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भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापार न होने से किसे हो रहा अधिक नुकसान?
20-Apr-2021 10:04 PM (52)
भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापार न होने से किसे हो रहा अधिक नुकसान?

-विजदान मोहम्मद कवूसा

अप्रैल की शुरुआत में भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय रिश्ते एक बार फिर सुर्खय़िों में आ गए थे और इसकी वजह थी पाकिस्तान के वित्त मंत्री का भारत के साथ दो साल से चले आ रहे एकतरफ़ा प्रतिबंध को वापस लिया जाना।

हालाँकि, पाकिस्तान की कैबिनेट ने अगले ही दिन इस फैसले को पलट दिया। भारत पहले भी संकेत दे चुका है कि वह व्यापार जारी रखने को तैयार है, लेकिन उसने इसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान पर छोड़ दी है।

इसके बावजूद हालिया दशकों में दोनों देश बड़े व्यापारिक साझेदार नहीं हैं, जबकि कुछ उद्योग और बाज़ार एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं और व्यापार पर रोक के कारण इन पर भारी मार पड़ रही है।

व्यापारिक कठिनाइयाँ बेहद छोटे स्तर पर बड़ी भूमिका निभाती हैं और हज़ारों लोगों की जि़ंदगियों को भी प्रभावित करती हैं।

साल 2018 में आई विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का कहना था कि अगर दोनों देश हाई टैरिफ़, कठिन वीज़ा नीतियों और बोझिल प्रक्रियाओं को हटा देते हैं, तो उनके बीच व्यापार 2 अरब डॉलर से बढक़र 37 अरब डॉलर का हो सकता है।

क्यों रुका व्यापार?

दोनों देशों के बीच व्यापार 2019 से बंद है, जब भारत प्रशासित कश्मीर से जुड़ी दो घटनाएँ हुईं।

कश्मीर के पुलवामा में चरमपंथी हमले में 40 सुरक्षाबलों की मौत हुई थी, जिसके लिए भारत पाकिस्तान को जिम्मेदार बताता है। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान का मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्ज छीन लिया और वहाँ से आयात होने वाली चीजों पर कस्टम ड्यूटी 200 फ़ीसदी तक बढ़ा दी।

इसका प्रभाव इतना गंभीर था कि जनवरी से लेकर मार्च के बीच पाकिस्तान से होने वाला आयात 91 फीसदी गिर गया।

भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मासिक आँकड़ों के अनुसार, भारत ने जनवरी में 3।23 करोड़ डॉलर का सामान आयात किया, जो फऱवरी में 1।86 करोड़ डॉलर और मार्च में 28 लाख डॉलर हो गया।

इसके बाद अगस्त 2019 में जब भारत ने जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया, तो पाकिस्तान ने भारत से आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। जिसके कारण जुलाई और सितंबर में भारत से पाकिस्तान में होने वाले निर्यात में 90त्न की गिरावट हुई।

भारत ने जुलाई में 12.03 करोड़ डॉलर का सामान निर्यात किया था, जिसके बाद अगस्त में यह सिर्फ 5.23 करोड़ डॉलर और सितंबर में 1।24 करोड़ डॉलर था।

भारत ने अप्रैल 2019 में नियंत्रण रेखा पर जम्मू-कश्मीर से होने वाले व्यापार पर भी रोक लगा दी थी। भारत का दावा है कि ऐसी खुफिया रिपोर्टें थीं कि पाकिस्तान स्थित चरमपंथी गुट इसके जरिए अवैध हथियार, जाली नोट और नशीले पदार्थों की तस्करी कर सकते हैं।

अर्थव्यवस्था पर प्रतिबंध का असर

दोनों देशों के बीच व्यापार रद्द होने से ऐसा दिखाई देता है कि इससे इनके कुल आयात और निर्यात बाजार पर अधिक असर नहीं पड़ा है, क्योंकि दोनों देशों के व्यापार में इसका बेहद मामूली हिस्सा है।

हालाँकि, पाकिस्तान की व्यापार के मामले में भारत पर थोड़ी अधिक निर्भरता देखने को मिलती है।

संयुक्त राष्ट्र कॉमट्रेड के आँकड़ों के अनुसार, बीते 15 सालों में 2018 तक भारत का दुनिया भर से आयात 5.2 लाख करोड़ डॉलर का था, लेकिन पाकिस्तान से सिर्फ 5.5 अरब डॉलर का ही आयात था। यह देश के कुल आयात का सिर्फ 0.1 फीसदी था। इसी समय में भारत से पाकिस्तान होने वाला निर्यात उसके कुल निर्यात का सिर्फ 0.7 फीसदी था।

इस दौरान किसी भी साल में भारत के कुल आयात में पाकिस्तान का हिस्सा 0.16 फीसदी से अधिक नहीं रहा। वहीं भारत के कुल निर्यात में उसका हिस्सा कभी 1.1 फीसदी से आगे नहीं बढ़ पाया।

वहीं, भारत से आयात करने के मामले में पाकिस्तान के कुल आयात का हिस्सा 3.6 फीसदी रहा है, जबकि निर्यात करने के मामले में भारत के कुल निर्यात का हिस्सा 1.5 फीसदी रहा है। इस दौरान पाकिस्तान के कुल आयात में भारत का हिस्सा 4.4 फीसदी तक पहुँच गया जबकि उसकी देश के कुल निर्यात में हिस्सेदारी 2.1 फीसदी थी।

पाकिस्तान के कपड़ा और

चीनी उद्योग पर असर

दोनों देशों के बीच व्यापार रद्द होने से कुछ क्षेत्रों में काफी असर हुआ है। पाकिस्तान में जहाँ कपड़ा उद्योग और चीनी का बाजार इससे प्रभावित हुआ है, वहीं भारत में इसके कारण सीमेंट उद्योग, छुहारे और सेंधा नमक के बाजार पर असर पड़ा है।

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रतिबंध से पाकिस्तान पर ख़ासा असर होगा, क्योंकि उसकी भारत पर कपड़े और दवा उद्योग के कच्चे माल के लिए भारी निर्भरता है।

रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान का कपास और चीनी पर आयात प्रतिबंध हटाने का फैसला कपड़ा उद्योग के कच्चे माल की कमी और घरेलू बाजार में चीनी के बढ़ते दाम के कारण लिया गया था।

पाकिस्तान का कपड़ा उद्योग बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक है और उसके कुल आयात में इसकी भागीदारी 60 फीसदी है। कपड़े के बाद चीनी उद्योग देश में सबसे बड़ा कृषि आधारित उद्योग है।

पाकिस्तान के वित्त मंत्री हम्माद अज़हर ने जब भारत के साथ सीमित व्यापार दोबारा शुरू करने की घोषणा की थी, तो उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में कपास की ज़्यादा मांग है, क्योंकि कपास की कम घरेलू पैदावार के बीच कपड़ा निर्यात बढ़ चुका है। वहीं, दूसरे देशों की तुलना में भारत में चीनी के दाम बेहद कम हैं।

कॉमट्रेड डाटाबेस के अनुसार, पाकिस्तान ने भारत से 2018 में जितनी भी वस्तुओं का आयात किया, उनमें कपास का कुल हिस्सा 24 फीसदी था। इसके बाद के साल में भी इस व्यापार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा था। उस साल पाकिस्तान का भारत से कपास का कुल आयात 37 फीसदी था।

साल 2018 में पाकिस्तान भारत से 9त्न चीनी और चीनी के अन्य उत्पाद आयात करता था। आउटलुक पत्रिका के अनुसार, पाकिस्तान ने जब भारत के साथ व्यापार प्रतिबंधित किया, उसके बाद उसने ब्राजील, चीन और थाइलैंड से चीनी आयात करना शुरू कर दिया। इसके कारण चीनी की सप्लाई कम हो गई और घरेलू बाजार में इसके दाम बढ़ गए।

2018 में भारत से पाकिस्तान और भी चीज़ें आयात करता था जो कि अधिकतर कपड़ा उद्योग से जुड़ी हुई थीं। इनमें कुछ जैविक रसायन, जीरा, धनिया और सरसों शामिल थीं।

डॉयचे वेले की एक रिपोर्ट में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ़ साउथ एशियन स्टडीज़ में रिसर्च फैलो अमित रंजन कहते हैं, ‘इस तरह के संबंध तोड़ लेना व्यावहारिक नहीं होते हैं क्योंकि कमज़ोर अर्थव्यवस्था से जूझ रहे पाकिस्तान पर इसने भारी बोझ डाला है। भारत से सामान लेना किसी भी देश की तुलना में बेहद सस्ता होता है।’

भारत में छुहारा, सेंधा नामक और सीमेंट बाजार पर असर

पाकिस्तान से भारत आयात होने वाली चीज़ों को लेकर यह एक दूसरी तस्वीर है, क्योंकि भारत तीन मुख्य चीजों को छोडक़र पाकिस्तान पर बहुत अधिक निर्भर नहीं है।

हालाँकि, ये ऐसी चीजें हैं, जिसके लिए भारत पाकिस्तान पर निर्भर है और व्यापार रद्द होने से इस पर ख़ासा असर पड़ा है।

दिल्ली स्थित कंसल्टिंग ऑर्गनाइज़ेशन ब्यूरो ऑफ़ रिसर्च ऑन इंडस्ट्री एंड इकोनॉमिक फंडामेंटल्स (क्चक्रढ्ढश्वस्न)की एक रिपोर्ट के अनुसार, द्विपक्षीय व्यापार रद्द होने से भारत में छुहारों के खुदरा दामों में तीन गुना वृद्धि हुई है क्योंकि वह इसके आयात के लिए पाकिस्तान पर निर्भर है।

भारत सरकार के आँकड़ों के अनुसार, 2018-19 में भारत का खजूर और छुहारों का पाकिस्तान से आयात 40 फीसदी था, छुहारों के मामले में यह आँकड़ा 99.3 फीसदी तक है। भारत ने जब पाकिस्तान के आयात पर 200 फीसदी की ड्यूटी लगाई, तो भारत में छुहारे आम उपभोक्ताओं के लिए बेहद महंगे हो गए।

2019-20 में भारत का पाकिस्तान से छुहारों का आयात सिर्फ 0.25 फीसदी ही रह गया।

क्चक्रढ्ढश्वस्न की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान से सीमा साझा करने वाले भारतीय शहर अमृतसर में व्यापार रुकने के बाद सेंधा नमक के दाम दोगुने हो गए थे। 2018-19 में पाकिस्तान से भारत का सेंधा नमक का आयात प्रतिशत 99.7 फीसदी था, अगले साल यह घटकर 28 फीसदी हो गया था।

इसी तरह से पाकिस्तान से भारत आयात होने वाली सीमेंट का प्रतिशत 2018-19 में 86त्न था। क्चक्रढ्ढश्वस्न की रिपोर्ट के अनुसार, कस्टम ड्यूटी बढ़ाने से पहले पाकिस्तान से सीमेंट और जिप्सम आयात करना बेहद आसान होता था।

आम इंसान को हो रहा नुक़सान

मीडिया रिपोर्टों में देखा जाता है कि व्यापार प्रतिबंध अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालता है, लेकिन यह आम लोगों पर अलग तरह से असर डालता है।

क्चक्रढ्ढश्वस्न में एसोसिएट डायरेक्टर निकिता सिंगला ने न्यूज वेबसाइट ‘द वायर’ में व्यापार रुकने के कारण मानवीय नुकसान पर लिखा है। वो बताती हैं कि भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के मीडिया में यह बताया जाता है कि व्यापार रुकने से उनके देशों की अर्थव्यवस्था पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ रहा है, जबकि इसके कारण कई लोग अपनी आजीविका खो चुके हैं।

सिंगला लिखती हैं, ‘मैं उन बच्चों से मिली हूँ, जिन्हें निजी स्कूलों से निकाल लिया गया, क्योंकि उनके पिता का व्यापार चौपट हो चुका था। अटारी ट्रक यूनियन के एक ट्रक मालिक से मैं मिलीं जिन्होंने 2010 में अमृतसर से हांगकांग आने का फ़ैसला किया था, क्योंकि उन्हें वाघा-अटारी सीमा पर व्यापार में संभावनाएँ दिखी थीं और उन्होंने 30 ट्रक खऱीदे थे।’

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‘मैं एक पिता से मिली थी, जो अपने तीन बेटों के साथ ट्रकों में सामान चढ़ाने और उतारने का काम किया करते थे और उसके ज़रिए अपनी आजीविका चला रहे थे। वे सभी अब बेरोजगार हैं, उनमें से उनका एक ‘पढ़ा-लिखा’ बेटा रोजगार ढूँढने में सफल हो पाया, जो एक गुरुद्वारा साहिब में ग्रंथी हैं और उन्हें सिर्फ दो घंटे का काम मिलता है।’

क्चक्रढ्ढश्वस्न की रिपोर्ट का अनुमान है कि द्विपक्षीय व्यापार पर असर पडऩे से घर में इकलौते कमाने वाले व्यक्ति के कारण सिर्फ अमृतसर शहर में 9,354 परिवारों पर सीधा असर पड़ा है।

उन्होंने इसमें व्यापारी, सीमा शुल्क एजेंट, ट्रक मालिक और ड्राइवर, मजदूर, दुकानदार, पेट्रो पंप कर्मी और मैकेनिक जैसे अन्य लोग शामिल किए हैं। (bbc.com)

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