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बॉडी होगी लचीली, वजन होगा कम, करें इन योगासनों का अभ्यास
03-Apr-2021 9:34 PM (207)
बॉडी होगी लचीली, वजन होगा कम, करें इन योगासनों का अभ्यास

-सविता यादव

Yoga Session- आज के लाइव योगा सेशन में हमने बॉडी को लचीला बनाने वाले और वजन कम करने वाले कई छोटे-छोटे कई योगाभ्यासों को सीखा. योग स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाए रखते हैं. जो लोग चाहते हैं कि उनकी सहनशक्ति बढ़े और वे लंबे समय तक बैठ कर काम कर पाएं. तो योग जरूर करें. वहीं इम्युनिटी को बेहतर बनाए रखने में भी योग की महत्वपूर्ण भूमिका है. ये आसन पैरों की मजबूती को बढ़ाते हैं और पाचन बेहतर बनाए रखते हैं. इन आसन के जरिए स्वास्‍थ्‍य बेहतर बना रहता है और तनाव से भी मुक्ति मिलती है. इसलिए योग को अपनी नियमित दिनचर्या में जरूर शामिल करें. योगाभ्‍यास करते समय इस बात का ध्‍यान रखें कि इसे धीरे-धीरे करना चाहिए. व्‍यायाम से पहले ये तीन नियम जरूर ध्‍यान रखें कि अच्‍छा गहरा लंबा श्‍वास लें, गति का पालन करें और अपनी क्षमता के अनुसार योग करें.

चक्‍की चलनासन
इस आसन की उत्‍पत्ति पुराने जमाने में हाथ से चलाई जाने वाली चक्‍की से हुई है. इसलिए इसका नाम भी चक्‍की चलनासन है यानी यह आसन उस तरह किया जाता है, जिस तरह हाथ से आटा पीसने वाली चक्‍की चलाई जाती है.

चक्‍की चलनासन कैसे करें

चक्‍की चलनासन करना बेहद आसान है. इसके लिए आप फर्श पर दरी या मैट बिछाकर बैठ जाएं.
बैठने के बाद अपने दोनों पैरों को बिल्‍कुल सामने की ओर फैला लें. हालांकि चक्‍की बैठकर चलाई जाती थी पर इसमें आपको पैरों के बल नहीं बल्कि कूल्‍हों को जमीन पर टिका कर आराम से बैठना है.
बैठने के बाद दोनों हाथों को जोड़कर पैरों के पास तक यानी अपने सामने लाएं. दोनों हाथों को जोड़े हुए ही इसे क्‍लॉक वाइज घुमाना शुरू करें, जिस तरह चक्‍की चलाई जाती है. इसी तरह एंटी क्‍लॉक वाइज घुमाएं. शुरुआत में आप इसे 10 मिनट कर सकते हैं.

चक्‍की चलनासन के फायदे
इस आसन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बैली फैट घटाने में मदद मिलती है. लटके हुए पेट को वापस शेप में लाने के लिए यह आसन बहुत फायदेमंद है. चक्‍की चलनासन करने से लोअर एब्‍डोमन और पेल्विक एरिया का भी एक्सरसाइज होता है. इससे कमर को लचीला बनाने में भी मदद मिलती है.

बटरफ्लाई आसन:
बटरफ्लाई आसन को तितली आसन भी कहते हैं. महिलाओं के लिए ये आसन विशेष रूप से लाभकारी है. बटरफ्लाई आसन करने के लिए पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएं,रीढ़ की हड्डी सीधी रखें. घुटनो को मोड़ें और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएं. दोनों हाथों से अपने दोनों पांव को कस कर पकड़ लें. सहारे के लिए अपने हाथों को पांव के नीचे रख सकते हैं. एड़ी को जननांगों के जितना करीब हो सके लाने का प्रयास करें. लंबी,गहरी सांस लें, सांस छोड़ते हुए घटनों एवं जांघो को जमीन की तरफ दबाव डालें. तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें. धीरे धीरे तेज करें. सांसें लें और सांसे छोड़ें. शुरुआत में इसे जितना हो सके उतना ही करें. धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं.

पश्चिमोत्तानासन:
पश्चिमोत्तानासन योग का नाम दो शब्दों के मेल से बना है- पश्चिम और उत्तान. पश्चिम यानी पश्चिम दिशा या शरीर का पिछला हिस्सा और उत्तान मतलब खिंचा हुआ. रीढ़ की हड्डी के दर्द से निजात पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पश्चिमोत्तानासन योग करना चाहिए. इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के पिछले हिस्से यानी रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न होता है, इस कारण इस आसन को पश्चिमोत्तानासन कहा जाता है. इस आसन को करने से शरीर का पूरा हिस्सा खिंच जाता है और यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उनके लिए पश्चिमोत्तानासन रामबाण की तरह काम करता है और इस रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए भी यह आसन बहुत फायदेमंद माना जाता है.

पश्चिमोत्तानासन के फायदे
तनाव दूर करने में फायदेमंद
पेट की चर्बी दूर करने में मददगार
हड्डियों को लचीला बनाने में कारगर
बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद
अनिद्रा की समस्या को दूर करता है
उष्ट्रासन:
उष्ट्र से तात्पर्य ऊंट से है. इस आसन को करने ले लिएअपने योग मैट पर घुटने के सहारे बैठ जाएं और कुल्हे पर दोनों हाथों को रखें.

घुटने कंधो के समानांतर हो तथा पैरों के तलवे आसमान की तरफ हो.
सांस लेते हुए मेरुदंड को खींचे जैसे कि नाभि से खींचा जा रहा है.
गर्दन पर बिना दबाव डालें बैठे रहें
इसी स्थिति में कुछ सांसे लेते रहे.
सांस छोड़ते हुए अपने प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं.
हाथों को वापस अपनी कमर पर लाएं और सीधे हो जाएं. (news18.com)

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