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डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च फेलोशिप
17-Oct-2020 12:27 PM 17
डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च फेलोशिप

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 16 अक्टूबर 2015 को दिवंगत डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम के 85वें जन्मदिवस पर उनके नाम पर पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च फेलोशिप प्रारंभ करने की घोषणा की । मंत्रालय का पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च फेलोशिप प्रोग्राम देश में पर्यावरण एवं पारिस्थितकी के क्षेत्र में काम कर रहे युवा वैज्ञानिकों की दिशा में लक्षित है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य समूह वे युवा वैज्ञानिक हैं जिन्होंने पर्यावरण एवं पारिस्थितकी के क्षेत्र में अपना पीएचडी पूरा कर लिया है या पूरा करने वाले हैं और जिनका एक बढिय़ा शैक्षणिक रिकॉर्ड है। आवेदकों को 35 वर्ष की उम्र से कम आयु का होना चाहिए। फेलोशिप की अवधि तीन वर्ष की होगी और फेलोशिप अवार्ड में एक रिसर्च एसोसिएट के बराबर की एक मासिक फेलोशिप तथा 1.5 लाख रूपये की एक वार्षिक रिसर्च आकस्मिकता अनुदान शामिल है। मंत्रालय के दिशानिर्देश के अनुसार पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो रिसर्च एसोसिएटशिप के लिए लागू आवास किराया भत्ता एवं अन्य लाभ पाने का भी हकदार होगा।
 मंत्रालय की योजना डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च फेलो के चयन के लिए डॉ. आर. ए. मशेलकर की अगुवाई में विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने की भी है।

लंगुरिया
लंगुरिया-भदावर में गाया जाने वाला लोकगीत है । भदावर के लोकगीत लंगुरिया में चंबल की माटी की सौंधी-सौंधी गंध महकती है। लंगुरिया लोकगीत करौली की कैलादेवी की स्तुति में गए जाते हैं। लांगुरिया - काल-भैरव जो कैलादेवी का गण है ,को सम्बोधित करते हुए गाए जाते हैं।  
करौली नामक स्थान कैला देवी का एक मंदिर है। महिलाएं ढोलक पर थपकियां लगाते हुये नृत्य गायन में मस्त हो जाती हंै तो ग्रामीण पुरुष बांसुरी के स्वर में लंगुरियों के गीत गुनगुनाते हैं। भारतीय लोक संस्कृति में लंगुरिया का विशेष स्थान रहा है । देवी के इन लोकगीतों में नर-नारियों के मनोभावनाओं के दर्शन होते हैं - श्रद्धा और भक्ति छलकती है और परस्पर नाट्य भावना के अन्तर्गत संवाद भी सुनाई पड़ते हैं।   लंगुरिया गीत को कइ
 

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