विशेष रिपोर्ट

बाप ने मां को मार डाला, खुद जेल में और 3 बेटियों को बस स्कूल का सहारा
बाप ने मां को मार डाला, खुद जेल में और 3 बेटियों को बस स्कूल का सहारा
Date : 23-Jan-2020

बाप ने मां को मार डाला, खुद जेल में और 3 बेटियों को बस स्कूल का सहारा

रमा शुक्ला

रायपुर, 23 जनवरी (छत्तीसगढ़)। शराब के नशे में चूर सिलबट्टे से अपनी पत्नी को मारने वाला कुकुरबेड़ा निवासी हालांकि वर्तमान में जेल की सजा काट रहा है लेकिन उसके अपराध की सजा उसकी तीन बेटियां भुगत रही हैं। बेसहारा बच्चियों को उनकी मौसी का आसरा है, लेकिन वह खुद पॉलीथिन बीनकर गुजारा करती है और उनके पति भी गुजर चुके हैं। 

समग्र शिक्षा योजना के तहत कुकुरबेड़ा स्थित शा.प्रा. शाला पं. रविवि परिसर में चल रहे विशेष गैर आवासीय प्रशिक्षण केंद्र में ऐसी ही तीन लड़कियां वर्तमान में पढ़ाई कर रही हैं। शिक्षिका सुनीता साहू ने बताया कि केंद्र में शाला त्यागी बच्चों को खोजकर उन्हें पढ़ाया जाता है। गरीबी के कारण ज्यादातर पालक बच्चों को स्कूल भेजने की जगह उनसे पॉलीथिन बीनने में मदद लेते हैं। केंद्र में ऐसी ही तीन बच्चियां  शामिल हैं। तीन साल पहले इन बच्चियों के पिता ने नशे में अपनी पत्नी की सिलबट्टे से मार कर हत्या कर दी थी। इस अपराध के लिए पिता को जेल हो गई और तीनों लड़कियां बेसहारा हो गईं। ऐसे में बच्चियों की मां की बड़ी बहन ने बच्चियों को पनाह दी। वर्तमान में वह अपने 5 बच्चों के साथ अपनी बहन की लड़कियों का लालन पालन कर रही हैं।

शिक्षिका खुशबू जोशी ने बताया कि वह विगत दिवस प्रशिक्षण केंद्र गईं थीं। वहां उन्हें बदहाल बच्चियों के बारे में जानकारी मिली जिसे उन्होंने सोशल मीडिया में वायरल कर दिया। बच्चियों के बारे में जानकर जनप्रतिनिधि उनके रहने खाने-पीने का बंदोबस्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

शिक्षिका सुनीता साहू ने बताया कि कुकुरबेड़ा में शाला त्यागी बच्चों की छानबीन करते हुए उन्होंने पाया कि ज्यादातर पालक गरीबी के कारण बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते हैं। ज्यादातर गरीब परिवार के बच्चे इस कारण से अपने मां-बाप के साथ पॉलीथिन बीनने जाते हैं। मां-बाप के साथ पॉलीथिन बीनकर दो-चार रुपये कमाने वाले बच्चे पैसों से मनपसंद चीजें खरीद कर खाते हैं।

तीन लड़कियों की घटना दिल दहलाने वाली है। बड़ी बच्ची जिसकी उम्र 7 साल है, ने खुद अपनी आंखों से अपने पिता को मां को सिलबट्टे से मारते देखा। ऐसे में उस बच्ची के मन पर क्या गुजरी होगी? यह सोचने की बात है। कुकुरबेड़ा में इस तरह की घटनाएं आम हैं।

 

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