विचार / लेख

कोरोना और हिंदुस्तानी इलाज-क्षमता
कोरोना और हिंदुस्तानी इलाज-क्षमता
Date : 23-Mar-2020

डॉ. नवमीत
वायरस इतना घातक इसलिए नहीं है कि इसकी मृत्यु दर बहुत ज्यादा है। मृत्यु दर तो इसकी 1-4 फीसदी तक ही बताई जा रही है। यह घातक इसलिए है क्योंकि जितनी तेजी से यह फैलता है उस तेजी से हमारे देश का स्वास्थ्य ढांचा इसे रोक पाने में असमर्थ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार किसी भी देश में प्रति 1000 आबादी पर 3 हॉस्पिटल के बेड चाहिए। 
लेकिन हमारे देश में सिर्फ 1 बेड प्रति 1000 आबादी है। बाकी यह जरूरत भी सामान्य परिस्थितियों के लिए है। महामारी के समय तो और भी बेडों जरूरत होती है। फिर इससे संक्रमित 80 फीसदी व्यक्ति भले ही बिना किसी खास नुकसान के ठीक हो जाते हैं, लेकिन 20 फीसदी को तो सघन चिकित्सा की जरूरत पड़ती ही हम 4-5 फीसदी को तो वेंटिलेटर की भी जरूरत पड़ सकती है। 
लेकिन फिलहाल हमारे पास इन तो इतने सघन चिकित्सा कक्ष हैं और न ही इतने वेंटिलेटर। जिस तेजी से और जितने कम समय में यह फैलता है, उस हिसाब से लगता है कि करोड़ों लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं जिनमें से लाखों क्या कई मिलियन लोगों को सघन चिकित्सा की जरूरत पड़ सकती है और हमारे देश की स्वास्थ्य सेवाएं एक साथ इतने लोगों को सघन चिकित्सा देने की स्थिति में नहीं हैं।  नतीजा मुझे कहते हुए भी डर लग रहा। नतीजा बहुत भयावह होगा। न तो हमारे पास पर्याप्त लैब हैं, न सघन चिकित्सा कक्ष और न डॉक्टर्स व नर्सें। जो डॉक्टर्स नर्सें हैं वे भी कितने लोगों को एक साथ देख सकेंगे? वे भी इंसान हैं, उनकी भी सीमाएं हैं।
समस्या वायरस तो है ही। लेकिन सबसे बड़ी समस्या हमारे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था है। यह इसलिए है क्योंकि पूरी व्यवस्था मुनाफे पर आधारित है जिसने हर चीज के साथ स्वास्थ्य को भी मुनाफे का साधन बना छोड़ा है। इसी व्यवस्था ने इस वायरस को वाइल्ड से इंसानों में प्रविष्ठ करवाया। यही व्यवस्था इसके इलाज में बाधक है।

 

Related Post

Comments