विचार / लेख

भक्तों का स्वार्थ ताड़क़र आराध्य ने कृपा-कपाट नहीं खोले
07-May-2021 5:34 PM (61)
भक्तों का स्वार्थ ताड़क़र आराध्य ने कृपा-कपाट नहीं खोले

-प्रकाश दुबे

आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ वायएसआरकांग्रेस ने ईसाई धर्मावलंबी को तिरुमला तिरुपति देवस्थानम का मुखिया बनाया। तिरुपति लोकसभा उपचुनाव में विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार की जमकर लानत-मलामत की। इसके बावजूद जगन्मोहन रेड्डी की पार्टी के नए नवेले उम्मीदवार डॉ. गुरुमूर्ति ने दो पूर्व केन्द्रीय मंत्रियों को भारी अंतर से हराया। दोनों दलबदलू। पनबाका लक्ष्मी कांग्रेस छोडक़र तेलुगु देशम पार्टी की उम्मीदवार बनीं। ढाई लाख मतों के अंतर से हारीं। नरसिंहराव सरकार में राज्यमंत्री रहे चिंतामोहन दस हजार वोट के लिए तरसे। जमानत जब्त हुई। धर्म के बजाय श्रद्धा को महत्व और बालाजी का आर्शीवाद मिला। लोकसभा का एक और उपचुनाव दक्षिणी छोर पर कन्याकुमारी में हुआ। एकनाथ रानाडे ने आजीवन मेहनत की।

कन्याकुमारी में स्वामी विवेकानंद शिला तैयार हुई। हिंदू धर्म की महत्ता और उदारता के व्याख्याकार दिग्विजयी स्वामी को खास चश्मे में कैद करन आसान नहीं है। लोकसभा चुनाव-2019 में केन्द्रीय राज्यमंत्री पोन राधाकृष्णन पराजित हुए। राधाकृष्णन को उपचुनाव में जिताने के लिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन ने साम, दाम, दंड, भेद का सहारा लिया। नाडार वोट पर नजर रखते हुए तमिल सौंदर्याराजन को तेलंगाना का राज्यपाल बनाया। पुदुचेरी में ऐन चुनाव के मौके पर उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। पुदुचेरी हासिल किया।

कन्याकुमारी के मतदाताओं ने स्वामी विवेकानंद की सीख अपनाई-एक समय आता है, जब मनुष्य अनुभव करता है कि थोड़ी सी मानव सेवा करना लाखों जप-ध्यान से बढक़र है। राधाकृष्णन ने फिर पटखनी खाई। रणनीतिकार चुनावी जीत के लिए धर्म को आसान नुस्खा मानते हैं। न्यायपालिका ने सबरीमाला में महिलाओं की प्रवेशबंदी को अनुचित ठहराया। भारतीय जनता पार्टी ने इसे धर्मविरोधी बताकर केरल सहित देश भर को मथने का प्रयास किया।

प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्रन को कोनी विधानसभा से उम्मीदवार बनाया। देश का हर बड़ा नेता सबरीमाला में दर्शन के बहाने प्रचार करने गया। दिलचस्प संयोग है कि कांग्रेस पार्टी की राय भाजपा से अधिक अलग नहीं थी, सिवा इसके कि वह आंदोलन से दूर रही। कोनी से माक्र्सवादी कम्युनिस्ट जेनिश कुमार ने जीत हासिल की। अद्भ़ुत संयोग है कि मलयाली फिल्मकार जिओ बेबी ने इसी पृष्ठभूमि पर हाल में दि ग्रेट इंडियन किचन फिल्म बनाई। सबरीमाला में समता के पक्ष में निर्णय सुनाने वाले उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश धनंजय चंद्रचूड़ को फिल्म पसंद आई। सबरीमाला में विराजमान आराध्य को समता के विवादास्पद विचार को लागू करने वाली पार्टी के उम्मीदवार और सरकार की जीत भाई। उडऩखटोले पर घूमने वाले सुरेन्द्रन दोनों चुनाव क्षेत्रों से पराजित हुए।

वोट की खातिर धर्म की याद दिलाने वाले लपक कर पहुंच जाते हैं। ओबेसी बिहार में मौजूद थे। मध्यप्रदेश का रुख करने से पता नहीं किसने रोका?अजमेर शरीफ के बाद श्रद्धालुओं के दूसरे आस्था केन्द्र पश्चिम बंगाल के फुरफुरा शरीफ में महीनों पहले पहुंचकर चुनावी बिसात बिछाई। कर्ताधर्ताओं में फुट पड़ी। आप में से किसी ने मतगणना के दिन धर्मपरस्त सियासती ओवैसी या उनकी पार्टी का नाम सुना? केरल में के एम मणि ने ईसाई मतावलम्बियों की पार्टी केरल कांग्रेस बनाई। सत्ता में कांग्रेस के साथ भागीदारी पाई। मणि के निधन के बाद बेटे जोस ने पाला बदलकर इस चुनाव में वाममोर्चे का दामन थामा। ईसाई प्रभावक्षेत्र वाले पाला विधानसभा क्षेत्र से बेटा जोस मणि ही चुनाव हार गया।

गुरुवयूर के मंदिर और गायक येसुदास को कोई नहीं भूल सकता। गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा के गायक ने भज रे मन कृष्णमुरारी और जगवंदित जगपूजित दाता जैसे भजन गाए। ईसाई येसुदास को गुरुवयूर में प्रवेश नहीं करने दिया। गुरुवयूर और येसुदास के घर कोचि में मतदाता की पसंद के उम्मीदवार और दल विजयी रहे। आराध्य खास धर्म के लिए कपाट बंद नहीं करते। कपाट बंद रहे-धर्म के राजनीतिक प्रयोग और हर तरह की धर्माधंता के लिए। 

धर्म का ढोल पीटने वाले भूल जाते हैं कि सभी धर्मों में पंथ और उपपंथ हैं। हिंदु धर्म की तरह जाति, उपजाति का प्रभाव है। हिंदु धर्म में अनुसूचित मतुआ समुदाय को महतो भी कहा जाता है। मतुआ समुदाय का बांग्लादेश में प्राचीन मंदिर है।

ऐन विधानसभा चुनाव के दिनों में प्रधानमंत्री मोदीबांग्लादेश के ओराकांडी मंदिर में माथा टेकने पहुंचे। भारत का इलेक्ट्रानिक मीडिया इसका सीधा प्रसारण कर सोनार बांग्ला के मतदाताओं की श्रद्धा जगाने से नहीं चूका। दूसरी तरफ मतुआ समुदाय के प्रभावशाली नेता छत्रधर महतो को एनआईए ने गिरफ्तार किया। ममता बनर्जी सरकार ने छत्रधर को कुछ समय पहले रिहा किया था। छत्रधर को जेल में और मतुआ देव को बांग्लादेश में नतीजों की खबर है। 90 प्रतिशत से अधिक हिंदू आबादी वाले झाडग़्राम से तृणमूल कांग्रेस के वीरवाह हंसदा जीते। मतुआ समुदाय को भिक्षुक कहने वाली तृणमूल की सुजाता मंडल का विरोध हुआ। कुछ गांवों में उन्हें घुसने नहीं दिया।  आरामबाग विधानसभा क्षेत्र से सुजाता पराजित हुईं।

काली कलकत्ते वाली का कालीघाट में मंदिर है। बरस पहले मैंने ममता बनर्जी का घर देखा था। लघुशंका निवारण की खस और टाट से कच्ची व्यवस्था की गई थी। भारतीय जनता पार्टी ने गढ़ जीतने के लिए सियाचिन में पहरेदारी करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा को दांव पर लगाया। विधायक बनने के लिए उत्सुक साहा निहत्थे ताकते रह गए। रासबिहारी क्षेत्र से तृणमूल कार्यकर्ता देवशीष कुमार जीते।

जनम भर के करमों पर नेकनीयती भारी पड़ती है। यह साधारण सी सीख हमारे गले नहीं उतरती।

(लेखक दैनिक भास्कर नागपुर के समूह संपादक हैं)

अन्य पोस्ट

Comments