संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 4 सितंबर : डिजिटल झूठ और अफवाह के इस वक्त सावधान रहें...
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 4 सितंबर : डिजिटल झूठ और अफवाह के इस वक्त सावधान रहें...
Date : 04-Sep-2019

भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रह चुके अब्दुल बासित ने कल ट्विटर पर एक चूक कर दी, उन्होंने कश्मीर में भारतीय सैनिकों की पैलेटगन से घायल एक नौजवान की तस्वीर बताते हुए जो तस्वीर पोस्ट की, वह एक गैरघायल नौजवान की थी जो कि पश्चिम का पोर्न फिल्मों का लोकप्रिय कलाकार है। जॉनी सिंस नाम के इस कलाकार ने इसका मजा लेते हुए अब्दुल बासित को धन्यवाद दिया है कि उनकी पोस्ट से उसके फॉलोअर्स बढ़ गए। अब्दुल बासित ने यह लिख दिया था कि पैलेटगन से इस नौजवान की आंखें खत्म हो गई हैं। 

पाकिस्तान के लिए देश के बाहर जिस उच्चायुक्त का सबसे अधिक महत्व है, वह भारत की पोस्ट ही है। ऐसी नाजुक जगह पर रह चुका एक राजनयिक जब ऐसी चूक करता है, तो वह इस खतरे से अनजान भी नहीं रहता कि इस किस्म की चूक आनन-फानन पकड़ में आ ही जाती है, और इन दिनों तो इंटरनेट पर बहुत सी ऐसी वेबसाईटें हैं जिनका महज एक ही काम है, वेब पर अफवाहों को पकड़कर, उनके झूठ के सुबूत ढूंढकर उनका भांडाफोड़ करना। भारत में ऐसी कई वेबसाईटें सोशल मीडिया के साथ-साथ मीडिया का झूठ भी उजागर कर रही हैं। अखबारों या टीवी चैनलों का एक हिस्सा हिन्दुस्तान में बहुत खुलकर एक घोषित मकसद के साथ झूठ के कारोबार में लगा हुआ है। ऐसे मीडिया में काम करने वाले पत्रकार या मीडियाकर्मी भी लगातार झूठ को बढ़ाते हैं, और न कोई हिचक है, न कोई डर। देश का आईटी कानून कहने के लिए तो बहुत कड़ा है, लेकिन उसके तहत जुर्म दर्ज करने का जिम्मा राज्य की पुलिस पर रहता है, और वह पुलिस छांट-छांटकर लोगों पर जुर्म दर्ज करती है, इसलिए सत्ता से मेहरबानी पाए हुए लोग बेधड़क झूठ और अफवाहें गढ़ते हैं, फैलाते हैं, और जनधारणा को बर्बाद करने का काम करते हैं। ऐसे काम में बहुत से मंत्री, बहुत से अफसर, और बहुत से राजनेता भी जुट जाते हैं। इस देश का सूचना तकनीक कानून कहने के लिए तो बहुत कड़ा है, लेकिन उसके तहत किसी को सजा होते देखा नहीं जाता। इसीलिए लोग अपनी बदनीयत को पहले तो महज सोशल मीडिया पर इस्तेमाल करते थे, लेकिन हाल के बरसों में टीवी और अखबारों के लोग, महज झूठ पर चलने वाली वेबसाईटों पर काम करने वाले लोग लगातार अफवाहें फैलाते हैं, और बेधड़क सत्तासमर्थन पाते हैं। 

लेकिन लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि सोशल मीडिया जैसी जगहों पर एक बार कही या लिखी गई बात हमेशा के लिए कहीं न कहीं दर्ज हो जाती है, और कई बरस बाद जाकर भी वह दिक्कत खड़ी कर सकती है। बहुत से लोगों को सूचना तकनीक कानून का यह खतरा भी नहीं मालूम है कि उन्हें वॉट्सऐप जैसे मैसेंजर पर बच्चों से जुड़ी हुई कोई पोर्नों सामग्री भी अगर वे फोन पर सम्हालकर रखते हैं, तो बिना आगे बढ़ाए हुए भी वे एक कड़ी सजा के हकदार रहते हैं। बच्चों की अश्लील तस्वीरें या उनके वीडियो को लेकर कानून बहुत कड़ा है जिसमें अपने फोन या कम्प्यूटर पर ऐसी तस्वीरों को रखना भी शामिल है। इसलिए आज के माहौल में अगर लोग गैरजिम्मेदारी से या साजिश के तहत गलत बातों को आगे बढ़ा रहे हैं, तो वे जान लें कि सरकारें बदलती रहती हैं, सरकार साथ न दे तो भी लोग अदालत तक जाकर रिपोर्ट लिखवा सकते हैं, और मुकदमा चल सकता है। ऐसे मामलों में गवाहों की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि डिजिटल सुबूत सबसे बड़े गवाह रहते हैं। फिर कानून से परे भी एक यह बात समझने की जरूरत है कि जो समझदार लोग आपके नाम के साथ किसी झूठ को देखते हैं, उनकी नजरों में तो आप वैसे भी गिर जाते हैं। इन सब बातों को देखते हुए लोग झूठ और अफवाह से दूर रहें तो ही वे इज्जतदार रहेंगे, और जेल के बाहर रहेंगे।
-सुनील कुमार

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