अंतरराष्ट्रीय

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15-Apr-2021 7:58 PM 13

जर्मनी अपनी दोहरी शिक्षा प्रणाली के लिए जाना जाता है. इसके तहत स्कूली शिक्षा के बाद किशोरों को व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलता है. कोरोना महामारी के दौरान बहुत से किशोर प्रशिक्षण से वंचित हैं.

 डॉयचे वैले पर महेश झा की रिपोर्ट- 

कोरोना महामारी का असर यूं तो दुनिया भर में हुआ है, लेकिन जर्मनी में अर्थव्यवस्था के कुछ इलाके इसके खास चपेट में आए हैं. इसका असर पर्यटन, संस्कृति और रेस्तरां जैसे इलाकों में कारोबार और नौकरी पर हुआ है. इसका प्रभाव बहुत से नौजवानों के भविष्य पर भी पड़ा है, जिन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण की जगह नहीं मिल रही है. आने वाले महीनों में जर्मनी में स्कूली साल खत्म हो रहा है और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए नया साल शुरू हो रहा है. इस मौके पर पर जो आंकड़े सामने आए हैं उसके अनुसार 2019 के मुकाबले 2020 में व्यावसायिक प्रशिक्षण के कॉन्ट्रैक्ट में करीब 10 फीसदी की कमी देखी गई.

सांख्यिकी कार्यालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार यह कमी अभूतपूर्व है. सांख्यिकी कार्यालय का कहना है कि हालांकि पिछले सालों में व्यावसायिक प्रशिक्षण की सीटों में कमी होती रही है, लेकिन पिछले साल जितनी कमी हुई है उतनी कभी नहीं हुई. पिछले साल 4,65,000 किशोरों ने व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया. सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार उनमें दो तिहाई संख्या पुरुषों की थी. पिछले साल व्यावसायिक प्रशिक्षण की सीटें पाने में महिलाएं पुरुषों से और पीछे रही हैं. उनकी संख्या में 10.2 प्रतिशत की कमी आई.

जर्मनी के विभिन्न प्रांतों में व्यावसायिक प्रशिक्षण में कमी से पता चलता है कि किस प्रांत में अर्थव्यवस्था की क्या हालत है. हैम्बर्ग और जारलैंड में कमी साढ़े 12 प्रतिशत से ज्यादा रही है, जबकि राजधानी बर्लिन से सटे ब्रांडेनबुर्ग में सिर्फ 2.8 प्रतिशत. यह इसलिए भी है कि कृषि क्षेत्र में हालत उतनी खराब नहीं रही. उसमें एक साल पहले के मुकाबले 500 ज्यादा किशोरों को प्रशिक्षण का मौका मिला. उद्योग और व्यापार में 12 प्रतिशत की कमी और कारीगरी में 6.6 प्रतिशत की. कोरोना महामारी का असर खासकर उद्योग और व्यापार पर पड़ा है.

व्यावसायिक प्रशिक्षण का मकसद किशोरों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ काम के लिए तैयार करना है. दो से तीन साल के व्यावसायिक प्रशिक्षण के दौरान ट्रेनी को तनख्वाह भी मिलती है. 2018 में ट्रेनी की औसत मासिक आय 908 यूरो थी. सबसे अच्छी तनख्वाह वाले व्यवसायों में शिप मैकेनिक, नर्स, राजमिस्त्री और बीमा क्लर्क आते हैं जिन्हें पहले साल करीब 1100 और तीसरे साल में 1500 यूरो से ज्यादा मिलता है. इन नौकरियों में सालाना तनख्वाह 35 से 40 हजार यूरो होती है.

जर्मनी की दोहरी शिक्षा प्रणाली अपने आप में अनूठी है जिसे देश में कम बेरोजगारी दर के लिए जिम्मेदार माना जाता है. तीन साल व्यावसायिक ट्रेनिंग के कारण देश में हमेशा प्रशिक्षित कुशल कर्मी उपलब्ध रहते हैं. जर्मनी के मिटेलश्टांड के नाम से विख्यात छोटे और मझौले उद्यम इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं क्योंकि देश के 10 में 8 ट्रेनी इन्हीं उद्यमों में ट्रेनिंग पाते हैं. इस सिस्टम की वजह से जर्मनी में 2019 में 15 से 24 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर सिर्फ 5.8 प्रतिशत थी, जबकि यूरोप में यह दर 15 प्रतिशत थी. ग्रीस और स्पेन जैसे देशों में यह 30 प्रतिशत से ज्यादा है.

व्यावसायिक प्रशिक्षण एक तरह से नौकरी पाने की गारंटी है. 2018 में 71 प्रतिशत ट्रेनी को उन्हीं कंपनियों में नौकरी मिल गई जहां वे ट्रेनिंग पा रहे थे. श्रम बाजार शोध संस्थान के अनुसार 94 प्रतिशत ट्रेनी को तीन महीने के अंदर नौकरी मिल जाती है. जर्मनी में करीब 30 लाख छोटे और मझौले उद्यम हैं. देश के करीब 15 लाख ट्रेनीशिप में 80 प्रतिशत ट्रेनिंग इन्हीं उद्यमों में दी जाती है. प्रशिक्षण का बड़ा खर्च 70 प्रतिशत तक भी वही उठाते हैं. लेकिन उन्हें प्रशिक्षित कर्मचारियों की भर्ती पर कोई खर्च नहीं करना पड़ता क्योंकि 10 में सात ट्रेनी उन्ही कंपनियों में नौकरी कर लेते हैं.

(dw.com)


15-Apr-2021 7:43 PM 13

एक वित्तीय कंपनी के लिए सरकार में लॉबिंग के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल करने के आरोपों से घिरे ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के खिलाफ संसदीय जांच नहीं होगी.

  डॉयचे वैले पर स्वाति बक्शी की रिपोर्ट- 

ग्रीनसिल कैपिटल नाम की एक कंपनी के हक में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों की लामबंदी के मामले में कैमरन फंस गए हैं. उनके खिलाफ लेबर पार्टी ने संसदीय जांच की योजना रखी लेकिन प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन ने अपने सांसदों से इसके खिलाफ वोट करने को कहा और प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया गया.

बॉरिस जॉनसन ने एक सरकारी वकील नाइजल बोर्डमैन को इस मामले में स्वतंत्र पुनरावलोकन का जिम्मा दिया है. बोर्डमैन अपनी सरकारी भूमिका से अलग रहकर ग्रीनसिल मामले के वित्तीय पहलुओं और लॉबिंग की जांच पूरी करेंगे. लेबर पार्टी ने इसे सत्ताधारी कंजरवेर्टिव पार्टी के भ्रष्टाचार की लीपा-पोती करार दिया है. डेविड कैमरन ने रविवार को एक लंबा बयान जारी करके कहा कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा है लेकिन इतना जरूर है कि उन्हें "सिर्फ औपचारिक तरीकों से संवाद करना चाहिए था ताकि भ्रामक प्रचार की कोई गुंजाइश ना रहे."

क्या है ग्रीनसिल कंपनी का मामला?

इस ताजा विवाद के केंद्र में है ग्रीनसिल कैपिटल और उसकी नींव रखने वाले लेक्स ग्रीनसिल जो उस वक्त डेविड कैमरन के सलाहकार थे, जब वे प्रधानमंत्री पद पर थे. इसके चलते ग्रीनसिल की तमाम सरकारी महकमों में पहुंच बनी जिसके चलते उनकी कंपनी को जबरदस्त आर्थिक फायदा हुआ. हालांकि इस साल मार्च में यह कंपनी ठप हो गई. संडे टाइम्स अखबार की खोजी रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीनसिल उस दौर में बनी ऐसी नीतियों के मुख्य कर्ताधर्ता रहे हैं, जिनसे छोटी कंपनियों को तुरत-फुरत में सरकारी सहायता मुहैया कराई जा सके. उनकी अपनी कंपनी ग्रीनसिल कैपिटल भी लाभ पाने वाली ऐसी कंपनियों में शामिल है.

2016 में अपना पद छोड़ने के बाद डेविड कैमरन साल 2018 में ग्रीनसिल से जुड़ गए. आरोप है कि उन्होंने ब्रिटेन के चांसलर ऋषि सुनक को लिखित संदेश भेजे और कई आला अधिकारियों और मंत्रियों तक अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए ग्रीनसिल कैपिटल को कोविड कॉरपोरेट वित्तीय सुविधा के तहत तात्कालिक सरकारी मदद दिलवाई.

ऋषि सुनक के संदेशों को बाद में सार्वजनिक किया गया, तो पता चला कि अप्रैल 2019 में उन्होंने डेविड कैमरन को कहा था कि वे उन्हें वित्तीय सुविधा का पूरा लाभ देने के लिए अपनी विभागीय टीम पर दबाव बना रहे हैं. कैमरन ग्रीनसिल कैपिटल से सलाहकार के तौर पर जुड़े और उन्हें इससे लाखों पाउंड का फायदा होने की बात कही जा रही है. 2019 में कैमरन ने ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक और ग्रीनसिल के बीच एक निजी बातचीत भी करवाई.

इसके अलावा यह बात भी सामने आई है कि 2018 में ग्रीनसिल ने सप्लाई चेन फाइनैंस सेवा के जरिये राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा यानी एनएचएस से जुड़ा एक कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने में भी सफलता पाई. सप्लाई चेन फाइनैंस सेवा देने वाली कंपनियां एक निश्चित फीस के बदले किसी कंपनी के बिलों का भुगतान तुरंत करने में सहायता करती है.

ग्रीनसिल की सरकारी मंत्रालयों में पैठ और अधिकारियों से संबंधों की परतें धीरे धीरे खुल रही हैं. सांठगांठ का यह संकट इस मंगलवार से और गहराता नजर आया जब यह बात सामने आई कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बिल क्रॉदर्स ने अपना पद छोड़ने से पहले ही ग्रीनसिल कैपिटल के सलाहकार के तौर पर काम करना शुरु कर दिया. चौंकाने वाली बात यह भी है कि उन्हें यह भूमिका निभाने के लिए आधिकारिक सहमति मिली हुई थी.

लॉबिंग के मायने और सवाल

ब्रिटेन में लॉबिंग राजनैतिक प्रक्रिया का मान्य हिस्सा है और सांसदों की लामबंदी आम बात है. लॉबिंग का मतलब है किसी नीति या जनहित के मसले पर सरकारी रुख को प्रभावित करने के लिए लामबंदी. इसके लिए लिखित सामग्री, ईमेल या सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि इसके लिए कायदे-कानून तय हैं ताकि सांसदों में भ्रष्ट आचरण और सरकारी महकमों में पहुंच का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए ना किया जाए. ब्रिटिश संसद की वेबसाइट के मुताबिक कोई भी व्यक्ति अपने सांसदों और हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्यों को लामबंद कर सकता है. लॉबिंग करने वालों में व्यवसाय, चैरिटी, दबाव गुट, ट्रेड यूनियन और औद्योगिक प्रतिनिधि शामिल हैं.

वर्तमान नियमों के मुताबिक ब्रिटेन में मंत्री और अहम प्रशासनिक अधिकारी पद छोड़ने के बाद दो साल तक लॉबिंग की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हो सकते. औपचारिक रूप से लॉबिंग करने वाले व्यक्तियों का नाम एक रजिस्टर में दर्ज किया जाता है. डेविड कैमरन ने 2016 में प्रधानमंत्री पद से विदा ली और ग्रीनसिल के साथ 2018 में जुड़े. वे एक स्वतंत्र लॉबिस्ट या किसी लॉबिंग कंपनी के लिए काम नहीं कर रहे थे, बल्कि ग्रीनसिल का हिस्सा थे. इसलिए रजिस्टर में नाम दर्ज करने की बात भी उन पर लागू नहीं हुई.

ग्रीनसिल कैपिटल मामले में लॉबिंग से जुड़े कई अनसुलझे सवाल तो हैं लेकिन मामला कहीं अधिक पेचीदा है. उदाहरण के तौर पर लेक्स ग्रीनसिल डेविड कैमरन की सरकार में इतने भीतर तक पहुंच बनाने में कामयाब कैसे होते चले गए. एक सवाल यह भी है कि सरकार को एनएचएस से जुड़े भुगतान के लिए सप्लाई चेन फिनैंस सेवा लेने की जरूरत क्यों पड़ गई. ऋषि सुनक के संदेश और भूमिका पर सवालिया निशान हैं, तो एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का अपने पद पर रहते हुए एक निजी कंपनी में काम करना, आला सरकारी अधिकारियों और निजी हितों के बीच गहरी सांठ-गांठ की चिंताजनक स्थिति की ओर इशारा करता है.

उम्मीद जताई गई है कि नाइजल बोर्डमैन ग्रीनसिल मामले में हुए वित्तीय फैसलों और लॉबिंग की प्रक्रिया पर अपनी रिपोर्ट जून के अंत तक देंगे. हालांकि लॉबिंग सरकारी महकमों और पूंजीवादी फायदों के उलझे तारों को यह रिपोर्ट सुलझा देगी, ऐसी उम्मीद बेमानी है.(dw.com)


15-Apr-2021 7:25 PM 23

ओटावा. कनाडा की संसद को अपने ही एक सदस्य की करतूतों पर शर्मसार होना पड़ा है. दरअसल, कोरोना संक्रमण के कारण हाउस ऑफ कॉमन्स की की डिजिटल मीटिंग के दौरान एक सांसद अचानक बिना कपड़ों के कैमरे के सामने आ गए. अपने साथी सांसद की इस करतूत को देखकर मीटिंग में मौजूद सभी सदस्य हैरान रह गए. कनाडाई संसद की कार्यवाही के दौरान निर्वस्त्र दिखे इस सांसद की पहचान पोंटिएक के क्यूबेक जिले का 2015 से प्रतिनिधित्व कर रहे विलियम अमोस के रूप में हुई है. जो स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है, उसके अनुसार, अमोस एक डेस्क के पीछे खड़े दिख रहे हैं और निजी अंग एक मोबाइल से ढके हुए हैं. अभी तक यह पता नहीं चला है कि उन्होंने इसे जान बूझकर अंजाम दिया कि अनजाने में ऐसी गलती हुई.

मीडिया में खबर आने और बेइज्जती होने के बाद अमोस ने ई-मेल के जरिए दिए गए बयान में कहा कि यह दुर्भाग्य से हुई गलती थी. जॉगिंग से लौटने के बाद मैं कार्यस्थल पर पहने जाने वाले कपड़े बदल रहा था जब मेरा वीडियो गलती से ऑन हो गया. अनजाने में हुई इस गलती के लिए मैं हाउस ऑफ कॉमन्स के अपने साथियों से दिल से माफी मांगता हूं. निश्चित तौर पर यह अनजाने में हुई गलती थी और यह दोबारा नहीं होगी.

विपक्षी ब्लॉक क्यूबेकोइस पार्टी की सांसद क्लाउडे बेलेफियोलि ने प्रश्नकाल के बाद इस घटना को उठाया और सुझाव दिया कि संसदीय मर्यादा के अनुरूप संसद के पुरुष सदस्यों को ट्राउजर, अंडरवियर, शर्ट और एक जैकेट तथा टाई पहननी चाहिए. जिसका बाकी सदस्यों ने भी समर्थन किया. कनाडाई संसद ने अभी तक इस सांसद के खिलाफ कार्रवाई करने का संकेत नहीं दिया है. (news18.com)


15-Apr-2021 7:25 PM 23

लंदन. दुनियाभर में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इसी बीच यूरोप में कोरोना की वजह से मरने वालों का आंकड़ा 10 लाख के पार पहुंच गया. वहीं, ब्रिटेन में दुनिया का सबसे लंबा और सख्त लॉकडाउन सोमवार से अनलॉक होना शुरू हो गया. 97 दिन बाद सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर फिर से रौनक दिखने लगी है. यहां 5 जनवरी से लॉकडाउन शुरू हुआ था. 21 जून से पूरी तरह से लॉकडाउन हटा लिया जाएगा. ब्रिटेन अपनी 48% से ज्यादा आबादी को कोविशील्ड वैक्सीन लगा चुका है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, 4 जनवरी को जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने नए प्रतिबंधों की घोषणा की, तब नियमों और प्लानिंग को लेकर बिल्कुल साफ रणनीति थी. कौन सा सेक्टर कब तक बंद रहेगा और कब खुलेगा? इसकी पहले से ही जानकारी दे दी गई थी. इस वजह से लोगों में अफरा-तफरी नहीं मची. लोगों ने सख्ती के साथ लॉकडाउन के नियमों का पालन किया.

इस बीच यूरोप धीमे टीकाकरण और लॉकडाउन में देरी की वजह से कोरोना की तीसरी लहर झेल रहा है. जनवरी में ब्रिटेन में रोजाना 55 हजार से ज्यादा नए केस मिल रहे थे. अब नए मरीजों का आंकड़ा 4 हजार से नीचे आ गया है.
डेढ़ महीने में दोगुने हुए नए केस
दुनिया में कोरोना का पीक 8 जनवरी को आया था. इस दिन सबसे ज्यादा 8.45 लाख मिले थे. इसके बाद 21 फरवरी को यह संख्या घटकर 3.22 लाख हो गई. यहां से केस बढ़ना शुरू हुआ और 11 अप्रैल को करीब दोगुना बढ़कर 6.32 लाख हो गए.

बीते दिन 5.88 लाख केस आए
दुनिया में सोमवार को 5 लाख 88 हजार 271 मामले रिकॉर्ड किए गए. इस दौरान 8,761 लोगों की मौत हुई. कोरोना के सबसे ज्यादा मामले भारत (1.60 लाख), अमेरिका (56,522), तुर्की (54,562), ब्राजील (38,866) और ईरान (23,311) में रिकॉर्ड किए गए. (news18.com)


15-Apr-2021 7:24 PM 23

 

इस्लामाबाद. बीते साल फ्रांस की एक मैगजीन में छपे पैगंबर मोहम्मद के एक कार्टून को लेकर पाकिस्तान में बवाल मचा हुआ है. देश की कट्टर इस्लामी पार्टी के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया जिसके बाद छिड़ी खूनी जंग में सात लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं. पाकिस्तान में बढ़ती हिंसा के मद्देनजर फ्रांस ने अपने नागरिकों और कंपनियों को जल्द से जल्द वहां से निकलने की सलाह दी है. रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, फ्रांस ने अपने नागरिकों और कंपनियों को कहा है कि उन्हें कुछ समय के लिए पाकिस्तान से निकल जाना चाहिए क्योंकि वहां की स्थितियां पेरिस के हितों के लिए खतरा है.

कार्टून को लेकर इमरान सरकार को फ्रांस के राजदूत को वापस भेजे जाने को लेकर कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान ने डेडलाइन दी थी. मगर प्रदर्शन से पहले ही पार्टी के प्रमुख साद हुसैन रिज्वी की गिरफ्तारी ने पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए. इन झड़पों के दौरान सात लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. सड़कों पर लोगों को हुजूम दिख रहा है. सोशल मीडिया पर भी काफी ट्रेंड हो रहा है.

दरअसल, तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) समर्थकों ने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून प्रकाशित करने के लिये फ्रांस के राजदूत को निष्कासित करने के वास्ते इमरान खान सरकार को 20 अप्रैल तक का समय दिया था, किंतु उससे पहले ही पुलिस ने सोमवार को पार्टी के प्रमुख साद हुसैन रिज्वी को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद टीएलपी ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. (news18.com)


15-Apr-2021 7:12 PM 11

कोरोना वायरस महामारी को शुरू हुए एक साल से अधिक का समय हो चुका है और इस समय ब्राज़ील में मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है.

ऐसे साक्ष्य हैं जो बताते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण से किशोरों और युवाओं की मौत कम ही होती है लेकिन ब्राज़ील में अब तक इस वायरस के कारण 1,300 बच्चों की मौत हो चुकी है.

एक डॉक्टर ने जेसिका रिकर्ते के कोरोना से संक्रमित एक साल के बेटे को यह कहते हुए देखने से मना कर दिया था कि उसके लक्षण इस वायरस के प्रोफ़ाइल से मिलते जुलते नहीं हैं. दो महीने बाद उस बच्चे की इस वायरस से मौत हो गई.

पेशे से शिक्षक जेसिका ने दो साल तक लगातार फ़र्टिलिटी का इलाज कराया था और उसमें नाकाम होती रही थीं लेकिन आख़िरकार वो गर्भवती हो गईं.

वो कहती हैं, "उसका नाम रोशनी से जुड़ा हुआ था. वो हमारी ज़िदंगी में एक प्रकाश की तरह था. उसने हमें वो ख़ुशी दिखाई जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी."

उन्होंने अपने बेटे लूकस में सबसे पहले भूख न लगने की समस्या को देखा क्योंकि वो पहले अच्छी तरह से खाना खाता था.

जेसिका को पहले लगा कि दांत निकलने की वजह से ऐसा है लेकिन लूकस की गॉडमदर जो उनकी नर्स हैं उन्होंने कहा कि उसके गले में ख़राश हो सकती है लेकिन उसके बाद लूकस को बुख़ार शुरू हो गया और सांस लेने में दिक़्क़त होने लगी.

कोविड टेस्ट ना कराने से बढ़ीं मुश्किलें
जेसिका उसको अस्पताल लेकर गईं और कोविड टेस्ट करने के लिए उन्होंने कहा.

जेसिका कहती हैं, "डॉक्टर ने ऑक्सिमीटर के ज़रिए ऑक्सीजन चेक किया तो उसका स्तर 86% था. अब मैं जानती हूं कि यह साधारण नहीं है."

लेकिन उसे तेज़ बुख़ार नहीं था तो डॉक्टर ने कहा, "चिंता करने की बात नहीं है और कोविड टेस्ट की ज़रूरत नहीं है. शायद यह गले में ख़राश की मामूली दिक़्क़त है."

यह भी पढ़ें: कोरोना: श्मशान कर्मचारियों का बुरा हाल, शवदाह के लिए लंबा इंतज़ार

डॉक्टर ने जेसिका से कहा कि कोविड-19 बच्चों में बेहद दुर्लभ है और उसने कुछ एंटिबायोटिक्स दवाइयां देकर उन्हें घर भेज दिया. इन संदेहों के बावजूद लूकस का प्राइवेट जगह से टेस्ट कराया जा सकता था.

जेसिका कहती हैं कि 10 दिन के एंटिबायोटिक्स के कोर्स के अंतिम दिन तक उसके लक्षण कम होते चले गए लेकिन उसकी थकान बरक़रार रही जिसके कारण उन्हें कोरोना वायरस की चिंता होने लगी.

वो कहती हैं, "मैंने कई वीडियो उसकी गॉडमदर, अपने परिजनों, मेरी सास और कई लोगों को भेजे तो उनका कहना था कि मैं इसके बारे में बहुत ज़्यादा ही सोच रही हूं. उन्होंने मुझे न्यूज़ देखने से मना किया क्योंकि उनका मानना था कि यह मुझे भ्रम में डाल रहा है. लेकिन मैं जानती थी कि मेरा बेटा ख़ुद से सांस नहीं ले पा रह है."

यह मई 2020 की बात है जब कोरोना वायरस महामारी लगातार फैल रही थी और उत्तर-पूर्व ब्राज़ील के तंबोरिल के सिएरा शहर में दो लोगों की मौत हो चुकी थी.

"हर कोई एक दूसरे को जानता था और पूरा शहर सदमे में था."

जेसिका के पति इसराइल को चिंता थी कि दूसरे अस्पताल में जाने पर संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाएगा और जेसिका और लूकस वायरस से संक्रमित हो जाएंगे.

लेकिन कई सप्ताह तक लूकस और अधिक सोने लगा तो आख़िरकार तीन जून को खाना खाने के बाद लूकस को लगातार उल्टियां होने लगीं.

जेसिका स्थानीय अस्पताल में गईं और उन्होंने उसका कोविड टेस्ट कराया.

लूकस की गॉडमदर जो वहां पर काम करती थीं उन्होंने बताया कि लूकस का कोविड टेस्ट पॉज़िटिव आया है.

अधिकतर बच्चों में MIS की स्थिति
जेसिका कहती हैं कि उस समय अस्पताल में रिसस्क्युरेटर (कृत्रिम तरीक़े से सांस देने वाली मशीन) तक नहीं था.

लूकस को सोबराल के पेडिएट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट में भेजा गया जो वहां से दो घंटे की दूरी पर था. वहां पर पता चला की लूकस को मल्टी-सिस्टम इनफ़्लेमेट्री सिंड्रोम (MIS) की शिकायत है.

यह ऐसी स्थिति होती है जिसमें वायरस के ख़िलाफ़ प्रतिरोधक क्षमता चरम पर होती है जिसके कारण महत्वपूर्ण अंगों में सूजन आ जाती है.

विशेषज्ञ कहते हैं कि यह स्थिति छह सप्ताह से अधिक आयु के बच्चों में कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद आ सकती है लेकिन यह बेहद दुर्लभ है.

लेकिन साओ पाउलो विश्वविद्यालय की महामारी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर फ़ातिमा मारिन्हो का कहना है कि उन्होंने महामारी के दौरान अब तक MIS के सबसे अधिक मामले देखे हैं लेकिन यह सभी मौतों के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

लूकस को जब अस्पताल में भर्ती किया गया तो जेसिका को उसी कमरे में रहने की अनुमति नहीं थी. उन्होंने अपनी ननद को अपने पास बुला लिया.

वो कहती हैं, "हम मशीन की बीप की आवाज़ सुन सकते थे जब तक मशीन बंद नहीं होती है तब तक लगातार बीप की आवाज़ आती रहती है. हम जानते हैं कि कोई व्यक्ति कब मरता है. कुछ मिनटों के बाद मशीन बंद होकर फिर चलने लगी और हमारा रोना शुरू हो गया."

डॉक्टर का कहना था कि लूकस को दिल का दौरा पड़ा था लेकिन वे उसे बचाने में सफल हो गए थे.

बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मेनुएला मोंते ने एक महीने तक लूकस का सोबराल के आईसीयू में इलाज किया. वो कहती हैं कि उन्हें आश्चर्य है कि लूकस की स्थिति बेहद चिंताजनक थी क्योंकि उसमें इस तरह के गंभीर लक्षण होने का कोई कारण नहीं था.

राज्य की राजधानी फोर्तालेज़ा के अलबर्ट सबिन चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल में बाल रोग विशेषज्ञ लोहोना तावारेस का कहना है कि जो भी बच्चे कोविड से संक्रमित पाए गए उनमें डायबिटीज़, हृद्य संबंधी और मोटापे जैसी अन्य बीमारियां भी थीं.

लेकिन लूकस के साथ ऐसा बिलकुल नहीं था.

लूकस आईसीयू में 33 दिन तक रहा और जेसिका उसे सिर्फ़ 3 बार ही मिल पाईं. लूकस को उसके दिल के लिए इम्युनोग्लोबुलिन दवाई की ज़रूरत थी जो कि बेहद महंगी है लेकिन सौभाग्य से एक मरीज़ ने उस दवा की एक ख़ुराक को अस्पताल को दे दिया था.

लूकस बेहद बीमार था इसलिए उसे इम्युनोग्लोबुलिन की दूसरी ख़ुराक की ज़रूरत थी. उसके शरीर पर लाल निशान पड़ने लगे और उसे लगातार बुख़ार आने लगा. उसे सांस लेने के लिए सपोर्ट की ज़रूरत थी.

लूकस की जब तबीयत थोड़ी ठीक हुई और वो ख़ुद से सांस लेने लगा तो डॉक्टर ने ट्यूब हटा दी. उन्होंने जेसिका और इज़रायल को वीडियो कॉल किया ताकि होश में आने के बाद लूकस ख़ुद को अकेला न महसूस करे.

जेसिका कहती हैं, "उसने जब हमारी आवाज़ सुनी तो उसने रोना शुरू कर दिया."

यह आख़िरी बार था जब उन्होंने अपने बेटे को कोई प्रतिक्रिया देते हुए पाया था. अगले वीडियो कॉल में 'वो ऐसे था जैसे उसके शरीर में जान ही नहीं है.' अस्पताल ने एक सीटी स्कैन कराने के लिए कहा और पाया कि लूकस को स्ट्रोक हुआ है.

तब तक दोनों पति-पत्नी से कहा गया कि लूकस बेहतर तरीक़े से ठीक हो रहा है और उसे जल्द ही आईसीयू से निकालकर जनरल वॉर्ड में शिफ़्ट कर दिया जाएगा.

जेसिका ने बताया कि वो और इज़रायल जब उसे देखने के लिए पहुंचे तो डॉक्टर पहले की तरह आशावान थे.

उन्होंने कहा, "उस रात मैंने अपने सेल फ़ोन को साइलेंट कर दिया. मैंने सपने में देखा कि लूकस मेरे पास आया है और मेरी नाक को चूम रहा है. वह सपना प्यार, समर्पण की एक बड़ी भावना थी और मैं बहुत ख़ुशी-ख़ुशी सोकर उठी थी. मैंने जब अपना फ़ोन देखा तो पाया कि उसमें डॉक्टर की 10 मिस्ड कॉल थीं."

डॉक्टर ने जेसिका को कहा कि लूकस का हार्ट रेट और ऑक्सीजन लेवल बेहद तेज़ी से गिर रहा था और सुबह को उसकी मौत हो गई.

जेसिका लोगों को कर रही हैं जागरूक
वो मानती हैं कि लूकस का अगर कोविड टेस्ट उनके निवेदन करने के बाद मई की शुरुआत में ही हो चुका होता तो वो आज ज़िंदा होता.

वो कहती हैं, "यह ज़रूरी है कि अगर डॉक्टर यह मानते हैं कि यह कोविड नहीं है तो भी उन्हें इसकी पुष्टि के लिए टेस्ट करना चाहिए."

"एक बच्चा नहीं कह सकता है कि वो कैसा महसूस कर रहा है इसलिए हमें टेस्ट पर निर्भर रहना होता है."

इज़रायल और जेसिका
जेसिका का मानना है कि उचित उपचार में देरी के कारण उसकी स्थिति ख़राब हुई. "लूकस को कई दिक़्क़तें शुरू हो चुकी थीं. फेफड़े 70 फ़ीसदी तक काम कर रहे थे, दिल 40 फ़ीसदी तक फैल चुका था. यह ऐसे स्थिति थी जिससे बचा जा सकता था."

डॉक्टर मोंते कहती हैं कि MIS कभी नहीं रोका जा सकता है इसका उपचार तब सफल होता है जब इसका इलाज शुरुआती चरण में ही शुरू हो जाए.

जेसिका अब उन लोगों को लूकस की कहानी सुनाकर उनकी मदद करना चाहती हैं जो गंभीर लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर जाते हैं.

"मैं उन लोगों के लिए यह कर रही हूं जो काश मेरे लिए यह कर पाते. अगर मेरे पास जानकारी होती तब मैं और सतर्क होती."

बच्चों पर कोविड का कम ख़तरा होता है?
डॉक्टर फ़ातिमा मारिन्हो कहती हैं कि यह एक ग़लतफ़हमी है कि बच्चों पर कोविड का कोई ख़तरा नहीं होता है. उनकी रिसर्च में पाया गया है कि इस वायरस से भारी संख्या में बच्चे और शिशु संक्रमित हुए हैं.

ब्राज़ील के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, फ़रवरी 2020 से लेकर 15 मार्च 2021 तक कोविड-19 के कारण नौ साल की आयु तक के कम से कम 852 बच्चों और एक साल की आयु तक के 518 बच्चों की मौत हुई है.

हालांकि, डॉक्टर मारिन्हो का अनुमान है कि यह संख्या दोगुनी हो सकती है. उनका मानना है कि कोविड टेस्टिंग कम होने की गंभीर समस्या के कारण भी नंबर कम हैं.

डॉक्टर मारिन्हो का आंकलन है कि महामारी के दौरान अनस्पेसिफ़ाइड अक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम से होने वाली मौतें पिछले साल की तुलना में 10 गुना अधिक हैं.

इन आंकड़ों को जोड़ते हुए वो बताती हैं कि वायरस ने 1,302 शिशुओं समेत 9 साल से कम आयु के 2,060 बच्चों की जान ली है.

आख़िर ऐसा क्यों हो रहा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्राज़ील में कोरोना के सबसे अधिक मामले बढ़ने की वजह यहां के शिशुओं और बच्चों के संक्रमित होने के कारण भी हो सकता है.

ब्राज़ीलियन सोसाइटी ऑफ़ पेडिएट्रिक्स के साइंटिफ़िक डिपार्टमेंट ऑफ़ इम्युनाइज़ेशन के अध्यक्ष रेनाटो कफ़ूरी कहते हैं, "हमारे यहां बिलकुल बहुत अधिक मामले आ रहे हैं और बहुत अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं और बच्चों समेत हर आयु के लोगों में अधिक मौतें हो रही हैं. अगर महामारी पर नियंत्रण किया जाता तो इन हालात को कम किया जा सकता था."

ब्राज़ील कोरोना संक्रमण के मामलों में अभी दुनिया में दूसरे नंबर पर है. देश में इसके कारण स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है. पूरे देश में ऑक्सीजन सप्लाई की कमी होती जा रही है, बुनियादी दवाओं की कमी है और देश के कई अस्पताल में आईसीयू बेड्स खाली नहीं हैं.

वहीं, ब्राज़ील के राष्ट्रपति ज़ायर बोलसोनारू ने लॉकडाउन का विरोध किया है और देश में P.1 नामक एक नए वैरिएंट का पता चला है जो कि अधिक संक्रामक समझा जा रहा है. महामारी की शुरुआत से किसी भी महीने की तुलना में पिछले महीने मरने वालों का आंकड़ा दोगुना रहा है.

टेस्टिंग की कमी के कारण बच्चों में इसके अधिक मामले पाए जाने की समस्या सामने आ रही है.

मारिन्हो कहती हैं कि बच्चों में कोविड के बारे में तब पता चल रहा है जब वे गंभीर रूप से बीमार हो जा रहे हैं. वो कहती हैं, "मामलों के पकड़ने की गंभीर समस्या का सामना हमें करना पड़ रहा है. आम जनता के लिए हमारे पास पर्याप्त टेस्ट नहीं हैं और बच्चों के लिए भी बहुत कम हैं. बीमारी के बारे में पता चलने में देरी हो रही है जिसके कारण बच्चों के इलाज में देरी हो रही है."

बच्चों में इस बीमारी के बारे में देर से पता चलने की वजह केवल कम टेस्टिंग ही नहीं है बल्कि कोविड-19 से संक्रमित बच्चों के लक्षण, विभिन्न आयु के युवा वर्ग के लक्षणों से अलग होते हैं जिसके कारण इसका पता लगाने में मुश्किल हो रही है.

वो कहती हैं, "आम कोविड के लक्षणों के मुकाबले बच्चों में डायरिया की अधिक दिक़्क़त है, इसमें उन्हें पेट दर्द और सीने में भी दर्द होता है. इसका पता चलने में देरी होती है तो बच्चा जब तक अस्पताल पहुंचता है तब तक उसकी हालत गंभीर हो चुकी होती है."

इसकी एक वजह ग़रीबी और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी भी है.

20 साल की आयु से कम के 5,857 कोविड-19 मरीज़ों को लेकर किए गए एक शोध से पता चलता है कि बच्चों में कोविड-19 की इतनी बुरी स्थिति के लिए अन्य बीमारियां और सामाजिक-आर्थिक दिक़्क़तें भी बड़ी वजहें हैं.

मारिन्हो इस पर सहमति जताते हुए कहती हैं, "अधिकतर मरीज़ काले बच्चे या फिर वे हैं जो ग़रीब परिवारों से आते हैं या जिनके पास मदद नहीं पहुंच पाती है. इन बच्चों पर भी मौत का अधिक ख़तरा है."

वो कहती हैं कि छोटे घरों में अधिक लोगों के रहने के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पाता है और ग़रीब समुदायों में स्थानीय स्तर पर आईसीयू की व्यवस्था नहीं होती है.

इसके अलावा इन बच्चों में कुपोषण की भी समस्या होती है जिसके कारण इनकी प्रतिरोधक क्षमता बेहद बुरी होती है.

मारिन्हो कहती हैं, "कोविड के कारण करोड़ों लोगों को ग़रीबी का मुंह देखना पड़ा है. एक साल के अंदर 70 लाख से 2.1 करोड़ लोग ग़रीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं. लोग भूखे हैं. ये सब मृत्यु दर पर असर डाल रहा है."

साओ पाउलो स्कूल ऑफ़ मेडिसिन के ब्रायन सूसा कहते हैं कि उनके शोध के अनुसार बच्चों के कुछ समूहों पर अधिक ख़तरा है इसलिए इन्हें कोविड का टीका पहले देना चाहिए. वर्तमान में 16 साल से कम आयु के बच्चों के लिए टीकाकरण की कोई व्यवस्था नहीं है.

कोरोना महामारी की शुरुआत से संक्रमण के डर के कारण आईसीयू में परिजन बच्चों से नहीं मिल सकते हैं.

अलबर्ट सबिन चिल्ड्रेंस हॉस्पिटल में आईसीयू में तैनात डॉक्टर सिनेरा कारनेइरो कहती हैं कि यह बहुत चुनौतीपूर्ण है क्योंकि परिजन ही बता सकते हैं कि उनके बच्चे कब कैसा महसूस करते हैं क्योंकि वे उनके दर्द या मनोवैज्ञानिक पीड़ा को समझ सकते हैं.

वो कहती हैं कि जब परिजन अपनी ग़ैर-मौजूदगी में अपने बच्चों की तबीयत के बारे में सुनते हैं तो वे परेशान हो जाते हैं क्योंकि वे उनके साथ वहां मौजूद रहना चाहते हैं.

डॉक्टर कारनेइरो कहती हैं, "बिना परिजनों की मौजूदगी में एक बच्चे की मौत बेहद पीड़ादायक है."

परिजनों और बच्चों के बीच बातचीत को सुधारने की कोशिश के तौर पर अलबर्ट सबिन हॉस्पिटल ने वीडियो कॉल के लिए फ़ोन और टैबलेट ख़रीदे हैं.

डॉक्टर कारनेइरो कहती हैं कि इसने बहुत मदद की है, "परिजनों और मरीज़ों के बीच में हम 100 से अधिक वीडियो कॉल कर चुके हैं. इस तरह की बातचीत तनाव कम करती है."

वैज्ञानिकों का तर्क है कि इस आयु वर्ग में मौत का ख़तरा अभी भी 'बेहद कम' है. वर्तमान आंकड़े बताते हैं कि ब्राज़ील में कोविड के कारण अब तक हुई 345,287 मौतों में से 0.58% उन लोगों की मौतें थीं जो 0-9 आयु वर्ग के बच्चे थे लेकिन यह संख्या भी 2,000 से अधिक बच्चों की है.

रॉयल कॉलेज ऑफ़ पेडिएट्रिक्स एंड चाइल्ड हेल्थ ने परिजनों को सलाह दी है कि वे आपातकालीन मदद तभी मांगें जब उनके बच्चों को यह दिक़्क़तें हों:

जब उसके शरीर पर लाल निशान दिखने लगे या छूने पर असामान्य रूप से उसका शरीर ठंडा महसूस हो.
सांस लेने में वो रुक रहा हो या अनियमित तरीक़े से सांस ले रहा हो या फिर सांस लेते वक़्त अजीब आवाज़ें निकाल रहा हो.
सांस लेने में दिक़्क़त हो या फिर उत्तेजित हो जाए या किसी बात पर प्रतिक्रिया न दे.
होंठ नीले पड़ जाएं, सुस्त हो या व्याकुल दिखे.
किशोर लड़कों के अंडाकोश में दर्द हो. (bbc.com)
 


15-Apr-2021 6:52 PM 20

सोफिया, 15 अप्रैल | बुल्गारिया के प्रधानमंत्री बॉयो बोरिसोव ने गुरुवार को अपनी गठबंधन सरकार से इस्तीफा दे दिया, जैसा कि इस महीने की शुरुआत में संसदीय चुनाव के बाद माना जा रहा था। समाचार एजेंसी डीपीए की रिपोर्ट के मुताबिक, नव निर्वाचित संसद के अंतरिम अध्यक्ष मीका साकोवा ने यह घोषणा की।

वह 2017 से प्रधानमंत्री के पद पर काबिज थे।

2020 में गर्मियों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों पर हजारों प्रदर्शनकारियों ने उनके इस्तीफे की मांग की थी।

4 अप्रैल को हुए चुनाव में बोरिसोव समर्थक यूरोपीय पॉपुलिस्ट जीईआरबी पार्टी यूरोपीय संघ और नाटो सदस्य राज्य में 26 प्रतिशत वोट के साथ फिर से सबसे मजबूत पार्टी बनी थी, लेकिन संसद में बहुमत नहीं जुटा पाई।

तीन विपक्षी दलों ने भी नई संसद में पहुंची, जिसके बाद कुल छह राजनीतिक बल बने।

सोफिया की नई संसद ने गुरुवार को अपने कन्स्टिचूअन्ट सत्र के लिए बैठक की।(आईएएनएस)


15-Apr-2021 2:34 PM 26

कोपेनहेगन (डेनमार्क): डेनमार्क ने मंगलवार को ऐलान किया है कि वह कोविड-19 वैक्‍सीन AstraZeneca के उपयोग को पूरी तरह से रोक देगा. साइड इफेक्‍ट के संदेह के चलते AstraZeneca वैक्‍सीन पर रोक लगाने वाला डेनमार्क, यूरोप का पहला देश है. विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन यानी WHO और यूरोपीय मेडिसिन्‍स की नियामक इकाई की ओर से वैक्‍सीन के पक्ष में राय जताए जाने के बाद भी डेनमार्क ने यह फैसला किया है. हेल्‍थ अथॉरिटी डायरेक्‍टर सोरेन ब्रोस्‍ट्रॉम ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा, 'डेनमार्क का टीकाकरण अभियान अब AstraZeneca वैक्‍सीन के बिना आगे बढ़ेगा.'

डेनमार्क यूरोप का पहला देश था जिसने अपने टीकाकरण प्रोग्राम से AstraZeneca वैक्‍सीन के उपयोग सस्‍पेंड किया था. वैक्‍सीन से ब्‍लड क्‍लॉटिंग की कुछ शिकायतों के बाद यह फैसला लिया गया था. ब्‍लड क्‍लॉटिंग के कुछ मामलों के बाद डेनमार्क ने एस्ट्राजेनेका के इस्तेमाल पर सबसे पहले रोक लगाई थी. डेनमार्क के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसकी घोषणा करते हुए कहा था कि ऐहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है. अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा गया है कि वैक्सीन और रक्त के थक्के जमने की बीच कोई संबंध है. बाद में फ्रांस, नॉर्वे और जर्मनी सहित करीब एक दर्जन देशों ने AstraZeneca वैक्‍सीन के उपयोग को अस्‍थायी तौर पर सस्‍पेंड किया था.

हालांकि यूरोपियन मेडिसिन्‍स एजेंसी की ओर वे वैक्‍सीन को सुरक्षित और प्रभावी बताए जाने के बाद ज्‍यादातर देशों ने इस वैक्‍सीन का फिर से उपयोग करना प्रारंभ कर दिया था. हालांकि डेनमार्क ने AstraZeneca का उपयोग बंद ही रखा था और इस संबंध में अपनी ओर से जांच की थी. डेनमार्क में 14 हजार से अधिक लोगों को टीका लगाए जाने के बाद Thrombosis के दो केसों को इस वैक्‍सीन के साथ जोड़ा गया था, इसमें से एक केस गंभीर किस्‍म था बताया गया था. 58 लाख की आबाद वाली डेनमार्क में अब तक 8 फीसदी लोगों का पूरी तरह कोविड-19 वैक्‍सीनेशन हो चुका है जबकि 17 फीसदी को टीके का पहला डोज लगा है. (ndtv.in)


15-Apr-2021 2:25 PM 32

एशिया महाद्वीप के हिस्सों में शादी पर लड़की वालों को दहेज देने की परंपरा पुरानी है. लेकिन पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अनोखी खबर ने सबको हैरत में डाल दिया. यहां दुल्हन की तरफ से मेहर के हक में सोना, चांदी, संपत्ति और लाखों रुपए नहीं रखा गया. शर्त रखी गई कि मात्र 32 फीसद कैदियों की जमानत और 32 नफिल नमाज मेहर में होना चाहिए. बीबीसी की खबर के मुताबिक, दुल्हन की तरफ से शर्त सामने आने पर वकील और गवाह दूल्हा के पास पहुंचे और उसने फौरन शर्त कबूल कर ली.

मेहर में 32 कैदियों की जमानत और नफिल नमाज की मांग

अनोखा निकाह जिला नवाबशाह की ताज कॉलोनी में सोमवार को आयोजित किया गया. 32 वर्षीय सफिया लाखो और 45 वर्षीय हबीब जसकानी एक दूसरे के जीवन साथी बन गए. सफिया का संबंध नवाबशाह और हबीब का संबंध खैरपुर जिला से है और दोनों पेशे से वकील हैं. 

पाक के सिंध प्रांत में अनोखी और आसान शादी का मामला

दुल्हन ने बताया कि गवाह और वकील ने रजामंदी के बारे में पूछा, "मैंने मेहर में उम्र के मुताबिक 32 गरीब कैदियों की जमानत और 32 नफिल नमाज की अदायगी की शर्त रख दी. जब ये शर्त दूल्हे को पढ़कर सुनाया गया, तो उसने भी हामी भर दी." दूल्हे का कहना था कि उनको मेहर में अजीब मांग सुनकर बहुत अच्छा लगा क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि परंपरा के मुताबिक सोना या नकदी लिखवाया जाएगा, लेकिन ये मामला तो बिल्कुल विपरीत साबित हुआ. हालांकि, उलेमाओं के कहने पर आपसी मशविरे से 11 सौ रुपए मेहर के तौर पर भी लिखाया गया है.

सफिया का कहना है कि उनका सबसे अलग मेहर तय करने का फैसला दूसरों को फायदा पहुंचाने की थी. उन्होने बताया, "32 कैदी आजाद होंगे तो उनके घरवालों की दुआएं मिलेंगी और हर जमानत के साथ एक नफिल की नमाज शुक्राने के तौर पर अदा की जाएगी." सफिया और लाखो दोनों की अरेंज मैरेज है. 2012 से सफिया वकालत के पेशे में हैं. उनकी कर्म स्थली नवाबशाह और कराची है, वहीं हबीब 2007 से सिंध हाई कोर्ट और निचली अदालतों मामले की पैरवी कर रहे हैं. दोनों की मंगनी पिछले साल अगस्त में हुई थी. (abplive.com)


15-Apr-2021 8:11 AM 21

गुवाहाटी/अगरतला, 14 अप्रैल| अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रोंगाली बिहू, पोहेला बोइशाख और संक्रांति जैसे त्योहारों को मनाने वाले लोगों को शुभकामनाएं दी हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों, दक्षिण एशियाई और दक्षिण पूर्व एशियाई नागरिकों को सोशल मीडिया के माध्यम से उनके नववर्ष पर शुभकामनाएं दीं।

बाइडेन ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर मंगलवार को लिखा, जिल (प्रथम महिला) और मैं (बाइडेन) दक्षिण एशिया एवं दक्षिण पूर्व एशियाई समुदायों को वैशाखी, नवरात्रि और इस सप्ताह आगामी नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं।

इसके साथ ही बाइडेन ने अल्थ अवुरुदा, बिहू, चैती चंद, गुड़ी पड़वा, खमेर नववर्ष, नवरेह, पोइला बोइशाख, पाना संक्रांति, पी माई, पुथंडु, रोंगाली बिहू, सोंगक्रान, तमिल नव वर्ष, उगादी और विशु को लेकर भी अपनी शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि आशा के इस मौसम में, हम कामना कर रहे हैं कि यह नव वर्ष आपके और आपके परिवार के लिए समृद्धि और प्रकाश लेकर लाए।

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों को इन त्योहारों की शुभकामनाएं दीं हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने ओडिशा के लोगों को उड़िया नववर्ष और महा बिशुबा पना संक्रांति पर अपनी शुभकामनाएं दी हैं। एक ट्वीट में मोदी ने सभी को उड़िया नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा, उड़िया नववर्ष और महा बिशुबा पना संक्रांति के पावन अवसर पर ओडिशा के लोगों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। मैं प्रार्थना करता हूं कि आने वाले वर्ष में आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हों। प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ्य और प्रसन्न रहे।

मोदी ने पुथांडु के पावन उत्सव पर दुनिया भर के और तमिलनाडु के तमिल भाइयों और बहनों को अपनी शुभकामनाएं दी हैं।

मोदी ने एक ट्वीट में कहा, तमिल संस्कृति की महानता उज्‍जवल रहे। इस प्रसन्नतापूर्ण और पावन दिवस पर मैं प्रार्थना करता हूं कि नया वर्ष सभी के जीवन को स्वास्थ्य, प्रसन्नता और समृद्धि से परिपूर्ण कर दे।  (आईएएनएस)
 


14-Apr-2021 9:41 PM 25

लंदन, 14 अप्रैल. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अप्रैल माह के अंत में होने वाले अपने भारत दौरे की अवधि को कम कर दिया है. देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बोरिस जॉनसन के प्रवक्ता के हवाले से बुधवार को यह जानकारी दी. इसके साथ ही प्रवक्ता ने कहा कि वो अपने इस दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे. इससे पहले, जॉनसन की जनवरी में गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत जाने की योजना थी, लेकिन ब्रिटेन में बढ़ते कोविड-19 संकट के कारण उन्हें यह यात्रा स्थगित करनी पड़ी थी.

बोरिस जॉनसन यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर जाने के बाद अपने पहले बड़े अंतरराष्ट्रीय दौरे के तहत अप्रैल के अंत में भारत आएंगे और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अवसर ‘देखेंगे’. जॉनसन की भारत यात्रा की घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब जॉनसन ने विदेश नीति, रक्षा, सुरक्षा और विकास संबंधी ब्रिटेन सरकार की समेकित समीक्षा का निष्कर्ष जारी किया. ब्रिटेन की विदेश नीति में आए बदलाव में ‘विश्व के भू-राजनीतिक केंद्र’ के रूप में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की ओर साफ झुकाव दिख रहा है. इसी के तहत ब्रिटेन ने आसियान आर्थिक संघ के साझेदार दर्जे के लिए आवेदन किया है.

‘डाउनिंग स्ट्रीट’ ने बीते 15 मार्च को कहा था, ‘‘ ‘क्वीन एलिजाबेथ कैरियर’ नाटो सहयोगियों के साथ क्षेत्र में अपनी पहली परिचालन तैनाती करेगा. ब्रिटेन दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) देशों के साझेदार दर्जे के लिए आवेदन कर रहा है और अप्रैल के अंत में प्रधानमंत्री (जॉनसन) यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होने के बाद अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा के तहत भारत जाएंगे.’’ उसने कहा था कि भारत की यात्रा ‘‘क्षेत्र में अवसरों को खोलेगी’’और इस दौरान भविष्य में एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के प्रणेता के रूप में बहुप्रतीक्षित भारत-ब्रिटेन उन्नत व्यापार साझेदारी (ईटीपी) को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है.

गौरतलब है कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के एक दिन में अब तक के सर्वाधिक 1,84,372 नए मामले सामने आए हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बुधवार के आंकड़ों के मुताबिक संक्रमण के कुल मामले 1,38,73,825 हो गए हैं, जबकि 13 लाख से अधिक लोग अब भी संक्रमण की चपेट में हैं. मंत्रालय के सुबह आठ बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 24 घंटे में 1,027 लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या 1,72,085 हो गई है जो 18 अक्टूबर, 2020 के बाद सबसे ज्यादा है.

लगातार 35वें दिन मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है और संक्रमित लोगों की संख्या 13,65,704 हो गई है जो कुल मामलों का 9.84 प्रतिशत है, जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने की दर घटकर 88.92 प्रतिशत हो गई है. इससे पहले 12 फरवरी को संक्रमित लोगों की सबसे कम संख्या 1,35,926 थी और 18 सितंबर 2020 को सबसे ज्यादा 10,17,754 थी. आंकड़ों के मुताबिक, बीमारी से स्वस्थ होने वालों की संख्या 1,23,36,036 हो गई है, जबकि संक्रमित मरीजों की मृत्यु दर और घटकर 1.24 प्रतिशत हो गई है.(news18.com)


14-Apr-2021 9:39 PM 28

लाहौर, 14 अप्रैल: पाकिस्तान (Pakistan) में 800 से अधिक भारतीय सिख यात्री बुधवार को अंतत: रावलपिंडी में अपने गंतव्य तक पहुंच गए. देश में एक कट्टर इस्लामी पार्टी के समर्थकों द्वारा सड़कें बंद किये जाने के कारण बैसाखी मनाने गुरुद्वारा पंजा साहिब जाने के दौरान उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा. भारतीय तीर्थयात्री बैसाखी पर्व में शामिल होने के लिये सोमवार को वाघा बॉर्डर के जरिये लाहौर पहुंचे थे.

फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून प्रकाशित करने के मामले में फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित करने की मांग कर रहे तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के समर्थकों द्वारा सड़कें बंद किये जाने से उनकी यात्रा प्रभावित हुई. पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि 800 से अधिक भारतीय सिखों ने हसनअबदाल में गुरुद्वारा पंजा साहिब में वैशाखी मनाई. उन्होंने कहा कि मंगलवार दोपहर भारतीय सिख पुलिस और रेंजर्स के साथ 25 बसों में सवार होकर लाहौर के गुरुद्वारा पंजा साहिब के लिये रवाना हुए.

अधिकारी ने कहा, 'टीएलपी के प्रदर्शन के दौरान सड़कें बंद होने के कारण सिख यात्री 14 घंटे के सफर के बाद बुधवार सुबह चार बजे के बाद हसनअबदाल पहुंचे, जहां पहुंचने में अमूमन तीन घंटे लगते हैं.' बुधवार को उन्होंने मुख्य कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जिसमें कई स्थानीय लोगों ने भी शिरकत की. भारतीय सिख पाकिस्तान में दिन के ठहराव के दौरान पंजाब में अन्य पवित्र स्थलों की भी यात्रा करेंगे.(news18.com)


14-Apr-2021 8:40 PM 23

न्यूयॉर्क, 14 अप्रैल | दैनिक जीवन में एल्गोरिदम की दखल पर बढ़ती चिंता के बावजूद, एक नए शोध से पता चलता है कि लोग मनुष्यों की तुलना में एल्गोरिदम पर भरोसा करने की अधिक संभावना रखते हैं, खासकर अगर कोई कार्य बहुत चुनौतीपूर्ण हो। अपनी प्लेलिस्ट पर अगला गीत चुनने से लेकर सही आकार की पैंट चुनने तक, लोग रोजमर्रा के निर्णय लेने में मदद करने और अपने जीवन को सुव्यवस्थित करने के लिए एल्गोरिदम की सलाह पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।

जॉर्जिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ता एरिक बोगर्ट ने कहा, "एल्गोरिदम बड़ी संख्या में कार्य करने में सक्षम हैं और वह जो कार्य करने में सक्षम है, उसमें हर दिन व्यावहारिक रूप से विस्तार भी हो रहा है।"

बोगर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि एल्गोरिदम पर अधिक से अधिक झुकाव के लिए एक पूर्वाग्रह भी है।

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन के लिए टीम में 1,500 व्यक्ति शामिल रहे और लोगों को एक तस्वीर का मूल्यांकन करने को कहा गया।

टीम ने स्वयंसेवकों को भीड़ की एक तस्वीर में लोगों की संख्या गिनने के लिए कहा और इसके साथ ही अन्य लोगों के समूह द्वारा तैयार किए गए सुझावों और एल्गोरिदम द्वारा उत्पन्न सुझावों को प्रदर्शित करने को कहा।

शोधकर्ता ने कहा कि जैसे ही फोटोग्राफ में लोगों की संख्या का विस्तार हुआ और इनकी गिनती अधिक कठिन हो गई तो लोगों ने खुद से गिनने के बजाय एक एल्गोरिथम की ओर से उत्पन्न सुझाव का पालन करने को तवज्जो दी।

शोधकर्ता के अनुसार, परीक्षण कार्य के रूप में मतगणना का विकल्प काफी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि फोटो में लोगों की संख्या बढ़ने पर यह कार्य निष्पक्ष रूप से कठिन हो जाता है। यह उस प्रकार का कार्य भी रहा, जिसके लिए लोग कंप्यूटर पर अधिक भरोसे की उम्मीद करते हैं। (आईएएनएस)


14-Apr-2021 7:55 PM 26

चीन में टीकाकरण अभियान की शुरुआत बहुत धीमी रही है. अब, जबकि चीन देश भर में टीकाकरण की दर को बढ़ाना चाहता है, तो लोगों को सुरक्षा और देश में मौजूद टीकाकरण की क्षमता को लेकर आशंकाएं पैदा हो रही हैं.

   डॉयचे वैले पर विलियम यांग की रिपोर्ट- 

दुनिया भर के तमाम देश जहां कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर को रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कोरोना वैक्सीन को पहुंचाने की कोशिश में लगे हैं वहीं चीन में टीकाकरण की दर को बढ़ाने के लिए पुरस्कार और दंड का सहारा लेना पड़ रहा है. 11 अप्रैल तक चीन में टीके की सिर्फ 16.73 करोड़ खुराक ही लोगों को दी जा सकी थी जो कि लक्ष्य से बहुत पीछे है. चीन में सरकार का लक्ष्य है कि जून महीने के अंत तक 56 करोड़ लोगों यानी करीब 40 फीसद आबादी का टीकाकरण कर दिया जाए.

इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अलग-अलग शहर और अलग-अलग संस्थाएं अलग-अलग तरीके अपना रही हैं. मसलन, कहीं-कहीं टीका लगवाने वालों को उपहार दिए जा रहे हैं तो कुछ जगहों पर अध्यापकों से कहा जा रहा है कि वो छात्रों के अभिभावकों से पूछें कि उनका टीकाकरण हुआ है या नहीं. यही नहीं, कुछ निजी कंपनियां तो अपने कर्मचारियों पर दबाव डाल रही हैं कि वो टीका लगवाएं अन्यथा उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा.

देश के दक्षिणी हिस्से में स्थित औद्योगिक केंद्र शेनजेन में जगह जगह बैनर लगे हैं जिन पर लोगों को टीका लगवाने की सलाह देने वाले नारे लिखे हुए हैं और एक जगह एक अध्यापक वी चैट ग्रुप में अभिभावकों को अपने टीकाकरण का विवरण देने के लिए दबाव बना रहा है. ली सरनेम वाली एक महिला ने डीडब्ल्यू को बताया, "जब तक किसी व्यक्ति के साथ स्वास्थ्य संबंधी कोई विशेष दिक्कत न हो, तो हर व्यक्ति को टीका लगवाना जरूरी कर दिया गया है.”

शेनजेंग के एक सार्वजनिक अस्पताल में काम करने वाली ली बताती हैं कि उनके तमाम सहयोगियों को यह नहीं बताया गया है कि उन्हें कौन सी वैक्सीन दी गई है. ली कहती हैं कि टीका लगवाने से वो इसलिए बच गईं क्योंकि उन्होंने अपनी ऐसी शारीरिक समस्या का प्रमाण दे दिया था जिसमें टीका लगवाने से दिक्कत हो सकती थी. हालांकि वो ये भी कहती हैं कि तमाम निजी संस्थाओं में इसके बावजूद टीका लगवाना पड़ रहा है क्योंकि वहां कर्मचारियों को टीका न लगवाने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है.

टीकाकरण प्रोत्साहन के लिए धमकी दी जा रही है

ली कहती हैं, "मेरी एक दोस्त की कंपनी ने पिछले महीने कहा कि यदि वह टीका नहीं लगवाती है तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा. जबकि मेरी दोस्त उस समय अपने नवजात शिशु को स्तनपान करा रही थी. तमाम लोग जो पहले चाइनीज वैक्सीन लगवाने से बच गए थे, अब सरकार के दबाव और तमाम धमकियों की वजह से उन्हें भी लगवाना पड़ रहा है.” डीडब्ल्यू के स्रोतों के मुताबिक, कोरोना वायरस संक्रमण के शुरुआती केंद्र रहे वुहान शहर में पिछले कुछ हफ्तों से वहां के नागरिकों को टीकाकरण के लिए तैयार किया जा रहा है. हालांकि तमाम लोग अपने आप भी टीका लगवा रहे हैं, लेकिन बहुत से लोगों का कहना है कि टीकाकरण के बारे में सूचनाएं छिपाई जा रही हैं और लोगों के पास ये जानने के बहुत कम स्रोत हैं कि जिन देशों में चीन में बने टीके लगाए गए हैं, वहां अब क्या स्थिति है.

लिन सरनेम वाले एक व्यक्ति का कहना था, "वुहान में बहुत से लोग सिर्फ यह जानते हैं कि कुछ देश चीन से टीका आयात कर रहे हैं लेकिन वो ये नहीं जानते कि टीकाकरण शुरू होने के बाद इन टीकों की वजह से पॉजिटिव मामलों में कमी आई है या नहीं. वुहान में हर व्यक्ति को सिनोफार्म नाम की वैक्सीन दी जा रही है लेकिन पड़ोसी शहरों में कुछ लोगों को सिनोवैट नाम की वैक्सीन दी जा रही है.”

सबसे ज्यादा चिंता सुरक्षा को लेकर है

कई चीनी नागरिकों ने टीका न लगवाने के पीछे सुरक्षा की चिंता और टीके की क्षमता को वजह बताया है. 11 अप्रैल को चीन में रोग नियंत्रण विभाग के एक बड़े अधिकारी ने कहा कि चीन में मौजूदा टीकों ने निम्न स्तर की सुरक्षा प्रदान की है और ऐसा माना जा रहा है कि इनकी क्षमता को बढ़ाने के लिए विभिन्न टीकों का मिश्रण बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है. चीन में सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के डायरेक्टर गाओ फू कहते हैं, "टीकों की बहुत उच्च सुरक्षा दर न होने की समस्या को हम जल्द ही सुलझा लेंगे. अब यह औपचारिक विचार के तहत हो रहा है कि क्या हमें टीकाकरण प्रक्रिया में विभिन्न तकनीक वाले अलग-अलग टीकों का प्रयोग करना चाहिए या नहीं.” बाद में चीन के एक सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में गाओ कहते हैं, कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उनकी टिप्पणियों की बिल्कुल गलत व्याख्या की.

अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर पॉलिसी, आउटकम्स एंड प्रिवेंशन के डायरेक्टर जैसन वांग ने डीडब्ल्यू को बताया कि चीन ज्यादा से ज्यादा लोगों के टीकाकरण के लिए "दंड और पुरस्कार” की रणनीति अपना रहा है. हालांकि उनका मानना है कि टीकाकरण में तेजी लाने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि टीके को लेकर लोगों की गलतफहमियों को दूर किया जाए. डीडब्ल्यू से बातचीत में वांग कहते हैं, "लोगों को वैक्सीन लेने के लिए प्रेरित करने का एक तरीका यह है कि उन्हें प्रोत्साहन दिया जाए और हर सरकार यह कर सकती है. यदि लोगों को कोई ऐसी चीज लेने के लिए दबाव डाला जाए जिसे वो अपने लिए नुकसानदेह समझ रहे हैं तो इससे लोगों का सरकार पर भरोसा कम हो जाएगा.”

दूसरी ओर, चीन ने पिछले कुछ महीनों में एक आक्रामक "वैक्सीन कूटनीति” कार्यक्रम की शुरूआत की है जिसके तहत दुनिया के कई देशों को वो लाखों टीकों का निर्यात कर रहा है. हालांकि चिली जैसे कई देश चीनी टीकों से देश की बड़ी जनसंख्या का टीकाकरण करने के बावजूद कोविड की एक नई लहर से जूझ रहे हैं.

चीन का टीकों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर

कुछ चीनी नागरिक सुरक्षा कारणों से वैक्सीन लेने से हिचक रहे हैं जबकि कई अन्य लोगों को कहना है कि चीन में बनी कोरोनावायरस वैक्सीन की अपेक्षाकृत कमजोर क्षमता कोई बड़ा मुद्दा नहीं है. कुछ लोग जो टीका लगवाने में दिलचस्पी ले रहे हैं, उसके पीछे मुख्य कारण ये लगता है कि देश के एक बड़े हिस्से में पिछले कुछ महीनों में एक भी पॉजिटिव केस नहीं मिला है. बीजिंग में ल्यू सरनेम वाली एक महिला ने डीडब्ल्यू को बताया, "मुझे लगता है कि चीन का ज्यादातर हिस्सा अब वायरस मुक्त हो चुका है. मैं बचाव के तरीकों को शुरू से ही अपना रही हूं इसलिए अब मैं संक्रमित होने से नहीं डर रही हूं. मेरे आस-पास तमाम लोगों ने स्वेच्छा से टीका लगवा लिया है और कुछ लोग इस डर से लगवा रहे हैं कि ऐसा न करने पर कहीं भविष्य में उन्हें अन्य देशों की यात्रा करने से रोक दिया जाए.”

चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिनहुआ के मुताबिक, देश में ज्यादातर वैक्सीन निर्माताओं ने उत्पादन क्षमता को बढ़ा दिया है और गाओ फू कहते हैं कि चीन का लक्ष्य है कि इस साल के अंत और अगले साल के मध्य तक देश की 70-80 फीसद जनसंख्या को टीका लग जाए. लेकिन जानकारों का कहना है कि इससे तब तक कोई मदद नहीं मिलेगी जब तक ज्यादातर देश भी अपनी अधिकांश आबादी का टीकाकरण नहीं कर लेते. वांग कहते हैं, "अन्यथा, जब सीमा खुल जाएगी और लोग एक-दूसरे देश में आवागमन करने लगेंगे, तो उन देशों के लोग फिर संक्रमित करना शुरू कर देंगे जहां पूरी तरह से टीकाकरण नहीं हुआ होगा.” (dw.com)

 


14-Apr-2021 6:43 PM 30

ओटावा, 14 अप्रैल | दुनियाभर में कोरोना की तेज रफ्तार जारी है। कनाडा में पिछले हफ्ते से, कोरोना के मामले लगभग 8100 आ रहे हैं, इसी के साथ रोजाना मामले में 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार कनाडा के मुख्य सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी थेरेसा टैम ने मंगलवार को बताया, "कोविड-19 महामारी कई कनाडाई लोगों के लिए तनाव और चिंता पैदा कर रहा है।"

टैम ने कहा, "पिछले सप्ताह से मरीजों की संख्या में वृद्धि जारी है। हर दिन अस्पतालों में कोविड-19 के करीब 3,000 से अधिक मरीजों का इलाज किया जा गया, जिसमें पिछले सप्ताह की तुलना में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।"

इसमें लगभग 970 लोगों को इंटेंसिव केयर यूनिट में इलाज किया गया था, जो कि एक सप्ताह पहले की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक था।

इनमें से लगभग 36,000 मामले नए वैरिएंट के हैं, जिसमें से बी.1.1.7 वैरिएंट का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा है।

इसमें बी.1.1.7 वैरिएंट के 34,404 मामले, पी.1 वैरिएंट के 1,222 मामले और बी.1.351 वैरिएंट के 365 मामले हैं।

सीटीवी के अनुसार कनाडा में मंगलवार शाम तक कुल 10,78,562 कोविड-19 मामले दर्ज हो चुके हैं, जिसमें 23,392 मौतें शामिल हैं।(आईएएनएस)


14-Apr-2021 2:37 PM 81

 

शादी-ब्याह दो दिलों का मेल है. जब दो एडल्ट आपस में जिंदगी बिताने को सहमत हो जाते हैं तब दोनों शादी के बंधन में बंध जाते हैं. भारत में तो शादी-ब्याह को त्योहार की तरह मनाया जाता है, जिसमें दो लोग ही नहीं, दो परिवार भी आपस में जुड़ जाते हैं. भारत में शादी से पहले घर परिवार की सारी पड़ताल की जाती है. हालांकि, विदेशों में सिर्फ लड़का-लड़की अपनी अंडरस्टैंडिंग देख कर शादी का फैसला करते हैं. लेकिन हाल ही में अमेरिका के न्यूयॉर्क कोर्ट में एक शख्स ने अपनी ही औलाद से शादी करने की परमिशन मांगी है. ये अपील वायरल हो रही है.

कोर्ट में दाखिल की अपील
अपील में शख्स ने लिखा है कि उसे उसकी औलाद से ही प्यार हो गया है. वो अपनी संतान को प्रपोज करना चाहता है लेकिन उसे डर है कि समाज उसका विरोध करेगा. साथ ही वो चाहता है कि उसे कोर्ट से उसे अपनी औलाद से शादी की परमिशन मिल जाए ताकि भविष्य में उसे किसी तरह की कोई समस्या ना हो.

पहचान नहीं की उजागर
कोर्ट में दाखिल की गई अपील में अपीलकर्ता ने अपनी और अपनी औलाद की पहचान छिपाई है. दोनों का जेंडर भी डिस्क्लोज नहीं किया गया है. ये याचिका मैनहैट्टन के फेडरल कोर्ट में दायर की गई है. दरअसल, इस देश में ऐसे रिश्तों को असंवैधानिक घोषित किया गया है. इन रिश्तों के खुलासे से समाज में काफी बदनामी होती है.
 
मिल सकती है 4 साल की सजा
कोर्ट में दाखिल की गई अपील में शख्स ने लिखा कि शादी दो लोगों के बीच का पर्सनल मामला है. ये लोगों की फीलिंग्स पर आधारित है. इसका फैसला दो लोगों को अपनी सहमति के आधार पर लेना चाहिए ना कि कोर्ट और कानून द्वारा बनाए गए नियम पर. बता दें कि न्यूयॉर्क कानून के मुताबिक़, अगर कोई अपने परिवार के सदस्य से शादी करे या उससे रिश्ता रखे तो इसमें चार साल तक की सजा हो सकती है. (news18.com)


14-Apr-2021 1:24 PM 17

डेनमार्क नहीं चाहता कि वहां भविष्य में नए शरणार्थी आएं. इसलिए अब सीरियाई शरणार्थियों से कहा जा रहा है कि वो सीरिया लौट जाएं क्योंकि सीरिया अब सुरक्षित है. स्थानीय समाज में घुल मिल रहे युवाओं को मुश्किल हो रही है.

   (dw.com)

अया अबो दाहेर ने डेनमार्क के शहर निबोर्ग के एक हाईस्कूल से हाल ही में स्कूली पढ़ाई पूरी की है और जून के अंत में अपने दोस्तों के साथ वो इस खुशी का उत्सव मनाने वाली थीं तभी उन्हें डेनमार्क के अधिकारियों की ओर से एक ऐसा ईमेल मिला जिसने उनकी खुशियों पर पानी फेर दिया. सीरियाई छात्रों और उनके मां-बाप को भेजे गए ईमेल में लिखा था कि उनके आवासीय परमिट का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा.

20 वर्षीया दाहेर कहती हैं, "मैं बहुत दुखी थी, मैंने खुद को इस कदर विदेशी समझा जैसे डेनमार्क की हर चीज मुझसे दूर कर दी गई है. मैं नीचे बैठ गई और जोर से चिल्लाने लगी. रात में, मुझे मेरी एक दोस्त ने मेरे घर छोड़ा क्योंकि मैं सो नहीं पा रही थी.” सीरिया के ज्यादातर शरणार्थियों को यही ईमेल मिला था जो कि दमिश्क के आस-पास के इलाकों के रहने वाले हैं.

‘युद्ध न तो खत्म हुआ है और न ही भुलाया गया है'
पिछली गर्मियों में, जब से डेनमार्क के अधिकारियों ने सीरिया की राजधानी दमिश्क को सुरक्षित घोषित किया है, तब से उस इलाके के हजारों सीरियाई शरणार्थियों के आवासीय परमिट रद्द कर दिए गए हैं या यूं कहें कि उनका नवीनीकरण नहीं किया गया है. डेनिश रिफ्यूजी काउंसिल की महासचिव चार्लोट स्लेंटे कहती हैं, "हालांकि युद्ध न तो खत्म हुआ है और न ही इसे भुलाया गया है लेकिन डेनमार्क के अधिकारी यही मान रहे हैं कि दमिश्क में स्थितियां इतनी अच्छी हो गई हैं कि सीरियाई शरणार्थियों को वहां भेजा जा सकता है.”

डेनमार्क एकमात्र यूरोपीय देश है जो सीरियाई शरणार्थियों के आवासीय परमिट निरस्त कर रहा है. स्लेंटे कहती हैं कि यह एक "गैरजिम्मेदार” फैसला है और वापस लौटने वालों पर हमले और उत्पीड़न का खतरा रहेगा. वो कहती हैं, "वहां लड़ाई नहीं हो रही है, इस आधार पर दमिश्क वापस लौटने वाले शरणार्थियों के लिए एक सुरक्षित शहर नहीं बन जाता.”

डेनमार्क और सीरिया सहयोग नहीं कर रहे हैं
डेनमार्क के इस रवैये के खिलाफ सिर्फ डीआरसी और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे मानवाधिकार संगठन ही नहीं हैं बल्कि वो वामपंथी पार्टियां भी इस कदम का विरोध कर रही हैं जो कि डेनमार्क की संसद में कभी-कभी प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के नेतृत्व वाली सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी की अल्पमत सरकार का सहयोग करती हैं. सोशल लिबरल पार्टी यानी रेडिकेल वेंस्टर के प्रवक्ता क्रिस्टियान हेगार्ड कहते हैं, "अया अबो दाहेर जैसे छात्रों को निष्कासित करने का फैसला निर्दयी और विवेकहीन है. डेनमार्क कैसे मान सकता है कि सीरिया एक सुरक्षित देश है?” अपने फेसबुक पेज पर हेगार्ड लिखते हैं, "डेनमार्क ने सीरिया में अपना दूतावास इसीलिए बंद कर रखा है क्योंकि वहां स्थितियां ठीक और सुरक्षित नहीं हैं.”

वामपंथी पार्टियों का तर्क है कि चूंकि डेनमार्क सीरियाई शासक बशर अल असद की सरकार के साथ सहयोग नहीं कर रहा है इसलिए इस वक्त शरणार्थियों को जबरन निष्कासित करना ठीक नहीं है. फिलहाल, जिन सीरियाई लोगों के आवासीय परमिट खत्म हो गए हैं और जिन्होंने स्वेच्छा से देश छोड़ने से इनकार कर दिया है उन्हें डेनिश डिपोर्टेशन शिविरों में रखा जाता है.

‘उन्हें योगदान करने दें, काम करने दें और शिक्षा  लेने दें'
हेगार्ड कहते हैं कि सीरियाई शरणार्थी अपने देश में परिस्थिति बदलने के लिए सालों यहां बैठकर इंतजार कर सकते हैं. हेगार्ड सुझाव देते हैं कि उन शरणार्थियों से काम लिया जा सकता है, उनके योगदान का लाभ लिया जा सकता है और उन्हें शिक्षा प्राप्त करने में मदद दी जानी जाहिए. इससे डेनमार्क को भी लंबे समय तक फायदा मिलेगा.

अया अबो दाहेर की एक सहपाठी ने डेनमार्क के समेकन मंत्री मतियास तेस्फाइ को एक खुला पत्र लिखा और मांग की कि एक ऐसी लड़की को निष्कासित न किया जाए जो धाराप्रवाह डेनिश भाषा बोल लेती है और यहां के समाज को कुछ देना चाहती है. लेकिन उसकी बात सुनी नहीं गई और तेस्फाइ ने डेनमार्क की मीडिया को बताया कि वो अपने उन अधिकारियों पर भरोसा करते हैं जिन्होंने स्थिति का आकलन किया है और वो सिर्फ इसलिए कोई संशोधन नहीं करेंगे कि कोई टेलीविजन पर आकर कुछ कह रहा है.

दाहेर के स्कूल के डायरेक्टर वेस्टरगार्ड स्टॉकहोम भी अपनी विद्यार्थी को लेकर काफी भावुक हैं. अया अबो दाहेर को वो एक "कर्मठ, ज्ञानपिपासु और स्पष्ट लक्ष्य” वाली लड़की बताते हैं. स्टॉकहोम कहते हैं कि सीरिया वापस लौटने पर उसकी सुरक्षा को खतरा है. वो कहते हैं कि इस लड़की के दो भाई एक साल पहले भागकर डेनमार्क आ गए थे क्योंकि वो असद की सेना में भर्ती होने ही वाले थे. उन्हें निष्कासन की धमकी नहीं दी जा रही है क्योंकि उन्हें विशेष संरक्षण मिला हुआ है.

अया अबो दाहेर कहती हैं, "निष्कासन हमें अपने परिवार से फिर दूर कर देगा जो कि बहुत मुश्किल से एक साथ मिल पाए थे. दमिश्क में वापस जाने पर हमारे पास कुछ भी नहीं रहेगा. अधिकारी मुझे उस जगह कैसे वापस भेज सकते हैं जिसे वो जानते हैं कि मेरे लिए खतरनाक है?”

डेनमार्क एक ‘दुखद उदाहरण' है
स्कूल के डायरेक्टर स्टॉकहोम कहते हैं, "भाइयों के भागने के बाद लोग अया से बार-बार पूछते थे कि वे कहां हैं. जब खाना बंटता था, अया और उसके मां-बाप से कहा जाता था कि उन्हें तब तक खाना नहीं मिलेगा जब तक कि उसके भाई लौटकर नहीं आ जाते.” यूरोप में डेनमार्क के अलावा किसी और देश ने सीरिया की इन परिस्थितियों में किसी शरणार्थी को वापस भेजने के बारे में फैसला नहीं किया है. स्टॉकहोम कहते हैं कि डेनमार्क वास्तव में एक ‘दुखद उदाहरण' पेश कर रहा है.

दरअसल, शरणार्थियों को जल्दी से जल्दी वापस भेजने का फैसला साल 2019 में आए उस अप्रवासन कानून के तहत हो रहा है जिसे पिछली कंजर्वेटिव सरकार लेकर आई थी और अब सोशल डेमोक्रैट्स और दक्षिणपंथी भी संसद में उसी का अनुकरण कर रहे हैं. कानून में साफ कहा गया है कि आवासीय परमिट सिर्फ एक सीमित अवधि के लिए ही जारी किए गए हैं. इस नीति के तहत, जैसे ही परिस्थितियां अनुकूल होने लगेंगी, आवासीय परमिट रद्द कर दिए जाएंगे और शरणार्थियों को उनके देश वापस भेज दिया जाएगा.

शरणार्थियों को हतोत्साहित करना
मेटे फ्रेडरिक्सन वामपंथी झुकाव वाली महिला होने के बावजूद अप्रवासन और शरणार्थी मामलों में दक्षिणपंथी रुझान दिखाने लगती हैं. उनके पास भविष्य में शरणार्थियों को डेनमार्क आने से रोकने की भी एक दीर्घकालीन योजना है. डेनमार्क की सरकार ऐसे शरणार्थियों को वित्तीय मदद भी दे रही है जो स्वेच्छा से अपने देश वापस जा रहे हैं. हालांकि सरकार लगातार शरणार्थियों को अपने देश से बाहर करने की भी कोशिशें कर रही है और जो लोग डेनमार्क में शरण लेने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें भी हतोत्साहित कर रही है.

अया अबो दाहेर निष्कासन से डरी हुई हैं लेकिन उन्हें उम्मीद है कि वो गर्मी में अपनी दोस्तों के साथ हाई स्कूल पूरा होने की खुशी मना सकेंगी. अया ने दंत चिकित्सक बनने का ख्वाब देख रखा है और अपने निष्कासन के नोटिस के खिलाफ एक याचिका भी डाल रखी है. उनके स्कूल के डायरेक्टर स्टॉकहोम कहते हैं कि इन सब में कुछ महीने लग जाएंगे और उम्मीद है कि जून महीने में अया अपनी ग्रेजुएशन की खुशी अपने दोस्तों के साथ मना सकेगी.
 


14-Apr-2021 10:29 AM 49

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि रविवार को हुए हमले में ईरान के सबसे अहम परमाणु केंद्र की हज़ारों मशीनें या तो ख़राब हो गई हैं या बर्बाद हो गई हैं.

ईरानी संसद के रिसर्च सेंटर के प्रमुख अलिरेज़ा ज़कानी ने कहा है कि इस घटना से ईरान की परमाणु सामग्री को परिशोधित करने की क्षमता समाप्त हो गई है.

एक अन्य अधिकारी ने बताया है कि नतांज परमाणु केंद्र के जिस हिस्से पर ये हमला हुआ है वो ज़मीन से पचास मीटर नीचे है. ईरान ने इस हमले को 'परमाणु आतंकवाद' बताते हुए इसराइल को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.

वहीं इसराइल ने अपनी भूमिका की ना ही पुष्टि की है और न ही इसका खंडन किया है. लेकिन इसराइल के सरकारी रेडियो पर ख़ुफ़िया सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ये इसराइल की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद का एक ऑपरेशन था. ईरान का कहना है कि वो प्रभावित सेंट्रीफ्यूज को बदल देगा.

सेंट्रीफ्यूज वो मशीन होती है जिसमें यूरोनियम का संवर्धन किया जाता है जिसे बाद में परमाणु ऊर्जा बनाने के काम में लाया जाता है. अधिक उन्नत सेंट्रीफ्यूज के ज़रिए परमाणु बम भी बनाए जा सकते हैं.

ईरान को कितना नुकसान हुआ है?
ईरान ने शुरूआत में कहा था कि सेंट्रीफ्यूज को नुकसान पहुंचा है लेकिन अतिरिक्त जानकारी नहीं दी थी.

अब सरकारी टीवी चैनल पर बोलते हुए ज़कानी ने बताया है कि परमाणु संयंत्र को भारी नुकसान पहुंचा हैं.

उन्होंने सवाल किया, 'क्या ये सामान्य बात है कि वो हमारे बिजली सिस्टम में घुस जाते हं और एक ही बार में कई हज़ार सेंट्रीफ्यूज को या तो बर्बाद कर देते हैं या नुकसान पहुंचाते है?'

'क्या हमें रविवार को हुई घटना पर संवेदनशील नहीं होना चाहिए जिसने हमारे संवर्धन की क्षमता को ही नष्ट कर दिया है?'

वहीं अमेरिकी ख़ुफ़िया अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया है कि नाभिकीय संयंत्र पर एक बड़ा धमाका हुआ. इससे भूमिगत संयंत्र के भीतर स्थापित सेंट्रीफ़्यूज़ों को बिजली पहुँचाने वाला पावर सिस्टम पूरी तरह बर्बाद हो गया.

उनका अनुमान है कि इस धमाके के बाद वहां फिर से यूरेनियम का संवर्द्धन शुरू होने में कम से कम नौ महीने लग जाएंगे.

इसराइली जहाज़ पर हमला
इसी बीच इसराइली और अरब मीडिया में आई रिपोर्टों में कहा गया है कि संयुक्त अरब अमीरात के पास हुए एक हमले में एक इसराइली पोत को नुकसान पहुंचा हैं. हालांकि इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं हैं.

एक अधिकारी ने इसराइले के चैनल 12 टीवी को बताया है कि इस हमले के पीछे ईरान है. यदि इसकी पुष्टि होती है तो ये दोनों देशों के जहाज़ों पर हुए हमलों और जवाबी हमलों की श्रंखला में एक और हमला होगा.

इसराइल ने दी थी धमकी

हाल ही में इसराइल ने ईरान को चेताया था कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा न शुरू करे. इसराइल बार-बार कहता रहा है कि वह ईरान को परमाणु शक्ति हासिल नहीं करने देगा.

ईरान ने रविवार को हुए हमले से एक दिन पहले ही नतांज परमाणु केंद्र पर उच्च गुणवत्ता के सेंट्रीफ्यूज़ शुरू किए थे. ये सेंट्रीफ्यूज़ साल 2015 के समझौते के तहत प्रतिबंधित थे.

ईरान और विश्व के छह शक्तशाली देशों के बीच साल 2015 में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौता हुआ था. अमेरिका राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अमेरिका को इस समझौते से अलग कर लिया था.

ईरान ने फिर से उच्च गुणवत्ता का यूरेनियम संवर्धन शुरू कर दिया था. ईरान का कहना है कि वह उच्च गुणवत्ता वाले यूरेनियम का संवर्द्धन तभी बंद करेगा जब उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध ख़त्म कर दिए जाएंगे.

पिछले साल इसी परमाणु केंद्र में लगी थी आग
पिछले साल जुलाई में ईरान के इसी भूमिगत परमाणु केंद्र में आग लग गई थी. ईरानी अधिकारियों ने इसे साइबर हमले का नतीजा बताया था.

ईरानी परमाणु केंद्र को ऐसे वक़्त में निशाना बनाया गया है जब अमेरिका के मौजूदा बाइडन प्रशासन की ओर से 2015 के परमाणु समझौते को बहाल करने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं. इसके लिए पिछले हफ़्ते वियना में बातचीत भी हुई.

ईरान के यूरेनियम संवर्धन से चिंतित हैं- अमेरिका
अमेरिका का कहना है कि वह ईरान के अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते का उल्लंघन करके यूरेनियम को परमाणु हथियार बनाने के स्तर तक संवर्धित करने को लेकर चिंतित है.

ईरान का कहना है कि वो यूरेनियम को 60 प्रतिशत तक संवर्धित करेगा. ये हथियार बनाने लायक यूरेनियम से 30 प्रतिशत नीचे होगा.

अमेरिका ने ईरान के इस क़दम को उकसाने वाला बताते हुए कहा है कि वो ईरान के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता जारी रखेगा. (bbc.com)


14-Apr-2021 10:19 AM 24

-शुमायला जाफ़री

पाकिस्तान में धार्मिक नेता साद हुसैन रिज़वी और उनके कई सहयोगियों की गिरफ़्तारी के बाद देश के कई हिस्सों में तनाव है. इसी बीच पुलिस ने साद रिज़वी समेत तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पार्टी (टीएलपी) के कई नेताओं के ख़िलाफ़ आतंकवाद रोधी क़ानून के तहत मुकद़मा दर्ज कर लिया है.

लाहौर पुलिस ने तहरीक ए लब्बैक पाकिस्तान के मुखिया साद हुसैन रिज़वी और दूसरे नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं पर पाकिस्तान दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं, आतंकवाद विरोधी क़ानून और लोक व्यवस्था अध्यादेश के तहत मामला दर्ज किया है.

ये मामला पुलिस की तरफ से दी गई शिकायत पर लाहौर के शाहदरा टाउन थाने में दर्ज हुआ है. साद रिज़वी के अलावा काज़ी महमूद रिज़वी, पीर सैयद ज़हीर अल हसन शाह, मेहर मुहम्मद क़ासिम, मोहम्मद एजाज़ रसूल, पीर सैयद इनायत अली शाह, मौलामा ग़ुलाम अब्बास फ़ैज़ी, मौलाना ग़ुलाम ग़ौस बग़ददादी का नाम भी रिपोर्ट में दर्ज है. इसके अलावा पाकिस्तान की इस धार्मिक पार्टी के अज्ञात कार्यकर्ताओं पर भी मुकदमा दर्ज किया गया है.

एफ़आईआर में कहा गया है कि इन लोगों ने पूरे पाकिस्तान में लोगों को हिंसा करने और जाम लगाने के लिए उकसाया. इसके लिए लाउडस्पीकर से ऐलान करने और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप भी लगाए गए हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अपने नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं ने जान लेने के इरादे से पत्थरबाज़ी की और पुलिसकर्मियों पर हमले किए. एफ़आईआर के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने कई पुलिसकर्मियों को पीटा और सिपाही मोहम्मद अफ़ज़ल की मौत हो गई.

सोमवार को पाकिस्तानी पुलिस ने साद रिज़वी को गिरफ़्तार कर लिया था. इसके बाद से ही देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं जिससे कई इलाक़ों में जनजीवन भी प्रभावित हुआ है.

साद रिज़वी की गिरफ़्तारी के बाद इस्लामाबाद और रावलपिंडी में प्रदर्शनस्थलों पर इंटरनेट भी बंद कर दिया गया था. वहीं गुजरांवाला में प्रदर्शनकारियों पर काबू करने के लिए पुलिस की कबड्डी टीम को भी बुलाया गया था.

साद रिज़वी की गिरफ़्तारी के बाद शुरू हुए प्रदर्शनों से सबसे ज़्यादा प्रभावित लाहौर ही रहा है. बीबीसी संवाददाता शहज़ाद मलिक के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री शेख राशिद अहमद के नेतृत्व में इस्लामाबाद में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रदर्शनों से प्रभावित राष्ट्रीय राजमार्गों को खोलने का फैसला लिया गया है.

इस बैठक में प्रदर्शनों के बाद पैदा हुए सुरक्षा हालातों पर भी चर्चा की गई है. इसमें पंजाब के पुलिस प्रमुख और मुख्य सचिव वीडियो लिंक के ज़रिए शामिल हुए थे. धार्मिक मामलों के मंत्री नूर उल हक़ क़ादरी भी इस बैठक में शामिल रहे.

इस बैठक के बाद गृहमंत्री ने कहा कि गिरफ़्तार किए गए लोगों को रिहा नहीं किया जाएगा. सोशल मीडिया पर घायल पुलिसकर्मियों के अपुष्ट वीडियो भी शेयर किए जा रहे हैं. वहीं प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में इंटरनेट भी बंद कर दिया है.

इस्लामाबाद और रावलपिंडी के कई इलाक़ों में प्रदर्शन की रिपोर्टें हैं. संवाददाता शहज़ाद मलिक के मुताबिक फ़ैज़ाबाद और भारा काहू इलाक़ों में प्रदर्शन हुए हैं. पुलिस ने आम लोगों से परिवर्तित रूटों पर सफर करने के लिए कहा है.

ट्रैफ़िक पुलिस के मुताबिक मरी रोड पर कई जगह प्रदर्शन हुआ है जिससे जाम की स्थिति हो गई. हालात काबू करने के लिए पुलिस के जवानों के अलावा रेंजर भी तैनात किए गए हैं.

इस्लामाबाद का अथल चौक भारा काहू इलाक़ा पूरी तरह बंद रहा. सौ से अधिक कार्यकर्ता सड़कों पर डटे रहे. उग्र प्रदर्शनकारी नारेबाज़ी कर रहे थे और मंच से उत्तेजक भाषण दे रहे थे. रिपोर्टों के मुताबिक कई जगह हाथों में लाठी लिए लोगों ने सड़कें जाम की हैं.

यहां रह-रहकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें होती रहीं. पुलिस ने लाठीचार्ज के बाद शहर के चंदा क़िला चौक को खाली कराया. इस्लामाबाद से लाहौर जाने वाले वाहन जीटी रोड पर इसी चौक से होकर गुज़रते हैं. गुजरांवाला पुलिस के मुताबिक पुलिस की कबड्डी टीम के ख़िलाड़ियों को भी भीड़ से निबटने के लिए बुलाया गया था.

प्रदर्शनकारियों ने कबड्डी खिलाड़ियों पर भी पत्थरबाज़ी की है. हालांकि पुलिस ने दावा किया है कि चंदा क़िला चौक को खाली करा लिया गया था.

लाहौर
यहां पुलिस ने फ्लैग मार्च निकाला है. इसमें लाहौर पुलिस की डॉलफ़िन फ़ोर्स और इलीट फ़ोर्स के जवानों ने भी हिस्सा लिया. टीएलपी कार्यकर्ताओं के प्रदर्शनों की वजह से शहर के कम से कम 17 इलाक़े बंद हैं.

यतीमख़ाना चौक से प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया. बीबीसी संवाददाता उमर दराज़ नांगियाना के मुताबिक यहां पुलिस ने कई मदरसों और टीएलपी नेताओं के घरों पर छापेमारी की है. गिरफ्तारी से बचने के लिए कई कार्यकर्ता घरों से भाग गए हैं.

संवाददाता रियाज़ सोहैल के मुताबिक शहर के कई इलाक़ों में टीएलपी कार्यकर्ता धरनों पर बैठे हैं. हालांकि पुलिस की तरफ से लाठीचार्ज और आंसूगैस के गोले छोड़े जाने के बाद कई जगह प्रदर्शन ख़त्म हो गए हैं.

संवाददाता मोहम्मद काज़िम के मुताबिक सोमवार से शुरू हुए प्रदर्शन चल रहे हैं. क्वेटा-कराची हाइवें को खुज़दार शहर में बंद कर दिया गया है जिसकी वजह से लोगों को परेशानी हो रही है.

कराची के पास हब इलाके में भी कार्यकर्ताओं ने क्वेटा-कराची हाईवे को जाम कर दिया है. डेरा जमाल मुराद इलाक़े में भी क्वेटा-जैकबाबाद रोड को जाम कर दिया गया था जिसे पुलिस ने बाद में खाली करा लिया.

पुलिस ने रिज़वी को हिरासत में लेने के बाद कोई कारण नहीं बताया था. साद रिज़वी ईशनिंदा विरोधी फ़ायरब्रांड धर्मगुरू ख़ादिम हुसैन रिज़वी के बेटे हैं.

हालांकी तहरीक-ए-लब्बैक पार्टी के नेता पुलिस के इस क़दम को 20 अप्रैल को प्रस्तावित इस्लामाबाद मार्च को रोकने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं.

साद रिज़वी जब एक दफ़न में शामिल होने जा रहे थे तब उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया. जैसे ही उनकी गिरफ़्तारी की ख़बर फैली तहरीक-ए-लब्बैक पार्टी के कार्यकर्ताओं ने देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन शुरू कर दिए.

पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार ने तहरीक-ए-लब्बैक के पूर्व प्रमुख ख़ादिम हुसैन रिज़वी के साथ 16 नवंबर 2020 को चार सूत्रीय समझौता किया था. ख़ादिम फ्रांस के राजदूत को देश से निकालने की मांग कर रहे थे. सरकार ने वादा किया था कि वो इस मुद्दे को संसद के सामने ले जाएगी और जैसा संसद में तय होगा वैसा किया जाएगा. ये समझौता ख़ादिम हुसैन रिज़वी को इस्लामाबाद की तरफ मार्च करने से रोकने के लिए किया गया था.

जब इस समझौते का पालन नहीं हुआ तो पार्टी ने सरकार के साथ फ़रवरी 2021 में एक और समझौता किया. इसके तहत टीएलपी ने पाकिस्तान सरकार को फ्रांसीसी राजदूत को वापस भेजने के लिए 20 अप्रैल तक का समय दिया है.

ख़ादिम रिज़वी का पिछले साल निधन हो गया था. उनकी पार्टी की 18 सदस्यीय समिति ने उनके बेटे साद हुसैन रिज़वी को नया प्रमुख चुन लिया है.

ख़ादिम रिज़वी के बेटे साद रिज़वी ने अपने पिता के मिशन को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है. वो इस समय अपने पिता के बनाए मदरसे में दर्स निज़ामी के अंतिम वर्ष के छात्र हैं. इस्लामी शिक्षा में ये डिग्री स्नातकोत्तर के बराबर होती है. (bbc.com)


14-Apr-2021 10:17 AM 18

 

वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की एक मई की समयसीमा को बढ़ाने का फैसला किया है जो डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने तालिबान के साथ बातचीत करके तय की थी. अमेरिका के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी कि बाइडन प्रशासन ने अब सैनिकों को अफगानिस्तान में रहने देने के लिए नयी समयसीमा के रूप में 11 सितंबर के हमलों की 20वीं बरसी को तय किया है.

अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं होने की शर्त पर बाइडन के इस फैसले की जानकारी दी. हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में सैनिकों की वापसी की समयसीमा मई में तय की गई थी. लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की अंतिम तारीख एक मई का पालन नहीं कर पाएंगे, वापसी के लिए 9/11 के तौर पर नया लक्ष्य रखा है.

बाइडन ने व्हाइट हाउस के ‘ईस्ट रूम’ में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि एक मई की समय सीमा में काम समाप्त करना मुश्किल होगा, उन सैनिकों को वहां से बाहर निकालना मुश्किल होगा. इसलिए जो हम कर रहे हैं, जो मैं कर रहा हूं और जो विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन कर रहे हैं. वह यह है कि हम अपने सहयोगियों से मिल रहे हैं, उन अन्य देशों से जो नोटो सहयोगी हैं, जिनके सैनिक भी अफगानिस्तान में है. अगर हम वहां से अपने सैनिकों को वापस लाएंगे तो, इसे सुरक्षित तथा व्यवस्थित तरीके से करेंगे.’ (news18.com)


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