सामान्य ज्ञान

क्या है बेंवर खेती
27-Feb-2021 2:36 PM 29
क्या है बेंवर खेती

बेंवर खेती पूरी तरह से जैविक, पारिस्थितिक, प्रकृति के अनुकुल और मिश्रित खेती है।  
इसकी खासियत यह है कि इस खेती में एक साथ 16 प्रकार के बीजों का इस्तेमाल किया जाता है, उनमें कुछ बीज अधिक पानी में अच्छी फसल देता है, तो कुछ बीज कम पानी होने या सूखा पडऩे पर भी अच्छा उत्पादन करते हैं। इससे खेत में हमेशा कोई-न-कोई फसल लहलहाती रहती है। फिलहाल इस तरह की खेती पर रोक लगी हुई है। सन् 1864 में अंग्रेजों के वन कानून ने इस पर रोक लगा दी है।  
बेंवर खेती के कई फायदे हैं। बिना हल चलाए खेती करने से पहाड़ अथवा ढ़लान की मिट्टी के कटाव को रोका जाता है। इसके खेत तैयार करने के लिए न तो पेड़ों को काटा जाता है और न ही जमीन जोती जाती है। इसकी सिंचाई और इसमें खाद डालने के लिए किसानों को सोचना भी नहीं पड़ता है। यह पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। इसलिए इस तरह की खेती पहाड़ी इलाकों में ज्यादा सुरक्षित है, जहां बारिश समय पर होती है। बेंवर खेती की मिश्रित प्रणाली के कारण फसल में कीड़ा लगने का खतरा भी नहीं रहता है। इसमें बाढ़ और आकाल झेलने की क्षमता भी होती है और यह कम लागत और अधिक उत्पादन की तर्ज पर काम करता है।  
बेंवर खेती के लिए जमीन तैयार करने में भी मशक्कत नहीं करनी पड़ती। मौजूदा खेती की तरह इसमें किसानों को न तो बिजली, पानी के लिए रोना पड़ता है और न ही उर्वरक लेने के लिए मारामारी करनी पड़ती है। इसमें सबसे पहले खेती की जमीन पर छोटे-छोटे पेड़ों और झाडिय़ों को काटकर बिछाया जाता है, फिर झाडिय़ां सूखने के बाद उसमें आग लगा दी जाती है। आग जलने के बाद राख की वहां एक परत बन जाती है, जिसमें बरसात शुरू होने से एक सप्ताह पहले विभिन्न किस्मों के बीज मिलाकर उसे खेत में छिडक़ दिया जाता है। बारिश के बाद उसमें फसल लहलहानी लगती है।   आज भी देश के कई इलाकों में  इस तरह की खेती आदिवासी करते हैं। 
 

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