विशेष रिपोर्ट

भोपाल के हनीट्रैप का शहद छत्तीसगढ़ के मंत्री, अफसरों तक लाता था वनमंत्री का खासमखास...
भोपाल के हनीट्रैप का शहद छत्तीसगढ़ के मंत्री, अफसरों तक लाता था वनमंत्री का खासमखास...
Date : 28-Sep-2019

भोपाल के हनीट्रैप का शहद छत्तीसगढ़ के मंत्री, अफसरों तक लाता था वनमंत्री का खासमखास...

विशेष संवाददाता
रायपुर, 28 सितंबर (छत्तीसगढ़़)।
मध्यप्रदेश की सरकारी सत्ता में गहरे तक पैठ बना चुके हनीट्रैप के छत्तीसगढ़ कनेक्शन बढ़ते चले जा रहे हैं। अभी मिली जानकारी के मुताबिक इस राज्य में एक पिछले वन मंत्री के लेन-देन का बहुत सा काम देखने वाले, और उस विभाग से एनजीओ को फंड दिलवाने वाले एक नाम का पता चला है जिसे भोपाल के हनीट्रैप गिरोह की एक युवती ने पूछताछ में बताया है। 

भोपाल के उच्चस्तरीय सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में एक युवती ने छत्तीसगढ़ के एक पिछले वनमंत्री के साथ काम करने वाले एक तरूण का नाम बताया है जिसने उसे मंत्री और कुछ अफसरों से मिलवाया था। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के इस हनीट्रैप में लोगों को सेक्स में फंसाकर ब्लैकमेल करने, या उनसे सरकारी रकम मंजूर करवाने के काम में लगी महिलाओं के छत्तीसगढ़ में भी कई मंत्रियों और अफसरों के साथ संबंध सामने आए हैं। 

ऐसे में जब मध्यप्रदेश के जांच अफसर अधिकृत तौर पर कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं, तब हाथ के लिखे हुए दो पन्ने अभी सामने आए हैं जो हनीट्रैप की एक महिला के नाम वाले हैं, और जिनमें छत्तीसगढ़ के बहुत से नामों के साथ लेन-देन का जिक्र है। ये पन्ने सोशल मीडिया से तैरते हुए पहुंचे हैं, और इनमें कुछ वक्त पहले तक छत्तीसगढ़ में सबसे ताकतवर रहे अफसरों और मंत्रियों के नाम हैं, इससे कितना भुगतान मिला, या कितना बाकी है, या किस तरह मिला इसे केवल संख्याओं में लिखा गया है, उनके साथ पूरी रकम नहीं लिखी गई है। लेकिन यह बात साफ है कि छत्तीसगढ़ सरकार के कुछ विभागों से इन युवतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ के ही कुछ दलालों ने जाल बिछाकर करोड़ों रूपए के काम मंजूर करवाए थे, और उनमें से कई काम पूरे न करने पर भी उनके बिल लगाकर भुगतान की कोशिश की गई थी। 

इनमें बस्तर इलाके के लिए वन विभाग के तहत कई करोड़ के काम मंजूर करवाए गए थे, और ढाई करोड़ से अधिक के काम में से सरकार बदल जाने से 50 लाख से कम का ही भुगतान हो पाया था। विभाग के अफसर बताते हैं कि एक पिछले वनमंत्री के दबाव में उन्हें इन संगठनों को काम देना पड़ा, और बाद में सरकार बदली, जांच हुई, तो पता लगा कि काम हुआ ही नहीं है, केवल बिल लगा दिया गया था। 

यह भी पता लगा है कि मध्यप्रदेश पुलिस होटलों और क्लबों के कमरों के रजिस्टर या रिसेप्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग से भी इन युवतियों से मिलने वाले नेताओं, अफसरों, और पत्रकारों-कारोबारियों की शिनाख्त कर रही है। इनमें से एक युवती ने पुलिस का गवाह बनना मंजूर किया है, और उससे पुलिस को सुबूत भी मिलते चल रहे हैं, और जानकारी के आधार पर पुलिस जांच आगे भी बढ़ रही है। 

छत्तीसगढ़ में सरकार के पास यह जानकारी पहुंची है कि यहां के सरकारी दफ्तरों में स्थानीय दलाल इन युवतियों को लेकर पहुंचते थे, और मंत्रियों के बंगलों से लेकर कुछ विभागों के रेस्ट हाऊस तक में उनसे मुलाकात करवाई जाती थी। पिछले एक वनमंत्री के जिस दलाल का नाम सामने आया है, उसने वन विभाग से कई और तरह के काम भी करवाए थे, और विभाग में यह आम चर्चा थी कि यह दलाल वनमंत्री का पूंजीनिवेश भी करता है। 

इस बीच छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर पूरी तरह से छत्तीसगढ़ी हनीट्रैप के मामले भी सामने आ रहे हैं जो कि सरकार से भी जुड़े हुए हैं, और सरकार से बाहर के लोगों से भी। अभी कुछ महीने पहले रायपुर में एक पेशेवर स्टिंग ऑपरेटर के घर छापा मारकर बहुत से उपकरणों में जो सेक्स रिकॉर्डिंग जब्त की गई थी, उससे भी बहुत से मामले मिलने की चर्चा है, हालांकि अभी तक पुलिस ने ऐसी कोई जानकारी जारी नहीं की है। भोपाल का यह भांडाफोड़ होने के पहले से छत्तीसगढ़ में ऐसा सिलसिला चल रहा था, लेकिन अब भोपाल से छत्तीसगढ़ मंत्रालय और दूसरे दफ्तरों का सीधा रिश्ता भी जुड़ गया है, और इसकी जांच इस राज्य की पुलिस के बजाय मध्यप्रदेश पुलिस के हाथ है। 

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