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आप बताइए शिक्षित कौन? : दिव्या गुप्ता
आप बताइए शिक्षित कौन? : दिव्या गुप्ता
27-Jun-2020 9:02 PM

टी एन शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त थे तब एक बार वे उत्तर प्रदेश की यात्रा पर गए। उनके साथ उनकी पत्नी भी थीं। रास्ते में एक बाग के पास वे लोग रूके। बाग के पेड़ पर बया पक्षियों के घोसले थे। उनकी पत्नी ने कहा दो घोसले मंगवा दीजिए मैं इन्हें घर की सज्जा के लिए ले चलूंगी। उन्होंने साथ चल रहे पुलिस वालों से घोसला लाने के लिए कहा।

पुलिस वाले वहीं पास में गाय चरा रहे एक बालक से पेड़ पर चढक़र घोसला लाने के बदले दस रूपये देने की बात कहे, लेकिन वह लडक़ा घोसला तोडक़र लाने के लिए तैयार नहीं हुआ। टी एन शेषन उसे दस की जगह पचास रुपए देने की बात कही फिर भी वह लडक़ा तैयार नहीं हुआ। उसने शेषन से कहा साहब जी! घोसले में चिडिय़ा के बच्चे हैं शाम को जब वह भोजन लेकर आएगी तब अपने बच्चों को न देखकर बहुत दुखी होगी, इसलिए आप चाहे जितना पैसा दें मैं घोसला नहीं तोड़ सकता।

इस घटना के बाद टी.एन. शेषन को आजीवन यह ग्लानि रही कि जो एक चरवाहा बालक सोच सका और उसके अंदर जैसी संवेदनशीलता थी, इतने पढ़े-लिखे और आईएएस होने के बाद भी वे वह बात क्यों नहीं सोच सके, उनके अंदर वह संवेदना क्यों नहीं उत्पन्न हुई? शिक्षित कौन हुआ? मैं या वो बालक?

उन्होंने कहा उस छोटे बालक के सामने मेरा पद और मेरा आईएएस होना गायब हो गया। मैं उसके सामने एक सरसों के बीज के समान हो गया। शिक्षा, पद और सामाजिक स्थिति मानवता के मापदण्ड नहीं हैं। प्रकृति को जानना ही ज्ञान है। बहुत सी सूचनाओं के संग्रह को ज्ञान नहीं कहा जा सकता है। जीवन तभी आनंददायक होता है जब आपकी शिक्षा से ज्ञान, संवेदना और बुद्धिमत्ता प्रकट हो।

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