विशेष रिपोर्ट

स्वच्छ भारत अभियान, एक ही नाम पर दो शौचालय, राशि जारी लेकिन शौचालय नहीं, कोरिया जिला ओडीएफ घोषित
स्वच्छ भारत अभियान, एक ही नाम पर दो शौचालय, राशि जारी लेकिन शौचालय नहीं, कोरिया जिला ओडीएफ घोषित
Date : 01-Oct-2019

स्वच्छ भारत अभियान, एक ही नाम पर दो शौचालय, राशि जारी लेकिन शौचालय नहीं, कोरिया जिला ओडीएफ घोषित

2 अक्टूबर स्वच्छ भारत अभियान के 5 वर्ष पूरे होने पर विशेष रिपोर्ट

चंद्रकांत पारगीर

बैकुंठपुर, 1 अक्टूबर। स्वच्छ भारत अभियान में टेक्निकल टाइपिंग मिस्टेक कर पंचायतों में एक ही नाम के हितग्राहियों को दो-दो बार राशि जारी कर दी गई। किसी नाम में एक अक्षर हटा दिया गया तो किसी में स्पेस देकर दुबारा उस नाम से राशि जारी कर दी गई। एक ही हितग्राही का मनरेगा से भी और एसबीएम से भी शौचालय स्वीकृत हो गया। मजे की बात तो यह कि इस कार्य की मॉनिटरिंग में लगी स्वच्छ भारत अभियान की टीम ने अभी इस ओर ध्यान ही नहीं दिया और एक ही शौचालय के लिए दो-दो तो कभी तीन बार राशि जारी कर दी गई। ‘छत्तीसगढ़’ ने जब स्वच्छ भारत अभियान की सरकारी वेबसाईड खंगाली तो इसका खुलासा हुआ।

इस संबंध में कलेक्टर डोमन सिंह का कहना है कि मामले की जांच करवाई जाएगी, खामियां पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।

जानकारी के अनुसार बीते वर्ष 2013-14 से 2017-18  तक 90,779 शौचालयों का निर्माण का सर्वे हुआ, जिसमें वर्ष 2013-14 में 26 12 बनाए जा चुके थे, जिसमें बाद 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत हुई और 2017-18  तक 8 8 ,16 7 शौचालयों का निर्माण पूर्ण होना बताया गया। जिसके बाद पूरा जिला ओडीएफ घोषित कर दिया गया। ये आंकडें केन्द्र सरकार की वेबसाईड मिनिस्ट्री ऑफ वॉटर एंड सेनिटेशन पर उपलब्ध है। सरकारी साईट पर छत्तीसगढ़ ने जिले के सभी तहसील के एक दो ग्राम पंचायतों को खंगाला, बैकुंठपुर के कंचनपुर और झरनापारा, भरतपुर के भगवानपुर, बहराशी, खडगवां के मेरो, इंदरपुर, बचरापोडी, सोनहत के ग्राम पंचायत सोनहत, मझारटोला की एंट्री किए गए डेटा को देखा, हर ग्राम पंचायत में 15 से 20 नाम ऐसे पाए गए जिन्हें मनरेगा और एसबीएम दोनों से शौचालय के 12 हजार रू जारी किए गए हैं, इसके अलावा कुछ पंचायतों में सिर्फ हितग्राही का नाम है पिता के नाम पर तीन अक्षर एंट्री कर दिए गए हैं, ऐसे सैकडों नामों को एंट्री किया गया है। चंूकि कम्प्यूटर एक नाम सिर्फ एक बार ही ले सकता है, इसलिए इन नामों में हल्का सा अंतर कर दो बार सॉफ्टवेयर में इंद्राज कर दिया गया। जैसे झरनापारा में rajesh पिता duhan singh फैमिली आई डी 78 942345 को को एसबीएम से राशि दी गई, और फिर इस नाम में RAJESH KUMAR  पिता DUHAN SINGH फैमिली आई डी 78 774547 करके दोबारा मनरेगा से भी स्वीकृति दे दी गई। इसी तरह कंचनपुर में dubraj bsaant  को एसबीएम से दो बार राशि जारी की गई, दूसरी बार दुबराज के नाम में एक स्पेश दे दिया गया। इसी तरह मेरो में shiv nath Pawan sai को दुबारा देने के लिए shiv nath Pawan sai कर कई लोगों के नाम से राशि दुबारा जारी कर दी गई है।

पंचायतों में 2 दर्जन से ज्यादा हितग्राही एक ही नाम के

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की बेबसाईट में कोरिया जिले की जो जानकारी इंद्राज की गई है उसका अवलोकन करने से स्पष्ट हो रहा है कि एक ग्राम पंचायत में 2 दर्जन से ज्यादा हितग्राही एक नाम के ही हैं साथ ही उनके पिता का नाम भी एक ही है। दूसरी ओर ग्राम पंचायतों के पदाधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं है। जानबूझ कर तकनीकी कमी करके बेबसाईट में फर्जी नामों को भी इंद्राज कर दिया गया है। दरअसल, स्वच्छ भारत अभियान संविदाकर्मियों के भरोसे है, मॉनिटरिंग के आभाव में एक ही नाम से दो-दो बार राशि जारी कर दी गई, जिन्हें इस कार्य के लिए रखा गया है उसमें भारी लापरवाही बरती गई है। यदि इसका भौतिक सत्यापन किया जाए तो इसमें करोड़ों की गड़बड़ी उजागर हो सकती है।

नाम है पर नहीं बने शौचालय

दूसरी ओर हर पंचायत में कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि उनके नाम से पैसा तो आया परन्तु शौचालय आज तक नहीं बना और राशि निकाल ली गई। खडगवां बचरापोडी ग्राम पंचायत के राकेश मोतीराम, राधेश्याम स्व सज्जनसाय, अशोक कुमार मोहरसाय, रविकुमार सुन्दरसाय, आन्नदराम रामलाल, गुलाबचंद शिवपूजन, नारेन्द्र कुमार श्रीकांत, सुन्दरसाय बीरन, कन्हैयालाल सुन्दरसाय, राजेशकुमार काशीराम, राजू काशीराम, लक्ष्मण रामंिसह, रामकुमार राम सिंह का कहना है कि उनके नाम से शौचालय स्वीकृत हुए हैं परन्तु आज तक बनाए नहीं गए हैं।

कब कितने बने शौचालय

तहसील       2014-2015        2015-16    2016 -17   2017-18

बैकुंठपुर     6 93  5198               13247           8 96 1

भरतपुर 28 5  7335        9218             925

खडगवां 394   4716        58 25             8 432

मनेन्द्रगढ़     46 2  38 35       106 31           1050

सोनहत 243   38 58        1916             552

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