सामान्य ज्ञान

अमरबेल
अमरबेल
Date : 12-Sep-2019

अमर बेल (ष्ठशस्रस्रद्गह्म्, ष्टह्वह्यष्ह्वह्लड्ड क्रद्गद्घद्यद्ग3ड्ड) एक पराश्रयी (दूसरों पर निर्भर) लता है, जो प्रकृति का चमत्कार ही कहा जा सकता है। बिना जड़ की यह बेल जिस वृक्ष पर फैलती है, अपना आहार उससे रस चूसने वाले सूत्र के माध्यम से प्राप्त कर लेती है। अमर बेल का रंग पीला और पत्ते बहुत ही बारीक तथा नहीं के बराबर होते हैं। अमर बेल पर सर्द ऋतु में कर्णफूल की तरह गुच्छों में सफेद फूल लगते हैं। बीज राई के समान हल्के पीले रंग के होते हैं। अमर बेल बसंत ऋतु (जनवरी-फरवरी) और ग्रीष्म ऋतु (मई-जून) में बहुत बढ़ती है और शीतकाल में सूख जाती है। जिस पेड़ का यह सहारा लेती है, उसे सुखाने में कोई कसर बाकी नहीं रखती है।
 अमरबेल के  विभिन्न भाषाओं में नाम हैं-  संस्कृत- आकाश बल्ली, आकाशवल्ली,  हिंदी-अमर बेल, आकाश बेल, मराठी- निर्मुली, अमरबेल, गुजराती-अकास बेल, अमरबेल, बंगाली -  स्वर्णलता, आलोक लता, तैलगू- नुलु तेगा, अरबी - कसूसेहिन्द, फारसी-अफ्तीमून, अंग्रेजी-डोडर, लैटिन -कस्कुटा रिफ्लेक्सा
अमरबेल का  स्वाद चरपरा और कषैला होता है। अमर बेल (आकाश बेल) डोरे के समान पेड़ों पर फैलती है। इनमें जड़ नहीं होती तथा रंग पीला तथा फूल सफेद होते हैं। अमर बेल गर्म एवं रूखी प्रकृति की है। इस लता के सभी भागों का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है।
अमरबेल कड़वी, आंखों के रोगों को नाश करने वाली, आंखों की जलन को दूर करने वाली तथा पित्त कफ और आमवात को नाश करने वाली है। यह वीर्य को बढ़ाने वाली रसायन और बलकारक है। अनेक औषधियों के उत्पादन में इसका उपयोग किया जाता है। 
 

Related Post

Comments