विचार / लेख

देश और दुनिया इस हफ्ते
देश और दुनिया इस हफ्ते
Date : 29-Jan-2020

प्रकाश दुबे

अमर रहे (नेता) गण का तंत्र

एक दो मुख्यमंत्रियों के नाम लिखो। जैसे नारायणस्वामी, भूपेश बघेल, कमलनाथ। एक दो भूतपूर्व जोड़ लो। भूपिन्दर सिंह हुड्डा हैं। हरीश रावत  हुए।  कुछ फिल्मी शिल्मी चमकदार नाम शत्रुघ्न सिन्हा, राज बब्बर जैसे। अरे अरे।  रुको। नेताओं के बाल-बच्चों के लिए जगह खाली रखो।  ये नाम जानते हो। बताने की जरूरत नहीं है। अमुक जी महासचिव रहे। उनके बेटे का नाम। अमुक जी बड़े पद पर और वे दूसरे केन्द्रीय मंत्रिपद पर विराजमान थे। उनकी बेटी का नाम। तमुक जी की पसंद वाला वह नाम भी। हां जी। सूची ऐसे ही बनती है। ये सब पार्टी के प्रचार के लिए दिल्ली में तैनात किए जाते हैं। अजी, जीत-हार या तो मतदाता तय करता है या वोटिंग मशीन। गीता यानी भगवान कृष्ण वाली गीता ने कहा है-कर्म कर। फल की परवाह मत कर। रिश्तेदारी का फल पार्टी से चुनाव के पहले ही मिल रहा है। प्रचार जिम्मेदारी की बांटमबांट में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का पूरा परिवार बाहर रह गया। शीलाजी की चलती थी तब बेटा लोकसभा में बैठता था। हारने के बाद बिटिया को अरविंद केजरीवाल के विरुद्ध लड़ाने का सुझाव टांय-टांय फिस्स हुआ। कांग्रेस महासचिव वेणुगोपाल न बता सकें, किसने साधा पार्टी प्रचार में नेतागणों का नाता तंत्र।

अमरावती का मरण योग

आंध्र प्रदेश की राजनीति राजधानी के इर्द-गिर्द घूम रही है। यानी राजधानी कहां न बने, कितनी राजधानियां हों? आदि आदि। मुख्यमंत्री जगन्मोहन रेड्डी ने गुंटूर के पास निर्माणाधीन अमरावती का आलीशान सपना ही तोड़ दिया। रेड्डी समर्थकों की दलील है कि राजधानी बदलकर वे पूर्व मुख्यमंत्री नर चंद्राबाबू नायडू और उनके खासमखास भामाशाहों की आर्थिक कूवत की कमर तोड़ रहे हैं। विवाद इतना बढ़ गया है कि सरकार समर्थक विधायकों ने चंद्राबाबू और उनके भरोसेमंद कई नेताओं के नाम लेकर आरोप लगाए। कहा-पहले उन सबने अमरावती के असपास जमीन खरीदी। बाद में अमरावती को राजधानी बनाने का एलान किया गया। इस बहाने मुख्यमंत्री जगन रेड्डी का कड़प्पा एक तिहाई राजधानी बन जाएगा। यानी आम के आम और बेकार गए अमरावती पर निवेश करने वालों के दाम।

पांच बजकर 17 मिनट

जीजी पारिख ने देश की आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई। जीवन के नौ दशकों की विरासत के बोझ से दबे नहीं है। सामाजिक सरोकार के मामलों में सक्रिय रहते हैं। उनके विचारों से सहमत अनेक व्यक्ति और संगठन तीस जनवरी की शाम जन गण मन अधिनायक गाकर मौन साधेंगे। कोई भाषण नहीं होगा। महात्मा गाधी के पोते राजमोहन, भारतीय प्रशासनिक सेवा छोडक़र सामाजिक सद्भाव में जुटे हर्ष मंदर जैसे अनेक व्यक्ति और संगठन इस अभियान में शामिल हैं। 30 जनवरी को ठीक पांच बजकर 17 मिनट पर नाथूराम गोडसे गोलियां चलाकर गांधीजी की हत्या की थी। इस दिन भारत को एक कड़ी में बांधे रखने के लिए मानव श्रृंखला बनेगी। आयोजकों ने सबसे कहा है कि तिरंगे के सिवा न कोई दूसरा झंडा होगा और न कोई भाषणबाजी।

हिंदी का खजाना

भाषा के खजाने को फिल्में और फिल्म वाले भी समृद्ध करते हैं। जो काम सात दशक में भारत के गणतंत्र की राजभाषा समितियां नहीं कर पाई, वह भी पूरा करने का प्रयास लोग करते हैं। कमांडो के लिए हिंदी में कोई शब्द राजभाषा समितियों या शब्दकोषों ने दिया? अटकल लगाकर सुरक्षाकर्मी मत कहिए। यह तो सिक्योरिटी अनुवादित शब्द है। बुलंद आवाज की होड़ में अमिताभ बच्चन को पीछे छोडऩे वाले रजा मुराद ने यह काम कर दिखाया। बुंदेलखंड के छतरपुर शहर में हरियाली और सफाई की जागरूकता मुहिम में शामिल रजा मुराद के प्रशंसक तस्वीर खिंचवाने के लिए घेरे थे।

 कतार समाप्त होने का नाम नहीं ले रही थी। सुरक्षा में तैनात कमांडो ने धीरे से कुछ कहा। माइक को शरमाने वाली आवाज में दहाड़ कर रजा मुराद ने कहा-बाकी लोग हट जाओ। मेरी हिफाजत में लगे मुस्तंडे सामने आएं।  मुस्तंडों के साथ मेरी तस्वीर खिंचेगी। अब यह लिखना जरूरी नहीं है कि कमांडो मतलब मुस्तंडे।

(लेखक दैनिक भास्कर नागपुर के समूह संपादक हैं)

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