विशेष रिपोर्ट

नसबंदी कांड के पांच साल बाद दवा कंपनी संचालकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, 2014 में नसबंदी के बाद 16 महिलाओं की मौत, सीएमएचओ सहित दो डॉक्टर हुए थे बर्खास्त
नसबंदी कांड के पांच साल बाद दवा कंपनी संचालकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, 2014 में नसबंदी के बाद 16 महिलाओं की मौत, सीएमएचओ सहित दो डॉक्टर हुए थे बर्खास्त
Date : 25-Feb-2020

नसबंदी कांड के पांच साल बाद दवा कंपनी संचालकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

2014 में नसबंदी के बाद 16 महिलाओं की मौत, सीएमएचओ सहित दो डॉक्टर हुए थे बर्खास्त

बिलासपुर, 25 फरवरी (छत्तीसगढ़)। प्रदेश के बहुचर्चित नसबंदी कांड के पांच साल तीन माह बाद तखतपुर की अदालत में फार्मा कंपनी संचालक रमेश महावर और राकेश खरे के खिलाफ अभियोजन पत्र दाखिल किया गया है। मामले पर प्रारंभिक सुनवाई तीन मार्च को होगी।

मालूम हो कि बिलासपुर के समीप तखतपुर विकासखंड के ग्राम पेंडारी स्थित नेमीचंद जैन निजी चिकित्सालय में स्वास्थ्य विभाग ने एक नसबंदी शिविर आयोजित किया था, जिसमें 137 महिलाओं का ऑपरेशन किया गया था, जिनमें से कई की तबीयत बिगड़ गई। अगले दिन 13 महिलाओं की तथा बाद में तीन और महिलाओं की मौत हो गई थी। पूरी प्रदेश सरकार में इस घटना से हडक़म्प मच गया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मामले की जानकारी लेने दिल्ली से पहुंचे थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस घटना पर चिंता जताई थी। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल को इस घटना के बाद काफी आलोचना का शिकार होना पड़ा था। तब के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस घटना के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया था। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष रहे टीएस सिंहदेव ने दोनों से इस्तीफे की मांग की थी और कांग्रेस ने इस घटना के विरोध में प्रदर्शन भी किया था।

दबाव बढऩे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. आर के भांगे और ऑपरेशन करने वाले डॉ. आर के गुप्ता को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। डॉ. गुप्ता के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी, जिसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ा और काफी दिनों बाद जमानत मिली थी।

उस वक्त आरोप लगा था कि जिन दवाओं का नसबंदी में इस्तेमाल किया गया उन्हें गोपनीय तरीके से जला दिया गया। घटना के चार दिन बाद 11 नवंबर 2014 को तखतपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से ड्रग विभाग ने सिप्रोसिन सहित आठ अन्य प्रकार की दवाओं को जब्त किया। स्वास्थ्य विभाग के अन्य स्टोर्स में रखे गये करी एक लाख 52 हजार टेबलेट भी जब्त किये गये, जिनमें से ज्यादातर सिप्रोसिन और आईबो प्रोफेन थे। तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव ने अपने स्तर पर कराई गई जांच के बाद कहा कि इन दवाओं में चूहा मारने के जहर का अंश पाया गया है। बाद में दवाओं का सैम्पल कोलकाता की केन्द्रीय औषधि प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया। जांच की रिपोर्ट में पाया गया कि दवाओं का स्तर अमानक है।  इसके बाद 24 फरवरी 2020 को बिलासपुर के ड्ग इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह धु्रव ने महावीर फार्मा, खम्हारडीह (बाकी पेजï 5 पर)

रायपुर के संचालक रमेश महावर तथा तिफरा बिलासपुर स्थित कविता फॉर्मेसी के संचालक राकेश खरे के खिलाफ व्यवहार न्यायालय तखतपुर में अभियोजन पत्र प्रस्तुत कर दिया है। यह अभियोजन पत्र ड्रग एवं कास्मेटिक एक्ट 1940 की धारा 17 बी डी एवं 18 ए1 धारा 27सी के अंतर्गत दाखिल किया गया है। इसकी सुनवाई तीन मार्च से होगी।

 

 

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