सामान्य ज्ञान

विश्व हीमोफीलिया दिवस-17 अप्रैल
17-Apr-2021 1:08 PM (57)
विश्व हीमोफीलिया दिवस-17 अप्रैल

इनसान के जीवन के लिए शरीर में खून के निरंतर दौड़ते रहने की जितनी ज़रूरत है, उतनी ही मौका आने पर उनके जमने की भी। खून के इस जमने को उसके थक्कों का जमना कहते हैं, और इसके ना जमाने को बाकायदा हीमोफीलिया बीमारी का नाम दिया गया है और चिकित्सा जगत हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाता है।
शाही बीमारी कहे जाने वाले रोग  हीमोफीलिया का पता उस वक्त चला था जब ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के वंशज एक के बाद एक इस बीमारी की चपेट में आने लगे थे। शाही परिवार के कई सदस्यों के हीमोफीलिया से पीडि़त होने के कारण ही इसे शाही बीमारी कहा जाने लगा। पुरुषों में इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है।
हीमोफीलिया एक आनुवांशिक बीमारी है जो महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ज्यादा होती है। इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति में खून के थक्के आसानी से नहीं बन पाते हैं। ऐसे में जरा-सी चोट लगने पर भी रोगी का बहुत सारा खून बह जाता है। दरअसल, इस बीमारी की स्थिति में खून के थक्का जमने के लिए आवश्यक प्रोटीनों की कमी हो जाती है।
इसके प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 1989 से विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाने की शुरुआत की गई। तब से हर साल वल्र्ड फेडरेशन ऑफ हेमोफीलिया (डब्ल्यूएफएच) के संस्थापक फ्रैंक कैनेबल के जन्मदिन 17 अप्रैल के दिन विश्व हेमोफीलिया दिवस मनाया जाता है। फ्रैंक की 1987 में संक्रमित खून के कारण एड्स होने से मौत हो गई थी। डब्ल्यूएफएच एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो इस रोग से ग्रस्त मरीजों का जीवन बेहतर बनाने की दिशा में काम करता है।
हीमोफीलिया दो प्रकार का होता है। इनमें से एक हीमोफीलिया ए  और दूसरा हीमोफीलिया बी  है। हीमोफीलिया ए सामान्य रूप से पाई जाने वाली बीमारी है। इसमें खून में थक्के बनने के लिए आवश्यक फैक्टर 8  की कमी हो जाती है। हीमोफीलिया  बी में खून में  फैक्टर 9  की कमी हो जाती है। पांच हजार से 10 हजार पुरुषों में से एक के हीमोफीलिया  ए से  ग्रस्त होने का खतरा रहता है जबकि 20 हजार से 34 हजार पुरुषों में से एक के हीमोफीलिया बी से ग्रस्त होने का खतरा रहता है।
महिलाओं के इस बीमारी से ग्रस्त होने का खतरा बहुत कम होता है। वे ज्यादातर इस बीमारी के लिए जिम्मेदार आनुवांशिक इकाइयों की वाहक की भूमिका निभाती हैं। वर्तमान में एक कठोर वास्तविकता यह है कि इस रोग से ग्रस्त 70 प्रतिशत मरीजों में इस बीमारी की पहचान तक नहीं हो पाती और 75 प्रतिशत रोगियों का इलाज नहीं हो पाता। इसकी वजह लोगों के पास स्वास्थ्य जागरूकता की कमी और सरकारों की इस बीमारी के प्रति उदासीनता तो है ही साथ ही एक महत्वपूर्ण कारक यह भी है कि इस बीमारी की पहचान करने की तकनीक और इलाज महंगा है। परिणामस्वरूप इस बीमारी से ग्रस्त ज्यादातर मरीज बचपन में ही मर जाते हैं और जो बचते हैं वे विकलांगता के साथ जीवनयापन करने को मजबूर होते हैं।

निम्न दाब क्षेत्र
निम्न दाब क्षेत्र वह क्षेत्र होता है, जहां का वातावरणीय दबाव निकटवर्ती क्षेत्रों से अपेक्षाकृत कम होता है। निकटवर्ती क्षेत्रों से निम्न-दाब क्षेत्र में वायु अंदर आने का प्रयास करती है, जिससे उस स्थान को भर सके, किन्तु कोरियोलिस प्रभाव के कारण यह वायु लंबावत्र्त घूम जाती है।
वायु प्रणाली इसे इक्विलिब्रियम में लाने हेतु वायु को आवर्त-आकार में घूमा देती है। यह कभी-कभी चक्रवात का रूप ले लेती है।
 

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