विशेष रिपोर्ट

दोरनापाल, पुनपल्ली में कहीं शौचालय में दीमक का घर तो कहीं शौचालय ही धराशाई, डेढ़ सालों से अधूरे, हितग्राही खुले में शौच करने को मजबूर
दोरनापाल, पुनपल्ली में कहीं शौचालय में दीमक का घर तो कहीं शौचालय ही धराशाई, डेढ़ सालों से अधूरे, हितग्राही खुले में शौच करने को मजबूर
Date : 23-Nov-2019

पुनपल्ली में कहीं शौचालय में दीमक का घर तो कहीं शौचालय ही धराशाई, डेढ़ सालों से अधूरे, हितग्राही खुले में शौच करने को मजबूर
छत्तीसगढ़ संवाददाता
दोरनापाल, 23 नवंबर।
 सुकमा जिले के पुनपल्ली में कहीं शौचालय में दीमक का घर तो कहीं शौचालय ही धराशाई हो गया है। यहां शौचालय पिछले डेढ़ सालों से अधूरे हैं जिससे हितग्राही खुले में शौच करने को मजबूर हैं।

‘छत्तीसगढ़’  की टीम पुनपल्ली पहुंची तो पाया कि गांव की पदाम मल्ले पति बंडी का शौचालय डेढ़ साल से अधूरा है क्योंकि शौचालय तो बना पर सेप्टिक टैंक नहीं और शौचालय में दीमक भी अपना घर बना चुकी। इतना ही नहीं गांव में डेढ़ साल पहले बनी एक अधूरे शौचालय की दीवारें पूरा होने से पहले ही धरासाई हो गई।

कोंटा के विभागीय आंकड़ों के अनुसार पंचायत में 216 में से 176 शौचालय पूर्ण बताए जा रहे हैं और 82 पंचायत मुख्यालय की बात की जाए तो 5 शौचालय ही उपयोगी बताए जा रहे हैं। हितग्राहियों को अब तक इसका लाभ नहीं मिल पाने से खुले में शौच करने को मजबूर हैं। काम भी शुरू हुआ पैसे भी आहरित किए गए पर इसके बावजूद न तो शौचालय का काम पूरा हुआ और न ही प्रशासन खुले में शौच को रोक पाई । पुनपल्ली में ठेके पर शौचालय का काम कर रहे माड़वी देवा ने पंचायत सचिव गोपी राजपूत पर कमीशन खोरी का आरोप लगाते हुए बताया कि 12000 के प्रत्येक शौचालय पर 500 रुपये कमीशन सचिव काट लेता है । 

एक तरफ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शहरों की बजाए गांवों को विकसित करने प्रयास रत हैं और जिला प्रशासन भी योजनाओं को गांव-गांव पहुंचाने पुरजोर लगा रही है वहीं प्रशासनिक अमला कागजों में गांवों को ओडीएफ घोषित करने में लगा होता है जबकि धरातल पर योजनाएं मुंगेरीलाल के सपनों सी नजर आती है। इसी तरह के हालात गांव के लगभग शौचालयों में देखने को मिले। कहीं दीवारें अधूरी तो कहीं कहीं सेफ्टिक टैंक गायब। दीमक शौचालयों में और हितग्राही खेतों में नजर आते हैं। अधूरा शौचालय शौच का नहीं नहाने के काम आ रहा है।

पंचायत सचिव पर लगा शौचालयों पर कमीशनखोरी का आरोप
पूरे मामले पर ग्रामीणों की परेशानी जानने के बाद जब ‘छत्तीसगढ़’ की टीम गांव में ठेके पर काम कर रहे मिस्त्री माड़वी देवा तक पहुंची तो मामला कुछ और नजर आया। मिस्त्री ने सचिव पर पैसे रोकने का आरोप लगाते हुए बताया कि सचिव 500 रुपये प्रति शौचालयों पर कमीशन काटता है। क्योंकि शौचालयों का पैसा हितग्राहियों के खातों में न आकर सीधे सरपंच-सचिवों के खातों में जाता है। मिस्त्री ने बताया कि 20 शौचालयों का निर्माण उसके द्वारा किया गया था। 12000 रुपये के हिसाब से 240000 रुपये बनता है मगर 110000 रुपये ही उसके हाँथ में आए है जबकि सभी शौचालयों का पूरा पैसा आहरित कर सचिव एक साल से घुमा रहा है। इस मामले पर जब सचिव गोपी राजपूत से हमारे संवाददाता ने फोन पर सम्पर्क किया तो सचिव द्वारा गोलमोल जवाब दिया जा रहा था और कमीशन वाले मामले पर कुछ भी कहने से मना कर दिया ।

आधे-अधूरे निर्माण कागजों में बताए जा रहे हैं पूरे 
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत पुनपल्ली में डेढ़ सालों में 150 से अधिक शौचालयों का निर्माण जरूर कराया गया पर वे अनुपयोगी साबित हुए हैं क्योंकि निर्माण का आज भी अधूरे हैं। मगर वार्ड पंचों की मानें तो कागजों में वे सभी काम पूरे कर लिए गए और आहरण भी पैसों का हो चुका है। ‘छत्तीसगढ़’ की टीम जब पड़ताल पर गांव पहुंची तो पाया कि एक शौचालय जिसका निर्माण डेढ़ साल पहले हुआ, न तो सेफ्टिक टैंक बनी, न दरवाजा, ये शौचालय हितग्राही की काम तो नहीं आया मगर दीमक का आशियाना जरूर बन गया है।  हितग्राही पदाम मल्ले पति बंडी को आज भी शौचालय के पूरे होने का इंतजार है।

वहीं कवासी हूँगा सेफ्टिक टैंक का काम पूरा न होने की वजह से खुले में शौच कर रहे और शौचालय का उपयोग नहाने के लिए कर रहे। रास्ते पर संवाददाता अमन भदौरिया को एक धराशायी शौचालय की दीवारें भी दिखी जो डेढ़ साल पहले बनी थी और पूरा होने से पहले ही गिर गई ।

प्रधानमंत्री शौचालय योजना जब से आई है अब तक गांव में 5-6 लोगों को ही लाभ मिला। 160 परिवार हैं पर जितने शौचालय बने सब अधूरे बने, जिम्मेदार इसका दुरुपयोग और लेट-लतीफी कर रहे हैं। कमीशनखोरी की बात मुझे भी पता चला है। लोग योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। रात में अगर सांप या जहरीले कीड़े के से कुछ होता है तो जिम्मेदार कौन होगा। अधिकारियों को कार्यवाही कर शौचालयों को पूरा करवाना चाहिए। 

कामा बारसे, वार्ड पंच पुनपल्ली
ग्राम पंचायत मुख्यालय में कुल कितने शौचालय बने हैं इसकी जानकारी मेरे पास नहीं है। मैं जानकारी निकालकर बताता हूँ। लगभग 255 शौचालय हमारे पंचायत में स्वीकृत है। सरपंच-मिस्त्री-गांव वाले मिलकर जैसे-जैसे बनाते हैं मैं पैसे देता गया। 140 से अधिक शौचालय पूरे कर लिए गए हैं कुछ शौचालय अधूरे भी हैं। जिसके पैसे भी हमारे पास है। कुछ काम पूरे नहीं किए जाने की वजह से पैसे नहीं दिया। शौचालयों पर 500 रुपये कमीशन का जो आरोप लगा है जो भी बोल रहा हो उस पर मैं कुछ भी नही कह सकता हूँ।

गोपी राजपूत, पंचायत सचिव, पुनपल्ली
 मेरे पास किसी तरह की लिखित शिकायत नही आई है । ‘छत्तीसगढ़’  के माध्यम से मुझे इसकी जानकारी मिल रही है। मामला संज्ञान में आया है तो मैं इसकी जांच करवाऊंगा उसके बाद आगे की कार्यवाही होगी । जिले में जितने भी गांवों में शौंचालय के काम अधूरे हैं कारणों का पता लगाकर काम शुरू करवाया जाएगा और लोगों को स्वच्छता के दृष्टिकोण से जागरूक भी किया जाएगा। इस हेतु शासन-प्रशासन प्रयासरत है निश्चित तौर पर आगे बेहतर काम किया जाएगा ।
नूतन कुमार कंवर, सीईओ जिला पंचायत ,सुकमा

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