सामान्य ज्ञान

सीमा सड़क संगठन

Posted Date : 16-Apr-2018



सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का गठन महान दूरदर्शी और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा मार्च, 1960 में किया गया। इसके गठन का उद्देश्य देश के उत्तरी तथा पूर्वोत्तर क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क के तीव्र विस्तार में समन्वय स्थापित करना था।
   सीमा सड़क संगठन दल में भारतीय थल सेना तथा जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (जीआरईएफ) से संबंधित कुशल अधिकारियों का समूह होता है जिसका नेतृत्व थल सेना के लेफ्टिनेंट जनरल के हाथ में होता है। पिछले 52 वर्षों के दौरान इस संगठन ने दुर्गम और बीहड़ इलाके, प्रतिकूल जलवायु, खराब मौसम और उग्रवाद की स्थिति का सामना करते हुए देश सेवा में अपना योगदान दिया है।
  अब तक इस संगठन ने देश के दुर्गम तथा दूर-दराज क्षेत्रों में लगभग 50 हजार 5 सौ किलो मीटर सड़क का निर्माण, 42 हजार  मीटर लंबाई के 430 बड़े स्थाई पुलों के निर्माण के अलावा 19 हवाई अड्डों का भी निर्माण किया है और इनका निर्माण कार्य उन क्षेत्रों में किया गया है जहां कोई निर्माण एजेंसियां शायद ही कार्य करने का साहस कर सकें। फिलहाल बीआरओ कई सड़कों के निर्माण कार्य में लगा हुआ है जिसमें नये निर्माण के साथ-साथ एक लेन वाले सड़क को दो लेन में विकसित करना भी शामिल है। बीआरओ लगभग 22 हजार 500 किलो मीटर सड़क का रख-रखाव कर रहा है। इसके अतिरिक्त यह संगठन प्रतिवर्ष 95 सड़कों (3 हजार  किलो मीटर) पर बर्फ हटाने का कार्य करता है ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों का देश के अन्य हिस्सों से संपर्क बना रह सके।

भारत में पहली ट्रेन कब चली
भारतीय रेल (आईआर) एशिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है तथा एकल प्रबंधनाधीन यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। यह 150 वर्षों से भी अधिक समय तक भारत के परिवहन क्षेत्र का मुख्य संघटक रहा है। यह विश्व का सबसे बड़ा नियोक्ता है, इसके 16 लाख से भी अधिक कर्मचारी हैं।
16 अप्रैल 1853 को पहली यात्री ट्रेन भारतीय उपमहाद्वीप में चली। अंग्रेजों ने अपनी प्रशासनिक सुविधा के लिए यह ट्रेन चलाई थी। इस ट्रेन ने अपने पहले सफर में 21 मील की दूरी तय की। यह ट्रेन बाम्बे  से ठाणे के बीच चली।  इस ट्रेन को बोरी बंदर से 3:30 बजे दोपहर बाद ठाणे के लिए रवाना किया गया था। यात्री ट्रेन की पहली यात्रा के लिए यहां भव्य समारोह आयोजित किया गया था। इस ट्रेन को 21 बंदूकों की सलामी दी गई थी।  इस दिन बॉम्बे में आम अवकाश कर दिया गया था। पहली ट्रेन में 14 डिब्बे थे, जिन्हें तीन लोकोमोटिव सुल्तान, सिंध और साहिब खींच रहे थे। इसके लगभग 6 साल बाद 3 मार्च, 1859 को उत्तर भारत की पहली रेल लाइन इलाहाबाद-कानपुर के बीच बिछाई गई । इसके बाद 1889  में दिल्ली-अम्बाला-कालका के बीच रेल लाइन बिछायी गई ।
आज प्रशासनिक तौर पर भारतीय रेल को 16 क्षेत्रों में विभाजित किया है, उत्तर रेलवे, जो 1952  में अपने वर्तमान स्वरूप में आया, सबसे बड़ा रेलवे क्षेत्र है उत्तर रेलवे नए प्रयोगों और आधुनिकीकरण के मामलों में सदैव अग्रणी रहा है । कम्प्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली की शुरूआत सबसे पहले उत्तर रेलवे पर ही 19 फरवरी 1989 को हुई ।
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