सामान्य ज्ञान

ओजोन और ओजोन संरक्षण
17-Sep-2020 1:52 PM 23
ओजोन और ओजोन संरक्षण

ओजोन (ह्र३) आक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनने वाली एक गैस है जो वायुमण्डल में बहुत कम मत्रा (0.02 प्रतिशत) में पाई जाती हैं । यह तीखे गंध वाली अत्यन्त विषैली गैस है। जमीन के सतह के उपर अर्थात निचले वायुमंडल में यह एक खतरनाक दूषक है, जबकि वायुमंडल की ऊपरी परत ओजोन परत के रुप में यह सूर्य के पराबैंगनी विकिरण से पृथ्वी पर जीवन को बचाती है, जहां इसका निर्माण ऑक्सीजन पर पराबैंगनी किरणों के प्रभावस्वरूप होता है। ओजोन ऑक्सीजन का एक अपररूप है। यह समुद्री वायु में उपस्थित होती है।
 वॉन मैरम ने सन 1785 में विद्युत विसर्जन यंत्रों के पास एक विशेष प्रकार की गंध का अनुभव किया जिसका उल्लेेख उन्होंने अपने लेखों में भी किया। 1801 में क्रिक शैंक को भी ऑक्सीजन में विद्युत विसर्जन करते समय यही अनुभव हुआ। 1840 में शानबाइन नें इस गंध का कारण एक नई गैस को बताया और उन्होंने इसे ओजोन नाम दिया जो यूनानी शब्द ओजो यानी- मैं सूंघता हूं, पर आधारित था। सन 1865 में सोरेट ने यह सिद्ध किया कि यह गैस ऑक्सीजन का एक अपररूप है और इसका अणुसूत्र  ह्र३ है। ओजोन परत को पहुंच रहे नुकसान  के प्रति जनजागरुकता लाने के लिए हर साल 16 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस मनाया जाता है। 
 संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1995 में प्रतिवर्ष 16 सितम्बर को अंतरराष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस मनाने का निर्णय किया था। वर्ष 1995 से प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस 16 सितम्बर को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर लोगों का ध्यान पर्यावरण से जुड़े अहम मुद्दों की ओर आकर्षित करना है। इसके साथ ही लोगों को धूप में निकलते समय अल्ट्रा वायलेट किरणों से सावधान रहने और ओजोन को संरक्षित रखने वाले उत्पादों का इस्तेमाल करने के प्रति जागरूक बनाना है। हर साल कोई न कोई विषय इस दिन के लिए निर्धारित किया जाता है। जैसे कि  वर्ष 2013 का विषय- ‘स्वस्थ वातावरण, हमारा भविष्य’ रखा गया था। 

आचार्य चरक
आचार्य चरक आयुर्वेद के विद्वान थे। उन्होंने आयुर्वेद के प्रमुख ग्रन्थों और उसके ज्ञान को इक_ïा करके उसका संकलन किया। चरक ने भ्रमण करके चिकित्सको के साथ बैठकें की, विचार एकत्र किए और सिद्धांतों को प्रतिपादित किया और उसे लिखाई-पढ़ाई के योग्य बनाया। 
चरक संहिता आठ भागों में विभाजित है।  इसें 120 अध्याय हैं। चरक संहिता में आयुर्वेद के सभी सिद्धांत हैं और जो इसमें नहीं है, वह कहीं नहीं है। यह आयुर्वेद के सिद्धांत का पूर्ण ग्रंथ है। 
 

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