विचार / लेख

महात्मा गांधी अब ब्रिटेन के सिक्कों पर भी नज़र आएंगे
महात्मा गांधी अब ब्रिटेन के सिक्कों पर भी नज़र आएंगे
04-Aug-2020 6:51 PM

-गगन सभरवाल

ब्रिटेन के वित्त मंत्री ऋषि सुनक ने उस अभियान का समर्थन किया है जिसमें ब्रिटेन की विविधता का जश्न मनाने के लिए काले और अल्‍पसंख्‍यक नस्‍लों के लोगों (BAME) को ब्रितानी सिक्कों पर दिखाने की बात की जा रही है.

बीबीसी को मिली जानकारी के अनुसार अश्वेत लोगों के योगदान और सफलता को याद करने के क्रम में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर भी ब्रितानी सिक्के पर नज़र आएगी.

ब्रिटेन के वित्त मंत्रालय ने बीबीसी को मेल के ज़रिए दिए गए अपने बयान में कहा है, "द रॉयल मिंट एटवाइज़री कमेटी गांधी को याद करने के लिए एक सिक्का जारी करने का विचार कर रही है."

द रॉयल मिंट एटवाइज़री कमेटी ब्रिटेन में सिक्‍कों के डिज़ाइन और उनके व‍िषयवस्‍तु पर सलाह देने वाली एक स्वतंत्र कमेटी है जिसमें इसके जानकार और विशेषज्ञ सदस्य होते हैं.

उन्होंने आगे कहा, "ब्रिटेन के वित्त मंत्री इस बात को लेकर बहुत इच्छुक हैं कि हमारे सिक्के पिछली पीढ़ी के उन लोगों के काम को दर्शाएं जिन्होंने इस देश की और राष्ट्रमंडल देशों की सेवा की है."

                                                                                        ब्रिटेन वित्त मंत्री ऋषि सुनक 

वित्त मंत्री ऋषि सुनक भारतीय मूल के ब्रितानी नागरिक हैं और भारत की जानी मानी आईटी कंपनी इनफ़ोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति के दामाद हैं.

लेकिन यह पहली बार नहीं है जब ब्रितानी सिक्के पर महात्मा गांधी की तस्वीर डालने की बात हो रही है. पूर्व वित्त मंत्री साजिद जावेद ने भी पिछले साल द रॉयल मिंट को कहा था कि महात्मा गांधी के जन्म के 150वीं सालगिरह के जश्न के मौक़े पर एक सिक्का जारी करें

महात्मा गांधी के अलावा ब्रितानी सिक्कों पर जिनकी तस्वीर लगाने की बात हो रही है उनमें भारतीय मूल की ब्रितानी जासूस नूर इनायत ख़ान और जमाइका मूल की ब्रितानी नर्स मेरी सिकोल हैं.

रविवार को ब्रितानी वित्त मंत्री ने ट्वीट किया था, "शनिवार को मैंने रॉयल मिंट को लिखकर उनसे आग्रह किया है कि वो काले और अल्‍पसंख्‍यक नस्‍लों के लोगों (BAME) की सफलता को ब्रितानी सिक्कों पर दर्शाने का विचार करें."

ज़हरा ज़ैदी का अभियान

'वी टू बिल्‍ट ब्रिटेन' अभियान का नेतृत्‍व करने वाली भारतीय मूल की ज़हरा ज़ैदी ने ऋषि सुनका को एक पत्र लिखकर ऐसी माँग की थी.

ज़हरा ज़ैदी ब्रिटेन की कंज़रवेटिव पार्टी से जु़ड़ी हुई हैं और वो पिछले तीन साल से इस बात की लड़ाई लड़ रही हैं कि महात्मा गांधी, नूर इनायत ख़ान और मेरी सिकोल जैसे लोगों की तस्वीर ब्रितानी सिक्कों पर नज़र आनी चाहिए.

पिछले महीने बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा था, "हमारे लिगल टेंडर, हमारी नोटों और हमारे सिक्कों पर किनकी तस्वीर नज़र आती है, उससे इस बात का वर्णन होता है कि एक राष्ट्र के तौर पर हम क्या सोचते हैं कि हम कौन हैं."

इस अभियान का समर्थन करते हुए वित्त मंत्री ने द रॉयल मिंट के अध्यक्ष लॉर्ड वॉल्डग्रेभ को पत्र लिखकर कहा, "काले, एशियाई और अल्पसंख्यक नस्ल के लोगों ने ब्रिटेन की साझा संस्कृति के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है. पीढ़ियों तक अल्पसंख्यक नस्लों के लोगों ने इस देश के लिए लड़ाई लड़ी है और अपनी जान दी है, इस देश को हमने मिलकर बनाया है, अपने बच्चों को पढ़ाया है, बीमारों की सेवा की है, बुज़ुर्गों की तीमारदारी की है, और उनके उद्यमी उत्साह से हमने अपने कुछ बहुत ही रोमांचक और सक्रिय व्यापार को शुरू किया है, नौकरियों को पैदा किया है और विकास को बढ़ावा दिया है."

अपने ख़त में सुनक ने आगे लिखा है, "मैं जानता हूं कि आप भविष्य में आने वाले सिक्कों में विविधता दर्शाने के लिए पहले से ही विचार कर रहे हैं और मैं आपके इन प्रयासों का स्वागत करता हूं. मुझे उम्मीद है कि ये अभियान हम सभी को ये करने के महत्व और ज़रूरत को याद दिलाता है."

काले, एशियाई और अल्पसंख्यक नस्ल के लोग जैसे वॉल्टर टूल, जो कि ब्रितानी सेना के पहले काले अफ़सर थे, उनकी तस्वीर ब्रितानी सिक्कों पर पहली आ चुकी है.

ज़हरा ज़ैदी ने इससे पहले एक अभियान चलाया था जिसमें उन्होंने बैंक ऑफ़ इंग्लैंड से अनुरोध किया था कि ब्रिटेन के 50 पाउंड की नोट पर अल्पसंख्यक नस्ल की महिलाओं की तस्वीर छापें. इनमें उन्होंने नूर इनायत ख़ान के नाम का सुझाव दिया था. लेकिन उनके अनुरोध को उस समय अस्वीकार कर दिया गया था और ब्रिटेन में कम्प्यूटर साइंस के पिता कहे जाने वाले एलन ट्यूरिंग को ब्रितानी नोटों पर जगह मिली. उनकी तस्वीर वाली नोट अगले साल से चलन में आएगी.

जॉर्ज फ़्लॉयड की हत्या

अमरीका में मई के महीने में एक काले नागरिक जॉर्ज फ़्लॉयड की पुलिस के हाथों मौत के बाद पूरी दुनिया में इतिहास, उपनिवेशवाद, और नस्ल को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है.

इस घटना के बाद ब्रिटेन की कई संस्थाओं ने भी अपने इतिहास पर दोबारा नज़र डालना शुरू कर दिया है.

कई संस्थाओं ने काले, एशियाई और अल्पसंख्यक नस्ल के लोगों की मदद के लिए अभियान शुरू किया है और नस्लीय विविधता के समर्थन में कई प्रोजक्ट शुरू किए गए हैं.

अमरीका में जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत ने नस्लवाद, उपनिवेशवाद और पुलिसिया दमन के ख़िलाफ़ वैश्विक विरोध को जन्म दिया है. (bbc)

अन्य पोस्ट

Comments