राजनीति

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16-Apr-2021 8:51 AM 51

-अनुज गुप्‍ता

उन्नाव. उत्तर प्रदेश के उन्नाव में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में नामांकन प्रक्रिया गुरुवार को समाप्त हो गई. बता दें कि यहां उन्नाव जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट ‘हॉट’ बनी हुई है. दरअसल, वार्ड नंबर-22 (फतेहपुर चौरासी तृतीय) सीट से कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी और निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर का बीजेपी ने समर्थन रद्द कर दिया था. अब इसी सीट पर पार्टी ने क्षत्रिय प्रत्याशी के तौर पर दिवंगत एमएलसी अजीत सिंह की पत्नी शकुन सिंह को प्रत्याशी घोषित किया है. शकुन सिंह ने नामांकन पर्चा दाखिल कर अपनी दावेदारी पेश कर दी है. शकुन की एंट्री से जिले की राजनीतिक सियासत गरम हो गई है.

नामांकन के दौरान प्रत्याशी के साथ काफी संख्या में समर्थक पहुंचे, जिन्हें कलेक्ट्रेट से दूर रोका गया. वहीं, नामांकन स्थलों पर भारी संख्या में फोर्स तैनात रहा. उन्नाव में तीसरे चरण में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. उन्नाव में 26 अप्रैल को मतदान होगा. उन्नाव में 1040 ग्राम प्रधान, 1319 क्षेत्र पंचायत और 51 जिला पंचायत सदस्य पद के साथ ही 12902 ग्राम पंचायत सदस्य पद पर नामांकन प्रक्रिया 15 अप्रैल को समाप्त हो गई.

...जब संगीता का कटा टिकट
बता दें कि 7 अप्रैल को बीजेपी समर्थित प्रत्याशी की जारी सूची में जेल में बंद पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष को वार्ड नंबर 22 फतेहपुर चौरासी तृतीय सीट से बीजेपी ने समर्थन देकर प्रत्यशी घोषित किया था. इसके बाद विपक्ष व रेप पीड़िता ने बीजेपी की छवि पर सवाल खड़े कर संगीता सेंगर के बीजेपी समर्थित प्रत्याशी पर हमला बोल दिया. राजनीतिक सरगर्मी बढ़ता देख 11 अप्रैल को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने बयान जारी कर संगीता सेंगर का समर्थन रद्द कर दिया.
फतेहपुर चौरासी तृतीय सीट भी रिक्त हो गई. काफी उठापटक के बीच नामांकन के आखिरी दिन 15 अप्रैल की शाम करीब 4 बजे पूर्व बीजेपी एमएलसी अजीत सिंह की पत्नी शकुन सिंह पर बीजेपी ने आखिरी समय पर दांव लगाया और पार्टी समर्थित प्रत्याशी घोषित किया. शकुन सिंह ने अपने बेटे बीजेपी नेता शशांक शेखर सिंह के साथ नामांकन कराया है.

बीजेपी से चुनावी मुकाबला
पूर्व एमएलसी की पत्नी शकुन सिंह इससे पहले भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी हैं. वहीं 2017 में अजीत सिंह के पुत्र शशांक शेखर सिंह ने सपा/बीएसपी के गठबंधन में बीएसपी प्रत्याशी के तौर पर भगवंतनगर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में थे और बीजेपी प्रत्याशी मौजूदा यूपी विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित ने चुनाव जीता था. शशांक शेखर सिंह दूसरे नंबर पर रहे थे.

शकुन सिंह बोलीं- जनता का विश्‍वास हमारे साथ
बीजेपी समर्थित प्रत्याशी शकुन सिंह ने नामांकन कराने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी ने समर्थन दिया है. जनता का विश्वास हमारे साथ है, जनता चुनाव जरूर जिताएगी. स्वर्गीय एमएलसी अजीत सिंह के पुत्र शशांक शेखर सिंह ने कहा कि पार्टी ने समर्थन दिया है, इसका आभार है. अपने पिता (अजीत सिंह) के पदचिन्हों पर चल रहा हूं. जनता की मदद के लिए हर समय तत्पर हूं और तत्पर रहूंगा. (news18.com)


11-Apr-2021 1:09 PM 21

जामुडिय़ा सीट से माकपा प्रत्याशी आयशी घोष को ग्रामीण महिलाओं से काफी उम्मीदें

  स्टारडम के बदौलत आसनसोल दक्षिण सीट में जमकर प्रचार कर रही तृणमूल प्रार्थी सायनी घोष  

पश्चिम बर्धमान की नौ सीटों में एक सीट बाराबनी में भाजपा ने भी खड़ा किया भाजयुमो नेता अरिजीत को  


बिकास के शर्मा
आसनसोल, 11 अप्रैल (‘छत्तीसगढ़’)।
राजनीति की दुनियां में युवाओं का क्रेज बढ़ा है। इसी वजह से पश्चिम बर्धमान जिले की नौ में से चार सीटों पर युवाओं बुलंद हौसले युवाओं में ही मिलती है यही कारण है कि अपनी बुलंद हौसले को लेकर कई युवा चेहरे चुनाव के मैदान में कूदे हैं। युवा चेहरों को चुनाव लडऩे का मौका देने में तृणमूल कांग्रेस और सीपीआईएम सबसे आगे है। सीपीआईएम ने लगभग क्षेत्रों में युवा चेहरों को ही उतारा है। दूसरे स्थान पर तृणमूल कांग्रेस है और तीसरे स्थान पर भाजपा है। केवल पश्चिम बर्दवान की नौ विधानसभा क्षेत्रों की अगर बात करें तो यहां की जामुडिय़ा और पांडवेश्वर से माकपा ने युवा चेहरे को उतारा है। तृणमूल कांग्रेस की बात करें तो इसने भी आसनसोल दक्षिण से युवा चेहरा सायनी घोष को चुनाव लडऩे का मौका दिया है। इनके अलावा इन नौ विधानसभा से कई निर्दलीय युवा चेहरे भी अपने से उम्र में बड़े धुरंधर चेहरों को मात देने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।

जेएनयू कैंपस में हमले के बाद सुर्खियों में आयी आयशी घोष
जामुडिय़ा से सीपीआईएम की 26 वर्षीय प्रत्याशी आयशी घोष जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्र संघ की अध्यक्ष भी हैं जो पश्चिम बंगाल की ही रहने वाली हैं। छात्र संघ की राजनीति में परचम लहराने के बाद अब आयशी राजनीति के असल मैदान में अपनी किस्मत आजमाने के लिए मैदान में उतरीं हैं। वर्ष 2020 में जब जेएनयू में हमलावर घुसे थे तो उस समय आयशी घोष की फोटो खूब वायरल हुई थी और उन्हें चोट भी आयी थी। उस समय अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने आकर आयशी का समर्थन किया था। तब से आयशी सुर्खियों में आयीं। जामुडिय़ा सीट से वर्ष 2016 में सीपीआईएम के ही जहांआरा खान जीते थे। इस बार आयशी तृणमूल कांग्रेस के 67 वर्षीय हरेराम सिंह को मुकाबला देने के लिए मैदान में उतरीं हैं।

सायनी घोष (आसनसोल दक्षिण क्षेत्र में बच्चों से मिलतीं तृणमूल प्रार्थी सह अभिनेत्री सायनी घोष)

टॉलीवूड अभिनेत्री सायनी सोशल मीडिया पर वायरल
परदे की दुनियां से सीधे राजनीति में कदम रखने वाली 28 वर्षीय सायनी घोष को तृणमूल कांग्रेस ने आसनसोल दक्षिण से प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है। हीरेंद्र लीला पत्रानविश स्कूल जादवपुर से 10+2 पास सायनी ने कम समय में ही परदे की दुनियां में खूब सुर्खियां बटोरी। जीटीवी पर आने वाले एपिसोड दीदी नंबर वन से सायनी घोष सुर्खियों में आयीं। इसके बाद उनकी सुर्खियों को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस ने आसनसोल दक्षिण से इन्हें प्रत्याशी बनाया है। अपने चुनावी इलाके में सायनी बुलंद हौसेले के साथ पसीना भी बहा रहीं हैं। यहां भाजपा की प्रत्याशी प्रख्यात फैशन डिजाइनर 48 वर्षीय अग्निमित्रा पाल को चुनावी मैदान में पस्त करने के लिए पूरा दमखम लगा रहीं है। हालांकि यह सीट पहले तृणमूल के ही तापस राय जीता करते थे। लेकिन इस बार तृणमूल कांग्रेस ने तापस राय का सीट चेंज कर दिया है उन्हें रानीगंज भेज दिया गया है।

अपने से 22 वर्ष बड़े को देंगे टक्कर अरिजीत
भाजपा ने बाराबनी में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के युवा चेहरे 29 वर्षीय अरिजीत राय को चुनाव मैदान में उतारा है। अपने काम व पार्टी में अच्छी पकड़ रखने के बदौलत अरिजीत राय को दोबारा युवा मोर्चा का जिला ध्यक्ष बनाया गया था। इस बार भाजपा ने अरिजीत को युवा मोर्चा से सीधे चुनाव के मैदान में भेज दिया है। अरिजीत ने कला संकाय में नेताजी सुभाष ओपन विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की है। यहां से तृणमूल के विधायक रहे 51 वर्षीय विधान उपाध्याय को टक्कर देने के लिए मैदान में उतरे हैं।

कई युवा निर्दलीय ने भी धुरंधरों को टक्कर देने को तैयार
पश्चिम बर्दवान की नौ सीटों पर कई युवा चेहरों ने निर्दलीय व अन्य पार्टी के प्रत्याशी के रूप में नामांकन भी किया है। इनमें आसनसोल उत्तर से एआईएमआईएम के 26 वर्षीय दानिश अजीज, दुर्गापुर पूर्व से निर्दलीय नयन मंडल, आसनसोल दक्षिण से निर्दलीय के रूप में 28 वर्षीय शिउली रुईदास, कुल्टी विधानसभा से बसपा के प्रत्याशी के रूप में 28 वर्षीय बापी रविदास, रानीगंज से निर्दलीय के रूप में 28 वर्षीय अभिजीत बाउरी, पूर्वाचल महापंचायत के प्रत्याशी के रूप में 29 वर्षीय नीरज रजक भी युवा चेहरा बन कर चुनावी मैदान में धुरंधरों से लड़ाई लडऩे के लिए नामांकन किया है।
(मूलत: पश्चिम बंगाल के निवासी लेखक युवा पत्रकार हैं और आईसीएफजे, यूएसए, के फेलो रहे हैं)


05-Apr-2021 9:00 PM 79

तृणमूल कांग्रेस मुख्यमंत्री ममता, भाजपा प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर मांग रही वोट
प्रार्थी सह विधायक की सरल छवि को भुनाने में जुटी तृणमूल, कांग्रेस कर रही तीसरे विकल्प का दावा 
पिछली बार की तरह इस बार भी तृणमूल के उज्जवल चटर्जी और भाजपा के डॉ अजय कुमार पोद्दार में सीधा मुकाबला

बिकास के शर्मा

आसनसोल, 5 अप्रैल (‘छत्तीसगढ़’) । पश्चिम बर्धमान जिले की अहम सीट कुल्टी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी डॉ अजय कुमार पोद्दार जहाँ एक ओर कुल्टी क्षेत्र में प्रचार के दौरान लोगों को विधायक उज्जवल चटर्जी को एक निष्क्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में बताकर अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं, तो वहीँ तृणमूल प्रार्थी श्री चटर्जी पिछले 10 दिनों में इलाके में घूमते हुए पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को तीसरी बार जिताने के लिए वोट मांगते नजर आ रहे हैं। कुल्टी में चाहे सत्ताशीन तृणमूल हो अथवा मुख्य विपक्षी होने को दावा ठोकने वाली भाजपा, दोनों ही दलों ने स्थानीय मुद्दों को भूलकर अपने-अपने दलों के शीर्ष नेताओं के नाम पर चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया। झारखंड के धनबाद जिले की सीमा लगा कुल्टी इलाका मूल रूप से एक समय एशिया के प्रसिद्ध ईस्को कारखाना और कोलियरियों के लिए पूरे पश्चिम बंगाल में जाना जाता था। साथ ही वहां के बराकर नगर की गल्ला मंडी की भी तीन दशक पूर्व एक विशेष ख्याति थी, जो नियामतपुर के विकसित होने एवं कल्याणेश्वरी रोड स्थित रेल ब्रिज पर बड़े वाहनों की आवाजाही बंद कर दिए जाने से प्रभावित हुई है। चुनाव को लेकर फ़िलहाल कुल्टी क्षेत्र के मतदाताओं में शांति है। कुछ लोग बदलाव की बात पर मौन स्वीकृति देते हुए आपको लोग मिल जायेंगे, तो स्थानीय विधायक के समर्थकों की एक लंबी फेहरिस्त भी तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनाव में कारगर साबित हो सकती है। भाजपा प्रत्याशी डॉ पोद्दार ने कहा- 'तीन बार से उज्जवल चटर्जी विधायक हैं और पंद्रह वर्ष तक कुल्टी नगरपालिका के अध्यक्ष भी रहे किंतु क्या इलाके में कोई नए उद्योगों या रोजगारों का सृजन करने में उन्होंने कोई प्रयास भी किये हैं? कुल्टी में बदलाव निश्चित होगा और भाजपा को एक लाख मत प्राप्त होंगे।'

इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है, हालांकि गठबंधन समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी भी अपने जीत को लेकर दावा करते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस प्रार्थी चंडी चटर्जी ने कहा कि साल 2016 में गठबंधन उम्मीदवार ने 43 हजार वोट लाये थे, जिसका सीधा अर्थ है कि हमें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।  श्री चटर्जी की मानें तो जनता तृणमूल कांग्रेस और भाजपा से तंग आ चुकी है क्यों कि दोनों ही दलों ने लोगों के अंदर आपसी भेदभाव को पैदा किया है और सांप्रदायिक राजनीति को आधार बनाकर चुनाव की वैतरणी पार लगाना चाहते हैं, ऐसे में संयुक्त मोर्चा एक ठोस विकल्प जनता के सामने है।
  
कुल्टी सीट तृणमूल कांग्रेस के लिए इस लिए भी अहम मानी जा रही है कि वर्ष 2006 में वाममोर्चा को मिले भारी बहुमत के दौरान भी तत्कालीन फॉरवर्ड ब्लॉक विधायक मानिकलाल आचार्या को टीएमसी प्रत्याशी सह निवर्तमान विधायक श्री चटर्जी ने 17 हजार मतों से पराजित किया था। उसके बाद से आज तक टीएमसी ही लगातर तीन बार चुनाव जीत चुकी है। कुल्टी सीट पर आगामी 26 अप्रैल को मतदान होगा और किसी भी दल के प्रत्याशी ने अभी तक नामांकन पर्चा नहीं भरा है।  

जनसंपर्क अभियान के दौरान अपने समर्थकों संग भाजपा प्रार्थी 

लोकसभा चुनावों की बढ़त से भाजपा के हौसले बुलंद
विधानसभा क्षेत्र वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने आसनसोल सीट से गायक बाबुल सुप्रियो को टिकट दिया था।  उस वक्त कुल्टी विधानसभा इलाका उनके लिए काफी माकूल रहा और उन्होंने 42 हजार मतों से बढ़त हासिल की थी। एक तृणमूल नेता ने नाम छिपाने की शर्त पर बताया कि तब तृणमूल विधायक श्री चटर्जी के लिए पार्टी आलाकमान को जवाब देना मुश्किल हो गया था कि आखिर क्यों भाजपा को वहां से बढ़त मिली। श्री चटर्जी ने पार्टी के कुछ पार्षदों पर अपना रोष भी व्यक्त किया था। वर्ष 2019 में मोदी लहर लोगों के और सर चढ़कर बोला और कुल्टी से भाजपा ने 72 हजार मतों से विधानसभा इलाके से बढ़त हासिल की थी। इसके बाद कुल्टी में तृणमूल कांग्रेस ने ब्लॉक अध्यक्ष महेश्वर मुखर्जी को पद से हटाकर पूर्व नपाध्यक्ष विमान आचार्या को आसीन किया था। भाजपा संयोजक राजेश सिन्हा ने बताया कि उनकी पार्टी इलाके में केंद्र की मोदी सरकार की योजनाओं का लाभ जनता को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने घर-घर पहुंचाया। जिसकी बदौलत आज संगठन काफी मजबूत दिखाई दे रहा है। श्री सिंहा ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार पार्टी की स्थिति ज्यादा मजबूत है और सदस्यता भी तीन गुना बढ़ी है।
 
हिंदी भाषियों को आकर्षित कर रहे सभी दल
इस बार के चुनाव में भाजपा ज्यादा सक्रियता के साथ प्रचार करती हुई दिखाई दे रही है, तो वहीं तृणमूल नेताओं की मानें तो उन्हें जीत को लेकर कोई शंका नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा द्वारा हिंदी भाषी प्रत्याशी दिए जाने के कारण तृणमूल के लिए बंगाली वोटर्स के बीच में कम और हिंदी भाषी मतदाताओं के बीच ज्यादा काम किया जा रहा है। साथ ही तृणमूल ने हिंदी भाषी संग दीदी कार्यक्रम के तहत पिछले डेढ़ माह में कुल्टी क्षेत्र में आधा दर्जन कार्यक्रमों के माध्यम से एक दशक में राज्य सरकार द्वारा हिंदी भाषियों के लिए किये गए की कार्यों को जनता से साझा किया है। भाजपा नेता विभाष सिंह ने बताया कि चुनाव के पूर्व और भाजपा के बढ़ते जनाधार से परेशान होकर तृणमूल कांग्रेस को हिंदी भाषियों की याद आई है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस हिंदी प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष मनोज यादव ने कहा कि भाजपा अपनी बहिरागत सोच से कभी उबर नहीं पायेगी। उनकी मानें तो कुल्टी ही नहीं अपितु पूरे राज्य में डेढ़ सौ वर्षों से भी अधिक समय से हिंदी भाषी रह रहे हैं। उनके हितों की रक्षा किसी पूर्वर्ती सरकार नहीं बल्कि केवल तृणमूल कांग्रेस ने ही की है। श्री यादव ने कहा कि भाजपा यहाँ के हिंदी भाषियों को बाहरी मानती है, जबकि तृणमूल भाजपा की सोच को बहिरागत मानती है। उन्होंने दावा किया कि कुल्टी के हिंदी भाषी मतदाता तृणमूल प्रार्थी के साथ पिछले चुनाव में भी थे और इस बार भी हैं।

सभी प्रत्याशियों का डोर-टू-डोर प्रारंभ
चुनाव की तिथि के नजदीक आते ही सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी रणनीति के तहत तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा प्रार्थी ने अपने प्रचार की शुरुआत कल्याणेश्वरी मंदिर में पूजा कर की थी तो तृणमूल प्रत्याशी श्री चटर्जी भी बिना किसी तामझाम के अपने समर्थकों संग क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। दीवार लेखन और सोशल मीडिया पर प्रचार एक साथ ही दोनों प्रत्याशियों द्वारा किया जा रहा है। कांग्रेस प्रार्थी को वाममोर्चा का समर्थन होने की वजह से कुछ स्थानों पर उनका भी दीवार लेखन दिखाई दे रहा है। लेकिन उनके जनसंपर्क अभियान में अभी थोड़ी शिथिलता है। भाजपा प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए परिवर्तन और अबकी बार 2 सौ पार के नारों के माध्यम से जनता को लुभा रही है तो स्थानीय तृणमूल कांग्रेस कर्मी सीएम एवं निवर्तमान विधायक की साफ़ छवि को हथियार बनाकर प्रचार में जुटी है।

2016 में 19488 से हुई थी तृणमूल की जीत
पिछले विधानसभा चुनाव में निवर्तमान विधायक श्री चटर्जी ने चुनाव जीता था। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी डॉ पोद्दार को 19,488 वोटों से हराया था। तृणमूल कांग्रेस को जहाँ 68,952 मत प्राप्त हुए थे वहीँ भाजपा को 49,464 वोट मिले थे। गठबंधन की ओर से कांग्रेस ने अभिजीत आचार्या (बाप्पा) को टिकट दिया था और वे 42,895 वोट लाकर तीसरी स्थान पर रहे थे। वर्तमान में श्री आचार्या भाजपा के सदस्य हैं, जिनकी बदौलत भाजपा प्रार्थी कुल्टी के दक्षिण-पश्चिम इलाके में खुद को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। हालांकि श्री आचार्या बहुत खुलकर पार्टी के लिए प्रचार करते हुए पूरे कुल्टी इलाके में नजर नहीं आ रहे हैं।
(मूलतः पश्चिम बंगाल के निवासी लेखन युवा पत्रकार हैं और आईसीएफजे, यूएसए, के फेलो रहे हैं)


02-Apr-2021 9:51 PM 82

नई दिल्ली, 2 अप्रैल | केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले दो चरणों में 60 सीटों में से 50 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करेगी। राज्य में पहले चरण में 27 मार्च को 30 सीटों पर और दूसरे चरण में एक अप्रैल को 30 सीटों पर चुनाव हुआ था।

पश्चिम बंगाल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, शाह ने कहा, "बंगाल चुनाव के पहले दो चरण में भाजपा 60 में से 50 से अधिक सीटें जीत रही है और दीदी (मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) खुद नंदीग्राम से हार रही हैं।"

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि गुरुवार की समीक्षा बैठक के बाद पार्टी को नंदीग्राम जीतने का भरोसा है। उन्होंने कहा, "भारी प्रतिक्रिया मिली है और नंदीग्राम से प्राप्त रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अधिकारी (सुवेंदु) आराम से जीत रहे हैं।"

ममता बनर्जी का सामना नंदीग्राम से भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के साथ हुआ था, जो कि विधानसभा चुनाव से पहले ही तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भगवा पार्टी में शामिल हुए हैं। 

गुरुवार को मतदान समाप्त होने से पहले, भाजपा ने दावा किया कि अधिकारी चुनाव जीत रहे हैं। अधिकारी ने गुरुवार को वोट डालने के बाद कहा था, "नंदीग्राम के हर व्यक्ति के साथ मेरे व्यक्तिगत संबंध हैं। मुझे चुनाव जीतने का पूरा विश्वास है।" (आईएएनएस)


02-Apr-2021 9:37 PM 88

अगरतला, 2 अप्रैल| भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को हराकर जीत हासिल करेगी और इसके साथ ही असम में सत्ता बरकरार रखेगी। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में 175 या अधिक सीटों पर जीत दर्ज करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, "असम में कांग्रेस या किसी अन्य विपक्षी पार्टी का कोई अस्तित्व नहीं है। भाजपा असम में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता बनाए रखेगी। चुनाव के बाद असम में विपक्षी सदस्य मुक्त विधानसभा होगी।"

त्रिपुरा में सीपीआई-एम और कांग्रेस का कोई अस्तित्व नहीं होने का दावा करते हुए देब ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास मिशन के प्रभाव से हर कोई भाजपा में शामिल हो रहा है। (आईएएनएस)


02-Apr-2021 6:47 PM 93

गुवाहाटी, 2 अप्रैल | चुनाव आयोग ने गुरुवार शाम को भाजपा उम्मीदवार की पत्नी के वाहन में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पाए जाने के बाद दक्षिणी असम के एक मतदान केंद्र पर दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया है। चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा कि पीठासीन अधिकारी और तीन अन्य अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही रतबारी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत इंदिरा एम.वी. मतदान केंद्र पर दोबारा मतदान करवाने के आदेश दिए हैं।

बयान में कहा गया है, "हालांकि ईवीएम की सील बरकरार पाई गई थी, लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर इंदिरा एम.वी. मतदान केंद्र में दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया गया है।

आयोग ने घटना के बारे में विशेष पर्यवेक्षक से रिपोर्ट भी मांगी है।

बयान में कहा गया है कि करीमगंज ईवीएम मशीन ले जा रहे अधिकारियों की कार खराब हो गई, जिसके बाद वे पास से गुजर रहे एक निजी वाहन में बैठ गए, जहां 50 से अधिक लोगों ने पथराव शुरू कर दिया।

कनैसिल (करीमगंज जिले के अंतर्गत) में भीड़ ने आरोप लगाया कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की जा रही थी। निजी कार पड़ोसी पथरकंडी निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा उम्मीदवार कृष्णेंदु पॉल की पत्नी की थी।

बयान में कहा गया है कि गुरुवार की रात हुई भारी बारिश और सड़कों पर कीचड़ होने के कारण मतदान कर्मियों की आधिकारिक कार खराब हो गई और फिर वे अपने निजी ईवीएम और अन्य सामग्रियों के साथ वाहन के स्वामित्व की जांच किए बिना एक निजी वाहन पर सवार हो गए।

घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद, जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) के साथ करीमगंज के जिला चुनाव अधिकारी घटनास्थल पर रात 10.20 बजे वहां पहुंचे। गुरुवार की रात को पथराव के दौरान, करीमगंज के एसपी मयंक कुमार को मामूली चोट लग गई और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवा में गोली चलाने का सहारा लेना पड़ा। (आईएएनएस)


26-Mar-2021 2:32 PM 73

सैय्यद मोजिज इमाम जैदी 

नई दिल्ली, 26 मार्च | विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस में गुटबाजी बढ़ गई है और सूत्रों का कहना है कि कई नेताओं के पार्टी से बाहर होने के बाद केरल में कांग्रेस टुकड़ों में बंटी नजर आ रही है।

राज्य में पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी और विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला के बीच बंटी हुई है, लेकिन अब एक और गुट उभरकर सामने आ रहा है जिसका नेतृत्व राहुल गांधी के करीबी और पार्टी के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल कर रहे हैं।

पार्टी के हाई प्रोफाइल नेता पी.सी. चाको और कई अन्य नेताओं के जाने के बाद गुटबाजी साफ नजर आ रही है। हालांकि, सोनिया गांधी के समय पर हस्तक्षेप करने के कारण पूर्व केंद्रीय मंत्री के.वी. थॉमस पार्टी में रुक गए गए। सूत्रों का कहना है कि मामला अभी भी खत्म नहीं हुआ है और यदि पार्टी चुनाव हारती है तो इसकी वजह गुटबाजी ही होगी।

सूत्रों का कहना है कि वेणुगोपाल के बढ़ते दबदबे से पार्टी के नेता खफा हैं, क्योंकि उन्होंने पर्यवेक्षकों और स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्यों के जरिए उम्मीदवारों के नाम आगे बढ़ाने की कोशिश की। लिहाजा बाद में सोनिया गांधी ने हस्तक्षेप करके मामले को सुलझाया।

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस महासचिव तारिक अनवर इस तनाव को दूर करने और विधानसभा चुनाव में पार्टी को एलडीएफ के खिलाफ एकजुट रखने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी खुद भी खासतौर पर इस राज्य पर ध्यान दे रहे हैं। अगले हफ्ते वे 2 दिन तक यहां प्रचार भी करेंगे और राज्य के नेताओं से मिलेंगे। जाहिर है कांग्रेस राज्य में वापसी करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है और पार्टी इसके लिए मजबूत चेहरा सामने रख रही है। चूंकि राहुल गांधी वायनाड से सांसद भी हैं इसलिए भी इन चुनावों में कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर है।

वैसे पूर्व मुख्यमंत्री ए.के. एंटनी के समर्थक उन्हें मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर आगे ला रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह इस दौड़ में नहीं हैं। उन्होंने साफ कह दिया है, "राज्यसभा में मेरा कार्यकाल अगले साल पूरा हो रहा है और उसके बाद मैं तिरुवनंतपुरम लौटने की योजना बना रहा हूं। मैंने साफ कर दिया है कि मेरा राज्य की राजनीति में कोई रोल नहीं है और 2004 में भी मैं यह कह चुका हूं।" हालांकि उन्होंने कहा कि वह राज्य में पार्टी के लिए प्रचार कर रहे हैं और उनके बेटे अनिल के. एंटनी राज्य कांग्रेस के सोशल मीडिया हेड हैं।  (आईएएनएस)
 


25-Mar-2021 7:24 PM 46

कोलकाता, 25 मार्च| गृहमंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के झारग्राम में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि झारग्राम हरे भरे जंगल और लाल मिट्टी की भूमि है। आदिवासी भाइयों ने वर्षों से इस भूमि की संस्कृति संजो कर रखा है। मां, माटी मानुष का नारा देकर दीदी सत्ता में तो आई, लेकिन आपके लिए कुछ नहीं किया। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, "मैं आपके क्षेत्र की कठिनाइयों को जानता हूं, लेकिन कुछ कठिनाई ऐसी हैं जो पूरे बंगाल की है। दीदी जहां जहां घूमती हैं वहां लोगों और निर्दोष आदिवासियों को डराती हैं- खेला होबे, खेला होबे। अरे दीदी आप हमें क्या डराती हो, खेला होबे से हम डर जाएंगे क्या। दीदी आपको मालूम नहीं है, बंगाल का छोटा बच्चा भी फुटबॉल खेलता है, आपके 'खेला होबे' से कोई नहीं डरता।"

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, "पश्चिम बंगाल में आदिवासियों को प्रमाण पत्र चाहिए होता है तो पटवारी को कट मनी देना होता है, हमने तय किया है कि आदिवासियों के लिए ऑनलाइन प्रमाण पत्र की व्यवस्था करके 'कट मनी' को खत्म करेंगे। बंगाल के लिए गरीबों के हक का चावल व गेहूं जो नरेन्द्र मोदी जी भेजते हैं, वो टीएमसी के गुंडे खा जाते हैं। भाजपा सरकार बनने के बाद हम ऐसी व्यवस्था करेंगे कि आपके हक का राशन आपको ही मिले।"  (आईएएनएस)


24-Mar-2021 9:54 PM 57

पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए मतदान कराए जाने में महज कुछ ही समय शेष बचा है. इसी के मद्देनजर चुनावी प्रचार अभियान जोरों पर हैं. इन सबके बीच, एबीपी न्यूज-सी वोटर ने वोटिंग शुरू होने से ठीक पहले एक ताजा सर्वे करवाया है, जिसे उसने फाइनल ओपिनियन पोल बताया है. ओपिनियन पोल के अनुसार, तमिलनाडु में कांग्रेस और एमके स्टालिन के गठबंधन वाली यूपीए की सरकार बनती दिख रही है. सर्वे के मुताबिक, यूपीए को यहां पर 173 से 181 सीटें मिलने का अनुमान है. जबकि, दिवंगत जे जयललिता की पार्टी और बीजेपी के गठबंधन को 45 से 53 सीटें मिल सकती हैं.

वहीं, पुदुचेरी में कांग्रेस की सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही फरवरी महीने में गिर गई. सर्वे के आंकड़े में भी कांग्रेस के लिए चिंता की स्थिति बनी हुई है और पार्टी की सत्ता में वापसी होती नहीं दिख रही है. जबकि, एनडीए को 19 से 23 सीटें मिल सकती हैं और राज्य में उनकी सरकार बन सकती है. कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को 7 से 11 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं अन्य को यहां पर 0-1 सीट मिल सकती है. जबकि, टाइम्स नॉउ-सी-वोटर ओपिनियन पोल के अनुसार पुडुचेरी में एनडीए को 30 में से 21 सीटें मिल सकती हैं, जबकि यूपीए, जिसमें कांग्रेस और डीएमके है, को 9 सीटें मिल सकती हैं.

केरल की बात करे तो यहां एक बार फिर एलडीएफ की सरकार बनती दिख रही है. एलडीएफ को 71 से 83 सीटें मिलने का अनुमान है. इस तरह से राज्य में एक बार फिर एलडीएफ की सरकार बन सकती है. जबकि, यूडीएफ के खाते में 56 से 68 सीटें मिल सकती हैं. बीजेपी को 0 से दो सीटें मिल सकती हैं. केरल में कुल 140 विधानसभा की सीटें हैं. वहीं, टाइम्स नॉउ-सी-वोटर ओपिनियन पोल के अनुसार, केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे को आने वाले चुनाव में जीत मिल सकती है. हालांकि, यहां बीजेपी के वोट शेयर में बढोतरी का अनुमान जताया गया है. इसमें वाम लोकतांत्रिक मोर्चे को केरल की 140 विधानसभा सीटों में से 77 सीटें मिलने का अनुमान है. पांच साल पहले के विधानसभा चुनाव में इसे 91 सीटें मिली थीं.

सर्वे के मुताबिक, असम में एक बार फिर एनडीए की सरकार बन सकती है. राज्य में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 63 है. एनडीए को 65 से 73 सीटें मिल सकती हैं. वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को 52 से 60 सीटें मिलने का अनुमान है. असम में कुल 126 विधानसभा की सीटें हैं. सी वोटर सर्वे के मुताबिक, अन्य को 0-4 सीटें मिल सकती है. (prabhatkhabar.com)


24-Mar-2021 9:50 PM 59

कोलकाता | पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के पहले फेज की वोटिंग होने में महज कुछ दिनों का समय ही बचा हुआ है। इन राज्यों में जिस पर लोगों की सबसे ज्यादा नजरें हैं, वह पश्चिम बंगाल है। बंगाल में 27 मार्च से वोटिंग शुरू होने जा रही है, जोकि 29 अप्रैल तक चलेगी। बंगाल में ममता बनर्जी तीसरी बार सत्ता में वापसी की आस लगाए बैठी हैं, तो वहीं, बीजेपी राज्य में 200 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करने का दावा कर रही है। हालांकि, ओपिनियन पोल्स की मानें तो इस बार बीजेपी राज्य में सत्ता हासिल करने से काफी दूर रह सकती है। एबीपी न्यूज-सी वोटर ने वोटिंग शुरू होने से ठीक पहले एक ताजा सर्वे करवाया है, जिसे उसने फाइनल ओपिनियन पोल बताया है। ओपिनियन पोल के अनुसार, राज्य में एक बार फिर से ममता बनर्जी हैट्रिक बनाने जा रही हैं। मालूम हो कि बीते दिन एबीपी न्यूज ने एक और सर्वे एजेंसी सीएनएक्स के साथ मिलकर सर्वे किया था, जिसमें ममता बनर्जी को तगड़ा झटका लगता दिखाई दे रहा था।

'फाइनल' आपेनियिन पोल में ममता बनर्जी की बल्ले-बल्ले
एबीपी न्यूज-सी वोटर के 'फाइनल' ओपिनियन पोल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) बंगाल में बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार करते हुए दिखाई दे रही है। राज्य की विधानसभा में 294 सीटें हैं और बहुमत का आंकड़ा 148 का है। ओपिनियन पोल के अनुसार, टीएमसी को इस बार 152-168 सीटें तक मिल सकती है। इस लिहाज से आसानी से ममता बनर्जी राज्य में सरकार बनाने वाली हैं। वहीं, बीजेपी एक बार फिर से 100 का आंकड़ा ही पार करती हुई दिखाई दे रही है। सर्वे में बीजेपी को 104-120 सीटें जीतने का अनुमान लगाया गया है। उधर, कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन 18-26 सीटें जीत सकता है, जबकि अन्य को 0-2 सीटें मिल सकती हैं।

किसे कितने फीसदी वोट का अनुमान?
पिछले लोकसभा चुनाव में बंगाल में 18 सीटें जीतकर सभी को चौंका चुकी बीजेपी इस बार राज्य में बड़ी जीत दर्ज करने का दावा कर चुकी है। हालांकि, अब जब फाइनल ओपिनियन पोल में टीएमसी की तीसरी बार सरकार बनाने का अनुमान जताया जा रहा है, तो अब लोगों की नजरें वोट फीसदी पर टिक गई हैं। सी वोटर के इस सर्वे के अनुसार, टीएमसी वोट फीसदी में बाजी मार सकती है। टीएमसी को इस बार 42 फीसदी वोट मिल सकता है, जबकि बीजेपी 37 फीसदी मतों पर ठहर सकती है। कांग्रेस और लेफ्ट की बात करें तो 13 फीसदी वोट मिल सकते हैं, जबकि अन्य की झोली में 8 फीसदी वोट जाने का अनुमान है।

पिछले ओपिनियन पोल में बीजेपी-टीएमसी की थी टक्कर
पश्चिम बंगाल के लिए किया गया पिछला ओपिनियन पोल एबीपी न्यूज और सीएनएक्स का था, जोकि मंगलवार शाम को जारी हुआ था। इस ओपिनियन पोल में बताया गया था कि बंगाल में बीजेपी को 130 से 140 सीटें तक मिल सकती हैं। ओपिनियन पोल के अनुसार, टीएमसी को 136-146 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। वहीं, कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन को राज्य में 14-18 सीटें दी गई थीं। उधर, अन्य को एक से तीन सीटें तक दी गईं। हालांकि, सी वोटर के साथ किए गए फाइनल ओपिनियन पोल में न्यूज चैनल ने टीएमसी को तीसरी बार सरकार में वापसी का अनुमान जताया है। (livehindustan.com)


17-Mar-2021 10:29 PM 58

लालगुडी. लालगुडी तमिलनाडु का एक विधानसभा क्षेत्र है. विधानसभा चुनाव 2016 में यह निर्वाचन क्षेत्र द्रविड़ मुनेत्र कड़गम द्वारा जीता गया था. तमिलनाडु राज्य के तिरुचिरापल्ली जिले के अंतर्गत लालगुडी निर्वाचन क्षेत्र आता है. 2016 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में लालगुडी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं का कुल प्रतिशत 88.59 प्रतिशत दर्ज किया गया था. विधानसभा चुनाव 2021 में यहां वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा जागरुकता अभियान चलाया गया है. मतदाताओं को जागरूक करने के लिए बैनर पोस्ट का इस्तेमाल भी किया गया है. यहां 6 अप्रैल को मतदान और 2 मई को मतगणना होगी.

विधानसभा चुनाव 2016 में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के साउंडरापांडियन ए ने ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के विजयमूर्ति एम को 3837 वोटों के अंतर से हराकर सीट जीती थी. लालगुडी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र पेरम्बलुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है. 2019 के लोकसभा चुनावों में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के उम्मीदवार डॉ शिवरिवेंद्र टी को हराकर जीत हासिल की.


17-Mar-2021 10:10 PM 40

तिरुचिरापल्ली. तिरुचिरापल्ली (पूर्व) तमिलनाडु का एक विधानसभा क्षेत्र है. विधानसभा चुनाव 2016 में यह निर्वाचन क्षेत्र ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम द्वारा जीता गया था. तमिलनाडु राज्य के तिरुचिरापल्ली जिले के अंतर्गत तिरुचिरापल्ली (पूर्व) निर्वाचन क्षेत्र आता है. 2016 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में तिरुचिरापल्ली (पूर्व) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं का कुल प्रतिशत 74.05 प्रतिशत दर्ज किया गया था. विधानसभा चुनाव 2021 में यहां वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा जागरुकता अभियान चलाया गया है. मतदाताओं को जागरूक करने के लिए बैनर पोस्ट का इस्तेमाल भी किया गया है. यहां 6 अप्रैल को मतदान और 2 मई को मतगणना होगी.

विधानसभा चुनाव 2016 में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नटराजन एन ने कांग्रेस के जे आर्किराज को 81894 मतों के अंतर से हराकर सीट जीती थी.  (hindi.news18.com)


16-Mar-2021 10:22 PM 39

दिसंबर से अब तक टीएमसी के कम से कम डेढ़ दर्जन विधायक और नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. पश्चिम बंगाल में बीते दस वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस में असंतोष, बगावत और पलायन का दौरा काफी पहले ही शुरू हो गया था.

    डॉयचे वैले पर प्रभाकर मणि तिवारी की रिपोर्ट- 

पश्चिम बंगाल में बीते दस वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस में तो असंतोष, बगावत और पलायन का दौरा विधानसभा चुनाव के एलान के पहले ही शुरू हो गया था. लेकिन टीएमसी का घर तोड़ कर अपना घर बसाने की कोशिश और राज्य की 294 में से दो सौ सीटें जीतकर सरकार बनाने का दावा करने वाली बीजेपी भी अब इस आग से अछूती नहीं है. पार्टी में उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी होने के बाद से ही राजधानी कोलकाता समेत पूरे राज्य में पार्टी की अंदरूनी कलह सतह पर आ गई है. बाहरी उम्मीदवारों को थोपने से नाराज बीजेपी के पुराने नेताओं व कार्यकर्ताओं ने रविवार रात से ही तमाम इलाको में तोड़-फोड़ और विरोध प्रदर्शन का जो सिलसिला शुरू किया था वह जस का तस है. इस व्यापक असंतोष को ध्यान में रखते हुए ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने दौरे के कार्यक्रम में फेरबदल कर बीजेपी अध्यक्ष और प्रदेश नेताओं के साथ कोलकाता में सोमवार को पूरी रात आपात बैठक की और इस पर काबू पाने के उपायों पर विचार किया. इसबीच, मनोनीत राज्यसभा सदस्य रहते विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारी पर विवाद के बाद स्वपन दासगुप्ता ने मंगलवार को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया.

बीजेपी ने तीसरे और चौथे दौर के सीटों के लिए उम्मीदवारों की जो सूची जारी की है उनमें केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के अलावा लॉकेट चटर्जी, स्वपन दासगुप्ता और निशीथ प्रामाणिक जैसे सांसदों के नाम शामिल थे. उसके बाद ही राजनीतिक हलकों में पूछा जाने लगा कि क्या बीजेपी के पास ढंग के उम्मीदवारों का टोटा हो गया है जो उसे सांसदों को उतारना पड़ रहा है?  उधर, टीएमसी की सूची में बस एक सांसद का नाम है. बीजेपी ने टीएमसी, कांग्रेस और सीपीएम से हाल में आए ज्यादातर दलबदलुओं के अलावा बांग्ला फिल्मोद्योग से जुड़े चार लोगों को भी उम्मीदवार बनाया है.

नाराजगी और विरोध प्रदर्शन

पार्टी की दूसरी सूची जारी होने के बाद रविवार रात से ही हुगली जिले में सिंगुर समेत विभिन्न इलाकों के अलावा कोलकाता स्थित पार्टी के दफ्तरों के सामने भी नाराज बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जम कर हंगामा किया और नारेबाजी की. हुगली में सांसद लॉकेट चटर्जी की उम्मीदवारी के खिलाफ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के दफ्तर में तोड-फोड़ की गई. हावड़ा जिले की पांचला सीट पर स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवार के खिलाफ नाराजगी जताई और पार्टी के दफ्तर में तोड़-फोड़ की. इन लोगों की नाराजगी इस बात से है कि कहीं लाकेट चटर्जी जैसे सांसद को टिकट दे दिया गया है तो कहीं हाल में टीएमसी से आने वाले 89 साल के रबींद्रनाथ भट्टाचार्य समेत दूसरे दलबदलू नेताओं को. दूसरी सूची जारी होने के बाद टीएमसी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी को ढंग के उम्मीदवार तक नहीं मिल रहे हैं.

हुगली के सिंगुर में रबींद्रनाथ भट्टाचार्य को टिकट देने के विरोध में बीजेपी के स्थानीय नेता संजय पांडे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पार्टी के पर्यवेक्षक और मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का घेराव किया और उनको खरी-खोटी सुनाई. असंतुष्ट गुट भट्टाचार्य की उम्मीदवारी वापस लेने की मांग कर रहा है. हुगली के सप्तग्राम में तो एक बीजेपी कार्यकर्ता ने रेलवे की पटरी पर सिर रख कर जान देने की भी कोशिश की. हुगली जिले के चंदन नगर में नाराज बीजेपी कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली और प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ नारे भी लगाए. हुगली जिले के निरुपम भट्टाचार्य तो जान देने के लिए रेल की पटरी पर जाकर सो गए. किसी तरह मना कर उनको वापस लाया गया.

पार्टी दफ्तर में तोड़फोड़

इन लोगों की नाराजगी इस बात से है कि कहीं लॉकेट चटर्जी जैसे सांसद को टिकट दे दिया गया है तो कहीं हाल में टीएमसी से आने वाले 89 साल के रबींद्रनाथ भट्टाचार्य समेत कई दूसरे नेताओं को. हुगली में सांसद लॉकेट चटर्जी की उम्मीदवारी के खिलाफ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के दफ्तर में तोड-फोड़ की है. वहां जिन सुबीर नाग का नाम उम्मीदवारी की होड़ में सबसे ऊपर था उन्होंने तो राजनीति से ही संन्यास ले लिया है. हावड़ा जिले की पांचला सीट पर स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवार के खिलाफ नाराजगी जताई और पार्टी के दफ्तर में तोड़-फोड़ की.  सिंगुर में टीएमसी के निवर्तमान टीएमसी विधायक रबींद्रनाथ भट्टाचार्य की उम्मीदवारी के खिलाफ भी स्थानीय नेता लगातार विरोध जता रहे हैं.

बीजेपी की सिंगुर शाखा के उपाध्यक्ष संजय पांडे कहते हैं, “हम पार्टी नेतृत्व से उम्मीदवार को बदलने की मांग कर रहे हैं. आखिर कितने पैसों का लेन-देन हुआ है? सांसद लॉकेट चटर्जी और प्रदेश अध्यक्ष इसका जवाब दें. रबींद्रनाथ उर्फ मास्टर मोशाय ने सीधे केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क कर पार्टी ज्वाइन की थी. हमने इसे भी स्वीकार कर लिया. लेकिन अब उनको उम्मीदवार बनाना हमें मंजूर नहीं है.” पांडे कहते हैं कि उनकी उम्र 89 साल है जबकि पार्टी अस्सी से ऊपर वालों को टिकट नहीं देने की बात कहती रही है. क्या वे लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से भी बड़े कद के नेता हैं?”

टिकट न मिलने पर बगावत

हुगली जिले कोन्ननगर में बीजेपी के संभावित उम्मीदवार रहे बीजेपी नेता कृष्णा भट्टाचार्य ने तो निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला किया है. उस सीट पर टीएमसी से आए प्रबीर घोषाल को टिकट दिया गया है. कोलकाता में बीजेपी के सांसद अर्जुन सिंह को भी कार्यकर्ताओं की नाराजगी का शिकार होना पड़ा. बैरकुर के बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह को भी कार्यकर्ताओं की नाराजगी का शिकार होना पड़ा. अर्जुन सिंह कहते हैं, “हमने राज्य की सभी विधानसभा सीटों के बारे में स्थानीय नेताओं की शिकायतें सुनी हैं. हम अपनी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेज रहे हैं. अगर शिकायत सही हुई तो इस पर विचार किया जाएगा.”

बीजेपी की एक पुरानी नेता तंद्रा भट्टाचार्य कहती हैं, “उम्मीदवारों के चयन के पीछे की दलील गले से नीचे नहीं उतर रही है.” दक्षिण 24-परगना जिले में भी उम्मीदवारों के चयन पर असंतोष पनप रहा है. लेकिन प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता शमीक भट्टाचार्य कहते हैं,  “पूरे राज्य में कोई विरोध नहीं है. कुछ जगहों पर लोगों ने असंतोष जाहिर किया है. पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी की नीतियों से आकर्षित होकर बहुत से लोगों ने पार्टी का दामन थामा है और यह पश्चिम बंगाल में असली बदलाव का संकेत है.”

सभी पार्टियों के दलबदलू बीजेपी में

बीजेपी ने अब तक कम से कम एक दर्जन दलबदलुओं को टिकट दिए हैं. इनमें टीएमसी के अलावा सीपीएम और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता शामिल हैं. वर्ष 2016 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने तीन सीटें जीती थीं. उनमें से एक खड़गपुर सदर सीट थी जहां प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष जीते थे. लेकिन उनके वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव में जीत के बाद खाली खड़गपुर सीट उपचुनाव में टीएमसी ने जीत ली थी. इसके अलावा बीजेपी को मालदा में दो सीटें मिली थीं. फिलहाल 2019 के बाद उसके दो विधायक ही थे. खड़गपुर सदर सीट पर इस बार बांग्ला अभिनेता हिरणमय चटर्जी को उम्मीदवार बनाया गया है. हिरणमय भी इसी साल फरवरी में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे.केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को उनके समर्थन में वहां एक रोड शो किया था.

दिलचस्प बात यह है कि टीएमसी समेत दूसरे दलों से बीजेपी में शामिल होने वाले ज्यादातर नेताओं के वाई, एक्स या जेड कटेगरी की सुरक्षा मुहैया कराई गई है. ऐसे लोगों में शुभेंदु अधिकारी के अलावा जितेंद्र तिवारी, हिरणमय चटर्जी, सीपीएम विधायक अशोक डिंडा, टीएमसी विधायक वनश्री माइती, कांग्रेस विधायक सुदीप मुखर्जी, गाजोल की टीएमसी विधायक दीपाली विश्वास, जगमोहन डालमिया की पुत्री वैशाली डालमिया, टीएमसी विधायक सैकत पांजा, विश्वजीत कुंडू और शीलभद्र दत्त के अलावा सीपीएम विधायक तापसी मंडल शामिल हैं.

तृणमूल में भी असंतोष

विधानसभा चुनावों का टिकट नहीं मिलने की वजह से टीएमसी के पूर्व विधायकों में भी नाराजगी है. उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद कम से कम सात नेता बीजेपी में शामिल हो गए हैं. इनमें कभी ममता बनर्जी की करीबी रहीं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सोनाली गुहा भी शामिल हैं. अब सोमवार को दो बार विधायक रहीं अभिनेत्री देवश्री राय ने भी टीएमसी से इस्तीफा दे दिया है. इसके अलावा कुछ उम्मीदवार निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतर गए हैं तो कुछ अब भी बीजेपी से टिकट की आस लगाए बैठे हैं.

बीते साल दिसंबर से अब तक टीएमसी के कम से कम डेढ़ दर्जन विधायक और नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. इनमें से शुभेंदु अधिकारी पर नारदा स्टिंग मामले में पैसे लेने के आरोप हैं. राजनीतिक पर्यवेक्षक प्रोफेसर सुकुमार पाल कहते हैं, “बीजेपी ने पहले टीएमसी के घर में सेंध लगाई. अब उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. असंतोष की आग उसके घर तक पहुंच गई है. इसका चुनावों पर थोड़ा-बहुत असर पड़ना लाजिमी है.” (dw.com)


15-Mar-2021 9:27 PM 78

ABP News-C Voter Opinion Poll: पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, पुदुचेरी और केरल समेत पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं. इन पांच राज्यों में से सबसे ज्यादा चर्चा में पश्चिम बंगाल है. राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी एक बार फिर सत्ता में वापसी के दावे कर रही हैं तो वहीं पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित बीजेपी चुनाव प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ रही. बीजेपी का भी दावा है कि वो तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर देगी.


राज्य में लेफ्ट के साथ गठबंधन करने वाली कांग्रेस भी चुनौती दे रही है. ऐसे में सभी के मन में एक ही सवाल है कि इस बार बंगाल की सत्ता पर कौन काबिज होगा. बंगाल चुनाव को लेकर एबीपी न्यूज़ के लिए सी वोटर ने ओपिनियन पोल (West Bengal Opinion Poll) किया है. जानिए राज्य में इस बार किसको कितनी सीटें मिल सकती हैं.

ओपिनियन पोल के मुताबिक-
तृणमूल कांग्रेस को 150 से 166 सीटें
बीजेपी को 98 से 114
कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन को 23 से 31
और अन्य को तीन से पांच सीटें मिल सकती हैं.
यानी पश्चिम बंगाल में तीसरी बार ममता बनर्जी की सरकार बन सकती है. वहीं बीजेपी को और इंतजार करना पड़ सकता है. हालांकि, पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले बीजेपी के प्रदर्शन में जबरदस्त इजाफा होता दिख रहा है. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी तीन सीटें जीतने में ही कामयाब हो पाई थी.

पश्चिम बंगाल के वोट प्रतिशत
पश्चिम बंगाल में पिछली बार यानी 2016 में टीएमसी को 44.9 प्रतिशत वोट मिले थे. ऐसा अनुमान है कि इस बार ये वोट डेढ़ प्रतिशत कम होकर 43.4% रह सकते हैं. बीजेपी को बहुत अच्छा फायदा दिख रहा है. पिछली बार 10.2% वोट मिले थे, जो इस बार बढ़कर 38.4% होने का अनुमान है. यानी 28.2% का फायदा होता दिख रहा है.

कांग्रेस और लेफ्ट के गठबंधन को सबसे ज्यादा नुकसान दिख रहा है. पिछली बार इन्हें 37.9% वोट मिले थे, इस बार 12.7% ही मिलने का अनुमान है, यानी माइनस 25.2% का नुकसान है. जबकि अन्य को पिछली बार 7 प्रतिशत वोट मिले थे, इस बार साढ़े 5 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है.

बंगाल में किस चरण में कितनी सीटों पर चुनाव?
पहले चरण में पश्चिम बंगाल की 294 में से 30 सीटों पर 27 मार्च को वोट डाले जाएंगे. वहीं, दूसरे चरण में 30 सीटों पर एक अप्रैल को, तीसरे चरण में 31 सीटों पर 6 अप्रैल को, चौथे चरण में 44 सीटों पर 10 अप्रैल को, पांचवे चरण में 45 सीटों पर 17 अप्रैल को, छठे चरण में 43 सीटों पर 22 अप्रैल को, सातवें चरण में 36 सीटों पर 26 अप्रैल को और आठवें चरण में 35 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. नतीजों की घोषणा दो मई को होगी.

बंगाल की वर्तमान स्थिति
बंगाल में वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस की सरकार है और ममता बनर्जी मुख्यमंत्री हैं. पिछले चुनाव में ममता की टीएमसी ने सबसे ज्यादा 211 सीटें, कांग्रेस ने 44, लेफ्ट ने 26 और बीजेपी ने मात्र तीन सीटों पर जीत दर्ज की थी. जबकि अन्य ने दस सीटों पर जीत हासिल की थी. यहां बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिए. (abplive.com/news)


14-Mar-2021 7:22 PM 55

कोलकाता, 14 मार्च| पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजकीय एसएसकेएम अस्पताल से छुट्टी मिलने के एक दिन बाद, रविवार को अपने भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ यहां पांच किलोमीटर लंबा रोड शो किया। रोड शो के दौरान ममता व्हीलचेयर से चलीं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने 'नंदीग्राम दिवस' मनाने के लिए मेयो रोड से 5 किलोमीटर लंबा रोड शो का आयोजन किया।

रोड शो में ममता व्हीलचेयर पर सबसे आगे चलीं और उनके पीछे सैकड़ों लोगों और अन्य तृणमूल नेताओं का समूह चला। इस दौरान ममता ने कहा कि उन्हें बंगाल के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने से कोई रोक नहीं पाएगा।

उन्होंने कहा, "हम निर्भीकता से लड़ते रहेंगे। मैं अभी भी बहुत दर्द में हूं, लेकिन मुझे अपने लोगों का दर्द और भी अधिक महसूस हो रहा है।"

ममता ने कहा कि श्रद्धेय भूमि की रक्षा के लिए इस लड़ाई में वह इस व्हीलचेयर पर ही बंगाल के चारों ओर घूमना जारी रखेंगी। उन्होंने कहा, "अगर मैं बिस्तर पर आराम करने चली जाऊं तो कौन लोगों तक पहुंच पाएगा .. हमें बहुत नुकसान हुआ है और हम और अधिक पीड़ित होंगे, लेकिन हम कायरता के आगे कभी नहीं झुकेंगे।" उन्होंने कहा, उनका लक्ष्य चोट और अस्वस्थ होने के बावजूद मजबूत है।

रोड शो के दौरान अभिषेक बनर्जी ने लोगों से वामपंथी-कांग्रेस-आईएसएफ महागठबंधन के लिए वोट न करने की अपील की। वहीं, ममता ने कहा, "बंगाल में बाहरी लोग सत्ता में नहीं आ पाएंगे। हम एक टूटे हुए पैर के सहारे चुनाव जीतेंगे और एक बार फिर नबान्नो लौटेंगे।"

ममता बनर्जी को बुधवार की शाम पूर्वी मिदनापुर के नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान कार से निकलते ही पैर में चोट लग गई थी। उन्हें ग्रीन चैनल के माध्यम से उसी रात कोलकाता ले जाया गया और राजकीय एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। ममता को शुक्रवार की शाम अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

अपने अभियान के कार्यक्रम के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को सोमवार से तीन जिलों - पुरुलिया, बांकुरा और झारग्राम का दौरा करना है। सूत्रों ने कहा कि ममता इन सभी जिलों की यात्रा हेलीकॉप्टर से करेंगी, लेकिन यात्रा के दौरान व्हीलचेयर पर बैठी रहेंगी, क्योंकि उनके पैर की चोट अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है।  (आईएएनएस)


14-Mar-2021 7:05 PM 19

नई दिल्ली/गुवाहाटी, 14 मार्च | असम में सत्तारूढ़ भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के आक्रामक अभियान में, कांग्रेस कई वादे कर रही है। इसमें से सबसे प्रमुख वादे -पांच लाख स्थानीय लोगों को नौकरी देना और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को राज्य में लागू नहीं होने देना है। वादों को 'गारंटी' कहते हुए, कांग्रेस भाजपा को सत्ता से हटाने और सत्ता में वापस आने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

असम में कांग्रेस के प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा, "यह चुनाव असम को बचाने के लिए, असम की महिलाओं को बचाने के लिए, युवाओं को रोजगार देने के लिए और विशेष रूप से राज्य की संस्कृति को बचाने के लिए है।"

कांग्रेस ने सत्ता में आने पर असम के लिए पांच 'गारंटी' दी हैं।

पहला नागरिकता संशोधन अधिनियम है। कांग्रेस ने कहा कि वे सुनिश्चित करेंगे कि सीएए असम में लागू न हो।

अन्य गारंटियों में शामिल हैं - 200 यूनिट मुफ्त बिजली, गृहणियों को 2,000 रुपये प्रति माह, चाय बगान मजदूरों का न्यूनतम वेतन 365 रुपए प्रतिदिन और राज्य में पांच लाख नौकरियां पैदा करना।

कांग्रेस अपनी सार्वजनिक बैठकों में बता रही है कि पार्टी राज्य में कैसे 5 लाख सरकारी नौकरियों की गारंटी देगी, क्योंकि इससे राज्य में लोगों के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी असम में भी प्रचार कर रहे हैं।

वह गुजरात मॉडल का मुकाबला करने के लिए असम में अपने राज्य के मॉडल का वर्णन कर रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर रविवार को डिब्रूगढ़ में निशाना साधा। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि राज्य में आखिर सरकार कौन चला रहा है, सर्बानंद सोनोवाल या हेमंत बिस्वा सरमा।

बघेल ने आरोप लगाया कि 'सिंडीकेट असम में सरकार चला रहे हैं, कोयला-रेत-सुपारी- गौ तस्करी सिंडिकेट राज्य में हैं, और सरकार उनकी रक्षा कर रही है।

कांग्रेस ने अब तक तीन चरण के असम विधानसभा चुनावों के लिए प्रचारकों की लिस्ट जारी की है, जिसमें पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, व अन्य शामिल हैं।

प्रियंका गांधी वाड्रा ने पिछले सप्ताह दो दिनों के लिए राज्य का दौरा किया था, और असम के चाय बागानों के श्रमिकों से मिलने के अलावा कुछ सार्वजनिक रैलियों को संबोधित किया था।

आने वाले दिनों में वह फिर से राज्य का दौरा करने वाली हैं।

कांग्रेस ने असम में एआईयूडीएफ, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ), सीपीआई, सीपीआई (एम), सीपीआई (एमएल), आंचलिक गण मोर्चा (एजीएम) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को मिलाकर एक महागठबंधन बनाया है।

126 सदस्यीय सदन के लिए चुनाव 27 मार्च, 1 अप्रैल, 6 अप्रैल को होगा। मतगणना 2 मई को होगी। (आईएएनएस)


14-Mar-2021 12:43 PM 49

-उत्तर दिनाजपुर की प्रमुख सीट पर तृणमूल कांग्रेस ने निवर्तमान विधायक अब्दुल करीम चौधरी को दिया टिकट
   -लोकसभा चुनाव में रायगंज से मिली जीत से भाजपा समर्थक उत्साहित  
- वाममोर्चा-कांग्रेस में असमंजस बरक़रार 

बिकास के शर्मा
इस्लामपुर, 14 मार्च।
अलुवाबाड़ी रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही बाबाई नामक टोटो चालक हमें मिल जाता है। लोहार पट्टी जाने के लिये निर्धारित किराया दस रुपये प्रति सवारी है। कुछ देर रुकने पर उसे चार और लोग मिल जाते हैं और इस प्रकार टोटो आगे बढ़ जाता है। कुल दो किलोमीटर के रास्ते को तय करने में सात-आठ मिनट लगते हैं और हम लोहापट्टी के श्री राम मंदिर के सामने उतर जाते हैं। उतरते वक्त वह कहता है- दादा मोने राखबेन तो, एबार पोरिबोर्तन (भईया, याद रखियेगा अबकी बार परिवर्तन होगा)। विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही इस्लामपुर में यूं तो राजनीतिक पारा बढ़ना शुरू हो गया था किंतु सत्ताशीन तृणमूल कांग्रेस द्वारा प्रार्थी घोषणा के साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। साथ ही भाजपा एवं वाम-कांग्रेस नेताओं को अभी पार्टी आलाकमान द्वारा प्रार्थी दिए जाने का इंतजार है। टीएमसी समर्थक एवं निजी बस अड्डे पर एजेंट के रुप में कार्य करने वाले सपन बैरागी ने कहा कि इस्लामपुर बस टर्मिनस का नवनिर्माण हो अथवा शहर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की स्थापना, सभी काम तृणमूल कांग्रेस के शासन में ही हुए हैं।

इस सीट से निवर्तमान विधायक अब्दुल करीम चौधरी को ही तृणमूल कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है। श्री चौधरी की पकड़ शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में काफी है। श्री चौधरी ने कहा कि इस्लामपुर आज उत्तर दिनाजपुर सबसे चर्चित एवं विकसित शहर है, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विजन का काफी योगदान है। भाजपा के बढ़ते वोट बैंक के बारे में उन्होंने प्रतिक्रिया दी कि लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के समीकरण अलग-अलग होते हैं। इस्लामपुर की जनता तृणमूल कांग्रेस को ही वोट देकर भारी बहुमत से जिताएगी।

तृणमूल की एक चुनावी सभा

लोहार पट्टी की रहने वाली सोनू कुमारी ने बताया कि इस्लामपुर शहर में उनके मोहल्ले सहित कुछ ही इलाके होंगे जिनमें सड़क ख़राब है अन्यथा पूरे नगर में सडकों की हालत बेहतर है। उन्होंने कहा कि क्यों कि लोहारपट्टी एक बाजार मार्किट क्षेत्र है और रोजाना हजारों की तादात में दूर दराज से लोग यहाँ जरुरत का सामना खरीदने एवं बेचने आते हैं तो इसलिए भी इसका रखरखाव शायद नहीं हो पता होगा किंतु नेताओं को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

पहले बिहार में था क्षेत्र
उत्तर दिनाजपुर जिले में पड़ने वाला इस्लामपुर विधानसभा क्षेत्र रायगंज लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत आता है। साल 2016 के चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार इस विधानसभा में कुल एक लाख 90 हजार मतदाता हैं। 1951 के चुनाव में यह इलाका बिहार अंतर्गत आता था किंतु वर्ष 1977 में यह पश्चिम बंगाल विधानसभा के अंतर्गत शामिल हुआ। 1977 में अब्दुल करीम चौधरी ने निर्दलीय चुनाव जीता था। उसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी।

वर्तमान तृणमूल प्रार्थी का शुरू से दबदबा
तृणमूल कांग्रेस ने वयोवृद्ध नेता अब्दुल करीम चौधरी को इस्लामपुर से 2021 के चुनाव में टिकट दिया है। श्री चौधरी के वर्चस्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1977 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद आज तक वे कुल सात बार विधायक चुने गए। वर्ष 1987 और 2006 के चुनावों में उन्हें माकपा के मो फ़ारुक़ ने पराजित किया था। वहीँ साल 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल और कांग्रेस के बीच में गठबंधन प्रत्याशी के रूप में वे जब खड़े हुए तो कांग्रेस के बागी उम्मीदवार एवं वर्तमान तृणमूल के जिलाध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल ने उनके खिलाफ निर्दलीय से पर्चा भरा। वह चुनाव भी श्री चौधरी जीत गए किन्तु 2016 के चुनाव में कांग्रेस प्रार्थी श्री अग्रवाल ने श्री चौधरी को 7718 मतों से हराया था। श्री अग्रवाल ने 2019 में विधायक पद से इस्तीफा दिया और तृणमूल कांग्रेस का झंडा थामा। उन्होंने रायगंज सीट से चुनाव भी लड़ा किंतु हार गए। 2019 में विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल ने पुनः श्री चौधरी को टिकट दिया और उन्होंने भाजपा उम्मीदवार डॉ सौम्यरूप मंडल को साढ़े 21 हजार मतों से पराजित किया। विशेषकर ग्रामीण इलाकों में श्री चौधरी की काफी पकड़ मानी जाती है। 

लोकसभा चुनाव में चली मोदी लहर, भाजपा के हौसले बुलंद
साल 2019 के संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर का असर पूरे उत्तर बंगाल के साथ-साथ रायगंज सीट पर भी हुआ। भाजपा की देबश्री चौधरी ने यहाँ से तृणमूल कांग्रेस प्रार्थी कन्हैया लाल अग्रवाल को 60574 पराजित किया था। भाजपा को कुल 41 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे वहीँ तत्कालीन माकपा सांसद मो सलीम को केवल 14 प्रतिशत लोगों ने ही मत दिया था। सुश्री चौधरी को भाजपा को विस्तार देने के उद्देश्य से सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री भी बनाया गया था। लोकसभा चुनाव में हुई जीत के बाद से ही रायगंज सहित इस्लामपुर में भाजपा ने अपने संगठन को बढ़ाने में सक्रियता दिखाई, जिसका नतीजा 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रार्थी को इस्लामपुर से 56141 मतों के रूप में मिला। इसके बाद से ही भाजपा समर्थकों का हौसला काफी बुलंद है। पार्टी के जिलाध्यक्ष विश्वजीत लाहिड़ी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में राज्य सरकार ने इस्लामपुर में कोई काम नहीं किया है, जिसके फलस्वरूप पिछले चुनाव में हमें 50 हजार से ज्यादा लोगों ने समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा निष्पक्ष चुनाव चाहती है जबकि तृणमूल कांग्रेस इलाके में मतदाताओं को डरा-धमकाकर वोट लेना चाहती है। इस्लामपुर सीट ही नहीं उत्तर दिनाजपुर की सभी सीटों पर भाजपा प्रार्थियों की जीत होगी। भाजपा की ओर से प्रार्थी की घोषणा 14 मार्च को दूसरी सूची में हो सकती है।

वामो-कांग्रेस खेमे में सक्रियता कम
इस्लामपुर सीट से अभी तक वाममोर्चा, कांग्रेस एवं आईएसएफ गठबंधन की ओर से प्रार्थी निर्धारित नहीं होने से इलाके के समर्थकों में मायूसी देखी जा रही है। सूत्रों की मानें तो आईएसएफ प्रमुख एवं फुरफुरा शरीफ अब्बास सिद्दीकी ने इस्लामपुर सीट में मुस्लिमों के संख्याबल को आधार बनाकर उनके दल की ओर से प्रार्थी देने की मांग की है, किंतु उत्तर दिनाजपुर के चाकुलिया सीट से फॉरवर्ड ब्लॉक विधायक अली इमरान रम्जा ने स्पष्ट कह दिया है कि फुरफुरा शरीफ का उत्तर बंगाल में कोई जनाधार नहीं है। गठबंधन में खींचतान को लेकर इस्लामपुर के एक स्थानीय माकपा नेता ने कहा कि जब तक प्रार्थी की घोषणा नहीं होती, तब तक चुनावी प्रचार शुरू करना संभव नहीं है। 2019 के विधानसभा उपचुनाव में माकपा ने शक्तिप्रकाश गुहा नियोगी को टिकट दिया था, उन्हें केवल 5128 मत प्राप्त हुए थे। आंकड़ों का अध्ययन करने पर ज्ञात होता है कि माकपा का वोट प्रतिशत कम होने से भाजपा के वोटों में वृद्धि हुई है।


इस्लामपुर बस टर्मिनस का एरियल व्यू

 

 


13-Mar-2021 9:46 PM 33

कोलकाता, 13 मार्च| पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सोमवार से व्हीलचेयर पर अपने चुनाव अभियान की शुरूआत करेंगी। इस सप्ताह के शुरू में पूर्वी मिदनापुर के नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान लगी चोटों का इलाज कराने के बाद तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो को शुक्रवार शाम को राज्य के एसएसकेएम अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

वह पहली बार पुरुलिया जिले का दौरा करेंगी, जहां तृणमूल प्रमुख दो जनसभाओं को संबोधित करने वाली हैं - एक बाघमंडी के झालदा इलाके में और दूसरी बलरामपुर के रथतला मैदान में।

अपने पहले अभियान कार्यक्रम के अनुसार, वह दो अन्य जिलों-बांकुड़ा और झारग्राम का दौरा करेंगी। 

सूत्रों ने कहा कि सीएम हेलीकॉप्टर से इन सभी जिलों की यात्रा करेंगे, लेकिन वह व्हीलचेयर पर बैठे रहेंगी, क्योंकि उनके पैर में लगी चोट पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है।

बनर्जी को बुधवार शाम नंदीग्राम में एक चुनाव प्रचार के दौरान पैर में चोट लग गई थी।  (आईएएनएस)


12-Mar-2021 1:17 PM 19

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक कथित हमले में चोट लगने के बाद बंगाल की राजनीति में तनाव बढ़ गया है. ममता की तृणमूल पार्टी के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं तो विपक्षी दल मामले की जांच की मांग कर रहे हैं.

      डॉयचे वैले पर प्रभाकर मणि तिवारी की रिपोर्ट- 

पश्चिम बंगाल में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस और उसे चुनौती देने वाली बीजेपी के बीच कड़वाहट तो विधानसभा चुनावों के बहुत पहले से ही बढ़ने लगी थी. लेकिन अब बुधवार को अपना नामांकन पत्र दायर करने नंदीग्राम पहुंची मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कथित हमले के बाद राज्य की राजनीति में अचानक उबाल आ गया है. इस घटना के खिलाफ तृणमूल के नेताओं ने बृहस्पतिवार को जहां चुनाव आयोग से मिल कर शिकायत की और जांच की मांग की, वहीं पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने इस कथित हमले के विरोध में राज्य के विभिन्न हिस्सों में जुलूस निकाला, हाइवे पर रास्ता रोका और रेलवे की पटरियों पर धरना दिया.

दूसरी ओर, बीजेपी के एक प्रतिनिधमंडल ने भी चुनाव आयोग से मिल कर घटना की जांच कराने की मांग की है ताकि हकीकत सामने आ सके. ममता और उनकी पार्टी के तमाम नेताओं ने जहां इसे सुनियोजित साजिश के तहत किया गया हमला करार दिया है वहीं बीजेपी, सीपीएम और कांग्रेस ने इस नौटंकी और पाखंड बताया है. इस घटना से सिर्फ एक दिन पहले राज्य के पुलिस महानिदेशक को बदलने के आयोग के फैसले पर भी सवाल उठने लगे हैं.

बंगाल पर बीजेपी की निगाह
बीते लोकसभा चुनावों में कामयाबी के बाद ही बीजेपी की निगाहें विधानसभा चुनावों पर लगी थी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तमाम नेता इस बार दौ सौ से ज्यादा सीटें जीत कर सरकार बनाने के दावे करते रहे हैं. बीजेपी ने अपना चुनावी नारा भी यही दिया है कि अबकी बार दो सौ पार. लेकिन अपने इस सपने को पूरा करने के लिए पार्टी ममता बनर्जी की पार्टी के दलबदलुओं का ही सहारा ले रही है.

बीते दिसंबर में अमित शाह की बांकुड़ा रैली के दौरान शुभेंदु अधिकारी समेत करीब एक दर्जन विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे. शुभेंदु को हाल तक ममता बनर्जी का दाहिना हाथ माना जाता था. वर्ष 2016 में नंदीग्राम विधानसभा सीट से जीतने वाले शुभेंदु अधिकारी की वर्ष 2007 के उस नंदीग्राम आंदोलन में काफी अहम भूमिका रही है जहां से टीएमसी के सत्ता में पहुंचने का राह निकली थी. वैसे भी अधिकारी परिवार का पूर्व मेदिनीपुर और आसपास के जिलों में काफी रसूख है. शुभेंदु के पिता शिशिर अधिकारी और एक भाई दिब्येंदु अधिकारी अब भी टीएमसी के ही टिकट पर सांसद हैं. यही शुभेंदु ममता के खिलाफ नंदीग्राम सीट से चुनावी मैदान में हैं.

दलबदलुओं को टिकट देने पर नाराजगी
तृणमूल के नेताओं को तोड़ कर अपने पाले में शामिल करने की बीजेपी की रणनीति अब तक जारी है. पार्टी के उम्मीदवारों की सूची के एलान के बाद अब तक कम से कम सात ऐसे पूर्व विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी का दामन थाम लिया है जिनको टिकट नहीं मिला है. इनके अलावा एक उम्मीदवार ने तो सीट पसंद नहीं आने की वजह से तृणमूल से नाता तोड़ लिया और बीजेपी खेमे में चली गईं. हालांकि ममता इन दलबदलुओं को तरजीह देने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना था, "उम्मीदवारों की सूची तैयार करने में मंत्रियों और पूर्व विधायकों के कामकाज को ध्यान में रखा गया है. असंतुष्ट नेताओं के लिए बाहर जाने का दरवाजा खुला है.”

दलबदलुओं को थोक मात्रा में पार्टी में शामिल करने और उनको टिकट देने पर बीजेपी के स्थानीय नेताओं में भी भारी नाराजगी है. इसे देखते हुए बीच में दलबदलुओं को पार्टी में शामिल करने पर अंकुश लगा दिया गया था. लेकिन अब फिर कई नेताओं को पार्टी में लेने से साफ है कि बीजेपी नेतृत्व इस मामले में गंभीर नहीं था. तृणमूल प्रवक्ता सौगत राय कहते हैं, "बीजेपी उधार के नेताओं के सहारे सत्ता हासिल करने का सपना देख रही है. उसका यह सपना कभी पूरा नहीं होगा. लोग इस पार्टी को भी समझ चुके हैं और टीएमसी से उसमें जाने वाले नेताओं की असलियत भी जान गए हैं.”

वैक्सीन प्रमाणपत्र पर पीएम की तस्वीर
इन दोनों दलों में कोरोना की वैक्सीन के प्रमाणपत्र पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के मुद्दे पर भी कड़वाहट पैदा हो गई. आखिर में टीएमसी के विरोध के बाद चुनाव आयोग को यह निर्देश देना पड़ा कि जिन राज्यों में चुनाव होने हैं वहां ऐसे प्रमाणपत्रों पर मोदी की तस्वीर नहीं होगी. चुनावों के एलान से पहले ही केंद्रीय बलों की सवा सौ कंपनियों को राज्य में भेजने के मुद्दे पर भी टीएमसी और केंद्र की बीजेपी सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज रहा. उसके बाद जब आठ चरणों में चुनाव कराने का ऐलान किया गया तो ममता ने साफ कहा था कि यह कार्यक्रम बीजेपी के स्थानीय दफ्तर में तैयार हुआ है और आयोग ने बीजेपी की उसी सूची पर मुहर लगा दी है.

बीजेपी बंगाल में तृणमूल को कड़ी चुनौती दे रही है
उसके बाद राज्य के कई पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया. लेकिन मंगलावर रात को अचानक पुलिस महानिदेशक वीरेंद्र को हटा कर उनकी जगह नीरज नयन को इस पद पर नियुक्त किया गया. चुनाव आयोग ने अपने पत्र में कहा था कि वीरेंद्र को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चुनाव की कोई जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए. ममता मंगलवार को सुबह ही नंदीग्राम चली गईं थी. वहां बुधवार को सुबह हल्दिया में नामांकन दाखिल करने के बाद शाम को एक मंदिर से लौटते समय कार के दरवाजे से उनको गंभीर चोटें आई हैं. उनके बाएं पांव पर प्लास्टर चढ़ा है और डाक्टरों ने कंधे और गर्दन में भी चोट की बात कही है. उनको 48 से 72 घंटे तक निगरानी में रखा गया है. कल शाम की घटना के बाद उनको ग्रीन कारीडोर के जरिए कोलकाता ले आकर महानगर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएसकेएम में दाखिल कराया गया था. वहां पांच डाक्टरों को लेकर बना मेडिकल बोर्ड उनका इलाज कर रहा है. मूल कार्यक्रम के मुताबिक ममता को आज नंदीग्राम से लौट कर तृणमूल का चुनाव घोषणापत्र जारी करना था. लेकिन फिलहाल उसे स्थगित कर दिया गया है.

ममता को चोट लगने के बाद प्रदर्शन
इस कथित हमले के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं और समर्थको ने जहां पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किया और रैलियां निकाली है वहीं इस मुद्दे पर पार्टी और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गया है. बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने सवाल किया है, "आखिर जेड प्लस सुरक्षा वाली ममता को चोट कैसे लगी? यह हैरत की बात है.” सीपीएम और कांग्रेस ने भी कहा है कि अगर यहां मुख्यमंत्री पर हमला हो सकता है तो कोई भी सुरक्षित नहीं है. इससे राज्य में कानून व व्यवस्था की स्थिति का अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है. कल रात अस्पताल में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर लौट रहे राज्यपाल जगदीप धनखड़ को भी टीएमसी समर्थकों की नाराजगी का सामना करना पड़ा और उनके खिलाफ गो बैक के नारे लगे.

राजनीतिक पर्यवेक्षक विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं, "यह हमला है या हादसा, इसका पता तो जांच से चलेगा. लेकिन अपनी तरह की इस पहली घटना पर अभी कुछ दिनों तक राजनीति गरामाई ही रहेगी. इससे ममता व उनकी पर्टी के चुनाव अभियान पर कितना असर होगा और क्या उनको सहानुभूति लहर का फायदा मिलेगा, इन सवालों का जवाब तो शायद दो मई को चुनाव नतीजे आने के बाद ही मिलेगा.” (dw.com)


07-Mar-2021 9:13 PM 57

नई दिल्ली, 7 मार्च | पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि राज्य के साथ-साथ राज्य के लोगों के भाग्य का फैसला 'बम और गोलियों' से नहीं किया जा सकता। पश्चिम बंगाल के मतदाताओं के लिए एक खुले पत्र में, गंभीर ने बताया कि हाल के दिनों में बम बनाने के कारखानों की कई रिपोर्ट सामने आई हैं।

उन्होंने कहा, "दशकों से वामपंथियों और तृणमूल कांग्रेस द्वारा धमकी, हिंसा को सामान्य बनाया गया है और यह अब बंगाल की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन गया है।"

पूर्वी दिल्ली के भाजपा सांसद गंभीर ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस राज्य में किसी भी विपक्ष को चुप कराने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

"यह बंगाल का लोकाचार नहीं है और मतदाताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए। उन्हें यह तय करना होगा कि वे सिंडिकेट का शासन चाहते हैं या 'सोनार बांग्ला'? वे भाई-भतीजावाद चाहते हैं या योग्यता? वे घुसपैठियों के साथ हैं या हमारे बहादुर जवानों के साथ? वे राज्य में अपराध और भ्रष्टाचार चाहते हैं या परिवर्तन।"

उन्होंने कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टिप्पणी पर दुख हुआ है कि भाजपा 'बाहरी लोगों' की पार्टी है और राज्य में इसका कोई स्थान नहीं है।

"एक पल के लिए भी मुझे यह महसूस नहीं हुआ कि मैं एक बाहरी व्यक्ति हूं और कोलकाता में या बंगाल में नहीं, कहीं और पैदा नहीं हुआ। मुझे यह कभी महसूस नहीं हुआ कि मैंने प्रेसीडेंसी कॉलेज या जादवपुर विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ा या बड़ा होने पर कभी पार्कस्ट्रीट में एगरोल नहीं खाया।"

उन्होंने आगे कहा कि वह हमेशा खुद को इस विशाल और खुशहाल परिवार के एक हिस्से की तरह महसूस करते हैं। राज्य में आने पर हर बार मुझे प्यार और आशीर्वाद मिलता है।

गंभीर ने कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) को दो आईपीएल फाइनल में जीत दिलाई है। राज्य में विशेषकर युवाओं के बीच उनकी बड़ी 'फैन फोलोविंग' है। वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा के स्टार प्रचारकों में से एक हैं।

पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच मतदान होगा। मतों की गिनती 2 मई को होगी।  (आईएएनएस)

 


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