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सिविल सर्विसेज पास करने वाले सभी आईएएस नहीं होते
10-Jan-2021 8:36 PM 45
सिविल सर्विसेज पास करने वाले सभी आईएएस नहीं होते

-नवनीत मिश्रा
प्रिय मीडिया के साथियों,  
सिविल सर्विसेज का रिजल्ट आने पर एक सावधानी जरूर बरतें। हर सफल उम्मीदवार को सीधे आईएएस मत घोषित करिए। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की पुत्री के आईएएस होने की खबर वायरल है। हिंदी छोड़िए, अंग्रेजी मीडिया ने भी अंजलि के आईएएस होने की खबरें जारी कर दीं। जबकि यह सरासर गलत है। सिविल सर्विसेज में सफल हुआ हर व्यक्ति आईएएस नहीं हो जाता। अंजलि बिरला का नाम सिविल सर्विसेज परीक्षा 2019 की मंगलवार को घोषित हुई रिजर्व लिस्ट में आया है। रिजर्व लिस्ट तब बनती है, जब पहली लिस्ट से वैंकेसी पूरी नहीं होती। इस लिस्ट में मेरिट में आने से छूटे अभ्यर्थियों को मौका मिलता है। 

2019 की जिस सिविल सर्विसेज परीक्षा में अंजलि सफल हुईं हैं, उसका परिणाम पिछले साल 4 अगस्त में आया था। तब कुल 829 सफल उम्मीदवारों की पहली सूची जारी हुई थी। अब वैंकेसी के हिसाब से संघ लोक सेवा आयोग ने 89 और सफल अभ्यर्थियों की सूची जारी की है, जिसमें अंजलि 67 वें नंबर पर हैं। अंजलि की रैंक को देखते हुए मुझे लगता है कि उन्हें आईएएस, आईपीएस और आईआरएस भी नहीं बल्कि ग्रुप बी की केंद्रीय सेवाओं में ही मौका मिलने की संभावना है। यहां तक कि पहली लिस्ट के 829 में से आधे से भी ज्यादा अभ्यर्थी आईएएएस, आईपीएस छोड़िए, आईआरएस भी नहीं बन पाए होंगे। ऐसे में दूसरी लिस्ट वाले आईएएस कहां से बन पाएंगे? लेकिन, अंग्रेजी लेकर हिंदी मीडिया ने अंजलि को तत्काल प्रभाव से आईएएस घोषित कर दिया। नतीजा, सब आईएएस होने की बधाई देने लगे। यह मामला अंजलि का नहीं है, हर साल मीडिया इसी तरह भेड़चाल का शिकार होती है।

दोस्तों, अंजलि को क्या काडर मिलेगा, क्या नहीं, यह उनकी मेरिट और कई मानकों के हिसाब से तय होगा। उन्हें आईएएस काडर ही मिलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। हर साल वैकेंसी के हिसाब से सात, आठ, नौ सौ लोग सिविल सर्विसेज की परीक्षा में सफल होते हैं। लेकिन, सभी आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, आईआरएस ही नहीं बन जाते। सिविल सर्विसेज परीक्षा के माध्यम से इन चार प्रमुख काडर के अतिरिक्त ग्रुप ए और ग्रुप बी की दो दर्जन सेवाओं के लिए भी चयन होता है।

कहने का मतलब है कि CSE में सफलता अलग बात है और IAS, IPS, IFS, IRS... आदि बनना अलग बात है। प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार कुल मिलाकर तीन चरणों में संघ लोक सेवा आयोग की ओर से होने वाली सिविल सर्विसेज परीक्षा में हर साल वैकेंसी के हिसाब से अभ्यर्थी सफल होते हैं। अभ्यर्थियों की रैंक और  उनके द्वारा Detailed Application Form (DAF) में बताई गई प्राथमिकता सहित कई मानकों के आधार पर काडर का आवंटन होता है। मेरिट के आधार पर कोई भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएएस) में जाता है तो कोई भारतीय विदेश सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय वन सेवा, भारतीय राजस्व सेवा, भारतीय रेल सेवा आदि में जाता है। 

और हां। सिविल सर्विसेज में सफलता अपने आप में बड़ी बात है। इस प्रतिष्ठित परीक्षा से अलग-अलग सेवाओं में लोग चुने जाते हैं। रैंक महज कुछ अंकों का खेल होता है बस। कोई आईएएस बन जाता है तो कोई कुछ और। लेकिन कुछ और बनने वाला आईएएस से कतई कम नहीं होता। लेकिन बिना आईएएस हुए किसी को आईएएस लिखना, क्या गलत नहीं है?

सिविल सर्विसेज को आईएएस का पर्याय मान लेना भी गलत है। आईएएस होना ही सर्वोत्कृष्ट होने की गारंटी नहीं है। कुछ अंकों से चूककर आईपीएस या आईआरएस बनने वाला भी बराबर योग्यता का होता है। ऐसे में मुझे लगता है कि सिविल सर्विसेज को आईएएस होने के नजरिए से देखना बंद करना चाहिए। सिविल सर्विसेज की सभी सेवाओं का बराबर सम्मान करना चाहिए।
  
अनुरोध है कि अगले साल जब सिविल सर्विसेज का रिजल्ट आएगा तो फिर एडवांस में किसी को IAS- IPS  घोषित करने की जगह सिर्फ इतनी सूचना देंगे अमुक ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विसेज परीक्षा में सफलता हासिल की... रैंक के हिसाब से फला काडर मिलने की उम्मीद है.... आदि... आदि। न कि सीधे आप काडर भी रिजल्ट के साथ घोषित कर देंगे। काडर घोषित करने का काम संघ लोक सेवा आयोग और कार्मिक मंत्रालय को करने दीजिए।

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