अंतरराष्ट्रीय

Previous123456789...285286Next
तालिबान राज में पहली बार महिलाओं के लिए खुशखबरी, शादी को लेकर दी इस बात की इजाजत, जानें
03-Dec-2021 7:27 PM (46)

काबुल. जबरदस्त अंतरराष्ट्रीय दबाव का असर अब तालिबान शासन पर दिखने लगा है. अब कट्टरपंथी संगठन ने अफगानिस्तान की महिलाओं के अधिकारों को लेकर नए आदेश जारी किए हैं. नया आदेश कहता है कि अब महिलाओं को प्रॉपर्टी के रूप में नहीं देखा जाएगा. साथ ही अब शादी के लिए महिलाओं की भी सहमति लेना आवश्यक होगा. हालांकि अभी महिलाओं की शिक्षा और कामकाज को लेकर कोई बात नहीं कही गई है.

दरअसल अफगानिस्तान के आर्थिक हालात बिगड़ते जा रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अफगानिस्तान को मिलने वाले सभी फंड रोक दिए हैं. ऐसे में तालिबान पर लगातार ये दबाव बनाया जा रहा था कि वो महिला अधिकारों के पक्ष में सकारात्मक निर्णय ले. तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा है- ‘महिलाएं प्रॉपर्टी नहीं हैं, बल्कि एक स्वतंत्र इंसान हैं.’

अब महिलाओं पर शादी के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकेगा
नए नियमों के मुताबिक अब महिलाओं पर शादी के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकेगा. साथ ही विधवा महिला को अपने पति की संपत्ति में हिस्सा दिया जाएगा. अब न्यायालयों को निर्णय देते वक्त नए आदेशों का खयाल रखना होगा.

तालिबान शासन आने के बाद बिगड़ते जा रहे हैं हालात
हालांकि अभी तालिबान की तरफ से महिलाओं की शिक्षा और कामकाज  को लेकर कोई निर्णय नहीं किया गया है. अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आने से पहले तक महिलाओं को भी पढ़ाई और कामकाज की छूट थी. लेकिन तालिबान शासन में महिलाओं की पढ़ाई और कामकाज पर रोक लगा दी गई है. इसे लेकर देश की सड़कों पर महिलाओं ने जमकर प्रदर्शन किया था.

तालिबान राज में पहली बार महिलाओं के लिए खुशखबरी, शादी को लेकर दी इस बात की इजाजत, जानें
स्थिति यहां तक बिगड़ गई थी कि तालिबान ने महिलाओं के लिए फरमान जारी किया था कि वे इन दिनों घरों में ही रहें. क्‍योंकि उसके कुछ लड़ाकों को महिलाओं का सम्‍मान करने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया गया है. न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स को तालिबान नेता अहमदुल्‍लाह वासेक ने कहा था कि जब तक महिलाएं हिजाब में रहेंगी तब तक उनके नौकरी करने को लेकर कोई परेशानी नहीं है. लेकिन उसका कहना था कि पर अब हम महिलाओं को तब तक घरों में रहने को कहेंगे जब तक कि हालात सामान्‍य नहीं हो जाते हैं. (news18.com)

9 साल के बच्चे जितना दिखता है 19 साल का शख्स! सोशल मीडिया पर महिला को कह दी ऐसी बात कि अकाउंट हुआ ब्लॉक
03-Dec-2021 3:54 PM (56)

दुनिया में कई लोग ऐसे होते हैं जिनका कद आम लोगों की हाइट जितना नहीं बढ़ पाता है. अक्सर ऐसे लोग अपनी लंबाई को लेकर बहुत परेशान होते हैं. कई बार तो लोगों को बेहद विचित्र बीमारियां भी हो जाती हैं जिसके कारण उनकी लंबाई कम रह जाती है. पर आज हम आपको एक शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो सिर्फ कद में ही नहीं, अपने रूप में भी किसी छोटे बच्चे जैसा लगता है. जो कोई भी उसे देखता है वो उसे बच्चा ही समझता है. ये ‘बच्चा’सोशल मीडिया पर काफी फेमस है.

डेगिस्तान के रहने वाले सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर हसबुल्ला मैगोएमेदोव सिर्फ रूस में ही नहीं, दुनिया भर में फेमस हैं. हसबुल्ला के फेमस होने का सबसे बड़ा कारण है उनका रूप. आप को जानकर हैरानी होगी कि हसबुल्ला 19 साल के हैं मगर दिखने में वो 9 साल के बच्चे से भी छोटे लगते हैं. पहली बार देखने पर किसी को भी उनपर प्यार आने लगता है मगर सोशल मीडिया पर अपनी दबंगई के लिए फेमस हसबुल्ला के बारे में जब कोई पूरी तरह जानना शुरू करता है तो दंग रह जाता है. हसबुल्ला के शरीर में ग्रोथ हॉर्मोन यानी शरीर बढ़ने वाले हॉर्मोन की कमी है. इसलिए उनका शरीर किसी बच्चे के शरीर जैसा लगता है.

इंस्टाग्राम ने ब्लॉक किया अकाउंट
सोशल मीडिया पर हसबुल्ला के कई वीडियोज वायरल होते रहते हैं. कभी वो जिम में पसीना बहाते नजर आते हैं तो कभी रेस्लिंग मैच का आनंद लेते दिख जाते हैं. मगर इस बार हसबुल्ला एक अलग कारण की वजह से चर्चा में आ गए हैं. आपको बता दें कि उन्होंने एक महिला को इंस्टाग्राम पर जान से मारने की धमकी दे डाली है जिसके बाद इंस्टाग्राम ने उनका अकाउंट ही ब्लॉक कर दिया है.

महिला को दी धमकी
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक महिला ने हसबुल्ला की बहन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया था. उसके बाद उन्होंने धमकी देते हुए कहा- इस महिला ने मेरी बहन का वीडियो पूरे इंस्टाग्राम को दिखाने के लिए शेयर कर दिया. अगर उसने पूरे सोशल मीडिया से माफी नहीं मांगी तो मैं उसे जिंदा नहीं छोड़ूंगा. जब से विवाद बढ़ा तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने धमकी तो दी है मगर उनका अकाउंट इंस्टाग्राम ने नहीं ब्लॉक किया है. उन्होंने खुद से ही अपना अकाउंट कुछ दिनों के लिए ब्लॉक कर लिया है. (news18.com)

शख्स ने रिकॉर्ड बनाने को मुंह में दबाए 11 जहरीले सांप, गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड्स ने झाड़ लिया पल्ला
03-Dec-2021 3:52 PM (53)

 

दुनिया में कई लोग हैं जो वर्ल्ड रिकार्ड्स बनाने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं. लोग अजीबोगरीब कारनामे कर रिकॉर्ड बनाते हैं. कई बार तो इसके लिए लोग हद से गुजर जाते हैं. वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की ऐसी ही सनक चढ़ी अमेरिका के टेक्सास में रहने वाले जैकी बिब्बी के ऊपर. वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए जैकी ने अपने मुंह में 11 खतरनाक जहरीले रैटल स्नेक दबा लिए थे. ये कारनामा जैकी ने 2010 में किया था. लेकिन अब इस केटेगरी को गिनीज बुक ऑफ़ रिकार्ड्स ने हटा दिया है.

अपने फेसबुक पेज पर गिनीज बुक ऑफ़ रिकार्ड्स ने इस रिकॉर्ड होल्डर की फोटोज शेयर की है. इन तस्वीरों में जैकी ने अपने मुंह में 11 सांप दबाए थे. जैकी ने इन सभी सांपों को बिना हाथ से पकड़े होने मुंह से दबा रखा था. ये रिकॉर्ड बेहद खतरनाक था. अगर इनमें से किसी भी सांप ने जैकी को काट लिया होता, तो उसकी मौत तय थी. इतना खतरनाक स्टंट करने के बाद अब गिनीज बुक ऑफ़ रिकार्ड्स ने इसे अपनी लिस्ट से बाहर कर दिया है.

जैकी ने 2010 में इस रिकॉर्ड को बनाया था. अब 11 साल बाद इसे लिस्ट से बाहर कर दिया गया है. गिनीज बुक ऑफ़ रिकार्ड्स ने अपने फेसबुक पेज पर इसकी जानकारी दी. उन्होंने साफ़ कर दिया कि अब आगे से वो इस रिकॉर्ड को मॉनिटर नहीं कर रहे. ऐसा इसलिए ताकि कोई और रिकॉर्ड बनाने के लिए कोई और इस स्टंट को ना करे. बता दें कि रेटल स्नेक दुनिया के सबसे हतरनाक सांपों में से एक है. इसके जहर की कुछ बूंदें भी जानलेवा है.

गिनीज बुक ऑफ़ रिकार्ड्स दुनिया भर के ऐसे लोगों के रिकार्ड्स का लेखा जोखा रखता है, जो यूनिक है. अगर कोई ऐसा काम कर रहा है, जो हटके है और उसे हर कोई नहीं कर सकता, तो उसे गिनीज बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में दर्ज किया जाता है. कई बार इन रिकार्ड्स को बनाने में लोगों की जान भी चली जाती है. हर साल इन रिकार्ड्स को रिन्यू किया जाता है. अगर पुराने रिकॉर्ड ो कोई तोड़ देता है, तो नाम को अपडेट कर दिया जाता है. (news18.com)

इमरान खान की इंटरनेशनल बेइज्जती, पाक एम्बेसी बोली-3 महीने से सैलरी नहीं मिली, स्कूल से निकाले गए बच्चे
03-Dec-2021 3:50 PM (66)

 

इस्लामाबाद. पाकिस्‍तान में महंगाई आसमान छू रही है. मुल्क पर भारी-भरकम विदेशी कर्ज है. नया कर्ज लेने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने देश की संप्रभुता के साथ भी समझौता कर लिया है. इस बीच सर्बिया में पाकिस्तान एम्बेसी के अधिकारियों ने इमरान खान की इंटरनेशनल बेइज्जती कर दी है.

पाकिस्‍तान की हाल ही में उस समय जगहंसाई हुई, जब सर्बिया में पाकिस्तान की एम्‍बेसी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर महंगाई और तीन महीने से तनख़्वाह नहीं मिलने की शिकायत की गई है. इस ट्वीट में प्रधानमंत्री इमरान खान को भी टैग किया गया है. इसी ट्वीट के नीचे एक और ट्वीट किया गया है जिसमें लिखा गया है कि इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं था.

समाचार एजेंसी एएनआई ने सर्बिया स्थित पाकिस्तानी दूतावास के उस ट्वीट को शेयर किया है, जिसमें अधिकारियों ने इमरान खान से सवाल पूछा है. इस ट्वीट में दूतावास में तैनात अधिकारियों ने इमरान से पूछा है, ‘पाकिस्तान में महंगाई अब तक के अपने सभी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ रही है. प्रधानमंत्री इमरान खान आप हमसे कब तक उम्मीद करते हैं कि हम सरकारी अधिकारी चुप रहेंगे. हमें तीन महीने से वेतन नहीं मिला है, फिर भी हम काम कर रहे हैं. स्कूल की फीस न भरने की वजह से हमारे बच्चों को स्कूलों से निकाला गया है.’

पाकिस्तान में महंगाई 70 साल के उच्च स्तर पर
पाकिस्तान में महंगाई की मार से आम जनता बेहद परेशान है. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान में महंगाई 70 सालों में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. ‘द न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में खाने की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं. घी, तेल, आटा और चिकन की कीमतें में जबर्दस्त उछाल आया है.

खाने-पीने से लेकर डीजल-पेट्रोल की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई हैं. इस बुरे हालात के लिए लोग सीधे तौर पर इमरान खान को जिम्मेदार बता रहे हैं. लोगों का कहना है कि एक प्रधानमंत्री के रूप में इमरान सभी मोर्चों पर असफल हो गए हैं.

लगातार बढ़ रहा विदेशी कर्ज
पाकिस्‍तान पर विदेशी कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है और वह बड़ी मुश्किल से अपने रोजमर्रा के खर्च चला पा रहा है.आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप झेल रहे पाकिस्‍तान की दुनिया में अच्‍छी छवि नहीं है. फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स की ‘ग्रे लिस्ट’ में पाकिस्तान बना रहेगा. आतंकवाद के वित्तीय पोषण के खिलाफ वैश्विक संस्‍था ने कहा कि संयुक्‍त राष्‍ट्र (द्वारा नामित आतंकियों जैसे भारत के मोस्ट वांटेड हाफिज सईद (और मसूद अजहर के साथ ही उनके नेतृत्व वाले समूहों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में बताने की जरूरत है.(news18.com)

10 साल वो यूट्यूबर जो इस काम से कमाता है सबसे ज्यादा पैसा
03-Dec-2021 3:26 PM (56)

 

इंटरनेट की दुनिया में कुछ यूट्यूबर इतनी ज्यादा कमाई करते हैं के वे ही लोगों के रोल मॉडल बन जाते हैं. ऐसा ही एक यू ट्यूबर एक 10 साल का बच्चा है जो पिछले 6 सालों में स्टार बन चुका है और कमाई के मामले में उसने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं. रायन काजी छोटे बच्चों की दुनिया में बहुत लोकप्रिय है और अपनी कमाई में हर साल लगातार इजाफा किए जा रहा है. इसकी व्यूअर शिप हर साल बढ़ती ही जा रही है. आइए जानते हैं कि इस बच्चे की नेटवर्थ करोड़ों डॉलर तक कैसे पहुंच गई.

कौन है रायन काजी
रायन काजी को आज दुनिया एक मशहूर यूट्यूबर के नाम से जानती है. अमेरिका के टेक्सास  6 अक्टूबर 2011 को पैदा हुए रायन अपनी मां लोन काजी और पिता शिओन काजी के साथ मिलकर अपना यूट्यूब चैनल चलाते हैं जिसमें  रायन की छोटी जुड़वां बहने केट और एमा भी दिखती हैं. आज रायन के यू ट्यूब चैनल रायन्स वर्ल्ड, जो पहले रायन टॉय रिव्यू के नाम से चलता था.

कैसे हुई थी चैनल की शुरुआत
साल 2015 में चार साल की उम्र में रायन ने यूट्यूब पर खिलौने का रीव्यू करने वाले चैनल देखते हुए अपनी मां से एक सवाल पूछा था कि वे दूसरे बच्चों की तरह यूट्यूब पर क्यों नहीं दिखते. इसी से प्रेरित होकर रायन की मां ने अपने कैमिस्ट्री शिक्षिका की नौकरी छोड़ने का फैसला किया और पूरा ध्यान यूट्यूब चैनल बनाने की ओर लगा दिया. यूट्यूब पर जाने से पहले परिवार ने अपना सरनेम गुआन से बदल कर काजी कर लिया था.

कितनी है रायन नेटवर्थ
आज रायन के यू ट्यूब पर करोड़ों की संख्या में व्यअर्स हैं जिसके कई वीडियो के व्यूज अरबों की संख्या तक भी पहुंच चुके हैं. लोगों को यह जानकर हैरानी होती है कि रायन की खुद की नेटवर्थ 3.2 करोड़ डॉलर है जबकि एक अन्य आंकलन के मुताबिक यह 5 करोड़ डॉलर तक पहुंच चुकी है. आज काजी परिवार की नेटवर्थ भी करोड़ों में हैं.

क्या है इसके सब्सक्राइबर्स का हाल
आज रायन के चैनलों के कुल मिला कर 4 करोड़ से ज्यादा सब्क्राइबर्स हैं. रायन के वीडियो अब तक 44 अरब से ज्यादा व्यूज हासिल कर चुके हैं. इसके चैनल में हर दिन कोई ना कोई नया वीडियो लॉन्च होता है.  पिछले साल नवंबर में रायन के ह्यूज एग्स सरप्राइज टॉयज चैलेंज को रिकॉर्ड 2 अरब से ज्यादा व्यूज मिले थे.

हजारों खिलौने बिकते हैं रायन के नाम से
रायन के परिवार ने रायन के नाम पर लेइसेंस ले रखा है जिसमें रायन्स वर्ल्ड्स के पांच हजार से ज्यादा उत्पादों में खिलौने, एक्शन फिगर्स, फेस मास्क, घरेलू सजावट का सामान  शामिल है.  फोर्ब्स के मुताबिक साल 2016-17 में रायन का परिवार यूट्यूब से सबसे ज्यादा कमाई करने वालों में 8वें स्थान पर है.

ऐसी आई खिलौनों की शृंखला
यूट्यूब पर रायन की मुख्य कमाई विज्ञापन से आती है. 2017 में रायन के माता पिता ने पॉकेट वॉच कंपनी से करार किया था जो रायन के यूट्यूब चैनल के लिए मार्केटिंग और बिक्री का काम करती है. इस तरह रायन पहला ऐसा बच्चा बना जो किसी प्रोडक्ट लाइन से जुड़ा. इसके बाद न्यू यॉर्कटॉय फेयर ने नए खिलौने की शृंखला का ऐलान किया. अगले साल तक यह शृंखला वॉलमार्ट और अमेजॉन पर भी आ गई.

रायन को इतनी कमाई के मामले में भाग्यशाली भी माना जाता है.  यूट्यूब पर अधिक सबस्क्राइबर होने के साथ अधिक लाइक मिलने से लोगों को स्पॉन्सर मिलने लगते हैं जो अपने विज्ञापन के देकर व्यक्ति को बहुत पैसे देते हैं. रायन का लोकप्रियता समय के साथ तेजी से बढ़ी जिसने खिलौने उद्योग को बहुत ही ज्यादा प्रभावित कर दिया जिसका रायन और उसके परिवार को पूरा फायदा मिला. (news18.com)

गीता गोपीनाथ को मिल गया प्रमोशन, IMF में बनेंगी नंबर 2 ऑफिसर
03-Dec-2021 3:22 PM (54)

वॉशिंगटन. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ अब इस संस्था में खास भूमिका में नजर आएंगी. भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ पहले आईएमफ को छोड़ना चाहती थीं, लेकिन अब उन्हें प्रमोशन मिल गया है. उन्हें प्रमोट कर आईएमएफ की फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर  बनाया गया है. यह आईएमएफ में दूसरे नंबर का पद है. बता दें कि गीता गोपीनाथ जनवरी 2022 में वापस हार्वर्ड यूनिवर्सिटी जाकर टीचिंग वर्क करना चाहती थीं.

प्रमोशन के तौर पर गीता गोपीनाथ वह ज्यॉफ्री ओकामोतो की जगह लेंगी. आईएमएफ ने गुरुवार को बताया कि ओकामोतो अगले साल की शुरुआत में अपना पद छोड़ देंगे, जिसके बाद गीता गोपीनाथ कामकाज संभालेंगी. गीता गोपीनाथ 3 साल से आईएमएफ में चीफ इकनॉमिस्ट के रूप में कार्य कर रहीं हैं. आईएमएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा कि गीता गोपीनाथ पहली महिला चीफ इकोनॉमिस्ट थीं, हमें इस बात की खुशी है कि वह अपनी सेवाएं जारी रखेंगी और अब डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में काम करेंगी.

क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा, ‘आईएमएफ में गोपीनाथ की सेवाएं शानदार रही हैं. खासकर उन्होंने ग्लोबल इकॉनमी और आईएमएफ की मदद के लिए बौद्धिक नेतृत्व प्रदान किया है. हमारे समय के सबसे बदतर आर्थिक संकट में उतार-चढ़ाव से निकलने का रास्ता दिखाया है.’

गीता गोपीनाथ ने क्या कहा?
अपनी नई भूमिका के बारे में गीता गोपीनाथ ने कहा,’पिछले 3 साल में मुझे आईएमएफ के कामकाज को करीब से देखने का अनुभव मिला है. यह देखना सुखद है कि हमारे काम का दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं और लोगों पर सकारात्मक असर देखने को मिला है. कोरोना महामारी से अभी हमारा पीछा नहीं छूटा है, इसलिए आईएमएफ की भूमिका और अहम हो गई है.’

भारत में पढ़ाई
गीता गोपीनाथ अब हालांकि अमेरिका की निवासी हैं. उनका जन्‍म भारत में हुआ था. उन्‍होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से अर्थशास्त्र में ऑनर्स की पढ़ाई की. उन्‍होंने 1992 में यहां से ऑनर्स किया और फिर दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में ही मास्टर की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद 1994 में वह वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी चली गईं. साल 1996 से 2001 तक उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी की.

2001 से 2005 तक रहीं असिस्टेंट प्रोफेसर
गीता गोपीनाथ वर्ष 2001 से 2005 तक शिकागो यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर रहीं, जिसके बाद उन्‍होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में असिस्‍टेंट प्रोफेसर के तौर पर ज्‍वाइन किया. अगले पांच वर्षों में यानी 2010 में वह इसी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बन गईं. व्यापार एवं निवेश, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट, मुद्रा नीतियां, कर्ज और उभरते बाजारों की समस्याओं पर उन्‍होंने लगभग 40 शोध-पत्र भी लिखे हैं. (एजेंसी इनपुट के साथ)

क्यों अहमदिया मुस्लिमों से नफरत करता है पाकिस्तान, पेशावर से क्यों भाग रहे हैं वो
03-Dec-2021 3:22 PM (68)

 

पाकिस्तान के पेशावर में रहने वाले अहमदिया समुदाय के मुस्लिम अपना घर बेचकर सुरक्षित जगहों पर जा रहे हैं. उन्हें पाकिस्तान में रहने पर लगातार जान से मारने की धमकियां मिलती हैं. पेशावर में बड़ी संख्या में अहमदी अपना घर खाली कर चुके हैं. पाकिस्तान में 40 लाख अहमदी रहते हैं. 

पाकिस्तान में पिछले कई दशकों से अहमदिया समुदाय के मुस्लिमों के खिलाफ घृणा अभियान चल रहा है. इस समुदाय के लोग खुद को मुस्लिम मानते हैं लेकिन पाकिस्तान का संविधान उन्हें मुस्लिम कहने से रोकता है और उन्हें सार्वजनिक तौर पर धार्मिक कार्यकलाप से रोकता है. पाकिस्तान में अब उनके घरों और धार्मिक स्थानों पर हमले काफी बढ़ गए हैं.

दरअसल अहमदी ऐसा मुस्लिम समुदाय है जो हज़रत मोहम्मद को आखरी पैगम्बर स्वीकार नहीं करते. अहमदिया समुदाय के लोग हनफी इस्लामिक कानून का पालन करते हैं. इसकी शुरुआत हिंदुस्तान में मिर्ज़ा गुलाम अहमद ने की थी. ये लोग मिर्ज़ा गुलाम अहमद एक नबी यानी खुदा के दूत थे. जबकि इस्लाम के ज़्यादातर फिरके मोहम्मद साहब को आखिरी पैगंबर मानते हैं.

ये लोग नमाज़, दाढ़ी, टोपी, बातचीत व लहजे से मुसलमान लगते हैं, वे खुद को मुसलमान मानते भी हैं लेकिन उन्हीं के देश में दूसरे मुसलमान उन्हें मुसलमान नहीं मानते. वजह कि अहमदिया इस्मालिक मूल्यों में से एक 'पैगंबर मोहम्मद को आखिरी नबी' नहीं मानते. इसके चलते मुस्लिम देशों में भी वे मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं. 

मुहम्मद साहब को आखिरी नबी नहीं मानने की इनकी बात पर मुसलमान इनके खिलाफ रहते हैं. इसी फर्क के चलते अहमदिया समुदाय पाकिस्तान में दूसरे दर्जे का नागरिक बना हुआ है. अहमदिया मुस्लिमों की सबसे ज्यादा तादाद पाकिस्तान में है. पाक में इनकी संख्या 40 लाख से ज़्यादा बताई जाती है. भारत में करीब 10 लाख, नाइजीरिया में 25 लाख से ज्यादा, इंडोनेशिया में करीब 4 लाख है.

अहमदिया संप्रदाय के लोग बाकी मुस्लिमों के निशाने पर रहते हैं. पाकिस्तान में इनपर बहुत ज़ुल्म होता है. जिस वजह से इन्होंने कई देशों में शरण ली. उन देशों में जर्मनी, तंजानिया, केन्या और श्रीलंका शामिल हैं.. 

अहमदिया मुस्लिमों का कहना है गुलाम अहमद ने अपनी कोई शरीयत नहीं दी बल्कि मोहम्मद साहब की ही शिक्षाओं को फैलाया, लेकिन वो खुद भी एक नबी का दर्जा रखते थे.

पिछले सत्तर सालों में पाकिस्तान को विज्ञान में सिर्फ एक नोबेल पुरस्कार मिला है. अब्दुस सलाम दुनिया के पहले पाकिस्तानी और मुस्लिम नोबेल पुरस्कार विजेता हैं. 1979 की क्वांटम फिज़िक्स की ‘इलेक्ट्रॉनिक यूनिफिकेशन थ्योरी’ के लिए उन्हें ये सम्मान मिला. वो अहमदिया समुदाय से ताल्लुक रखते थे. 

अहमदिया समुदाय पाकिस्तान में दूसरे दर्जे का नागरिक बना हुआ है. वो अपनी इबादतगाह को मस्जिद नहीं कह सकते हैं. उनके सार्वजनिक रूप से कुरान की आयतें पढ़ने और हज करने पर भी पाबंदी है. बात यहीं पर नहीं खत्म होती है. अगर कोई अहमदिया अस्सलाम वालेकुम से किसी का अभिवादन कर दे तो उसे जेल में डाल दिया जाएगा. पाकिस्तान में जैसे-जैसे चरमपंथ बढ़ा है इन लोगों पर होने वाले हमले भी बढ़े हैं.. 

पाकिस्तान में रहने वाले अहमदिया अपनी इबादतगाह को मस्जिद नहीं कह सकते हैं. उनके सार्वजनिक रूप से कुरान की आयतें पढ़ने और हज करने पर भी पाबंदी है. पाकिस्तान में जैसे-जैसे चरमपंथ बढ़ा है इन लोगों पर होने वाले हमले भी बढ़े हैं. अगर ये लेख पाकिस्तान में लिखा जा रहा होता तो अहमदिया के आगे मुसलमान नहीं लिखा जा सकता था..

अहमदिया सम्प्रदाय के लोग अपने वर्तमान सर्वोच्च धर्मगुरु को नबी के रूप में ही मानते हैं। इसी मुख्य बिंदु को लेकर अन्य मुस्लिम समुदायों के लोग समय-समय पर सामूहिक रूप से इस समुदाय का घोर विरोध करते हैं तथा बार-बार इन्हें यह हिदायत देने की कोशिश करते हैं कि अहमदिया समुदाय स्वयं को इस्लाम धर्म से जुड़ा समुदाय घोषित न किया करें और इस समुदाय के सदस्य अपने-आप को मुसलमान भी न कहें।. 

इनको 'कादियानी' भी कहा जाता है. दरअसल इसकी शुरुआत गुरदासपुर के कादियान नामक कस्बे में 23 मार्च 1889 को मुसलमानो के बीच एक आंदोलन से हुई थी. यही आगे चलकर अहमदिया आंदोलन के नाम से जाना गया. यह आंदोलन बहुत ही अनोखा था. मुसलमानों के बीच एक व्यक्ति ने घोषणा की कि "मसीहा" फिर आयेंगे. मिर्जा गुलाम अहमद ने अहमदिया आंदोलन शुरू करने के दो साल बाद 1891 में अपने आप को "मसीहा" घोषित कर दिया. (news18.com)

भारत के आगे झुका चीन, श्रीलंका में तमिलनाडु के पास रोका सोलर प्‍लांट प्रॉजेक्‍ट
03-Dec-2021 3:21 PM (62)

 

कोलंबो. भारत के भारी विरोध के बाद चीन ने श्रीलंका में हाइब्रिड एनर्जी सिस्‍टम परियोजना के निर्माण को रोक दिया है. इन हाइब्रिड एनर्जी सिस्‍टम को 3 उत्‍तरी द्वीपों पर बनाया जाना था, जो भारत के बेहद करीब हैं. इससे पहले जनवरी में भारत ने श्रीलंका से चीनी कंपनी को सोलर पावर प्‍लांट बनाए जाने का ठेका दिए जाने पर विरोध दर्ज कराया था. श्रीलंका ने हाल ही में कोलंबो बंदरगाह पर ईस्‍ट कंटेनर डिपो के निर्माण का ठेका चीन की कंपनी को दिया है.

श्रीलंका ने पहले इस कंटेनर डिपो को बनाने का ठेका भारत और जापान को दिया था. श्रीलंका में चीन के दूतावास ने ट्वीट करके कहा था कि उत्‍तरी द्वीपों पर सोलर पावर प्‍लांट बनाए जाने के प्रॉजेक्‍ट को एक तीसरे देश के सुरक्षा को लेकर चिंता जताए जाने के बाद रद कर दिया है. चीन ने इस तीसरे देश के रूप में भारत का नाम नहीं लिया है. चीनी दूतावास ने यह भी कहा कि इसी कंपनी ने मालदीव में ठेका हासिल किया है.

चीन को टक्कर देगा यूरोपियन यूनियन, बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के लिए बनाया ये काउंटर प्लान
चीनी दूतावास ने एक बयान में कहा, ‘साइनो सोर हाइब्रिड टेक्‍नालॉजी ने तीसरे पक्ष के सुरक्षा चिंता जताए जाने के बाद उत्‍तरी द्वीपों पर हाइब्रिड एनर्जी सिस्‍टम बनाने के काम को रद्द कर दिया है. इसी कंपनी ने मालदीव के साथ 12 द्वीपों पर सोलर पावर प्‍लांट बनाने का 29 नवंबर को एक करार किया है. इससे पहले श्रीलंका ने खराब गुणवत्ता का हवाला देते हुए चीन से आए 20,000 टन जैविक खाद की पहली खेप को लेने से इनकार कर दिया था. इसके बाद गुस्‍साए चीन ने श्रीलंका के एक बैंक को ब्लैकलिस्ट कर दिया था.’

श्रीलंका ने चीन की बजाय भारत से खाद लेने का समझौता किया. भारत ने तत्‍काल श्रीलंका को खाद की आपूर्ति भी कर दी. दरअसल, श्रीलंका को दुनिया के पहले पूरी तरह से जैविक खेती वाले देश में बदलने के प्रयास में महिंदा राजपक्षे की सरकार ने रसायनिक खादों के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया था. इसके ठीक बाद श्रीलंकाई सरकार ने चीन की जैविक खाद निर्माता कंपनी किंगदाओ सीविन बायो-टेक समूह के साथ लगभग 3700 करोड़ रुपये में 99000 टन जैविक खाद खरीदने का एक समझौता किया था. किगदाओ सीविन बायो-टेक समूह को समुद्री शैवाल आधारित खाद बनाने में विशेषज्ञता प्राप्त है.

चीन की खाद के एक नमूने में हानिकारक बैक्टीरिया पाए गए
इसके बाद चीन से हिप्पो स्पिरिट नाम का एक शिप सितंबर में 20,000 टन जैविक खाद लेकर श्रीलंका पहुंचा. श्रीलंकाई सरकारी एजेंसी नेशनल प्लांट क्वारंटाइन सर्विस ने शिपमेंट को यह कहते हुए स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि इस खाद के एक नमूने में हानिकारक बैक्टीरिया पाए गए हैं. ये श्रीलंका में जमीन के अंदर उगने वाली फसलों जैसे आलू और गाजर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. (एजेंसी इनपुट के साथ) (news18.com)

बिना कपड़ों के मॉल में टहलती दिखी पेंट से नहाई महिला! गार्ड्स ने धक्के मारकर निकाला बाहर
03-Dec-2021 3:19 PM (88)

आजकल सोशल मीडिया पर लोग फेमस होने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं. अजीबोगरीब हरकतें करने के कारण उनके वीडियोज तेजी से वायरल भी होने लगते हैं. कई बार तो लोग भीड़भाड़ वाली जगहों पर पहुंचकर ऐसा कुछ कर जाते हैं कि हर कोई दंग हो जाता है. इन दिनों एक महिला के खूब चर्चे हैं जिसने एक मॉल में ऐसा ही कुछ कर दिया. ये महिला मॉल में बिना कपड़ों के टहल रही थी. उसने अपने शरीर पर सिर्फ पेंटलगाया था!

बेशक आप ये पढ़कर दंग हो गए होंगे मगर हाल ही में एक महिला ने ऐसा ही किया. फेमस प्लेबॉय मॉडल फ्रांसिया जेम्स ने अमेरिका के मियामी स्थित एक मॉल में बेहद ही अजीबोगरीब काम किया. महिला वहां बिना कपड़ों के पहुंच गई. उन्होंने अपने शरीर को पूरी तरह पेंट से ढक लिया था. और युवा लोगों को अखरोट बांटती नजर आ रही थीं. उनका पहनावा नटक्रैकर डॉल की तरह लग रहा था जिसके मुंह में अखरोट फंसा कर तोड़ा जाता है. ये डॉल दिखने में किसी रॉयल सेना के सैनिक जैसी लगती है.

अखरोट क्यों दे रही थी महिला
फ्रांसिया ने अपने इंस्टाग्राम पर इस पूरे वाकये का वीडियो शेयर कर लोगों को चौंका दिया. पहली नजर में जब लोगों ने उन्हें देखा तो ऐसा लगा कि उन्होंने सिर्फ टाइट कपड़े पहने हैं मगर जब नजदीक से देखा गया तो उन्होंने कुछ भी नहीं पहना था, सिर्फ अपने शरीर पर पेंटलगा लिया था. महिला का ये प्रैंक पुरुषों के नो-नट नवंबर चैलेंज को तोड़ने के लिए था. ये एक सोशल मीडिया चैलेंज होता है जिसमें लोग किसी भी तरह के शारीरिक संबंध से बचकर अपनी इच्छाओं पर संयम रखते हैं. वीडियो 21 नवंबर को शेयर किया गया है जब ये चैलेंज चल रहा था.

सिक्योरिटी गार्ड्स ने मॉल से निकाला बाहर
जैसे ही फ्रांसिया को गार्ड्स ने देखा वो भी कुछ पल के लिए दंग रह गए और तुरंत ही उन्हें मॉल से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया. वीडियो में महिला ये कहते नजर आ रही है- मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि मुझे धक्के मारकर बाहर निकाला जा रहा है. इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को 17 लाख से ज्यादा लोगों ने देख लिया है. आपको बता दें कि फ्रांसिया एक एडल्ट मॉडल हैं और इंस्टाग्राम पर वो हमेशा ही अपनी बोल्ड फोटोज और वीडियो शेयर करती रहती हैं. पहले भी वो भीड़भाड़ वाले इलाकों में अजीबोगरीब हरकतें करती देखी गई हैं. (news18.com)

Instagram पर सबसे पतली कमर दिखाने की सनक, मॉडल ने कराई भयानक सर्जरी
03-Dec-2021 3:17 PM (66)

 

मॉडल लुआना सैंडीन ने अपनी कमर का साइज़ घटाने के लिए कोलंबिया में वेस्टलाइन सर्जरी कराई है. उन्होंने ऐसा सिर्फ इसलिए किया है क्योंकि वे इस्टाग्राम पर सबसे पतली कमर वाली मॉडल दिखना चाहती हैं.

Daily Star की रिपोर्ट के मुताबिक हमेशा से लुआना चाहती थीं कि वे बार्बी डॉल जैसी पतली कमर में दिखें, ऐसे में वे किसी तरह का रिस्क उठाने के लिए तैयार थीं. उन्होंने अपने फॉलोअर्स को सोशल मीडिया के ज़रिये बताया है कि वे रिकवर कर रही हैं. 

उन्होंने बताया है कि उन्होंने किसी तरह का रिब रिडक्शन नहीं कराया है, बल्कि अपने हिप्स के किनारे से चर्बी हटवाई है. वे अपनी सर्जरी के बाद से रिजल्ट्स से काफी खुश हैं. 

लुआना सैंडीन का दावा है कि जब उनके फॉलोअर्स उन्हें देखेंगे तो वे चौंक जाएंगे. उन्होंने बताया कि उन्होंने जितना दर्द सहा है, वो उनके बचपन के सपने से काफी कम है. उन्होंने इससे पहले भी कई बार अपने खुलासों को लेकर सुर्खियां बटोरी हैं. 

इससे पहले लुआना कई बार ये दावा कर चुकी हैं कि वे खुद को लेकर सबसे ज्यादा सजग हैं. उनका कहना है कि वे खुद को ही डेट करना चाहती हैं और खुद के साथ ही खुश हैं. 

इतना ही नहीं लुआना ने कुछ वक्त पहले इसलिए भी सुर्खियां बटोरी थीं क्योंकि उन्होंने फुटबॉलर लियोन मैसी के आंसुओं से भीगे रूमाल की कीमत करोड़ों में लगाई थी.  (news18.com)

हवाई जहाज में चैन की नींद के लिए फ्लाइट अटेंडेंट ने बताए अनोखे उपाय, घोड़े बेचकर सोने की है गारंटी!
03-Dec-2021 3:16 PM (48)

 

अगर आपने फ्लाइट में ट्रैवेल किया होगा तो निश्चित तौर पर आप जानते होंगे कि प्लेन में सोना कितना मुश्किल है. हवा में उड़ने के कारण कान का बंद हो जाना, सिर भारी रहना, अन्य यात्रियों का शोर, जलती लाइटें, स्टाफ की तरफ से की जाने वाली घोषणाएं आदि जैसी कई चीजें फ्लाइट में किसी की भी नींद में खलल डाल देती हैं. मगर अब इस समस्या का हल एक महिला ने बताया है जिसकी बात पर आपको विश्वास भी होगा क्योंकि महिला लंबे वक्त तक फ्लाइट अटेंडेंट रह चुकी है.

अमेरिका की रहने वाली पूर्व फ्लाइट अटेंडेंट कैट कमलानी ने 6 साल तक अटेंडेंट के तौर पर काम किया है. वो सोशल मीडिया पर काफी फेमस हैं और टिकटॉक, इंस्टाग्राम समेत अन्य प्लेटफॉर्म्स पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं. डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में उन्होंने एक वीडियो टिकटॉक पर शेयर किया है जिसमें उन्होंने बताया कि फ्लाइट में चैन की नींद यात्री कैसे सो सकते हैं. इसके लिए उन्होंने कुछ टिप्स दिए हैं.

फ्लाइट में इन चीजों को जरूर ले जाएं-
कैट ने बताया कि अगर कोई फ्लाइट पर यात्रा कर रहा है तो ये मानकर चले कि उनका 2 ही तरह की फ्लाइट अटेंडेंट से पाला पड़ सकता है. एक वो जो कैबिन की लाइट सोने के वक्त बुझा देती हैं और दूसरी वो जो नहीं बुझातीं. ऐसे में कैट ने बताया कि लोगों को अपने साथ आंखों पर लगाने वाला मास्क जरूर लेकर आना चाहिए. साथ ही, अन्य यात्रियों के शोर-गुल से बचने के लिए नॉइस-कैंसेलिंग हेडफोन या फिर आम से ईयरप्लग भी कारगर होंगे. इसके अलावा लैवेंडर एसेंशियल ऑयल लाना भी सुविधाजनक होता है क्योंकि ये एग्जाइटी और डिप्रेशन को कम करता है.

कपड़ों का भी रखें ध्यान
कैट ने बताया कि फ्लाइट में सराउंडिंग के साथ-साथ आप जो कपड़े पहनते हैं वो भी नींद आने में बहुत मदद करता है. उनका कहना है कि लोगों को दूसरों के बारे में बिना सोचे ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जो आरम दें ना कि सिर्फ उनका लुक अच्छा हो. ऐसे में नींद जल्दी आ जाती है. अगर कोई रातभर की यात्रा करने वाला है तो उसे आमतौर पर पैयजामे पहनने चाहिए जिससे आराम के चलते आसानी से नींद आ जाए. (news18.com)

गलती पकड़े जाने पर झेंप जाता है कुत्ता, मुस्कुराते हुए डॉग का Video देख लोटपोट हो जा रहे लोग!
03-Dec-2021 3:15 PM (69)

डॉग लवर्स अपने पालतू कुत्तों से इतना प्यार करते हैं कि उन्हें उनकी हर एक हरकत पर भयंकर हंसी आती है. उनकी एक-एक चीज पर वो दिल हार जाते हैं. वैसे कुत्ते कई बार अनोखी चीजें करते भी हैं जिसपर दिल हार जाना लाजमी है. सोशल मीडिया पर कुत्तों के क्यूट वीडियोज अक्सर वायरल होते रहते हैं. हाल ही में एक ऐसा वीडियो काफी देखा जा रहा है जिसमें एक कुत्ता मुस्कुरा रहा है. कुत्ते की मुस्कुराहट देखकर आपको हंसी तो आएगी ही पर उसका कारण जानकर आपको और भी हंसी आ जाएगी.

सोशल मीडिया साइट रेडिट पर अमेरिका के वॉशिंग्टन (में रहने वाले यूजर u/danaeewhite ने हाल ही में अपने गोल्डर रीट्रीवर कुत्ते का एक वीडियो शेयर किया है. 30 नवंबर को पोस्ट किए गए इस वीडियो में उनका पेट डॉग उनको प्यार दिखाता नजर आ रहा है. बीच-बीच में ऐसा लगता है जैसे वो मुस्कुरा रहा है. वीडियो के साथ यूजर ने बताया जब उनके कुत्ते को पता चलता है कि उसने कोई गलती की है और अब उसे डांट पड़ेगी तो वो झेंपकर मुस्कुराने लगता है.

लोगों ने बताई अपने पालतू कुत्ते की हरकतें
इस वीडियो पर कमेंट कर लोग अपने पालतू कुत्ते के बारे में भी बता रहे हैं. एक शख्स ने कमेंट में लिखा- मेरा 3 साल का कुत्ता भी ऐसा करता है. शायद उसे इस बात ये डर लगता है कि उस स्थिति को मैं कैसे संभालूंगा और कहीं मैं उसे बड़ी सजा ना दे दूं. एक अन्य शख्स ने बताया कि उनका कुत्ता ऐसा तब करता है जब उसे नहाने के लिए कहा जाता है.

एक शख्स ने तो अपने कुत्ते के बारे में बताकर सबको दंग कर दिया. उसने बताया कि उसके कुत्ते के पास एक सॉरी कार्ड है और जब भी वो कोई गलती करता है तो सॉरी कार्ड मुंह से पकड़कर माफी मांगने लगता है. एक शख्स ने कुत्ते की मस्ती के बारे में बताते हुए कहा कि अगर उनका कुत्ता उनकी तकिया को फाड़ भी देता है तो वो उसे डांटते नहीं है. तब वो तकिया कुत्ते की हो जाती है. इससे वो भी खुश हो जाते हैं और कुत्ता भी खुश हो जाता है. वहीं एक और शख्स ने कहा कि जब उनके कुत्ते को पता चलता है कि वो खतरे में है तो वो अपने मुंह से अपनी ही दुम पकड़ने की कोशिश करने लगता है. (news18.com)

आईएमएफ की पहली उप प्रबंध निदेशक बनेंगी गीता गोपीनाथ
03-Dec-2021 3:14 PM (36)

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने घोषणा की है कि गीता गोपीनाथ अगले साल की शुरुआत में पहली उप प्रबंध निदेशक के रूप में पदभार संभालेंगी.

  (dw.com)

भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की मौजूदा प्रबंधक निदेशक क्रिस्टालिना जोर्जिएवा के अधीन सेवा करने वाली पहले उप प्रबंध निदेशक के रूप में ज्यॉफ्री ओकामोतो की जगह लेंगी. आईएमएफ में पहली बार ऐसा होगा जब दो महिलाएं शीर्ष पदों पर काबिज होंगी.

आईएमएफ की प्रबंध निदेशक जोर्जिएवा ने कहा कि यह देखते हुए कि महामारी ने हमारे सदस्य देशों के सामने व्यापक आर्थिक चुनौतियों के पैमाने और दायरे में वृद्धि की है, मेरा मानना है कि गीता के पास ठीक वैसी ही विशेषज्ञता है जिसकी हमें इस समय एफडीएमडी भूमिका के लिए जरूरत है.

जोर्जिएवा के मुताबिक, "वास्तव में उनका विशेष कौशल मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में कोष में उनके वर्षों के अनुभव के साथ-साथ उन्हें विशिष्ट रूप से योग्य बनाता है. इसके लिए वह सही समय पर सही व्यक्ति हैं."

जोर्जिएवा ने यह भी कहा कि आईएमएफ की वरिष्ठ प्रबंधन टीम की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों में कुछ बदलाव किया जा रहा है. जो विशेष रूप से एफडीएमडी निगरानी और संबंधित नीतियों का नेतृत्व करेगा.

आईएमएफ के मुताबिक गोपीनाथ 21 जनवरी 2022 को एफडीएमडी के रूप में अपनी नई पारी शुरू करेंगी. 2019 की शुरूआत में मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में आईएमएफ में शामिल होने से पहले गोपीनाथ हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन और अर्थशास्त्र के जॉन ज्वानस्ट्रा में प्रोफेसर थीं.

गीता ने एक बयान में कहा, "मैं आईएमएफ की अगली एफडीएमडी बनने के लिए सम्मानित और विनम्र हूं. जैसा कि महामारी ने हम पर अपनी पकड़ जारी रखी है, कोष का काम कभी भी अधिक महत्वपूर्ण नहीं रहा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग कभी भी अधिक महत्वपूर्ण नहीं रहा है."

गोपीनाथ की नई नियुक्ति अप्रत्याशित थी क्योंकि उन्होंने अक्टूबर में कहा था कि उन्होंने जनवरी 2022 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय लौटने की योजना बनाई थी.

गोपीनाथ का जन्म भारत में हुआ था और उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से अर्थशास्त्र में ऑनर्स की पढ़ाई की. उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स की पढ़ाई करने के बाद बाकी की पढ़ाई अमेरिका में जाकर की.

एए/सीके (रॉयटर्स)
 

क्या रूस वास्तव में यूक्रेन पर हमला कर सकता है?
03-Dec-2021 3:08 PM (39)

नाटो और यूरोपीय संघ के साथ शीर्ष अमेरिकी राजनयिकों ने यूक्रेन पर कोई भी सैन्य कार्रवाई शुरू करने के खिलाफ रूस को चेतावनी दी है.

  (dw.com)

इस साल अक्टूबर के महीने में सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो साझा किए गए जिनमें रूसी सैनिकों, टैंकों और मिसाइलों को यूक्रेन की सीमा की ओर बढ़ते हुए दिखाया गया था. उस समय यूक्रेन ने कहा था कि रूस ने अपनी सीमा के पास 1,15,000 सैनिकों को तैनात किया ह  यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगी लंबे समय से रूस पर यूक्रेन के अलगाववादियों को हथियारों की आपूर्ति करने का आरोप लगाते रहे हैं. यूक्रेन के मुताबिक उन्हीं अलगाववादी समूहों ने 2014 में रूस को क्रीमिया पर कब्जा करने में मदद की थी. रूस ने उन आरोपों से इनकार किया था.     

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने पिछले महीने कहा था कि वॉशिंगटन रूस की "असाधारण" गतिविधियों के बारे में चिंतित है. उन्होंने मॉस्को को 2014 की गंभीर गलती करने से बचने की चेतावनी दी.

रूस की कूटनीतिक चाल?
कुछ विश्लेषकों के मुताबिक रूस ने इस साल के वसंत में यूक्रेनी सीमा पर अपने सैनिकों की संख्या में वृद्धि की. उनकी राय में, रूस ऐसा करके राजनयिक फायदा हासिल करना चाहता था. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा शिखर सम्मेलन की घोषणा के बाद रूस द्वारा सैनिकों को सीमा से हटा दिया गया था. कुछ जानकारों के मुताबिक रूस का ताजा कदम एक बार फिर नया दबाव बनाने की कोशिश हो सकता है, क्योंकि अमेरिका और रूस के राष्ट्रपतियों के बीच एक और शिखर वार्ता होने की संभावना है.      

कुछ पर्यवेक्षकों के अनुसार यूक्रेन ने नाटो सदस्य तुर्की से ड्रोन हासिल करके रूस को नाराज किया है, अलगाववादियों के खिलाफ तुर्की ड्रोन का उपयोग करने वाले यूक्रेनी सेना ने ड्रोन की फुटेज जारी होने के बाद सीमा पर रूस की सेना की बढ़ोतरी की सूचना मिली थी.

रूस का आरोप
रूस ने पश्चिम पर काला सागर में सैन्य अभ्यास करने और यूक्रेन को आधुनिक हथियार मुहैया कराने का आरोप लगाया है. रूस ने यह भी मांग की है कि नाटो गारंटी दे कि उसकी सैन्य महत्वाकांक्षाएं पूर्व की ओर नहीं फैलेंगी.

अमेरिका, नाटो और यूरोप ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने के खिलाफ रूस को बार-बार चेतावनी दी है. अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकेन भी जल्द ही अपने रूसी समकक्ष सेर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे. इसी हफ्ते की शुरुआत में लावरोव ने यूक्रेन के सैन्य इरादों पर चिंता व्यक्त की थी. उनके मुताबिक कीव ने पूर्वी सीमा पर 1,25,000 सैनिकों को तैनात किया है.
जॉर्जिया जैसा ना हाल हो जाए

रूस पश्चिमी देशों के आरोपों से इनकार करता आया है. मॉस्को के मुताबिक इस साल के वसंत में रूस के बारे में इसी तरह की चिंता व्यक्त की जा रही थी, लेकिन रूस द्वारा ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई. रूस ने 2008 में जॉर्जिया के कुछ हिस्सों पर बमबारी की थी. जॉर्जिया तब अपने ही अलगाववादियों को निशाना बना रहा था. रूस की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के एक हालिया बयान में कहा गया है कि यूक्रेन को जॉर्जिया के नाटो में शामिल होने जैसे निर्णय लेने से बचना चाहिए क्योंकि जॉर्जिया को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी.

कार्नेजी मॉस्को सेंटर के आलेक्जेंडर बानोव ने समाचार एएफपी को बताया कि वह "बिना किसी कारण के आक्रमण की शायद ही कल्पना कर सकते हैं." वे सवाल करते हैं कि इस हमले से रूस को क्या हासिल होगा.

एए/सीके (एएफपी)
 

अपने जन्म के लिए डॉक्टर पर केस कर लड़की ने जीते करोड़ों
03-Dec-2021 3:02 PM (56)

ब्रिटेन की एक युवती ने अपनी मां के डॉक्टर पर इस बात के लिए मुकदमा कर दिया कि उसे जन्मने क्यों दिया गया. कोर्ट ने युवती के पक्ष में फैसला दिया है.

    डॉयचे वैले पर विवेक कुमार की रिपोर्ट-

ईवी टूम्स नाम की इस युवती ने ‘अनुचित गर्भाधान' के आधार पर अपनी मां के डॉक्टरों पर मुकदमा किया है. टूम्स को स्पाइना बाइफिडा नाम का रोग है. इस रोग के मरीजों की रीढ़ की हड्डी में कमी होती है जिस कारण कई बार तो उन्हें 24 घंटे तक ट्यूब से बंधकर गुजारने होते ह 

ब्रिटिश मीडिया ने खबर दी है कि 20 साल की ईवी टूम्स ने डॉ. फिलिप मिचेल पर मुकदमा किया. उनका कहना था कि डॉ. मिचेल उनकी मां को सही सलाह देने में नाकाम रहे जिस कारण उनका जन्म हुआ. टूम्स का दावा है कि अगर डॉ. मिचेल ने उनकी मां को बताया होता कि बच्चे को स्पाइना बाईफिडा के साथ पैदा होने का खतरा कम करने के लिए फॉलिक एसिड लेना होगा, तो उनकी मां गर्भवती ही ना होतीं और उनका जन्म भी ना होता.

करोड़ों का हर्जाना
ब्रिटिश अखबार डेली मेल के मुताबिक लंदन हाई कोर्ट की जज रोसलिंड कोए ने एक ऐतिहासिक फैसले में ईवी टूम्स की दलील स्वीकार कर ली. जज ने फैसला दिया कि यदि ईवी की मां को सही सलाह दी गई होती तो वह गर्भवती होने की कोशिश टाल सकती थी.

ईवी टूम्स को बड़े हर्जाने का अधिकारी तय करते हुए जज ने कहा, "वैसे हालात में गर्भ देर से ठहरता और बच्चा स्वस्थ पैदा होता.” ईवी के वकीलों ने कहा कि अभी हर्जाने की राशि की गणना नहीं की गई है लेकिन यह भारी-भरकम राशि होगी क्योंकि इसमें ईवी के पूरे जीवन की देखभाल का खर्च जोड़ा जाएगा.

ईवी की मां ने अदालत को बताया था कि अगर डॉ. मिचेल ने उन्हें उचित परामर्श दिया होता तो वह बच्चा पैदा करने की योजना टाल सकती थीं. उन्होंने जज को बताया, "मुझे बताया गया था कि अगर मेरा खान-पान अच्छा रहा है तो मुझे फॉलिक एसिड लेने की जरूरत नहीं है.”

पिछले महीने हुई सुनवाई के दौरान 50 वर्षीय कैरोलाइन ने बताया कि फरवरी 2001 में वह डॉ मिचेल के पास गई थीं. उन्होंने कहा, "परिवार की शुरुआत एक बहुत कीमती फैसला था क्योंकि मेरे अपने माता-पिता की मौत तब हो गई थी जब मैं बहुत छोटी थी. इसलिए हम बिना डॉक्टर से बात किए यौन संबंध बनाने से भी परहेज कर रहे थे.”

कैरोलाइन ने दावा किया कि फॉलिक एसिड को लेकर डॉ. मिचेल से बात तो हुई लेकिन उन्होंने स्पाइना बाईफिडा की रोकथाम के लिए इसकी जरूरत के बारे में कुछ नहीं किया.

क्यों अहम है फैसला
ईवी को न्यूरल ट्यूब में खामी से जुड़ी एलएमएम नाम की बीमारी है जो स्थायी अपंगता का कारण है. नवंबर 2001 में उनके जन्म के कुछ समय बाद ही इसका पता चल गया था.  डॉक्टर मिचेल की तरफ से पैरवी करने उतरे वकील माइकल डे नावारो ने कहा कि इसमें डॉक्टर की जिम्मेदारी नहीं बनती है. उन्होंने दलील दी कि हो सकता है कैरोलाइन रोडवे डॉक्टर से मिलने से पहले ही गर्भवती हों. उन्होंने कहा कि उनकी मुवक्किल ने उचित सलाह दी थी. उन्होंने कहा डॉक्टर ने कहा होगा कि अच्छी खुराक के चलते फॉलिक एसिड का असर ज्यादा नहीं होगा लेकिन इसे बिल्कुल ना लेने की बात उन्होंने नहीं कही.

हालांकि जज ने उनकी यह दलील स्वीकार नहीं की और ईवी टूम्स के पक्ष में फैसला दिया. अपने फैसले में जज ने कहा, "इन हालात में मैं पाती हूं कि श्रीमती टूम्स तब गर्भवती नहीं थीं. उन्होंने फॉलिक एसिड लेने की सलाह नहीं दी गई. उन्हें स्पाइना बाइफिडा या न्यूरल ट्यूब से फॉलिक एसिड के संबंध के बारे में भी नहीं बताया गया.”

लंदन हाई कोर्ट के इस फैसले को ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि इसका अर्थ होगा कि यदि कोई स्वास्थ्यकर्मी जन्म और गर्भ से संबंधी गलत सलाह देता है और उसकी वजह से बच्चा अस्वस्थ पैदा होता है, तब उसे कानूनन जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. (dw.com)
 

भारत ने भी किया ‘हत्यारे रोबोट’ पर प्रतिबंध का विरोध
03-Dec-2021 2:56 PM (45)

‘किलर रोबोट’ यानी वे हथियार जो बिना इंसानी दखल के घातक हमले कर सकते हैं, विवाद का विषय बने हुए हैं. भारत और अमेरिका सहित कई देश इन पर प्रतिबंध का विरोध कर रहे हैं.

  (dw.com)

अमेरिका ने ‘किलर रोबोट' कहे जाने वाले हथियारों पर प्रतिबंध लगाने या उनके इस्तेमाल को नियमबद्ध करने की मांग खारिज कर दी है. अमेरिका का प्रस्ताव है कि इनके इस्तेमाल के लिए एक अचार संहिता बनाई जा सकती है.

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश किया है कि ‘किलर रोबोट' कहे जाने वाले हथियारों की एक अचार संहिता बनाई जाए. इन हथियारों पर प्रतिबंध लगाने या उनका इस्तेमाल तय नियमों के अंदर करने के कानूनी बंधन सुनिश्चित करने की मांग को खारिज कर उसने यह प्रस्ताव रखा है.

जेनेवा में एक बैठक में बोलते हुए अमेरिकी प्रतिनिधि ने कानून बनाकर स्वचालित घातक हथियारों का इस्तेमाल नियमबद्ध करने के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया. जॉश डोरसिन चाहते थे कि ऐसे हथियारों के इस्तेमाल को लेकर एक साझा पक्ष खोजा जाए जिस पर सभी सहमत हो सकें.

चार साल से जारी बातचीत
इस बैठक में दुनियाभर के विशेषज्ञ शामिल थे. ये लोग अगले हफ्ते होने वाली कॉन्वेंशन ऑफ सर्टेन कन्वेंशनल वेपंस में होने वाली बातचीत की तैयारी कर रहे हैं. इस मौके पर डोरसिन ने कहा, "हमारा विचार है कि आगे बढ़ने का यही सबसे अच्छा तरीका है कि एक अचार संहिता बनाई जाए, जिसमें किसी तरह की बाध्यता ना हो.”

संयुक्त राष्ट्र 2017 से ऐसी बातचीत करवा रहा है कि स्वचालित घातक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर किसी तरह विभिन्न देशों के बीच सहमति बन जाए. शांति कार्यकर्ता और कई देश मांग कर चुके हैं कि ऐसे हथियारों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए जो बिना मनुष्य के दखल किए ही घातक हमले कर सकते हैं.

नवंबर 2018 में संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंटोनियो गुटेरेश ने भी इस मांग का समर्थन किया था कि जो हथियार बिना इंसानी दखल के हमला करने का फैसला कर सकते हैं उन पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए. लेकिन अब तक इस बात को लेकर किसी तरह की सहमित नहीं बन पाई है.

भारत ने भी किया विरोध
गुरुवार को बहस के दौरान कई देशों ने ऐसे हथियारों पर प्रतिबंध का विरोध किया. इनमें अमेरिका के अलावा भारत भी शामिल था. डोरसिन ने कहा कि अचार संहिता "विभिन्न देशों को जिम्मेदाराना व्यवहार और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के लिए प्रेरित करेगी.”

मानवाधिकार कार्यकर्ता इस बात से सहमत नहीं हैं. स्टॉप किलर रोबोट्स अभियान की क्लेयर कोनबॉय कहती हैं, "देशों के पास एक मौका है यह सुनिश्चित करने का ताकत पर अर्थपूर्ण मानव नियंत्रण बना रहे और ऐसी दुनिया ना बन जाए जहां जिंदगी व मौत के फैसले मशीनों के हाथ में हों.”

मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच में हथियारों पर रिसर्च करने वालीं बोनी डॉचरी ने एक बयान में कहा, "फिलहाल चल रहीं कूटनीतिक वार्ताओं के बजाय किलर रोबोट्स पर कानून बनाने के लिए एक निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत विचार-विमर्श करना ज्यादा प्रभावशाली होगा.”

वीके/एए (एएफपी)
 

मुझे पैदा क्यों होने दिया? लड़की ने डॉक्टर पर किया केस, जीता 1 करोड़
03-Dec-2021 12:58 PM (96)

 

लंदन. क्या कभी आपने सोचा है कि किसी लड़की ने खुद को पैदा करने के लिए डॉक्टर पर ही केस कर दिया हो? शायद नहीं. मगर, ब्रिटेन (Britain) में एक 20 साल की लड़की ने ऐसा ही किया. लड़की दिव्यांग है. उसने अपनी मां के डॉक्टर पर बड़ी ही अजीबोगरीब वजह से केस किया था. लड़की का दावा था कि उसे ‘पैदा नहीं होना चाहिए’ था. डॉक्टर चाहता तो उसे पैदा होने से रोक सकता था. अब लड़की ने ये केस जीत लिया है. मुआवजे के तौर पर उसे कई मिलियन डॉलर का पेमेंट किया गया है. ब्रिटेन की स्टार शोजम्पर एवी टॉम्ब्स ने ‘स्पाइना बिफिडा’ के साथ पैदा होने के कारण अपनी मां के डॉक्टर के खिलाफ केस किया था. स्पाइनल डिफेक्ट का मतलब है कि एवी को कभी-कभी ट्यूबों के साथ 24 घंटे बिताने पड़ते थे.

द सन’ की रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है. शोजम्पर एवी टॉम्ब्स अपनी मां को ठीक से सलाह देने में विफलता के लिए डॉ. फिलिप मिशेल को अदालत ले गईं. एवी टॉम्ब्स का दावा है कि अगर डॉ. मिशेल ने उनकी मां को बताया होता कि अपने बच्चे को प्रभावित करने वाले स्पाइना बिफिडा के जोखिम को कम करने के लिए उन्हें फोलिक एसिड की खुराक लेने की जरूरत है, तो वह दिव्यांग पैदा नहीं होती.

27 साल की महिला को था बॉयफ्रेंड पर बेवफाई करने का शक, उठाया ऐसा कदम कि सभी के उड़ गए होश

द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, जज रोसलिंड कोए क्यूसी ने बुधवार को लंदन हाईकोर्ट में दिए अपने ऐतिहासिक फैसले में एवी का समर्थन दिया. जज ने फैसला सुनाया कि अगर एवी की मां को ‘सही सलाह दी गई होती तो वह गर्भवती होने के प्रयासों में कुछ देर करतीं.’ उन्होंने एवी को एक बड़े मुआवजे का अधिकार देते हुए कहा कि परिस्थितियों के अनुसार कुछ समय बाद वह गर्भवती होतीं. परिणामस्वरूप एक सामान्य और स्वस्थ बच्चा पैदा होता.

एवी की मां ने कोर्ट को बताया, ‘मुझे सलाह दी गई थी कि अगर मैं अच्छी डाइट लेती हूं, तो मुझे फोलिक एसिड नहीं लेना पड़ेगा.’ इस फैसले को एक अहम निर्णय माना जाता है, क्योंकि इसका मतलब है कि एक डॉक्टर को गलत पूर्व-गर्भधारण सलाह के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. अगर इसका असर नवजात शिशु पर पड़ता है. (news18.com)

दक्षिण अफ्रीका में एक दिन में दोगुने हुए ओमिक्रॉन संक्रमित, लगाना पड़ा लॉकडाउन
03-Dec-2021 12:58 PM (88)

 

डरबन. कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन दुनियाभर में तेजी से फैल रहा है. पिछले एक हफ्ते में ही यह दक्षिण अफ्रीका से लेकर 25 देशों में पहुंच चुका है. सबसे ज्यादा खराब स्थिति साउथ अफ्रीका में चल रही है. यहां एक दिन में ही ओमिक्रॉन केस दोगुने हो गए हैं. हालात कितने चिंताजनक हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लग सकता है कि साउथ अफ्रीका में लेवल वन का लॉकडाउन लगा दिया गया है. बाजार बंद चल रहे हैं, सड़कें सूनी पड़ चुकी हैं और लोग फिर अपने घर की चहारदीवारी में कैद दिख रहे हैं.

साउथ अफ्रीका में कुल पांच तरह के लॉकडाउन लगाए जा सकते हैं. इसमें सबसे सख्त लॉकडाउन पांचवीं श्रेणी का माना जाता है. अभी के लिए लॉकडाउन की पहली श्रेणी से ही लोग परेशान होने लगे हैं. व्यापारी बता रहे हैं कि उनका बिजनेस पूरी तरह ठप हो चुका है. नुकसान इसलिए भी हो रहा है क्योंकि कई देशों ने साउथ अफ्रीका पर ट्रैवल बैन लगा दिया है. इस लिस्ट में अमेरिका, कनाडा, ब्राजील, थाइलैंड, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर जैसे कई देश शामिल हैं.

24 नवंबर को सामने आया था पहला केस
ओमिक्रॉन वेरिएंट का पहला मामला साउथ अफ्रीका में 24 नवंबर को सामने आया था. उस समय वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि उनके देश में कोरोना का एक नया वेरिएंट पाया गया है, जो 30 से ज्यादा बार म्यूटेट हुआ है. ऐसा डर है कि ये वेरिएंट दूसरे वेरिएंट की तुलना में काफी तेजी से फैल सकता है. देश में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. पिछले 24 घंटे में भी 11 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं. अस्पताल मरीजों से भरे हुए हैं और स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा रही हैं.

गुआटेंग प्रांत से लिए गए थे 77 सैंपल
15 नवंबर के आस-पास गुआटेंग प्रांत से 77 सैंपल लिए गए और इनकी सीक्वेंसिंग की गई. गहन जांच पड़ताल के बाद एक्सपर्ट्स इस नतीजे पर पहुंचे कि ये कोरोना वायरस का नया वेरिएंट है. इसका जीन इसलिए पकड़ में नहीं आ रहा था, क्योंकि यह म्यूटेट हो चुका है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने इस नए वेरिएंट का नाम B.1.1.529, यानी ओमिक्रॉन रखा. 26 नवंबर को इसे चिंताजनक वेरिएंट घोषित किया गया. इसके बाद से 24 देशों में ये नया वेरिएंट पाया जा चुका है.

सभी मरीजों में अभी हल्के लक्षण
इस बीच ओमिक्रॉन वेरिएंट के बारे में दुनिया को बताने वाले दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने राहत देने वाला दावा किया है. इन वैज्ञानिकों ने कहा है कि कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट में प्राइमरी लेवल पर डेल्टा वेरिएंट से हल्के लक्षण मिले हैं. दक्षिण अफ्रीकी मेडिकल एसोसिएशन के प्रमुख डॉ. एंजेलिक कोएत्जी ने कहा कि नए वेरिएंट में मरीजों को थकान, शरीर में दर्द जैसे लक्षण मिल रहे हैं. (news18.com)

ओमिक्रॉन के खतरे के बीच दक्षिण कोरिया में गंभीर रूप से बीमार कोविड मरीजों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर
03-Dec-2021 10:46 AM (84)

सियोल, 3 दिसम्बर| दक्षिण कोरिया के दैनिक कोरोना वायरस मामले शुक्रवार को 5,000 से नीचे हो गए, लेकिन गंभीर रूप से बीमार रोगियों की संख्या अभी तक एक और रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई। देश नए ओमिक्रॉन वेरिएंट पर बढ़ती चिंताओं के बीच निजी समारोहों को सीमित करने की तैयारी कर रहा है। योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, कोरिया रोग नियंत्रण और रोकथाम एजेंसी (केडीसीए) के अनुसार, देश में 4,944 नए कोविड मामले दर्ज किए गए, जिससे कुल मामले बढ़कर 4,62,555 हो गए।

गंभीर रूप से बीमार रोगियों की संख्या गुरुवार को 733 के पिछले रिकॉर्ड उच्च स्तर से बढ़कर 736 हो गई।

शुक्रवार का मामला पिछले दिन सामने आए 5,266 मामलों से नीचे है। लगातार दो दिनों तक दैनिक मामले 5,000 से ऊपर रहे।

इस सप्ताह छह ओमिक्रॉन वेरिएंट के संक्रमणों की पुष्टि की गई है और आशंका लगाई जा रही है कि मामले तेजी से बढ़ेंगे। (आईएएनएस)

Elon Musk ने कसा तंज! ट्विटर के नए सीईओ Parag Agrawal को 'बनाया' तानाशाह स्टालिन
03-Dec-2021 10:31 AM (84)

नई दिल्ली. इलेक्ट्रिक कार निर्माता टेस्‍ला और स्‍पेस-एक्‍स के फाउंडर एलन मस्क का एक और ट्वीट चर्चा का विषय बन गया है. एलन मस्क ने एक पोस्ट करते हुए ट्विटर के नए सीईओ पराग अग्रवाल और पूर्व सीईओ जैक डोर्सी पर निशाना साधा है. एलन मस्क ने 1 दिसंबर को सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन की फोटोशॉप्ड तस्वीर में पराग अग्रवाल और जैक डोर्सी का मीम शेयर किया.

मस्क के शेयर किए गए मीम में दो तस्वीरें थीं- पहली तस्वीर में सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन के चेहरे पर ट्विटर के नए CEO Parag Agrawal का चेहरा लगाया गया है और उनके साथ निकोले येज़ोव के चेहरे पर जैक डोर्सी का चेहरा फोटोशॉप्ड किया गया है. दूसरी तस्वीर में भी वही तस्वीर है, मगर इसमें निकोले येज़ोव (जैक डोर्सी) नहीं है. उन्‍‍‍‍‍हें पानी में उछाल दिखाया गया है, जैसे कि पानी में कुछ फेंका गया हो. पहली तस्वीर में पानी शांत है.

क्या है इस तस्वीर का इतिहास
किसी समय में निकोले येज़ोव जोसेफ स्टालिन के करीबी और विश्वासपात्र थे. निकोले येज़ोव ने स्टालिन के निर्देश पर सामूहिक गिरफ्तारियां, फांसियां और कई अत्याचारों को अंजाम दिया था. स्टालिन के खिलाफ कथित तौर पर साजिश रचने के आरोप में येज़ोव का 1940 में कत्ल करवा दिया दिया गया था. ये तस्वीर लगभग 10 साल पहले मॉस्को की नहर के पास ली गई बताई जाती है.

पराग ने संभाली डोर्सी की कुर्सी
भारतीय मूल के टेक एग्जीक्यूटिव पराग अग्रवाल 2011 से ट्विटर से जुड़े हुए हैं. उन्‍हें 29 नवंबर 2021 को ट्विटर का सीईओ बनाया गया था. उन्होंने डोर्सी की जगह ली, जिन्होंने 2006 में कंपनी की सह-स्थापना की थी और 2015 से इस पद पर थे.

इससे पहले स्ट्राइप कंपनी के सीईओ और को-फाउंडर पैट्रिक कोलिसन ने ट्वीट किया था, ‘Google, Microsoft, Adobe, IBM, पालो आल्टो, नेटवर्क्स और अब ट्विटर के सीईओ भारत में ही पले-बढ़े हैं. टेक की दुनिया में भारतीयों की आश्चर्यजनक सफलता को देखकर खुशी हो रही है. बधाई हो पराग.’ पैट्रिक कोलिसन के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए एलन मस्क ने कहा, ‘भारतीय टैलेंट से अमेरिका को काफी फायदा हुआ है.’ (news18.com)

अधर में लटकी अमेरिकी बंधक फ्रेरिच की रिहाई, बदले में अफगान ड्रग सरगना को अमेरिकी जेल से मुक्त कराना चाहता है तालिबान
03-Dec-2021 9:14 AM (80)

-मृत्युंजय कुमार झा 

नई दिल्ली, 2 दिसंबर: तीन महीने से अधिक समय हो गया है, लेकिन अभी भी अंतिम अमेरिकी बंधक मार्क फ्रेरिच का कोई सुराग नहीं है, जिसका पिछले साल तालिबान के खूंखार हक्कानी आतंकी नेटवर्क के आतंकवादियों द्वारा अपहरण कर लिया गया था।

तालिबान वार्ताकारों ने अफगानिस्तान के लिए तत्कालीन अमेरिकी विशेष प्रतिनिधि जलमय खलीलजाद से कई बार कहा था कि मार्क फ्रेरिच की रिहाई संभव है, अगर अमेरिका तालिबान से संबंध रखने वाले अफगान ड्रग सरगना बशीर नूरजई को मुक्त कर दे।

नूरजई अमेरिका में 5 करोड़ डॉलर की हेरोइन की तस्करी के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। लेकिन, बंधक फ्रेरिच के परिवार ने खलीलजाद पर इस मुद्दे को प्राथमिकता नहीं देने का आरोप लगाया है।

अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि थॉमस वेस्ट ने मंगलवार को दोहा में यूएस-तालिबान वार्ता के दौरान तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के साथ इस मुद्दे को फिर से उठाया। वेस्ट ने ट्वीट किया कि मार्क फ्रेरिच की सुरक्षित वापसी सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे वार्ता का मुख्य फोकस है।

हालांकि कोई और विवरण साझा नहीं किया गया था, अफगान सूत्रों के अनुसार मुत्ताकी इस बारे में कोई ठोस जबाव नहीं दे सके कि अमेरिकी बंधक अभी भी उनकी हिरासत में क्यों है।

सूत्रों के अनुसार, मुत्ताकी को याद दिलाया गया है कि सिराजुद्दीन हक्कानी के छोटे भाई अनस हक्कानी ने उम्मीद जताई थी कि उनके समूह और पश्चिम के पूर्ववर्ती प्रतिनिधि खलीलजाद के बीच चर्चा का सकारात्मक परिणाम दिखाई देगा, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हुआ है।

अमेरिका ने फ्रेरिच के स्थान के बारे में जानकारी प्रदान करने और उसकी वापसी सुनिश्चित करने के लिए 50 लाख डॉलर की पेशकश की है। अमेरिका ने पाकिस्तान से संपर्क किया है, जो हक्कानी नेटवर्क की मदद कर रहा है, ताकि आतंकी समूह पर दबाव बनाया जा सके।

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने सिराजुद्दीन हक्कानी के सिर पर 1 करोड़ डॉलर का ईनाम घोषित किया है।

अमेरिका की ओर से इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखने के बावजूद कुछ नहीं हुआ है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा, "राष्ट्रपति के लिए फ्रेरिच का बहुत महत्व है। अमेरिकी टीम ने तालिबान पर उनकी रिहाई के लिए दबाव डालना जारी रखा है और दोहा और इस्लामाबाद में वरिष्ठ स्तर की व्यस्तताओं में स्थिति को बढ़ाना जारी रखा है।"

दिलचस्प बात यह है कि बशीर नूरजई सिराजुद्दीन हक्कानी का भरोसेमंद सहयोगी है।

एक ठेकेदार और पूर्व अमेरिकी नौसेना गोताखोर मार्क फ्रेरिच का जनवरी 2020 में हक्कानी नेटवर्क द्वारा अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर खोस्त क्षेत्र में अपहरण कर लिया गया था, जो हक्कानी का गढ़ है। एक महीने बाद यूएस-तालिबान ने समझौते पर हस्ताक्षर किए और दिलचस्प बात यह है कि सिराजुद्दीन हक्कानी तालिबान की वार्ता टीम के रूप में हस्ताक्षर करने वालों में से एक था, लेकिन उनकी रिहाई के बारे में कोई प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिल रही है।

विश्वसनीय पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार, वह जीवित हैं और हक्कानी नेटवर्क अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच उसके ठिकाने बदल रहा है।

अब सवाल यह है कि अगर बाइडेन प्रशासन तालिबान सरकार में वांछित एफबीआई अपराधियों के साथ काम करने को तैयार है तो आखिरी अमेरिकी बंधक को प्राप्त करना इतना कठिन क्यों है?

इस संबंध में पाकिस्तानी सूत्र का कहना है, "तालिबान को लगता है कि फ्रेरिच उनकी जासूसी कर रहा था और वह तालिबान और हक्कानी के बारे में बहुत कुछ जानता है।"

(यह आलेख इंडियानैरेटिव डॉट कॉम के साथ एक व्यवस्था के तहत लिया गया है)

पूर्व अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने तालिबान को बताया अपना भाई
03-Dec-2021 8:41 AM (77)

अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने तालिबान को अपना भाई बताया है और उनके साथ काम करने पर ज़ोर दिया है.

बीबीसी की याल्दा हाकिम को दिए साक्षात्कार में उन्होंने तालिबान से हुई बातचीत, लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं की नौकरी को लेकर बात की.

हामिद करज़ई ने कहा, “ये हमारा देश है. हम इस मिट्टी की संतान हैं, हमें इसे नहीं छोड़ना चाहिए. यहां रहकर इसे बेहतर बनाना चाहिए. मैं अफ़ग़ानिस्तान से जाने वाले हर अफ़ग़ान शख़्स से वापस आने और देश का निर्माण करने की अपील करूंगा.”

उन्होंने कहा, “मैं तालिबान को भाइयों की तरह देखता हूं और मैं दूसरे अफ़ग़ान लोगों को भी भाइयों की तरह देखता हूं. हमे एक राष्ट्र हैं, इसके लोग हैं.

“सभी अफ़ग़ान लोगों ने परेशानी झेली है. तालिबान से लड़ाई के नाम पर विदेशी शक्तियों ने यहां बम बरसाएं हैं. गांवों में बम बरसाए, बच्चे मारे गए, परिवार बर्बाद हो गए. आख़िर एक अफ़ग़ान ही परेशानी झेल रहा है.”

लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं की नौकरी को लेकर तालिबान से हुई बातचीत को हामिद करज़ई ने सकारात्मक बताया.

उन्होंने कहा, “मेरी उनसे बातचीत हुई है. कई मसलों पर उनके साथ अच्छी चर्चा हुई है. महिलाओं की नौकरियों पर वापसी, स्कूल और देश का झंडा. एक ऐसी सरकार के लिए राजनीतिक प्रक्रिया की ज़रूरत जिसे सभी अफ़ग़ान अपना मानते हों.”

“हम चाहते हैं कि वो ना सिर्फ़ वापस स्कूल जाएं बल्कि विश्वविद्यालय में और नौकरी पर भी जाएं. हमारी इस बारे में तालिबान के साथ बातचीत हुई है. वो हम से सहमत हैं, वो इसे समझते हैं और उन्होंने कहा है कि ऐसा होगा. हमने कहा कि ये अभी तुरंत होना चाहिए.”

हामिद करज़ई ने अमेरिका को संदेश किया कि उन्हें और उनके सहयोगियों को अफ़ग़ानिस्तान की मदद के लिए आगे आना चाहिए.

उन्होंने कहा कि तालिबान के साथ काम करना होगा क्योंकि वो आज सरकार में हैं. सुधार और एक बेहतर अफ़ग़ानिस्तान के लिए काम करना होगा. (bbc.com)

टेस्ला ने बच्चों के लिए ऑल-इलेक्ट्रिक 'साइबरक्वाड' लॉन्च किया
03-Dec-2021 8:27 AM (91)

सैन फ्रांसिस्को, 3 दिसंबर| इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता टेस्ला ने बच्चों के लिए साइबरक्वाड नाम से चार पहिया एटीवी (ऑल-टेरेन व्हीकल) लॉन्च किया है, जिसकी कीमत 1,900 डॉलर है। बच्चों के लिए ऑल-इलेक्ट्रिक साइबरक्वाड इस समय अमेरिका में टेस्ला वेबसाइट पर ऑर्डर करने के लिए उपलब्ध है। दो से चार सप्ताह में शिपिंग शुरू हो जाएगी।

टेस्ला ने अपनी वेबसाइट पर कहा, "हमारे प्रतिष्ठित साइबरट्रक डिजाइन से प्रेरित चार पहिया एटीवी में एक पूर्ण स्टील फ्रेम, कुशन वाली सीट और रियर डिस्क ब्रेकिंग और एलईडी लाइट बार है।"

कंपनी ने बताया कि लिथियम-आयन बैटरी द्वारा संचालित 15 मील तक की रेंज और 10 मील प्रति घंटे की रफ्तार वाला साइबरक्वाड 8 साल और उससे अधिक उम्र के किसी भी बच्चे के लिए सही है।

टेस्ला के अनुसार, बच्चे के एटीवी को पूरी तरह से चार्ज करने में 5 घंटे तक का समय लगेगा और बैटरी रेंज उपयोगकर्ता के वजन, इलाके और गति सेटिंग से प्रभावित हो सकती है।

जब टेस्ला ने 2019 में साइबरट्रक प्रोटोटाइप का अनावरण किया, तो इसमें एक तितली स्टीयरिंग व्हील, या टेस्ला को 'योक' व्हील कहा गया।

टेस्ला के अगले साल के अंत तक बाजार में साइबरट्रक को लाने की उम्मीद है, लेकिन मस्क ने कहा कि वह 2022 की शुरुआत में एक उत्पाद रोडमैप अपडेट देगा। (आईएएनएस)

कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट को नेगेटिव बताकर जो बाइडन के साथ बहस में शामिल हुए थे ट्रंप
02-Dec-2021 2:41 PM (69)

वॉशिंगटन. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक किताब में चौंकाने वाला दावा किया गया है. व्हाइट हाउस के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ की एक नई किताब में दावा किया गया है कि ट्रंप पिछले साल सितंबर में अपने पहले प्रेसिडेंशियल डिबेट से ठीक तीन दिन पहले कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे, लेकिन उनकी रिपोर्ट को नेगेटिव में बदल दिया गया, ताकि वो जो बाइडन के साथ डिबेट में हिस्सा ले सके.

व्हाइट हाउस के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ मार्क मीडोज की किताब की एक कॉपी ‘द गार्डियन’ के हाथ लगी है. जिसमें इस बात का खुलासा हुआ है. मीडोज का कहना है कि ट्रंप 26 सितंबर, 2020 को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे. ये वही दिन है, जब उन्होंने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में सुप्रीम कोर्ट के उम्मीदवार एमी कोनी बैरेट के लिए एक समारोह की मेजबानी की थी, जिसे बाद में चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा एक सुपर स्प्रेडर कार्यक्रम माना गया.

इस कार्यक्रम में शामिल हुए कम से कम 12 लोग संक्रमित पाए गए थे. मीडोज के अनुसार, ट्रंप ‘थोड़े थके हुए’ लग रहे थे. इसके बाद व्हाइट हाउस के डॉक्टर सीन कॉले ने मीडोज को फोन करके कहा, ‘राष्ट्रपति को जाने से रोको. वो अभी कोविड पॉजिटिव पाए गए हैं.’

रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मीडोज ने ट्रंप से मिस्टर प्रेसिडेंट, मुझे कुछ बुरी खबर मिली है. आपकी कोरोना वायरस रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. इतना सुनते ही ट्रंप ने जवाब दिया, ओह. मीडोज की किताब में आगे कहा गया है कि बाद में ट्रंप की रिपोर्ट को पॉजिटिव से नेगेटिव किया गया. फिर 29 सितंबर 2020 को क्लीवलैंड में ट्रंप राष्ट्रपति उम्मीदवार बाइडन संग बहस में शामिल हुए.

ट्रंप ने दो बार कराई थी जांच
मीडोज ने अपनी किताब में दावा किया है कि जिस जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, उसे पुराने मॉडल किट से किया गया था. बाद में उनका एंटिजन टेस्ट किया गया, इस बार रिपोर्ट निगेटिव थी. हालांकि, पहली जांच एंटीजन थी या पीसीआर इस बारे में अभी पता नहीं चल सका है. अमेरिका के खाद्य व औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) के दिशा निर्देशों के अनुसार, बाइनेक्स टेस्ट निगेटिव आने का ये मतलब नहीं है कि किसी को कोरोना संक्रमण नहीं हुआ है. ऐसे में इस तरीके को संक्रमण नियंत्रित करने या अपनी मर्जी से इलाज करने के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ट्रंप की दूसरी जांच इसी तरीके से हुई थी.

मीडोज अपनी किताब में लिखते हैं कि ट्रंप निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद ऐसे व्यवहार कर रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं है. जिसके बाद उन्होंने ट्रंप के आसपास रहने वालों से कहा, ‘उनके साथ ऐसे ही व्यवहार करें, जैसे वो संक्रमित हैं.’ हालांकि ये खबर व्हाइट हाउस के वेस्ट विंग तक पहुंच गई थी. फिर भी ट्रंप ने इंडोर में 27 सितंबर, 2020 को प्रेस ब्रीफिंग की. वो अपने गोल्फ क्लब गए. वह व्हाइट हाउस के इवेंट में शामिल हुए. फिर 29 सितंबर को वह अपने प्रतिद्विंदी जो बाइडेन के साथ बहस करने क्लीवलैंड पहुंचे.

2 अक्टूबर को दुनिया को जानकारी दी
ट्रंप और बाइडेन बेशक काफी दूरी पर खड़े थे, लेकिन इंडोर में मौजूद दर्शकों में से कई बिना मास्क के थे. इसके अगले दिन 30 सितंबर को ट्रंप एक रैली में भी शामिल हुए थे. फिर ट्रंप ने 2 अक्टूबर को बताया कि वह और उनकी पत्नी मिलेनिया ट्रंप कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं. इसी दिन रात को वह अस्पताल में भर्ती हुए.

व्हाइट हाउस ने बताया था कि ट्रंप 1 अक्टूबर को संक्रमित मिले हैं. प्रेजिडेंशियल डिबेट के ठीक दो दिन बाद. ट्रंप ने तब वाल्टर रीड अस्पताल में तीन दिन बिताए, जहां उनका एक प्रायोगिक एंटीबॉडी कॉकटेल के साथ इलाज किया गया, जो कोरोना वायरस स्पाइक प्रोटीन को टारगेट करता है. (news18.com)

ईरानी सैनिकों और तालिबानी लड़ाकों के बीच हुई हिंसक झड़प, ताबड़तोड़ फायरिंग का वीडियो वायरल
02-Dec-2021 2:40 PM (137)

 

तेहरान. अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है. आए दिन आतंकी हमले हो रहे हैं. इस बीच ईरान के सैनिकों और तालिबानी लड़ाकों के बीच अफगानिस्तान-ईरान की सीमा पर हिंसक झड़प की भी खबर है. गल्फ न्यूज की जानकारी के मुताबिक, हालांकि इस हिंसक झड़प में किसी की मौत की कोई खबर नहीं है. झड़प के बाद कहा गया कि ऐसा ‘गलतफहमी’ की वजह से हुआ है.

इस घटना के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. जिसमें तालिबानी लड़ाके हथियारों के साथ दिखाई दे रहे हैं. इनके बीच गोलीबारी भी हुई है. तालिबानियों को जवाब देते हुए ईरान की तरफ से गोले दागे गए. ईरान की न्यूज एजेंसी तस्नीम ने पुष्टि करते हुए बताया है कि ये लड़ाई हिरमंद काउंटी के शाघालक गांव में हुई है.

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़ी तस्नीम एजेंसी ने कहा कि तस्करी का मुकाबला करने के लिए अफगानिस्तान के साथ लगी सीमा के पास ईरानी क्षेत्र में दीवारें खड़ी की गई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ ईरानी किसानों ने दीवारों को लांघ लिया था लेकिन वह फिर भी ईरान की सीमा के भीतर ही थे. लेकिन तालिबानी बलों ने लगा कि किसान उनके इलाके में आ गए हैं, जिसके चलते उन्होंने गोलीबारी करना शुरू कर दिया.

तालिबान के साथ बातचीत हुई
ईरान के अधिकारियों ने इस मामले में तालिबान के साथ बातचीत की है, जिसके बाद लड़ाई खत्म हो गई. बाद में बुधवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद खतीबजादेह ने एक बयान में तालिबान का नाम लिए बिना कहा कि ‘सीमावर्ती इलाकों में रहने वालों के बीच की गलतफहमी’ लड़ाई का कारण बनी है. एक वीडियो में कथित तौर पर तालिबान बलों को एक ईरानी क्षेत्र के अंदर देखा गया है, जिसमें दावा किया गया कि तालिबानी लड़ाको ने कई चौकियों पर कब्जा कर लिया है. हालांकि तस्नीम ने इस दावे को खारिज कर दिया है.

कब्जे की बात से ईरान का इनकार
ईरान की तरफ से बताया गया है कि सीमा क्षेत्र के वीडियो में लड़ाई के शुरुआती हिस्से दिख रहे हैं और अब देश की सीमा पर सुरक्षा बलों का पूरा नियंत्रण है. आईआरजीसी से जुड़ी एक अन्य न्यूज वेबसाइट में कहा गया है कि लड़ाई के कारण किसी की मौत नहीं हुई और अब यहां पूरी तरह शांति है. सिस्तान और बलूचिस्तान के गवर्नर के सुरक्षा डिप्टी मोहम्मद मराशी ने ईरानी सरकारी टेलीविजन को बताया कि झड़पें गंभीर नहीं थीं, कर्मियों या संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है. तालिबान ने अगस्त में विदेशी सेना की वापसी के बाद अफगानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया था. ईरान ने तालिबान सरकार को आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं दी है. (news18.com)

Previous123456789...285286Next