सामान्य ज्ञान

मेटाबॉलिज्म
19-Feb-2021 12:10 PM 33
मेटाबॉलिज्म

मेटाबॉलिज्म शरीर की वह प्रक्रिया है, जो भोजन को ऊर्जा में बदलती है। इस प्रक्रिया के सुस्त पडऩे से शरीर की इंसुलिन ग्रहण करने की क्षमता में कमी आ जाती है, जिससे कम उम्र में ही मोटापा, थकावट, हाई बीपी और डायबिटीज होने की आशंका बढ़ जाती है। खासतौर पर संतुलित भोजन व नियमित व्यायाम के बावजूद यदि वजन कम नहीं हो रहा है तो इसमें मेटाबॉलिज्म की खास भूमिका होती है।  
मेटाबॉलिज्म अगर स्वस्थ है तो कोई भी व्यक्ति वजन को काबू में रख सकता है। दरअसल जब शरीर का बी़.एम.आर. यानी बेसल मेटाबॉलिक रेट काफी कम हो जाता है तो शरीर में चर्बी जमा होने लगती है। जिस तरह काम न करने से मशीन को जंग लग जाता है और वर्कलोड बढऩे से उसके कल-पुर्जे जवाब देने लगते हैं, ठीक उसी तरह से शरीर की मशीनरी भी काम करती है। काफी देर भूखे रहने के बाद जब हम कुछ खाते हैं तो भूख की वजह से जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं। हमारा शरीर उस सारे खाने को ऊर्जा में नहीं बदल पाता। नतीजतन चर्बी या वसा शरीर में जमा होने लगती है। कसरत व डायटिंग के तमाम प्रयास तभी फायदा देते हैं, जब शरीर का मेटाबॉलिक रेट सही होता है। भोजन का ऊर्जा में बदलना और फिर उस ऊर्जा की सही खपत होना, इस चक्र का चलते रहना बेहद जरूरी है। कसरत मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने का कारगर उपाय है। 
पानी  हमारे मेटाबॉलिज्म के लिए बूस्टर का काम करता है।  ब्लैक कॉफी और ग्रीन टी   मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने में मददगार हो सकती है।   मसालेदार चीजें भी मेटाबॉलिज्म को बढ़ाती हैं, इसलिए थोड़ा तीखा खाना खाने की आदत डालें। मिर्च में मौजूद कैप्सीकिन तत्व मिर्च को तीखापन देता है। वही मेटाबॉलिक रेट को भी बढ़ाता है। पर जिन्हें अल्सर की समस्या है, उन्हें अवश्य तीखे भोजन से परहेज करना चाहिए। ओमेगा 3- यह फैटी एसिड सिर्फ मछली के तेल में पाया जाता है। यह मेटाबॉलिज्म को आश्चर्यजनक ढंग से बढ़ा देता है, इसलिए सेहत व व्यायाम विशेषज्ञ भी इसके सेवन की सलाह देते हैं।  
 

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