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अमेजन और फ्लिपकार्ट के एफडीआई पालिसी के उल्लंघन के आरोप की पुष्टि करती है जिससे न केवल सरकार को चकमा दिया जा रहा है बल्कि भारत के घरेलू व्यापार को बहुत नुकसान हो रहा है तथा सरकार को भारी जीएसटी और आयकर राजस्व का नुकसान हो रहा है- कैट
अमेजन और फ्लिपकार्ट के एफडीआई पालिसी के उल्लंघन के आरोप की पुष्टि करती है जिससे न केवल सरकार को चकमा दिया जा रहा है बल्कि भारत के घरेलू व्यापार को बहुत नुकसान हो रहा है तथा सरकार को भारी जीएसटी और आयकर राजस्व का नुकसान हो रहा है- कैट
Date : 30-Nov-2019

अमेजन और फ्लिपकार्ट के एफडीआई पालिसी के उल्लंघन के आरोप की पुष्टि करती है जिससे न केवल सरकार को चकमा दिया जा रहा है बल्कि भारत के घरेलू व्यापार को बहुत नुकसान हो रहा है तथा सरकार को भारी जीएसटी और आयकर राजस्व का नुकसान हो रहा है- कैट

रायपुर, 30 नवंबर। कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिय़ा टेऊडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मगेलाल मालू, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, प्रदेश महामंत्री जितेंद्र दोशी, प्रदेश कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, वरिष्ट उपाध्यक्ष राम मंधान एवं प्रदेश प्रवक्ता राजकुमार राठी ने बताया कि कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने  केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल को एक पत्र भेजकर हाल ही में केन द्वारा जारी एक मीडिया स्टोरी की ओर ध्यान दिलाया है जिसमें बहुत ही स्पष्ट तरीके से अमेजन द्वारा एफडीआई पालिसी का घोर उल्लंघन करते हुए प्राइवेट लेबल के सामान की बिक्री किये जाने का सत्य सामने लाया गया है । कैट ने कहा है किउपरोक्त मीडिया स्टोरी कैट द्वारा अमेजन और फ्लिपकार्ट के एफडीआई पालिसी के उल्लंघन के आरोप की पुष्टि करती है जिससे न केवल सरकार को चकमा दिया जा रहा है बल्कि भारत के घरेलू व्यापार को बहुत नुकसान हो रहा है तथा सरकार को भारी जीएसटी और आयकर राजस्व का नुकसान हो रहा है। 

कैट राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा कि अमेजॅन और फ्लिपकार्ट दोनों का व्यवसाय मॉडल सरकार की नाक के ठीक नीचे एफडीआई नीति की हत्या से कम नहीं है और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर पियूष गोयल द्वारा बार-बार दिए गए बयानों  कि किसी भी हालत में लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना और भारी डिस्काउंट देना स्वीकार नहीं होगा और ई कामर्स पर सरकार के स्पष्ट रुख को नजरअंदाज करते हुए ये कंपनियां अभी भी लागत से कम मूल्य और भारी डिस्काउंट पर सामान बेच रही हैं और निजी लेबल के माध्यम से  ई कामर्स बाजार ही नहीं बल्कि रिटेल बाजार पर अपना प्रभुत्व बनाने में लगी हुई हैं।

हालांकि इस मामले पर आपके द्वारा तत्काल संज्ञान लेने और मंत्रालय के अधिकारियों को हमारे द्वारा दायर शिकायतों पर गौर करने के लिए कड़े निर्देश दिए गए किन्तु दो महीने से अधिक हो गए हैं लेकिन अभी तक इन कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है जो उन्हें अपने अनैतिक और अनुचित व्यवसाय प्रथाओं के साथ जारी रखने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं और व्यापारियों के लिए अनिश्चितता और व्यापार के नुकसान का माहौल पैदा कर रही हैं।

 

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