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मस्तूरी में ठंड-भूख से 9 गाएं मरीं, रातों रात खुले में फेंका शव
30-Aug-2020 8:10 PM
मस्तूरी में ठंड-भूख से 9 गाएं मरीं, रातों रात खुले में फेंका शव

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 30 अगस्त। जिले में एक बार फिर गोवंश की मौत का मामला सामने आया है। मस्तूरी के पचपेड़ी में बारिश से बचाने के लिये बनाये गये अस्थायी गौठान में रखे गये 19 गायों में से 9 की ठंड और भूख से मौत हो जाने का पता चला है। मामले को दबाने के लिये गायों को ट्रैक्टर ट्रॉली में लादकर खुले में ले जाकर फेंक दिया गया। भाजपा नेताओं ने इसे लेकर शासन प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। जिला पंचायत ने इस मामले की जांच के लिये टीम भेजी है।

मस्तूरी इलाके में बीते कई दिनों से बारिश हो रही थी। यहां बारिश से बचाने लिये स्थानीय पंचायत ने एक अस्थायी गौठान प्लास्टिक का तिरपाल खींचकर बनाया था। जिसमें 19 गाय रखे गये थे। इनमें से 9 गायों की कल शाम मौत हो गई। शेष की स्थिति भी नाजुक बताई जा रही है। बताया जाता है कि इन गायों को चार दिन से यहां रखा गया था लेकिन उनके लिये चारा-पानी की व्यवस्था नहीं की गई। मौत हो जाने के बाद रात में जब खुले मैदान में मृत गायों को फेंका गया। सुबह लोगों को इसकी जानकारी हुई।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गजेन्द्र सिंह ठाकुर के अनुसार एक जांच टीम गांव में भेजी गई है उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जायेगी। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक व मस्तूरी विधायक डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी ने कहा कि सरकार की गोधन संरक्षण बुरी तरह फेल हो गई है। गोबर खरीदी योजना में भी भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। इसके लिये शासन प्रशासन जिम्मेदार है। ज्ञात हो कि इससे पहले बीते 25 जुलाई को मेड़पार में 76 गायों की मौत हो चुकी है, जिसमें किसी के विरुद्ध अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। लोहर्सी, मड़ई, सीपत, मोपका के आदर्श गोठान के अलावा प्रदेश के कोरबा, तिल्दा, धमधा आदि स्थानों में गोवंश की मौत की घटनाएं हुई हैं। 


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