सामान्य ज्ञान

खाने में भी स्वादिष्ट हैं फूल
02-Dec-2020 12:39 PM 65
खाने में भी स्वादिष्ट हैं फूल

दुनिया में तरह-तरह के फूल मिलते हैं। खूशबूदार फूलों का इस्तेमाल इत्र, एसेंस  वगैरह के लिए होता है। कई फूलों को खाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे ही कुछ फूल हैं-
लैवेंडर- जामुनी रंग के लैवेंडर की खुशबू कमाल की होती है। जुलाई के महीने में इटली और फ्रांस के कई इलाकों में लैवेंडर की खेती होती है।  जामुनी रंग के फूलों से भरे खेतों का नजारा अद्भुत होता है। कई लोग इन्हें चाय में मिला कर पीना पसंद करते हैं।
जलकुंभी- लाल और पीले रंग के इन फूलों को बहुत चाव से खाया जाता है। यूरोप में अक्सर पांच सितारा रेस्त्रां खाने को इन फूलों से सजाना पसंद करते है। इनका स्वाद कुछ कुछ मूली जैसा होता है और इन्हें चीज से भर कर परोसा जाता है।
कुकरौंधा- जो लोग खरगोश पालते हैं, वे इस फूल से वाकिफ हैं। इसका स्वाद कड़वा होता है लेकिन खरगोश इसे खाना पसंद करते हैं। बढिय़ा शेफ वो है जो इस कड़वाहट का भी इतनी चतुराई से इस्तेमाल करे कि खाने वाले अंगुलियां चाटते रह जाएं। वाइन, जेली और कुकीज में इसे मिलाया जाता है।
पैंजी- यह फूल दुनिया के कई देशों और कई रंगों में मिलता है पर इसके बीच का हिस्सा हमेशा काला ही होता है। इसीलिए इसे केक और कुकीज में डाला जाता है। साधारण से दिखने वाले पीले चीजकेक में इस फूल के कारण रंग आ जाते हैं।
गेंदा- अक्सर मंदिरों में दिखने वाला गेंदे का फूल खाया भी जा सकता है। गेंदे की कई किस्में होती हैं। इसका इस्तेमाल तरह तरह की क्रीम और लोशन में किया जाता है। साथ ही बेकरी के उत्पादों में भी गेंदे का फूल काम आता है।  गेंदे के रस से भरा मफिन का स्वाद कमाल का होता है। 
गुलनार- इन फूलों का इस्तेमाल ज्यादातर पूजा में किया जाता है। लेकिन असल में इनसे स्वादिष्ट जेली और शरबत भी बनते हैं। मक्खन में मिला कर भी इसका आनंद लिया जा सकता है। स्वाद कुछ-कुछ लौंग से मेल खाता है।
बबूने- इस फूल को पानी में उबाल कर पीने से पेट दर्द से राहत मिलती है। स्वाद हल्का सा कड़वा होता है लेकिन ग्रीन टी के शौकीनों में यह काफी लोकप्रिय है। माना जाता है कि इसकी सुगंध सिरदर्द से भी निजात दिलाती है।
ग्लैडीओलस- लंबी डंडी वाले ये फूल अक्सर गुलदस्तों में दिखाई देते हैं। कम ही लोग जानते हैं कि इन्हें खाया भी जा सकता है, वह भी यूं ही सलाद में मिला कर।

आत्मनिर्णय सिद्धांत 
आत्मनिर्णय का सिद्धांत प्रथम विश्व युद्ध के बाद क्षेत्रीय समस्याओं को सुलझाने के लिए तत्कालीन राष्टï्रपति विल्सन ने अपनाया और तभी से यह प्रचलन में आ गया। इस सिद्धांत  के द्वारा प्रत्येक राष्टï्र को स्वयं यह निर्णय लेने का अधिकार है कि वे स्वतंत्र राष्टï्र के रुप में रहे और अपने लिए उपयुक्त शासन प्रणाली का चुनाव करे। आत्मनिर्णय के सिद्धांत का प्रयोग कभी-कभी किसी राष्टï्र के विशेष क्षेत्र या समुदायों के किसी राष्टï्र विशेष में मिलने अथवा एक स्वाधीन राष्टï्र के रुप में रहने आदि के प्रश्न पर किया जाता है। इस स्थिति में जनमत संग्रह कराया जाता है। 
 

अन्य पोस्ट

Comments