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तोक्यो ओलंपिक टले, जापान को अरबों डॉलर का नुकसान
तोक्यो ओलंपिक टले, जापान को अरबों डॉलर का नुकसान
Date : 26-Mar-2020

नई दिल्ली, 26 मार्च। तोक्यो ओलिंपिक टले, जापान को अरबों डॉलर का नुकसानतोक्यो ओलिंपिक 2021 तक के लिए टल गए हैं। अब आता है सबसे बड़ा सवाल। इस देरी से होने वाले नुकसान की भरपाई कौन करेगा, और यह नुकसान कितना बड़ा होगा? इसका सबसे पहला जवाब जो दिमाग में आता है वह है जापान के टैक्सपेयर। एक नजर डालते हैं कि इस आयोजन को डालने से अंदाजन कितना नुकसान हो सकता है

जापान के एक बिजनस अखबार निकी ने स्थानीय आयोजकों से बातचीत के आधार पर अंदाजा लगाया है कि ओलिंपिक टलने से 2.7 बिलियन डॉलर यानी करीब 200 अरब रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
आयोजकों को वेन्यू के लिए नई लीज पर बात करनी होगी। एरिना के मैंटेनस के लिए भुगतान करना होगा और शायद इस बार मामला अलग हो। इसके साथ ही उन्हें रीयल एस्टेट डेवलपर्स से भी बात करनी होगी जो पहले ही से ऐथलीट विलेज में इस्तेमाल होने वाले अपार्टमेंट्स को बेचने में जुटे हैं। आयोजक समिति के पास 3500 स्टाफ मेम्बर्स भी हैं और कुछ को कॉस्ट कटिंग के चलते अपनी नौकरी गंवानी पड़ सकती है।
तोक्यो ने 3.3 बिलियन डॉलर यानी करीब 250 अरब रुपये की स्थानीय स्पॉन्सरशिप बेची है। यह पिछले किसी भी ओलिंपिक के मुकाबले दोगुनी रकम है। अब वे ब्रॉन्ड अपने पैसों का हिसाब मांगेगे। वे जानना चाहेंगे कि उन्हें उनके पैसे के बदले में क्या मिलेगा?  रिफंड, नई डील या फिर नए अनुबंध?
तोक्यो में 33 खेलों के लिए 42 वेन्यू की योजना बनाई थी। पैरालिंपिक्स के लिए एक अतिरिक्त वेन्यू का भी प्लान किया गया था। अब यह साफ नहीं है कि अगले साल के लिए कितने वेन्यू उपलब्ध होंगे।
ऐथलीट विलेज भी सबसे बड़ा सिरदर्द होगा। इसमें 11000 ओलिंपियंस और स्टाफ के लिए मकान बनाए गए थे। इसके अलावा पैरालिंपियंस के लिए भी 4400 मकान थे। तोक्यो बे के किनारे पॉश साइट पर करीब 5632 अपार्टमेंट्स ओलिंपिक के बाद बेचे जाने थे। खबरें हैं कि इसमें से करीब एक चौथाई पहले ही बिक चुके हैं। कुछ की कीमत को एक मिलियन डॉलर यानी करीब साढ़े करोड़ रुपये तक है।
आयोजकों ने ओलिंपिक के आयोजन को करवाने के लिए 12.6 बिलियन डॉलर की रकम खर्च की है। हालांकि दिसंबर में केंद्र सरकार की एक ऑडिट रिपोर्ट में यह रकम करीब 28 बिलियन डॉलर बताई गई। ओलिंपिक के आयोजन पर खर्च होने वाली रकम हमेशा सवालों में रही है।
आयोजकों को 78 लाख टिकट की बिक्री से करीब एक बिलियन डॉलर जुटाने की उम्मीद थी। सभी टिकटों में एक शर्त ऐसी है जिससे आयोजक रिफंड देने से बच सकते हैं। (नवभारत टाईम्स)

 

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