संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 20 सितंबर : ऐसे डिनर की तस्वीरों और खबर का इंतजार
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 20 सितंबर : ऐसे डिनर की तस्वीरों और खबर का इंतजार
Date : 20-Sep-2019

जिंदगी कैसे रूख बदलती है इसे असल जिंदगी में देखना बड़ा दिलचस्प होता है। और ऐसे में ही लोगों को कभी किस्मत पर भरोसा होने लगता है, तो कभी लगता है कि जिंदगी कैसे-कैसे खेल खेलती है। आज दुनिया के एक सबसे कामयाब फुटबॉलर, और सबसे रईस खिलाडिय़ों में से एक, क्रिश्चियानो रोनाल्डो की एक तलाश पूरी हुई जब उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने बचपन का हाल बताया था कि किस तरह वे अपने दूसरे साथी खिलाड़ी बच्चों के साथ एक मैकडोनाल्ड रेस्तरां के पीछे का दरवाजा खटखटाकर पूछते थे कि कुछ खाना बचा हुआ है क्या, और उस वक्त खाना देने वाली तीन युवतियों में से एक ने आज सार्वजनिक रूप से अपना खुलासा किया। रोनाल्डो ने इंटरव्यू में बताया था कि किस तरह से मैकडोनाल्ड की तीन महिला कर्मचारी बड़ी रहमदिल थीं, और बचा हुआ खाना उन बच्चों को देती थीं। उन्होंने एक हसरत जाहिर की कि अगर वे महिलाएं उन्हें मिल जाएं, तो वे उन्हें अपने साथ डिनर पर ले जाना चाहेंगे। इस इंटरव्यू के बाद इनमें से एक महिला पॉला लेका सामने आई और उसने कहा कि वह उन तीनों में से एक है, और उसे रोनाल्डो के साथ डिनर पर जाने में खुशी होगी। 

हर कुछ हफ्तों में दुनिया के किसी न किसी कोने से आधी या चौथाई सदी पुरानी ऐसी कोई तलाश पूरी होने की खबर आती है जिसमें कहीं मां-बाप खोए हुए या बिछुड़े बच्चे को पा लेते हैं, या बच्चे अपने मां-बाप तक पहुंच जाते हैं। ऐसे मामलों को देखें तो लगता है कि जिंदगी बड़ी हैरतअंगेज और अविश्वसनीय होती है, और जाने कैसी-कैसी हसरतें वक्त पूरी कर देता है। जिन लोगों को जिंदगी में कभी ऐसा कुछ होने का भरोसा नहीं होता, और जो उम्मीद छोड़ चुके होते हैं, उनको भी असल जिंदगी की इन कहानियों को देखकर अपना हौसला रखना चाहिए कि अपना टाईम आएगा। भला कौन यह सोच सकते थे कि मांगकर खाने वाले एक बच्चे की जिंदगी अपने हुनर से ऐसी बदल जाएगी कि वह दुनिया का सबसे कामयाब और रईस खिलाड़ी बन जाएगा? और उस पर, एक फुटपाथी बच्चे की मदद करने वाली महिलाओं को भी भला यह क्या मालूम रहा होगा कि एक दिन वह बच्चा उन्हें दुनिया के सबसे महंगे रेस्त्रां में ले जाकर खाना खिला सकता है? 

इससे दो सबक मिलते हैं। पहला तो यह कि दया, प्रेम, और लोगों की मदद कभी बेकार नहीं जाते। जिस तरह कुदरत सिखाती है कि आम बोते चलें, तो जिंदगी में आम मिलते भी चलेंगे, फिर चाहे वे अपने बोए हुए आम न हो, किसी और के बोए हुए आम के फल हों। आज जो लोग सागौन के फर्नीचर पर बैठते हैं, वह उनकी अपनी जिंदगी का तो बोया हुआ रहता नहीं है, लेकिन लोग बोते चलते हैं, और पाते भी चलते हैं। इसीलिए नेक नीयत से किए हुए अच्छे काम कभी बेकार नहीं जाते, और रोनाल्डो की एक वक्त मदद करने वाली पॉला लेका का कहना है कि उसे कभी कर्म के फल पर भरोसा नहीं था, वह मानती थी कि ऐसा कुछ नहीं होता है, लेकिन अब उसे इस पर भरोसा होने लगा है। वह अब अपनी जिंदगी में आए इस मोड़ के बारे में सोच रही है, और साथ-साथ अपने इंटरव्यू के बाद रोनाल्डो की भी इस बात को लेकर चारों तरफ तारीफ हो रही है कि वह इतनी कामयाबी और संपन्नता के बाद भी विनम्र बना हुआ है।

धर्म तो नहीं, लेकिन कुदरत जरूर यह सिखाती है कि लोगों को अच्छा काम करते रहना चाहिए, और उसका अच्छा फल इसी दुनिया में, इसी जिंदगी में मिल जाता है। धर्म तो मौत के बाद स्वर्ग और जन्नत जैसे सपने दिखाता है, लेकिन कुदरत इसी धरती पर बोए हुए को काटने की बात साबित करते रहता है। जिन लोगों को आज अपनी जिंदगी में सामने आने वाले कमजोर, गरीब, और जरूरतमंद लोगों को हिकारत से देखने की आदत है, उन लोगों को यह सोचना चाहिए कि जिंदगी का सैलाब कब किसे बहाकर किसके सामने ले जाकर खड़ा कर दे, उसका कोई ठिकाना तो है नहीं। इसलिए और किसी वजह से न सही, कम से कम अपने खुद के भले के लिए लोगों को भला करना चाहिए, और बिना उम्मीद करते रहना चाहिए। सबसे अधिक भला वह होता है जो उन लोगों के लिए किया जाता है जो कि आज जाहिर तौर पर कुछ वापिस नहीं कर सकते। जिनसे कुछ हासिल होने की उम्मीद है, उनका भला करना कोई महान काम नहीं होता। जिन लोगों ने रोनाल्डो और इस महिला की यह खबर पढ़ी है, वे लोग जाहिर तौर पर ऐसे किसी डिनर की तस्वीरें और खबर देखने का इंतजार कर रहे होंगे। 
-सुनील कुमार

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