संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : नाबालिग छात्र का शिक्षिका द्वारा यौन शोषण और खुदकुशी से उपजे सवाल
24-Mar-2021 2:52 PM (190)
‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : नाबालिग छात्र का शिक्षिका द्वारा यौन शोषण और खुदकुशी से उपजे सवाल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक होनहार नाबालिग स्कूली छात्र ने अपनी शिक्षिका द्वारा किए गए देह शोषण से थककर और उसके द्वारा की जा रही ब्लैकमेलिंग से डरकर खुदकुशी कर ली। छात्र से दोगुनी से अधिक उम्र की शिक्षिका अपने इस छात्र के साथ मोबाइल फोन के टेलीग्राम अकाऊंट से अश्लील वीडियो लेन-देन कर रही थी। इस छात्र ने खुदकुशी करते हुए डिजिटल कैमरा शुरू कर रखा था जिसमें फांसी रिकॉर्ड है, और उसने दोस्तों को खुदकुशी के संदेश भी भेजे थे, और आत्महत्या की चिट्ठी भी अपने मोबाइल पर टाईप करके रखी थी। उसने लिखा है कि शिक्षिका ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, और उसका वीडियो बनाकर ब्लैकमेल कर रही है, इसके अलावा वह उसे अनुसूचित जनजाति कानून के तहत जेल भेजने की बात भी कर रही है। खुदकुशी के इस नोट और तरह-तरह के वीडियो के बाद पुलिस ने 30 बरस उम्र की इस शिक्षिका को बच्चों के सेक्स-शोषण के कानून पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया है। 

अभी कल-परसों ही हमने स्कूल-कॉलेज की लड़कियों और महिला खिलाडिय़ों के देह शोषण के बारे में इसी जगह पर लिखा था इसलिए इतनी जल्दी यहां पर जुड़े हुए एक और मुद्दे पर लिखने की जरूरत नहीं पडऩी थी, लेकिन यह घटना ऐसी है, और इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसा कुछ घट भी रहा है कि उन्हें जोडक़र देखना जरूरी है। जो लोग फेसबुक पर दिखने वाले नाच-गाने के कुछ साधारण दिखते हुए वीडियो खिसकाते हुए आगे बढ़ते हैं, दूसरे वीडियो की तरफ जाते हैं, तो दो-चार वीडियो के बाद ही पोर्नो शुरू हो जाता है। और हिन्दुस्तान में, हिन्दी में बनाए गए ऐसे अश्लील, वयस्क, और नग्नता वाले वीडियो में से आधे ऐसे रहते हैं जिनमें कोई महिला शिक्षिका ट्यूशन पढऩे आने वाले किसी छात्र-लडक़े का यौन शोषण करती दिखती है। अब बिलासपुर में गिरफ्तार इस शिक्षिका के बारे में यह तो जांच में ही पता लगेगा कि उसके और खुदकुशी करने वाले छात्र के बीच कौन किसे कैसे वीडियो भेज रहे थे, लेकिन मरने वाले की बात को सच मानें तो इस शिक्षिका ने अपने से आधी उम्र के इस छात्र के साथ खुद के कुछ सेक्स वीडियो बना रखे थे, और उसके आधार पर वह उसे ब्लैकमेल कर रही थी। चूंकि इन दिनों फेसबुक पर ऐसे हजारों हिन्दुस्तानी-पोर्नो तैर रहे हैं इसलिए ये दोनों बातें मिलकर एक साथ लिखने के लिए मजबूर कर रही हैं। 

जो लोग पोर्नोग्राफी को नुकसानरहित मानते हैं, और यह मानते हैं कि इससे लोग अपनी उत्तेजना की जरूरत खुद पूरी कर पाते हैं, उन्हें भी मनोवैज्ञानिकों के इस निष्कर्ष पर गौर करना चाहिए कि अधिक पोर्नो देखने वालों के दिमाग की कोशिकाएं इससे कमजोर होती चलती हैं, मरती जाती हैं। बहुत से लोगों का यह भी मानना है कि जब पोर्नोग्राफी अधिक आसानी से हासिल होती है तो उसमें दिखाई और सुझाई गई कहानियों से प्रेरणा पाकर लोग अपने आसपास जबर्दस्ती पर उतारू हो जाते हैं। अभी हमारा खुद का इस बारे में अधिक सोचना इसलिए नहीं है कि यह मनोवैज्ञानिकों और समाजशास्त्रियों के अध्ययन और विश्लेषण के नतीजों की बात है, और इस मुद्दे का हम अतिसरलीकरण करके खुद कोई नतीजा निकालना नहीं चाहते। अमरीकी सरकार की एक वेबसाईट पर भारत में पोर्नोग्राफी और रेप के बीच संबंध स्थापित करने की कोशिश की गई है, और ऐसे अध्ययन का नतीजा यह निकला है कि पोर्नोग्राफी तक आसान पहुंच से बलात्कार की घटनाओं और महिलाओं के खिलाफ हिंसा में कोई मायने रखने वाला असर पड़ते नहीं दिखता है। लेकिन यह सिर्फ एक अध्ययन के नतीजे की बात है, और हो सकता है कि कुछ दूसरे अध्ययन कुछ और सुझाएं। 

लेकिन एक बात जो हमें लगती है वह यह कि अपने ही देश और अपनी ही भाषा के लोगों के ऐसे पोर्नो जो कि किसी पारिवारिक कहानी में गूंथकर बनाए गए हों, वे देखने वालों को ऐसे संबंध बनाने का हौसला शायद देते होंगे जो बलात्कार या जुर्म न भी हों, लेकिन जो पारिवारिक और सामाजिक खतरे वाले जरूर होते होंगे, जैसा कि बिलासपुर के सेक्स-शोषण और खुदकुशी के इस मामले में दिख रहा है। एक 30 बरस की शिक्षिका 17 बरस के नाबालिग छात्र से ऐसे संबंध बनाए, रखे, उसका वीडियो बनाए, उस पर दबाव डाले, उसे ब्लैकमेल करे, यह कुल मिलाकर ऐसा लग रहा है जैसे फेसबुक पर पोस्ट किसी पोर्नो की हिन्दुस्तानी कहानी हो। यह मामला एक आम देह-शोषण से अलग है, और यह खुदकुशी एक आम आत्महत्या से अलग है। दुनिया के बहुत से देशों से बड़ी उम्र की शिक्षिकाओं, और कमउम्र के उनके छात्रों के बीच ऐसे संबंधों की कहानियां बीच-बीच में आती रहती हैं, और बिना किसी हत्या-आत्महत्या के भी सिर्फ ऐसे संबंध रखने के लिए भी बहुत सी शिक्षिकाएं जेल जाते दिखती हैं। 

इस मुद्दे पर लिखने का मकसद यही है कि स्कूल-कॉलेज जैसे संस्थान भी ऐसी बातों की तरफ आंखें खुली रखें, और परिवार अपने बच्चों का ख्याल रखे। इसके अलावा समाज के लोगों को भी अपने आसपास ऐसा कुछ संदिग्ध होते हुए दिखे, तो उन्हें सावधान रहना चाहिए ताकि ऐसे और हादसे न हों। (क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक)

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