राजनीति

28-Oct-2020 4:34 PM 12

लखनऊ, 28 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर घमासान जारी है। नामांकन के आखिरी दिन समाजवादी पार्टी समर्थित प्रकाश बजाज ने नामांकन कर बसपा प्रत्याशी रामजी गौतम की मुश्किल बढ़ा दी। बुधवार को बसपा में ही राज्यसभा प्रत्याशी रामजी गौतम के नामांकन को लेकर बगावत हो गई। बसपा के 5 विधायक (जो रामजी गौतम के नामांकन पत्र में प्रस्तावक बने थे) अपना नाम वापस लेने के लिए विधानसभा पहुंच गए. ऐसे में अब बसपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है।

दरअसल, राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी के प्रस्तावक के रूप में 10 विधायकों का होना जरूरी होता है। लेकिन, अब पार्टी के ही पांच विधायक असलम चौधरी, असलम राईनी, मुत्जबा सिद्दीकी, हाकम लाल बिंद और गोविंद जाटव ने अपना प्रस्ताव वापस ले लिया है. ऐसे में अब स्क्रूटनी के दौरान बसपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द होना तय माना जा रहा है, क्योंकि अब नए प्रस्तावक बनाने का समय भी नहीं रहा। अगर बसपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द होता है सपा समर्थित प्रकाश बजाज का राज्यसभा पहुंचना तय है। बीजेपी के 8 प्रत्याशियों की जीत पहले ही तय है। जबकि सपा के एक प्रत्याशी  प्रो रामगोपाल भी उच्च सदन के लिए चुन लिए जाएंगे।

पांच बागी विधायकों ने की थी अखिलेश से मुलाकात

बताया जा रहा है कि बसपा के सभी पांच बागी विधायकों ने मंगलवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। इसके बाद ही सपा ने निर्दलीय के तौर पर आखिरी वक्त में प्रकाश बजाज का नामांकन करवा दिया। इसके बाद एक सीट के लिए मतदान तय माना जा रहा था। लेकिन, बुधवार को जैसे ही बसपा के पांच विधायकों ने प्रस्तावक के तौर पर अपना नाम वापस लिया तो सारा खेल ही बिगड़ गया। (hindi.news18.com)


28-Oct-2020 3:48 PM 29

लखनऊ, 28 अक्टूबर| उत्तर प्रदेश में दस सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होने हैं। लेकिन उससे पहले बहुजन समाज पार्टी में बगावत हो गयी है। बसपा के प्रत्यशी रामजी गौतम के 10 प्रस्तावकों में से 5 प्रस्तावकों ने अपना प्रस्ताव वापस ले लिया है। इसके बाद 5 विधायकों ने सपा मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात की। बगावत करने वालों में बसपा विधायक असलम चौधरी, असलम राईनी, मुज्तबा सिद्दीकी, हाकम लाल बिंद, गोविंद जाटव शामिल हैं। मंगलवार को ही असलम चौधरी की पत्नी ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली थी। यूपी में दस राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है, जिसके लिए कुल 11 प्रत्याशी मैदान में हैं। भाजपा की ओर से आठ, समाजवादी पार्टी के एक, बहुजन समाज पार्टी के एक और एक निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।

बसपा के राज्य सभा प्रत्याशी रामजी गौतम के प्रस्तावक के तौर पर अपना नाम वापस लेने वाले पांच बागी विधायक अखिलेश यादव से मिलने समाजवादी पार्टी कार्यालय पहुंचे। सभी की बंद कमरे में मुलाकात हुई है। कहा जा रहा है कि बसपा के पांचों विधायक समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। फिलहाल टूट के कगार पर पहुंची बसपा की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

बता दें कि रामजी गौतम ने राज्यसभा के उम्मीदवार के रूप में 26 अक्तूबर को नामांकन किया था, तब उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा व कई अन्य नेता मौजूद थे।

बुधवार को जब प्रस्तावक अपना नाम वापस लेने के लिए विधानसभा आए तो हलचल मच गई।

भिनगा के बसपा विधायक मो. असलम राईन ने कहा कि रामजी गौतम के प्रस्तावक के रूप में उन लोगों ने दस्तखत नहीं किया। उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाए गए हैं। राइनी ने कहा कि कूटरचित हस्ताक्षर के लिए वह विधिक कार्रवाई करेंगे। फर्जी हस्ताक्षर की शिकायत करने वाले विधायकों में मुज्तबा सिद्दीकी, हाकिम लाल बिंद व असलम चौधरी हैं।

ज्ञात हो कि सपा से रामगोपाल यादव और बसपा से रामजी गौतम के अलावा भाजपा के आठ उम्मीदवार मैदान में हैं। सूत्रों की मानें तो इन विधायकों ने दो दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। (आईएएनएस)


28-Oct-2020 1:12 PM 11

भोपाल, 28 अक्टूबर| मध्य प्रदेश के विधानसभा के उप-चुनाव में बयानों के बाण लगातार तल्ख हेाते जा रहे हैं। कांग्रेस के उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करने आए आचार्य प्रमोद कृष्णन ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को धार्मिक ग्रंथ के तीन मामा शकुनी, कंस और मरीच का मिश्रण बताए जाने पर सियासी माहौल गर्मा दिया है। कांग्रेस उम्मीदवारों के समर्थन में प्रमोद कृष्णन ने मंगलवार केा शिवपुरी जिले और मुरैना के विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित किया था। इन सभाओं में कृष्णन के निशाने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रहे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि पहला मामा मरीच जिसने रूप बदलकर सीता माता का हरण कराया था, दूसरा मामा कंस, जिसने अपनी सत्ता को बचाने के लिए बहन के बच्चों को मार दिया था और तीसरा मामा शकुनि जो छल फरेब करके पांडवों का सर्वनाश करना चाहता था। इन तीनों मामाओं को मिला दें तो मामा शिवराज बनता है।

कृष्णन के इस बयान के बाद से राज्य मंे सियासी बवाल मचा हुआ है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल का कहना है कि, कांग्रेस के अधिकृत स्टार प्रचारक प्रमोद कृष्णन द्वारा जिस प्रकार की अभद्र आपत्तिजनक और शर्मनाक भाषण मुरैना जिले में कांग्रेस के मंच से दिया गया, इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ जिम्मेदार हैं। कमल नाथ प्रदेश के लाखों भांजे-भांजियों से क्षमा याचना करें और प्रमोद कृष्णन को प्रचार करने पर प्रतिबंध लगाएं।

रजनीश अग्रवाल ने कांग्रेस और कमल नाथ से सवाल किया है कि क्या स्वयं कांग्रेस ऐसी भाषा का विरोध कर निर्वाचन आयोग में शिकायत करेगी?

वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने प्रमोद कृष्णन का बचाव करते हुए कहा कि, आचार्य प्रमोद कृष्णन धार्मिक व्यक्ति है, अब वह जो भी बात करेंगे धर्म आधारित उदाहरणों पर ही करेंगे। मप्र में भाजपा ने अधर्म, अनीति के रास्ते पर चलकर सरकार बनाई है अब ऐसे में इसी तरह के उदाहरण दिए जा सकते हैं। भाजपा के नेताओं को इस प्रकार से बौखलाना नहीं चाहिए। प्रदेश की जनता भी जानती है किस तरह से लोकतंत्र की हत्या करके महापाप कर भाजपा ने सरकार बनाई है। (आईएएनएस)


28-Oct-2020 12:56 PM 26

गया, 28 अक्टूबर| भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार वोट डालने के दौरान कमल के फूल की प्रिंट वाला मास्क पहने एक मतदान केंद्र पहुंचने पर विवादों में आने के बाद अब सफाई दी है। इधर, निर्वाचन आयोग ने भी कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं। कुमार गया शहर से भाजपा के उम्मीदवार हैं और वे इस सीट से छह बार चुने गए हैं। 

कृषि मंत्री प्रेम कुमार बुधवार को गया के स्वराजपुरी के रोड नंबर 120 स्थित मतदान केंद्र अपना वोट डालने साइकिल से पहुंचे थे। प्रेम कुमार ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, लेकिन इस दौरान उन्होंने कमल छाप वाला मास्क पहना रखा था। उन्होंने मतदान के दौरान भी इसे नहीं निकाला और कमल छाप का निशान का मास्क लगाकर ही वोट दिया। इसके बाद यह मामला विवादों में आ गया। 

इधर, बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एच आर श्रीनिवास ने कहा कि अगर कोई भी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करता है, तो कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि गया के अधिकारी इस मामले को देख रहे हैं। 

इधर, मंत्री प्रेम कुमार ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि गलती से ऐसा हो गया। उन्होंने कहा कि ऐसी उनकी कोई मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा, ''मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं थी और मुझे किसी ने इस तरफ ध्यान भी नहीं दिलाया। अधिक व्यस्तता के कारण भाजपा का मास्क पहन के मैं वोट देने चला गया था।''

बिहार में 16 जिलों की 71 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं जबकि दो और चरण की वोटिंग 3 और 7 नवंबर को होनी है। बिहार चुनाव के बाद मतों की गिनती 10 नवंबर को होगी। (आईएएनएस)


27-Oct-2020 3:04 PM 32

पटना, 27 अक्टूबर| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर बिहार चुनाव के दौरान तीन चुनावी सभाओं को संबोधित करने के लिए बिहार पहुंच रहे हैं। इससे पहले राजद के नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने मंगलवार को उनसे 11 सवाल पूछे हैं। तेजस्वी ने कहा कि दरभंगा एम्स की घोषणा 2015 में हुई लेकिन ऐन चुनाव के पहले ही उसका काम शुरू करने की घोषणा क्यों की गई?

तेजस्वी इस चुनाव में किसी भी मुद्दे को हाथ से नहीं छोड़ना चाहते हैं। यही कारण है कि चुनाव के दौरान उन्होंने मृजफरपुर बालिका गृह में लड़कियों से कथित दुष्कर्म का मामला उठाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा है, ''प्रधानमंत्री जी, मुजफ्फरपुर भी आ रहे हैं। सत्ता संरक्षण में मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में 34 अनाथ बच्चियों के साथ हुए दुष्कर्म के मुख्य आरोपी को मुख्यमंत्री ने बचाया ही नहीं बल्कि उसके घर जन्मदिन की पार्टी में भी गए, उसे निरंतर वित्तीय मदद की और चुनाव भी लड़वाया? क्या प्रधानमंत्री जी डबल इंजन सरकार के इस घृणित कार्य पर बोलेंगे?''

तेजस्वी ने दरभंगा और मुजफ्फरपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल नहीं बनाने तथा स्किल विश्वविद्यालय नहीं खोलने को लेकर भी प्रधानमंत्री से सवाल पूछे हैं।

उन्होंने बिहार के गंदे शहरों को लेकर भी प्रधानमंत्री से सवाल करते हुए कहा, ''प्रधानमंत्री को बिहारवासियों को बताना चाहिए कि देश के टॉप 10 सबसे गंदे शहरों में बिहार के 6 शहर क्यों हैं? पटना और बिहार की इस बदहाली का जिम्मेवार कौन है?''

उल्लेखनीय है कि बुधवार को नरेंद्र मोदी बिहार में तीन चुनावी सभाओं को संबोधित करने आ रहे हैं। प्रधानमंत्री बुधवार को दरभंगा, मुजफरपुर और पटना में रैली को संबोधित करेंगें।

बता दें कि बुधवार को ही बिहार में पहले चरण में 71 सीटों पर मतदान होना है। (आईएएनएस)


27-Oct-2020 2:36 PM 30

ग्वालियर, 27 अक्टूबर| पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस पार्टी के स्टार प्रचारक सचिन पायलट मध्य प्रदेश में होने जा रहे 28 विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के लिए आ रहे हैं। पायलट अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान शिवपुरी, मुरैना, भिण्ड और ग्वालियर जिले की विभिन्न विधानसभाओं में कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में जनसभाएं करेंगे। कांग्रेस के ग्वालियर-चंबल इलाके के मीडिया प्रभारी के.के. मिश्रा ने बताया कि पायलट मंगलवार को शिवपुरी जिले की करैरा विधानसभा के नरवर, पोहरी विधानसभा के सतनबाड़ा, मुरैना जिले की जौरा विधानसभा के कैलारस, ग्वालियर एवं ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा लेंगे। उनका रात्रि विश्राम ग्वालियर में रहेगा।

पायलट 28 अक्टूबर को मुरैना के रनचोली, भिण्ड जिले की मेहगांव विधानसभा, गोहद विधानसभा, ग्वालियर जिले की डबरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। (आईएएनएस)
 


26-Oct-2020 5:10 PM 19

औरंगाबाद (बिहार), 26 अक्टूबर| भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने सोमवार को यहां राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के 10 लाख लोगों को रोजगार देने के वादे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सत्ता में रहने पर नौकरी छीनने वाले आज रोजगार देने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उस दौर में नौकरी करने वाले नौकरी छोड़कर भाग गए थे।

औरंगाबाद में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने महागठबंधन में राजद के वामपंथी दलों के साथ गठबंधन को विध्वंसक बताते हुए कहा कि इन दोनों बिहार में अराजकता ही फैलाई है।

उन्होंने कहा कि उजाले के महत्व का पता तब ही चलता है, जब अंधेरे का पता हो। मैं कहना चाहता हूं कि विकास का पता तब ही चलता है जब वह दिन याद हो।

भाजपा अध्यक्ष ने खुद को बिहार में रहने की बात कहते हुए कहा कि पहले क्या स्थिति थी बिजली की। बिजली आती नहीं थी कि चली जाती थी। मुश्किल से 24 घंटे में दो घंटे रहती थी। किसानों को डीजल पंप से सिंचाई करना पड़ता था। आज किसानों के लिए अलग फीडर लग रहा है।

नड्डा ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा, पहले जब बिहार में कोई चुनावी सभा करता था तो जाति, धर्म की बात होती थी, समाज को बांटने की बात होती थी, लेकिन चुनाव में आज हमारे उम्मीदवार विकास की बात करते हैं, सरकार की उपलब्धियां बताते हैं, ये बदलाव आया है। जब नरेंद्र मोदी आए हैं उन्होंने राजनीति का चाल, चरित्र बदल दिया है। इसे हमें याद रखना होगा।

नड्डा ने कोरोना काल की चर्चा करते हुए कहा कि पहले देश में एक भी पीपीई किट नहीं बनता था लेकिन आज देश पीपीई किट दूसरे देशों को दे रहा है। आज देश में तीन लाख से ज्यादा वेंटिलेटर है।

उन्होंने राजग के प्रत्याशी को वोट देने की अपील करते हुए कहा, राजद का चरित्र अभी तक नहीं बदला है। मैं व्यक्तिगत रूप से बिहार की मिट्टी को पहचानता हूं और इसीलिए कह सकता हूं कि डबल इंजन की सरकार बिहार के लिए जरूरी है। (आईएएनएस)


26-Oct-2020 5:09 PM 25

मनोज पाठक
पटना, 26 अक्टूबर|
केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कंधे से कंधा मिलकार चल रही लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने बिहार चुनाव में अकेले चुनाव मैदान में उतरकर ऐसा सियासी दांव चला है, जिसमें भाजपा के सहयोगी जनता दल (युनाइटेड) का खेल बिगाड़ कर रख दिया है। कल तक बिहार में ''बडे भाई'' की भूमिका में दंभ भरने वाले जदयू की हालत ऐसी हो गई है कि भाजपा ने भी समाचार पत्रों में दिए गए विज्ञापनों में नीतीश कुमार की तस्वीर नहीं लगाई है, जिससे कई तरह की संभावनाओं को बल मिल रहा है।

दीगर बात है कि राजग नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर चुनावी मैदान में है।

लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने पार्टी की कमान संभालते ही अलग स्टैंड लिया, जिससे पार्टी को मजबूती से स्थापित किया जा सके। अब वे खुद को स्थापित करने की जद्दोजहद में हैं। यही वजह है कि कई मौकों पर उन्होंने अपना स्टैंड जदयू से अलग दिखाया।

चुनाव के पहले से ही चिराग पासवान सरकार की कई योजनाओं के क्रियान्वयन व अफसरशाही पर सवाल उठाने से पीछे नहीं रहे। जब जदयू ने समय पर चुनाव कराने की बात की तो चिराग ने चुनाव आयोग को पत्र के जरिये कोरोना संक्रमण के चलते अभी चुनाव नहीं कराने की मांग कर दी। उस समय ही यह आशंका को बल मिल गया कि चिराग कोई बड़ा निर्णय लेंगे।

चिराग ने इस चुनाव में कुल 136 प्रत्याशी मैदान में उतार दिए, जिनमें दो का मखदुमपुर और फुलवारी में नामांकन रद हो गया। इस तरह अब 134 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें से अधिकांश प्रत्याशी जदयू के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे हैं। लोजपा का हालांकि गोविदंगज, लालगंज, भागलपुर, राघोपुर, रोसड़ा और नरकटियागंज में भी प्रत्याशी है जहां से भाजपा चुनावी मैदान में है।

लोजपा के प्रवक्ता और अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रमुख अशरफ असांारी कहते हैं कि गोविंदगंज और लालगंज उनकी सीटिंग सीट थी, शेष चार पर भाजपा के साथ उनका दोस्ताना संघर्ष है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि इस चुनाव के बाद लोजपा भाजपा के साथ बिहार में सरकार बनाने वाली है।

इधर, चिराग ने भी उन सभी सीटों पर भाजपा प्रत्याशी को जीताने की अपील की है, जहां से लोजपा के प्रत्याशी नहीं हैं। हालांकि भाजपा और जदयू लगातार लोजपा को अलग होने की बात करते हुए बयान दे रही है।

कहा जा रहा है कि लोजपा इस चुनाव में नरेंद्र मोदी की छवि का प्रचार करके कम से कम 10-15 सीटें जीतना चाहती है, ऐसे में अगर भाजपा और जदयू मिलकर 122 के सरल बहुमत आंकड़े को हासिल करने में पीछे रह जाते हैं तो लोजपा की भाजपा के सहयोगी के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

राजग की ओर से जदयू जहां 115 सीटों पर चुनाव लड़ रही है वहीं भाजपा 110 सीटों पर चुनाव मैदान में है। भाजपा ने अपने हिस्से की 11 सीटें राजग में शामिल विकासशील इंसान पार्टी को दी है जबकि जदयू अपने हिस्से की सात सीटें हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) को दी है।

इधर, भाजपा द्वारा समाचार पत्रों में दिए गए विज्ञापनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर तो है, लेकिन नीतीश कुमार की तस्वीर को स्थान नहीं दिया गया है। हाल ही में विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी किए गए सर्वे में नीतीश की लोकप्रियता में कमी को दशार्या गया है।

हालांकि भाजपा के अध्यक्ष संजय जायसवाल कहते हैं कि भाजपा चुनावी मैदान में मुख्यमंत्री नीतीश के नेतृत्व में उतरी है, इसमें किसी को असमंजस में नहीं रहना चाहिए।

इधर, जदयू के अजय आलोक कहते हैं कि कई 'युवराज' चुनावी मैदान में अपने अस्तित्व को बचाने के लिए हैं, 10 नवंबर को सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा। (आईएएनएस)


26-Oct-2020 3:29 PM 44

संदीप पौराणिक
भोपाल, 26 अक्टूबर|
मध्यप्रदेश में विधानसभा के उपचुनाव कांग्रेस में हुई बगावत के कारण हो रहे हैं, मगर उसके बाद भी कांग्रेस में बगावत का दौर थमने का नाम नहीं ले रही है। आगामी लगभग एक हफ्ते में उप-चुनाव के लिए मतदान होने वाला है और इस बीच कांग्रेस को कई और झटके लगने के आसार बने हुए हैं।

राज्य में लगभग सात माह पूर्व कांग्रेस के तत्कालीन 22 विधायकों के विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने और भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस की कमल नाथ के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी। उसके बाद से कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने वालों का सिलसिला थमा नहीं है। पहले एक-एक कर तीन विधायकों ने सदस्यता छोड़ी और भाजपा का दामन थामा तो चुनाव से ठीक पहले दमोह से कांग्रेस विधायक राहुल लोधी ने रविवार को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया।

पार्टी सूत्रों की माने तो कांग्रेस के कई और विधायक भाजपा के संपर्क में है और संभावना इस बात की है कि मतदान के कुछ दिन पहले भी कुछ विधायक कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। भाजपा ऐसा करके कांग्रेस के मनोबल को गिराने के साथ जनता के बीच यह संदेश देना चाह रही है कि कांग्रेस की किसी भी सूरत में सत्ता में वापसी संभव नहीं है। ऐसा जनमानस के बीच संदेश जाने पर भाजपा को बड़ी जीत हासिल हो सकती है और उसी के अनुसार भाजपा आगे बढ़ रही है।

राज्य की विधानसभा की स्थिति पर गौर करें तो पता चलता है कि वर्तमान में कुल 29 स्थान रिक्त है, उनमें से 28 स्थानों पर उप-चुनाव हो रहे हैं। इस तरह राज्य में जिस भी दल के पास 115 विधायक होंगे, वही सरकार बना लेगा। भाजपा के पास 107 विधायक पहले से ही हैं, उसे पूर्ण बहुमत के लिए आठ विधायकों की जरुरत है। उसे चार निर्दलीय विधायकों ने अपना समर्थन पहले ही दे दिया है। वहीं सपा-बसपा के भी विधायक सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। इस तरह भाजपा को एक विधायक की जरुरत है। बाहर से समर्थन देने वालों को अलग कर दिया जाए तो भाजपा को ज्यादा से ज्यादा आठ सीटों पर जीत जरूरी है। कांग्रेस के पास 87 विधायक हैं और उसे पूर्ण बहुमत के लिए 28 विधायकों की जरुरत है। इस तरह उसे उप-चुनाव में सभी स्थानों पर जीत जरुरी है। वहीं निर्दलीय और सपा-बसपा के विधायकों का समर्थन हासिल करने पर कांग्रेस को कम से कम 21 सीटें जीतना जरुरी है।

राजनीतिक विश्लेशक शिव अनुराग पटेरिया का कहना है कि राज्य के विधानसभा के उप-चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में न तो माहौल है और न ही अंक गणित। भाजपा इस बात को मतदाता ही नहीं अपने दल के नेताओं के बीच भी स्थापित करना चाहती है। साथ ही दल बदल करने की सोच रहे नेताओं को भी साफ संदेश दिया जा रहा है। इसी रणनीति पर भाजपा काम कर रही है। यही कारण है कि कांग्रेस के नेता को जोड़ने में परहेज नहीं किया जा रहा है। आने वाले दिनों में कुछ और विधायक भाजपा में आ जाएं तो किसी को अचरज नहीं हेाना चाहिए। (आईएएनएस)


25-Oct-2020 2:25 PM 31

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के प्रचार में स्थानीय समस्याओं से पटे मुद्दों के बीच माता सीता (Goddess Seeta) की एंट्री भी राजनीतिक दलों ने करा दी है. लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janshakti Party) के प्रमुख चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने चुनाव प्रचार के बीच सीता मंदिर (Sita Temple) बनाने को लेकर बड़ा बयान दिया है. चिराग पासवान ने कहा कि मैं चाहता हूं कि सीतामढ़ी में देवी सीता के लिए अयोध्या के राम मंदिर से बड़ा मंदिर बनाया जाए. क्योंकि देवी सीता के बिना भगवान राम अधूरे हैं. ऐसे में सीता मंदिर का निर्माण जरूरी है. इससे बिहार के विकास में भी सहयोग मिलेगा.

चिराग पासवान ने कहा कि माता सीता नारी शक्ति का प्रतीक हैं. ऐसे में अयोध्या के राम मंदिर से बड़ा सीता मंदिर यहां सीतामढ़ी में बनना चाहिए. इसके साथ ही अयोध्या को सीतामढ़ी को जोड़ने वाले एक कॉरिडोर का निर्माण भी किया जाना चाहिए. चिराग ने कहा कि इसमें मेरी आस्था तो है ही. इसके साथ ही बिहार इतना भव्य मंदिर बनने से राजस्व बढ़ेगा और बिहार का विकास भी होगा.

सियाराम कॉरिडोर बनाने का वादा
बिहार में चुनाव प्रचार कर रहे चिराग पासवान ने कहा कि भगवान राम माता सीता के बगैर अधूरे हैं और माता सीता भगवान राम के बिना अधूरी हैं. ऐसे में न सिर्फ मंदिर का निर्माण हो, ​बल्कि अयोध्या से सीतामढ़ी तक एक सियाराम कॉरिडोर का निर्माण भी कराया जाए. चिराग ने कहा कि इस मांग को पूरा करने का वादा उन्होंने अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी किया है. ऐसे में इस वादे को पूरा करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है. (hindi.news18.com)


25-Oct-2020 1:56 PM 29

लोजपा प्रमुख चिराग पासवान (Chirag Paswan) रविवार को बिहार के अलग-अलग इलाकों के चुनावी दौरे पर हैं. चिराग ने सीतामढ़ी में माता सीता के जन्मस्थली पुनौरा धाम में सुबह पूजा की और आशीर्वाद लिया.

पटना. बिहार चुनाव (Bihar Assembly Election) को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janshakti Party) के नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने अपना चुनावी दौरा शुरू कर दिया है. पिछले चार दिनों से चिराग पासवान लगातार बिहार के अलग-अलग हिस्सों में लोगों से मिलकर जनसभा कर रहे हैं और वोट की अपील कर रहे हैं. इस बीच एक बार फिर से चिराग पासवान का बीजेपी (BJP) के प्रति प्रेम उमड़ा है. चिराग ने अपने समर्थकों से साफ-साफ कहा है कि जिस विधानसभा सीट पर लोजपा के प्रत्याशी हों, वहां उन्हें वोट दें और जहां नहीं तो बीजेपी के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करें.

दरअसल, विजयदशमी के दिन चिराग पासवान ने अपने टि्वटर हैंडल से एक ट्वीट किया है जिसमें बिहार के लोगों से एक अनुरोध किया गया है. चिराग पासवान ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि जहां भी लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं उन सभी स्थानों पर बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट को लागू करने के लिए लोजपा के प्रत्याशियों को वोट दें, जबकि अन्य स्थानों पर भारतीय जनता पार्टी के साथियों को अपना वोट दें. चिराग ने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए लिखा है कि आने वाली सरकार नीतीश मुक्त सरकार बनेगी इसके साथ ही चिराग ने कुछ दिन पहले शुरू किया हुआ टि्वटर #असंभव नीतीश भी लिखा है.

दरअसल बिहार में चिराग पासवान इस बार एनडीए का हिस्सा नहीं है, लेकिन वह लगातार बीजेपी के साथ होने की बात कह रहे हैं. लोजपा प्रमुख खुले मन से लोगों से कह भी रहे हैं कि इस बार की सरकार नीतीश कुमार के बगैर बनेगी. यही कारण है कि उन्होंने #असंभव नीतीश की मुहिम भी चलाई है. (hindi.news18.com)


25-Oct-2020 1:19 PM 16

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर| बिहार चुनाव को लेकर एक अहम बात सामने आई है। यहां के 61 प्रतिशत मतदाताओं को लगता है कि चिराग पासवान की लोजपा और भाजपा एक-दूसरे के साथ काम कर रही हैं। बिहार के विधानसभा चुनावों को लेकर शनिवार को जारी हुए एबीपी-सीवोटर के जनमत सर्वे के अनुसार, 61 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि वास्तव में लोजपा और भाजपा अंदरुनी तौर पर एक-दूसरे के साथ काम कर रहे हैं।

इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि चिराग पासवान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला कर रहे हैं और राज्य के चुनावों में भाजपा का समर्थन कर रहे हैं। इस सवाल पर कि चुनाव के बाद चिराग पासवान राजद से हाथ मिलाएंगे या नहीं। इस पर सर्वे में 53.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि चुनाव के बाद राजद और लोजपा हाथ मिला सकते हैं जबकि 46.7 प्रतिशत ने इसका नकारात्मक जबाव दिया।

अधिकांश लोगों को यह भी लगता है कि लोजपा के बाहर होने से भाजपा गठबंधन को नुकसान होगा। सर्वे में 59.3 प्रतिशत ने कहा कि इससे भाजपा गठबंधन को नुकसान होगा, जबकि 40.7 प्रतिशत ने इससे इनकार किया।

असली एनडीए कौन है इस पर भी मतदाता के मन में भ्रम है। 42.7 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि भले ही लोजपा एनडीए से बाहर चली गई है, फिर भी असली एनडीए, भाजपा और लोजपा हैं। वहीं 57.3 फीसदी ने कहा कि भाजपा-जदयू गठबंधन ही असली गठबंधन है।

एक तरफ जहां चिराग पासवान ने बिहार चुनाव में अकेले जाने का फैसला किया है, वहीं दूसरी ओर वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ कर रहे हैं और चुनावों के बाद भाजपा के साथ गठबंधन करने की बात कर रहे हैं। क्या इसे लेकर मतदाता में भ्रम की स्थिति है, इस पर 57.7 प्रतिशत लोगों ने कहा कि हां इसे लेकर भ्रम की स्थिति है, जबकि 42.3 प्रतिशत ने कहा कि ऐसा कोई भ्रम नहीं है।

यह सर्वे 30,678 लोगों पर 1 अक्टूबर से 23 अक्टूबर के बीच किया गया है। वहीं पिछले 12 हफ्तों में ट्रैकर द्वारा कुल 60 हजार से अधिक लोगों को बतौर सैंपल इसमें शामिल किया गया है। इसके अलावा सर्वे 243 विधानसभा क्षेत्रों को कवर कर रहा है और इसमें त्रुटि का मार्जिन राज्य स्तर पर प्लस/माइनस 3 प्रतिशत और क्षेत्रीय स्तर पर प्लस/माइनस 5 प्रतिशत है।

इसमें इस्तेमाल किया गया डेटा ज्ञात जनगणना आंकड़ों पर आधारित है। सर्वे में पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हुए मतदान के अलावा लिंग, आयु, शिक्षा, ग्रामीण/शहरी, धर्म और जाति आदि का डेटा शामिल है। (आईएएनएस)


25-Oct-2020 12:48 PM 18

भोपाल, 25 अक्टूबर| मध्य प्रदेश में कांग्रेस को रविवार को एक और झटका लगा जब दमोह विधानसभा क्षेत्र के विधायक राहुल लोधी ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने रविवार को संवाददाताओं को बताया कि दमोह से विधायक राहुल लोधी ने दो दिन पहले इस्तीफा देने की बात कही थी, जिस पर उन्हें सोच विचार करने को कहा गया था, राहुल लोधी ने शनिवार को फिर अपना इस्तीफा देने की इच्छा जाहिर की। रविवार को नवरात्रि के नवमीं के दिन राहुल लोधी ने इस्तीफा दे दिया।

ज्ञात हो कि राज्य में तत्कालीन 22 विधायकों ने अपनी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा था, जिससे कमल नाथ की सरकार गिर गई थी। उसके बाद तीन और विधायकों ने इस्तीफा दिया और अब राहुल लोधी ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। (आईएएनएस)


24-Oct-2020 2:56 PM 21

पटना, 24 अक्टूबर| बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 28 अक्टूबर को होना है, इससे चार दिन पहले शनिवार को राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) ने घोषणा पत्र जारी की। घोषणा पत्र को 'वचन पत्र' बताते हुए रालोसपा ने रोजगारों को रोजगार देने का वादा किया है। रालोसपा के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा द्वारा जारी घोषणा पत्र में 'उपेंद्र हैं, तो उम्मीद है' का नारा देते नौजवानों को रोजगार, विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा का वादा किया गया है।

उन्होंने नारा देते हुए कहा, 'न 15 साल वाली ये सरकार, न 15 साल वाली वो सरकार। अबकी बार शिक्षा और रोजगार वाली सरकार।'

रालोसपा के घोषणा पत्र में 25 सूत्री कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें दवाई, कड़ाई, कमाई, सिंचाई, कार्रवाई, सुनवाई को सम्मिलित किया गया है। शहर में वार्ड क्लिनिक और गांवों में 2,000 की आबादी पर एक क्लिनिक खोलने का वादा किया गया है जबकि नवोदय विद्यालय की तर्ज पर सभी जिलों में स्कूल की स्थापना करने और मुफ्त शिक्षा देने का वादा किया गया है।

घोषणा पत्र में 'युवा आयोग' का गठन करने का वादा भी किया गया है। सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य की प्रतिमा स्थापित करने का भी वादा लोगांे से किया गया है।

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट (जेडीएसएफ) के बैनर तले चुनाव लड़ रही है। इस मोर्चे में मायावती की पार्टी बसपा और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के अलावा अन्य पार्टियां शामिल हैं। (आईएएनएस)


24-Oct-2020 1:32 PM 27

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर। पंजाब के होशियारपुर में बिहार के प्रवासी परिवार की बेटी से बेरहमी पर बीजेपी ने राहुल गांधी और तेजस्वी को घेरा है। सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा है कि हाथरस पर आंदोलन करने वाले राहुल गांधी होशियारपुर क्यों नहीं जाते? बिहार की बेटी के साथ जुल्म हुआ वहां कांग्रेस की सरकार है, तेजस्वी राहुल गांधी के साथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं।

प्रकाश जावडेकर ने कहा, ‘बिहार के दलित प्रवासी मजदूर के छह वर्ष की बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ। दुष्कर्म के बाद उसको मार दिया गया। यह कैसी दर्दनाक और शर्मसार करने वाली घटना है। अभी तक अपराधी पकड़े नहीं गए। हम मांग करते हैं कि अपराधियों को पकड़ें और कड़ी कार्रवाई करें।’

जावडेकर ने आगे कहा, ‘राहुल गांधी पॉलिटिल टूर पर जाते हैं, इसके बजाए उन्हें पंजाब, राजस्थान जाना चाहिए। उनकी सरकारों में महिलाओं के साथ क्या अन्याय हो रहा है, कैसे दुष्कर्म हो रहा है। यह देखने ना प्रियंका गांधी गयीं, ना राहुल गांधी गए। इसकी हम भर्तसना करते हैं, हम तेजस्वी यादव से भी मांग करते हैं कि बिहार की बेटी के साथ अत्याचार पर चुप रहने वालों के साथ वो प्रचार करते हैं। यह कैसे चलेगा ?’

जानकारी के मुताबिक पंजाब के होशियार पुर में हुई घटना में शामिल हो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जिस बच्ची की मौत हुई है उसके पिता एक हवेली में काम करते हैं। इस हवेली के मालिक के पोते पर ही इस वारदात को अंजाम देने का आरोप है।

पुलिस ने दादा और पोता, दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मामले में डीजीपी को स्पीड ट्रायल करवाने के आदेश दिए थे। उन्होंने आरोपियों तो सख्त से सख्त सजा दिलाने की बात भी कही थी। (abplive.com)


23-Oct-2020 3:34 PM 31

नवादा, 23 अक्टूबर| बिहार विधानसभा चुनाव में सत्ता तक पहुंचने के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी क्रम में शुक्रवार को महागठबंधन के दो दिग्गज कांग्रेस के राहुल गांधी और राजद के तेजस्वी यादव एक मंच पर पहुंचे और विरोधियों पर जमकर निशाना साधा। नवादा के हिसुआ में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी ने कोरोना काल के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री आवास से बाहर नहीं निकलने को लेकर आड़े हाथों लिया और करारा सियासी हमला बोला।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब लोगों को उनकी जरूरत थी तब वे 'घर में कैद थे' और आज बाहर निकलकर वोट मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रवासी मजदूर अन्य राज्यों से लौट रहे थे तब भी कोरोना काल था और आज भी कोरोना काल है। उस समय मुख्यमंत्री घर से नहीं निकले, लेकिन आज जब वोट मांगना हुआ तो रैली कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, नीतीश कुमार 144 दिनों तक मुख्यमंत्री आवास में बंद थे। लेकिन अब वो घर से बाहर आ गए हैं, क्यों? तब भी कोरोना था, अब भी कोरोना है। लेकिन अब उनको आपका वोट चाहिए, तो उनको बाहर आना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों को अब भी रोजगार नहीं मिला है। आम लोग अभी भी बेरोजगार हैं।

तेजस्वी ने भोजपुरी भाषा में लोगों में जोश भरते हुए कहा कि अगर वे सत्ता में आए तो पहली कैबिनेट की बैठक में 10 लाख लोगों को रोजगार देने के प्रस्ताव को मंजूर करेंगे।

उन्होंने कहा कि आज बजट की आधी राशि खर्च नहीं की जाती है, वह सब वापस लौट जाता है। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्रों का विकास कर भी रोजगार दिया जाएगा।

इस रैली को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी संबोधित किया और केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कृषि कानूनों को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि ये कानून किसानों पर आक्रमण करने के लिए लाए गए हैं।

बिहार चुनाव में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी तीन रैली को संबोधित कर रहे हैं। (आईएएनएस)


23-Oct-2020 1:25 PM 14

लखनऊ, 23 अक्टूबर| उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की दस सीटों के लिए सभी पार्टियों में जोर आजमाईश शुरू हो गयी है। भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन के लिए मंथन तेज है। ऐसे में बहुजन समाज पार्टी द्वारा अपना उम्मीदवार उतारने के फैसले से निर्विरोध निर्वाचन की संभावना खत्म होती दिख रही है। पार्टी ने अपने नेशनल कोआर्डिनेटर रामजी गौतम को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला लिया है। बसपा की इस चाल से भाजपा के नौ सदस्यों के जीतने की राह जहां कठिन होगी वहीं, सपा और कांग्रेस के सामने भी पशोपेश के हालत हो सकते हैं।

दरअसल, विधायकों की संख्या के आधार पर होने वाले इस चुनाव में भाजपा के आठ व सपा के एक सदस्य की जीत तय है। भाजपा का एक और सदस्य तब ही जीत सकता है जब विपक्ष साझा प्रत्याशी न खड़ा करे। न बसपा और न ही कांग्रेस खुद के दम पर अपना प्रत्याशी जिता सकती है। विधानसभा में मौजूदा सदस्य संख्या के आधार पर जीत के लिए किसी भी प्रत्याशी को 36 वोटों की आवश्यकता होगी। भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन उसके आठ उम्मीदवारों की जीत तय है। बसपा द्वारा उम्मीदवार उतारने का फैसला किए जाने से ऊहापोह की स्थिति बन गई है।

समाजवादी पार्टी ने अपना एक उम्मीदवार प्रो. रामगोपाल यादव का नामांकन कराकर स्पष्ट कर दिया कि उसके पास दस वोट अतिरिक्त होने के बावजूद वह किसी और को खड़ाकर करने का संकेत नहीं दे रही है। सपा द्वारा केवल उम्मीदवार खड़ा करने से भाजपा को निर्विरोध निर्वाचन की आश थी। भाजपा को भरोसा था कि पर्याप्त वोट न मिलने से विपक्षी दलों की एकता को झटका लगेगा। ऐसे में भाजपा अपने 9 सदस्यों को राज्यसभा की दहलीज तक पहुंचाने में कामयाब हो जाएगी। ऐसी स्थिति में बसपा की प्रमुख मायावती पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर रामजी गौतम को चुनाव लड़ाकर एक तीर से कई निशाना साधना चाह रही हैं।

बसपा विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा ने बताया कि पार्टी ने बिहार के प्रभारी रामजी गौतम को अपना प्रत्याशी बनाया है। 26 अक्टूबर को उनका नामांकन किया जाएगा। विधानसभा में बसपा के पास 18 विधायक हैं। पार्टी को एक सीट निकालने के लिए करीब 39 प्रतिशत मतों की जरूरत होगी। इससे साफ है कि उसे दूसरे दलों से सहयोग लेना पड़ेगा।

गौरतलब है कि बहुजन समाज पार्टी के विधायकों की संख्या वैसे तो 18 ही हैं, लेकिन इनमें भी मुख्तार अंसारी, अनिल सिंह सहित दो-तीन और के वोट उसे मिलने की उम्मीद नहीं है। फिर भी मायावती प्रत्याशी उतारकर, भाजपा के नौवें उम्मीदवार के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना को खत्म कर बड़ा संदेश देना चाह रही हैं। बसपा नेताओं का कहना है कि मायावती के इस फैसले से कांग्रेस, सपा व अन्य विपक्षी दलों द्वारा पार्टी को भाजपा की बी-टीम के रूप में प्रचार करने पर खुद-ब-खुद ब्रेक भी लग जाएगा।

दूसरी तरफ अगर बसपा प्रत्याशी को सपा व कांग्रेस समर्थन नहीं देंगी तो पार्टी को पलटवार करने का मौका मिलेगा। बसपा प्रत्याशी के हारने की स्थिति में पार्टी नेताओं द्वारा जनता के बीच यह सवाल उठाया ही जाएगा कि आखिर भाजपा का मददगार कौन है। वैसे सूत्रों का कहना है कि भाजपा को हराने के लिए सपा, कांग्रेस के साथ ही सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अलावा कई निर्दलीय का भी बसपा को समर्थन मिल सकता है। बसपा की नजर भाजपा के असंतुष्टों पर भी है। (आईएएनएस)


23-Oct-2020 1:21 PM 14

मनोज पाठक
पटना, 23 अक्टूबर|
ऐसे तो आम तौर पर किसी भी चुनाव के पहले राजनीतिक दलों द्वारा वादों की झड़ी लगाई जाती रही है, लेकिन बिहार में इस साल हो रहे विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दल नौकरियों की बारिश कर रहे हैं। अगर सच में राजनीतिक दल इतनी नौकरियां उपलब्ध करा दें तो बिहार में पलायन की समस्या ही दूर हो जाए।

वैसे, सबसे मजेदार बात है कि पिछले 30 साल से बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस, जनता दल युनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में रही है, लेकिन आज भी यहां के युवाओं को शिक्षा या नौकरी के लिए अन्य राज्यों में पलायन करना पड़ता है।

इस चुनाव में यही राजनीतिक दल अपने-अपने घोषणा पत्र में नौकरी और रोजगार की झड़ी लगाकर, युवाओं को आकर्षित करने में जुड़े हैं। हालांकि इस दौरान सभी राजनीतिक दल 'खुद की कमीज दूसरों से सफेद' बताने को लेकर एक-दूसरे की आलोचना करते हुए सवाल भी उठा रहे हैं।

महागठबंधन में शामिल होकर साथ में चुनाव मैदान में उतरे राजद और कांग्रेस ने जहां बिहार के 10-10 लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा किया है वहीं, भाजपा ने 19 लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा अपने घोषणा पत्र में किया है।

भाजपा की नेता और केन्द्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को पटना में भाजपा के '5 सूत्र, एक लक्ष्य, 11 संकल्प' के विजन डाक्यूमेंट को जारी किया। इस घोषणा पत्र में बीजेपी ने 19 लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा किया है।

भाजपा ने अपने घोषणापत्र में वादा किया है कि एक हजार नए किसान उत्पाद संघों को आपस में जोड़कर राज्यभर के विशेष सफल उत्पाद जैसे- मक्का, फल, सब्जी, चूड़ा, मखाना, पान, मशाला, शहद, मेंथा, औषधीय पौधों के लिए सप्लाई चेन विकसित करेंगे जिससे 10 लाख रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इसके अलावा स्वास्थ और शिक्षा क्षेत्रों में भी रोजगार देने का वादा किया गया है।

इससे पहले काग्रेंस ने बुधवार को अपना घोषणा पत्र जारी किया था। कांग्रेस के इस घोषणा पत्र में 10 लाख युवाओं को रोजगार और जिन लोगों को रोजगार नहीं मिलेगा, उन्हें 1500 रुपये मासिक बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया गया है।

इधर, जदयू ने भी कौशल विकास कर लोगों को रोजगार देने का वादा किया है।

इधर, राजद नेता तेजस्वी यादव ने पार्टी का घोषणा पत्र जारी करते हुए संकल्प लिया है कि उनकी सरकार बनते ही पहली कैबिनेट में युवाओं को 10 लाख रोजगार देने पर मुहर लगेगी। इस मामले को वे सभी चुनावी सभाओं में जिक्र भी कर रहे हैं।

तेजस्वी के रोजगार देने के वादे को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सवाल उठाए कि आखिर इतना पैसा कहां से आएगा।

सुषील मोदी ने कहा, यदि वास्तव में दस लाख लोगों को सरकारी नौकरी दी जाए तो राज्य के खजाने पर 58,415.06 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसके अलावा पूर्व से कार्यरत 12 लाख से ज्यादा कर्मियों के वेतन मद में होने वाले खर्च 52,734 करोड़ को इसमें जोड़ लें तो यह राशि 1,11,189.06 करोड़ होती है।

उन्होंने राजद के वादे को ढपोरशंखी तक बता दिया।

इधर, भाजपा के घोषणा पत्र में 19 लाख रोजगार देने को लेकर राजद नेता तेजस्वी यादव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राजद के 10 लाख नौकरियों पर सवाल उठाने वाले अब 19 लाख लोगों को रोजगार देने की बात कर रहे हैं। उन्होंने इसे छलावा बताते हुए कहा कि हमारे निर्णय के बाद इन्हें रोजगार देने की चिंता सता रही है।

इधर, सुशील मोदी कहते हैं, भााजपा और दूसरे दलों में यही फर्क है कि दूसरे जहां तारे तोड़ लाने जैसे वादे कर केवल सत्ता हथियाना चाहते हैं, वहां भाजपा सिर्फ वही बात करती है, जिसे जमीन पर लागू किया जा सके।

उन्होंने आगे कहा, हम कोरा वादा नहीं, सेवा का संकल्प करते हैं, इसलिए घोषणा पत्र में 19 लाख लोगों को रोजगार देने का निश्चय किया है। हमने इसका ब्योरा भी दिया है कि ये अवसर लोगों को कैसे दिलाएंगे।

बहरहाल, इस चुनाव में नौकरियों की बारिश हो रही है, अब देखने वाली बात है किस राजनीतिक दल के वादों पर लोग ज्यादा विश्वास करते हैं और उन्हें सत्ता तक पहुंचाते हैं। (आईएएनएस)


22-Oct-2020 3:49 PM 35

पटना, 22 अक्टूबर| राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद भले ही चारा घोटाला के मामले में सजा काट रहे हों, लेकिन अपने ट्विटर हैंडल से वे बिहार विधानसभा चुनाव में लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। लालू के ट्विटर हैंडल से लगातार विरोधियों पर निशाना साधा जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को लालू के ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्य 'मौका' मंत्री और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को उप मुख्य 'धोखा' मंत्री बताया गया है।

लालू के ट्विटर हैंडल से एक कार्टून भी पोस्ट किया गया है, जिसमें नीतीश, सुशील मोदी को मौका मांगते दिखाया गया है, जबकि जनता उनसे कितना मौका देने की बात कह रही है।

लालू ने कार्टून के साथ ट्वीट करते हुए लिखा, ''मुख्य-मौका मंत्री जी और उप मुख्य-धोखा मंत्री जी, जनता ने बहुत दिया आपको मौका और आप ने दिया जनता को धोखा।''

उल्लेखनीय है कि लालू ट्विटर के जरिए लगातार विरोधियों पर निशाना साध रही है। लालू चारा घोटाला के मामले में जेल में बंद हैं। फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से वे रांची के रिम्स में भर्ती हैं।  (आईएएनएस)


22-Oct-2020 2:45 PM 29

मनोज पाठक 
पटना, 22 अक्टूबर| आम तौर पर चुनाव के पूर्व सत्ता तक पहुंचने की महत्वकांक्षा में नेताओं का दल बदलकर ''निजाम'' बदलने की परंपरा पुरानी है, लेकिन कोरोना काल में हो रहे बिहार विधानसभा चुनाव में रिश्तों पर भी सियासत भारी पड़ रही है, जिस कारण मतदाताओं में भी संशय है।

बिहार के इस चुनावी मैदान में सास और बहू भी एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ी हैं वहीं चाचा-भतीजा भी एक-दूसरे के लिए ताल ठोंक रहे हैं। रिश्तेदारों के बीच मचे घमासान से मतदाता भी संशय में है कि वह किसे वोट दे, क्योंकि उनके ताल्लुकात दोनों पक्षों से अच्छे हैं। ऐसे में रिश्तेदारों के बीच हो रहे इस चुनावी दंगल का रोमांच और भी अधिक बढ़ गया है।

विधानसभा चुनाव में रामनगर ऐसी सीट है, जहां सास और बहू आमने-सामने हैं। यहां भाजपा विधायक भागीरथी देवी को उनकी बहू निर्दलीय रानी कुमारी से कड़ी टक्कर मिल रही है। यहां दोनों के चुनावी मैदान में उतर जाने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। रामनगर का दो बार प्रतिनिधित्व कर चुकी भागीरथी देवी के मुकाबले उनकी बहू राजनीति में भले ही नई हों लेकिन वे क्षेत्र में भावनात्मक रूप से वोट मांग रही हैं।

रानी का कहना है कि एक-एक घर में जाएंगी और विकास के दावे और वादे की सच्चाई बताएंगी। इधर, भागीरथी देवी कहती हैं कि जनता-जनार्दन मालिक हैं। चुनाव में वही फैसला करते हैं।

सीमांचल की जोकीहाट सीट पर इस बार दिग्ग्ज नेता रहे तस्लीमुद्दीन के दो पुत्र आमने-सामने हैं। इस सीट से पांच बार तस्लीमुद्दीन विधायक रहे हैं। इसी सीट से उनके मंझले पुत्र सरफराज आलम चार बार विधायक बने। विधायक रहते हुए उन्होंने तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद 2018 में अररिया लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव में राजद प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने जोकीहाट विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया।

यहां हुए उपचुनाव में उनके छोटे भाई शाहनवाज आलम राजद के टिकट पर जोकीहाट से विधायक बने। इसके बाद के 2019 में लोकसभा चुनाव में सरफराज आलम हार गए और अपनी परंपरागत जोकीहाट सीट पर वापस आए और राजद से टिकट मिल गया। इसके बाद उनके छोटे भाई शाहनवाज आलम एआइएमआइएम के तरफ से चुनावी मैदान में उतर आए।

इधर, भोजपुर के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में जेठानी और देवरानी के बीच रोचक मुकाबला है। पूर्व विधायक मुन्नी देवी को भाजपा ने एक बार फिर अपना उम्मीदवार बनाया है तो उनकी जेठानी शोभा देवी बतौर निर्दलीय चुनावी अखाड़े में उतर आई हैं। पिछले चुनाव में शोभा देवी के पति विशेश्वर ओझा भाजपा के उम्मीदवार थे।

सारण जिले के मढ़ौरा विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रामप्रवेश राय के पुत्र आनंद राय निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं उनके चाचा जयराम राय भी निर्दलीय ही मैदान में उतर चुके हैं।

बहरहाल, राज्य के कई विधानसभा क्षेत्रों में सियासत की सीढ़ियां चढ़ने के लिए नेता रिश्तों को दरकिनार कर चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे हों, लेकिन देखने वाली बात होगी मतदाता किसे तरजीह देते हैं।

बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए तीन चरणों में होने वाले चुनाव के लिए मतदान 28 अक्टूबर, तीन नवंबर और सात नवंबर को होगा जबकि मतगणना 10 नवंबर को होगी। (आईएएनएस)