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गिनीज बुक
13-Jan-2021 12:58 PM 29
गिनीज बुक

गिनीज बुक आज दुनिया भर में अपने अनोखे रिकाड्र्स के कारण मशहूर है। इसमें स्थान पाने के लिए लोग क्या - क्या नहीं करते हैं।    यह प्रतिवर्ष प्रकाशित होने वाली एक सन्दर्भ पुस्तक है जिसमें विश्व कीर्तिमानों (रिकॉड्र्स) का संकलन होता है। सन् 2000 तक इसे  गिनीज़ बुक ऑफ रिकॉड्र्स (अमेरिका में गिनीज़ बुक ऑफ़ वल्र्ड रिकॉड्र्स) के नाम से जाना जाता था। यह पुस्तक  सर्वाधिक बिकने वाली कॉपीराइट पुस्तक  के रूप में स्वयं एक रिकार्डधारी पुस्तक है। यह पुस्तक अमेरिका के  सार्वजनिक पुस्तकालयों से सर्वाधिक चोरी जाने वाली पुस्तक  भी है।
1951 की बात है। इंग्लैंड के एक रईस थे सर ह्यूग कैंपबेल बीवर। वह गिनीज ब्रेवरीज़ के डायरेक्टर थे। एक दिन वह अपने दोस्तों के साथ चिडिय़ों का शिकार करने के लिए निकले। अभी वे अपने शिकार की प्लानिंग कर ही रहे थे कि चिडिय़ों का एक झुंड बहुत तेजी से उनसे सिर के ऊपर से निकल गया। बीवर और उनके दोस्त हैरान रह गए कि इतनी तेज उडऩेवाली ये कौन-सी चिडिय़ा है? तीनों में इस बात पर बहस छिड़ गई कि सबसे तेज उडऩे वाली चिडिय़ा कौन-सी है?
काफी कोशिश के बाद भी इस बारे में कोई फैसला न हो सका। बीवर ने घर आकर यह पता लगाने के लिए कि यूरोप का सबसे तेज उडऩे वाला पंछी कौन-सा है, तमाम किताबें उलटी पलटीं। फिर भी उन्हें अपनी जिज्ञासा का जवाब नहीं मिला। बीवर थमे नहीं। वह लगातार अपने काम में लगे रहे। 1954 में एक किताब में उन्हें अपने सवाल का जवाब मिल गया लेकिन यह कोई ऑथेंटिक जवाब नहीं था। इस पूरी घटना से बीवर के मन में यह बात आई कि कई लोगों के मन में इस तरह के सवाल आते होंगे और उनका जवाब न मिलने पर इन्हें कितनी निराशा होती होगी! बीवर ने यह बात गिनेस कंपनी के एम्प्लॉयी क्रिस्टोफर के साथ शेयर की।
क्रिस्टोफर ने उन्हें नोरिस और रॉस मॅक्विटर नाम के दो युवकों से मिलाया। ये दोनों लंदन में एक फैक्ट फाइंडिंग एजेंसी चलाते थे। तीनों की कोशिशों के बाद अगस्त 1954 में गिनीज बुक ने शक्ल अख्तियार की, जो 1955 में पब्लिश हुई। लोगों को यह किताब इतनी पसंद आई कि मार्केट में इसकी खूब डिमांड हुई, जो आज तक बरकरार है। इसमें नाम दर्ज करवाने के लिए दुनिया भर के लोग उत्सुक रहते हैं। किसी भी क्षेत्र में रिकॉर्ड बनाने वालों का नाम इसमें दर्ज किया जाता है और वह ऑथेंटिक होता है।
गिनीज बुक ऑफ वल्ड रिकॉड्र्स दुनिया भर में मशहूर किताब है और यह नाम अब लोगों के लिए अनजाना नहीं है। अलग-अलग क्षेत्र में बनाए गए ऐसे कीर्तिमान और कारनामे इसमें दर्ज हैं, जो दूसरों को प्रेरणा देते हैं। हर साल कुछ नए रिकॉड्र्स इसमें दर्ज हो जाते हैं, जो इस किताब को ज्यादा उपयोगी और सार्थक बनाते हैं। फिलहाल यह करीब 30 भाषाओं में प्रकाशित होती है। 
 

व्यय प्रबंधन आयोग

व्यय प्रबंधन आयोग का गठन अगस्त 2014 में बिमल जालान की अध्यक्षता में किया गया था। बिमल जालान भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर रह चुके हैं।  व्यय प्रबंधन आयोग  में  पूर्व वित्त सचिव सुमित बोस, भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गर्वनर सुबीर- गोकरन सदस्य बनाए गए हैं।  यह आयोग सब्सिडी सुधार के लिए मार्ग निर्देशन, यूरिया नीति निर्धारण सहित व्यय प्रबंधन  के अन्य मुद्दों पर अपनी सिफारिशें देता है। 
 

 

 

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