विचार / लेख

 क्या कहना है उस बहन का...
क्या कहना है उस बहन का...
Date : 01-Dec-2019

बाला सतीश/नवीन कुमार
क्या मीडिया से एक-एक करके लोग ऐसे ही आते रहेंगे और हर बार मुझे यही सब दोहराना होगा? क्या मीडिया से 100 अलग-अलग लोगों को आना चाहिए और एक ही सवाल मुझसे बार-बार पूछना चाहिए? ये सवाल उस लडक़ी के हैं जिनकी बहन को कथित रेप के बाद जलाकर मार दिया गया।
मृतक डॉक्टर ने आखऱिी बार अपनी बहन से फोन पर बात की थी लेकिन अब वो बहन लोगों ख़ास तौर पर मीडिया से बात कर-करके थक चुकी हैं।
उनका कहना है  एक ही सवाल सौ बार...पहले से ही दुखी हूं और अब बार-बार वही सब पूछा जा रहा है।
अब बहन साथ नहीं
घटना वाले दिन रात करीब नौ बजे तक पीडि़त युवती टोल प्लाज़ा अपनी स्कूटी लेने पहुंची थी। वहीं से उन्होंने आखिरी बार अपनी बहन को फोन किया और बताया कि उनकी स्कूटी पंचर है।
पीडि़त युवती ने फोन पर अपनी बहन को बताया कि उन्हें अकेले सडक़ पर खड़ा होने में डर लग रहा है, अचानक से कुछ लोग दिख रहे हैं, कुछ लोग उन्हें स्कूटी ठीक करने की बात भी बोल रहे हैं। लडक़ी ने फोन पर ही अपनी बहन को बताया था कि एक ट्रक ड्राइवर उनके पास रुका और उसने स्कूटी ठीक करने की बात कही। जब लडक़ी ने ट्रक ड्राइवर से स्कूटी ठीक करवाने से इंकार कर दिया तो उसके बाद भी वह ट्रक ड्राइवर उनका पीछा करता रहा।
लडक़ी की बहन ने उन्हें सलाह दी कि वह टोल प्लाज के पास ही खड़ी हो जाएं, इस पर लडक़ी राजी नहीं हुई और उन्होंने बताया कि सभी लोग उन्हें घूर रहे हैं जिससे उन्हें डर लग रहा है। इसके बाद लडक़ी ने अपनी बहन को थोड़ी देर में फोन करने की बात कही, लेकिन इसके बाद उनका फोन स्विच ऑफ हो गया।
वो कहती हैं इससे ज़्यादा क्या दुर्भाग्यपूर्ण हो सकता है। जि़ंदगी तो वापस नहीं लौट सकती है। ये किसी के भी साथ नहीं होना चाहिए। मैं सोच भी नहीं सकती कि ये सब कुछ मेरी अपनी बहन के साथ हुआ। अब मैं सिर्फ यही कह सकती हूं कि हर किसी को चौकन्ना रहना चाहिए। हर वक्त। हर जगह।
उस रात के उस आखिरी फोन कॉल को याद करत हुए वो कहती हैं मेरी बहन ने मुझे कहा भी कि वो डरी हुई है। लेकिन मैं ही नहीं समझ पायी कि सब कुछ इतना गंभीर है। अब मैं ये समझ पा रही हूं कि इस तरह की बात को किसी भी सूरत में हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इस बात का कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता है कि अगले ही पल किसके साथ क्या हो जाए।
अफसोस जताते हुए वो कहती हैं मैं अपनी बहन को बचा सकती थी, अगर मैंने मौके की नजाकत को उतनी ही गंभीरता से लिया होता तो...किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए भले ही वो कोई जानने वाला ही क्यों ना हो। मैं समझ रही हूं मुझे ये सबकुछ नहीं कहना चाहिए। लेकिन मैं ये बात इसलिए कह पा रही हूं कि मैंने सुना एक औरत अपने किसी जानने वाले के यहा जन्मदिन की पार्टी में गई...फिर उसका रेप हो गया और उसे मार डाला गया।
अगर आप किसी अपने के साथ हैं तो भी चौकन्ने रहिए। देर रात अगर कहीं जा रहे हैं तो किसी को घर पर बताकर जाएं।
इस घटना के सामने आने के बाद से एक बात यह भी उठी कि अगर पीडि़त महिला डॉक्टर ने बहन के बजाय पुलिस को 100 नंबर पर फोन करके मदद मांगी होती तो शायद उसे मदद मिल जाती और यह हादसा ना होता। इस पर पीडि़त डॉक्टर की बहन कहती हैं कि ये ठीक है कि मेरी बहन को पुलिस को फोन करना चाहिए था लेकिन उस वक्त किस तरह की स्थितियां थी ये तो कोई नहीं जानता। वो कहती हैं मैं हर उस महिला से जो घर से बाहर निकलती है उसे कहना चाहूंगी कि सतर्क रहें। कहीं भी अकेले ना जाएं।
कानून को लेकर क्या कुछ कहना है
पीडि़ता की बहन कहती हैं कि क़ानून और सख्त होना चाहिए ताकि इस तरह के हादसे ना हों। वो कहती हैं इंसानियत नाम की चीज नहीं रह गई है। नैतिकता को स्कूले के पाठ्यक्रम में होना चाहिए। शिक्षा दी जा रही है लेकिन अनुशासन नहीं। बच्चों को सही और गलत के बीच का फर्क समझाया जाना चाहिए। वो सिर्फ पैसे कमाने के लिए पढ़ाई ना करें।
मीडिया के व्यवहार पर क्या कुछ कहना है
मैं मीडिया की आलोचना नहीं करना चाहती। एक बार जब मेरे और मेरी बहन के बीच हुए अंतिम संवाद की क्लिप सार्वजनिक हो गई तो भी उसके बाद ये पूछना कि मेरे और उसके मध्य क्या बात हुई...कहां तक सही है। सब कुछ सामने है, फिर भी पूछा जा रहा है। वो ऐसा सिर्फ भावनाओं को दोबारा से जगाने के लिए कर रहे हैं लेकिन एक परिवार जो ऐसे दर्द से गुजर रहा हो उसके साथ ऐसा करना क्या सही है?
मीडिया पर सवाल उठाते हुए वो कहती हैं कि अगर मीडिया को कुछ पता ही करना है तो ये पता करे कि इस घटना के पीछे वजह क्या थी। बजाय बैकग्राउंड को कुरेदने के।
हम पहले से ही परेशान हैं। हर बार उसे खोने का दर्द महसूस कर रहे हैं। ऐसे में ये सवाल उस दर्द को बढ़ा ही रहा है। मैं सिर्फ यही कहना चाहूंगी कि जागरूकता बढ़ाइए ताकि एक सुरक्षित समाज बन सके। (बीबीसी)

 

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