संपादकीय

'छत्तीसगढ़' का संपादकीय : धर्म, राजनीति, और बाजार का खतरनाक मेल जुटा हुआ है कोरोना के स्वागत के लिए
13-Apr-2021 5:23 PM (226)
'छत्तीसगढ़' का संपादकीय : धर्म, राजनीति, और बाजार का खतरनाक मेल जुटा हुआ है कोरोना के स्वागत के लिए

photo courtesey The Quint

राजनीति और धर्म दोनों अपने आपमें पर्याप्त जानलेवा होते हैं, और जब इन दोनों का एक घालमेल होता है तो वह लोकतंत्र को भी खत्म करने की ताकत रखता है, और इंसानियत को तो खत्म करता ही है। उत्तराखंड में कल हरिद्वार में कुंभ मेले के दौरान सुबह से शाम तक 31 लाख लोग पहुंचे। राज्य सरकार ने खुद ही यह मान लिया है कि वह लोगों पर काबू नहीं रख सकी, और इस विकराल भीड़ के बीच कोरोना की सावधानी लागू कर पाना उसके लिए नामुमकिन था। देश में आज कोरोना जिस तरह छलांग लगाकर आगे बढ़ रहा, जिंदा लोगों के लिए अस्पताल की बात तो छोड़ ही दें, मुर्दों के लिए भी चिताओं की जगह कम पडऩे लगी है, वैसे में इस धार्मिक आयोजन को छूट देना अपने आपमें एक भयानक फैसला था, लेकिन जब राजनीति और धर्म एक-दूसरे के गले में हाथ डालकर नाचते हैं तो लोकतंत्र उनके पैरों तले कुचलते ही रहता है।

उत्तराखंड के हरिद्वार के स्थानीय लोग दहशत में हैं कि बाहर से आई हुई इतनी भीड़ उनके शहर और पूरे इलाके को कोरोना हॉटस्पॉट बनाकर छोड़ेगी। आज देश के किसी प्रदेश में कोरोना वायरस पर काबू पाना वहां की सरकार के बस में नहीं दिख रहा है, और देशभर में लोगों को टीकाकरण के लिए टीके दे पाना केंद्र सरकार के बस में नहीं दिख रहा है। ऐसे में किसी भी भीड़ से बचने की कोशिश करनी चाहिए लेकिन दसियों लाख लोगों की भीड़ के अंदाज वाले इस कुंभ को इजाजत देकर राज्य सरकार ने, और केंद्र सरकार ने एक आपराधिक जिम्मेदारी का काम किया है, जिसके नतीजे पूरा देश लंबे समय तक भुगतेगा, यहाँ से लौटते लोग कोरोना पूरे देश में फैलाएंगे।

देश में वैसे भी कोरोना के मोर्चे पर राजनीति इतना नंगा नाच कर रही है कि उसे देखना भी मुश्किल हो रहा है। गुजरात में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने यह सार्वजनिक मुनादी की कि एक जीवन रक्षक इंजेक्शन जो कि बाजार में नहीं मिल रहा है, उन्होंने उसके 5000 इंजेक्शन जुटा लिए हैं और भाजपा कार्यालय से उन्हें बांटा जाएगा। ऐसा हुआ भी उन्होंने भाजपा कार्यालय से यह इंजेक्शन बांटे जिनके बारे में केंद्र और राज्य सरकारों ने सख्त आदेश निकाले हैं कि जिस दुकानदार के पास इस इंजेक्शन का स्टॉक हो, वे तुरंत इस बारे में प्रशासन को खबर करें ताकि अधिक जरूरतमंद लोगों को यह इंजेक्शन मिल सके और इसकी कालाबाजारी ना हो सके। लेकिन ऐसी घोषणा भी लोगों को रोक नहीं पाई मध्यप्रदेश में कई दुकानदार इसकी कालाबाजारी करते हुए मिले, और गुजरात में तो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष खुद ही सरकार से परे यह इंजेक्शन बांटते हुए दिखे। अब सवाल यह है कि जैसे एक इंजेक्शन के लिए लोग दिन-दिन भर कतार में लगे हैं, वह 5000 की संख्या में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को कैसे मिल गया?

राजनीति सिर्फ इतना नहीं कर रही है, और धर्म भी सिर्फ इतना नहीं कर रहा है, लोगों को याद रहना चाहिए कि पिछले एक बरस में हिंदू धर्म का एक सबसे चर्चित प्रतीक बना हुआ बाबा रामदेव कितनी बार अपनी कितनी दवाइयों को लेकर झूठे दावे करते पकड़ाया, और किस तरह उसके दावों का साथ देने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी उसके दावों में मौजूद रहे। यह एक अलग बात है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जब रामदेव के दावों में अपने नाम के बेजा इस्तेमाल पर विरोध किया, तब जाकर धर्म और राजनीति का यह एक बाजारू मेल, रामदेव कुछ चुप हुआ। यह समझने की जरूरत है कि रामदेव को पिछले वर्षों में हिंदू धर्म का, आयुर्वेद और योग के गौरवशाली इतिहास का, सबसे बड़ा प्रतीक बनाकर उसे कांग्रेस के खिलाफ और भाजपा के पक्ष में इस्तेमाल किया गया है, और आज भी वह रामदेव इस्तेमाल किया जा रहा है। एक नजरिया यह भी हो सकता है कि एक तरफ भाजपा उसका इस्तेमाल कर रही है, और दूसरी तरफ वह भाजपा का इस्तेमाल करके अपने कारोबार को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुकाबले टक्कर में खड़ा कर रहा है। आज जब देश सचमुच खतरे में पड़ा हुआ है, तो रामदेव का बाजारू दवा उद्योग चुप बैठा है। कोरोना के लिए, कोरोना के इलाज के लिए, या कि कोरोना से मरने वालों के मुर्दे जलाने के लिए भी रामदेव का मुंह नहीं खुल रहा कि उसके लिए पतंजलि का कौन सा सामान इस्तेमाल किया जाए। यह सिलसिला भयानक है। हरिद्वार के कुंभ से लेकर गुजरात के भाजपा दफ्तर में बंटते इंजेक्शन, और हरिद्वार में ही बसे रामदेव के बाजार को खड़ा करने तक का पूरा सिलसिला धर्म और राजनीति का खतरनाक मेल है। यह मेल उन दिनों से चले आ रहा है जब कबीले का सरदार इलाके के पुजारी के साथ मिलकर जनता का शोषण करने के लिए धर्म का आविष्कार कर रहे थे।(क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक)

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