विशेष रिपोर्ट

राज्य में कारखाने शुरू करने सरकारी मंजूरी तो है, लेकिन मजदूर कहीं नहीं...
राज्य में कारखाने शुरू करने सरकारी मंजूरी तो है, लेकिन मजदूर कहीं नहीं...
02-Apr-2020

राज्य में कारखाने शुरू करने सरकारी मंजूरी तो है, लेकिन मजदूर कहीं नहीं...

शशांक तिवारी

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 2 अप्रैल। लॉकडाउन के बीच सरकार ने स्टील-सीमेंट उद्योगों के साथ-साथ और राईस मिलों को शुरू करने की अनुमति दे दी है। धमतरी और कई जिलों में राईस मिल शुरू भी हो गई  हैं, मगर सीमेंट और कई स्टील उद्योग फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं हैं।

केन्द्र सरकार ने स्टील, सीमेंट, एल्युमिनियम और कॉपर उद्योगों को शुरू करने की अनुमति दी है और इसके लिए सभी राज्यों को दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही साथ राईस मिलों को भी शुरू करने की अनुमति दी है। इन सभी को अति आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में लाया गया है। बताया गया कि राज्य सरकार ने इन उद्योगों को चालू करवाने के लिए पहल भी की है। मगर कई उद्योग इसके लिए तैयार नहीं है। इसकी वजह यह है कि  कोरोना संक्रमण की आशंका के चलते श्रमिक लॉकडाउन के बीच आने की स्थिति में नहीं हैं।

स्पंज आयरन उद्योग संघ के पूर्व अध्यक्ष अनिल नचरानी ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि लॉक डाउन खत्म होने तक उद्योग बंद रहेंगे।

दूसरी तरफ, सीमेंट उद्योगों को भी चालू कराने के लिए सरकार का काफी दबाव है। न सिर्फ प्लांट में उत्पादन शुरू करने की अनुमति दी गई, बल्कि खदानों को भी चालू करने की भी छूट दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने सीमेेंट उद्योगों को भरोसा दिलाया है कि  कच्चे माल की आपूर्ति के अलावा परिवहन में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। प्रदेश में आधा दर्जन से अधिक सीमेंट प्लांट हैं और देश में सबसे ज्यादा सीमेंट का उत्पादन छत्तीसगढ़ में ही होता है। मगर कोई भी प्लांट फिलहाल उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार नहीं है। वजह यह है कि कोरोना संक्रमण फैला, तो फिर आगे प्लांट चालू करने में दिक्कत आएगी। वर्तमान में प्लांट शुरू करना जोखिम भरा माना जा रहा है। साथ ही वर्तमान में अधिकारी-कर्मचारी और मजदूर अपने घरों में हैं। वे भी मौजूदा हालत में काम पर आने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। राज्य सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि 15 फरवरी की स्थिति में खनिज उत्खनन में लगे सभी कुशल, अकुशल, श्रमिक और कर्मचारियों को मार्च माह का वेतन, अवकाश एवं अन्य जरूरी सुविधाएं खनिज प्रबंधकों द्वारा दिया जाएगा। ताकि किसी प्रकार से मजदूर लोकडाउन ख़त्म होने के बाद भी काम की तलाश में कहीं ना जाएँ.  

दूसरी तरफ, लॉक डाउन के बीच प्रदेश के एक-दो जिलों में राईस मिलरों ने कस्टम मिलिंग का काम शुरू कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष और राइस मिल एसोसिएशन के संरक्षक रामगोपाल अग्रवाल ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि सरकार की अनुमति के बाद इक्का-दुक्का ही मिले चालू हो पाई है। मिल मजदूर नहीं आ रहे हैं। मजदूर नहीं होने के कारण काम शुरू नहीं हो सकता है। इन उद्योगों पर भी जल्द से जल्द मिल चालू करने के लिए दबाव था। प्रदेश में इस बार 83 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन हुआ है। मिलिंग जल्द करने के लिए मिलरों पर दबाव है। मगर अभी भी कोरोना के भय से मजदूर काम पर नहीं आ रहे हैं। इस वजह से ज्यादातर मिले बंद हैं। प्रदेश में करीब 18 सौ राइस मिल हैं। सबसे ज्यादा मिल रायपुर और धमतरी जिले में हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ दिनों में ज्यादातर मिलें चालू हो जाएंगी।

कोरोना हो जाए, तो दिया जाए अवकाश!

राज्य सरकार ने केन्द्र के दिशा निर्देशों के अनुरूप सामाजिक-दूरी को अपनाते हुए न्यूनतम श्रमिकों और मजदूरों के साथ खनिज गतिविधियां सुचारू रूप से चलाने की छूट दी है। यह भी कहा है कि यदि किसी खनिज कर्मचारी और श्रमिक को कोरोना वायरस से प्रभावित हो जाता है, तो उन्हें सवैतनिक अवकाश प्रबंधकों द्वारा प्रदान किया जाएगा।  सरकार ने यह भी निर्देशित किया है कि लॉकडाउन का बहाना लेकर किसी कर्मचारियों और श्रमिकों की सेवा समाप्त, छटनी, सर्विस ब्रेक और वेतन में कटौती जैसा कार्य खनिज प्रबंधकों के जरिए नहीं किया जा सकता है।

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