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कोरोना के साये में बिहार में चरम पर है चुनाव प्रचार
24-Oct-2020 7:29 PM 48
कोरोना के साये में बिहार में चरम पर है चुनाव प्रचार

बिहार , 24 अक्टूबर | कोरोना संकट के दौर में देश में पहली बार हो रहे विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए पहली एक्चुअल रैली गया में एनडीए की तरफ से आयोजित की गई जिसे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संबोधित किया. इस चुनावी जनसभा के लिए आयोजकों ने कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार सुरक्षा के तमाम उपाय किए थे, किंतु उत्साहित समर्थकों की भीड़ के सामने तमाम एहतियात धरे रह गए. मानो नेताओं को सुनने के लिए लोग कोरोना को भूल गए और कंधे से कंधा मिला लिया.

हालांकि निर्वाचन आयोग ने इस मामले में कार्रवाई भी की किंतु इसके बावजूद चुनावी जनसभाओं में हालात जस के तस हैं. सभास्थल की कुर्सियों की दूरी मीटर से घटकर सेंटीमीटर पर आ गई है तो मास्क यदि है भी तो वह नाक से उतरकर ठुड्डी पर या फिर जेब में आ गया है. रैली के व्यवस्थापकों की बार-बार की अपील का भी उत्साहित समर्थकों पर कोई असर नहीं पड़ता है. वे इससे अनजान बने हैं कि उनकी यह अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है. 71 सीटों पर 28 अक्टूबर को होने वाले प्रथम चरण के चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है. पार्टियों के स्टार प्रचारक रोजाना रैलियां कर रहे हैं.

कहीं कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन तो कहीं अनदेखी

शुक्रवार को राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती की रैलियां हुईं. सासाराम में प्रधानमंत्री मोदी ने भोजपुरी भाषा में अपने भाषण की शुरुआत करते हुए सबसे पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान व रघुवंश प्रसाद सिंह को श्रद्धांजलि दी तथा कहा कि बिहार के लोग कोरोना का मुकाबला करते हुए लोकतंत्र का महापर्व मना रहे हैं.” प्रधानमंत्री ने कहा, "बिहार ने ठान लिया है कि जिसका इतिहास बिहार को बीमार बनाने का रहा है, उसे आसपास फटकने नहीं देंगे. कृषि बिल को लेकर ये लोग भ्रम फैला रहे हैं, इनके लिए देश हित नहीं दलालों का हित जरूरी है.” गया में पीएम मोदी ने मगही भाषा में अपने भाषण की शुरुआत की. उन्होंने भी सबसे पहले कोरोना के बीच पहले चुनाव की चर्चा करते हुए लोगों से खुद को सुरक्षित रखते हुए लोकतंत्र को मजबूत करने की अपील की. मोदी ने लालू-राबड़ी शासन की याद दिलाते हुए कहा, "90 के दशक में लोग रात में घर नहीं जाते थे. यात्रा करते समय हमेशा अपहरण की आशंका बनी रहती थी. लेकिन अब लालटेन की जरूरत खत्म हो गई है, हरेक घर में उजाला आ गया है.” पीएम मोदी की इन तीन सभाओं में भागलपुर व गया में तो कोरोना प्रोटोकॉल का अनुपालन दिखा, किंतु सासाराम में उत्साही भीड़ कोरोना से बेखौफ रही.

इधर, राहुल गांधी ने नवादा के हिसुआ और भागलपुर के कहलगांव में सभाएं की. उन्होंने पीएम मोदी पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि चीन जब हमारी सीमा में घुस आया तो मोदी ने झूठ बोलकर वीरों का अपमान किया कि हमारी सीमा में कोई नहीं घुसा है. वे आज कहते हैं कि मैं उनके आगे सिर झुकाता हूं.” राहुल गांधी ने कहा, "सिर तो वे आपके सामने झुकाते हैं लेकिन काम किसी और के आएंगे. नोटबंदी का फायदा किसे हुआ, क्या अंबानी-अडाणी बैंक के सामने खड़े दिखे. उन्होंने पूछा, जब बिहार के जवान शहीद हुए तब पीएम ने क्या किया. पिछली बार मोदी जी ने कहा था, दो करोड़ लोगों को रोजगार देंगे. क्या किसी को रोजगार मिला.” इन दोनों रैलियों में नेताओं ने तो विरोधियों पर जमकर भड़ास निकाली, किंतु अफसोस यहां भी समर्थक कोरोना से बेखौफ रहे. मास्क व सोशल डिस्टेंशिंग से लोगों का कोई लेना-देना नहीं रहा. मंच पर मौजूद महागठबंधन के नेता भी कोरोना प्रोटोकॉल के अनुपालन का आग्रह करते नहीं देखे गए.

कैमूर जिले के भभुआ में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) व उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के गठबंधन की जनसभा हुई. मायावती ने कहा, "आज भी बिहार पिछड़ा हुआ है. इतने दिनों के शासनकाल में नीतीश सरकार राज्य एक भी कल-कारखाना नहीं लगा पाई. लॉकडाउन के दौरान जो भी लोग लौटे, वे रोजगार के अभाव में फिर पलायन कर गए. दलित, महादलित व अल्पसंख्यक के नाम पर लोगों को बांट तो दिया गया किंतु उनकी दुर्दशा आज भी जस की तस है.” इस चुनावी रैली में भी उत्साह से लबरेज श्रोताओं ने कोरोना की खूब अनदेखी की.

काफी हद तक बदल गया चुनाव प्रचार का ट्रेंड

निर्वाचन आयोग के डंडे के डर के कारण जनसंपर्क का तरीका काफी हद तक बदल गया है. प्रत्याशी भरसक कोशिश कर रहे कि आयोग की कार्रवाई का शिकार न बनें. हालांकि कई जगहों पर नामांकन के दौरान आयोग के निर्देशों की धज्जियां उड़ती देखी गई. आचार संहिता व कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला भी खूब दर्ज हुआ. गांव-घरों में प्रत्याशियों की गाड़ियों का काफिला नहीं प्रवेश कर रहा. नेताओं की गाड़ी गांव से थोड़ी दूर पर खड़ी हो रही है, किंतु घर-घर घूमने के दौरान सोशल डिस्टेंशिंग का ख्याल नहीं रखा जाता है. पटना के बाढ़ निवासी रामाकिशोर सिंह कहते हैं, "यह पता थोड़े ही रहता है कि फलां प्रत्याशी फलां टाइम में आ रहा है. वे अचानक ही अपने कार्यकर्ताओं के साथ दरवाजे पर आ धमकते हैं. अब घर में तो हर समय कोई मास्क लगाए रहता नहीं है.

यह अव्यावहारिक बात है जिस पर कड़ाई से अमल मुश्किल है.”

वहीं पंडारक के अवध सिंह कहते हैं, "जब इतना ही डर था, कोरोना संक्रमण के फैलने की संभावना थी तो चुनाव की क्या जरूरत थी. राष्ट्रपति शासन भी तो लगाया जा सकता था. कम से कम स्थिति तो सुधर जाती.” सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार तेजी से चल रहा है, किंतु यही काफी नहीं है. वोटरों की भी अपेक्षा रहती है कि नेताजी दरवाजे पर आएं इसलिए उम्मीदवारों को तो जनसंपर्क करना ही है. किसी न किसी जगह भोज-भात का आयोजन होता ही है. वहां भी लोग मास्क पहनने व सोशल डिस्टेंशिंग जैसे शब्दों से दूर ही रहते हैं. पटना के पालीगंज के अजय कुमार कहते हैं, "हम बिहारियों की इम्युनिटी पॉवर काफी स्ट्रॉन्ग है, इसलिए तो यहां रिकवरी रेट काफी है. बच-बचाकर ही चुनाव प्रचार कर रहे हैं, जब कुछ होगा तो देखा जाएगा.”

भारी पड़ सकती है कोरोना की अनदेखी

चुनावी सभा हो या जनसंपर्क, ऐसी अनदेखी तो भारी ही पड़ेगी. लगातार चुनाव प्रचार कर रहे कई नेता भी तेजी से कोरोना संक्रमित हो रहे हैं. भाजपा के स्टार प्रचारक राजीव प्रताप रूडी और शाहनवाज हुसैन व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय भी कोरोना संक्रमित हो गए हैं. बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी कोरोना संक्रमित होकर पटना एम्स अस्पताल में भर्ती हैं. कई जगहों के प्रत्याशी भी कोविड की चपेट में आ गए हैं. हालांकि चुनाव आयोग ने भी कोरोना आयोग की गाइडलाइन पर सख्ती दिखाई है. राजनीतिक दलों से कहा गया है कि किसी कीमत पर भीड़ में अनुशासन को बनाए रखा जाए. आयोग ने पार्टियों को जनसभाओं के लिए सशर्त अनुमति दी थी जिसके अनुसार छह फीट की दूरी तथा मास्क व सैनिटाइजर की उपलब्धता जरूरी थी.

लेकिन इन आदेशों पर अमल नहीं किया जा रहा है. केंद्र सरकार की वैज्ञानिकों की नेशनल सुपर मॉडल कमेटी ने भी चेतावनी दी है कि बिहार में चुनाव के कारण असामान्य रुप से कोरोना के मामलों में वृद्धि हो सकती है. और संक्रमण अगर बढ़ेगा तो फरवरी तक कोरोना की दूसरी लहर का सामना करना पड़ सकता है. अतएव हर स्तर पर एहतियात बरतना जरूरी है. वहीं प्रदूषण के कारण भी कोरोना के बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई है. इसे देखते हुए आयोग भी काफी सख्त है. चुनाव में प्रचार व जनसभाओं के दौरान कोरोना गाइडलाइन का अनुपालन नहीं करने के आरोप में अबतक 25 एफआइआर दर्ज की जा चुकी है तथा कई अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करने की अनुशंसा की गई है. इन प्राथमिकियों का आधार सोशल मीडिया पर दलों या प्रत्याशियों द्वारा किए गए पोस्ट व समाचार पत्रों में प्रकाशित तस्वीरों को बनाया जा रहा है और इसमें उन्हें नामजद किया जा रहा है जिन्होंने सभा की अनुमति ली है.(DW.COM)

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