राजनीति

नीतीश के दलित दांव पर तेजस्वी का ओबीसी कार्ड -सरकार बनी तो 4.5 लाख पदों पर करेंगे तुरंत बहाली
05-Sep-2020 4:36 PM 8
नीतीश के दलित दांव पर तेजस्वी का ओबीसी कार्ड -सरकार बनी तो 4.5 लाख पदों पर करेंगे तुरंत बहाली

पटना, 5 सितंबर। बिहार इलेक्शन 2020 से पहले सूबे में दलित वोटबैंक पर सियासत तेज है। मुख्यमंत्री और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार के दलित दांव पर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने ओबीसी कार्ड चला है। शनिवार को उन्होंने ऐलान किया कि अगर चुनाव में उनकी पार्टी की सरकार बनी, तो वे लोग करीब 4.5 लाख पदों पर फौरन बहाली करेंगे। 

तेजस्वी पत्रकारों से बोले, चूंकि, चुनाव नजदीक हैं। नीतीश कुमार ने बिहार में मारे गए एससी/एसटी लोगों के बच्चों को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया। पर ओबीसी या फिर सामान्य वर्ग के जो लोग मारे गए, उनकी संतानों को नौकरी क्यों नहीं दी जा रही? यह एससी/एसटी लोगों की हत्या को प्रोत्साहित करने जैसा है। बकौल राजद नेता, बिहार की बेरोजगारी दर लगभग 46 फीसदी है, जो भारत में सबसे अधिक है। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में लगभग 4.5 लाख पद रिक्त हैं। अगर मौका दिया जाता है, तो हमारी सरकार सभी रिक्त पदों को भरेगी और जनसंख्या के अनुपात में नई रिक्तियों का निर्माण करेगी।  इससे पहले, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत लंबित मामलों को 20 सितंबर तक निपटाने के आदेश दिए। 

साथ ही उन्होंने अधिकारियों को असमय मृत्यु से संबंधित मामलों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी एवं एसटी) के आश्रितों को अनुकंपा आधार पर नौकरी देने के लिए नियम बनाने के भी निर्देश दिए। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, कुमार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के सचिव प्रेम कुमार मीणा को मामलों के त्वरित निपटान के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ संपर्क में रहने का भी निर्देश दिया। 

मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम 1995 के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। इस दौरान, वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री रमेश ऋषिदेव, सांसदों विजय मांझी, पशुपति कुमार पारस, प्रिंस राज और आलोक कुमार सुमन के अलावा विधायकों और अन्य जन प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। (jansatta.com)
 

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