संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : तीर्थयात्रियों से अधिक कोरोना कर रहा है हरिद्वार कुंभ का इंतजार
01-Apr-2021 5:24 PM (116)
‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : तीर्थयात्रियों से अधिक कोरोना कर रहा है हरिद्वार कुंभ का इंतजार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि हरिद्वार में होने जा रहे कुंभ मेले में आने वाली अपार भीड़ की कोरोना-जांच के लिए मेला स्थल पर हर दिन 50 हजार कोरोना जांच की जाए। अदालत ने इसके लिए पार्किंग और घाट के इलाकों में मोबाइल मेडिकल सुविधाओं सहित प्रशिक्षित मेडिकल टीम तैनात करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा दिए गए कोरोना-निर्देशों पर सख्ती से अमल किया जाए। यह आदेश ऐसे वक्त आया है जब आज पहली अप्रैल से हरिद्वार महाकुंभ की औपचारिक शुरूआत हो रही है, और 30 अप्रैल तक यह मेला चलेगा। इसमें दसियों लाख लोग पहुंचने वाले हैं, और राज्य सरकार का कहना है कि कोरोना से अधिक प्रभावित एक दर्जन राज्यों से आने वाले लोगों पर खास नजर रखी जाएगी। सरकार ने यह भी कहा है कि पहुंचने के पिछले 72 घंटों के भीतर ही आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट और फिटनेस प्रमाणपत्र कुंभ मेले की वेबसाईट पर अपलोड करने के बाद उसकी रसीद दिखाने पर ही श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र में प्रवेश दिया जाएगा। जो लोग हरिद्वार जैसे नदी किनारे बसे हुए शहर से वाकिफ हैं वे समझ सकते हैं कि शहर की सरहद पर हर दिन पहुंचने वाले लाखों लोगों के कागजातों की इतनी जांच कैसे हो सकेगी, और कैसे हाईकोर्ट के हुक्म के मुताबिक रोज 50 हजार लोगों की आरटीपीसीआर जांच हो सकेगी। 

अभी चार दिन पहले ही महाराष्ट्र के नांदेड़ में सिक्खों के एक बड़े महत्वपूर्ण माने जाने वाले गुरूद्वारे के बाहर पुलिस ने जब धार्मिक जुलूस निकालने से रोका, तो सैकड़ों सिक्खों की भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। इनमें से दर्जनों लोग तलवारें लेकर पुलिस पर टूट पड़े। इस हमले का वीडियो भी चारों तरफ फैला है। धक्का-मुक्की वाला ऐसा जुलूस, और धार्मिक लोगों का ऐसा हथियारबंद हमला झेलती हुई पुलिस न सिर्फ जख्म पा रही थी, बल्कि कोरोना का खतरा भी पा रही थी। ऐसी ही नौबत उत्तराखंड में आ सकती है जहां लाखों लोगों से हर दिन उनकी कोरोना रिपोर्ट इंटरनेट पर डालने की उम्मीद की जाएगी, और मोबाइल फोन पर उसकी रसीद दिखाने की भी। ऐसी अपार धार्मिक भीड़ से अदालत और सरकार किस किस्म के अनुशासित होने की उम्मीद कर सकती है? और सवाल यह भी उठता है कि जब पिछले एक बरस में महीनों तक इस देश में तमाम ईश्वरों के दरवाजे बंद देखे हैं जिन्हें खोलने के लिए ईश्वरों ने भी अपनी दैवीय ताकत या करिश्मे का कोई इस्तेमाल नहीं किया, तो आज दुनिया के एक सबसे बड़े धार्मिक आयोजन, कुंभ की इस जानलेवा धक्का-मुक्की वाली भीड़ को कोरोना के खतरे से कोई कैसे बचा सकेंगे? अगर लोगों को अपनी धार्मिक भावनाओं को पूरा करते हुए यह याद नहीं पड़ रहा है कि आज हिन्दुस्तान में कोरोना का खतरा कितना गंभीर है, तो उन्हें यह याद दिलाना जरूरी है। पिछले बरस जब कोरोना इस देश में सबसे खतरनाक हाल पैदा कर चुका था, तब हर दिन हिन्दुस्तान में एक लाख से कुछ कम लोग कोरोना पॉजिटिव मिल रहे थे। वह नौबत कई महीनों के कोरोना-संक्रमण के बाद आई थी। लेकिन अभी हाल के कुछ हफ्तों में कोरोना पॉजिटिव तेजी से छलांग लगाकर अब कल एक दिन में 72 हजार पार कर चुकी है और कल के एक दिन में 459 कोरोना मौतें हुई हैं। जो कि पिछले बरस के सर्वाधिक आंकड़ों से अधिक पीछे नहीं है। ऐसे में हिन्दुओं का एक बहुत बड़ा मेला जिसमें एक महीने में दसियों लाख लोग पहुंचेंगे, वह किसका भला करने जा रहा है? अगर देश के हालात और अधिक बिगड़े तो महाराष्ट्र की तरह दूसरे राज्य भी ईश्वरों को बचाने के लिए धर्मस्थलों को बंद कर देंगे, लेकिन इंसान कहां जाएंगे? नांदेड़ में चार सौ लोगों की भीड़ जब सैकड़ों पुलिसवालों पर टूट पड़ी तो उसने कई पुलिसवालों को बुरी तरह जख्मी कर दिया। अब कुंभ में धर्मालु भीड़ अगर किसी वजह से हिंसक या बेकाबू हुई तो किस धर्म के लोगों का सबसे अधिक नुकसान होगा? कुंभ से लौटकर आने वाले श्रद्धालु जाहिर तौर पर अपने हिन्दू परिवारों में ही लौटेंगे, और अगर वे संक्रमण लेकर आते हैं तो देश के हिन्दुओं को ही कोरोना का प्रसाद देंगे। ऐसे में कोरोना के इस खतरनाक और जानलेवा दौर में जिस धर्म के लोग इकट्ठा हो रहे हैं उसी धर्म का सबसे बड़ा नुकसान है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने औपचारिक रूप से यह कहा है कि पूरे कुंभ के दौर में हरिद्वार में देश-विदेश के श्रद्धालु रहेंगे, और कोरोना संक्रमण का खतरा बने रहेगा। तमाम सावधानी के बावजूद वहां के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और उनकी पत्नी दोनों कोरोना पॉजिटिव हैं, पूर्व सीएम और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री भी कोरोना पॉजिटिव हैं। महामारी के इस भयानक दौर में इस धार्मिक आयोजन पर अड़े रहना राज्य सरकार के लिए, बाकी देश के लिए जितना भी बड़ा खतरा है, उससे कहीं अधिक बड़ा खतरा वह इस धर्म के लोगों और उनके परिवारों के लिए है।

लोगों को याद होगा कि पिछले बरस इन्हीं दिनों में दिल्ली में तब्लीगी जमात के कुछ हजार लोगों के बीच से कोरोना देश भर में फैलने को लेकर दिल्ली की सरकारों ने कुछ इस किस्म का हंगामा खड़ा किया था कि उस पर देश की कई अदालतों ने बहुत बुरी नाराजगी जाहिर की है, और सरकार और मीडिया की कड़ी आलोचना भी की है। अब कुछ हजार लोगों के एक धार्मिक आयोजन से तो दसियों लाख लोगों के गंगा स्नान वाले कुंभ की कोई तुलना भी नहीं की जा सकती। उस वक्त अगर लौटे हुए तब्लीगी जमातियों से कोरोना फैला था, तो अब दसियों लाख हिन्दुओं के कुंभ-स्नान से लौटने के बाद क्या वैसा कोई खतरा नहीं हो सकता? देश में धार्मिक भावनाएं उबाल पर हैं, और हिन्दुस्तानियों की सोच में जितनी कुछ भी वैज्ञानिक सोच आधी सदी में विकसित हो पाई थी, उसे धर्मान्धता की धार मार-मारकर धो दिया गया है। कुंभ का जितना इंतजार तीर्थयात्री नहीं कर रहे हैं, उनका ईश्वर नहीं कर रहा है, कुंभ का उतना इंतजार कोरोना कर रहा है। 

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