राजनीति

जैसे-जैसे राज्य बढ़ते गए कांगे्रस के, चंदा भी बढ़ता गया पार्टी का
जैसे-जैसे राज्य बढ़ते गए कांगे्रस के, चंदा भी बढ़ता गया पार्टी का
Date : 12-Jan-2020

भारती जैन
नई दिल्ली,
12 जनवरी (नवभारतटाईम्स)। वर्ष 2018-19 में बीजेपी की कुल आय बढ़कर 2,410 करोड़ रुपये हो गई जो 2017-18 के 1,027 करोड़ रुपये से 134 फीसदी ज्यादा है। सत्ताधारी दल ने चुनाव आयोग को सौंपी 2018-19 की ऑडिट रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी। इन 2,410 करोड़ रुपये में 1,450 करोड़ रुपये सिर्फ चुनावी बॉन्ड्स से मिले थे। साल 2017-18 में बीजेपी ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स से 210 करोड़ रुपये की आमदनी घोषित की थी। बीजेपी ने 1 अप्रैल, 2018 से 31 मार्च, 2019 तक आमदनी और खर्च का जो हिसाब दिया, उसके मुताबिक उसे फी और सब्सक्रिप्शंस से 1.89 करोड़ रुपये, स्वेच्छा से योगदान के मद में 2,354 करोड़ रुपये (इलेक्टोरल बॉन्ड्स से मिली रकम भी शामिल है), बैंकों से मिले ब्याज से 54 करोड़ रुपये जबकि अन्य मदों से 24 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई। स्वेच्छा से योगदान में कई मदों से पैसे आए, इनमें आजीवन सहयोग निधि से 24.64 करोड़ रुपये, मोर्चाओं से योगदान 68 करोड़ रुपये, बैठकों से हुई आमदनी 93 करोड़ रुपये, इलेक्टोरल बॉन्ड्स से मिली रकम 1,450.89 करोड़ रुपये और अन्य मदों से प्राप्त धन 867.87 करोड़ रुपये है। 
बीजेपी ने बताया कि उसने 2018-19 में 1,005 करोड़ रुपये खर्च किए जो 2017-18 में हुए 758 करोड़ रुपये के खर्च से 32 फीसदी ज्यादा है। 2018-19 में पार्टी ने 792.4 करोड़ रुपये चुनावों एवं सामान्य प्रचार पर खर्च किए थे। इस मद में उसने 2017-18 में 567 करोड़ रुपये खर्च किए थे। 
वहीं, कांग्रेस ने चुनाव आयोग को सौंपी अपनी ऑडिट रिपोर्ट में बताया कि उसे 2018-19 में 918 करोड़ रुपये की आय हुई जो एक वर्ष पहले 199 करोड़ रुपये की आमदनी से 361 फीसदी ज्यादा है। पार्टी ने 2018-19 में 470 करोड़ रुपये का खर्च घोषित किया। कांग्रेस को इलेक्टोरल बॉन्ड्स से 383 करोड़ रुपये मिले थे जो 2017-18 में मिले महज 5 करोड़ रुपये से बहुत ज्यादा है। 
कांग्रेस की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, उसे 2018-19 में इलेक्टोरल बॉन्ड से 383 करोड़ रुपये, कंपनियों से 20.62 करोड़ रुपये, इलेक्टोरल ट्रस्टों और फाउंडेशनों से 94.6 करोड़ रुपये जबकि अन्य दानदाताओं से 2.38 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। पार्टी ने बताया कि 2018-19 में उसका चुनावी खर्च करीब 309 करोड़ रुपये रहा जिसमें 57 लाख रुपये चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों पर जबकि प्रचार पर 78 करोड़ रुपये का हुआ खर्च शामिल है। 

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