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चाड के राष्ट्रपति इदरिस डेबी की कहानी जो विद्रोहियों के हाथों मारे गए
21-Apr-2021 12:28 PM (38)
चाड के राष्ट्रपति इदरिस डेबी की कहानी जो विद्रोहियों के हाथों मारे गए

68 साल के इदरीस डेबी चाड की सत्ता पर तीन दशक से भी अधिक समय से काबिज थे.

चाड के राष्ट्रपति इदरिस डेबी देश के उत्तरी इलाक़े में विद्रोहियों के साथ हुए संघर्ष में मारे गए हैं.

चाड की सेना के अनुसार, इस संघर्ष में वे घायल हो गए थे, जिसके बाद में उनकी मौत हो गई. उनकी मौत अस्थायी चुनाव परिणाम आने के एक दिन बाद हुई है. इसमें अनुमान लगाया गया था कि वे राष्ट्रपति का चुनाव छठी बार जीत सकते हैं.

चाड की सरकार और संसद दोनों को भंग कर दिया गया है. चाड में कर्फ्यू का ऐलान किया गया है और सीमाओं को बंद कर दिया गया है.

68 साल के डेबी चाड की सत्ता पर तीन दशक से भी अधिक समय से काबिज थे. वह अफ्ऱीका के सबसे लंबे समय तक सत्तारूढ़ रहने वाले नेताओं में से एक थे.

वह पहले सेना के एक अधिकारी थे. 1990 में सशस्त्र विद्रोह के ज़रिए उन्होंने सत्ता अपने हाथों में ली. वे अफ्ऱीका के साहेल इलाक़े में जिहादी समूहों के ख़िलाफ़ लड़ाई में फ्रांस और अन्य पश्चिमी शक्तियों के लंबे समय से सहयोगी रहे थे.

सेना के एक जनरल ने मंगलवार को चाड के सरकारी टीवी पर कहा कि डेबी ने संप्रभु राष्ट्र की रक्षा करते हुए युद्ध के मैदान में अंतिम सांस ली.

वे सप्ताहांत में राजधानी एनजमेना के कई सौ किलोमीटर उत्तर सेना के मोर्चे पर गए थे. वहाँ पर सेना और विद्रोही संगठन फैक्ट (द फ्रंट फॉर चेंज एंड कॉनकॉर्ड इन चाड) के बीच लड़ाई चल रही है.

बताया गया है कि चाड के राष्ट्रपति डेबी का अंतिम संस्कार शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ होगा.

डेबी की मौत के बाद फ़ैसला लिया गया है कि उनके 37 वर्षीय बेटे महामत इदरीस डेबी इट्नो के नेतृत्व में बनी एक सैन्य परिषद अगले 18 महीनों तक शासन करेगी. महामत डेबी सेना में अभी 'फोर स्टार जनरल' हैं.

सेना ने अपने बयान में कहा कि महामत डेबी सैन्य परिषद का नेतृत्व करेंगे. संक्रमण काल से गुजर जाने के बाद चाड में "स्वतंत्र और लोकतांत्रिक" चुनाव कराए जाएंगे. सेना ने बाद में 14 अन्य जनरलों का नाम लेते हुए एक और बयान जारी किया और बताया कि ये लोग गवर्निंग बॉडी का हिस्सा होंगे.

बीबीसी मॉनिटरिंग के एक पत्रकार ने सेना की नोटिस की कॉपी को ट्वीट किया है. इस ट्वीट में कहा गया है- चाड के नए नेता महामत इदरिस डेबी ने 15 जनरलों को संक्रमण काल की सैन्य परिषद (टीएमसी) के सदस्यों के रूप में नियुक्त किया है. यह परिषद चाड पर अगले 18 महीनों के लिए शासन करेगी.

हालाँकि विशेषज्ञों ने बीबीसी और अन्य मीडिया संस्थानों से कहा है कि यह क़दम असंवैधानिक है. नियम के अनुसार, चुनाव होने के पहले ही यदि किसी राष्ट्रपति की मृत्यु हो जाती है तो मौजूदा संसद के स्पीकर को पदभार संभालना चाहिए.

इससे पहले, 11 अप्रैल को चुनाव से पहले डेबी ने इलाक़े में शांति और सुरक्षा लाने के लिए एक अभियान चलाया था. चुनाव के अस्थायी यानी प्रोविजिनल नतीजों से पता चला है कि चुनाव में उन्हें 80 फ़ीसदी वोट मिले हैं.

हालांकि चाड के तेल संसाधनों के प्रबंधन को लेकर उनकी सरकार से नाराज़गी बढ़ रही थी.

'इस मौत ने चाड में एक ख़ालीपन ला दिया है'
बीबीसी के अफ्ऱीका संवाददाता एंड्रयू हार्डिंग ने कहा है कि इदरिस डेबी में एक दुर्लभ बात थी, तभी उन्हें एक सच्चे योद्धा राष्ट्रपति के रूप में जाना जाता है. पूर्व विद्रोही और प्रशिक्षित पायलट रहे डेबी किसी जनरल के विपरीत स्वभाव के इंसान थे.

वे चाड जैसे एक विशाल राष्ट्र के 30 साल से अधिक समय तक प्रमुख रहे. सहारा क्षेत्र में फैले चाड के चारों ओर अफ्ऱीका के सबसे कठिन संघर्ष चल रहे हैं. और डेबी का हर संघर्ष में हाथ था. चाहे डारफुर, लीबिया, माली, नाइजीरिया और मध्य अफ्ऱीकी गणराज्य को ही ले लें. उसके सैनिक दुनिया के सबसे लड़ाके सैनिकों में से हैं.

हार्डिंग के अनुसार, धीरे-धीरे वे चाड के निरंकुश प्रमुख बन गए थे. उनकी ताजा चुनावी जीत में लगभग 80 फीसदी वोट मिलने का दावा किया गया है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ग़रीब, सामंती और कमज़ोर चाड में सत्ता का सहजता से बदलाव हो पाएगा या नहीं. इसे लेकर बहुत सी चिंताएं हैं. पूर्व राष्ट्रपति डेबी माली, नाइजर और अन्य जगहों पर इस्लामी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ युद्ध में सालों तक पश्चिम के अपरिहार्य सहयोगी बने रहे. उनकी मौत से एक ख़ालीपन आया है जिसे भरने के लिए कई लोग संघर्ष कर सकते हैं.

दुनिया उन्हें याद कर रही
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने अपने एक बयान में डेबी को "बहादुर दोस्त" के रूप में याद किया और कहा कि उन्होंने चाड में स्थिरता लाने के लिए काफ़ी प्रयास किया. फ्रांस ने सालों से डेबी के विरोधियों को पीछे धकेलने के लिए अपनी सेना और लड़ाकू विमान तैनात किए हैं.

साहेल क्षेत्र में इस्लामी कट्टरपंथियों से लड़ रहे सैन्य बलों, जिन्हें "जी 5" देशों का समर्थन हासिल है, में चाड की सेना को सबसे असरदार माना जाता है.

बीबीसी की कैथरीन ब्यारूहांगा के अनुसार, चाड ने इस इलाक़े में जहाँ लीबिया, सूडान और मध्य अफ्ऱीकी गणराज्य हैं, अक्सर स्वयं को सबसे स्थिर देश साबित किया है. इस इलाक़े में कई सशस्त्र समूह स्वतंत्र रूप से घूमते हैं और हथियारों और आकर्षक संसाधनों का व्यापार करते हैं. इसका नतीजा इलाक़े में तनाव के रूप में सामने आता है.

डेबी से नाराज़ पूर्व सैन्य अधिकारियों द्वारा 2016 में बनाए गए विद्रोही समूह 'फैक्ट' ने राष्ट्रपति डेबी पर चुनाव में दमन का आरोप लगाया था. फैक्ट विद्रोहियों ने लीबिया में टिबेस्टि के पहाड़ों में अपना आधार बनाया है. यह उत्तरी चाड और दक्षिणी लीबिया के हिस्से में फैला है.

चुनाव वाले दिन, इस समूह ने एक सीमा चौकी पर हमला करके धीरे-धीरे एनजमेना की ओर आगे बढ़ा. ताजा संघर्ष शनिवार को शुरू हुआ. चाड की सेना के एक जनरल ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि 300 विद्रोहियों को मार दिया गया जबकि 150 को पकड़ लिया गया है. उन्होंने कहा कि चाड के पांच सैनिक इस मुक़ाबले में मारे गए और 36 घायल हो गए हैं. हालांकि इन आँकड़ों को अभी प्रमाणित नहीं किया जा सका है.

राजधानी का माहौल अभी ठीक है
इस बीच राजधानी एनजमेना के कुछ विदेशी दूतावासों ने अपने कर्मचारियों को चाड छोड़ने का आग्रह किया है.

एनजमेना में बीबीसी के एक पूर्व पत्रकार महामत एडेमोऊ ने बताया है कि राजधानी के हालात अपेक्षाकृत शांत है. उन्होंने कहा, "लोगों से मिल रही ख़बरों से पता चल रहा है कि राजधानी एनजमेना का माहौल अभी शांत है. राष्ट्रपति डेबी की मौत की ख़बर सुनकर लोग चौंक गए हैं. बहुत से लोग तो यह भी नहीं जानते थे वे घायल हो गए थे या वे सीमा पर गए हुए थे."

"शहर में सड़क पर बख्तरबंद वाहन हैं जो प्रमुख चौराहों पर तैनात हैं. लोग सोच रहे हैं कि आगे क्या होगा. हालांकि इससे ज्यादा कुछ यहां नहीं सोचा जा रहा है."

एनजमेना पहले भी विद्रोहियों के हमलों की जद में आ चुका है. सोमवार को शहर में दहशत का माहौल था. अभिभावक जब अपने बच्चों को स्कूल से घर ला रहे रहे थे, तब सड़कों के किनारे टैंक तैनात कर दिए गए थे.

चाड के बारे में पाँच प्रमुख बातें:
1) इसका नाम एक झील चाड के नाम पर रखा गया है. यह अफ्रीका की दूसरी सबसे बड़ी झील है. हालांकि 1960 के बाद यह 90 फीसदी तक सिकुड़ गई है. इसका जल अधिग्रहण क्षेत्र नाइजीरिया, नाइजर, चाड और कैमरून के कुछ हिस्सों को कवर करता है. यह झील दो से तीन करोड़ लोगों के लिए एक प्रमुख जल स्रोत है.

2) सहारा रेगिस्तान देश के लगभग एक तिहाई हिस्से को कवर करता है. उत्तर का अधिकांश भाग रेगिस्तानी है, जहाँ चाड की महज एक फीसदी एक फ़ीसदी आबादी रहती है. दक्षिण में जंगली सवाना के व्यापक फैलाव है.

3) यहां 2001 में सत्तर लाख साल पुराने मानव जैसे जीव या होमिनिड के अवशेष जिसे "टूमई" कहा जाता है, पाया गया. इसे खोजने वालों ने बताया कि ये सबसे पुराना होमिनिड है.

4) चाड 2003 में एक तेल-उत्पादक राष्ट्र बना. अटलांटिक तट पर बने टर्मिनलों से इसके तेल क्षेत्रों को जोड़ने के 4 बिलियन डॉलर की लागत से पाइपलाइन बिछाई गई. हालांकि यह उद्योग भ्रष्टाचार के आरोपों से काफी त्रस्त है.

5) यहां के अधिकतर लोगों की आजीविका का साधन कृषि है. दक्षिणी भाग में कपास उगाया जाता है, जिसे यूरोप और अमेरिका को निर्यात किया जाता है. (bbc.com)

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