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तोड़-जोड़ का कर नाटक
01-Dec-2020 6:23 PM 59
तोड़-जोड़ का कर नाटक

-प्रकाश दुबे

सोनिया गांधी ने पहला चुनाव कर्नाटक के बेल्लारी से जीता था। बेल्लारी का नाम बलारी हो चुका है। मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने लोहे से सोना बनाने वाले रेड्डी बंधुओं के कारण चर्चित बलारी जिले को तोड़ कर दो भागों में बांट दिया। रेड्डी बंधुओं की धौंस के कारण मुख्यमंत्री को कई बार झुकना पड़ा था। लोहे को सोने में बदलने वाले एक दूसरे कीमियाकार आनंद सिंह ने काम आसान किया। दलबदल किया। मंत्री बने। खनन घोटाले में सुर्खियों में रहे आनंद सिंह हास्पेट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। नए जिले का नाम विजयनगर होगा और जिला मुख्यालय हास्पेट। विजयनगर के ऐतिहासिक गौरव से पार्टी का लाभ होगा और रेड्डी भाइयों को ठिकाने लगाने से मुख्यमंत्री का। गुजरात में प्रधानमंत्री की जाति को पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया। मुख्यमंत्री उसी तरह स्वजातीय लिंगायतों को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल कराना चाहते हैं। शुक्रवार को मंत्रिमंडल की बैठक में कुछ मंत्रियों ने ही विरोध कर इरादे पर पानी फेर दिया।

बेटी बचाओ के युग में

बिहार के लोगों को इतिहास में नाम दर्ज कराने का, लगता है, वरदान प्राप्त है। नई सरकार बनने के बाद विधानसभा में बहस का स्तर बच्चे पैदा करने की पूछताछ तक पहुंच गया। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी ने मुख्यमंत्री से सवाल किया-बेटी पैदा होने के डर से आपने दूसरी संतान पैदा नहीं की? मुख्यमंत्री को ठिठोली भारी पड़ी। कहा था-बेटे की चाहत में लालू प्रसाद लड़कियों के बाद लड़कियां पैदा करते रहे। तमतमाए तेजस्वी ने कहा-हम दो भाइयों के बाद बहन का जन्म हुआ। इस मामले में वैसे तेजस्वी कुछ कर भी नहीं सकते थे। योजना और कार्यक्रम तो मां-बाप बनाते हैं। प्रचार के दौरान तेजस्वी पर हमले करते हुए कई नेताओं ने लालू प्रसाद के कार्यकाल का मखौल उड़ाकर कहा-विकास के नाम पर लालू जी बच्चे पैदा करते रहे। नीतीश कुमार जैसे संयमी तू तड़ाक पर उतरे। इसका कारण था। तेजस्वी ने फब्ती कसी थी-कहते हो, पिछले बार तुम्हारे चेहरे के भरोसे हम लोग चुनकर आए थे। अपने चेहरे के बावजूद आप तीसरे क्रम पर फिसल गए और हमारी पार्टी अव्वल नंबर है। इसे कहते हैं दलदलद का न्याय।

अमानत में अचानक सेंध 

महामारी के दौरान उत्तर प्रदेश के उन्नाव की पूर्व सांसद अनु टंडन ने कांग्रेस पार्टी से नाता तोड़ लिया।  अनु टंडन के पति रिलायंस समूह में काम करते थे। बेटे काम करते हैं। चर्चा है कि अनु को स्वरोजगार के लिए मुकेश अम्बानी ने आठ हजार करोड़ रुपए दिए थे। ताज़ा झटका रायबरेली की विधायक अदिति सिंह ने दिया। उत्तर प्रदेश सरकार के आर्थिक अपराध विभाग को लिखा कि कमला नेहरू एजुकेशन सोसायटी के घोटालों की जांच करो। रायबरेली की लोकसभा सदस्य सोनिया गांधी हैं।। अदिति के पिता अखिलेश सिंह नेहरू-गांधी परिवार के कृपापात्र रहे। पांच बार विधायक रहे। अदिति ने पिछले बरस ही पंजाब के कांग्रेस विधायक अंगद सिंह से विवाह किया। सोनिया गांधी किसी नतीजे पर पहुंचतीं, उससे पहले परिवार और पार्टी के आर्थिक व्यवहार संभालने वाले आपदा प्रबंधक अहमद पटेल का निधन हो गया। नुकसान एक पार्टी, परिवार और व्यक्ति का है। आयु, आक्रमण और तौर तरीकों में कोई समानता नहीं। सिवा इसके, कि अनु टंडन और अदिति दोनों ने 15 दिन पहले एक ही दिन जन्मदिन मनाया। अ नाम के नेताओं की बगावत का अमित रहस्य आसानी से समझ में नहीं आएगा। उ प्र के मुख्यमंत्री योगी है। नाम भी आदित्य है। उनकी योग साधना के बाद ही सच उजागर हो सकता है।

एक पिता एकस के हम बारिक

ईश्वर से मेल कराने का दावा सभी धर्म और पंथ प्रचारक करते हैं। इंसान की बराबरी और भाईचारे की बात करते करते आपस में सिर फुटव्वल करने से बाज नहीं आते। ऐसे माहौल में बीवी जागीर कौर तीसरी बार शिरोमणि गुरुद्धारा प्रबंधक कमेटी की अध्यक्ष चुनी गईं। सिख पंथ की बुनियाद समता पर आधारित है। दुनिया का यह एकमात्र पंथ है जिसमें नाम के आधार पर विषमता नहीं फैलती। जागीर के साथ सिंह जुड़ा तो पुरुष और कौर जुड़ा तो महिला। गुरुग्रंथ साहिब में कहा गया है-एक पिता एकस के हम बारिक (संतान)। बीवी जागीर कौर का पंथ और अकाली राजनीति का लम्बा अनुभव है। दुख-सुख झेले। पंजाब में मंत्री रहीं। बेटी की हत्या के आरोप में जेल में भी रहीं। 2019 में बरी होते ही बीवी जागीर पूरे साल गुरु नानक देव के 550 वें जयंती वर्ष-प्रकाश पर्व आयोजन में जुटी रहीं शिखर पद पर बीवी जागीर कौर के तीसरी बार पहुंचने से समता का नया कीर्तिमान बना। शिरोमणि गुरुद्धारा प्रबंधक समिति देश के अनेक हिस्सों में बने गुरुद्धारों की देखभाल और सेवा पर निगरानी रखती है।

(लेखक दैनिक भास्कर नागपुर के समूह संपादक हैं)

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