अंतरराष्ट्रीय

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29-Oct-2020 9:54 AM 12

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश में दूसरे राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की है जो कम से कम पूरे नवंबर महीने में लागू रहेगा.

मैक्रों ने राष्ट्र के नाम संबोधन में शुक्रवार से शुरू हो रहे लॉकडाउन के नए प्रतिबंधों के बारे में जानकारी दी. इसमें लोगों को सिर्फ़ बेहद ज़रूरी कामों या स्वास्थ्य कारणों से ही घर छोड़ने की इजाज़त होगी.

रेस्टॉरेंट्स और बार जैसे ग़ैर-ज़रूरी व्यवसाय बंद रहेंगे जबकि स्कूल और फ़ैक्ट्रियां खुली रहेंगी.

कोविड-19 के कारण होने वाली मौतों का फ़्रांस में आंकड़ा अप्रैल के बाद से सबसे उच्च स्तर पर है. मंगलवार को 33,000 नए मामलों की पुष्टि हुई है.

मैक्रों ने कहा कि देश में 'दूसरी लहर का ख़तरा पहुंच चुका है जिसमें कोई शक नहीं है कि यह पहले वाले से ज़्यादा गहरा होगा.'

इससे पहले जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा था कि उनके देश को 'अभी कार्रवाई' करने की ज़रूरत है और कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिए 'बड़े राष्ट्रव्यापी प्रयासों' की ज़रूरत है.

कई यूरोपीय देशों में संक्रमण तेज़ी से बढ़ रहा है.

फ़्रांस में 4.6 करोड़ लोगों के साथ कई देशों के नागरिक रात्रि कर्फ़्यू का सामना कर रहे हैं. एक मंत्री ने शिकायत की है कि वे सामाजिक संपर्क को स्थगित करने में नाकाम रहे हैं.

फ़्रांस में कैसे हैं हालात?

राष्ट्र को संबोधित करते हुए मैक्रों ने कहा कि फ़्रांस को 'महामारी के प्रसार में समा जाने से' बचने के लिए तुरंत 'ब्रेक लगाने जैसी निर्दयता' करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि फ़्रांस के अस्पतालों में सभी आईसीयू बेड कोविड मरीज़ों से भरे हैं.

राष्ट्रपति ने कहा कि लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए एक फ़ॉर्म भरना होगा जैसे मार्च में हुए शुरुआती लॉकडाउन के दौरान करना होता था. सामाजिक मिलने-जुलने पर प्रतिबंधित रहेगा.

उन्होंने कहा, "वसंतु ऋतु की तरह ही, आप सिर्फ़ काम पर जाने के लिए, मेडिकल अपाइंटमेंट के लिए, रिश्तेदारों की मदद के लिए, ज़रूरी चीज़ों की ख़रीदारी के लिए या फिर अपने घर के पास ताज़ी हवा लेने के लिए ही घर छोड़ पाएंगे."

कोरोना वायरस के लिए चमगादड़ों को दोष देना कितना सही?

नागरिकों को व्यायाम के लिए एक घंटा दिया जाएगा और काम के लिए यात्रा करने की अनुमति तभी होगी जब एम्प्लॉयर का मानना होगा कि घर से काम करना असंभव है.

मैक्रों ने यह भी कहा कि केयर होम्स जाने की इजाज़त होगी जिसकी मार्च में शुरू हुए दो महीने के लॉकडाउन के दौरान नहीं थी.

यह प्रतिबंध 1 दिसंबर तक लागू रहेंगे और हर दो सप्ताह के बाद इनका मूल्यांकन किया जाएगा.

राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी 'उम्मीद बरक़रार है कि क्रिसमस पर सभी परिवार फिर से मिल पाने में समर्थ होंगे.'(bbc)


29-Oct-2020 9:15 AM 12

अमरीका में कोरोना महामारी की रोकथाम को देेखने वाले वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एंथनी फाउची ने राष्ट्रपति ट्रंप के चुनाव प्रचार की आलोचना की है. उन्होंने बीबीसी से एक इंटरव्यू में कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप की चुनावी रैलियों से कोविड-19 फैलना तय है.

डॉ फाउची ने कहा कि लोगों का बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के इस तरह जुटना संभावित सुपरस्प्रेडिंग आयोजन है.

उन्होंने व्हाइट हाउस में एक सभा के बाद ट्रंप प्रशासन के कई कर्मचारियों के कोरोना पॉज़िटिव होने की घटना का हवाला दिया.

डॉ फाउची ने कहा कि वो इस बात को मानते थे कि अमरीका में पूरे देश में लॉकडाउन लगाना मददगार हो सकता था और इसपर विचार हो रहा था.

उन्होंने माना कि इसकी एक आर्थिक क़ीमत चुकानी पड़ी लेकिन ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण दिखाता है कि मेलबर्न में लगाया गया लॉकडाउन बहुत असरदार हो सकता है.

दरअसल मेलबर्न कोरोना महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुआ था, जिसके बाद वहां तब तक लॉकडाउन जारी रहा जब तक कि वहाँ कोरोना संक्रमण के मामले आने पूरी तरह से बंद नहीं हो गए.(bbc)


28-Oct-2020 6:01 PM 14

सऊदी अरब, 28 अक्टूबर | पीओके कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने बुधवार को कहा कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान के नक्शे से हटा दिया है. उन्होंने एक तस्वीर भी ट्वीट की, जिसमें कैप्शन दिया गया था, भारत के लिए सऊदी अरब का दिवाली गिफ्ट – पाकिस्तान के नक्शे से गिलगित-बाल्टिस्तान और कश्मीर गायब.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सऊदी अरब ने 21-22 नवंबर को जी -20 शिखर सम्मेलन के आयोजन की अपनी अध्यक्षता के लिए एक 20 रियाल का बैंकनोट जारी किया. यह बताया गया कि बैंकनोट पर प्रदर्शित विश्व मानचित्र में गिलगित-बाल्टिस्तान (जीबी) और कश्मीर को पाकिस्तान के हिस्सों के रूप में नहीं दिखाया गया है.  इसमें सामने की तरफ सऊदी किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज का फोटो और एक स्लोगन है. दूसरे हिस्से के मैप में जी-20 देशों को अलग-अलग रंगों में दिखाया गया है.  इसमें PoK के अलावा गिलगित और बाल्तिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बताया गया.

इससे गिलगित-बाल्टिस्तान पर क्या था भारत ने

मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि सऊदी अरब का कदम पाकिस्तान को अपमानित करने के प्रयास से कम नहीं है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने सितंबर में कहा था कि उन्होंने 15 नवंबर को होने वाले तथाकथित “गिलगित-बाल्टिस्तान” विधानसभा के चुनावों के बारे में रिपोर्ट देखी है और इस पर कड़ी आपत्ति ज़ाहिर की है.

विदेश मंत्रालय ने कहा, भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार को कड़ा विरोध जताया और दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, तथाकथित गिलगित और बाल्टिस्तान सहित भारत का एक अभिन्न हिस्सा हैं.

इमरान सरकार ने ये कहकर दी थी विवाद को हवा

इमरान खान सरकार ने पहले पाकिस्तान का एक नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया था, जिसमें दावा किया गया कि गुजरात के जूनागढ़, सर क्रीक और गुजरात, मानवादार, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हिस्से हैं. पाक की ये हरकत धारा 370 को निरस्त करने के भारत सरकार के फैसले की पहली वर्षगांठ के बाद सामने आई थी.(https://www.tv9bharatvarsh.com/)


28-Oct-2020 5:58 PM 11

इस्लामाबाद, 28 अक्टूबर | पाकिस्तान के संघीय गृह मंत्रालय ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट (आईएचसी) को बताया है कि जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मिली सजा को पूरा करने के बाद पांच भारतीय जासूसों को वापस भारत भेज दिया गया।

मंत्रालय भारतीय उच्चायोग द्वारा दायर एक याचिका का जवाब दे रहा था, जिसमें बिचरे, बंग कुमार, सतीश भाग और सोनू सिंह सहित कम से कम पांच जासूसों को पाकिस्तानी जेल से रिहा करने की मांग की गई थी, क्योंकि उन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली थी।

याचिका में कहा गया, "सजा पूरी करने के बाद कैदियों को जेल में रखना पाकिस्तान के संविधान के तहत अधिकारों की अवहेलना है।" भारतीय उच्चायोग ने कहा कि कानूनी तौर पर उन्हें जेल में रखने का कोई कारण नहीं बनता। कैदियों को रिहा किया जाना चाहिए और उनके भारत लौटने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

हालांकि, पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट को सूचित किया कि जासूसी के दोषी पांच भारतीय कैदियों को उनकी सजा पूरी करने के बाद 26 अक्टूबर को रिहा कर दिया गया और वापस भारत भेज दिया गया। जबकि एक अपनी सजा पूरा होने के बाद भी वापस नहीं जाना चाहता था। हालांकि, उसे डिपोर्ट कर दिया गया।

मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा, "गृह मंत्रालय ने पांच भारतीय कैदियों को डिपोर्ट कर दिया है।"

आईएचसी के मुख्य न्यायाधीश अतहर मिनल्लाह ने याचिकाओं की सुनवाई की अगुवाई की और पूछा, "आप उन्हें उनकी सजा से अधिक समय तक कैसे रख सकते हैं?"

उन्होंने कहा कि अगर भारतीय कैदियों ने सजा पूरी कर ली है तो उन्हें वापस भेज दें।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "सजा पूरी होने के बाद कैदी को जेल में रखना एक अपराध है। जिन कैदियों ने अपनी सजा पूरी की हैं, उन्हें कानून के अनुसार जेल से रिहा किया जाना चाहिए।"

तीन और भारतीय कैदियों की रिहाई और वापसी की मांग करने वाली एक अलग याचिका को 5 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

याचिका की सुनवाई के दौरान भारतीय उच्चायोग ने उल्लेख किया कि तीन और नागरिक हैं, जो अपनी सजा पूरी करने के बावजूद पाकिस्तानी जेल में मौजूद हैं।

डिप्टी अटॉर्नी जनरल (डीएजी) तैय्यब शाह ने जवाब दिया कि अदालत आने वाले दिनों में शेष तीन कैदियों के मामले को भी देखेगी।

--आईएएनएस


28-Oct-2020 5:33 PM 15

अमरीका, 28 अक्टूबर | अमरीका के फ़िलाडेल्फ़िया शहर में एक काले नागरिक की मौत को लेकर दूसरे दिन भी हंगामा जारी है.

फ़िलाडेल्फ़िया पुलिस ने कहा है कि तनाव के बीच सैकड़ों लोगों की भीड़ ने सड़कों पर लूटपाट और आगज़नी की.

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, फ़िलाडेल्फ़िया शहर में अतिरिक्त पुलिस बल और नेशनल गार्ड तैनात करने पड़े हैं.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़, उग्र भीड़ को नियंत्रित करने में अब तक 30 से अधिक पुलिसकर्मियों को चोट पहुँची है.

पुलिस का कहना है, "27 वर्षीय वॉल्टर वॉलेस से पुलिसकर्मियों ने उनके आदेश मानने को कहा था, पुलिस ने उनसे कहा था कि उनके हाथ में जो चाक़ू है, उसे वो नीचे डाल दें, लेकिन वे नहीं माने, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें गोली मार दी."

वॉलेस के परिवार का कहना है कि वे मानसिक स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे थे.

फ़िलाडेल्फ़िया में कैसी है स्थिति?

मंगलवार रात फ़िलाडेल्फ़िया पुलिस ने चेतावनी जारी की कि 'शहर के कास्टर और अरामिंगो इलाक़े में लगभग 1,000 लोगों की भीड़ लूटपाट कर रही है, इन इलाक़ों में जाने से बचें.'

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से यह भी अपील की कि 'वॉल्टर वॉलेस की मौत को लेकर हो रहे प्रदर्शन कुछ जगहों पर उग्र हो गए हैं, इसलिए स्थानीय नागरिक बाहर निकलने से बचें और अपने घरों में ही रहें.'

फ़िलाडेल्फ़िया पुलिस के अनुसार, "प्रदर्शनकारियों का कई जगह पुलिस से टकराव हुआ. भीड़ ने कई जगहों पर पुलिस के बैरिकेड उखाड़ दिए. भीड़ पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस को 'मिर्च के स्प्रे' का प्रयोग करना पड़ा."

मंगलवार शाम को शहर की सभी दुकानें वक़्त से काफ़ी पहले बंद करा दी गई थीं और शहर के कई रास्तों को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया था.

शहर के अधिकारी क्या कह रहे हैं?

मेयर जिम केनी डेमोक्रेट नेता हैं. उन्होंने कहा है कि "सोमवार को हुई वॉल्टर वॉलेस की शूटिंग का वीडियो कई गंभीर सवाल खड़े करता है जिनके जवाब दिए जाने चाहिए."

उन्होंने विस्तार से इस बारे में कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि 'वॉल्टर वॉलेस, उनके परिवार, अधिकारियों और फ़िलाडेल्फ़िया के लिए एक तेज़ और पारदर्शी हल निकलना ज़रूरी है.'

फ़िलाडेल्फ़िया की पुलिस कमिश्नर डैनियल आउटलॉ ने कहा कि "वे घटनास्थल का मुआयना कर चुकी हैं और मानती हैं कि स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर काफ़ी ग़ुस्सा है."

मंगलवार को प्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा, "अभी और तनाव देखने को मिल सकता है. लोगों में काफ़ी ग़ुस्सा है. लेकिन हम सभी ज़रूरी तैयारियाँ कर रहे हैं, ताकि परिस्थिति ना बिगड़े और क़ानून व्यवस्था बनी रहे. शहर में कुछ मुख्य जगहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने का निर्णय किया गया है."

इसी साल, मिनेसोटा में जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद भी फ़िलाडेल्फ़िया में काफ़ी उग्र प्रदर्शन हुए थे. जॉर्ज फ़्लॉयड को उनके अंतिम वीडियो में साँस न आने की तकलीफ़ ज़ाहिर करते देखा गया था, लेकिन गोरे पुलिस अधिकारी डेरेक शॉविन ने उनकी गर्दन से तब तक अपना घुटना नहीं हटाया, जब तक जॉर्ज की मौत नहीं हो गई.

जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद पूरी दुनिया में नस्लभेद और पुलिस की बर्बरता के ख़िलाफ़ बड़े प्रदर्शन हुए थे.

बहरहाल, सोमवार को वॉल्टर वॉलेस की मौत के बाद 300 से ज़्यादा लोग सड़क पर प्रदर्शन करने उतरे थे, जिनमें से 91 लोगों को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था.

ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे और लोग मंगलवार सुबह तक अपनी जगहों पर बने रहे. पुलिस के अनुसार, रात में कई बार भीड़ हिंसक भी हुई. लेकिन मंगलवार शाम तक पूरा माहौल गर्म हो गया और लूटपाट-आगजनी की ख़बरें आने लगीं.

गोलीबारी के बारे में जो पता है?

पुलिस का कहना है कि 'घटना सोमवार शाम 4 बजे की है, जब दो पुलिस अधिकारियों को पश्चिमी फ़िलाडेल्फ़िया के कॉब्स क्रीक इलाक़े से एक शख़्स की शिकायत मिली कि वो हाथ में चाक़ू लेकर घूम रहा है.'

पुलिस की प्रवक्ता तान्या लिटिल ने प्रेस से बातचीत में कहा, "एक शख़्स जिसकी बाद में वॉल्टर वॉलेस के रूप में पहचान हुई, उसने हाथ में एक चाक़ू लिया हुआ था. जब पुलिस अफ़सर मौक़े पर पहुँचे, तो उन्होंने उनसे चाक़ू नीचे डालने को कहा, लेकिन चाक़ू फेंकने की बजाय वो पुलिसकर्मियों की तरफ़ बढ़े."

उन्होंने बताया, "दोनों अफ़सरों ने कई फ़ायर किए, कुछ गोलियाँ वॉलेस के सीने और कंधे पर लगीं."

उनमें से एक अधिकारी वॉल्टर वॉलेस को अस्पताल लेकर दौड़ा, लेकिन अस्पताल ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

सोशल मीडिया पर इस घटना का जो वीडियो शेयर हो रहा है, उसमें देखा जा सकता है कि वॉल्टर वॉलेस दोनों पुलिस अधिकारियों की ओर बढ़ रहे हैं और दोनों ने उन पर बंदूक़ें तानी हुई हैं.
पुलिस विभाग का कहना है कि मौक़े पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने पीछे हटते हुए वॉल्टर वॉलेस को हथियार डालने की चेतावनी दी थी.

वॉलेस के पिता ने जाँचकर्ताओं से कहा है कि उनका बेटा मानसिक स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा था, जिसके लिए उसकी दवा चल रही थी.

उनके पिता ने सवाल किया कि 'पुलिसकर्मियों ने टेज़र गन (करंट मारने वाली बंदूक़) क्यों नहीं ले रखी थी?'

प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पुलिस विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दोनों पुलिसकर्मियों ने सात-सात फ़ायर किए, जिनमें से कुछ वॉलेस को लगे. पुलिस विभाग ने दोनों अधिकारियों के नाम तो नहीं बताए, लेकिन कहा गया कि दोनों ने बॉडी-कैमरा पहना हुआ था और दोनों के पास शॉट गन (छर्रे वाली बंदूक़) नहीं थी.

इस बीच वॉलेस परिवार की वकील ने कहा कि 'वॉल्टर की मानसिक स्थिति को देखते हुए परिवार ने एंबुलेंस बुलाई थी, पुलिस नहीं.'

वकील शाका जॉनसन ने बताया कि 'वॉल्टर की गर्भवती पत्नी के अनुसार वो बाइपोलर मनोरोग से ग्रस्त थे और उनकी दवा चल रही थी.'

डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडन और उनकी सहयोगी कमला हैरिस ने इस घटना पर दुख ज़ाहिर किया है.

उन्होंने एक बयान में कहा कि 'इस घटना से उनका दिल दुखा है. वे नहीं चाहेंगे कि कभी किसी मनोरोग से ग्रसित शख़्स का अंत इस तरह की मौत से हो.'

फ़िलाडेल्फ़िया पेन्सिलवेनिया प्रांत का सबसे बड़ा शहर है, जिसे अगले सप्ताह होने वाले चुनाव के लिहाज़ से काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.(https://www.bbc.com/hindi)


28-Oct-2020 5:06 PM 13

इस्लामाबाद, 28 अक्टूबर | पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बुधवार को कहा कि कुछ ताकतें देश को अस्थिर करना चाहती हैं। पेशावर विस्फोट पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने जोर देकर कहा कि संघीय और प्रांतीय सरकारों को अलर्ट रहना होगा। इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई थी।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिए लोगों का समर्थन जरूरी है। उन्होंने साथ ही धार्मिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की।

उन्होंने जीयो टीवी से कहा, "कुछ तत्व ईशनिंदा मामले का राजनीतिकरण करना चाहते हैं। सरकार अपने दायित्व के प्रति लापरवाह नहीं है।"

विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार ईद मिलाद-उल-नबी उत्सव के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

जीओ पाकिस्तान से बात करते हुए, कुरैशी ने अपने अफगान समकक्ष मोहम्मद हनीफ अतमर से क्वेटा और पेशावर में हाल में हुए आतंकवादी हमलों के बारे में हुई बातचीत को याद किया।

मंत्री ने कहा कि उन्होंने अतमर को अफगानिस्तान की धरती पर आतंकवादी तत्वों को पनपने के खिलाफ आगाह किया। मंत्री ने अफगानी समकक्ष से कहा था, "कुछ तत्व पाक-अफगान संबंध में व्यवधान उत्पन्न करना चाहते हैं।"

--आईएएनएस


28-Oct-2020 3:33 PM 26

दुबई, 28 अक्टूबर| संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रहने वाले प्रवासी भारतीय अब अपने पासपोर्ट में दर्ज कराने के लिए स्थानीय पता दे सकते हैं। दुबई में भारतीय वाणिज्य दूतावास में कॉन्सल, पासपोर्ट और अटेस्टेशन सिद्धार्थ कुमार बरैली ने कहा कि भारत सरकार ने अपने विदेशी नागरिकों को अपने निवास स्थान में अपने स्थानीय पते को जोड़ने की अनुमति देने का फैसला किया है, यह मुख्य रूप से उन लोगों के लिए हैं जिनके पास भारत में स्थायी या वैध पते नहीं हैं।

उन्होंने कहा, "हम समझते हैं कि बहुत से लोग जो लंबे समय से यूएई में रह रहे हैं, उनका भारत में कोई वैध पता नहीं है। वे अपने पासपोर्ट में अपना स्थानीय यूएई पता जोड़ सकते हैं।"

अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पता में बदलाव मौजूदा पासपोर्ट में नहीं किया जा सकता है। गल्फ न्यूज ने बताया कि भारतीय पासपोर्ट धारकों को नए पासपोर्ट के लिए आवेदन करना होगा, जिसमें पते में बदलाव किया जा सकता है।

किराए या खुद के घर में रहने वाले भारतीय प्रवासियों द्वारा सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है। अपना यूएई पता देने के इच्छुक लोगों को भारत से विदेशों में पता बदलने के लिए नए पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के समय निवास के प्रमाण के रूप में कुछ दस्तावेज देने होंगे।

बरैली ने कहा कि बिजली और पानी के बिल, रेंट एग्रीमेंट, किरायेदार से अनुबंध को यूएई में निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा। पता बदलने से आवेदकों को पासपोर्ट नवीनीकरण के समय भारत से तुरंत पुलिस सत्यापन प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। (आईएएनएस)


28-Oct-2020 2:33 PM 17

     (dw.com)

राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले अमेरिका में एक और अश्वेत की पुलिस की गोली से मौत हो गई है. 27 साल के वॉल्टर वॉलेस की मौत के बाद दो रातों से विरोध प्रदर्शन जारी है. कई दुकानों में लूटपाट भी हुई है.

फिलाडेल्फिया में पुलिस ने 27 साल के अश्वेत को चाकू नीचे फेंकने को कहा और उसके बाद उसको गोली मार दी. अश्वेत वॉल्टर वॉलेस जूनियर की पुलिस शूटिंग में मौत के बाद शहर में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे और लोगों ने सड़कों पर उतरकर पुलिस द्वारा कथित हत्या पर अपना विरोध दर्ज कराया. इस घटना के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शन में 30 से अधिक लोग घायल हो गए और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

पुलिस प्रवक्ता तान्या लिटिल ने बताया कि पुलिस को सोमवार को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति हाथ में हथियार लिए हुए है. इसके बाद पुलिस अफसर कॉब्स क्रीक इलाके में पहुंचे जहां उनका सामना वॉलेस से हुआ. वॉलेस के हाथ में चाकू था, पुलिस ने उनसे चाकू फेंकने को कहा. लिटिल के मुताबिक वॉलेस पुलिस अफसर की ओर बढ़ गए और दोनों अफसरों ने "कई बार" गोली चलाई. वॉलेस के कंधे और छाती पर गोली लगी. लिटिल के मुताबिक एक अफसर ने वॉलेस को अस्पताल पहुंचाया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

वॉलेस की मौत के बाद सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए और पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया. मंगलवार तड़के तक पुलिस के खिलाफ लोगों का गुस्सा शांत होता नजर नहीं आया. कई बार प्रदर्शनकारी और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं.

पीड़ित परिवार के वकील का कहना है कि वह मानसिक स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे थे और परिवार ने एंबुलेंस के लिए फोन किया था ना कि पुलिस के दखल के लिए. पुलिस की फायरिगं का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दूसरी ओर पुलिस की दलील है कि वॉलेस चाकू पकड़े हुए थे और उन्होंने पुलिस के आदेश को नहीं माना. लेकिन वॉलेस के माता-पिता का कहना है कि पुलिस को पता था कि उनका बेटा मानसिक बीमारी से ग्रसित है. वॉलेस की मां कैथी वॉलेस ने कहा, "वे वहां खड़े थे और हम पर हंस रहे थे."

वॉलेस की पत्नी गर्भवती हैं और उनके नौ बच्चे हैं. प्रेस वार्ता में वॉलेस के दो बच्चों ने बहुत ही कम बात की. वॉलेस की मौत के बाद मंगलवार को सैकड़ों लोगों ने दुकानों में लूटपाट की और वहां से फरार हो गए. फिलाडेल्फिया में अशांति की आशंका को देखते हुए सैकड़ों नेशनल गार्ड कर्मियों की तैनाती की तैयारी की जा रही है.

अमेरिकी चुनाव में ब्लैक लाइव्स मैटर का मुद्दा अहम है और ऐसे में चुनाव से ठीक पहले एक और पुलिस द्वारा अश्वेत की मौत पुलिस बल के रवैये पर कई सवाल खड़े करते हैं. गौरतलब है कि पुलिस हिरासत में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अमेरिका समेत दुनिया भर में उग्र विरोध प्रदर्शन हुए थे.
एए/सीके (एएफपी, एपी)


27-Oct-2020 6:42 PM 17

मनीला, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)| फिलीपींस में तूफान मोलावे की वजह से 3 लोगों की मौत हो गई है। इसके चलते चारों ओर बाढ़ और तबाही का मंजर है और जनजीवन बेहाल है। यहां आपदा प्रबंधन के एक अधिकारी ने मंगलवार को इसकी सूचना दी है।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन परिषद (एनडीआरआरएमसी) के प्रवक्ता मार्क टिम्बल के बयान के हवाले से सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यहां डूबने के चलते तीन लोगों की मौत हुई है।

उन्होंने आगे कहा कि 13 में से 10 मछुआरे लापता हो गए हैं। लापता हुए अन्य लोगों में दो स्थानीय व्यक्ति और एक क्रू मेंबर शामिल हैं।

हालांकि, मंगलवार की सुबह से फिलीपींस में मोलावे ने भले ही शांत रूख अपना लिया है, लेकिन इस विनाशकारी तूफान से 237,948 परिवार के 914,709 लोग प्रभावित हुए हैं।

मोलावे ने रविवार शाम को मनीला के दक्षिण में स्थित टबाको शहर में अपनी पहली दस्तक दी थी।

कोविड-19 महामारी के बीच मोलावे फिलीपींस में आया 17वां तूफान है।

फिलीपींस में प्रतिवर्ष लगभग 20 तूफान आते हैं।


27-Oct-2020 6:37 PM 16

भारत और अमरीका के बीच मंगलवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में तीसरी 2+2 मंत्री स्तरीय बैठक हुई. इस दौरान दोनों देशों के बीच बेसिक एक्‍सचेंज ऐंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA) समेत कई अहम समझौते हुए.

बेका समझौते के तहत दोनों देश एक दूसरे को अत्याधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी, साज़ोसामान और भू-स्थानिक मानचित्र साझा करेंगे. बेका समझौते पर भारत की ओर से एडिशनल सेक्रेटरी जिवेश नंदन ने हस्ताक्षर किया.

बैठक में भारत की तरफ़ से विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जबकि अमरीका की तरफ़ से विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर इस बैठक में शामिल थे. इसके अलावा शीर्ष सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों की मौजूदगी भी बैठक में रही. दोनों देशों ने कारोबारी, हिंद व प्रशांत महासागरीय क्षेत्र की सुरक्षा, सामरिक व रणनीतिक सहयोग पर चर्चा की.

बैठक के बाद अमरीकी रक्षा मंत्री माइक एस्पर ने कहा, "दोनों देशों के बीच रक्षा समझौते हमारे साझा मूल्यों और हितों पर आधारित हैं. सब के लिए खुला और स्वतंत्र इंडो-पैसिफ़िक क्षेत्र हो इसके लिए हम कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े हैं, ख़ास कर चीन की बढ़ती आक्रामकता और अस्थिर करने वाली गतिविधियों के मद्देनज़र."

मार्क एस्पर ने कहा कि दो दिनों की बैठक में रक्षा के क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करने, रक्षा व्यापार को बढ़ाने और सेनाओं के बीच पारस्परिक सहयोग पर भी बातचीत हुई.

बाद में अमरीकी विदेश मंत्री ने भारत और अमरीका के बीच स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुई नई संधि का एलान किया, जिसमें उन्होंने चीन पर निशाना साधा.


चीन मित्रवत नहींः पॉम्पियो

बैठक के बाद एक साझा बयान जारी किया गया जिसमें दोनों देशों ने एक दूसरे के साथ सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया.

अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा, "चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी लोकतंत्र, क़ानूनी नियमों, एक दूसरे के बीच स्पष्टता और नौ-परिवहन की स्वतंत्रता (नैविगेशन की आज़ादी) को लेकर मित्रवत नहीं है जो कि मुक्त और खुले इंडो-पैसेफ़िक क्षेत्र का आधार है."

इस बैठक से पहले माइक पॉम्पियो नेशनल वॉर मेमोरियल गए थे जिसकी तस्वीर के साथ एक ट्वीट को रीट्विट करते हुए उन्होंने लिखा कि "हम उन वीर पुरुषों, महिलाओं को कभी नहीं भूलेंगे जिन्होंने दुनिया के सबसे बड़े लोकत्रंत की रक्षा में अपनी जान दी है."

अमरीकी मंत्रियों के भाषणों में गलवान का भी ज़िक्र हुआ जहां चीनी फ़ौज के साथ झड़प में भारत के 20 सैनिकों की मौत हो गई थी लेकिन भारत के दोनों मंत्री- एस जयशंकर और राजनाथ सिंह चीन का नाम लेने से बचते दिखे.

राजनाथ सिंह ने क्या कहा?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'बेका' को महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि "महत्वपूर्ण मुद्दों पर हमारे बीच बातचीत हुई. अमरीका के साथ हमारा सैन्य सहयोग बहुत बढ़िया तरीक़े से आगे बढ़ रहा है. हमने रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास के लिए परियोजनाओं को चिह्नित किया है."

उन्होंने कहा, "इंडो-पैसेफ़िक क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के प्रति हमने अपनी प्रतिबद्धता जताई."

रक्षा मंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच जो महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं उनमें अमरीकी-भारतीय लाइज़न ऑफ़िसर की नियुक्ति, कॉमसैट अकाउंट, दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास को बढ़ाना शामिल है.

अगले महीने दोनों देश 'मालाबार एक्सरसाइज़' में शामिल होंगे. यह एक्सरसाइज़ इंडो-पैसेफ़िक क्षेत्र में होने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास है जिसमें क्वाड, यानी 'क्वाडिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग' में शामिल चारों देश भाग लेंगे. ये चार देश हैं- भारत, अमरीका, जापान और ऑस्ट्रेलिया.

इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "इस बैठक के दौरान हमारे पड़ोसी देशों में चल रही गतिविधियों पर भी बातचीत हुई. हमने यह स्पष्ट किया कि सीमा पार से आतंकवादी गतिविधियां बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है."

विदेश मंत्री ने सीमा पार आतंकवाद, अफ़ग़ानिस्तान और हर देश का दूसरे देश की संप्रभुता और सीमाओं का आदर करने की बात भी कही.

संयुक्त वक्तव्य के बाद जब राजनाथ सिंह से एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि क्या आप अमरीका से और अधिक हथियार ख़रीदने की योजना रखते हैं तो रक्षा मंत्री ने कहा, "किसी भी देश का दूसरे देश से हथियार ख़रीदने या बेचने का समझौता दोनों देशों की बीच बातचीत पर निर्भर करता है."

क्या है बेसिक एक्सचेंज एंड कॉपरेशन एग्रीमेंट?

बेसिक एक्सचेंज एंड कॉपरेशन एग्रीमेंट यानी 'बेका' भारत और अमरीका के बीच होने वाले चार मूलभूत समझौतों में से आख़िरी है. इससे दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक्स और सैन्य सहयोग को बढ़ावा मिलेगा.

पहला समझौता 2002 में किया गया था जो सैन्य सूचना की सुरक्षा को लेकर था. इसके बाद दो समझौते 2016 और 2018 में हुए जो लॉजिस्टिक्स और सुरक्षित संचार से जुड़े थे.

ताज़ा समझौता भारत और अमरीका के बीच भू-स्थानिक सहयोग है. इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा में सहयोग करना, रक्षा सूचना साझा करना, सैन्य बातचीत और रक्षा व्यापार के समझौते शामिल हैं.

इस समझौते पर हस्ताक्षर का मतलब है कि भारत को अमरीकी से सटीक भू-स्थानिक (जियोस्पैशियल/जियोस्पैटिकल) डेटा मिलेगा जिसका इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई में बेहद कारगर साबित होगा.

जहां इससे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ेगा वहीं इस समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि अमरीकी सैटेलाइट्स से जुटाई गई जानकारियां भारत को साझा की जा सकेंगी. इसका रणनीतिक फ़ायदा भारतीय मिसाइल सिस्टम को मिलेगा.

इसके साथ ही भारत उन देशों की श्रेणी में भी शामिल हो जाएगा जिसके मिसाइल हज़ार किलोमीटर तक की दूरी से भी सटीक निशाना साध सकेंगे.

इसके अलावा भारत को अमरीका से प्रिडेटर-बी जैसे सशस्त्र ड्रोन भी उपलब्ध होंगे. हथियारों से लैस ये ड्रोन दुश्मन के ठिकानों का पता लगा कर तबाह करने में सक्षम हैं. (bbc)


27-Oct-2020 5:41 PM 16

रावलपिंडी, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)| रावलपिंडी में एक वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस अधिकारियों को टिकटॉक के इस्तेमाल से प्रतिबंधित कर दिया गया। मीडिया में यह खबर मंगलवार को आई। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित इस जिले के पुलिस विभाग ने चेतावनी दी है कि अगर किसी अधिकारी का कोई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होता है, चाहे वह टिकटॉक का हो या फेसबुक या यूट्यूब, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

रावलपिंडी के सीपीओ अहसान यूनस द्वारा संभागीय एसपी, सर्कल अधिकारी और स्टेशन हाउस अधिकारियों को जारी किए गए एक पत्र में इस नए नियम का उल्लेख किया गया।

पत्र में इस बात का जिक्र किया गया कि सोशल मीडिया पर किसी वीडियो को पोस्ट किए जाने और बाद में उसके वायरल होने से डिपार्टमेंट की एक गलत छवि बनती है।

वीडियो के वायरल होने के बाद कम से कम एक अफसर को निलंबित कर दिया गया।


27-Oct-2020 5:22 PM 22

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर| अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में कहा कि भारत और अमेरिका को भारतीय उपमहाद्वीप और भारत-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा के लिए संयुक्त रूप से चीन के खतरों का सामना करने की जरूरत है। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चीन के साथ जारी गतिरोध के बीच नई दिल्ली में तीसरी भारत-अमेरिका 'टू प्लस टू' वार्ता के दौरान पोम्पेयो ने चीन के वुहान प्रांत से शुरू हुई कोरोना महामारी को हराने पर सहयोग सहित अन्य कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

इसके साथ ही अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के खतरों का सामना करने, पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए भी बातचीत हुई।

अमेरिकी सरकार के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सुरक्षा संबंधी खतरे का मुद्दा उठाया, जिसका भारत चीन से सामना कर रहा है। उन्होंने द्विपक्षीय वार्ता में कहा, "रक्षा के क्षेत्र में हमें अपनी उत्तरी सीमाओं पर अंधाधुंध आक्रामकता से चुनौती मिली है।"

इस बैठक का महत्व इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन के अमेरिकी सचिवों ने कोरोनावायरस महामारी के बीच नई दिल्ली की यात्रा की और यहां तक कि अमेरिका में तीन नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनावों के लिए बड़े स्तर पर अभियान चल रहा है, इसके बावजूद यह यात्रा आयोजित की गई।

पोम्पियो ने अपने भारतीय समकक्ष से कहा, "एक मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक के लिए हमारी दोस्ती और प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से उच्च स्तर पर है, जब हम इस महीने की शुरुआत में क्वाड बैठक के लिए टोक्यो में थे और मंत्री जयशंकर और मैं अपने ऑस्ट्रेलियाई एवं जापानी दोस्तों के साथ थे।"

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, "आज हमारे जैसे दो महान लोकतंत्रों के लिए वास्तविक अवसर है कि हम और अधिक बढ़ सकें, जैसा कि मैंने पिछले साल अपनी भारत यात्रा पर कहा था, जब मैंने अपने संबंधों में एक नई उमंग पैदा करने का आह्वान किया था। मुझे लगता है पिछले एक साल में इस पर काम किया गया है। इसे सुनिश्चित करने के लिए और भी बहुत अधिक काम किया जाना है।"

उन्होंने कहा, "भारत और अमेरिका मिलकर हमारे लोगों को हमारे साझा मूल्यों और हमारी संस्कृतियों, हमारे रक्षा संबंधों, वैज्ञानिक सहयोग और आपसी समृद्धि पर आधारित एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। मैं 21वीं सदी में लोकतांत्रिक देशों की परिभाषित साझेदारी के निर्माण के लिए आपके नेतृत्व साथ ही आप सभी को धन्यवाद देता हूं।"

जयशंकर ने 'टू प्लस टू' वार्ता में कहा कि चूंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को कोरोनावायरस महामारी के कारण बड़े पैमाने पर चोट पहुंची है, इसलिए भारत सरकार को इस नुकसान की भरपाई जल्द ही करनी है, क्योंकि आर्थिक मंदी के घरेलू और बाहरी दोनों परिणाम होंगे।

अमेरिकी विदेश विभाग के बयान के अनुसार, अपने समकक्ष रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक में रक्षा मंत्री मार्क टी. एस्पर ने मंगलवार को पहली अमेरिका-भारत डिफेंस फ्रेमवर्क की 15वीं वर्षगांठ के रूप में चिह्न्ति किया।

उन्होंने कहा, "हमने तब से अपनी रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को काफी मजबूत किया है, खासकर पिछले एक साल में, जिसके दौरान हमने अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा, सैन्य-से-सैन्य और सूचना-साझा सहयोग को उन्नत किया है। हमारा ध्यान अब हमारे सहयोग को संस्थागत बनाने और नियमित करने के साथ ही आज की चुनौतियों का सामना करने और भविष्य में एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के सिद्धांतों को बनाए रखने पर होना चाहिए।" (आईएएनएस)


27-Oct-2020 4:56 PM 23

रियाद, 27 अक्टूबर| सऊदी अरब 18 से 50 वर्ष के बीच के विदेशी जायरीनों को रविवार से शुरू होने वाले 'उमरा' करने के लिए देश में प्रवेश करने की अनुमति देगा। गल्फ न्यूज के मुताबिक, यह कदम उमरा सेवाओं के संबंध में छूट के तीसरे चरण को दर्शाता है।

हज और उमरा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए एहतियाती उपायों और निवारक प्रोटोकॉल के अनुसार, चल रहे कोविड-19 महामारी के मद्देनजर सऊदी पहुंचने के बाद जायरीनों को तीन दिनों के लिए क्वांरटीन में रहना होगा।

सऊदी अखबार 'ओकाज' के मुताबिक, इन नियमों के तहत, तीर्थयात्रियों के पास एक पीसीआर मेडिकल टेस्ट प्रमाणपत्र होना चाहिए, जिसमें दर्शाया जाना चाहिए कि वे कोविड-19 निगेटिव हैं। रिपोर्ट सऊदी के लिए प्रस्थान के समय से 72 घंटे से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए।

मक्का के ग्रैंड मस्जिद (मस्जिद-अल-हरम) द्वारा 4 अक्टूबर को कोविड-19 प्रतिबंधों के छह महीने के बाद उमरा करने वाले तीर्थयात्रियों के पहले समूह के लिए अपने दरवाजे फिर से खोल दिए जाने के बाद यह नवीनतम प्रगति देखने को मिली है। (आईएएनएस)


27-Oct-2020 4:55 PM 23

मियामी, 27 अक्टूबर | पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा मंगलवार को ऑरलैंडो में डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन के लिए एक चुनाव-रैली में भाग लेंगे। यह फ्लोरिडा में 3 दिन में उनकी दूसरी रैली होगी। इससे पहले 24 अक्टूबर को ओबामा ने बाइडेन के समर्थन में मियामी में सामाजिक दूरी का पालन कर रही एक भीड़ को संबोधित किया था। बाइडेन 20 जनवरी, 2009 से 20 जनवरी, 2017 तक उनके उप-राष्ट्रपति रहे थे।

बता दें कि 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्लोरिडा में 49.02 प्रतिशत मतों से जीत हासिल की थी, जबकि उनकी तत्कालीन डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी हिलेरी क्लिंटन को 47.82 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं रविवार को एनबीसी न्यूज द्वारा जारी किए गए नए ट्रैकर सर्वे में खुलासा हुआ है कि फ्लोरिडा में बाइडेन ट्रंप पर 50-48 की बढ़त बनाए हुए हैं।

शुरुआती मतदान में हिस्सा लेने वाले अधिकांश (61 फीसदी) मतदाताओं ने कहा कि उन्होंने बाइडेन को वोट दिया है। वहीं राष्ट्रपति को उन पंजीकृत मतदाताओं का बड़ा समर्थन मिल रहा है, जिन्हें अभी अपने मतपत्र डालने हैं।

23 अक्टूबर को जारी हुए क्विनिपियाक यूनिवर्सिटी के नए पोल नतीजों ने बाइडेन को 10 अंकों का फायदा दिखाया है। रियलक्लीयर पॉलिटिक्स पोलिंग में पूर्व उपराष्ट्रपति 8.1 प्रतिशत अंकों से आगे चल रहे थे। (आईएएनएस)
 


27-Oct-2020 4:55 PM 27

मॉस्को, 27 अक्टूबर| एक रूसी लड़ाकू विमान ने बाल्टिक सागर के ऊपर एक जर्मन और एक अमेरिकी सैन्य विमान को रोक दिया। रक्षा मंत्रालय ने यहां यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, सोमवार को एक बयान में मंत्रालय ने कहा कि रूसी हवाई क्षेत्र नियंत्रण ने सोमवार को बाल्टिक सागर के ऊपर उड़ान भरने वाले दो एयर टारगेट का पता लगाया।

एक रूसी एसयू-27 लड़ाकू विमान ने उड़ान भरी और जर्मन नेवी पी-3सी ओरियन पेट्रोल एयरक्राफ्ट और अमेरिकी वायुसेना के यू2एस टोही विमान के रूप में टारगेट की पहचान की।

रूसी जेट ने विदेशी विमानों का पीछा तब तक किया जब तक कि वे देश की सीमा से दूर नहीं चले गए।

मंत्रालय ने कहा कि एसयू-27 ने उड़ान के दौरान हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल के लिए अंतर्राष्ट्रीय नियमों का कड़ाई से अनुपालन किया। (आईएएनएस)


27-Oct-2020 4:54 PM 20

हमजा अमीर 

इस्लामाबाद, 27 अक्टूबर| पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने आशंका व्यक्त की है कि भारत अफगान की धरती का इस्तेमाल पाकिस्तानी सरजमीं को अस्थिर करने और निशाना बनाने के लिए कर सकता है।

इस्लामाबाद में दो दिवसीय पाकिस्तान-अफगानिस्तान व्यापार एवं निवेश मंच के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "पाकिस्तान को डर है कि भारत अफगानिस्तान का इस्तेमाल हमें अस्थिर करने में करेगा।"

उन्होंने कहा, "हमने भारत के साथ दोस्ती करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। हमें लगता है कि भारत वैचारिक रूप से पाकिस्तान के खिलाफ है।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार न केवल एक देश के रूप में पाकिस्तान के खिलाफ है, बल्कि अपनी मुस्लिम आबादी के भी खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों का निरंतर दमन हो रहा है।

कश्मीर में भारत सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों के बारे में बात करते हुए, खान ने कहा कि यह निर्दोष कश्मीरियों पर अत्याचार करने पर आमादा है।

उन्होंने कहा, "अवैध रूप से भारतीय कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन दमन और बर्बरता का सबसे खराब उदाहरण है।"

जहां खान की सरकार वैश्विक मुद्दों पर कश्मीर मुद्दे को नहीं उठाने के दबाव और आलोचना को महसूस कर रही है, तो प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा हर क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को उठाया है।

यह उल्लेख करना उचित है कि अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान के विकास और प्रगति में भारत की बढ़ती भूमिका को देखने की इच्छा के बाद, पाकिस्तान लगातार भारतीय उपस्थिति बढ़ाने के वाशिंगटन के इरादे पर अपनी चिंताओं को जाहिर करता रहा है, जिसमें इसने कहा है सीमा सुरक्षा और अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच व्यापक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

पाकिस्तान का कहना है कि नई दिल्ली अफगानिस्तान में आतंकी तत्वों के साथ मिली हुई है और इस्लामाबाद को निशाना बनाने के लिए उन्हें बढ़ावा दे रही है।

इस्लामाबाद ने अमेरिकी प्रशासन के साथ भी अपनी चिंताओं को उठाया है, क्योंकि वह अफगानिस्तान में बढ़ती भारतीय उपस्थिति को नहीं देखना चाहता है।

इस्लामाबाद ने वाशिंगटन के सामने भी अपनी चिंता जाहिर की है, क्योंकि वह अफगानिस्तान में भारत की बढ़ती मौजूदगी को नहीं देखना चाहता।

हालांकि, पाकिस्तानी दावे को नई दिल्ली ने हमेशा खारिज किया है। (आईएएनएस)


27-Oct-2020 2:38 PM 29

निखिला नटराजन
न्यूयॉर्क, 27 अक्टूबर| वॉल स्ट्रीट जर्नल की स्तंभकार और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन की पूर्व सहायक पेगी नूनन डेमोक्रेटिक पार्टी की उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस के प्रति हमलावर रुख दिखाने के बाद आलोचनाओं से घिर गई हैं।

उन्होंने एक प्रचार अभियान के दौरान बारिश में हैरिस के हल्का-फुल्का डांस करने को शर्मनाक, असंवेदनशील और ओछी हरकत कहा था।

नूनन ने कमला हैरिस के डांस, उनकी हंसी और उनके स्टाइल के बारे में अपने कॉलम 'ए गुड डिबेट, एंड इट्स नॉट क्वाइट ओवर' के अंत में दो पैराग्राफ में ये टिप्पणी की।

एमएनएसबीसी पर नूनन को हैरिस के खिलाफ निशाना साधने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

पूर्व डेमोक्रेटिक सीनेटर, क्लेयर मैकस्किल जिन्होंने कमला हैरिस के लिए कड़ी मेहनत की, उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को बेशर्म ठहराया।

उन्होंने कहा, "कमला हैरिस बेशर्म छोड़कर सब कुछ है। वह आगे बढ़ रही हैं। वह प्रेरणादायक हैं। वह मजबूत हैं।"

अंतिम प्रेसिडेंशियल डिबेट पर अपनी राय देने के बाद नूनन ने हैरिस के विषय में लिखा है।

नूनन ने लिखा, "उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस जब वाट्सअप फ्लोरिडा कहती हैं, और जोर से हंसती हैं खासकर जब किसी ने कुछ भी मजाकिया नहीं कहा, तो बेशर्म लगती हैं। वह युवा उम्मीदवार है जो युवा वोट हासिल करना चाहती है और लेकिन जब उन्होंने फ्लोरिडा के जैक्सनविल में बारिश में स्टेज पर डांस किया तो यह अव्यवहारिक, छिछोरापन और शर्मनाक था।"

अफ्रीकन अमेरिकन पॉलिसी फोरम ने ट्वीट किया, "ये वो खुशी है जिससे पैगी नूनन को इतनी पीड़ा हुई कि उन्होंने सीनेटर हैरिस के बारे में एक कॉलम लिखा कि कैसे सीनेटर हैरिस बेशर्म हैं। अश्वेतों की खुशी कुछ ऐसी है जिस पर उन्हें हमला करने की जरूरत महसूस होती है।" (आईएएनएस)


27-Oct-2020 1:06 PM 33

फ्रांस पर नस्लवाद, इस्लामोफोबिया और फासिस्ट रवैये के आरोप क्यों हैं? क्या सिर्फ पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों के मुद्दे पर पूरा मुस्लिम वर्ल्ड फ्रांस के खिलाफ लामबंद हो गया है? मैक्रों का रवैया क्या है? 

फ्रांस में एक टीचर की नृशंस हत्या स्कूल के बाहर इसलिए कर दी गई थी क्योंकि उसने अपने स्टूडेंट्स को पैगंबर मोहम्मद के कार्टून  दिखाए थे। हत्यारे को पुलिस ने गोली मार दी। इसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने टीचर सैमुएल पैटी की हत्या को ‘इस्लामी आतंकवाद’ करार देकर कहा कि ‘इस्लाम हमारा भविष्य हथियाने का इरादा रखता है, जो कभी नहीं होगा।’ इन घटनाओं के बाद से फ्रांस और मुस्लिम वल्र्ड टकरा रहे हैं क्योंकि मैक्रों ने मोहम्मद के कार्टूनों को जारी रखने की भी बात कही। लेकिन, बात इससे कुछ और ज़्यादा है।

चूंकि मुस्लिम मोहम्मद के किसी भी कार्टून को ईशनिंदा मानते हैं, तो ऐसे में मुस्लिम देशों ने फ्रांस के प्रोडक्ट्स का बॉयकॉट शुरू कर दिया है। फ्रांस ने हालांकि इस तरह की मुहिम को कुछ ‘कट्टर अल्पसंख्यकों’ की चालबाज़ी कहा है, लेकिन मामला गंभीर होता जा रहा है। सोशल मीडिया से लेकर मुस्लिम देश आधिकारिक तौर पर इस बारे में बयान जारी कर रहे हैं।

कुवैत में करीब 60 संस्थाओं के गैर सरकारी कोऑपरेटिव संगठन ने बीते 23 अक्टूबर को बॉयकॉट फ्रांस को लेकर निर्देश जारी किए और कई स्टोर्स में फ्रेंच प्रोडक्ट्स का व्यापार बंद हो गया। दोहा में भी इस तरह की खबरें हैं तो कतर यूनिवर्सिटी ने फ्रांस के रवैये को इस्लाम के खिलाफ बताते हुए फ्रेंच सांस्कृतिक सप्ताह के कार्यक्रम को टाल दिया है। मुस्लिम देशों में फ्रांस और मैक्रों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कहां कैसी प्रतिक्रिया हो रही है?

मैक्रों दिमागी इलाज करवाएं
तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने बयान जारी किया कि मैक्रों का मुस्लिमों और इस्लाम को लेकर रवैया बताता है कि उन्हें दिमागी इलाज की ज़रूरत है। जिस देश में लाखों मुस्लिम रह रहे हैं, उसके प्रमुख को जब आस्था की स्वतंत्रता को लेकर ही समझ नहीं है तो और क्या कहा जाए?

अभिव्यक्ति के नाम पर ईशनिंदा?
कुवैत के विदेश मंत्री ने फ्रेंच टीचर की हत्या की निंदा की लेकिन यह भी कहा कि इस पर राजनीति करते हुए नफरत और नस्लवाद फैलाना ठीक नहीं है। उधर, सऊदी अरब स्थित 57 देशों के इस्लामिक संगठन ने पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों की प्रैक्टिस की निंदा करते हुए कहा था कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर आप किसी धर्म की या ईशनिंदा नहीं कर सकते।

ध्रु​वीकरण की राजनीति न करें
पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने भी इस बहस में कूदते हुए ट्वीट किया और कहा कि ऐसे समय में मैक्रों को हमदर्दी से काम लेना था, न कि ध्रु​वीकरण की राजनीति करते हुए कट्टरता को बढ़ावा देना था। ‘यह नाजीवादी अप्रोच है, जो इस्लामोफोबिया फैलाने में यकीन रखती है।’ वहीं मोरक्को और जॉर्डन ने भी मोहम्मद के कार्टूनों के प्रकाशन पर ऐतराज जताया।

फ्रांस ने कैसे किया डैमेज कंट्रोल
मुस्लिम देशों ने जिस तरह संगठित और आक्रामक तौर पर फ्रांस के प्रोडक्ट्स का बॉयकॉट किया, तो फ्रांस की मशीनरी को होश आया। फ्रांस के विदेश मंत्रालय और कूटनीतिज्ञों ने इस बॉयकॉट को वापस लिये जाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं, तो दूसरी तरफ, मैक्रों ने भी ट्विटर के ज़रिये यह संदेश दिया है कि वो ‘हेट स्पीच के पक्ष में नहीं हैं और मानवीय गौरव और यूनिवर्सल मूल्यों का समर्थन करते हैं।’ साथ ही, मैक्रों ने सभी संप्रदायों और शांति की भावना को मानने का भी संदेश दिया।

फ्रांस का रवैया समझना ज़रूरी
हत्या की एक घटना या कार्टूनों के प्रकाशनों को मैक्रों की हिमायत मिलने के कारण बात इतनी नहीं बढ़ी कि पूरा मुस्लिम वर्ल्ड फ्रांस के खिलाफ हो जाए और वो भी इतने पुरज़ोर तरीके से। रिपोर्ट्स के मुताबिक 60 लाख मुस्लिमों की आबादी वाले फ्रांस के बॉयकॉट के पीछे और भी कारण हैं।

* 1905 से सेक्युलर विचार अपनाने वाले फ्रांस ने पिछले कुछ समय से इस्लाम के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया। फ्रांस के मुस्लिमों को ‘काउंटर सोसायटी’ कहा जाता है और यह भी तथ्य है कि यूरोप में फ्रांस वह देश था, जिसने 2004 में हिजाब पर प्रतिबंध लगाया।
* मैक्रों ‘इस्लाम में सुधार’ संबंधी बयान दे चुके हैं, जिन पर काफी तीखी प्रतिक्रिया हो चुकी है। यह फैक्ट भी कुछ कहता है कि 2012 से फ्रांस में मुस्लिम अल्पसंख्यकों ने करीब 36 हमले किए हैं।
* इस्लाम के खिलाफ लामबंदी को 2022 चुनाव के मद्देनजऱ मैक्रों की राजनीति भी माना जा रहा है। मैक्रों एक ऐसा कानून लाने की तैयारी में हैं, जिसके तहत विदेशी फंड से ट्रेंड इमाम फ्रांस में नहीं आ सकेंगे। यह भी प्रस्ताव है कि मस्जिदों को स्टेट फंडिंग मिले और टैक्स ब्रेक्स भी।
* मैक्रों खुद ‘इस्लाम के संकट’ में होने संबंधी बयान देते रहे हैं, तो उनके मंत्री भी ‘इस्लामी अलगाववाद’ और इस्लाम को केंद्र में रखकर फ्रांस के सामने ‘सिविल वॉर’ के खतरे होने जैसे बयान देते रहे हैं।

कुल मिलाकर, फ्रांस पर फासीवादी रवैया, नस्लवादी बर्ताव और राजनीतिक फायदे के लिए वैश्विक मूल्यों की अनदेखी के आरोप हैं, तो दूसरी तरफ, फ्रांस अपनी सेक्युलर, लोकतांत्रिक छवि को बचाने और कारोबारी नुकसान के खतरे को टालने में लग चुका है। नफरत की आग कैसे और कब तक बुझेगी, यह देखना होगा। (hindi.news18.com)


27-Oct-2020 12:26 PM 34

    (dw.com)

अमेरिकी सीनेट ने एमी कोनी बैरेट की सोमवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में जज के रूप में नियुक्ति की पुष्टि कर दी। इसे अमेरिकी न्यायपालिका के लिए एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

सीनेट में रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट सांसदों को हराते हुए अदालत में संभवत: एक लंबे समय के लिए कंजर्वेटिव बहुमत सुनिश्चित करा लिया। बैरेट को उदारवादियों की आइकन दिवंगत जज रुथ बेडर गिंसबर्ग की मृत्यु के बाद सुप्रीम कोर्ट में रिक्त हुए पद को भरने के लिए ट्रंप ने मनोनीत किया था।

जीवनकाल के लिए नियुक्त हुई 48 वर्षीय बैरेट सुप्रीम कोर्ट की 115वीं जज बन गई हैं। वो मंगलवार से काम शुरू कर पाएंगी। उनकी नियुक्ति की पुष्टि के बाद संभव है कि अब गर्भपात, सस्ती स्वास्थ्य सेवा और खुद ट्रंप के निर्वाचन जैसे मामलों पर फैसलों के एक नए युग की शुरुआत हो सकती है। वो सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप द्वारा मनोनीत तीसरी जज बन गई हैं।

व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में उनके शपथ-ग्रहण समारोह में ट्रंप ने कहा, ‘यह अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है।’ करीब 200 लोगों की उपस्थिति में जस्टिस क्लैरेंस थॉमस ने बैरेट को संविधान की शपथ दिलाई। शपथ लेने के बाद बैरेट ने कहा कि वो मानती हैं कि ‘एक जज का काम है कि वो नीतियों को लेकर अपनी पसंद से प्रभावित ना हो’और वो ‘अपना काम बिना किसी डर या पक्षपात के’ करेंगी।

चुनावों से ठीक एक सप्ताह पहले कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसला लंबित है और बैरेट का मत इनमें से कई मामलों में निर्णायक साबित हो सकता है।

अहम समय में नियुक्ति
यह पहली बार था जब राष्ट्रपति चुनाव के इतनी करीब सुप्रीम कोर्ट में किसी जज की नियुक्ति हुई। यह अमेरिका के आधुनिक इतिहास में पहली बार था जब अल्पसंख्यक पार्टी ने राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत जज को जरा भी समर्थन ना दिया हो।

डेमोक्रेट सांसदों ने कई हफ्तों तक यह कहा कि उनकी नियुक्ति पर मतदान में गलत तरह से जल्दबाजी की जा रही है। यहां तक की रविवार को पूरी रात जिरह करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि रिक्त पद को भरने के लिए किसी का नाम मनोनीत करने का अधिकार उसे मिलना चाहिए जो तीन नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में अपनी जीत दर्ज करे।

चुनावों से ठीक एक सप्ताह पहले कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसला लंबित है और बैरेट का मत इनमें से कई मामलों में निर्णायक साबित हो सकता है। इनमें नार्थ कैरोलाइना और पेंसिल्वेनिया राज्यों में ऐब्सेंटी बैलट की समय सीमा बढ़ाना और ट्रंप की इमरजेंसी अपील कि मैनहैटन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी को उनके आयकर रिटर्न हासिल करने से रोका जाए शामिल हैं। 10 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में ओबामा युग के अफोर्डबल केयर कानून पर भी सुनवाई होनी है, जिसे ट्रंप के कहने पर चुनौती दी गई है। सीके/एए (एपी)

 


27-Oct-2020 11:49 AM 60

   dw.com

पेशावर, 27 अगस्त। पाकिस्तान के पेशावर में एक मदरसे में मंगलवार की सुबह हुए शक्तिशाली विस्फोट में कम से कम 7 बच्चों की मौत हो गई और 70 अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस और अस्पताल कर्मचारियों ने मृतकों की पुष्टि की है।

यह धमाका मंगलवार की सुबह ऐसे वक्त में हुआ जब मदरसे में मौलवी इस्लाम के बारे में बच्चों को बता रहे थे। पेशावर के इस मदरसे का नाम जामिया जुबैरा है। पुलिस अधिकारी वकार अजीम ने बताया कि धमाका मदरसे में एक बैग छोड़े जाने के तुरंत बाद हुआ। उनके मुताबिक मदरसे में किसी ने बैग रख दिया था और उसके चंद मिनटों बाद विस्फोट हुआ। धमाके में घायल कई लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है और अस्पताल प्रशासन को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। घायलों का इलाज लेडी रीडिंग अस्पताल में चल रहा है।

लेडी रीडिंग अस्पताल के प्रवक्ता, मुहम्मद असीम ने एक बयान में कहा कि पांच शवों और 70 घायल लोगों को अब तक अस्पताल लाया गया है, उन्होंने कहा कि ज्यादातर शव और घायल जिन्हें अस्पताल लाया गया, वे जल गए थे और उनके शरीर में छर्रे लगे थे।

पेशावर खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय राजधानी है, जो कि अफगानिस्तान से सटा इलाका है। पुलिस अधिकारी मदद खान ने कहा है कि मदरसे वाले इलाके को सील कर दिया गया और बैग रखने वाले शख्स की तलाश की जा रही है। बचाव अभियान के सदस्य बिलाल फैजी ने बताया कि राहत और बचाव का काम पूरा कर लिया गया है और सभी घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया है। शहर के सभी अस्पतालों में आपातस्थिति की घोषणा की गई है। पुलिस के साथ अन्य एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

पिछले महीने खैबर पख्तूनख्वा के नौशेरा स्थित अकबरपुरा इलाके में विस्फोट हुआ था जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी और 2 घायल हुए थे।

मौके पर सबूत इक_ा करते सुरक्षाकर्मी

हाल के सालों में इस प्रांत में आतंकवादी हमले की कई वारदात हुई हैं लेकिन पूरे पाकिस्तान में अलग-अलग संप्रदाय के बीच हिंसा में भी लोगों की जान जाती रही है।

बीते एक सप्ताह में ये पाकिस्तान में धमाके की दूसरी घटना है. हाल ही में पाकिस्तान के कराची शहर में बड़ा धमाका हुआ था। इस विस्फोट में पांच लोगों की मौत हुई थी और 20 के करीब लोग घायल हुए थे। मदरसे में धमाके से दो दिन पहले क्वेटा में भी एक विस्फोट हुआ था जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी।

साल 2014 में पाकिस्तान तालिबान के आतंकियों ने सेना द्वारा चलाए जाने वाले स्कूल पर हमला कर 150 बच्चों की हत्या कर दी थी. पाकिस्तान में अल कायदा, तालिबान और आईएस के आतंकियों ने 2004 से अब तक करीब 70,000 लोगों की हत्या की है, जिनमें नेता, पत्रकार, एक्टिविस्ट और आम लोग शामिल हैं।

2014 के जून से सैन्य कार्रवाई के कारण आतंकी अफगानिस्तान की तरफ चले गए हैं लेकिन अभी भी उनमें अचानक हमले को अंजाम देने की क्षमता है। एए/सीके (रॉयटर्स, एपी, एएफपी)

 

 


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