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बंगाल चुनावी संग्राम- 3 : इस्लामपुर : तृणमूल को जीत का विश्वास, भाजपा को मोदी लहर की आस
14-Mar-2021 12:43 PM (68)
बंगाल चुनावी संग्राम- 3 :  इस्लामपुर : तृणमूल को जीत का विश्वास, भाजपा को मोदी लहर की आस

मतदाताओं से मिलते तृणमूल प्रार्थी अब्दुल करीम चौधरी

-उत्तर दिनाजपुर की प्रमुख सीट पर तृणमूल कांग्रेस ने निवर्तमान विधायक अब्दुल करीम चौधरी को दिया टिकट
   -लोकसभा चुनाव में रायगंज से मिली जीत से भाजपा समर्थक उत्साहित  
- वाममोर्चा-कांग्रेस में असमंजस बरक़रार 

बिकास के शर्मा
इस्लामपुर, 14 मार्च।
अलुवाबाड़ी रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही बाबाई नामक टोटो चालक हमें मिल जाता है। लोहार पट्टी जाने के लिये निर्धारित किराया दस रुपये प्रति सवारी है। कुछ देर रुकने पर उसे चार और लोग मिल जाते हैं और इस प्रकार टोटो आगे बढ़ जाता है। कुल दो किलोमीटर के रास्ते को तय करने में सात-आठ मिनट लगते हैं और हम लोहापट्टी के श्री राम मंदिर के सामने उतर जाते हैं। उतरते वक्त वह कहता है- दादा मोने राखबेन तो, एबार पोरिबोर्तन (भईया, याद रखियेगा अबकी बार परिवर्तन होगा)। विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही इस्लामपुर में यूं तो राजनीतिक पारा बढ़ना शुरू हो गया था किंतु सत्ताशीन तृणमूल कांग्रेस द्वारा प्रार्थी घोषणा के साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। साथ ही भाजपा एवं वाम-कांग्रेस नेताओं को अभी पार्टी आलाकमान द्वारा प्रार्थी दिए जाने का इंतजार है। टीएमसी समर्थक एवं निजी बस अड्डे पर एजेंट के रुप में कार्य करने वाले सपन बैरागी ने कहा कि इस्लामपुर बस टर्मिनस का नवनिर्माण हो अथवा शहर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की स्थापना, सभी काम तृणमूल कांग्रेस के शासन में ही हुए हैं।

इस सीट से निवर्तमान विधायक अब्दुल करीम चौधरी को ही तृणमूल कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है। श्री चौधरी की पकड़ शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में काफी है। श्री चौधरी ने कहा कि इस्लामपुर आज उत्तर दिनाजपुर सबसे चर्चित एवं विकसित शहर है, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विजन का काफी योगदान है। भाजपा के बढ़ते वोट बैंक के बारे में उन्होंने प्रतिक्रिया दी कि लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के समीकरण अलग-अलग होते हैं। इस्लामपुर की जनता तृणमूल कांग्रेस को ही वोट देकर भारी बहुमत से जिताएगी।

तृणमूल की एक चुनावी सभा

लोहार पट्टी की रहने वाली सोनू कुमारी ने बताया कि इस्लामपुर शहर में उनके मोहल्ले सहित कुछ ही इलाके होंगे जिनमें सड़क ख़राब है अन्यथा पूरे नगर में सडकों की हालत बेहतर है। उन्होंने कहा कि क्यों कि लोहारपट्टी एक बाजार मार्किट क्षेत्र है और रोजाना हजारों की तादात में दूर दराज से लोग यहाँ जरुरत का सामना खरीदने एवं बेचने आते हैं तो इसलिए भी इसका रखरखाव शायद नहीं हो पता होगा किंतु नेताओं को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

पहले बिहार में था क्षेत्र
उत्तर दिनाजपुर जिले में पड़ने वाला इस्लामपुर विधानसभा क्षेत्र रायगंज लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत आता है। साल 2016 के चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार इस विधानसभा में कुल एक लाख 90 हजार मतदाता हैं। 1951 के चुनाव में यह इलाका बिहार अंतर्गत आता था किंतु वर्ष 1977 में यह पश्चिम बंगाल विधानसभा के अंतर्गत शामिल हुआ। 1977 में अब्दुल करीम चौधरी ने निर्दलीय चुनाव जीता था। उसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी।

वर्तमान तृणमूल प्रार्थी का शुरू से दबदबा
तृणमूल कांग्रेस ने वयोवृद्ध नेता अब्दुल करीम चौधरी को इस्लामपुर से 2021 के चुनाव में टिकट दिया है। श्री चौधरी के वर्चस्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1977 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद आज तक वे कुल सात बार विधायक चुने गए। वर्ष 1987 और 2006 के चुनावों में उन्हें माकपा के मो फ़ारुक़ ने पराजित किया था। वहीँ साल 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल और कांग्रेस के बीच में गठबंधन प्रत्याशी के रूप में वे जब खड़े हुए तो कांग्रेस के बागी उम्मीदवार एवं वर्तमान तृणमूल के जिलाध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल ने उनके खिलाफ निर्दलीय से पर्चा भरा। वह चुनाव भी श्री चौधरी जीत गए किन्तु 2016 के चुनाव में कांग्रेस प्रार्थी श्री अग्रवाल ने श्री चौधरी को 7718 मतों से हराया था। श्री अग्रवाल ने 2019 में विधायक पद से इस्तीफा दिया और तृणमूल कांग्रेस का झंडा थामा। उन्होंने रायगंज सीट से चुनाव भी लड़ा किंतु हार गए। 2019 में विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल ने पुनः श्री चौधरी को टिकट दिया और उन्होंने भाजपा उम्मीदवार डॉ सौम्यरूप मंडल को साढ़े 21 हजार मतों से पराजित किया। विशेषकर ग्रामीण इलाकों में श्री चौधरी की काफी पकड़ मानी जाती है। 

लोकसभा चुनाव में चली मोदी लहर, भाजपा के हौसले बुलंद
साल 2019 के संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर का असर पूरे उत्तर बंगाल के साथ-साथ रायगंज सीट पर भी हुआ। भाजपा की देबश्री चौधरी ने यहाँ से तृणमूल कांग्रेस प्रार्थी कन्हैया लाल अग्रवाल को 60574 पराजित किया था। भाजपा को कुल 41 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे वहीँ तत्कालीन माकपा सांसद मो सलीम को केवल 14 प्रतिशत लोगों ने ही मत दिया था। सुश्री चौधरी को भाजपा को विस्तार देने के उद्देश्य से सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री भी बनाया गया था। लोकसभा चुनाव में हुई जीत के बाद से ही रायगंज सहित इस्लामपुर में भाजपा ने अपने संगठन को बढ़ाने में सक्रियता दिखाई, जिसका नतीजा 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रार्थी को इस्लामपुर से 56141 मतों के रूप में मिला। इसके बाद से ही भाजपा समर्थकों का हौसला काफी बुलंद है। पार्टी के जिलाध्यक्ष विश्वजीत लाहिड़ी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में राज्य सरकार ने इस्लामपुर में कोई काम नहीं किया है, जिसके फलस्वरूप पिछले चुनाव में हमें 50 हजार से ज्यादा लोगों ने समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा निष्पक्ष चुनाव चाहती है जबकि तृणमूल कांग्रेस इलाके में मतदाताओं को डरा-धमकाकर वोट लेना चाहती है। इस्लामपुर सीट ही नहीं उत्तर दिनाजपुर की सभी सीटों पर भाजपा प्रार्थियों की जीत होगी। भाजपा की ओर से प्रार्थी की घोषणा 14 मार्च को दूसरी सूची में हो सकती है।

वामो-कांग्रेस खेमे में सक्रियता कम
इस्लामपुर सीट से अभी तक वाममोर्चा, कांग्रेस एवं आईएसएफ गठबंधन की ओर से प्रार्थी निर्धारित नहीं होने से इलाके के समर्थकों में मायूसी देखी जा रही है। सूत्रों की मानें तो आईएसएफ प्रमुख एवं फुरफुरा शरीफ अब्बास सिद्दीकी ने इस्लामपुर सीट में मुस्लिमों के संख्याबल को आधार बनाकर उनके दल की ओर से प्रार्थी देने की मांग की है, किंतु उत्तर दिनाजपुर के चाकुलिया सीट से फॉरवर्ड ब्लॉक विधायक अली इमरान रम्जा ने स्पष्ट कह दिया है कि फुरफुरा शरीफ का उत्तर बंगाल में कोई जनाधार नहीं है। गठबंधन में खींचतान को लेकर इस्लामपुर के एक स्थानीय माकपा नेता ने कहा कि जब तक प्रार्थी की घोषणा नहीं होती, तब तक चुनावी प्रचार शुरू करना संभव नहीं है। 2019 के विधानसभा उपचुनाव में माकपा ने शक्तिप्रकाश गुहा नियोगी को टिकट दिया था, उन्हें केवल 5128 मत प्राप्त हुए थे। आंकड़ों का अध्ययन करने पर ज्ञात होता है कि माकपा का वोट प्रतिशत कम होने से भाजपा के वोटों में वृद्धि हुई है।


इस्लामपुर बस टर्मिनस का एरियल व्यू

 

 

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