विचार / लेख

संयुक्त परिवार की महत्वता - संजय हरनारायण मोहता
संयुक्त परिवार की महत्वता - संजय हरनारायण मोहता
19-May-2020

संयुक्त परिवार की महत्वता, संजय हरनारायण मोहता, रायपुर।

(यह लेखक के निजी विचार हैं)

संयुक्त परिवार की महत्वता हमेशा रही है। किसी ने ठीक कहा है कि परिवार व्यक्ति के जीवन की बुनियाद है। उसका निर्माण और विकास परिवार से ही होता है। संयुक्त परिवार में माता-पिता, बच्चों, दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताईजी और अन्य सदस्यों के बीच रहकर निश्चित तौर पर हमें संस्कार, अनुशासन, सही दिशा,अच्छे-बुरे की पहचान, हर सदस्य का अनुभव और प्यार भरपूर मिलता है। बदलते समय के साथ-साथ संयुक्त परिवार की रूप रेखा भी बदलती जा रही है। पारस्परिक संबंधों की अपेक्षा आर्थिक महत्व बढ़ता जा रहा है, व्यक्तिवाद बढ़ रहा है, इस वजह से संयुक्त परिवार, एकाकी परिवार होते जा रहे हैं। यह आने वाली पीढ़ी के लिए घातक हो सकता है।

गला-काट प्रतियोगिता, अस्त-वयस्त जीवन शैली आदि से डूबने से बचा सकने वाला परिवार ही है। कोरोना जैसी महामारी ने हमें फिर से संयुक्त परिवार की महत्वता समझाई है। हमें फिर से बदलाव लाते हुए, तालमेल बैठाकर रहने की आदत लानी होगी, तभी हम अनुशाशन और संस्कारो के बीच रहकर आने वाली पीढ़ियों को परिवार की महत्वता समझा पायेंगे। 

मेरा परिवार आज भी हर एक त्यौहार, हर एक विशेष एकत्रित हो व्यतित करता है। साल में एक बार पूरा परिवार पिकनिक भी मनाता है, जिसमें तीन पीढ़ियों मिलजुलकर आनंद लेती है। आज भी इस परिवार से मिले संस्कार आदरपूर्वक पालन तीसरी पीढ़ी करती आ रही है। हाल ही में विश्व फैमिली दिवस में हम सभी को संकल्प लेना चाहिए संयुक्त परिवार की महत्वता हमेशा बनाये रखें।

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