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अलीगढ़: दलित लड़की की हत्या मामले में 17 साल का लड़का गिरफ़्तार
04-Mar-2021 2:55 PM 33
अलीगढ़: दलित लड़की की हत्या मामले में 17 साल का लड़का गिरफ़्तार

SAMIRATMAJMISHRA

-समीरात्मज मिश्र

"16-17 साल का लड़का अपने खेतों में पानी दे रहा था और मोबाइल पर अश्लील वीडियो देख रहा था. पड़ोस के गाँव की क़रीब 15 साल की लड़की उसके पास पीने का पानी मांगने पहुंची. लड़की को देखकर उसके माइंड में कुछ ऐसा हुआ कि उसने लड़की को पकड़ लिया, ग़लत काम करने की कोशिश की और ऐसा न कर पाने पर दुपट्टे से गला दबा दिया जिससे लड़की की मौत हो गई."

अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुनिराज जी ने रविवार दोपहर हुई एक दलित लड़की की हत्या का तीन दिन के भीतर पर्दाफ़ाश का दावा करते हुए क़त्ल की कहानी कुछ इस तरह बताई.

लेकिन पुलिस की इस कहानी पर परिजनों को भरोसा नहीं हो रहा है. परिजनों का कहना है कि लड़की की लाश जब खेत में मिली थी तो उसके शरीर पर कपड़े नहीं थे, कई जगह ज़ख़्म थे और शरीर पर ज़्यादती के निशान भी थे. लेकिन पुलिस ने रेप की बात से इनकार किया है.

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ ज़िले के अकराबाद क्षेत्र में 15 वर्षीय दलित किशोरी की हत्या के मामले में पुलिस ने बुधवार को अपना पक्ष रखा. पुलिस ने इस मामले में पड़ोस के गाँव धौराई में रहने वाले एक नाबालिग लड़के को गिरफ़्तार किया है. पुलिस के मुताबिक़, अभियुक्त ने अपना अपराध कबूल कर लिया है और अब उसे सज़ा दिलाने की कोशिश की जा रही है.

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अकराबाद क्षेत्र के गाँव किवलास में रविवार शाम को नाबालिग लड़की का शव गेहूँ के एक खेत से मिला था. लड़की ठीक से बोल नहीं पाती थी और क़रीब दस साल से अपनी नानी के यहां ही रह रही थी.

लड़की की नानी ने बीबीसी को बताया, "घटना वाले दिन हमारी बेटी चारा लेने खेत पर गई थी. शाम तक जब वह नहीं आई तो उसकी तलाश की गई. कुछ लोगों ने उसका शव खेत में देखा तो पुलिस को सूचना दी गई. जिन लोगों ने उसे सबसे पहले देखा, उसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था. सबसे पहले उसे देखने वालों ने शरीर पर कपड़े डाले."

रविवार को हुई इस घटना के बाद गाँव वालों ने शव को पोस्‍टमॉर्टम के लिए ले जाने से रोका और पुलिस के साथ गाँव वालों का संघर्ष भी हुआ जिसमें एक इंस्‍पेक्‍टर समेत कई लोगों को चोटें भी आईं. अगले दिन पोस्‍टमॉर्टम के बाद परिजनों ने किशोरी का अंतिम संस्‍कार तो कर दिया लेकिन परिजन अब भी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

अलीगढ़ ज़िला मुख्यालय से क़रीब 35 किमी दूर किवलास गाँव में रविवार को गाँव की ही एक लड़की का शव मिला था. लड़की के परिजनों ने अज्ञात लोगों पर रेप और हत्या के मामले में एफ़आईआर दर्ज कराई थी.

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पुलिस ने पॉक्सो और एससीएसटी एक्ट की धाराओं में भी मामला दर्ज किया. इस मामले में गाँव के ही एक लड़के की निशानदेही पर कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पुलिस को पता चला कि पड़ोस के गाँव धौराई के ही एक लड़के ने कथित तौर पर रेप में नाकाम रहने पर ये अपराध किया.

लड़की का पोस्टमॉर्टम करने के बाद पुलिस ने लड़की के शव को अलीगढ़ के जयगंज में रहने वाले उसके माता-पिता को सौंप दिया जबकि लड़की बचपन से ही अपने ननिहाल में रह रही थी और घटना भी वहीं हुई थी.

बुधवार को किवलास गाँव में मौजूद लड़की की मां ने बीबीसी को बताया, "हमारी लड़की ठीक से बोल नहीं पाती थी. बचपन से ही वह अपनी नानी के ही पास रह रही थी. नानी के साथ ही वह चारा काटने भी जाती थी और हर समय उन्हीं के साथ घर पर ही रहती थी. घटना वाले दिन उसे अकेले ही जाना पड़ा था क्योंकि नानी को बुख़ार आ रहा था. पुलिस वालों ने शहर में ही लड़की का अंतिम संस्कार करा दिया जबकि हम लोग चाहते थे कि उसका शव गाँव लाया जाए."

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अलीगढ़ के जयगंज में रहने वाले लड़की के पिता रिक्शा चलाकर परिवार का पेट भरते हैं जबकि लड़की की माँ भी घरों में छोटा-मोटा काम करती है. परिवार बेहद ग़रीब है. लड़की के ननिहाल में भी दो कमरे का छोटा सा घर है जहाँ कई लोग रहते हैं. थोड़ी ही दूर धौराई गांव में गिरफ़्तार अभियुक्त के घर पर भी सन्नाटा पसरा हुआ है और घर का कोई भी सदस्य इसके सिवाय कुछ बोलने को तैयार नहीं है कि उनके 'निर्दोष बेटे को फँसाया जा रहा है.'

किवलास गांव के ही रहने वाले एक व्यक्ति नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, "लड़की बोल भले नहीं पाती थी लेकिन शरीर से काफ़ी मज़बूत दिखती थी. पुलिस की यह बात समझ से परे है कि उसे वो लड़का इतनी आसानी से मार देगा. दिन के समय यदि लड़की चिल्लाई होती तो गांव में कोई न कोई तो उसकी आवाज़ भी सुनता ही. क्योंकि खेत की दूरी गांव से बहुत ज़्यादा नहीं है और गांव वालों का दिन में उधर आना-जाना लगा रहता है."

अलीगढ़ के पुलिस अधीक्षक मुनिराज ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की की मौत दम घुटने से हुई है और उसके शरीर पर जो निशान मिले हैं, वो मरने के बाद के हैं. उनके मुताबिक, "लड़के ने शव को घसीटकर दूसरे खेत में रख दिया ताकि किसी को संदेह न हो. इसी दौरान लड़के के नाखूनों के निशान लड़की के चेहरे, गले और बांहों पर मिले हैं."

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पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम में रेप की बात सामने नहीं आई है लेकिन लड़की के शरीर के अंदरूनी भागों की फ़ोरेंसिक जांच के लिए सैंपल भेजे गए हैं और उसके रिपोर्ट के बाद ही इस बारे में सब कुछ स्पष्ट हो सकेगा.

वहीं लड़की के परिजनों को सबसे ज़्यादा इस बात पर हैरानी है कि तीन दिन से लगातार इधर-उधर चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं दी जा रही है.

दिल्ली में रहने वाले लड़की के एक रिश्तेदार का कहना था, "जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस सब कुछ बता रही है तो हमें रिपोर्ट क्यों नहीं दी जा रही है. हमें कहा जा रहा है कि रिपोर्ट 15 दिन बाद मिलेगी. पर कोई यह नहीं बता रहा है कि जब रिपोर्ट आ गई है तो 15 दिन बाद क्यों मिलेगी."

धौराई गाँव के जिस युवक पर लड़की को मारने के आरोप लगे हैं, वह अपने परिवार वालों के साथ दूध का व्यवसाय करता है. पुलिस के मुताबिक, किवलास गांव में भी वह दूध बेचने आता था और इसी वजह से लड़की को पहले से भी जानता था. लेकिन लड़की के परिजन इस बात से इनकार कर रहे हैं कि लड़के का उनके घर पर आना-जाना था. यही नहीं, लड़के की उम्र पर भी संदेह जताया जा रहा है.

किवलास गांव में मृत लड़की के घर पर मौजूद गांव की ही एक महिला रेखा कहती हैं, "वह लड़का नाबालिग नहीं है. यदि ठीक से पता लगाया जाए तो वह बीस साल से कम का नहीं होगा क्योंकि हम लोग उसे काफ़ी समय से जानते हैं. उसकी उम्र कम बताए जाने के पीछे साज़िश है, ताकि उसे ज़्यादा सज़ा न होने पाए."

हालांकि किवलास गांव के कुछ लोगों को अभियुक्त लड़के से हमदर्दी भी है. ख़ुद लड़की के एक मामा कहते हैं, "लड़की को मारने की कोई वजह नहीं दिख रही है. रेप की कोशिश यदि उसने की होती तो लड़की विरोध करने में सक्षम थी. अकेले वह लड़का तो उसके साथ कुछ भी नहीं कर सकता है और न ही मार सकता है. इसमें ज़रूर और भी लोग शामिल होंगे."(bbc.com)

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