सामान्य ज्ञान

एचएमटी घडिय़ां
एचएमटी घडिय़ां
15-Sep-2020 12:04 PM

कभी भारत में एचएमटी घडिय़ों का वर्चस्व हुआ करता था। लेकिन अब  केंद्र सरकार ने लगातार घाटों की वजह से  एचएमटी वाचेज को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का फैसला किया है। वर्ष 2011-12 में 224.04 करोड़ रुपयों के घाटे के मुकाबले 2012-13 में इसका शुद्ध घाटा 242.47 करोड़ रुपये हो गया है।   एचएमटी वाचेज एचएमटी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
भारत में एचएमटी की पहली विनिर्माण इकाई जापान की सिटिजन वॉच के सहयोग से वर्ष 1961 में बैंगलोर में स्थापित की गई थी। वर्ष 1972 में, एचएमटी ने अपने घड़ी बनाने की क्षमता का बैंगलोर फैक्ट्री के साथ एक और फैक्ट्री की स्थापना कर विस्तार किया। फिर वर्ष   1975 में बैंगलोर की वॉच फैक्ट्री ने मेन स्प्रिंग, हेयर स्प्रिंग और शॉक एबजॉर्बर घटकों के निर्माण के लिए और विस्तार किया। उसके बाद वर्ष 1978 और 1985 में एचएमटी ने क्रमश: घड़ी के घटकों के उत्पादन के लिए टुमकुर और रानीबाग में विनिर्माण इकाईयों की स्थापना की। टुमकुर की घड़ी फैक्ट्री को घड़ी के साथ क्वार्ट्ज के निर्माण के लिए एम/एस सिटिजन वाच को जापान के सहयोग से आंशिक रूप से बदला गया।  प्रमुख बाजार में अग्रणी होनेके लिए वर्ष 1983 में बैंगलोर में विशेष विनिर्माण इकाई शुरु की गई थी। एचएमटी घडिय़ों को ऑटोमैटिक डे- डेट (दिन और तारीख) घडिय़ों के साथ पहली ब्रेल और क्वाट्र्स घडिय़ां बनाने का भी श्रेय है।
साल 2000 में, एचएमटी वाच बिजनेस समूह एचएमटी वाचेज लिमिटेड के नाम से पुनर्गठित किया गया था। हालांकि, इसके तुरंत बाद ही कंपनी को नुकसान होना शुरु हो गया जिसके बाद एक पुनरुद्धार योजना बनाई गई और इसे 2006 में  मंजूर भी कर लिया। वित्त मंत्रालय और योजना आयोग द्वारा प्रस्ताव का समर्थन नहीं करने की वजह से सरकार ने कंपनी को इस योजना को किसी सलाहकार से पुनरीक्षित करने को कहा था। एचएमटी लिमिटेड के निदेशकों के मुताबिक घड़ी की यह कंपनी 2012-13 में कार्यशील पूंजी की कमी, व्यापार चैनल में कमी और उच्च लागत जैसे कारकों की वजह से  प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार नहीं कर सकी।  कंपनी के पास 31 मार्च 2013 तक 1105 कर्मचारी थे।

 ट्रंासजेनिक जीव और पौधा
ट्रांसजेनिक जीव एक ऐसा पौधा या जन्तु हो सकता है,जिसकी कोशिका में उसके अपने जीन के अलावा विदेशी जीन प्रत्यारोपित किया गया हो। ट्रांसजेनिक गाय, भेड़ और बकरे के माध्यम से मानव प्रोटीन युक्त दूध उत्पादित किया जा रहा है। ट्रांसजेनिक जीव से टमाटर, तम्बाकू और गेहूं मेें कीट और बीमारी तथा कोहरा प्रतिरोधक क्षमता विकसित की गई है। 
ट्रंासजेनिक पौधे उन पौधों को कहते हैं, जिनका उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्हें कीड़ों तथा रोगों से मुकाबला करने योग्य बनाया जाता है और उनमें पानी की कमी, अत्यधिक गर्मी या सर्दी तथा अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों को झेलने की क्षमता का विकास किया जाता है।  इन्हें पराजीनी पौधे यानी ट्रांसजेनिक पौधे कहा जाता है।  दूसरे शब्दों में जीन इंजीनियरिंग द्वारा  पौधों को अधिक पोषक बनाने जाने की प्रक्रिया ट्रांसजेनिक प्रक्रिया कहलाती ह

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