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म्यांमार में दिल दहलाने वाले जुल्म, अपने ही लोगों के खिलाफ युद्ध की तैयारी में सेना, दुविधा में पड़ा भारत चुप
11-Apr-2021 6:31 PM (57)
म्यांमार में दिल दहलाने वाले जुल्म, अपने ही लोगों के खिलाफ युद्ध की तैयारी में सेना, दुविधा में पड़ा भारत चुप

-शालिनी सहाय

नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) के कुछ कार्यकर्ताओं को रात में ले जाया गया और अगले दिन उनके शव परिवारों को भेजे दिए गए। कोई जानकारी नहीं दी गई कि क्या हुआ, कैसे हुआ। मुकदमा, सुनवाई और जेल तो दूर की बात है। चेहरे समेत पूरे शव पर चोट के ढेरों निशान थे।

मैं जिन सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करती हूं, उनकी आवाज गुम हो गई है। हर बीतते दिन के साथ म्यांमार में जमीनी स्तर पर क्या हो रहा है, यह जानना और मुश्किल होता जा रहा है। जो रिपोर्ट छन-छनकर आ रही है, उसके मुताबिक, म्यांमार वायुसेना ने थाईलैंड से लगती सीमा पर बमबारी की है और सेना अंधाधुंध तरीके से आम लोगों को मार रही है। ऐसी स्थिति में भारत के सामने अलग तरह की पसोपेश की स्थिति आ खड़ी हुई है। वह खुलकर विरोध नहीं कर रहा है कि पिछली बार ऐसी ही स्थिति में उसने तो अपने को काट लिया था, लेकिन चीन ने तब म्यांमार से रिश्तों को बेहतर करने का मौका ताडक़र हालत अपने पक्ष में कर लिया था। म्यांमार से जो भी खबरें आ रही हैं, उनमें से एक संगीतकार के हवाले से उभरती तस्वीर दिल को झकझोरने वाली है। विभिन्न प्लेटफार्मों पर आई जानकारी यह अंदाजा लगाने के लिए काफी है कि म्यांमार में आम लोगों की हालत कैसी है। नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं को रात में ले जाया गया और अगले दिन उनके शव परिवारों को भेजे दिए गए। कोई जानकारी नहीं दी गई कि क्या हुआ, कैसे हुआ। मुकदमा, सुनवाई और जेल तो दूर की बात है। चेहरे समेत पूरे शव पर चोट के ढेरों निशान थे। एक आदमी के मुंह में कोई दांत नहीं था और उसके शरीर के कई अंग भी गायब थे। वे उसे रात में ले गए थे और परिवार वालों को खबर भिजवाई थी कि आकर शव ले जाएं।

वे छात्रों, प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लेते हैं और पकड़े गए कुछ लोगों को सरेआम सडक़ों-गलियों में सिर पर बंदूक तानकर गोली मार देते हैं, जिससे लोगों में खौफ बने। हम जानते हैं कि उनका मुकाबला ईंट-पत्थरों से नहीं कर सकते। लेकिन हम वह सब कर रहे हैं जो कर सकते हैं। हम बंदूकों से डरकर चुप नहीं बैठना चाहते। हर व्यक्ति लडऩे के लिए तैयार है, और अब हर कोई बंदूक प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है।

अब सामान्य जीवन नहीं रह गया है। मेरा मतलब है, सब बंद है। सब कुछ थम गया है। शहर के बाहर से खाने-पीने का कोई सामान नहीं आ रहा है। आने-जाने का कोई साधन नहीं। लोग कैद होकर रह गए हैं। सभी बैंक बंद हैं, हम अपना पैसा भी नहीं निकाल सकते। वही खा रहे हैं जो पास है। लगता है, जल्दी ही भुखमरी की हालत होगी। कोई सुरक्षित नहीं है। वे आपके पर्स की तलाशी लेंगे। पैसे मिले तो रख लेंगे। वे सुरक्षा बलों की तरह तो सलूक ही नहीं कर रहे। लगता है जैसे डाकू हों।

एक बैंड के एक गायक को ले जाया गया। उन्हें एनएलडी समर्थक के रूप में जाना जाता था क्योंकि वे पार्टी के नेताओं और लोकतंत्र को बढ़ावा देते थे। कोई नहीं जानता कि वह अभी कहां हैं। वह रॉक योर वोट नाम के बैंड में थे। यह बैंड लोगों को वोट देने के लिए जागरूक करता था। बैंड का टॉक शो और गीत-संगीत का खासा असर हुआ और युवाओं में वोट के प्रति जागरूकता आई भी। अब बैंड के गायक को उठा लिए जाने से युवाओं में खासा गुस्सा है।

सोशल मीडिया पर एक नागरिक ने कहा कि उन्होंने बर्मी शिक्षा प्रणाली को नष्ट कर दिया है क्योंकि वे तब बेवकूफ लोगों को स्मार्ट लोगों की तुलना में आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं। 1988 में मैं सात साल का था। अभी मेरे बेटे की उम्र ठीक इतनी ही है। मेरे बचपन में मुझे समझना-सीखना पड़ा कि संघर्ष कैसे करें, दुनिया के दूसरे हिस्सों के कलाकारों की तुलना में मुझे कितनी अधिक मेहनत करनी होगी। मुझे संतोष था कि मेरे बेटे को वैसे हालात से नहीं गुजरना होगा, क्योंकि चीजें बेहतर दिख रही थीं। अब जब मैं अपने बेटे को देखता हूं तो अफसोस होता है कि उसे भी उन्हीं हालात से दो-चार होना होगा।

बड़े दर्द भरे और नाउम्मीदी में उन्होंने कहा कि शर्तिया है कि हमें यूएन बचाने नहीं आ रहा। यूएन शायद 1,000 और बयान जारी करेगा और शायद बड़ा सख्त भी, लेकिन... सेना कहीं नहीं जाने वाली। अगर गृहयुद्ध होता है, तो वे हम पर बम बरसाएंगे। म्यांमार की सेना युद्ध की तैयारी कर रही है। सेना अस्पतालों, स्कूलों में बलों को तैनात कर रही है। अगर अंतरराष्ट्रीय हवाई हमले होते हैं तो वे इन अस्पतालों और स्कूलों पर कब्जा करके मोर्चा खोलेंगे। (navjivanindia.com)

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