ताजा खबर

कश्मीर में BJP नेताओं पर हमले, क्या पार्टी के बढ़ते क़द का असर है?
11-Apr-2021 8:46 AM (34)
कश्मीर में BJP नेताओं पर हमले, क्या पार्टी के बढ़ते क़द का असर है?

इमेज स्रोत,MAJID JAHANGIR/BBC

-माजिद जहांगीर

बीजेपी के नौजवान नेता मोहम्मद अनवर ख़ान के श्रीनगर के नौगाम स्थित घर के मेन गेट और दीवार पर लगी गोलियों के निशान आज भी मौजूद हैं.

उनके घर का मेन गेट अंदर से बंद है और पुलिसकर्मी गेट के अंदर बनाए गए बंकर में बंदूक ताने खड़े हैं.

छह दिन पहले ख़ान के घर पर चरमपंथी हमला हुआ. हमले में उनका एक सुरक्षाकर्मी मारा गया. ख़ान सुरक्षित हैं क्योंकि वो हमले के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे. लेकिन उस दिन के बाद से अब तक उनके बच्चे स्कूल नहीं जा पाए हैं.s

अनवर ख़ान कहते हैं, "हम बीते छह दिनों से बच्चों को स्कूल नहीं भेज सके हैं. एक डर सा बैठ गया है घरवालों में. वो जोखिम नहीं उठाना चाह रहे. जब इस तरह की घटना होती है, तो डर लाज़मी है."

पुलिस ने इस हमले के लिए चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को ज़िम्मेदार ठहराया है.

MAJID JAHANGIR/BBC
न गाड़ी पर बीजेपी का झंडा, न मकान पर

अनवर ख़ान बीजेपी की कार्यकारिणी के सदस्य होने के साथ-साथ लेह और कुपवाड़ा में पार्टी के इंचार्ज भी हैं.

बीते आठ वर्षों में अनवर ख़ान पर यह तीसरा हमला था. वर्ष 2015 में भी उन पर एक हमला हुआ था, जिसमें एक पुलिसकर्मी घायल हो गया था. उन्होंने घटनास्थल से भागकर अपनी जान बचाई थी.

अनवर ख़ान कहते हैं कि सुरक्षा चिंताओं के कारण वो पार्टी के काम से जगहों का दौरा करने से बचते हैं.

वो बताते हैं, "मैं भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर ही रहता हूं. जुमे की नमाज़ पढ़ने मस्जिद नहीं जाता हूँ. शादियों में भी नहीं जाता हूं. आपको अपनी सुरक्षा का ख़याल रखना पड़ता है."

ख़ान की गाड़ी और मकान पर बीजेपी का कोई झंडा लगा नहीं है और न ही पार्टी के किसी बड़े नेता की कोई तस्वीर हमें नज़र आई.

वो कहते हैं, "दरअसल, आजकल चेकिंग और रिपोर्ट लिखने के लिए यहाँ विभिन्न विभागों के लोग आ रहे हैं, जिसकी वजह से हमने फ़िलहाल झंडा उतार दिया है."

MAJID JAHANGIR/BBC

अनवर ख़ान के दरवाज़े पर लगी गोलियों के निशान

बीजेपी के नेताओं को ख़तरा
अनवर खान कहते हैं कि घाटी में बीजेपी की लोकप्रियता बढ़ रही है और अब कश्मीर में कई पंचायतों में पार्टी के पंच हैं. डीडीसी और बीडीसी चुनावों में भी पार्टी के कार्यकर्ता जीते हैं.

लेकिन बीजेपी के कार्यकर्ता चरमपंथियों के निशाने पर क्यों हैं? क्या इसके पीछे आर्टिकल 370 को हटाना कोई वजह है?

ख़ान बताते हैं, "यह भी हो सकता है. चरमपंथी भी नहीं चाहते थे कि आर्टिकल 370 हटे. आर्टिकल हटने के बाद हमारे लोगों के लिए ख़तरा और भी बढ़ गया है."

MAJID JAHANGIR/BBC

श्रीनगर का बीजेपी दफ़्तर

बीजेपी के श्रीनगर के दफ्तरों में पसरा सन्नाटा
श्रीनगर के जवाहर नगर स्थित बीजेपी के दोनों पार्टी दफ्तरों में सन्नाटा है. दोनों ही दफ्तरों पर पार्टी का कोई भी झंडा नहीं दिखा.

हमने पार्टी के एक नेता से जवाहर नगर वाले दफ्तर में मिलने की इच्छा जताई तो जवाब आया कि उन्हें दफ़्तर न जाने की सलाह दी गई है.

वर्ष 2019 में दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग में बीजेपी के स्थानीय कार्यकर्ता गुल मोहम्मद मीर उर्फ़ अटल जी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी.

उनके दोनों बेटे अब भी पार्टी के साथ हैं. उनके छोटे बेटे शकील अहमद श्रीनगर पार्टी दफ़्तर में काम करते हैं.

शकील कहते हैं, "अगर मेरे पिता को सुरक्षा मुहैया की जाती, तो वे बच जाते. हमने पुलिस अधिकारियों तक ये बात पहुंचाई थी, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी. पिता की हत्या के बाद पार्टी ने ये मुद्दा उठाया था, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला."

मुश्ताक़ नौराबादी (48) कश्मीर में बीजेपी के पुराने नेता हैं. मुश्ताक़ ने उस समय बीजेपी के साथ अपना रिश्ता जोड़ा था, जब वो 22 वर्ष के थे.

मुश्ताक़ कहते हैं कि कश्मीर में बीजेपी के लोगों पर हमलों के बाद उन्होंने बाहर आने-जाने में एहतियात बरतना शुरू कर दिया है.

कुलगाम ज़िले के नौराबाद के निवासी मुश्ताक़ के घर पर साल 2014 में हमला किया गया था. हमले के बाद मुश्ताक़ परिवार समेत श्रीनगर में रहने लगे. हमले के वक्त मुश्ताक़ उस समय घर पर मौजूद नहीं थे.

मुश्ताक़ कहते हैं कि मस्जिद या दूसरी जगहों पर जाने में भी काफी अलर्ट रहना पड़ता है. उन्होंने कहा, "बीजेपी पर हमलों के बाद एक ख़ौफ़ ज़रूर है. पुलिस ने भी हमें हिदायत दी है कि ज़्यादा बाहर न निकलें. "

मुश्ताक़ को भी लगता है कि पार्टी को निशाना बनाने की वजह हालिया चुनावों में दिखा बढ़ता प्रभाव है. वो कहते हैं कि बीजेपी की इमेज हिंदुत्व लागू करने वाली पार्टी की बनी जो सच नहीं है.

क्या कहते हैं जानकार?
पांच अगस्त 2019 को केंद्र ने जम्मू- कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद राज्य का विशेष दर्जा खत्म करके जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र प्रशासित प्रदेश बना दिया था.

वो कहते हैं, "बीजेपी ने जिस तरह से जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाया या कुछ क़ानून बदल दिए, उनको कश्मीर के लोगों ने नेगेटिव अंदाज़ में लिया हालांकि पार्टी ने ये क़दम कश्मीर की जनता के बेहतर भविष्य के लिए उठाए हैं. हमें लोगों की सोच को बदलने की ज़रूरत है."

डॉक्टर रफ़ी आरोप लगाते हैं कि घाटी में बीजेपी के चेहरों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही.

उन्होंने कहा, "कश्मीर में बीजेपी के क़रीब 100-150 लोग ऐसे हैं, जो कश्मीर में बीजेपी की पहचान हैं. बदक़िस्मती ये है कि इन लोगों की सुरक्षा का इंतज़ाम भी बेहतर तरीके से नहीं किया जा रहा है. सरकार के लिये ये कोई बड़ा मसला नहीं था. कश्मीर में बीजेपी के लोगों पर हमलों और हत्याओं के बाद एक बड़े ख़ैफ़ में हम जी रहे हैं."

विश्लेषक और पत्रकार हारून रेशी कहते हैं, "पांच अगस्त 2019 को बीजेपी ने जम्मू और कश्मीर के हवाले से जो फैसला लिया, उसका राज्य में मुख्यधारा की दूसरी पार्टियों ने भी विरोध किया. चरमपंथी इस पर कोई बयान जारी करते हैं, इसलिए उनके दिमाग में क्या चल रहा है, ये भी कहना मुश्किल है."

''यह कहा जा सकता है कश्मीर में बीजेपी के लोगों को अपनी सरकार बचाने में नाकाम रही है. हमने देखा कि बीते दो वर्षों में बीजेपी के कई लोगों को कश्मीर में मारा गया."

कश्मीर बीजेपी की मीडिया सेल के अध्यक्ष मंज़ूर अहमद के मुताबिक़ पाँच अगस्त 2019 से अभी तक कश्मीर में बीजेपी के क़रीब 13 नेता और आम कार्यकर्ता चरमपंथी हमलों में मारे जा चुके हैं.

MAJID JAHANGIR/BBC

बीजेपी नेताओं के साथ शकील मुश्ताक़

घाटी में बीजेपी के बढ़ते क़द का असर?

पार्टी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर कहते हैं कि उनकी पार्टी ने बीजेपी के लोगों पर कश्मीर में होने वाले हमलों के मुद्दे को जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल के साथ उठाया है. ठाकुर ने बताया कि उप-राज्यपाल ने हमें आश्वासन दिया कि पार्टी के पदाधिकारियों को पूरी सुरक्षा मुहैया करवाई जाएगी.

मुकम्मल सुरक्षा न मिलने की दिक्कत के बारे में बताते हुए पार्टी प्रवक्ता कहते हैं, "जम्मू-कश्मीर में पार्टी के पांच लाख से अधिक मेंबर हैं. हर एक को सुरक्षा नहीं दी जा सकती है. अलबत्ता, जो लोग पदों पर हैं, उनको ज़रूर सुरक्षा दी गई है या जिन्हें फिलहाल नहीं दी गई है, उनके लिए कोशिश हो रही है."

ठाकुर भी कहते हैं कि कश्मीर में पार्टी की जड़ें दिन-ब-दिन मज़बूत हो रही हैं और ये देखते हुए पाकिस्तान की तरफ़ से चलाई जाने वाली "दहशतगर्दी" बीजेपी की राष्ट्रवादी आवाज़ को दबाना चाहती है, जो उनके लिए मुमकिन नहीं है."

बीजेपी नेताओं पर हमलों और सुरक्षा के हवाले से बीबीसी ने कश्मीर ज़ोन के इंस्पेक्टर जनरल विजय कुमार को कई बार फ़ोन भी किया और व्हाट्सअप्प पर सवाल भी भेजे, लेकिन अभी तक उनका कोई जवाब नहीं मिला है.

जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा के दफ्तर को भी ईमेल के ज़रिए बीजेपी नेताओं की सुरक्षा से जुड़े कुछ सवाल भेजे थे, जिनका अभी तक जवाब नहीं आया है.

1990 के दशक में कश्मीर में हथियारबंद आंदोलन शुरू होने के बाद अब तक सैकड़ों राजनैतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को मारा गया है. सबसे ज़्यादा राजनीतिक कार्यकर्ता नेशनल कॉन्फ्रेंस के मारे गए हैं.

जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए जिला परिषद चुनाव (डीडीसी) में बीजेपी को पहली बार कश्मीर में किसी सीट को अपने खाते में डालने में कामयाबी हासिल हुई है.

बीजेपी के लोगों पर कश्मीर में होने वाले हमलों पर कश्मीर के दूसरे राजनैतिक दल सख्त निंदा करते हुए कहते हैं कि ये बड़ी अफ़सोस की बात है.

जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने कहा, "नेता या कार्यकर्ता किसी भी राजनैतिक दल का हो, उस पर हमला किसी भी हाल में जायज़ नहीं है. हम इस की सख्त निंदा करते हैं और दुआ करते हैं कि जो लोग ये कर रहे हैं उन्हें ऊपर वाला बेहतर सोच से नवाज़े." (bbc.com)

अन्य पोस्ट

Comments