अंतर्राष्ट्रीय

WHO ने कहा- 20 साल से कम उम्र के लोगों पर कोरोना का खतरा कम, ये बीमारी फैला रहे
WHO ने कहा- 20 साल से कम उम्र के लोगों पर कोरोना का खतरा कम, ये बीमारी फैला रहे
16-Sep-2020 11:02 AM
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक 20 साल से कम उम्र के लोगों पर महामारी (Covid-19) का ख़तरा काफी कम है. हालांकि संगठन के मुताबिक इस उम्र के लोग ज्यादातर देशों में फिर से कोरोना संक्रमण फैलाने के जिम्मेदार साबित हो रहे हैं.
 
 विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि आंकड़ों में ऐसा सामने आ रहा है कि 20 साल से कम उम्र के लोगों पर कोरोना महामारी (Covid-19) का खतरा काफी कम है. इसकी एक वजह उनकी ज्यादा बेहतर इम्युनिटी है. हालांकि WHO ने ये भी कहा है कि कई देशों में कोरोना की वापसी के लिए इस आयु वर्ग के लोग जिम्मेदार हैं क्योंकि ये इसके फैलने का जरिया बन रहे हैं. (फोटो-AFP) विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि आंकड़ों में ऐसा सामने आ रहा है कि 20 साल से कम उम्र के लोगों पर कोरोना महामारी (Covid-19) का खतरा काफी कम है. इसकी एक वजह उनकी ज्यादा बेहतर इम्युनिटी है. हालांकि WHO ने ये भी कहा है कि कई देशों में कोरोना की वापसी के लिए इस आयु वर्ग के लोग जिम्मेदार हैं क्योंकि ये इसके फैलने का जरिया बन रहे हैं. 
 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि आंकड़ों में ऐसा सामने आ रहा है कि 20 साल से कम उम्र के लोगों पर कोरोना महामारी (Covid-19) का खतरा काफी कम है. इसकी एक वजह उनकी ज्यादा बेहतर इम्युनिटी है. हालांकि WHO ने ये भी कहा है कि कई देशों में कोरोना की वापसी के लिए इस आयु वर्ग के लोग जिम्मेदार हैं क्योंकि ये इसके फैलने का जरिया बन रहे हैं. 
 
WHO के मुताबिक दुनियाभर में अब तक कोविड-19 के जितने मामले सामने आए हैं, उनमें 20 साल से कम उम्र वाले मरीजों की संख्या 10 फीसदी से भी कम है. इस उम्र वाले सिर्फ 0.2 फीसदी लोगों की मौत हुई. (फोटो-AFP) WHO के मुताबिक दुनियाभर में अब तक कोविड-19 के जितने मामले सामने आए हैं, उनमें 20 साल से कम उम्र वाले मरीजों की संख्या 10 फीसदी से भी कम है. इस उम्र वाले सिर्फ 0.2 फीसदी लोगों की मौत हुई. 
 
WHO के मुताबिक दुनियाभर में अब तक कोविड-19 के जितने मामले सामने आए हैं, उनमें 20 साल से कम उम्र वाले मरीजों की संख्या 10 फीसदी से भी कम है. इस उम्र वाले सिर्फ 0.2 फीसदी लोगों की मौत हुई.
 
WHO ने हालांकि, यह भी कहा कि इस बारे में अभी और रिसर्च की जरूरत है क्योंकि बच्चों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए. संगठन ने कहा- हम जानते हैं कि बच्चों के लिए भी यह वायरस जानलेवा है और उनमें भी हल्के लक्षण देखे गए हैं. लेकिन, यह भी सही है कि उनमें डेथ रेट काफी कम है. (फोटो-AP) WHO ने हालांकि, यह भी कहा कि इस बारे में अभी और रिसर्च की जरूरत है क्योंकि बच्चों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए. संगठन ने कहा- हम जानते हैं कि बच्चों के लिए भी यह वायरस जानलेवा है और उनमें भी हल्के लक्षण देखे गए हैं. लेकिन, यह भी सही है कि उनमें डेथ रेट काफी कम है. 
 
WHO ने हालांकि, यह भी कहा कि इस बारे में अभी और रिसर्च की जरूरत है क्योंकि बच्चों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए. संगठन ने कहा- हम जानते हैं कि बच्चों के लिए भी यह वायरस जानलेवा है और उनमें भी हल्के लक्षण देखे गए हैं. लेकिन, यह भी सही है कि उनमें डेथ रेट काफी कम है. 
 
 बता दें कि महामारी ने दुनिया भर के बच्चों को काफी हद तक प्रभावित किया है. यूनिसेफ की एग्जीक्युटिव डायरेक्टर हेनरिटा फोरे ने कहा- 192 देशों में आधे से ज्यादा बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. महामारी ने इन पर गंभीर असर डाला है. (फोटो-AFP) बता दें कि महामारी ने दुनिया भर के बच्चों को काफी हद तक प्रभावित किया है. यूनिसेफ की एग्जीक्युटिव डायरेक्टर हेनरिटा फोरे ने कहा- 192 देशों में आधे से ज्यादा बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. महामारी ने इन पर गंभीर असर डाला है. 
 
बता दें कि महामारी ने दुनिया भर के बच्चों को काफी हद तक प्रभावित किया है. यूनिसेफ की एग्जीक्युटिव डायरेक्टर हेनरिटा फोरे ने कहा- 192 देशों में आधे से ज्यादा बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. महामारी ने इन पर गंभीर असर डाला है. 
 
करीब 16 करोड़ स्कूली बच्चे इन दिनों घर में हैं. फोरे ने कहा- यह सुकून की बात है कि दूर-दराज में रहने वाले लाखों बच्चे टीवी, इंटरनेट या ऐसे ही दूसरे किसी माध्यम के जरिए शिक्षा हासिल कर पा रहे हैं. 
 
करीब 16 करोड़ स्कूली बच्चे इन दिनों घर में हैं. फोरे ने कहा- यह सुकून की बात है कि दूर-दराज में रहने वाले लाखों बच्चे टीवी, इंटरनेट या ऐसे ही दूसरे किसी माध्यम के जरिए शिक्षा हासिल कर पा रहे हैं. 
 
 उधर डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल ट्रेडोस गेब्रेसिएस ने कहा कि बच्चों पर महामारी का सबसे खतरनाक असर होता है. हालांकि, स्कूलों को अस्थायी तौर पर उन्हीं इलाकों में बंद करना चाहिए, जहां संक्रमण का ज्यादा खतरा हो. स्कूलों को बंद करना महामारी से निपटने में सबसे आखिरी कदम होना चाहिए. साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए. (फोटो-AFP) उधर डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल ट्रेडोस गेब्रेसिएस ने कहा कि बच्चों पर महामारी का सबसे खतरनाक असर होता है. हालांकि, स्कूलों को अस्थायी तौर पर उन्हीं इलाकों में बंद करना चाहिए, जहां संक्रमण का ज्यादा खतरा हो. स्कूलों को बंद करना महामारी से निपटने में सबसे आखिरी कदम होना चाहिए. साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए. 
 
उधर डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल ट्रेडोस गेब्रेसिएस ने कहा कि बच्चों पर महामारी का सबसे खतरनाक असर होता है. हालांकि, स्कूलों को अस्थायी तौर पर उन्हीं इलाकों में बंद करना चाहिए, जहां संक्रमण का ज्यादा खतरा हो. स्कूलों को बंद करना महामारी से निपटने में सबसे आखिरी कदम होना चाहिए. साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए. 
 
पाकिस्तान में 6 महीने बाद स्कूल खुल गए हैं. प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा- बच्चों की हिफाजत सामूहिक जिम्मेदारी है. स्कूल खोलने के लिए सख्त नियम तय किए गए हैं. इनका पालन न करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पहले चरण में 9वीं और 10वीं तक के स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज खोले जाएंगे. प्राइमरी और सेकंडरी स्कूल महीने के आखिर तक शुरू किए जा सकते हैं. देश में सभी शिक्षण संस्थान 15 मार्च से बंद थे. (फोटो-AFP) पाकिस्तान में 6 महीने बाद स्कूल खुल गए हैं. प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा- बच्चों की हिफाजत सामूहिक जिम्मेदारी है. स्कूल खोलने के लिए सख्त नियम तय किए गए हैं. इनका पालन न करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पहले चरण में 9वीं और 10वीं तक के स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज खोले जाएंगे. प्राइमरी और सेकंडरी स्कूल महीने के आखिर तक शुरू किए जा सकते हैं. देश में सभी शिक्षण संस्थान 15 मार्च से बंद थे. 
 
पाकिस्तान में 6 महीने बाद स्कूल खुल गए हैं. प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा- बच्चों की हिफाजत सामूहिक जिम्मेदारी है. स्कूल खोलने के लिए सख्त नियम तय किए गए हैं. इनका पालन न करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पहले चरण में 9वीं और 10वीं तक के स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज खोले जाएंगे. प्राइमरी और सेकंडरी स्कूल महीने के आखिर तक शुरू किए जा सकते हैं. देश में सभी शिक्षण संस्थान 15 मार्च से बंद थे. 
 
14 अगस्त को इमरान ने कहा था- कल से लाखों बच्चे फिर स्कूल जाएंगे. यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम बच्चे सुरक्षित रहें. इसके लिए नियमों का पालन करना जरूरी होगा. दुनिया में अब संक्रमितों का आंकड़ा 2 करोड़ 97 लाख 15 हजार 706 हो चुका है. अच्छी खबर ये है कि ठीक होने वालों की संख्या भी अब 2 करोड़ 15 लाख से ज्यादा हो चुकी है. वहीं, महामारी में मरने वालों की संख्या 9 लाख 38 हजार से ज्यादा हो गई है.  (news18)

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