विशेष रिपोर्ट

दंतेवाड़ा की जीत किसकी, हाट-बाजार योजना, और सुपोषण की?
दंतेवाड़ा की जीत किसकी, हाट-बाजार योजना, और सुपोषण की?
Date : 27-Sep-2019

दंतेवाड़ा की जीत किसकी, हाट-बाजार योजना, और सुपोषण की?

छत्तीसगढ़ संवाददाता
रायपुर, 27 सितंबर।
 दंतेवाड़ा उपचुनाव में मतदाताओं ने भूपेश बघेल सरकार के कामकाज पर मुहर लगाई है। चुनाव से दो महीने पहले शुरू हुई सुपोषण अभियान और हाट बाजार योजना, धुर नक्सल प्रभावित इलाकों में भी अपना प्रभाव छोडऩे में सफल रही है। इसका चुनाव में कांग्रेस को काफी फायदा मिला। इससे परे भाजपा को अपने पक्ष में सहानुभूति लहर चलने का भरोसा था। कार्यकर्ता भी एकजुट थे, लेकिन पार्टी के रणनीतिकार अपने पक्ष में माहौल बनाने में कामयाब नहीं हो पाए। चुनाव प्रचार के बीच अंतागढ़ को लेकर मंतूराम पवार के खुलासे ने भी भाजपा की नैय्या डुबोने में कोई कसर बाकी नहीं रखी।

दंतेवाड़ा विधायक भीमा मंडावी की नक्सल हत्या के बाद लोकसभा चुनाव में भाजपा को यहां से करीब साढ़े पांच हजार वोटों की बढ़त मिली थी। पार्टी ने उनकी पत्नी ओजस्वी मंडावी को चुनाव मैदान में उतारकर एक तरह से सहानुभूति लहर पैदा करने की कोशिश की। ओजस्वी शिक्षित महिला हैं और शहरी इलाकों में उनके पक्ष में सहानुभूति भी देखने को मिली। भाजपा ने दंतेवाड़ा, बचेली, किरंदुल और गीदम के नगरीय इलाकों में विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया था। यहां भाजपा ने स्थानीय नेताओं के बजाए चुनाव प्रचार की कमान शिवरतन शर्मा को सौंपी थी। साथ ही साथ पूर्व मंत्री महेश गागड़ा को भी लगाया गया था। पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के साथ-साथ दंतेवाड़ा के पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी भी चुनाव खत्म होने तक वहां डटे रहे। चौधरी ने अपने कलेक्टर रहते वहां कराए गए कार्यों का उल्लेख कर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट मांगे, लेकिन वे बेदम साबित हुए। पूर्व सीएम अजीत जोगी भी अपने प्रत्याशी के समर्थन में धुंआधार प्रचार किया। 

जोगी पार्टी के उम्मीदवार का हाल यह रहा कि प्रत्याशी सुजीत कर्मा अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। उन्हें नोटा से भी कम वोट मिले। दूसरी तरफ, सीएम भूपेश बघेल ने चुनाव प्रचार अभियान शुरू होने से पहले ही सरकार के 8 महीने के कामकाज पर ही वोट देने की अपील की थी। यद्यपि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यहां से पिछड़ी थी। लेकिन इस बार उन्होंने जमकर प्रचार किया। कांग्रेस का चुनाव संचालन उद्योग मंत्री कवासी लखमा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने संभाल रखी थी। 

कांग्रेस प्रत्याशी देवती कर्मा के पति महेन्द्र कर्मा की भी हत्या नक्सलियों ने की थी, लेकिन वे पिछला चुनाव मामूली वोटों से हार गई थीं। उनके पुत्र छविन्द्र कर्मा की नकारात्मक बयानबाजी से भी उन्हें नुकसान का अंदेशा जताया जा रहा था। इन सबके बावजूद कांग्रेस को यहां सरकार की मुख्यमंत्री हाट बाजार योजना और सुपोषण अभियान के साथ-साथ वनोपज की खरीदी के लिए की गई व्यवस्था के चलते काफी समर्थन मिला। हाट बाजार योजना के तहत हाट बाजार में डाक्टरों की टीम बीमार लोगों का मुफ्त इलाज करती है। साथ ही उन्हें निशुल्क दवाईयां भी उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना का असर यह हुआ कि हर हाट बाजार में इलाज के लिए बीमार आदिवासी सरकारी एम्बूलेंस तक पहुंचने लगे है। यह एक  योजना है कि जिसका नक्सली भी विरोध नहीं कर पाए। एक जानकारी के मुताबिक अंदरूनी इलाकों में भी करीब 20 हजार से अधिक आदिवासी खुद चलकर  उपचार कराने पहुंचे थे। 
इसी तरह सरकार की सुपोषण अभियान का भी काफी असर देखने को मिला।  आदिवासी इलाकों में मध्यान्ह भोजन के साथ-साथ अंडे का भी वितरण किया गया। जबकि पिछली सरकार अंडा बांटने से कतराती रही है। इसी तरह 15 से अधिक वनोपज का समर्थन मूल्य पर खरीदी का भी आदिवासियों के बीच अच्छा संदेश गया और वे एक तरह से बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर वनोपज को बेचने की मजबूरी नहीं रह गई थी। यही नहीं, लोहंडीगुड़ा में आदिवासियों की जमीन वापस देने से भी विशेषकर बस्तर संभाग में सकारात्मक असर हुआ है। कांग्रेस-भाजपा से परे किरंदुल और अंदरूनी इलाकों में सीपीआई का भी अच्छा प्रभाव है, लेकिन कांग्रेस ने सीपीआई के वोटों पर भी सेंधमारी की है। सीपीआई को हमेशा यहां 10-15 हजार वोट आसानी से मिलते रहे हैं, लेकिन इस बार सीपीआई प्रत्याशी भीमसेन मंडावी जमानत नहीं बचा पाए। कुल मिलाकर सीपीआई के वोटों पर भी कांग्रेस ने सेंधमारी की है। 
चुनाव प्रचार के बीच अंतागढ़ उपचुनाव के मंतूराम पवार के खुलासे से भी भाजपा बचाव की मुद्रा में आ गई। उन्होंने पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह, अजीत जोगी और अन्य भाजपा नेताओं का नाम वापसी के लिए लेन-देन के आरोप लगा दिए। मंतूराम पवार भाजपा में थे और उनके वार से भाजपा के बड़े प्रचारक पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह पूरे समय सफाई देते ही नजर आए। इससे कांग्रेस को हमलावर होने का मौका मिला और उन्होंने चुनाव में खूब भुनाया। आखिरी के दिनों में सीएम भूपेश बघेल ने शहरी इलाकों में डटकर प्रचार किया और उनके धुंआधार प्रचार से कांग्रेस के पक्ष में माहौल बन गया। कुल मिलाकर कांग्रेस की देवती कर्मा पिछले चुनावों में दंतेवाड़ा से सबसे ज्यादा जीतने वाली प्रत्याशी रही हैं। कांग्रेस भारी जीत से गदगद है और चित्रकोट पर कब्जा बरकरार रखने की तैयारी में जुट गई है। 

Related Post

Comments