अंतरराष्ट्रीय

Posted Date : 16-Jan-2019
  • लंदन, 16 जनवरी । ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे का यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होने संबंधी ब्रेक्जिट समझौता मंगलवार को संसद में पारित नहीं हो सका। इसके साथ ही देश के ईयू से बाहर जाने का मार्ग और जटिल हो गया है और मे की सरकार के खिलाफ अविश्वास पत्र लाने की घोषणा हो गई है। मे के समझौते को हाउस ऑफ कामन्स में 432 के मुकाबले 202 मतों से हार का सामना करना पड़ा। यह आधुनिक इतिहास में किसी भी ब्रितानी प्रधानमंत्री की सबसे करारी हार है। इस हार के कुछ ही मिनटों बाद विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोर्बिन ने घोषणा की कि उनकी पार्टी मे की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएगी।
    ब्रिटेन 1973 में 28 सदस्यीय यूरोपीय संघ का सदस्य बना था। उसे 29 मार्च को ईयू से अलग होना है। ईयू से अलग होने की तारीख आने में केवल दो महीने बचे हैं, लेकिन ब्रिटेन अभी तक यह निर्णय नहीं ले पाया है कि उसे क्या करना है। बेक्जिट के समर्थक और ब्रिटेन के ईयू में बने रहने के समर्थक दोनों विभिन्न कारणों से इस समझौते का विरोध कर रहे है। कई लोगों को आशंका है कि बेक्जिट के कारण ब्रिटेन के यूरोपीय संघ के साथ व्यापार संबंध बिगड़ सकते हैं। 
    मे की कंजर्वेटिव पार्टी के 100 से अधिक सांसदों ने समझौते के विरोध में मतदान किया। ब्रिटेन के हालिया इतिहास में यह किसी सरकार की सबसे करारी संसदीय हार है। इस हार के साथ ही ब्रेक्जिट के बाद ईयू के साथ निकट संबंध बनाने की टेरेसा मे की दो वर्षीय रणनीति का भी कोई औचित्य नहीं रहा। मे ने हाउस ऑफ कामन्स में हार के बाद कहा कि सांसदों ने यह बता दिया है कि वे खिलाफ हैं, लेकिन यह नहीं बताया है कि वे किसका समर्थन करते हैं। वहीं, संसद में परिणाम के बाद कोर्बिन ने कहा कि उनकी सरकार बुधवार को मे की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी।
    ब्रिटेन की संसदीय प्रक्रिया के अनुसार जब सांसद कोई विधेयक खारिज कर देते हैं, तो प्रधानमंत्री के पास दूसरी योजना (प्लान बी) के साथ संसद में आने के लिए तीन कामकाजी दिन होते हैं। ऐसी संभावना है कि मे बुधवार को ब्रसेल्स जाकर ईयू से और रियायतें लेने की कोशिश करेंगी और नए प्रस्ताव के साथ ब्रिटेन की संसद में आएंगी। सांसद इस पर भी मतदान करेंगे। यदि यह प्रस्ताव भी असफल रहता है तो सरकार के पास एक अन्य विकल्प के साथ लौटने के लिए तीन सप्ताह का समय होगा। यदि यह समझौता भी संसद में पारित नहीं होता है तो ब्रिटेन बिना किसी समझौते के ही ईयू से 29 मार्च को बाहर हो जाएगा। (भाषा)

     

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Posted Date : 15-Jan-2019
  • नई दिल्ली, 15 जनवरी । पाकिस्तानी उच्चायोग के एक अधिकारी द्वारा लोकप्रिय सरोजनी नगर मार्केट में एक युवती से कथित दुव्र्यवहार से भारत-पाकिस्तान के बीच एक बार फिर राजनयिक विवाद शुरू हो चुका है। भारत पड़ोसी पाकिस्तान पर अपने उच्चायोग के अधिकारियों के उत्पीडऩ का आरोप लगाता रहा है, इस बीच इस घटना के बाद पाकिस्तान अब ऐसा ही आरोप लगा रहा है। पाकिस्तान ने नई दिल्ली में अपने उच्चायोग के अधिकारी को हिरासत में लिए जाने को वियना कन्वेंशन का उल्लंघन बताया है। 
    पाकिस्तानी उच्चायोग के एक अधिकारी को पुलिस ने हिरासत में लिया था। उस पर एक युवती ने आरोप लगाया था कि सरोजनी नगर मार्केट में उसने उसे अनुचित तरीके से छुआ था। बाद में अधिकारी ने युवती से लिखित में माफी मांग ली, जिसके बाद उसे छोड़ दिया गया। आरोपी के माफी मांगने के बाद युवती ने केस दर्ज नहीं कराया। 
    पाकिस्तानी अधिकारी की पहचान शौकत के तौर पर हुई है, जो नवल अडवाइजर के असिस्टैंट के तौर पर तैनात है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि घटना शनिवार शाम को हुई, जब दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा ने शौकत पर भीड़भाड़ वाली एक दुकान में उसे अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया। हालांकि, पुलिस ने इस बात से इनकार किया है कि पाकिस्तानी अधिकारी को घंटों हिरासत में रखा गया था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, हमें युवती का इंतजार करना पड़ा कि वह औपचारिक तौर पर शिकायत दर्ज कराना चाहती है या नहीं। इस दौरान अधिकारी को एसएचओ ऑफिस में बैठने के लिए कहा गया। पाकिस्तानी अधिकारी को आराम से बैठाया गया और पुलिस ने उसका भी पक्ष सुना। 
    दूसरी तरफ, पाकिस्तान ने अधिकारी को हिरासत में लिए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई है। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के हवाले से बताया, पाकिस्तान ने राजनयिक संबंधों को लेकर हुए वियना कन्वेंशन के इस उल्लंघन पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। वहीं, सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह घटना राजनयिक के उत्पीडऩ का है ही नहीं, क्योंकि युवती ने खुद पुलिस को कॉल किया था और आरोपी के खिलाफ ऐक्शन लेने को कहा था। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, उत्पीडऩ के ज्यादातर मामले तो इस्लामाबाद में हो रहे हैं। 
    सूत्रों ने बताया कि 10 जनवरी को भारत ने इस्लामाबाद में एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक के सोशल मीडिया अकाउंट्स को हैक करने की कोशिश को लेकर पाकिस्तान के सामने विरोध दर्ज कराया। दरअसल, भारतीय राजनयिक के रिश्तेदार के नाम से बनाए गए फेक अकाउंट के जरिए, उनके सोशल मीडिया अकाउंट को कई बार हैक करने की कोशिश हो चुकी है। इसके अलावा, एक अन्य वरिष्ठ राजनयिक को फेसबुक की तरफ से मेल मिला है, जिसमें बताया गया है कि उनके अकाउंट को हैक करने की कई कोशिशें की गई हैं। (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 14-Jan-2019
  • नई दिल्ली, 14 जनवरी । चीन के शांक्सी प्रांत में एक कोयला खदान की छत ढहने से मृतकों की संख्या बढक़र 21 हो गई। रविवार को बचावकर्मियों को खदान में फंसे दो और खनिककर्मियों के शव मिले, जिसके बाद यह आंकड़ा बढक़र 21 हुआ है। सिन्हुआ के मुताबिक, यह दुर्घटना शनिवार को शाम लगभग 4.30 बजे शेन्मू शहर में बेजी माइनिंग कंपनी के लिजियागोउ कोयला खदान में हुआ। इस हादसे के समय 84 लोग खदान में काम कर रहे थे, जिनमें से 66 को सुरक्षित बाहर निकाला गया। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। (एजेंसी)

     

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Posted Date : 14-Jan-2019
  • - अभय शर्मा

    मेक्सिको की सीमा पर दीवार बनाने को लेकर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच चला आ रहा गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस गतिरोध के कारण अमरीकी संसद में धन विधेयक अटका पड़ा है। इसकी वजह से वहां के सरकारी दफ्तरों का कामकाज पिछले कई हफ्तों से ठप पड़ा है। इसके साथ ही यहां के कर्मचारियों को वेतन-भत्ते तक नहीं मिल पा रहे हैं।
    डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वे किसी ऐसे धन विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे जिसमें मेक्सिको की सीमा पर दीवार बनाने के लिए पांच अरब डॉलर की व्यवस्था न की गई हो। जबकि निचले सदन में बहुमत वाली डेमोक्रेटिक पार्टी इसके लिए तैयार नहीं है। उसका कहना है कि सीमा पर दीवार बनाना सही नहीं है।
    इस मुद्दे को लेकर कई जानकार डेमोक्रेटिक पार्टी के विरोध पर सवाल उठाते हैं। इनका मानना है कि मेक्सिको की सीमा के जरिये जिस तरह की गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है, उसे देखते हुए दीवार बनाना गलत नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक आतंकियों द्वारा अमरीका में घुसने की सबसे ज्यादा कोशिशें मैक्सिको की सीमा से ही की जाती हैं। और यहीं से अमरीका में सबसे ज्यादा नशीली दवाएं भी भेजी जाती हैं। बीते महीने अमरीकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा से जुड़ी एजेंसी ने संसद को बताया था कि मैक्सिको सीमा से हर रोज अवैध रूप से अमरीका में घुसने वालों की संख्या हजारों में रही है। वहीं दिसंबर में ऐसा करते हुए एक दिन में तीन हजार लोगों की गिरफ्तारी का आंकड़ा सबसे ज्यादा रहा।
    कई अमरीकी पत्रकार डेमोक्रेट्स के विरोध को राजनीति से प्रेरित भी बताते हैं। इनके मुताबिक अगर डोनाल्ड ट्रंप दीवार बनवा देते हैं तो यह डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा। दरअसल, अमरीका में प्रवासियों का अधिकांश वोट डेमोक्रेटिक पार्टी को ही जाता है। एक आम राय है कि जो भी प्रवासी अमरीका आते हैं, वे डेमोक्रेट्स की नरम नीतियों के चलते उन्हें ही तरजीह देना पसंद करते हैं। ऐसे में दीवार बनना डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए घाटे का सौदा है।
    इसके अलावा यह भी बताया जाता है कि ट्रंप पहले दिन से ही जिस तरह से अपने चुनावी वादे पूरे करने में लगे हैं, उससे डेमोक्रेटिक पार्टी खासा परेशान है। यह एक बड़ी वजह है जिसके चलते लाख आलोचनाओं के बाद भी ट्रंप की अपने वोटरों पर पकड़ बनी हुई है। मेक्सिको की सीमा पर दीवार बनाने को लेकर किए गए एक हालिया सर्वेक्षण में भी सामने आया है कि ट्रंप को वोट देने वाले 85 फीसदी से ज्यादा लोग इस मामले पर उनके साथ खड़े हैं। मेक्सिको सीमा पर दीवार बनाना डोनाल्ड ट्रंप का सबसे बड़ा चुनावी वादा था। ऐसे में डेमोक्रेटिक पार्टी को लगता है कि दीवार बनने के बाद उनकी लोकप्रियता में भारी इजाफा होगा जिसका फायदा वे अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उठाएंगे।
    डेमोक्रेटिक पार्टी की वरिष्ठ नेता और निचले सदन में स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने हाल ही में दीवार का विरोध करते हुए कहा, 'मेरा मानना है कि सीमा पर दीवार बनाना सबसे महंगा, अनैतिक और सीमा को सुरक्षित करने का एक बेहद कमजोर तरीका है। मुझे समझ नहीं आता कोई कैसे इसे अच्छा बता सकता है...जब तक कि इसे बनाने के पीछे कोई और मकसद न छिपा हुआ हो।Ó
    डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं द्वारा दिए जा रहे ये तर्क भी लोगों के गले नहीं उतर रहे हैं। साथ ही इन तर्कों से उनकी मंशा पर भी शक होता है। जानकार कहते हैं कि दुनियाभर में जिस तरह से अमरीका अपना पैसा खर्च करता है, उसे देखते हुए दीवार के लिए पांच अरब डॉलर कोई बड़ी राशि नहीं है।
    कुछ जानकार यह भी कहते हैं कि ट्रंप 30 फीट से भी ज्यादा ऊंची दीवार बनाने की बात कह रहे हैं, साथ ही कई जगह चेकिंग पांइट्स भी बनाए जाएंगे। ऐसे में दीवार को अवैध प्रवासियों को रोकने के लिहाज से कारगर न मानना तार्किक नहीं लगता। ये लोग एक और बात भी बताते हैं। इनके मुताबिक 2006 में बराक ओबामा, हिलेरी क्लिंटन और चेक शूमर, जो इस समय दीवार के सबसे बड़े विरोधी हैं, ने मेक्सिको की सीमा सुरक्षित करने के लिए केवल 18 फीट ऊंची लोहे की नुकीली बाड़ लगाने के पक्ष में मतदान किया था, जबकि वह तरीका तो 30 फीट ऊंची दीवार के मुकाबले कहीं कम कारगर है।
    संसद के निचले सदन में आम्र्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष और डेमोक्रेटिक सांसद एडम स्मिथ सहित कई नेता दीवार के अनैतिक होने का कारण बताते हुए कहते हैं कि इसके बनाने के विचार की बुनियाद में प्रवासियों के प्रति दुराग्रह और नस्लभेद की भावना मौजूद है।
    अमरीकी पत्रकार डेविड हरसानी अपनी एक टिप्पणी में स्मिथ की बात पर दलील देते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की प्रवासियों के प्रति सोच को देखते हुए इस डेमोक्रेटिक नेता का यह तर्क अपनी जगह पर सही हो सकता है। लेकिन दीवार बनाने या न बनाने की चर्चा में इसे शामिल नहीं किया जा सकता। क्योंकि दीवार बनाने का एकमात्र मकसद अपने देश की सीमा को सुरक्षित करना, अवैध प्रवासियों और गैरकानूनी काम को रोकना है। (सत्याग्रह)

     

     

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Posted Date : 14-Jan-2019
  • टोरंटो, 14 जनवरी । परिवार की प्रताडऩा से तंग आ कर सऊदी अरब से भागी, सोशल नेटर्वक पर आपबीती साझा करके पनाह मांगी, कनाडा में शरण मिली और लंबा सफर तय करके अपने नए ठिकाने पर पहुंची रहाफ अलक्यूनन के चेहरे पर थकान के लक्षण स्पष्ट थे लेकिन उसकी मुस्कुराहट कह रही थी कि अंतत: उसकी मेहनत रंग लाई और अब वह आजादी से जी सकती है। 
    कनाडा के विदेश मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने अलक्यूनन के टोरंटो हवाई अड्डे पहुंचने पर उसका गर्मजोशी से स्वागत किया और कहा, यह है रहाफ अलक्यूनन,एक बेहद बहादुर नई कनाडियन। 
    हवाई अड्डे के गेट से बाहर निकलते वक्त जिपर हुडी और कैप पहने अलक्यूनन काफी खुश दिखाई दे रही थीं। विदेश मंत्री ने कहा कि अलक्यूनन की किसी पत्रकार को जवाब देने की इच्छा नहीं थी।
    फ्रीलैंड ने कहा, वह वाकई बेहद थकी हुई हैं और लंबी यात्रा के बाद उन्होंने जाने और आराम करने को तरजीह दी। वह दक्षिण कोरिया के सियोल से टोरंटो पहुंची हैं।
    इससे पहले अलक्यूनन ने विमान में अपनी सीट से दो तस्वीरें पोस्ट की थीं। एक तस्वीर में वह हाथ में पासपोर्ट और वाइन से भरा ग्लास लिए है तो वहीं दूसरी तस्वीर में वह विमान में पासपोर्ट लिए है और उसमें लिखा हुआ है, मैंने कर दिखाया।  (लाइव हिन्दुस्तान)

     

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Posted Date : 14-Jan-2019
  • वाशिंगटन, 14 जनवरी । अमरीका में ठप पड़ा सरकारी कामकाज रविवार बीतने के साथ ही इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बंद बन गया है। खबरों के मुताबिक हर गुजरते दिन के साथ विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
    अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अमरीका में 1976 के बाद से अब तक 21 बार सरकारी कामकाज ठप पड़ चुका है। लेकिन, कभी आर्थिक वृद्धि पर उसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला। इस बार बंदी की अवधि बढ़ जाने के चलते इसका आर्थिक वृद्धि पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
    ‘एस एंड पी ग्लोबल’ रेटिंग्स के प्रमुख और अमरीकी अर्थशास्त्री बेथ एन बोविनो ने का कहना है कि करीब एक चौथाई संघीय कार्यालय बंदी के चलते प्रभावित हैं और इससे अर्थव्यवस्था को हर हफ्ते करीब 1.2 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है। उनका यह भी कहना है कि अगर कामकाज और ज्यादा दिनों तक ठप रहता है तो ये आंकड़े बढ़ सकते हैं।
    अमरीका में सरकार को पैसा न मिलने के कारण सरकारी दफ्तरों में कामकाज तीन हफ्ते से ठप पड़ा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह अवरोध तभी खत्म होगा जब अमरीकी सांसद मैक्सिको की सीमा पर दीवार बनाने के लिए आर्थिक मदद को मंजूरी देंगे। उनके मुताबिक जब तक दीवार के बजट को मंजूरी नहीं मिलती तब तक वे सरकार के खर्च संबंधी बजट पर दस्तखत नहीं करेंगे। ट्रंप का कहना है कि देश में अवैध तौर पर प्रवेश करने वालों को रोकने के लिए इस दीवार का बनना जरूरी है।
    उधर, निचले सदन में बहुमत वाली डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद दीवार के लिए पांच अरब डॉलर के बजट को अनुमति देने से साफ इनकार कर रहे हैं। इनका कहना है कि दीवार बनाने की योजना आव्रजन समस्या को और जटिल बना देगी। (पीटीआई)

     

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Posted Date : 14-Jan-2019
  • चंद्रमा के अज्ञात हिस्सों की जानकारी जुटाने के लिए भेजा गया चीन का चंद्र रोवर ‘चांग ई-4’ रात के दौरान चंद्रमा पर रहने वाले सेटिंग पॉइंट के तापमान का पता लगाएगा। वैज्ञानिकों ने रविवार को यह जानकारी दी। चंद्र अभियान ‘चांग‘ई-4’ का नाम चीनी पौराणिक कथा के अनुसार चंद्रमा देवी के नाम पर रखा गया है।
    धरती से कभी न दिखने वाले चंद्रमा के पिछले हिस्से पर यह यान तीन जनवरी को उतरा था। यह अब तक पहला यान है जिसे चंद्रमा के सबसे अछूते हिस्से पर उतारा गया है। चांग ई-4 के सफल प्रक्षेपण को खगोलीय अवलोकन की दिशा में चीन की एक लंबी छलांग माना जा रहा है। और इससे अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की दिशा में उसकी महत्वाकांक्षाओं को काफी बल मिला है।
    चंद्रमा की सर्कुलर साइकिल और रोटेशनल साइकिल समान होती है इसलिए धरती से चंद्रमा का एक ही पक्ष हमेशा दिखता है और इसके दूसरे पक्ष के अधिकतर हिस्से को नहीं देखा जा सकता है। धरती से नजर नहीं आने वाले चंद्रमा के उस पक्ष को ही ‘डार्क साइड’ कहते हैं। यानी अंधकार की वजह से नहीं बल्कि अज्ञात एवं अनछुआ होने के चलते इसे ‘डार्क साइड’ कहा जाता है।
    चंद्रमा पर एक दिन धरती के 14 दिन के बराबर होता है और रात भी उतनी ही लंबी होती है। चांद पर दिन और रात के तापमान में भीषण अंतर होता है। वैज्ञानिकों का आकलन है कि दिन के दौरान अत्यधिक तापमान 127 डिग्री सेल्सियस के आस पास जबकि रात का तापमान शून्य से 183 डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच सकता है।
    चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ के अनुसार 2013 में चीन ने चांग ई-3 का प्रक्षेपण किया था। पिछले पांच साल में 60 चंद्र रात्रि से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी इसके वैज्ञानिक उपकरण अब भी वहां अपने लैंडर पर ठीक अवस्था में कार्यरत हैं।
    चाइना एकेडमी ऑफ स्पेस टेक्नोलॉजी (सीएएसटी) से चांग ई-4 अन्वेषण परियोजना की कार्यकारी निदेशक झांग हे ने ‘शिन्हुआ’ को बताया, यह सफलता तो है लेकिन चांग ई-3 को तापमान आंकड़े के हिसाब से डिजाइन किया गया था। झांग ने कहा, चंद्रमा के तापमान के बारे में अपने आंकड़े के बगैर हम नहीं जान पाते कि चंद्रमा पर रातें वास्तव में कितनी सर्द हो सकती है। चांग ई-4 चंद्रमा पर दिन और रात के तापमान के बीच के अंतर को मापेगा, जिससे वैज्ञानिकों को चंद्रमा की सतह की प्रकृति के आकलन में मदद मिलेगी। (फस्र्टपोस्ट)

     

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Posted Date : 14-Jan-2019
  • वाशिंगटन, 14 जनवरी । अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की को चेतावनी दी है कि अगर वह सीरिया से अमरीकी बलों की वापसी के मद्देनजर कुर्द लड़ाकों पर हमला करता है तो उसे आर्थिक तबाही का सामना करना पड़ेगा। रविवार को यह बयान देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कुर्द लड़ाकों से भी अपील की कि वे तुर्की को न उकसाएं। ट्रंप ने ट्वीट किया, कुर्द बलों पर हमला करने पर तुर्की को आर्थिक रूप से तबाह कर देंगे। इसी तरह, हम यह भी नहीं चाहते कि कुर्द अंकारा को उकसाएं।
    ट्रंप ने दिसंबर में घोषणा की थी कि वे सीरिया से अमरीकी सैनिकों को वापस बुलाएंगे। उन्होंने कुर्द लड़ाकों की सुरक्षा की शर्त पर अमरीकी सुरक्षा बलों की वापसी की योजना के बारे में बताया था, जिस पर तुर्की ने नाराजगी जताई थी। बता दें कि कुर्द बहुल सीरियन डेमोक्रेटिक बल सीरिया में आईएस के खिलाफ अमरीका नीत अभियान का जमीनी स्तर पर नेतृत्व करता है। (एएफपी)

     

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Posted Date : 12-Jan-2019
  • वॉशिंगटन, 12 जनवरी । अमेरिका में नियुक्त किए गए भारत के नए राजदूत हर्ष वर्धन श्रृंगला ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने देश और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बहुत महत्व देते हैं। श्रृंगला ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति को अपना राजनयिक परिचय पत्र तथा दस्तावेज सौंपे। उन्होंने वॉशिंगटन पहुंचने के बाद 50 घंटे से भी कम समय में ऐसा किया।
    वहीं, अमेरिकी राजधानी में किसी विदेशी राजनयिक के लिए परिचय पत्र सौंपने संबंधी कार्यक्रम का इतना त्वरित आयोजन बहुत दुर्लभ है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि भारत समेत अन्य देशों के राजदूतों को अपने राजनयिक परिचय पत्र तथा दस्तावेज औपचारिक तौर पर सौंपने के लिए हफ्तों तक इंतजार करना पड़ता था। इसीलिए समारोह के बाद श्रृंगला ने कहा, ‘स्पष्ट तौर पर राष्ट्रपति हमारे द्विपक्षीय संबंधों को बहुत महत्त्व देते हैं।’
    हर्ष वर्धन श्रृंगला अमेरिका में भारत के सबसे युवा राजदूत हैं। व्हाइट हाउस से वापस आने के बाद उन्होंने कहा कि ट्रंप ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ टेलीफोन पर हुई हालिया बातचीत का संदर्भ दिया और कहा कि वे निकट भविष्य में फिर से हमारे प्रधानमंत्री से बात करने की इच्छा रखते हैं। (पीटीआई)

     

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Posted Date : 12-Jan-2019
  • ओटावा, 12 जनवरी (एपी) ओटावा शहर के पश्चिमी हिस्से में वेस्टबोरो स्टेशन के पास एक डबल डेकर बस के शुक्रवार को पारगमन आश्रय से टकराने पर तीन लोगों की मौत हो गई और 23 अन्य लोग घायल हो गए। ओटावा के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।    

    पुलिस ने बताया कि बस चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है लेकिन उसकी हिरासत पर अधिक जानकारी देने से उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि पुलिस दुर्घटना के कारण का पता लगाने के लिए जांच कर रही है। मेयर जिम वॉटसन ने बताया कि मारे गए लोगों में से दो बस में सवार थे और अन्य एक आश्रय स्थल में था। ओटावा अस्पताल के ट्रॉमा केन्द्र ने बताया कि नौ घायलों की हालत गंभीर है। हादसे के कारण यातायात प्रभावित रहा।

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Posted Date : 12-Jan-2019
  • लाहौर, 12 जनवरी । पाकिस्तान की एक जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सेहत बिगड़ गई है। उनकी बेटी मरियम नवाज ने शुक्रवार को यह दावा किया और आरोप लगाया कि जेल प्रशासन उनके हृदय चिकित्सकों को जेल में उनकी जांच नहीं करने दे रहा है।
    उन्होंने ट्वीट किया, शरीफ के हृदय रोग विशेषज्ञ पूरे दिन उन तक पहुंचने का प्रयास करते रहे लेकिन इजाजत नहीं दी गई। उनकी उन डॉक्टरों से जांच की जरूरत है जिन्हें उनके जटिल चिकित्कसकीय अतीत (कॉम्प्लीकेटेड मेडिकल हिस्ट्री) की जानकारी है। मरियम ने कहा कि लाहौर की कोट लखपत जेल में अल अजीजिया स्टील मिल भ्रष्टाचार मामले में 7 साल की सजा काट रहे शरीफ के बांह में दर्द है जो शायद एंजाइना (हृदयरोग के चलते हृदय और अन्य अंगों में दर्द) है। मरियम के आरोपों पर जेल के एक प्रवक्ता ने कहा कि जेल के डॉक्टरों ने शरीफ की जांच की है और उनका स्वास्थ्य ठीक है। (पीटीआई)

     

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Posted Date : 12-Jan-2019
  • यूएई, 12 जनवरी । एशिया कप में भारतीय फुटबॉल टीम और यूएई के खिलाफ गुरुवार को हुए मैच से पहले एक शख्स ने भारत के कुछ प्रशंसकों को पिंजरे में बंद कर दिया। इस घटना का पता एक वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद लगा। इस मामले में यूएई के अधिकारियों ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है।
    घटना का जो वीडियो सामने आया है, उसमें पक्षियों के पिंजरे में कुछ मजदूर कैद हैं और एक आदमी हाथ में छड़ी लेकर बाहर बैठा है। हाथ में छड़ी लेकर आदमी मजदूरों से पूछता है कि वे किसका समर्थन कर रहे हैं तो मजदूर कहते हैं- भारतीय टीम का। इस पर वह मजदूरों को कहता है कि यह सही नहीं है क्योंकि वे यूएई में रहते है और उन्हें यूएई का समर्थन करना चाहिए। वह छड़ी घुमाते हुए बंधकों से दोबारा पूछता है कि वे किसका समर्थन करेंगे। इस बार मजदूरों का जवाब होता है- यूएई। इसके बाद वह पिंजरा खाल देता है और मजदूर बाहर निकल जाते हैं।
    यूएई के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने अपने बयान में इस घटना की पुष्टि की है। उसके मुताबिक वीडियो में दिख रहे शख्स ने पक्षियों के पिंजरे में एशियाई मूल के कई पुरुषों को कैद कर रखा है। उधर, इस वीडियो को यूट्यूब को पर डालने वाले शख्स ने कहा कि उसने केवल मजाक में ऐसा किया था। अपने बयान में उसने कहा, ‘ये सभी लोग मेरे कर्मचारी हैं। एक को मैं 22 साल से जानता हूं। मैं इस फार्म में इन लोगों के साथ रहता हूं, हम एक ही थाली में खाना खाते है। मैंने उन्हें मारा नहीं, न ही सच में किसी को कैद किया था।’ यूएई में ऐसे मामलों में छह महीने से 10 साल तक की सजा और 50,000 से 20 लाख दिरहम (13,611 डालर से 5.44 लाख डालर) तक का जुर्माना हो सकता है। (खलीज टाईम्स)

     

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