खेल

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    कुरुद, 19 जनवरी। पं. रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर के तत्वावधान में अयोजित अंतर महाविद्यालयीन नेटबांल प्रतियोगिता का आयोजन शासकीय महाविद्यालय भाटापारा बलौदाबाजार में हुआ। जिसमें संत गुरू घासीदास महाविघालय कुरूद ने भाग लिया। 
     कुरूद महाविद्याालय ने विप्र महाविघालय रायपुर  को 13-10 से सेंचुरी सीमेन्ट महाविद्यालय बैकुन्ठ को 15-6 के मुकाबाले हरा कर फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल मैच मेजबान टीम शासकीय महाविद्यालय भाटापारा व संत गुरू घासीदास पीजी कॉलेज कुरूद के मध्य खेला गया। जिसमें कुरूद महाविघालय हार का सामना करते हुए उपविजेता के खिताब पर कब्जा किया। 
    चयनित खिलाड़ी ऑल इण्डिया नेटबॉल प्रतियोगिता में पं.रविशकर विश्वविद्यालय रायपुर प्रतिनिधित्व करेंगे। टीम में अजीत कुमार, कमलेश्वर यादव, शुभम गोस्वामी, योगेश निर्मलकर, डोमेंश साहू ,मुकेश पटेल, हेमशंकर, हितेश कुमार शामिल थे। ये सभी परखंदा के ग्रामीण ़क्षेत्र खेल अभ्यास केन्द्र के खिलाड़ी हैं। इस उपलब्धि पर टीम कोच गोपाल कुमार साहू, मैनेजर अमीत कुमार टण्डन प्रोफेसर महाविद्यालय प्रचार्य ओपी चन्द्राकर, ओम जी गुप्ता, खेल अधिकारी सुधा कुमार ने उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

     

     

     

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    राजनांदगांव, 19 जनवरी। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के क्रीड़ा विभाग द्वारा दो दिवसीय क्रीड़ा प्रतियोगिता के अंतर्गत पहले दिन छात्र एवं छात्राओं के लिए स्लो सायकल रेस, एक मिनट में रस्सी कूद, कुर्सी दौड़ तथा पासिंग बाल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. आरएन सिंह द्वारा किया गया।
    सभी प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं ने भारी संख्या में हिस्सा लिया। छात्र वर्ग में कुर्सी दौड़ में प्रथम गीतेश साहू बीए द्वितीय तथा द्वितीय सोनल मिश्रा बीए द्वितीय ने प्राप्त किया। छात्रा वर्ग में गोदावरी साहू एमएससी गणित तथा द्वितीय स्थान नेहा झा एमएससी बायोटेक, एक मिनट रस्सीकूद में छात्र वर्ग में पलेशराम बीएससी प्रथम तथा द्वितीय मोहित कुमार योगा, छात्राओं में प्रथम कविता सिन्हा एमए अंग्रेजी तथा द्वितीय उषा सिन्हा बीएससी द्वितीय रहे। पासिंग बाल में छात्रा वर्ग में प्रीति साहू प्रथम तथा संतोषी सहारे ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। छात्र वर्ग में गोपाल साहू प्रथम तथा लीलाधर पटेल द्वितीय स्थान प्राप्त किए।
     क्रीड़ा गतिविधियां क्रीड़ाधिकारी अरुण चौधरी के मार्गदर्शन में संपन्न कराया गया। प्रतियोगिता को संपन्न कराने में क्रीड़ा संयोजक डॉ. शैलेन्द्र सिंह, डॉ. एचएस भाटिया, डॉ. एचएस अलरेजा, डॉ. केएन प्रसाद, दीपक कुमार परगनिहा, रजिस्ट्रार प्रो. हिरेन्द्र ठाकुर, प्रो. त्रिलोक देव, प्रो. डाकेशवर वर्मा, प्रो. युनूस रजा बेग, दिव्या पवार, लीलाधर साहू, आशीष मंडले, प्रो. माजीद अली, रामअवतार, शरद तिवारी, अमर वर्मा, सुनील सिंह ठाकुर, रामू पाटिल तथा स्टॉफ के समस्त कर्मचारियों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

     

     

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    भिलाई नगर, 19 जनवरी। छत्तीसगढ़ पॉवर लिफ्टिंग टीम ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता इंदौर में बेहतर प्रदर्शन किया। वेस्ट जोन राष्ट्रीय पॉवरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ टीम की महिला पॉवर लिफ्टर बिजली बाग (बीएसपी डे बोर्डिंग की खिलाड़ी) ने 52 किलो समूह में 345 किलो वजन लिफ्ट कर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया, वहीं पुरूष वर्ग में निसार अहमद (बिलासपुर जिला) ने रजत पदक और देवेंद्र बाग (दुर्ग जिला) ने कांस्य पदक जीता है। 
    छत्तीसगढ़ के इन पदक विजेता खिलाडिय़ों को प्राप्त उपलब्धियों में टीम के कोच महेश पटेल व राजेन्द्र यादव ने बधाई दी। प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, गोआ, विदर्भा, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ के 180 महिला व पुरुष खिलाडिय़ों, रेफरी व पदाधिकारियों ने भाग लिया जिसमे मध्यप्रदेश की टीम ने विजेता तथा महाराष्ट्र की टीम उप विजेता रही।

     

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • शिवकुमार उलगनाथन

    ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी एकदिवसीय मैच और एकदिवसीय सिरीज जीत कर भारत ने तीन महीने लंबा ऑस्ट्रेलियाई दौरा सफलता के साथ खत्म कर लिया है। शुक्रवार 18 जनवरी को मेलबर्न में खेले गए मैच में भारत ने 7 विकेट से जीत हसिल की और 2-1 से ये सिरीज जीत ली। लंबे वक्त तक विदेश दौरों में भारतीय टीम असफलता की मार झेलती रही है।
    भारत की जमीन पर आम तौर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले भारतीय बल्लेबाज विदेशी दौरों में विपक्षी तेज गेंदबाजों के सामने घुटने टेक देते हैं। पेस वाली पिच पर भी भारतीय पेस बोलर्स विपक्षी टीम के फास्ट बोलर्स की तुलना में पीछे ही रहते हैं।
    लेकिन हाल में पूरा हुआ भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा सभी उम्मीदों पर खरा उतरा है। टेस्ट मैचों में भारतीय बल्लेबाज ऑस्ट्रेलियाई खिलाडिय़ों के सामने टिक पाने में कामयाब हुए, साथ ही एक दिवसीय मैचों में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा।
    क्रिकेट के इतिहास में पहली बार भारतीय टीम में ऑस्ट्रेलिया की सरजमीं पर खेली गई द्विपक्षीय सिरीज जीती है। इस दौरान कई रिकॉर्ड बने और भारतीय टीम के दौरों के लेकर चले आ रहे कई मिथक भी दफन हो गए।
    ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसी की जमीन पर सभी सिरीज जीतने के बाद अब आईसीसी वल्र्ड कप के लिए भारतीय टीम से उम्मीदें बढ़ गई हैं। कईयों का मानना है कि विदेशी दौरा करने वाली ये भारत की अब तक की सबसे सफल टीम है। ऑस्ट्रेलिया के नजरिए से भी ये चर्चा गर्म है कि टीम को स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर की कमी खल रही है। इस पर भी चर्चा हो रही है कि बीते एक दशक से क्रिकेट के मैदान पर अपना सिक्का जमा चुकी इस टीम का दबदबा अब खत्म हो गया है।
    इन चर्चाओं में कितना दम है, ये जानने के लिए मैंने बात की इस खेल के जानकारों से। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी मदन लाल कहते हैं कि ये भारतीय टीम के बेहतरीन विदेशी दौरों में से एक है। पूरी सिरीज में गेंदबाजों ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया। इशांत, बुमरा, मोहम्मद शमी ने कई ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के आत्मविश्वास को हिला दिया।
    पुजारा की शानदार बल्लेबाजी और विराट कोहली और मयंक अग्रवाल के बेहतरीन प्रदर्शन ने भारतीय टीम के लिए टेस्ट सिरीज में जीत सुनिश्चित की। ऑस्ट्रेलियाई टीम के प्रदर्शन पर मदन लाल कहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया को इस सिरीज की हार और स्टीव स्मिथ और वॉर्नर की कमी के बारे में सोचने के लिए वक्त लगेगा। नए खिलाडिय़ों को भी टीम में जमने में अभी वक्त लगेगा।
    आने वाले कुछ दिनों में भारतीय टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर जाने वाली है। मदन लाल कहते हैं कि न्यूजीलैंड कोई आसान टीम नहीं। भारत के लिए ये दौरा मुश्किल हो सकता है। विजय लोकपल्ली कहते हैं कि पर्थ में मिली हार को दरकिनार कर दिया जाए तो पूरे दौरे में भारत का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। इसके बाद अब भारतीय टीम का आत्मविश्वास चरम पर होगा।
    वो कहते हैं कि एकदिवसीय सिरीज में धोनी का फॉर्म में लौट आना भारतीय टीम के लिए बढिय़ा बात है। धोनी महान फिनिशर हैं और सही समय पर धोनी फिर से अपने बल्ले के साथ क्रीज पर आ गए हैं। भारतीय टीम के पूर्व कोच और खिलाड़ी रघुरमन कहते हैं कि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया दौरा भारत के लिए आत्मविश्वास तोडऩे वाला रहा है और कई खिलाडिय़ों के करियर भी दौरे के बाद खत्म हुए। आने वाले वर्षों में भारत के बेहतरीन प्रदर्शन के लिए इस दौरे को याद किया जाएगा।
    वो कहते हैं कि धोनी का वापस आना, कोहली का हमेशा की तरह तैयार रहना, तेज-तर्रार फास्ट बोलर और मयंक और ऋषभ पंत जैसे खिलाडिय़ों का शानदार खेल - भारत के पास खुशियां मनाने के लिए कई सारी वजहें हैं।
    सिरीज जीतने में विराट कोहली का योगदान सबसे अधिक रहा। पर्थ के मैदान में संघर्षपूर्ण शतक बनाने के अलावा टेस्ट मैचों में उन्होंने पुजारा के साथ अच्छी पार्टनरशिप निभाई। एडिलेड के एकदिवसीय मैच में उनका शतक भी याद करने लायक है।
    मैदान पर अपने आक्रामक तेवर और दूसरी टीम के साथ झगड़े के लिए तमाम आलोचनाओं के बावजूद, विराट ने शानदार नेतृत्व किया और उनके आत्मविश्वास ने टीम के युवा खिलाडिय़ों में भी जोश भर दिया। भारत को देश के भीतर नामी खिलाडिय़ों की सराहना के साथ-साथ डैरेन लीमैन, माइकल वॉन और माइकल क्लार्क जैसे विदेशी नामचीन खिलाडिय़ों से भी प्रशंसा मिली।
    किसी भी तरह के मैच में जब भी भारत कोहली के नेतृत्व में रनों का पीछा करता है, खेल से उम्मीदें काफी अधिक होती हैं। बीते तीन साल से एकदिवसीय क्रिकेट में विराट बेहतरीन फॉर्म में हैं। 2016 की शुरुआत से ही कोहली एकदिवसीय मैचों में 16 शतक बना चुके हैं जिनमें उनकी औसत 90 से अधिक रही है। अब दिन-पर-दिन नहीं बल्कि सिरीज-दर-सिरीज उनसे उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं।
    रघुरमन कहते हैं कि कोहली पर्दे से ओझल होते ही नहीं हैं। अगर किसी मैच वो बल्लेबाजी में अपना कमाल नहीं दिखा पाते हैं तो उस मैच में उनकी कप्तानी का जलवा देखने को मिलता है, वो युवाओं को प्रेरित करते हैं, अच्छी फील्डिंग करते हैं और टीम को बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं। वो साबित कर चुके हैं कि एक महान नेता के सभी गुण उनमें हैं।
    विजय लोकपल्ली कहते हैं कि टेस्ट सिरीज में पुजारा का प्रदर्शन औसत से कहीं बेहतर रहा लेकिन बल्लेबाजी के मामले में विराट भी कहीं कम नहीं हैं। सबसे बढिय़ा बात ये है कि विदेशों में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। साथ ही टेस्ट मैच, एकदिवसीय मैचों और टी-20 में मैचों में भी वो बढिय़ा रहे हैं।
    ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट फैन तीन भारतीय खिलाडिय़ों (जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा) के नाम आसानी से भूल नहीं सकेंगे। इससे पहले के दौर में एक या दो ही बोलर्स अच्छा प्रदर्शन करते थे और हर बार भारतीय टीम एक खास लाइन सुनते हुए हार जाती थी कि भारत के पास एक फास्ट बोलर कर पड़ गया। लेकिन इस बार तीन की ये तिकड़ी कमाल दिखा गई।
    भारतीय फास्ट बोलर ने लगातार कई गेंदें 140 मील प्रति घंटे की रफ्तार से फेंकी। भारतीय फास्ट बोलर के कई बाउंसर के कारण कई बार ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज बगैर खाता खोले पवेलियन लौटे। वर्षों से क्रिकेट देखने वाले साधारण भारतीय क्रिकेट फैन्स के लिए ये मजेदार सीरिज रही। इस फास्ट बोलर्स के अलावा भुवनेश्वर कुमार और उमेश यादव को भी मौका मिला तो उन्होंने भी अपना कमाल दिखाया। अश्विन, जडेजा और कुलदीप यादव जैसे स्पिनर्स भी अपना बेहतरीन खेल दिखाने से नहीं चूके।
    भारतीय क्रिकेट फैन्स के लिए ऑस्ट्रेलियाई दौरा जहां नया रोमांच लेकर आया, वहीं चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेन्ट के लिए ये नई चुनौतियां लेकर आया है। विजय लोकपल्ली कहते हैं कि टेस्ट सिरीज में सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा पुजारा और बुमराह का। कोहली, मयंक और गेंदबाजों ने भी बेहतर खेला लेकिन लगातार उनका प्रदर्शन शानदार रहेगा, ऐसा नहीं कह सकते। एकदिवसीय सिरीज की बात करें तो धोनी, कोहली और भुवनेश्वर ने बढिय़ा खेल दिखाया। सिरीज के आखिरी मैचों में चहल का खेल देखने लायक था।
    रघुरमन कहते हैं कि इस सिरीज की खोज रही मयंक अग्रवाल। मेलबर्न में उनका डेब्यू शानदार रहा। हम देखेंगे कि आने वाले कई मैचों में वो टीम का हिस्सा बनेंगे। भारत फिलहाल विश्व की नंबर दो टीम है और जल्द ही न्यूजीलैंड से उनकी सरजमीं पर और ऑस्ट्रेलिया से भारत में भिडऩे के लिए तैयार है।
    हालिया सिरीज में भारत की जीत से टीम की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं और पहले ही चर्चा शुरू हो गई है कि क्या भारत 2019 के आईसीसी विश्वकप विजेता बन सकता है। विजय लोकपल्ली कहते हैं कि एकदिवसीय फॉर्मैट में भारत पहले ही एक मजबूत टीम है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिरीज में जीत वाकई में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए काफी है। आने वाले विश्वकप मुकाबले में भी भारत की दावेदारी मजबूत रहेगी। विश्पकप से पहले धोनी का फॉर्म में आ जाना सबसे महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
    मदन लाल कहते हैं कि बढिय़ा फास्ट बोलर, मदद देने वाले स्पिनर्स, एक से एक बेहतर बल्लेबाज और फिर कोहली और धोनी का नेतृत्व - भारत विश्वकप के लिए एक मजबूत दावेदारी पेश कर सकता है। देखा जाए तो इस वक्त एक आम भारतीय क्रिकेट फैन खुश है और टीम से उसे अपेक्षाएं भी बहुत हैं। भारतीय टीम भी अपने बेहतरीन फॉर्म में है लेकिन जानकार मानते हैं कि टीम को अपना फॉर्म और अपना शानदार प्रदर्शन बनाए रखना होगा। (बीबीसी)

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • दिनेश उप्रेती

    लोगों ने कहा, वह अब बूढ़ा हो गया है।
    लोगों ने कहा, वो अब टीम पर बोझ बन गया है।
    लोगों ने कहा, उसे अब नए खिलाड़ी के लिए जगह देनी चाहिए।
    लेकिन भारत को आईसीसी की तीन-तीन ट्रॉफियां जिताने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने हर बार की तरह एक बार फिर अपने आलोचकों को अपने बैट से जवाब दिया।
    ऑस्ट्रेलिया को उसकी ही धरती पर पहली बार वनडे सिरीज में हराने वाली टीम इंडिया में धोनी का योगदान अहम रहा। उन्होंने तीनों वनडे मैचों में हाफ सेंचुरी जड़ी और आखिरी के दो वनडे मुकाबलों में वही फिनिशर धोनी दिखा, जिसके तमाम क्रिकेट प्रशंसक दीवाने हैं।
    धोनी को वनडे मैचों में उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द सिरीज चुना गया। उन्होंने सिरीज में कुल मिलाकर 193 रन बनाए और दो बार भारतीय टीम की जीत पक्की करने के बाद ही वापस पवेलियन लौटे। वैसे धोनी की टीम इंडिया के लिए अहमियत क्या है, इसे टीम के कोच रवि शास्त्री के इस बयान से बखूबी समझा जा सकता है।
    टेलीग्राफ के लिए इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन को दिए एक इंटरव्यू में शास्त्री ने कहा था कि आप धोनी की जगह किसी और से नहीं बदल सकते। ऐसे खिलाड़ी 30-40 साल में एक बार आते हैं। मैं भारतीयों से भी यही कहता हूँ। जब तक वो खेल रहा है, इसका मजा उठाओ। जब वो जाएंगे तो आप एक खाली जगह देखेंगे, जिसे भर पाना बेहद-बेहद मुश्किल होगा।
    37 साल के धोनी टीम इंडिया के सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं और कप्तान विराट कोहली को समय-समय पर सलाह देते हुए भी दिखते हैं। डिसीजन रिव्यू सिस्टम यानी डीआरएस लेने में कई बार विराट कोहली को धोनी से सलाह लेते हुए देखा गया है।
    कप्तान न होने के बावजूद फील्ड प्लेसमेंट और डीआरएस में धोनी की सलाह पर रवि शास्त्री ने कहा था कि वो इसलिए क्योंकि जिस जगह धोनी होते हैं, वे चीजों को बेहतर तरीके से देख पाते हैं। खिलाडिय़ों के साथ उनके रिश्ते बेहतरीन हैं, वे सभी धोनी को बहुत मानते हैं। ये पूरी टीम उन्हीं की खड़ी की हुई है क्योंकि वो 10 साल तक इस कप्तान रहे हैं। ड्रेसिंग रूम में इस तरह का सम्मान पाना और इसका अनुभव होना बहुत बड़ा है।
    ऑस्ट्रेलिया में इतिहास रचने के बाद भारतीय टीम को मई में इंग्लैंड में होने जा रहे वल्र्ड कप 2019 का बड़ा दावेदार माना जाने लगा है। और हो भी क्यों ना ऑस्ट्रेलिया में टीम ने न केवल बल्ले और गेंद से बल्कि फील्ड पर रन बचाकर और कुछ बेहतरीन कैच लेकर जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उससे उसका ये दावा और पुख्ता हो गया है।
    हालांकि इंग्लैंड में विराट और उनके साथियों का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था और वल्र्ड कप की टीम की तैयारियों पर भी सवाल उठने लगे थे। यहाँ तक कि एशिया कप में भी हालाँकि भारत ने रिकॉर्ड आठवीं बार चैंपियनशिप पर कब्जा किया, लेकिन मध्य क्रम के बल्लेबाजों का प्रदर्शन आलोचकों को संतुष्ट नहीं कर पाया था।
    ज्यादातर आलोचनाएं महेंद्र सिंह धोनी के प्रदर्शन को लेकर थी और सवाल पूछे जाने लगे थे कि क्या धोनी को टीम इंडिया का हिस्सा होना चाहिए? कहा जा रहा था कि अब जबकि वल्र्डकप में एक साल से भी कम समय बचा है, धोनी को किसी युवा खिलाड़ी के लिए जगह खाली कर देनी चाहिए। क्रिकेट समीक्षक अयाज मेमन ने भी कहा था जिस तरह के फॉर्म में धोनी हैं, वो टीम पर बोझ से लगते हैं। उन्होंने कहा था आज के क्रिकेट में धोनी को बदलना होगा क्योंकि रन रेट का चलन या मापदंड बन चुका है। अगर ऐसा ना हो तो टीम को नुकसान होता है।
    इसमें कोई शक नहीं कि धोनी के बल्ले में अब वो धार नहीं है, जैसा कि उनके स्वर्णिम दौर में हुआ करता था, लेकिन ये कहना भी गलत होगा कि अब टीम में उनकी जगह ही नहीं बची है।
    इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल 2018 में चेन्नई सुपर किंग्स में लौटने के बाद धोनी ने 75 से अधिक के औसत के साथ रन बनाए थे और उनका स्ट्राइक रेट 150 के आस-पास था। यही नहीं, धोनी ने एक बार फिर अपनी कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स को चैंपियन भी बनाया था।
    लेकिन आईपीएल के बाद जो दो वनडे सिरीज खेली गई, उनमें धोनी का प्रदर्शन उनके रूतबे के हिसाब से नहीं है। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सिरीज में उनका औसत 39.50 का रहा और उनका उच्चतम स्कोर था 42 रन। एशिया कप में धोनी ने 19.25 की औसत से महज 77 रन बनाए और उनका अधिकतम स्कोर रहा 36 रन। वेस्टइंडीज के खिलाफ सिरीज में भी धोनी रंग में नहीं लौटे और 16.66 की औसत से वे केवल 50 रन ही जुटा सके और अधिकतम स्कोर रहा 23 रन।
    लेकिन 335 वनडे मुकाबलों का अनुभव रखने वाले और 10 हजार से अधिक रन बनाने वाले धोनी आलोचनाओं का जवाब देना अच्छी तरह जानते हैं और वो भी अपने प्रदर्शन से। टीम मेंबर्स में माही के नाम से मशहूर धोनी जानते हैं कि बुरी और अच्छी फॉर्म का फासला महज एक उम्दा पारी का होता है और ऑस्ट्रेलिया पहुँचने के साथ ही धोनी ने जो किया उससे क्रिकेट समीक्षक फिर उनकी प्रतिभा के कसीदे पढऩे लगे हैं।
    बेशक, ऋषभ पंत ने ऑस्ट्रेलिया दौरे में टेस्ट सिरीज में धमाकेदार प्रदर्शन किया, लेकिन अब भी वल्र्ड कप जैसे टूर्नामेंट के लिए टीम प्रबंधन को अगर धोनी या ऋषभ पंत में से किसी पर दांव लगाना होगा तो वो धोनी ही होंगे। मेलबर्न में जीत के बाद कप्तान कोहली ने कहा भी कि टीम इंडिया में धोनी से अधिक समर्पित खिलाड़ी कोई नहीं है और पांचवें नंबर का बल्लेबाजी क्रम उनके लिए आदर्श है। टीम इंडिया के कप्तान कोहली और कोच रवि शास्त्री को अच्छी तरह पता है कि 2019 के वल्र्ड कप की क्या अहमियत है। शायद आलोचक भी जल्द ही इस अहमियत को समझ पाएंगे। (बीबीसी)

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • मेलबोर्न, 19 जनवरी । भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री ने कहा कि मैं जवाब देने में विश्वास नहीं करता, लेकिन अगर राष्ट्रीय टीम की आलोचना किसी एजेंडे के तहत की जा रही है तो वह इसका सीधे जवाब देंगे।
    ‘द डेली टेलीग्राफ’ के लिए इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन के साथ साक्षात्कार में शास्त्री ने कहा, मैं उन व्यक्तियों में से हूं जो मानते हैं कि अगर आलोचना रचनात्मक है तो ठीक है। लेकिन अगर मुझे लगता है कि ये किसी एजेंडे को लेकर की जा रही हैं तो मैं सीधे इसका जवाब दूंगा। मुझे परवाह नहीं कि वो कोई महान व्यक्ति है या कोई सामान्य व्यक्ति। शास्त्री से जब सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली के बीच तुलना करने के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा कि तेंदुलकर ज्यादा शांत खिलाड़ी थे और अपने दायरे में रहते थे जबकि कोहली काफी आक्रामक है। शास्त्री ने विराट कोहली की प्रशंसा की और कहा कि जिस तरह से वह बल्लेबाजी करता है, वह ‘विवियन रिचर्ड्स के करीब’ आता है।
    हाल ही में महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने पर्थ टेस्ट में भारत को मिली हार के बाद टीम की आलोचना की थी जिन्होंने टीम के संयोजन और ट्रेनिंग के तरीकों पर सवाल उठाये थे। शास्त्री ने उन्हें जवाब देते हुए कहा था यह सैकड़ो मील दूर से ‘हवा में तीर छोडऩे’ जैसा है। शास्त्री की जवाब प्रतिक्रिया देते हुए गावस्कर ने कहा था कि हमारी प्रतिक्रियाओं ने ही मेलबर्न में टीम को अच्छा करने के लिए प्रेरित किया। (पीटीआई)

     

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • मेलबर्नः स्पिनर युजवेंद्र चहल (6 विकेट) की शानदार गेंदबाजी और महेंद्र सिंह धोनी (नाबाद 87 रन) की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन वनडे मैचों की सीरीज का आखिरी और निर्णायक मुकाबला 7 विकेटों से अपने नाम कर लिया। 231 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी मेहमान टीम ने 3 विकेट खोकर जीत हासिल कर ली। इस जीत के साथ भारतीय टीम वनडे सीरीज पर 2-1 से कब्जा करने में कामयाब रही। सीरीज के पहला मैच में जहां ऑस्ट्रेलिया ने 34 रनों से जीत दर्ज की वहीं दूसरे मैच में भारतीय टीम ने छह विकेट से विजय हासिल की।  भारत ने ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर पहली बार द्विपक्षीय वनडे सीरीज जीती है। भारत ने करीब दो महीने लंबे ऑस्ट्रेलियाई दौरे का अंत जीत के साथ किया है। ऑस्ट्रेलियाई दौरा भारत के लिए यादगार रहा। इससे पहले भारत ने ऑस्ट्रेलिया को घर में ही चार टेस्ट मैचों की सीरीज में मात देकर इतिहास रचा था। हालांकि, मेहमान टीम तीन20 मैचों की सीरीज जीतने से चूक गई। यह सीरीज ड्रॉ 1-1 से ड्रॉ हो गई थी। 
    मेलबर्न में खेले गए तीसरी वनडे में भारत की शुरुआत बेहद खराब रही। मेहमान टीम को पहला झटका रोहित शर्मा के रूप में 15 के कुल स्कोर पर लगा। रोहित 17 गेंदों में 9 रन बनाकर पीटल सिडल का शिकार बन गए। इसके बाद शिखर धवन (23) और विराट कोहली ने पारी को आगे बढ़ाया। दोनों टीम को 50 रन के पार ले गए। लेकिन संभलाकर बल्लेबाजी कर रहे धवन 17वें में मार्कस स्टोइनिस की गेंद पर कॉट एंड बोल्ड हो गए।
    धवन के आउट होने के बाद कप्तान विराट कोहली ने महेंद्र सिंह धोनी के साथ मोर्चा संभाला। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 54 रन साझेदारी कर टीम को लड़खड़ाने से बचाया। हालांकि, कोहली अपना अर्धशतक पूरा नहीं कर पाए और 46 के निजी स्कोर पर आउट हो गए। उनका विकेट 113 के स्कोर पर लगा। यहां से धोनी का साथ देने के लिए आए केदार जाधव (61*) ने लाजवाब बल्लेबाजी की। धोनी और जाधव ने चौथे विकेट के लिए नाबाद 121 रन की साझेदारी कर जीत की नैया को पार लगाया। ऑस्ट्रेलिया के लिए सिडल, जे रिचर्डसन और स्टोइनिस ने 1-1 विकेट हासिल किया।
    इससे पहले टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलयिई टीम 48.4 ओवरों में 230 रन बनाकर ढेर हो गई। पीटर हैंड्सकॉम्ब ने ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे ज्यादा 59 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया ने निराशानजक आगाज किया और उसके सलामी बल्लेबाज एलेक्स केरी (5) और एरोन फिंच (14) जल्द पवेलियन लौट गए। इसके बाद उस्मान ख्वाजा (34) और शॉन मार्श (39) ने 73 रन की साझेदारी कर टीम को 100 के कुल स्कोर तक पहुंचाया। लेकिन दोनों की साझेदारी इससे आगे नहीं बढ़ सकी और मार्श टीम के इसी कुल स्कोर पर अपना विकेट गंवा बैठे। उनके आउट होने के बाद 101 के कुल स्कोर पर उस्मान भी आउट हो गए।
    इन दोनों के पवेलियन लौटने के बाद मेजबान टीम लड़खड़ा गई और नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे। हालांकि, इस दौरान  हैंड्सकॉम्ब ने एक छार संभाल रखा। एक समय लग रहा था कि ऑस्ट्रेलियाई टीम 175 का आंकड़ा भी नहीं छू पाएगई मगर हैंड्सकॉम्ब ने आखिर तक टीम की उम्मीदों को बरकरार रखा। उन्होंने मार्कस स्टोइनिस (10) के साथ 22 और ग्लेन मैक्सवेल (26) के साथ 38 रनों की छोटी-छोटी साझेदारियां कीं।
    मैक्सवेल के 161 के कुल स्कोर पर आउट होने के बाद हैंड्सकॉम्ब ने सबसे अहम साझेदारी जे रिचर्डसन (16) के साथ की। उन्होंने रिचर्डसन के साथ मिलकर सातवें विकेट के लिए 45 रन जोड़े और टीम को 200 रन के पार पहुंचाया। हैंड्सकॉम्ब ने 57 गेंदों में अपने वनडे क्रिकेट करियर का तीसरा अर्धशतक जमाया। वह अर्धशतक बनाने के बाद ज्यादा देर टिक नहीं सके और 219 के कुल स्कोर पर चहल का शिकार बन गए। उनके आउट होती ही एडम जाम्पा (8) भी पेवलियन लौट गए। ऑस्ट्रेलिया की ओर से आउट होने वाले आखिरी बल्लेबाज बिलि स्टानलेक (0) थे। वहीं, पीटलर सिडल 10 रन बनाकर नाबाद रहे।
    भारत के लिए युजवेंद्र चहल ने सबसे शानदार गेदंबाजी की। उन्होंने 10 ओवरों में 42 रन देकर 6 विकेट अपने नाम किए। चहल के अलावा भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी ने दो-दो विकेट चटकाए। चहल का यह प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया में वनडे में किसी भी गेंदबाज द्वारा किया गया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इस मामले में उन्होंने भारत के ही अजीत आगरकर की बराबरी की है। वहीं चहल आस्ट्रेलिया में एक वनडे मैच में सबसे ज्यादा लेने वाले पहले स्पिनर भी बन गए हैं। 
    अर्धशतक से चूके विराट कोहली 
    दूसरे वनडे के शतकवीर कप्तान विराट कोहली अर्धशतक के करीब पहुंचने के बाद अपना विकेट गंवा बैठे। उन्होंने 62 गेंदों में 3 चौकों की मदद से 46 रन बनाए। कोहली बेहद संभलकर खेल रहे थे लेकिन 30वें ओवर की आखिरी गेंद पर जे रिचर्डसन का शिकार बन गए। उन्होंने रिचर्डसन की गेंद पर कवर ड्राइव खेलन का प्रयास किया। लेकिन गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेकर विकेटकीपर एलेक्स केरी के दस्तानों में समा गई।
    कोहली का विकेट 113 के कुल स्कोर पर गिरा। कोहली ने महेंद्र सिंह धोनी के साथ तीसरे विकेट के लिए 54 रन जोड़कर टीम को लड़खड़ाने से बचाने में अहम भूमिका निभाई। यह तीसरी मर्तबा है जब कोहली सीरीज में तेज गेंदबाज रिचर्डसन की गेंद पर आउट हुए हैं। पहले मैच में रिचर्डसन ने कोहली को 3 पर आउट किया था। वहीं दूसरे वनडे में वह 104 रन की पारी खेलने के बाद रिचर्डसन का शिकार बने थे। 
    कॉट एंड बोल्ड हुए शिखर धवन
    रोहित शर्मा के सस्ते में पवेलियन लौटने के बाद संभलकर बल्लेबाजी कर रहे सलामी बल्लेबाज शिखर धवन एक बार फिर बड़ी पारी खेलने से चूक गए। दूसरे वनडे में 32 रन बनाने वाले धवन तीसरे वनडे में 46 गेंदों 23 रन बनाकर अपना विकेट गंवा बैठे।  उन्हें 17वें ओवर की दूसरी गेंद पर  मार्कस स्टोइनिस ने कॉट एंड बोल्ड आउट किया। वह स्टोइनिस की गेंद को पिच पर पड़ने के बाद समझ नहीं पाए और गलत शॉट खेलकर उन्हें ही कैच थमा दिया। धवन का विकेट 59 के कुल स्कोर पर गिरा। उन्होंने दूसरे विकेट के लिए विराट कोहली के साथ मिलकर 44 रनों की पार्टनरिशप की। 
    नहीं चला 'हिटमैन' रोहित का बल्ला
    लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। सिडनी में 133 और एडिलेड में 43 रन की पारी खेलने वाले रोहित 17 गेंद खेलकर महज 9 रन बना सके। वह पीटर सिडल की गेंद पर पहली स्लिप में खड़े शॉन मार्श के हाथों लपके गए। पारी के छठवें ओवर की आखिरी गेंद पर जब टीम इंडिया ने रोहित का विकेट गंवाया उस वक्त स्कोर 15 रन था। 
    युजवेंद्र चहल ने चटकाए 6 विकेट
    युजवेंद्र चहल की शानदार गेंदबाजी के दम पर भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया को जल्द समेटने में कामयाब रही। चहल ने 10 ओवरों में 42 रन देकर 6 विकेट अपने नाम किए। चहल के अलावा भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी ने दो-दो विकेट चटकाए। पहली बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत बेहद खराब रही और उसके सलामी बल्लेबाज एलेक्स केरी (5) और एरोन फिंच (14) जल्द पवेलियन लौट गए। इसके बाद उस्मान ख्वाजा (34) और शॉन मार्श (39) ने 73 रन की साझेदारी कर टीम को 100 के कुल स्कोर तक पहुंचाया। लेकिन दोनों की साझेदारी इससे आगे नहीं बढ़ सकी और मार्श टीम के इसी कुल स्कोर पर अपना विकेट गंवा बैठे।
    उनके आउट होने के बाद 101 के कुल स्कोर पर उस्मान भी आउट हो गए। इन दोनों के पवेलियन लौटने के बाद मेजबान टीम लड़खड़ा गई और नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे। हालांकि, इस दौरान पीटर हैंड्सकॉम्ब (59) ने एक छार संभाल रखा। एक समय लग रहा था कि ऑस्ट्रेलियाई टीम 175 का आंकड़ा भी नहीं छू पाएगई मगर हैंड्सकॉम्ब ने आखिर तक टीम की उम्मीदों को बरकरार रखा। उन्होंने मार्कस स्टोइनिस (10) के साथ 22 और ग्लेन मैक्सवेल (26) के साथ 38 रनों की छोटी-छोटी साझेदारियां कीं।
    ऑस्ट्रेलिया ने सातवें विकेट के लिए की अहम पार्टनरशिप
    मैक्सवेल के 161 के कुल स्कोर पर आउट होने के बाद हैंड्सकॉम्ब ने सबसे अहम साझेदारी जे रिचर्डसन (16) के साथ की। उन्होंने रिचर्डसन के साथ मिलकर सातवें विकेट के लिए 45 रन जोड़े और टीम को 200 रन के पार पहुंचाया। हैंड्सकॉम्ब ने 57 गेंदों में अपने वनडे क्रिकेट करियर का तीसरा अर्धशतक जमाया। वह अर्धशतक बनाने के बाद ज्यादा देर टिक नहीं सके और 219 के कुल स्कोर पर चहल का शिकार बन गए। उनके आउट होती ही एडम जाम्पा (8) भी पेवलियन लौट गए। ऑस्ट्रेलिया की ओर से आउट होने वाले आखिरी बल्लेबाज बिलि स्टानलेक (0) थे। वहीं, पीटलर सिडल 10 रन बनाकर नाबाद रहे। 
    बड़ी पारी से चूके ग्लेन मैक्सवेल
    ऑस्ट्रेलिया को छठा झटका ग्लेन मैक्सवेल के रूप में 161 के कुल स्कोर पर लगा। वह तेजी से रन बनाने की फिराक में बड़ी पारी से चूक गए। दूसरे वनडे में 48 रन की शानदार पारी खेलने वाले मैक्सवेल से टीम को एक बार फिर पड़ी पारी की उम्मीद थी। लेकिन वह आशानुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए। मैक्सवेल 19 गेंदों में 26 रन बनाकर अपना विकेट गंवा बैठे। उन्होंने अपनी पारी में 5 चौके मारे। उन्हें 35वें ओवर की पांचवीं गेंद पर मोहम्मद शमी ने पवेलियन की राह दिखाई। वह शमी की गेंद पर बड़ा शॉट मारना चाहते थे लेकिन बाउंड्री के करीब भुवनेश्वर कुमार के हाथों लपके गए। भुवनेश्वर ने दौड़कर शानदार कैच लपका। मैक्सवेल ने छठे विकेट के लिए पीटर हैंड्सकॉम्ब के साथ 38 रनों की पार्टनरशिप की। 
    स्टोइनिस ने सस्ते में गंवाया विकेट
    उस्मान ख्वाजा के आउट होने के बाद छठे नंबर पर क्रीज पर आए मार्कस स्टोइनिस सस्ते में अपना विकेट गंवा बैठे। वह 20 गेंदों में महज 10 रन ही बना सके। उन्हें 30वें ओवर की तीसरी गेंद पर चहल ने कैच आउट करवाया। स्टोइनिस ने चहल की गेंद को लेग साइड की ओर खेलने का प्रयास किया लेकिन गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेकर स्लिप में खड़े रोहित शर्मा के हाथों में चली गई। उनका विकेट 123 के कुल स्कोर पर गिरा। सीरीज के पिछले दो मैचों में थोड़ा संभलकर खेलने वाले स्टोइनिस तीसरे मैच में संयम बरकरार नहीं रख सके। पहले और दूसरे वनडे में उन्होंने क्रमश: 47* और 29 रन की पारी खेली थी। 
    एक ही ओवर में पवेलियन लौटे मार्श-उस्मान
    ऑस्ट्रेलिया के 2 विकेट 27 के कुल स्कोर पर गिरने के बाद टिककर बल्लेबाजी कर रहे शॉन मार्श और उस्मान ख्वाजा एक ही ओवर में पवेलियन लौट गए। दोनों को 24वां ओवर फेंकने आए युजवेंद्र चहल ने आउट किया। चहल ने दूसरे वनडे में शतकीय पारी खेलने वाले मार्श को ओवर की पहली गेंद पर स्टंप आउट करवाया। मार्श ने 54 गेंदों में 39 रन की पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में 3 चौके जड़े। वह चहल की गेंद पर शॉट मारने की फिारक में थे मगर चूक गए। इसके बाद विकेट के पीछे खड़े महेंद्र सिंह धोनी ने गेंद को फुर्ती से पकड़ा और बिना देर किए गिल्लियां बिखेर दीं। उनका विकेट 100 के कुल स्कोर पर गिरा। 
    ऑस्ट्रेलिया को चौथा झटका उस्मान के तौर पर लगा। उन्होंने 51 गेंदों में 2 चौकों की मदद से 34 रन बनाए। उन्हें चहल ने ओवर की चौथी गेंद पर अपना शिकार बनाया। वह चहल की गेंद को क्रीज पर पड़ने के बाद भांप नहीं पाए और गलत शॉट खेलकर कॉट एंड बोल्ड हो गए। उनका विकेट 101 के कुल स्कोर पर गिरा। दो विकेट जल्द गंवाने के बाद लड़खड़ाई रही टीम को उस्मान ने मार्श के साथ संभाला। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 73 रनों की अहम साझेदारी की।
    नहीं चला एरोन फिंच का बल्ला
    ऑस्ट्रेलिया का दूसरा विकेट कप्तान एरोन फिंच के रूप में गिरा। फिंच लगातार तीसरे वनडे में बल्ले से प्रभावी प्रदर्शन नहीं कर सके। उन्होंने 24 गेंदों में 14  रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 1 चौका लगाया। उन्हें 9वें ओवर की आखिरी गेंद पर भुवनेश्वर कुमारा ने अपना दूसरा शिकार बनाया। वह भुवनेश्वर की अंदर की ओर गेंद पर शॉट मारना चाहते थे लेकिन चूक गए। इसके बाद भुवनेश्वर ने अपील की और फौरन ही अंपायर ने अपनी उंगली खड़ी कर दी। फिंच का विकेट 27 के कुल स्कोर पर गिरा। 
    दिलचस्प बाय यह है कि एरोन फिंच को इस सीरीज के तीनों मौचों में भुवनेश्वर कुमार ने ही आउट किया है। फिंच तीनों ही मैचों भुवनेश्वर की इनस्विंगर पर चूके हैं और हर बार अपना विकेट गंवाया। उन्हें सिडनी और एडलिडे वनडे में भुवनेश्वर ने बेहतरीन इनस्विंगर पर बोल्ड किया था। फिंच दोनों ही मैचों में महज 6 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन लौट गए थे। 
    ऑस्ट्रेलिया का फिर निराशाजनक आगाज 
    पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने तीसरे वनडे में भी निराशाजनक आगाज किया। मेजबान टीम को पहला झटका एलेक्स केरी के रूप में कुल 8 के स्कोर पर लगा। पारी का आगाज करने आए केरी ने 11 गेंदों में 1 चौके की मदद से सिर्फ 5 रन बनाए। उन्हें तीसरे ओवर की पांचवीं गेंद पर भुवनेश्वर कुमार ने कैच आउट करवाया। वह भुवनेश्वर की गेंद को पिच पर पड़ने के बाद समझ नहीं पाए और गलत शॉट खेल बैठे। गेंद उनके बल्ले का बाहरी किनारा लेकर दूसरी स्लिप में खड़े कप्तान विराट कोहली के हाथों में चली गई।
    केरी सीरीज के पिछले दोनों वनडे में भी बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे थे। पहले और दूसरे वनड में उन्होंने क्रमश: 24 और 18 रन की पारी खेली।भारत को मौजूदा सीरीज के तीन मैचों में पहली कामयाबी भुवनेश्वर कुमार ने दिलाई। तीनों ही मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने खराब शुरुआत की। पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया का पहला विकेट 8 के कुल स्कोर पर गिरा जबकि दूसरे मैच में मेजबान टीम पहले विकेट के लिए महज 20 रन ही जोड़ सकी। 
    फाइनल वनडे मैच में टीम इंडिया के फैंस की नजरें एक बार उसके दो सबसे बड़े खिलाड़ियों- कप्तान विराट कोहली और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर टिकी होंगी। विराट कोहली जहां अपना 40वां वनडे शतक जड़ने का प्रयास करेंगे वहीं धोनी भी एक खास और बड़े रिकॉर्ड के करीब हैं।
    भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारत ने इस मैच के लिए टीम में तीन बदलाव किए। अंबाती रायुडू, मोहम्मद सिराज और कुलदीप यादव की जगह केदार जाधव, युजवेंद्र चहल और विजय शंकर को मौका दिया गया। शंकर का यह पदार्पण वनडे मैच था। वह भारत के लिए वनडे क्रिकेट खेलने वाले 226वें खिलाड़ी हैं। वहीं, ऑस्ट्रेलिया ने अंतिम एकादश में दो बदलाव किए। जेसन बेहेरेनडॉर्फ और नाथन लॉयन के स्थान पर बिलि स्टेनलेक और एडम जाम्पा को शामिल किया गया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के बाद टीम इंडिया को तुरंत न्यूजीलैंड रवाना होना है जहां अगले बुधवार से भारत-न्यूजीलैंड के बीच पांच वनडे मैचों की सीरीज का आगाज होगा। उस वनडे सीरीज के बाद दोनों टीमों के बीच तीन टी20 मैचों की सीरीज भी खेली जाएगी।
    टीमें:-
    भारतीय टीम: विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा, शिखर धवन, दिनेश कार्तिक, केदार जाधव, महेंद्र सिंह धोनी (विकेटकीपर), विजय शंकर, युजवेंद्र चहल, रवींद्र जडेजा, भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी
    ऑस्ट्रेलियाई टीम: एरोन फिंच (कप्तान), उस्मान ख्वाजा, शॉन मार्श, पीटर हैंड्सकॉम्ब, ग्लेन मैक्सवेल, मार्कस स्टोइनिस, एलेक्स केरी (विकेटकीपर), जे रिचर्डसन, बिलि स्टानलेक, पीटर सिडल और एडम जाम्पा 

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    दल्लीराजहरा, 18 जनवरी। आंध्रप्रदेश में चल रहे राष्ट्रीय सीनियर स्कूल अंडर 19 स्पर्धा में आयरन ओर वेटलिफ्टिंग राजहरा माइंस की मोनिका ध्रुवे ने 57 किग्रा स्नैच और 71 किग्रा क्लीन जर्क कुल 128 किलो वजन उठाकर कांस्य पदक प्राप्त किया। 
    इस वर्ष आयरन ओर वेटलिफ्टिंग क्लब ने राष्ट्रीय स्तर के स्पर्धा में कुल चार पदक छत्तीसगढ़ राज्य के लिए जीते हैं। ये सभी पदक अनिता शिंदे के कोचिंग व मार्गदर्शन में प्राप्त करा राज्य, जिला व लौह नगरी को गौरवांवित किया है।

     

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    धमतरी, 18 जनवरी। टैलेंट पब्लिक स्कूल के दिग्विजय और सर्वोदय स्कूल के रौनक ने भूटान में आयोजित मार्शल आर्ट स्पर्धा (हपकीडो) में स्वर्णपदक पर कब्जा किया है। 
    दोनों खिलाडिय़ों के साथ रायपुर की प्रगति उपाध्याय ने भी गोल्ड मेडल हासिल किया। तीनों खिलाडिय़ों ने छत्तीसगढ़ का नेतृत्व कर स्वर्ण जीता है। 
    12 से 14 जनवरी तक फुआंट्स होलिंग भूटान में मार्शल आर्ट स्पर्धा आयोजित हुई। इस स्पर्धा में धमतरी शहर से टैलेंट पब्लिक स्कूल के 8वीं का छात्र दिग्विजय पिता विनोद सिंह और सर्वोदय स्कूल के 11वीं के छात्र रौनक तलूजा का चयन हुआ। इनके अलावा रायपुर की प्रगति उपाध्याय का चयन हुआ। तीनों खिलाडिय़ों ने छत्तीसगढ़ का नेतृत्व किया। भूटान में आयोजित तीसरी अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा में भारत के अलावा बंगलादेश, दक्षिण कोरिया, नेपाल, भूटान के खिलाड़ी शामिल हुए थे। 
    बंग्लादेश को दी मात 
    दिग्विजय, रौनक और प्रगति ने कोच दीपक प्रसाद के मार्ग में बेहतर प्रदर्शन किया। तीनों ने गोल्ड पर कब्जा कर शहर और राज्य में अलग पहचान बनाई।
     अंडर 14 के मुकाबले में दिग्विजय ने अपने विरोधी बंगलादेश के खिलाड़ी को पराजित कर स्वर्ण पर कब्जा किया। 
    अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मार्शल आर्ट में प्रदेश को मेडल दिलाने वाले दिग्विजय और रौनक भूटान से धमतरी पहुंचे, तब दोनों खिलाडिय़ों का कलेक्टर डॉ. सीआर प्रसन्ना ने स्वागत कर उत्साह बढ़ाया। 

     

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    राजिम, 18 जनवरी। 18वीं सीनियर राज्य स्तरीय कबड्डी चैंपियनशिप कोरबा बालको में आयोजित हुई। प्रतियोगिता में गरियाबंद जिला कबड्डी संघ ने तीसरा स्थान हासिल किया। कबड्डी संघ के पदाधिकारियों ने राजिम थाना प्रभारी विकास कुमार बघेल से सौजन्य मुलाकात की। 
    श्री बघेल ने सभी खिलाडिय़ों, टीम मैनेजर, कोच और कबड्डी संघ के सभी सदस्यों को बधाई दी और हरसंभव सहयोग प्रदान करने की बात कही। खिलाडिय़ों में कमलेश ठाकुर, चन्द्रबाबू यादव, राघवेंद्र, राकेश, सूरज पटेल, डायमण्ड साहू, यादराम साहू , अक्षय साहू, हरिसिह नेताम, चेतन कुमार नागेश, डॉगेश्वर कुमार, वेदप्रकाश यादव शामिल थे। टीम मैनेजर महेश, कोच नीलकंठ साहू, कबड्डी संघ के अध्यक्ष नरेन्द्र राव चौहान, उपाध्यक्ष शरद पारकर, पूरन यादव, रमेश पटेल, गिरवर निषाद, बिटू पठारी, हरिश्चंद्र निषाद, टकेश्वर मरकाम, कैलाश साहू, नरेंद्र पटेल सहित कबड्डी संघ के सभी ने खिलाडिय़ों इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

     

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • मुंबई, 18 जनवरी । क्रिकेटर हार्दिक पंड्या और लोकेश राहुल को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी के लिए इंतजार करना होगा क्योंकि प्रशासकों की समिति (सीओए) ने वीरवार को सर्वोच्च अदालत से इस मामले में लोकपाल नियुक्त करने की अपील की है। न्यायाधीश एस।ए। बोब्डे और ए।एम। सापरे की पीठ ने इस मामले की सुनवाई को अगले सप्ताह तक के लिए टाल दिया है। पंड्या और राहुल को टीवी शो 'कॉफी विद करणÓ में महिलाओं के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी करने का खामियाजा प्रतिबंध के तौर पर उठाना पड़ा है। इसी कारण यह दोनों आगामी न्यूजीलैंड दौर पर वनडे सीरीज में नहीं खेल पाएंगे। 

    अदालत में सीओए का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील पराग त्रिपाठी ने कहा कि इस मुद्दे को लोकपाल के लिए जिम्मे सौंप देना बेहतर होगा। पराग ने अदालत में कहा कि सीओए ने फैसला किया है कि वह इस मसले पर कोई और टिप्पणी तब तक नहीं करेगी, जब तक लोकपाल कोई फैसला नहीं ले लेता। इस मामले में लोकपाल की जरूरत है। 
    वीरवार को हुई सुनवाई में जब पूर्व महान्यायवादी पी।एस। नरसिम्हा को इस मामले में वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रामण्यम के स्थान पर एमिकस क्यूरी बनाने का सुझाव दिया गया तो अदालत ने कहा कि उनसे पूछा जाना चाहिए क्या वह इस पद को ग्रहण करने को तैयार हैं। सुब्रामण्यम ने एमिकस क्यूरी बने रहने पर अपनी असमर्थता जाहिर की है। बीसीसीआई के नए संविधान को राज्यों द्वारा अपनाने की स्टेटस रिपोर्ट पर ही चर्चा हुई।
    इस बीच राज्य संघों का पक्ष रख रहे महान्यायवादी तुषार मेहता ने कहा है कि सीओए ने अपना काम कर दिया है और अब बीसीसीआई के चुनाव कराए जाने चाहिए। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • मेलबोर्न, 18 जनवरी । मोहम्मद शमी ने जैसे ही अपने 10वें और पारी के 48.4वें ओवर में बिली स्टानलेक को बोल्ड किया वैसे ही कंगारू पारी ढेर हो गई। ऑस्ट्रेलिया ने 48.4 ओवर में 230 रन बनाकर भारत को 231 रन का लक्ष्य दिया है। 
    यजुवेंद्र चहल ने आखिरकार पीटर हैंड्सकॉम्ब की 58 रन की संघर्षपूर्ण का काम तमाम कर दिया है। 63 गेंदों पर दो चौके की मदद से उन्होंने 58 रन बनाए। अंपायर ने उन्हें एलबीडब्ल्यू दिया, लेकिन उन्होंने रिव्यू लिया। हालांकि इसका कोई फायदा नहीं हुआ। इसके साथ चहल के पांच विकेट पूरे हो गए हैं।  एलेक्स कैरी और एरॉन फिंच की ओपनिंग जोड़ी भुवनेश्वर कुमार का शिकार होकर पवेलियन लौट गई तो चहल ने अपने पहले ही ओवर में शॉन मार्श और उस्मान ख्वाजा को पवेलियन भेजकर ऑस्ट्रेलिया की कमर तोड़ दी है। जबकि ऑस्ट्रेलिया का पांचवां विकेट भी चहल के खाते में गया है। उन्होंने स्टोइनिस को रोहित के हाथों कैच कराया। ग्लेन मैक्सवेल को शमी ने आउट किया तो एक बार फिर चहल की फिरकी में एक खिलाड़ी फंस गया। इस बार रिचर्डसन आउट हुए।
    भारतीय कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया है। भारतीय टीम में तीन बदलाव हुए हैं। मोहम्मद सिराज की जगह विजय शंकर आए हैं, जो कि आज अपना डेब्यू कर रहे हैं। इसके अलावा रायडू की जगह केदार जाधव और कुलदीप यादव की जगह यजुवेंद्र चहल  टीम में आए हैं। कुलदीप को आराम दिया गया है।
    इस वक्त दोनों टीमें तीन मैचों की वनडे सीरीज में 1-1 से बराबरी पर हैं। ऑस्ट्रेलिया ने सिडनी में पहला वनडे 34 रन से अपने नाम किया तो एडिलेड में छह विकेट से बाजी मारकर भारत ने हिसाब बराकर कर लिया। जबकि आज का मुकाबला दोनों के लिए 'करो या मरो' वाला होगा। ऑस्ट्रेलिया मेलबर्न में हर हाल में हार से बचना चाहेगी तो भारतीय टीम पहली बार वनडे सीरीज जीतने का इतिहास रचना चाहेगी।
    भारत ने ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर कभी द्विपक्षीय वनडे सीरीज नहीं जीती है। इस फॉर्मेट में उसने ऑस्ट्रेलिया में 1985 में विश्व चैम्पियनशिप और 2008 में सीबी सीरीज अपने नाम की थी। जबकि मेलबर्न में मिली जीत भारत को इस दौरे पर बिना कोई सीरीज गंवाए लौटने का अहम मौका भी देगी। हालांकि इस मैच में भारत की एकमात्र चिंता पांचवें गेंदबाजी विकल्प की होगी। सीरीज में अभी तक तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी प्रभावी रहे हैं जबकि स्पिनर कुलदीप यादव और रविंद्र जडेजा ने बीच के ओवरों में मोर्चा संभाला है।
    वैसे इस वक्त भारत को हार्दिक पंड्या की गैर मौजूदगी में काफी खल रही है क्योंकि सिडनी और एडीलेड में पांचवें विकल्प के रूप में तेज गेंदबाजों खलील अहमद और मोहम्मद सिराज को आजमाया जिन्होंने क्रमश: 55 और 76 रन लुटाए। जबकि इन दोनों को लेकर कप्तान विराट कोहली भी खासे तनाव में दिखाई दिए थे।
    इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया ने अपनी टीम में बिली स्टानलेक और एडम जाम्पा को जगह दी है, ताकि भारत पर किसी भी हाल में विजय हासिल की जा सके। हालांकि ऑस्ट्रेलिया ने एमसीजी पर भारत के खिलाफ 14 में से नौ वनडे जीते हैं और भारत ने पांच बार बाजी मारी है। भारत ने आखिरी मैच साल 2008 में जीता था।
    टीमें (प्लेइंग इलेवन)
    भारत- विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा, शिखर धवन, दिनेश कार्तिक, केदार जाधव, महेंद्र सिंह धोनी, युजवेंद्र चहल, रविंद्र जडेजा, भुवनेश्वर कुमार, विजय शंकर और मोहम्मद शमी।
    ऑस्ट्रेलिया- एरॉन फिंच (कप्तान), एलेक्स कैरी, उस्मान ख्वाजा, शान मार्श, पीटर हैंड्सकोंब, मार्कस स्टोइनिस, ग्लेन मैक्सवेल, पीटर सिडल,जे रिचर्डसन, बिली स्टानलेक, और एडम जाम्पा। (न्यूज18)

     

     

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Posted Date : 18-Jan-2019

  • गुकेश के सामने कर्जाकिन के विश्व रिकॉर्ड को तोडऩे का मौका था। कर्जाकिन ने 2002 में 12 साल और सात माह की उम्र में ग्रैंडमास्टर बनकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था...

    - मनोज चतुर्वेदी

    विश्वनाथन आनंद के विश्व चैंपियन बनने के बाद से भारतीय शतरंज की दिशा एकदम से बदल गई है। आनंद के 1988 में देश का पहला ग्रैंडमास्टर बनने के समय लगा था कि इस मुकाम तक पहुंचना बहुत ही मुश्किल है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश में ग्रैंडमास्टर बनने की रफ्तार को देखकर लगने लगा है कि यह काम अब उतना मुश्किल नहीं रहा है। अब तो बहुत ही कम उम्र में खिलाड़ी यह सम्मान पाने लगे हैं। तमिलनाडु के डी गुकेश ने तो देश में सबसे कम उम्र में ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल कर लिया है। उन्होंने 12 साल, सात महीने और 17 दिन में ग्रैंडमास्टर बनकर पिछले साल जून में ग्रैंडमास्टर बने रमेश बाबू प्रगनानंद का रिकॉर्ड तोड़ा है। रमेश बाबू प्रगनानंद 12 साल, 10 माह और 13 दिन में ग्रैंडमास्टर बने थे। गुकेश अब सर्जेई कर्जाकिन के बाद दुनिया में दूसरे सबसे कम उम्र में बने ग्रैंडमास्टर हैं।
    गुकेश तोड़ सकते थे विश्व रिकॉर्ड
    गुकेश के सामने कर्जाकिन के विश्व रिकॉर्ड को तोडऩे का मौका था। कर्जाकिन ने 2002 में 12 साल और सात माह की उम्र में ग्रैंडमास्टर बनकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। गुकेश ने पिछले साल नवंबर में बार्सिलोना में विश्व अंडर-12 चैंपियन बनने के दौरान यदि आधा अंक और बना लिया होता तो वह उस समय ही ग्रैंडमास्टर बन गए होते और विश्व रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज हो चुका होता। लेकिन उन्हें ग्रैंडमास्टर टाइटिल पाने के लिए दिल्ली इंटरनेशनल ओपन ग्रैंडमास्टर्स शतरंज टूर्नामेंट तक इंतजार करना पड़ा और कर्जाकिन के रिकॉर्ड से 17 दिन पिछड़ गए। गुकेश ने पांच साल के करियर में ही बहुत कुछ हासिल कर लिया है। गुकेश की मां पद्मा कुमारी कहती हैं कि पांच साल पहले जब गुकेश ने शतरंज को गंभीरतापूर्वक लेना शुरू किया तो हमारे दिमाग में कोई रिकॉर्ड नहीं था और हम उसे प्रोफेशनल खिलाड़ी बनाना चाहते थे। पर वह पांच साल में ही ग्रैंडमास्टर बन जाएगा, यह हमने कभी नहीं सोचा था।
    देश में पहला ग्रैंडमास्टर नॉर्म पाने वाले प्रवीण थिप्से थे। लेकिन उनसे पहले विश्वनाथन आनंद 1988 में ग्रैंडमास्टर बन गए। थिप्से को यह सम्मान पाने के लिए 1997 तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान दिब्येंदु बरुआ भी ग्रैंडमास्टर बन गए। इस तरह थिप्से देश के तीसरे ग्रैंडमास्टर हैं। पहले सम्मान पाना बेहद मुश्किल था, इसलिए आनंद के 1988 में ग्रैंडमास्टर बनने के 12 साल बाद तक यानी 2000 तक देश को सिर्फ पांच ही ग्रैंडमास्टर मिल सके। पहले तीन ग्रैंडमास्टर्स के साथ अभिजीत कुंटे और कृष्णन शशिकिरण के नाम ही जुड़ सके। लेकिन इसके बाद 18 साल में देश में ग्रैंडमास्टर्स की संख्या 59 तक पहुंच गई है।
    असल में ग्रैंडमास्टर नॉर्म पाने के लिए जरूरी है कि आप टूर्नामेंट में एक तिहाई ग्रैंडमास्टर्स से खेले हों और कम से कम तीन ग्रैंडमास्टर्स से खेलना जरूरी होता है। इस तरह के ही टूर्नामेंट में ग्रैंडमास्टर नॉर्म को हासिल किया जा सकता है। पर पिछले एक दशक में देश में ग्रैंडमास्टर्स की भरमार होने से देश में होने वाले ज्यादातर टूर्नामेंटों का दर्जा ऊंचा हो गया है, जिसकी वजह से खिलाडिय़ों को ग्रैंडमास्टर बनने के लिए देश से बाहर जाने की भी जरूरत नहीं होती है। इसी का परिणाम है कि देश में 2013 से लेकर अब तक करीब छह साल में 21 नए ग्रैंडमास्टर बन गए हैं। इसके विपरीत शुरुआती वर्षों में देश में बड़ी कैटेगरी का टूर्नामेंट नहीं होने की वजह से खिलाडिय़ों को विदेश जाना पड़ता था और कई बार विपरीत हालात में खेलना पड़ता था। इसके अलावा देश में शतरंज खेलने वाले युवाओं को प्रशिक्षित करने की सुविधाएं भी बढ़ी हैं। इसके अलावा देश में शतरंज का स्तर ऊंचा होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, इससे खिलाडिय़ों को तैयारी करने में मदद मिलती है।
    तमिलनाडु के रहने वाले गुकेश डॉक्टर माता-पिता की संतान हैं। उनके पिता डॉक्टर रजनीकांत ईएनटी के विशेषज्ञ हैं और माता पद्मा कुमारी भी डाक्टर हैं। माता डाक्टर पद्मा कुमारी ने गुकेश के सबसे कम उम्र में ग्रैंडमास्टर बनने पर भावुक होते हुए कहा कि बेटे ने जब शतरंज खिलाड़ी बनने की इच्छा जाहिर की और इस तरफ अपनी दिलचस्पी दिखाई तो पिता ने अपने करियर की बेटे के खातिर बलि चढ़ा दी। पिता रजनीकांत पिछले पांच साल से बेटे को कहां खिलाना चाहिए यह योजना बनाते हैं। योजना बनाने के बाद उस स्थान का टिकट बुक कराने के साथ ठहरने की व्यवस्था करते हैं। पर बेटे ने भी पिता की मेहनत को चार चांद लगाते हुए यह साबित कर दिया है कि वह अब आगे से गुकेश के पिता ही कहलाएंगे।
    पर देश को नहीं मिल सका है दूसरा आनंद
    इसमें कोई दो राय नहीं है कि देश में पिछले एक दशक में शतरंज का माहौल एकदम से बदला है। आज भारतीय दुनियाभर में चमक बिखेरते नजर आते हैं। पर हम इन प्रयासों के बाद दूसरा आनंद नहीं निकाल सके हैं। आनंद ने 2000 से 2002 तक फीडे विश्व चैंपियन बनने के बाद 2007 और 2013 में विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। वह 2800 रेटिंग प्वाइंट पार करने वाले इकलौते भारतीय हैं। वह मार्च 2011 को 2817 रेटिंग प्वाइंट तक पहुंचे। आनंद के बाद देश में 58 ग्रैंडमास्टर निकल चुके हैं। लेकिन कोई भी विश्व चैंपियन बनने की आस नहीं जगा सका है। पेंटाला हरिकृष्ण 2001 में ग्रैंडमास्टर बने और 2006 में ग्रैंडमास्टर बने परिमार्जन नेगी से आनंद की जगह लेने की उम्मीद जगाई गई। लेकिन दोनों ही उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। लेकिन पिछले कुछ समय में देश को प्रगनानंद, निहाल सरीन और गुकेश के रूप में तीन कम उम्र वाले ग्रैंडमास्टर मिले हैं। इन तीनों को यदि सही तरीके से तैयार किया जाए तो ये यंग ब्रिगेड देश को दूसरा आनंद देने की क्षमता रखती है। (फस्र्टपोस्ट)

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में अपनी बल्लेबाजी के चलते सुर्खियों में आए भारत के विकेट कीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत एक बार फिर से इंटरनेट पर सनसनी मचा रहे हैं। इस पंत अपने खेल की वजह से नहीं बल्कि अपनी निजी जिंदगी के चलते चर्चा में हैं। दरअसल पंत ने हाल ही में सोशल मीडिया साइट पर अपनी गर्लफ्रेंड की तस्वीर के साथ साथ अपनी लव लाइफ का खुलासा किया है।
    ऑस्ट्रेलिया के बड़े बड़े बड़े दिग्गज गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले ऋषभ पंत जिसके इश्क में गिरफ्तार हैं उसका नाम है ईशा नेगी। यह ईशा नेगी कौन हैं यह जानने से पहले हम आपको बता दें कि पंत ने उनके बारे में क्या लिखा है। पंत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर ईशा के साथ अपने एक रोमांटिक तस्वीर शेयर करके लिखा है, मैं तुम्हें खुश रखना चाहता हूं क्योंकि मेरी खुशी की वजह तुम हो।
    ऐसा नहीं है कि पंत ने यह पोस्ट अचानक भावनाओं में बहकर शेयर की हो। उनकी गर्लफ्रेंड ईशा नेगी ने भी उसी तस्वीर को लगभग उसी वक्त पर शेयर करते हुए पंत को टैग किया है। ईशा ने लिखा है, ‘मेरे हमदम, मेरे मन के मीत, मेरे बेस्ट फ्रेंड, तुम मेरी जिंदगी का प्यार हो।
    इंस्टाग्राम पर ऋषभ पंत के इस खुलासे के बाद हो सकता है कई लड़कियों के दिल भी टूटे हों लेकिन इंटरनेट पर इस जोड़ी की तस्वीर खूब वायरल हो रही है। अब सवाल है कि पंत की गर्लफ्रेंड ईशा नेगी कौन हैं? जानकारी के मुताबिक वह इंटीरियर डिजायनर है और जीजस एंड मैरी स्कूल की छात्रा रही हैं। इंस्टाग्राम पर उनकी बायो के मुताबिक वह एमिटी यूनिवर्सिटी की छात्रा भी रही हैं। भारतीय क्रिकेट टीम में शायद ही ऐस कोई नजीर है जब किसी खिलाड़ी ने इस तरह से सोशल मीडिया के जरिए इस निजी जानकारी का खुलासा किया हो। (फस्र्टपोस्ट)

     

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • दो दिवसीय इंटर स्कूल जूडो प्रतियोगिता 

    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बचेली, 17 जनवरी। जिला जूडो संघ दंतेवाड़ा के तत्वावधान में दो दिवसीय इंटर स्कूल जूडो प्रतियोगिता का आयोजन हाई स्कूल दन्तेवाड़ा में किया गया। जिसमें बचेली के पंकज साहू को 28 किलोग्राम वर्ग में सवर्ण पदक तथा प्रतीक शर्मा को 45 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक प्राप्त हुआ है। साथ ही बचेली के रोशन का प्रदर्शन सराहनीय रहा, जिन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर निर्णयकों के बीच अपनी अलग छवि बनाई। ये तीनों छात्र प्रकाश विद्यालय बचेली में पढ़ते हंै। 
    प्रतियोगिता में करीब 250 जूडो खिलाडिय़ों ने भाग लिया था। विजेता खिलाडिय़ों को जिला खेल अधिकारी प्रदीप सिंह एवं जिला जूडो संघ बस्तर महासचिव अब्दुल मोइन द्वारा पदक व प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। बचेली की निशा शोरी कई बच्चों को जूडो व कराटे का प्रशिक्षण दे रही हंै। निशा एनएमडीसी बचेली के कार्मिक विभाग में ठेका श्रमिक पर कार्यरत हंै। 
    इन तीनों खिलाडिय़ों की ट्रेनर निशा शोरी ने बताया कि वो कई समय से बचेली के छात्र-छात्राओं को जूडो सीखा रही हंै। यहां के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है। आने वाले समय में वे प्रदेश व देश में नगर व जिले का नाम रोशन करेंगे। 
    इस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी आगामी 26 व 27 जनवरी को बिलासपुर में होने वाले राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे। निर्णयकों में विजेंद्र ठाकुर, लक्ष्मी नारायण, निशा शोरी, जवाला ठाकुर, भाग्य कुमार, दगड़ा मांझी, डिकेश्वरी, मकसूदां हुसैन राव, शैलेन्द्र व अन्य थे।

     

     

     

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Posted Date : 17-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    रायपुर, 17 जनवरी। छत्तीसगढ़ प्रदेश मास्टर्स वेटलिफ्टिंग संघ द्वारा वन विभाग खेल परिसर में विगत दिवस वेटलिफ्टिंग संघ सलेक्शन ट्रायल रखा गया। प्रतियोगिता में बीएसएनएल, रेलवे, वन विभाग सहित छत्तीसगढ़ के 27 जिलों के 100 खिलाडिय़ों ने भाग लिया। चयनित खिलाड़ी 24 से 27 फरवरी देहरादून में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेंगे। 
    छत्तीसगढ़ प्रदेश मास्टर्स वेटलिफ्टिंग संघ द्वारा आयोजित सलेक्शन ट्रायल का उद्घाटन वेट लिफ्टिंग के अध्यक्ष पी रत्नाकर एवं महासचिव तेजासिंह साहू द्वारा किया गया। प्रतियोगिता के मुख्य निर्णायक जयंत बागजी, पी सत्यनाथन, दुर्गा जंघेल और मिथलेश मून रहे। चयनित खिलाडिय़ों को मुख्य अतिथि उपमंडल अधिकारी वन विभाग जेजे आचार्या द्वारा पुरस्कृत किया गया। 
    चयन स्पर्धा के परिणाम इस प्रकार रहे- 50 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के तहत 55 किग्रा में बीएसएनएल के नत्थु सेंडे, 61 किग्रा में बीएसएनएल के महेश सोनी, 81 किग्रा में बीएसएनएल के मानिक ताम्रकार, 89 किग्रा में दुर्ग के अर्जुन सागरवंशी प्रथम रहे। 44 से 49 वर्ष आयु वर्ग के तहत 109 किग्रा में दुर्ग के तुलसी सोनी, 73 किग्रा में पृथपाल सिंह प्रथम रहे। 39 से 44 वर्ष आयुवर्ग के तहत 73 किग्रा में रेलवे के मनीष प्रथम, दुर्ग के जय वर्मा द्वितीय, 81 किग्रा फारेस्ट के सुंदर सारंग प्रथम और दुर्ग के शतपाल द्वितीय रहे। 89 किग्रा में कोरबा के कन्हैयालाल प्रथम तथा रेलवे के राज शेखर द्वितीय रहे। 96 किग्रा में किशन जंघेल प्रथम रहे। 34 से 39 वर्ष आयु वर्ग के तहत 61 किग्रा में फारेस्ट के जुगलराम साहू, 67 किग्रा में दुर्गा प्रसाद जंघेल तथा 73 किग्रा दुर्ग के किशोर केलकर प्रथम रहे। 

     

     

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Posted Date : 17-Jan-2019
  • राजनांदगांव, 17 जनवरी। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय द्वारा राज्य स्तरीय नेटबाल स्पर्धा का आयोजन किया गया। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि प्राचार्य डॉ. आरएन सिंह, क्रीड़ा संयोजक डॉ. शैलेन्द्र सिंह, अब्दुल अहमद, पूर्णिमा लाल, रितु दुबे, जावेद अहमद खान राष्ट्रीय खिलाड़ी तथा जानकीशरण कुशवाहा थे।

    प्राचार्य डॉ. आरएन सिंह ने खिलाडिय़ों को शुभकामनाएं देते कहा कि जीवन में कड़ी मेहनत करके सफल खिलाड़ी बनकर राज्य एवं देश का नाम रोशन करें। डॉ. शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि छग राज्य में खेल के क्षेत्र में अपार संभावनाएं है। वे क्रीड़ा के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाकर अपना नाम रोशन कर सकते हैं। प्रतियोगिता का पहला मैच दिग्विजय कॉलेज और साजा कॉलेज के बीच खेला गया। इसमें दिग्विजय ने साजा को 14-5 से पराजित किया। दूसरे मुकाबले में वैशाली नगर महाविद्यालय ने मंसा महाविद्यालय को 16-3 से पराजित कर दिया। फायनल मैच दिग्विजय कॉलेज और वैशाली नगर के बीच खेला जाएगा। प्रतियोगिता के निर्णायक जानकीशरण कुशवाहा, ललित ठाकुर, भोजराज तथा चंद्रेश देवांगन थे। इस अवसर पर क्रीड़ाधिकारी नीता नायर, परेश वर्मा, यशवंत देशमुख, रामू पाटिल थे। कार्यक्रम का संचालन क्रीड़ाधिकारी अरूण चौधरी द्वारा किया गया।

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Posted Date : 17-Jan-2019
  • भिलाई नगर, 17 जनवरी। मास्टर्स गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा 24 फरवरी से 2 मार्च तक देहरादून उत्तराखंड में मास्टर्स गेम्स का आयोजन किया गया है। इस प्रतियोगिता में छत्तीगसगढ़ की टीमें भी भाग ले रही हैं। 

    छत्तीगसगढ़ के प्रभारी ताजुद्दीन ने बताया कि टीमों का चयन 19 एवं 20 जनवरी को स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा रायपुर में होगा। इस दौरान कुल 13 खेलों के लिए टीमों का चयन किया जाएगा। इन खेलों में एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, वालीबॉल, फुटबॉल, हॉकी, स्वीमिंग, टेबल टेनिस, लॉन टेनिस, वेटलिफ्टिंग, ऊशु, तीरअंदाजी, बैडमिंटन व शुटिंग शमिल है। उक्त सभी खेलों के लिए होने वाली चयन स्पर्धा में 30 वर्ष से अधिक आयु के खिलाडिय़ों को भाग लेने की पात्रता होगी।

     

     

     

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Posted Date : 17-Jan-2019
  • भिलाई नगर, 17 जनवरी। स्व. कृष्णा चौधरी स्मृति में आयोजित रात्रिकालीन वैशालीनगर विधानसभा कप क्रिकेट प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला वार्ड-8 कोहका और वार्ड-38 खुर्सीपार के मध्य खेला गया। इसमें वार्ड-38 की टीम रोमांचक जीत हासिल कर स्पर्धा की विजेता बनी। 

    वार्ड-38 के कप्तान मनोज ने टांस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। दोनों ओपरन बल्लेबाज राकेश और मनोज 17 रनों के कुल योग पर वापस पैवेलियन लौट गए। लक्ष्मण और छोटू ने संभल कर बल्लेबाजी करते हुए टीम का स्कोर आगे बढ़ाया। वार्ड-38 ने निर्धारित 12 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 132 रनों का स्कोर बनाया। जिसमें राकेश ने 7 गेंद में 12 रन, मनोज ने 11 गेंदों में 8 रन, लक्ष्मण ने 24 गेंदों में 43 रन बनाए। छोटू ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए मात्र 13 गेंदों पर 41 रनों की पारी खेली। वार्ड-8 की ओर से गेंदबाजी करते हुए प्रीतम ने 2 विकेट, पिंटू ने 2, जग्गू ने 1, बाबू ने 2 एवं राजा ने 1 विकेट लिया। 133 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरे वार्ड-8 के ओपनर बल्लेबाजी आरिफ और बिट्टू और शानदार बल्लेबाजी करते हुए पहले विकेट के लिए 46 रनों की साझेदारी करते हुए अच्छी शुरुआत दिलाई। 

     

     

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Posted Date : 17-Jan-2019
  • राजनांदगांव, 17 जनवरी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले के मार्गदर्शन में जिला पुलिस द्वारा कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत 26 से 28 जनवरी तक तीन दिवसीय शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के लिए महिला एवं पुरूष वर्ग के लिए सिग्नल व डबल्स वर्ग में बैडमिंटन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता का आयोजन आफिसर क्लब आरके नगर राजनांदगांव में जिला पुलिस बल द्वारा कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत जिला प्रशासन के सहयोग से किया जा रहा है। प्रतियोगिता को अलग-अलग वर्गों में विभाजित किया गया है । महिला वर्ग में किसी भी उम्र की महिलाएं प्रतिस्पर्धा में हिस्सा ले सकती है, इसी प्रकार पुरूषो के लिए इस प्रतियोगिता में तीन वर्ग रखे गए हैं। 40 वर्ष से कम उम्र वाले प्रतियोगी, 40 वर्ष से 50 वर्ष के प्रतियोगी एवं 50 वर्ष से अधिक उम्र वाले प्रतियोगी प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकेंगे।  इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ी सिंगल्स एवं डबल्स दोनों फारमेट में भाग ले सकते हैं। प्रतिभागी अपना आवश्यक सामान स्वयं लेकर आएंगे। 

    धोनी का फॉर्म में लौटना टीम के लिए अच्छा संकेत
    मेलबर्न। सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने धौनी की फॉर्म को लेकर कुछ अहम बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि धौनी जब अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो बाकी बल्लेबाज काफी शांत रहते हैं। उन्होंने कहा कि धौनी का फॉर्म में वापस लौटना टीम के लिए बहुत अच्छा संकेत है।

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