अंतरराष्ट्रीय

कोरोना में घर से 30 मिनट दूर फंसा आदमी दो साल बाद क्यों लौट पाया?
02-Dec-2021 2:19 PM (41)

ये आपबीती है मलेशिया के मुहम्मद फारिस की. काम के सिलसिले में फारिस रोजाना सिंगापुर जाते थे. मार्च 2020 में कोरोना के चलते जब सीमाएं सील हुईं, तो फारिस सिंगापुर में फंस गए. अब वो अपने परिवार से दोबारा मिल पाए हैं.

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मुहम्मद फारिस अब्दुल्ला का घर मलयेशिया में है और दफ्तर सिंगापुर में. कोरोना महामारी से पहले उन्हें घर से दफ्तर आने-जाने में रोजाना बस 30 मिनट लगते थे. मगर मार्च 2020 में जब बिना किसी पूर्व चेतावनी के राष्ट्रीय सीमाएं सील हो गईं, तो खाना पहुंचाने वाली एक कंपनी में ड्राइवर की नौकरी कर रहे 37 बरस के फारिस सिंगापुर में फंस गए. एक ऐसी जगह, जहां उनके पास कोई घर-बार तक नहीं था. कोरोना प्रतिबंधों में दी गई ढील के चलते फारिस इस हफ्ते करीब दो साल बाद अपने परिवार से दोबारा मिल पाए हैं.

मलेशिया के सुदूर दक्षिणी छोर पर बसे शहर जोहोर बाहरु के लिए रवाना होते समय बातचीत में फारिस ने बताया, "ऐसा लग रहा है मानो आपको जेल में बंद कर दिया गया हो और लंबे समय बाद आप अपने परिवार से मिले हों." मुहम्मद फारिस की कहानी अपने आप में अकेली नहीं. मलेशिया और सिंगापुर की सीमा दुनिया की सबसे व्यस्त जमीनी सीमाओं में से एक है. कोरोना के चलते जब ये सीमा बंद की गई, तो दोनों मुल्कों के हजारों लोग अपने घर-परिवार से दूर पड़ोसी देश में फंस गए.

लॉकडाउन में सीमा सील
फारिस का बेटा चार साल का था, जब उन्होंने आखिरी बार उसे देखा था. अब वो छह साल का हो गया है. इतने समय बाद दोबारा उससे मिलते समय फारिस बेहद भावुक थे. उन्होंने कहा, "मैं तो हैरान रह गया उसे देखकर. वो बहुत लंबा हो गया है. उसके जूते का नंबर भी बड़ा हो गया है. उसे अच्छे से समझ सकूं, इसके लिए मुझे उसके साथ ज्यादा समय बिताना होगा." फारिस के बेटे का नाम है, मुहम्मद इशाक बिन मुहम्मद फारिस. इतने महीनों बाद पिता से दोबारा मिलकर वो बहुत खुश हुआ. बोला, "मुझे पापा की बहुत याद आती थी. पापा वापस आ गए, मैं बहुत खुश हूं."

बीते महीने फारिस के लिए काफी मुश्किल थे. कोरोना के चलते सीमा सील होने के बाद शुरुआती छह महीने तो उनके पास सिर छुपाने की भी जगह नहीं थे. मजबूरी में उन्हें अपनी कार के भीतर सोना पड़ता. बाद में वो अपने भाई के साथ रहने चले गए. फारिस बताते हैं कि उनकी अपने ही जैसे परदेस में फंसे कई लोगों से दोस्ती भी हो गई थी.
ओमिक्रॉन ने बढ़ाई चिंता

मलेशिया और सिंगापुर के बीच जमीनी और हवाई यात्रा इस हफ्ते दोबारा शुरू हो गई. फिलहाल केवल वैक्सीन लगवा चुके लोग ही सीमा पार आ-जा सकते हैं. मगर ये भी इतना आसान नहीं है. जैसे कि फारिस, जिन्हें जमीन के रास्ते मलेशिया में प्रवेश की इजाजत नहीं थी. ये अनुमति फिलहाल उन्हीं नागरिकों को है, जिनके पास दोनों देशों में वैध दीर्घकालिक पास हैं.

इसीलिए फारिस सीधे अपने परिवार के पास नहीं जा सके. बल्कि उन्हें पहले हवाई यात्रा करके करीब 350 किलोमीटर दूर स्थित मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर जाना पड़ा. फिर वहां से गाड़ी के रास्ते करीब इतनी ही दूरी और तय कर वो अपने परिवार के पास पहुंचे. मलेशिया और सिंगापुर दिसंबर के दूसरे पखवाड़े से अपनी जमीनी सीमा को खोलने की योजना बना रहे हैं. मगर ओमिक्रॉन वैरिएंट के चलते उपजी ताजा चिंताओं के कारण इसके आगे खिसकने की आशंका है.

एसएम/एमजे (रॉयटर्स)

महिला टेनिस संगठन ने चीन में रद्द की प्रतियोगिताएं
02-Dec-2021 2:18 PM (41)

विश्व महिला टेनिस की पूर्व नंबर एक खिलाड़ी पेंग श्वाई के साथ चीन में जो हो रहा है उसे लेकर विश्व महिला टेनिस संगठन ने चीन में अपनी सारी प्रतियोगिताएं रद्द कर दी हैं. कई खिलाड़ियों ने इस कदम की सराहना की है.

(dw.com)

पेंग ने नवंबर में सोशल मीडिया पर लिखी एक पोस्ट में चीन के पूर्व उप-प्रधानमंत्री जांग गाओली पर उनका यौन शोषण करने का आरोप लगाया था. उसके बाद वो एक तरह से गायब हो गईं और उनके आरोपों को भी सार्वजनिक मंचों से हटा दिया गया.

हालांकि वो करीब तीन सप्ताह बाद एक बार फिर नजर आईं. सरकारी मीडिया द्वारा जारी की गई तस्वीरों और वीडियो में वो अपने दोस्तों के साथ खाना खाते और बच्चों के एक टेनिस टूर्नामेंट में नजर आईं. 21 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष थॉमस बाक ने 30 मिनट तक पेंग से वीडियो कॉल पर बात भी की, जिस दौरान पेंग ने उन्हें बताया कि वो सुरक्षित हैं.

जांच की मांग
लेकिन पेंग के आरोपों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. जांग 2018 में सेवानिवृत्त हो गए थे लेकिन उन्होंने और सरकार ने इन आरोपों पर अभी तक कुछ नहीं कहा है. इसके अलावा चीन में इंटरनेट पर इस विषय पर चर्चा पर भी बैन लगा दिया है.

महिला टेनिस संगठन इस पूरी स्थिति को गंभीरता से ले रहा है. संगठन के मुख्य कार्यकारी स्टीव साइमन ने कहा है कि संगठन के निदेशकों के बोर्ड को यह विश्वास नहीं है कि पेंग के साथ सब ठीक है. उन्होंने बताया कि प्रतियोगिताएं रद्द करने के फैसले का बोर्ड ने पूरी तरह से समर्थन किया है.

साइमन ने आगे कहा, "हमें यह तो मालूम है कि पेंग कहां है, लेकिन हमें उनके स्वतंत्र, सुरक्षित और सेंसर, दबाव और भय से मुक्त होने पर गंभीर रूप से शक है." उन्होंने कहा कि उनका सगठन पेंग के आरोपों की पूरी और पारदर्शी जांच की मांग को दोहरा रहा है.

साइमन ने एक बयान में कहा, "पेंग श्वाई को स्वतंत्रता से अपनी बात कहने नहीं दिया जा रहा है और मालूम होता है कि उनपर यौन उत्पीड़न के अपने आरोपों का खंडन करने का दबाव भी डाला गया है, मुझे नहीं समझ में आता कि हम इन हालात में वहां अपने खिलाड़ियों को खेलने के लिए कह सकते हैं."

खिलाड़ियों का समर्थन
साइमन ने यह भी कहा, "अगर शक्तिशाली लोग महिलाओं की आवाज को दबा देंगे और यौन उत्पीड़न के आरोपों को गलीचों के नीचे सरका देंगे तो महिलाओं के लिए बराबरी के जिस आधार पर डब्ल्यूटीए की स्थापना हुई थी उसे एक बड़ा धक्का पहुंचेगा. मैं ना यह होने दे सकता हूं और ना होने दूंगा."

उन्होंने आगे कहा, "मौजूदा हालात को देखते हुए, मुझे इस बात की भी चिंता है कि 2022 में भी अगर हम चीन में कोई कार्यक्रम करेंगे तो वहां हमारे सभी खिलाड़ियों और स्टाफ को जोखिम का सामना करना पड़ सकता है." चीन के विदेश मंत्रालय ने तुरंत इस पर कोई टिप्पणी नहीं की थी.

चीन ओपन प्रतियोगिता के आयोजनकर्ताओं ने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया. विदेश मंत्रालय ने पिछले महीने कहा था कि "कुछ लोगों" को पेंग के मामले का "राजनीतिकरण" और "द्वेषपूर्ण प्रचार" बंद कर देना चाहिए. टेनिस संगठन का यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब चीन फरवरी 2022 में शीतकालीन ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है.

मानवाधिकारों पर चीन के रिकॉर्ड को देखते हुए वैश्विक अधिकार समूहों और दूसरे कई लोगों ने इन ओलंपिक खेलों के बहिष्कार की मांग की है. डब्ल्यूटीए के इस कदम का बिली जीन किंग और मार्टिना नवरातिलोवा जैसे टेनिस के महान खिलाड़ियों ने समर्थन किया है. पुरुष टेनिस में विश्व के नंबर एक खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने भी अपना समर्थन दिया है.

सीके/एए (एएफपी)

पूर्व जापानी पीएम शिंजो आबे के बयान पर चीन को सख़्त एतराज़, राजदूत को तलब किया
02-Dec-2021 10:36 AM (137)

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के ताइवान पर आए एक बयान से नाराज़ चीन ने बीजिंग में जापान के राजदूत को विदेश मंत्रालय तलब कर लिया.

चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बुधवार शाम को जापान के राजदूत को एक "आपात बैठक" के लिए बुलाया गया.

विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, ''चीन की सहायक विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग ने जापान के राजदूत शुई हिदेओ के साथ हुई मुलाक़ात में शिंजो आबे के बयान को "ग़लत" और इसे चीन-जापान संबंधों के बुनियादी मानदंडों का उल्लंघन भी बताया.''

चीन के विदेश मंत्रालय ने शिंजो आबे के बयान के बारे में कहा, "ये चीन की संप्रभुता को खुले तौर पर चुनौती और ताइवान की आज़ादी की बात करने वाले ताक़तों का निर्लज्ज समर्थन है. चीन इसका कड़ा विरोध करता है.''

बयान के अनुसार, हुआ चुनयिंग ने इस मामले में जापान के सामने चीन का "दृढ़ प्रतिनिधित्व" किया.

इससे पहले जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने बुधवार को ताइवान के एक थिंक टैंक के वर्चुअल फोरम में कहा कि यदि चीन ने ताइवान पर हमला किया तो न तो उनका देश और न ही अमेरिका ताइवान के साथ खड़ा हो सकता है.

उन्होंने कहा कि ताइवान पर हमला होने पर जापान की सुरक्षा गंभीर ख़तरे में पड़ जाएगी. शिंजो आबे ने पिछले साल जापान के प्रधानमंत्री का पद छोड़ दिया था. वो वहां की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हैं और अभी भी पार्टी में प्रभावशाली हैं. (bbc.com)

कोविड: ओमिक्रॉन को यात्रा प्रतिबंधों से रोकना संभव नहींः डब्ल्यूएचओ
01-Dec-2021 7:59 PM (173)

 

कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के फैलने को लेकर पूरी दुनिया में जहां हवाई यात्राओं पर तरह-तरह के नियम लाए जा रहे हैं वहीं कई देशों ने यात्राओं को लेकर नियमों में कई बदलाव किए हैं. कुछ देशों ने तो विदेशी यात्राओं से जुड़े प्रतिबंध भी लगाए हैं.

भारत में भी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की बहाली 15 दिसंबर से शुरू होनी थीं, लेकिन उसे फिलहाल अनिश्चितकाल (अगली घोषणा तक) के लिए टाल दिया गया है.

लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर यात्राओं से जुड़ी कोई भी कार्रवाई इसकी "मौजूदगी के ख़तरे के आधार पर" करनी चाहिए क्योंकि यात्रा पर प्रतिबंध इस वेरिएंट को फ़ैलने से नहीं रोक सकेगा.

डब्ल्यूएचओ ने यात्रा से जुड़ा एक बयान जारी कर कहा है कि यात्रा प्रतिबंध ओमिक्रॉन के फैलने को नहीं रोक सकेंगे बल्कि इस तरह के प्रतिबंध लोगों के जीवन और उनकी आजीविका पर भारी पड़ेंगे.

इस बयान में ये भी कहा गया है कि रिपोर्ट है कि 28 नवंबर तक 56 देशों ने ओमिक्रॉन के उनके देशों में संभावित प्रवेश में देरी को लेकर कुछ यात्रा उपाए लागू किए हैं.

इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ ने 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को लेकर भी सलाह दी है.

डब्ल्यूएचओ ने कहा कि 60 से अधिक उम्र के उन लोगों ने जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगाई है या जिनके पास कोविड संक्रमण होने के कोई सबूत मौजूद नहीं हैं और वो जिन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी समस्याएं हैं, उन्हें उनकी यात्रा स्थगित करने की सलाह दी जानी चाहिए क्योंकि उन्हें बीमारी और मौत दोनों का ही अधिक ख़तरा है. (bbc.com)

इल्हान उमर बोलीं- मुझे जान से मारने की धमकी मिली
01-Dec-2021 7:58 PM (96)

 

अमेरिकी मुस्लिम महिला सांसद इल्हान उमर ने बताया कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई है. उन्होंने एक वॉयस मेल जारी किया, जिसमें उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई.

उमर ने सांसद लॉरेन बोबर्ट से उनके मुस्लिम विरोधी बयानों पर सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगने की मांग की थी. जिसे बोबर्ट ने सिरे से ख़ारिज कर दिया था.

मंगलवार को एक प्रेस वार्ता में इल्हाम ने रिपब्लिकन नेतृत्व से इस बाबत कहा कि मुस्लिम विरोधी नफ़रत के ख़िलाफ़ खड़े हों और उन्हें रोकें, जो इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.

बोबर्ट ने उमर को जिहादी समूह की सदस्य और आत्मघाती हमलावरों से जुड़ा हुआ बताया था.

उमर ने कहा कि उन्हें यह वॉयस मेल सोमवार को मिला, जब बोबर्ट ने एक फ़ोन कॉल के दौरान सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगने से इनकार कर दिया था. बीते हफ़्ते बोबर्ट ने उमर पर जो टिप्पणी की थी, उसके बाद से दोनों सांसद खुल कर एक दूसरे पर हमला कर रहे हैं.

अमेरिकी संसद के बाहर उमर के वीडियो को देखकर बोबर्ट ने कहा था कि उन्हें यह देख कर राहत मिली कि उनके पास कोई बैकपैक नहीं है.

बोबर्ट ने बीते हफ़्ते इसे लेकर माफ़ी भी मांगी थी.

उन्होंने ‘मुस्लिम समुदाय में मैंने, जिसे भी ठेस पहुँचाई हो’ कहते हुए माफ़ी मांगी थी, लेकिन तब उन्होंने सीधे तौर पर उमर का नाम नहीं लिया था.

सोमवार को फ़ोन पर हुई बातचीत के बाद उमर और बोबर्ट ने एक-दूसरे की आलोचना करते हुए बयान जारी किया.

उमर ने कहा, "मैं उनके साथ बातचीत करने में यक़ीन रखती हूँ, जो सम्मानजनक तरीक़े से आपसे मतभेद रखते हैं. लेकिन तब नहीं जब वह मतभेद घृणा या अन्य नकारात्मक कारणों पर आधारित हों."

उन्होंने कहा, "मैंने उस बेकार के फ़ोन कॉल को बीच में ही ख़त्म करना सही समझा."

वहीं बोबर्ट ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो में कहा, "माफ़ी स्वीकार नहीं करना और कॉल बीच में काट देना, ख़राब संस्कृति की पहचान और डेमोक्रेटिक पार्टी का आधार है."

क़रीब एक हफ़्ते पहले बोबर्ट ने अपने क्षेत्र के लोगों के साथ हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, जिसमें इल्हान उमर से बातचीत का ज़िक्र था.

हालांकि उमर का कहना है कि दोनों के बीच ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई.

जिहादी दस्ते का हिस्सा कहे जाने के विरोध में इल्हान को न्यूयॉर्क के जमाल बोमन का भी समर्थन मिला है.

इल्हान मूल रूप से सोमालिया की हैं. सोमालिया से पलायन कर उनका परिवार अमरीका में शरणार्थी के तौर पर बस गया था.

2018 में हुए चुनावों में मिनेसोटा से जीतकर इल्हान उमर हाइस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव्स में आई थीं. वो पहली दो मुसलमान महिलाओं में से एक हैं जो अमरीकी कांग्रेस तक पहुंचीं हैं.

(bbc.com)

अमेरिका में फिर हुई कैंपस में गोलीबारी, तीन छात्र मारे गए
01-Dec-2021 2:47 PM (144)

मिशिगन में 15 साल के एक हाई स्कूल के छात्र ने अपने स्कूल में अचानक गोलियां चला दीं, जिसमें तीन छात्र मारे गए. राज्य के गवर्नर ने स्कूलों के परिसरों में होने वाली गोलीबारी को एक विशिष्ट रूप से अमेरिकी समस्या बताया है.

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घटना मिशिगन में डेट्रॉइट से करीब 65 किलोमीटर दूर ऑक्सफर्ड हाई स्कूल की है. 15 वर्षीय इस छात्र ने मंगलवार 30 नवंबर को स्कूल में ही अचानक एक सेमी-ऑटोमैटिक हैंडगन से गोलियां चला दीं. मरने वाले तीनों छात्र थे, जबकि घायल होने वाले आठ लोगों में से एक शिक्षक हैं और बाकी सब छात्र.

इनमें से दो की सर्जरी चल रही है और बाकी छह की हालत स्थिर है. पुलिस ने बताया कि गोली चलाने वाले छात्र को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन उसकी मंशा का अभी तक पता नहीं चल पाया है.

'अमेरिकी' समस्या
उसने यह काम अकेले किया और करीब 15-20 गोलियां चलाईं. उसने पुलिस को अपने इरादों के बारे में कुछ नहीं बताया और अपने माता-पिता की सलाह पर वकील से सलाह लेने के अधिकार की मांग की.

राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पत्रकारों से बात करते हुए "अपने प्रियजन को खो देने के अकल्पनीय दुख से गुजर रहे परिवारों" के प्रति संवेदना व्यक्त की. इससे पहले भी अमेरिका में स्कूलों में कई बार इस तरह गोली चलाने की घटनाएं हो चुकी हैं.

अमेरिका में बंदूकों के इस्तेमाल पर नियंत्रण पर हमेशा बहस छिड़ी रहती है. कई राज्यों में हथियार रखने को बहुत आसान बना दिया गया है. मिशिगन के राज्यपाल ग्रेचेन व्हिटमर ने कहा, "ये विशिष्ट रूप से एक अमेरिकी समस्या है जिसका हमें समाधान निकालने की जरूरत है."

स्कूल रहते हैं तैयार
स्कूल की 15 वर्षीय छात्र ऐबी होडर ने डेट्रॉइट फ्री प्रेस को बताया कि वो केमिस्ट्री की कक्षा में थीं जब उन्होंने कांच के टूटने की आवाज सुनी. उन्होंने बताया, "मेरे शिक्षक बाहर की तरफ भागे और टेबलों को धक्का देने लगे. हमें स्कूल में सिखाया जाता है कि ऐसी स्थिति में बैरिकेड कर लेना चाहिए इसलिए हम सब को यह पता था. फिर हम सब टेबलों को धक्का देने लगे."

पुलिस ने इस तरह की घटना के लिए तैयार रहने की और व्यवस्थित तरीके से लोगों को निकाल लेने की सराहना की. ओकलैंड काउंटी के पुलिस अधिकारी माइकल बाउचर्ड ने बताया कि वो बंदूक छात्र के पिता ने खरीदी थी, लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम कि बंदूक खरीदने का कारण क्या था.

बाउचर्ड ने यह भी बताया कि छात्र ने उस बंदूक को चलाने की प्रैक्टिस भी की थी और उसकी तस्वीरें भी ऑनलाइन डाली थी. एक और पुलिस अधिकारी माइक मैक केब ने बताया कि सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि स्कूल में गोली चलने की एक घटना हो सकती है इस तरह की चर्चा पहले से चल रही थी, लेकिन पुलिस अभी इस बात की जांच करेगी.

सीके/एए (रॉयटर्स, एपी)

ओमिक्रॉन का डरः ग्रीस में टीका न लगवाने वाले बुजुर्गों पर भारी जुर्माना
01-Dec-2021 2:45 PM (114)

ग्रीस में सरकार ने 60 साल से ऊपर के लोगों के लिए कोविड वैक्सीन को अनिवार्य कर दिया है. जो व्यक्ति वैक्सीन नहीं लगवाएगा उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा.

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ग्रीस में 60 वर्ष से ऊपर के लोगों को वैक्सीन अनिवार्य रूप से लगवानी होगी. ऐसा ना करने पर उन्हें 100 यूरो प्रति माह जुर्माना देना होगा. देश में कोविड के मामलों में एक बार फिर वृद्धि के चलते यह फैसला किया गया है.

ग्रीस के प्रधानमंत्री कीरियाकोस मित्सोताकीस ने मंगलवार को टीवी पर एक संबोधन में इस फैसले का ऐलान किया. उन्होंने बताया कि यह निर्णय 16 जनवरी से लागू होगा और जुर्माने की राशि टैक्स बिल में जोड़ दी जाएगी.

ग्रीस में अब तक कुल 18,000 लोगों की मौत कोविड-19 से हो चुकी है. देश में कोरोनावायरस संक्रमण के मामले रिकॉर्ड स्तर पर हैं जबकि देश की करीब एक चौथाई आबादी को टीका नहीं लगा है.

लॉकडाउन नहीं लगेगा
इससे पहले ग्रीस की सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी ऐसा ही फैसला किया था. तब सभी स्वास्थ्यकर्मियों और अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों के लिए वैक्सीन लेना अनिवार्य कर दिया गया था और ऐसा न करने पर उन्हें बिना वेतन नौकरी से अनिश्चितकाल के लिए निलंबन की सजा तय की गई थी.

सरकार ने कहा है कि देश में और लॉकडाउन नहीं लगाए जाएंगे. प्रधानमंत्री ने कहा कि बुजुर्गों के लिए सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं ताकि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को चरमराने से बचाया जा सके. देश में आईसीयू के बिस्तर लगभग पूरी तरह भरे हुए हैं

मित्सोताकीस ने कहा, "नया ओमिक्रॉन वेरिएंट चिंता का विषय है और हमें सचेत रहन की जरूरत है. दुर्भागय से जिन लोगों ने अब तक टीका नहीं लगवाया है उनमें से पांच लाख 80 हजार लोग 60 साल से ऊपर हैं. नवंबर में टीका लगवाने के लिए सिर्फ 60 हजार लोगों ने अपॉइंटमेंट ली है."

प्रधानमंत्री मित्सोताकीस ने सचेत किया कि 60 साल से ऊपर के लोगों को ही ज्यादातर अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा है और उन्हीं की जान भी ज्यादा जा रही है.

यूरोप में कई जगह गंभीर हालात
यूरोप के कई देशों में कोरोनावायरस के कारण स्थिति एक बार फिर गंभीर हो गई है. फ्रांस में स्वास्थ्य मंत्री ओलिविए वेरान ने चेतावनी दी है कि हालात खराब हो रहे हैं. संसद में मंगलवार को उन्होंने कहा, "बीते 24 घंटे में 47 हजार नए मामले आए हैं जो दिखाता है कि राष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है."

दो हफ्ते पहले फ्रांस में कुल मामले 15 हजार थे जो एक हफ्ता पहले 23 हजार पर और इस हफ्ते की शुरुआत में 30 हजार पर पहुंच गए थे. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "अगर इसी तरह चलता रहा तो हफ्ते के आखिर तक मरीजों की संख्या तीसरी लहर से भी ऊपर चली जाएगी."

फ्रांस में ओमिक्रॉन का पहला मामला भी दर्ज हो चुका है और वेरान ने कहा कि आने वाले घंटों में और कई मामले सामने आ सकेत हैं. यूरोप में फ्रांस उन देशों में है जहां सबसे ज्यादा वैक्सीन लग चुकी हैं. देश की 70 प्रतिशत से ज्यादा आबादी को टीका लग चुका है.

ब्रिटेन में भी ओमिक्रॉन के मामले सामने आ रहे हैं. मंगलवार को आठ नए मामलों के साथ देश में ओमिक्रॉन से संक्रमित लोगों की संख्या 22 हो गई थी. मीडिया से बातचीत में देश के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि जनवरी के आखिर तक देश के सभी योग्य लोगों को बूस्टर डोज देने की योजना है.

जॉनसन ने कहा, "देश में अस्थायी टीकाकरण केंद्र क्रिसमस ट्री की तरह जगह-जगह लगाए जाएंगे." ब्रिटेन में 12 साल से ऊपर के 88 फीसदी से ज्यादा लोगों को कोविड वैक्सीन की पूरी खुराक मिल चुकी है.

ओमिक्रॉन का बढ़ता डर
दुनियाभर में कोरोनवायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के कारण चिंता बढ़ गई है. कई देशों ने अपने यहां लोगों के आने पर पाबंदी लगा दी है जिनमें हांग कांग, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई देश शामिल हैं.

अमेरिका ने विदेशी यात्रियों के लिए कोविड जांच के नियमों को और सख्त कर दिया है. वहां की केंद्रीय संस्था सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन ने मंगलवार को कहा कि विदेशी यात्रियों के लिए ‘ग्लोबल टेस्टिंग ऑर्डर' में बदलाव किए गए हैं और अब अमेरिका आने वाले लोगों को यात्रा शुरू करने से एक दिन पहले टेस्ट कराना होगा.

वीके/एए (एएफपी, रॉयटर्स)
 

'जिंदगी का सबसे बड़ा झटका': वैज्ञानिकों को ऐसे मिला ओमिक्रॉन
01-Dec-2021 2:44 PM (103)

दक्षिण अफ्रीका में जिस वैज्ञानिक ने सबसे पहले ओमिक्रॉन को देखा, उसके लिए यह जिंदगी का सबसे बड़ा झटका था. ओमिक्रॉन की पहचान की पूरी कहानी तीन दिन की है.

  (dw.com)

दक्षिण अफ्रीका की सबसे बड़ी निजी टेस्टिंग लैब लांसेट की विज्ञान प्रमुख रकेल वियाना के लिए वह जिंदगी का सबसे बड़ा झटका था. उनके सामने कोरोनावायरस के आठ नमूनों के विश्लेषण थे. और इन सभी में अत्याधिक म्यूटेशन नजर आ रहा था, खासकर उस प्रोटीन की मात्रा तो बहुत ज्यादा बढ़ी हुई थी जिसका इस्तेमाल वायरस इंसान के शरीर में घुसने के लिए करता है.

रकेल वियाना बताती हैं, "वो देखकर तो मुझे बड़ा झटका लगा था. मैंने पूछा भी कि कहीं प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गई है. लेकिन जल्दी ही वो झटका एक गहरी निराशा में बदल गया क्योंकि उन नमूनों के बहुत गंभीर नतीजे होने वाले थे."

वियाना ने फौरन फोन उठाया और जोहानिसबर्ग स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्यूनिकेबल डिजीज (NICD) स्थित अपने एक सहयोगी वैज्ञानिक डेनियल एमोआको को फोन किया. एमोआको जीन सीक्वेंसर हैं. वियाना कहती हैं, "मुझे समझ नहीं आ रहा ये बात उन्हें कैसे बताई जाए. मुझे तो ये एक अलग ही शाखा लग रही थी."
यह ओमिक्रॉन था!

यह शाखा दरअसल कोरोनावायरस का वो वेरिएंट ओमिक्रॉन था, जिसने इस वक्त पूरी दुनिया को चिंता में डाला हुआ है. दो साल बाद जब हालात सामान्य होने लगे थे तब एक बार फिर दुनिया बड़े लॉकडाउन के मुहाने पर पहुंच गई है. कई देश अपनी सीमाएं बंद कर चुके हैं और विशेषज्ञों में डर है कि अब तक किया गया टीकाकरण भी इस वेरिएंट के सामने नाकाम हो सकता है.

20-21 नवंबर को एमोआको और उनकी टीम ने वियाना के भेजे आठ नमूनों का अध्ययन किया. एमोआको बताते हैं कि उन सभी में समान म्यूटेशन पाई गई. एक बार तो उन लोगों को भी लगा कि कहीं कोई गलती हुई है. फिर उन्हें ख्याल आया कि पिछले एक हफ्ते में कोविड-19 के मामलों में असामान्य वृद्धि हुई थी, जिसकी वजह यह नया वेरिएंट हो सकता है.

इससे पहले वियाना को उनके एक सहयोगी ने भी एक अलग तरह के म्यूटेशन के बारे में चेताया था जो अब तक के सबसे खतरनाक वेरिएंट डेल्टा से टूटकर बना था. एमोआको बताते हैं, "23 नवंबर, मंगलवार तक हमने जोहानिसबर्ग और प्रेटोरिया के इर्द-गिर्द 32 और नमूनों की जांच की. इसके बाद तस्वीर साफ हो गई. यह डराने वाली थी."
दुनियाभर में प्रसार

मंगलवार को ही NICD की टीम ने स्वास्थ्य मंत्रालय और देश की अन्य प्रयोगशालाओं को सूचित किया. बाकी प्रयोगशालाओं को भी वैसे ही नतीजे मिले. आंकड़ों को वैश्विक डेटाबेस GISAID को भेजा गया और तब पता चला कि बोत्सवाना और हांग कांग में भी ऐसे ही जीन सीक्वेंस वाले मामले मिल चुके हैं.

24 नवंबर को NICD व दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों विश्व स्वास्थ्य संगठन को सूचित किया. वियाना कहती हैं कि तब तक दक्षिण अफ्रीकी राज्य गाउटेंग में मिले कोरोनावायरस के मामलों में दो तिहाई से ज्यादा ओमिक्रॉन के थे, जो एक संकेत था कि यह वेरिएंट तेजी से फैल रहा था.

सोमवार को देश के प्रमुख विशेषज्ञ सलीम अब्दुल करीम ने बताया कि ओमिक्रॉन की वजह से इस हफ्ते के आखिर तक दक्षिण अफ्रीका में कोविड-19 के मामले चार गुना बढ़कर 10 हजार को पार कर जाएंगे.

अब वैज्ञानिको के सामने बड़ा सवाल यह है कि ओमिक्रॉन वैक्सीन या पहले हुए संक्रमण से तैयार हुई इम्यूनिटी को धोखा दे सकता है या नहीं. साथ ही यह भी कि किस आयुवर्ग पर इस वेरिएंट का असर सबसे ज्यादा होगा. इन सवालों के जवाब खोजने में दुनियाभर के वैज्ञानिक जुटे हुए हैं. उनका कहना है कि इनके जवाब मिलने में तीन-चार हफ्ते का वक्त लग सकता है.

वीके/एए (रॉयटर्स)

भारत का वो पड़ोसी देश, जहां कोई बेघर नहीं ना कोई रहता है भूखा और सबको हेल्थकेयर फ्री
01-Dec-2021 1:54 PM (112)

 

भूटान एक ऐसा देश है, जहां सरकार सबको घर और भूखा नहीं रहने की गारंटी देती है. इसीलिए इस देश में आपको ना तो कोई भिखारी मिलेंगे और ना कोई बेघर. हर किसी के पास अपने मकान हैं. यहां के लोग आमतौर पर खुश जीवन गुजारते हैं. सबसे बड़ी बात ये भी है कि यहां आपका इलाज एकदम मुफ्त है. दवाओं का खर्च भी सरकार ही उठाती है. यहां कोई भूखा भी नहीं रहता. कुल मिलाकर इस मामले में ये देश एशिया का सबसे खुशहाल देश है.

भूटान में अब बेशक टीवी और इंटरनेट है लेकिन लंबे समय तक यहां पर इन दोनों सेवाओं पर इसलिए प्रतिबंध लगा रहा कि इसके जरिए विदेशों की जो संस्कृति यहां आएगी, उसका भूटान के लोगों और जीवन पर गलत असर पड़ेगा. लेकिन 1999 से इसे राजा द्वारा हटा लिया गया. आप ये कह सकते हैं कि भूटान दुनिया का आखिरी देश था जिसने टेलीविजन का इस्तेमाल शुरू किया.

इस देश में 2008 में लोगों की आंतरिक शांति का ख्याल रखने के लिए, सकल राष्ट्रीय खुशी समिति का गठन किया गया. यहां तक कि जनसंख्या जनगणना प्रश्नावली में एक कॉलम होता है, जहां आप संकेत कर सकते हैं कि आप अपने जीवन से संतुष्ट हैं या नहीं. यहां एक खुशी मंत्रालय भी है, जो सकल घरेलू खुशी को मापते हैं. यहां पर जीवन की गुणवत्ता उनके वित्तीय और मानसिक मूल्यों के बीच संतुलन से निर्धारित होती है.

भूटान में कोई सड़कों पर नहीं रहता. यदि कोई व्यक्ति अपना घर खो देता है, तो उसे बस राजा के पास जाने की जरूरत होती है, जो उन्हें जमीन का एक टुकड़ा देता है, जहां वे घर बना सकते हैं और सब्जियां लगा सकते हैं. भूटानी लोग खुद को खुश मानते हैं और अपने जीवन से संतुष्ट रहते हैं. प्रत्येक भूटानी निवासी को मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने का अधिकार है. भूटान में पारंपरिक और शास्त्रीय दोनों तरह की चिकित्सा आम है. एक व्यक्ति खुद ये करता है कि उसे किस विधि से उपचार कराना है.

भूटानी लोग पारंपरिक कपड़े पहनते हैं. पुरुष भारी, घुटने की लंबाई वाले वस्त्र पहनते हैं. महिलाएं लंबी पोशाक पहनती हैं. एक व्यक्ति की स्थिति और सामाजिक स्तर की पहचान उनके बाएं कंधे पर दुपट्टे के रंग से की जाती है. साधारण लोग सफेद दुपट्टा पहनते हैं. कुलीन लोग और साधु पीले रंग के कपड़े पहनते हैं.

ये लंबे समय तक अलग थलग देश रहा है. 1970 में पहली बार किसी विदेशी पर्यटक को यहां आने की इजाज़त दी गई थी. अब भी अधिकारी विदेशी प्रभाव पर कड़ी नज़र रखते हैं.

वैसे अब भूटान में चीज़ें तेज़ी से बदल रही हैं. राजधानी थिम्पू में अब स्मार्टफ़ोन और कराओके बार आम हो गए हैं. युवा यहां आबादी में बहुतायत में हैं और उन्होंने सोशल मीडिया को आसानी से स्वीकार कर लिया है.इसकी वजह से वहां स्ट्रीट फ़ैशन में उछाल आ गया है और राजनीति में ज़्यादा खुलकर चर्चा हो रही है.

भूटान पर्यावरण क्षेत्र में अग्रणी रहा है. प्लास्टिक की थैलियां वहां 1999 से ही प्रतिबंधित हैं. तंबाकू लगभग पूरी तरह से ग़ैरक़ानूनी है. क़ानूनन देश के 60% भाग में जंगल होने ही चाहिए.कमाल के प्राकृतिक दृश्यों और शानदार संस्कृति के बावजूद यह अब भी बड़े पैमाने पर पर्यटन से बचा रहा है और ऐसा जान-बूझकर किया गया है.वे बढ़ते पेड़ों पर भी विशेष ध्यान देते हैं. वैसे, 2015 में, भूटान ने एक विश्व रिकॉर्ड बनाया जब लोगों ने सिर्फ एक घंटे में 50,000 पेड़ लगाए.

भूटान का मुख्य निर्यात बिजली है, वह भारत को पनबिजली बेचता है. इसके अलावा लकड़ी, सीमेंट, कृषि उत्पाद और हस्तशिल्प का भी निर्यात करता है. भूटान के पास सेना है लेकिन चारों ओर से घिरा होने की वजह से नौसेना नहीं है. इसके पास वायुसेना भी नहीं है और इस क्षेत्र में भारत उनका ख़्याल रखता है.

अधिकांश भूटानी लोग बौद्ध हैं. चूंकि यह धर्म पूरे जानवरों की दुनिया के लिए सम्मान सिखाता है, इसलिए शाकाहार वास्तव में वहां आम है. मुख्य और मूल पकवान चावल है. वैसे, साधारण चावल ऐसे ऊंचाई पर विकसित नहीं हो पाएंगे, इसलिए लोग लाल चावल उगाते हैं, जो कि कठिन है और एक अजीब स्वाद है. लोग चाय पीने पर बहुत ध्यान देते हैं. वे नमक, काली मिर्च और एक चम्मच मक्खन के साथ काली और हरी चाय पीते हैं.

.भूटान में महिलाओं को सम्मानित और सम्मानित किया जाता है। और विरासत की उनकी परंपरा यह साबित करती है। सभी संपत्ति और सामान जैसे कि उनके घर, मवेशी और जमीन सबसे बड़ी बेटी को जाते हैं, बेटे को नहीं।भूटान में किसी भी रासायनिक उत्पादों को आयात या उपयोग करने के कानून के खिलाफ है. इसलिए वे जो कुछ भी उपयोग करते हैं वह देश के अंदर खेती की जाती है और पूरी तरह से प्राकृतिक है.

भूटान में, किसी विदेशी से शादी करना निषिद्ध है। राजा अपनी विशिष्टता और दुनिया के बाकी हिस्सों से अलगाव को संरक्षित करने के लिए वह सब कुछ करता है. हालांकि ये नियम वहां के राजा पर लागू नहीं होता. सभी आवश्यक अनुष्ठान किए जाने के बाद ही एक युगल परिवार बनता है. वैसे, एक नियम के रूप में, एक पुरुष एक महिला के घर आता है और जब वह पर्याप्त पैसा कमाता है, तो वे दूसरे घर में जा सकते हैं.

2006 में सत्ता ग्रहण करने वाले राजा जिग्मे खेसार नामग्येल वांगचुक को लोग पसंद करते हैं. वो देश में बड़े नाटकीय बदलाव लाए हैं. भारत, अमरीका और ब्रिटेन में पढ़े राजा की अब भी पूजा की जाती है और रानी जेटसुन पेमा बेहद लोकप्रिय हैं. देश में राजशाही और लोकतंत्र का मिलाजुला रूप है. उनके पिता ने ही इसकी शुरुआत कर दी थी जब 1998 में उन्होंने अपनी कुछ निरंकुश शक्तियों को छोड़ दिया था. अब वहां सरकार के हर स्तर पर चुनाव होते हैं.पहले आम चुनाव 2008 में हुए थे. इसमें सिर्फ़ दो पार्टियों ने हिस्सा लिया था और राजशाही से संबंधित भूटान पीस एंड प्रॉसपैरिटी पार्टी (डीपीटी) जीत गई थी. लेकिन 2013 में दूसरा चुनाव विपक्षी पार्टी पीपल्स डेमोक्रिटिक पार्टी (पीडीपी) ने जीता.वर्ष 2018 का चुनाव Druk Nyamrup Tshogpa पार्टी ने जीता, जो अभी वहां सत्ता में है. (news18.com)

छोटा सा मुंह फैलाकर सांप ने निगल लिया विशाल अंडा, रोंगटे खड़े कर देगा Video
01-Dec-2021 1:49 PM (127)

अजगर के बारे में ये मशहूर है कि बो बड़ी से बड़ी चीज़ को सीधा निगल सकता है. सांप भी इसी प्रजाति का जानवर है, तो क्या सांप भी चीज़ों को निगल सकता है? इस वक्त वायरल हो रहे एक खौफनाक वीडियो में सांप को एक बड़ा अंडा निगलते हुए देखा जा रहा है. जिस तरह वो अंडे को अपने छोटे से मुंह से निगलता है, वो देखकर आपको रोंगटे खड़े हो जाएंगे.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सांप का ये वीडियो वाकई डरा देने वाला है. आज तक आपने नहीं सोचा होगा कि नाग का मुंह इतना बड़ा फैल सकता है कि वो बड़े से अंडे को निगल जाए. हालांकि वायरल हो रहे वीडियो को देखकर आपको इस बात का यकीन हो जाएगा कि सांप उससे कहीं ज्यादा खतरनाक है, जितना आप सोचते आए हैं. इस डरावने वीडियो को आप अंत तक देखेंगे तो आपको इस जानवर की क्षमता का पता चल जाएगा.

अंडा निगलने की लगातार कोशिश
वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि एक सांप किसी ऐसी जगह पर है, जहां दो बड़े-बड़े अंडे रखे हुए हैं. इसी दौरान एक काले सांप की नजर इन अंडों पर पड़ती है. वो धीरे-धीरे अंडों के पास जाता है और उन्हें निगलने की कोशिश करता है. शुरुआत में सांप का छोटा सा मुंह देखकर आपको लगेगा कि सांप अंडा नहीं निगल पाएगा. फिर वो जिस तरह से अपने मुंह को अंडे के मुताबिक फैलाता है, उसे देखकर आप डर जाएंगे. वीडियो में देखा जा सकता है कि अंडा बड़ा होने की वजह से सांप आराम से उसे निगल नहीं पा रहा है. फिर धीरे-धीरे उसने अपना जो रूप दिखाया, तो बेहद डरावना था.

वीडियो का अंत देख दहल जाएगा दिल
वीडियो के अंत में मुंह फैलाते-फैलाते सांप अपने मुंह को इतना ज्यादा खोल देता है कि पूरा का पूरा अंडा उसमें समा जाता है. इस दौरान सांप के मुंह के आस-पास की त्वचा बेहद पतली हो जाती है और उसकी त्वचा के अंदर से भी अंडा दिखाई देने लगता है. सांप का ये रूप बहुत ही ज्यादा खतरनाक लग रहा है. वीडियो को ट्विटर पर @Animal_WorId नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है और इसे अब तक सैकड़ों लोग देख चुके हैं. (news18.com)

न पेरिस और न सिंगापुर, ये है दुनिया का सबसे महंगा शहर
01-Dec-2021 1:46 PM (205)

इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट ने दुनिया के सबसे महंगे शहरों की लिस्ट जारी की है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस लिस्ट में इजराइल के तेल अवीव शहर को टॉप पर रखा गया है. बुधवार को प्रकाशित सर्वे के मुताबिक तेल अवीव दुनिया का सबसे महंगा शहर है, जहां बढ़ती महंगाई ने वैश्विक स्तर पर रहने की लागत को बढ़ा दिया है. सबसे महंगे शहरों में पेरिस और सिंगापुर संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर हैं. वहीं, दमिश्क को रहने के लिए दुनिया का सबसे सस्ता शहर बताया गया.

इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (ईआईयू) द्वारा संकलित आधिकारिक रैंकिंग में पहली बार शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए इजरायली शहर पांच पायदान चढ़ गया. वर्ल्डवाइड कॉस्ट ऑफ लिविंग इंडेक्स 173 शहरों में वस्तुओं और सेवाओं के लिए अमेरिकी डॉलर में कीमतों की तुलना करके संकलित किया गया है.

तेल अवीव आंशिक रूप से अपनी राष्ट्रीय मुद्रा और साथ ही परिवहन और किराने के सामान की कीमतों में वृद्धि के कारण रैंकिंग में चढ़ गया है.

इस लिस्ट में पेरिस और सिंगापुर संयुक्त दूसरे स्थान पर रहे. फिर ज्यूरिख और हांगकांग का स्थान रहा. न्यूयॉर्क छठे स्थान पर है. स्विटजरलैंड का जिनेवा सातवें पायदान पर पहुंचा है.

शीर्ष 10 में आठवें स्थान पर कोपेनहेगन, नौवें में लॉस एंजिल्स और 10 वें स्थान पर जापान का ओसाका शहर रहा. पिछले साल सर्वेक्षण में पेरिस, ज्यूरिख और हांगकांग को संयुक्त रूप से पहला स्थान मिला था.

इस साल का डेटा अगस्त और सितंबर में एकत्र किया गया था, क्योंकि माल और वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई थी. यह दर्शाता है कि स्थानीय मुद्रा के संदर्भ में औसत कीमतों में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई. (news18.com)

भारत में डेल्टा वेरिएंट के कहर के दौरान भी कारगर रही Covishield- लैंसेट स्टडी
01-Dec-2021 1:45 PM (107)

Covishield Impact During Delta Surge: कोरोना वायरस के खिलाफ भारत में बनी वैक्सीन कोविशील्ड से जुड़ी एक अच्छी खबर सामने आई है. एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में छपी स्टडी के मुताबिक जिस वक्त कोरोना के डेल्टा वेरिएंट का कहर पीक पर था, उस वक्त कोविशील्ड वायरस के खिलाफ काफी प्रभावी पाई गई और इसने लोगों को सुरक्षा कवच देने का काम किया. अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल द लैंसेट इनफेक्शियस डिसीसेज में इस स्टडी के नतीजों को प्रकाशित किया गया है. ये स्टडी  भारतीय रिसर्चस ने अप्रैल-मई 2021 के बीच तब की थी, जब देश में डेल्टा वेरिएंट ने कहर मचा रखा था.

ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट की अगुवाई में हुई रिसर्च के मुताबिक दोनों डोज लेने वाले लोगों पर कोविशील्ड 63% असरदार रही. वहीं मध्यम से गंभीर बीमारी में यह 81% असरदार पाई गई. स्टडी के दौरान संक्रमण के 2379 केस के बीच तुलना की गई. इसमें पाया गया कि वैक्सीन से मिला इम्यून प्रोटेक्शन विभिन्न वेरिएंट के खिलाफ कमजोर इम्यूनिटी की भरपाई कर सकता है. यही नहीं, ये वैक्सीन मीडियम से गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत को रोकती है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि स्टडी वास्तविक दुनिया के टीके की प्रभावकारिता पर व्यापक डाटा देती है.

ऑमीक्रॉन की दस्तक 
इस स्टडी के नतीजे ऐसे समय में सामने आए हैं, जब दुनिया के सामने कोरोना के नए ओमीक्रॉन वेरिएंट या बी.1.1.529 ने दस्तक दे दी है. सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में समाने आए इस नए वेरिएंट के अब तक 19 देशों में केस मिल चुके हैं. सबसे ज्यादा 77 मामले साउथ अफ्रीका में ही मिले हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने इसे “चिंता के प्रकार” के रूप में नामित किया है. इसके बाद से ही विश्वभर में खतरे की घंटी बज चुकी है. डब्ल्यूएचओ ने कहा कि ओमीक्रॉन वेरिएंट विश्व स्तर पर “बहुत अधिक” जोखिम वाला संस्करण है.

डब्ल्यूएचओ ने इस बात पर जोर दिया कि अभी यह बताना मुश्किल होगा कि यह कितना संक्रामक और खतरनाक हो सकता है. हालांकि, भारत में ओमीक्रॉन का एक भी मामला सामने नहीं आया है. भारत के स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने राज्यसभा में बताया कि देश में ओमीक्रॉन का भारत में अभी एक भी केस नहीं मिला है.

6 महीने में बूस्टर डोज संभव 
भारत में कोविशील्ड का प्रोडक्शन कर रही कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के प्रमुख पूनावाला ने कहा कि ऑक्सफोर्ड में वैज्ञानिक ओमीक्रॉन वेरिएंट पर कोविशील्ड की प्रभावकारिता का विश्लेषण कर रहे हैं. हम 6 माह में नई वैक्सीन ला सकते हैं, जो बूस्टर डोज की तरह काम करेगी. (news18.com)

पाकिस्तानी सेना से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- सिनेमा हॉल और घर बनेंगे तो रक्षा का क्या होगा
01-Dec-2021 1:43 PM (113)

 

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कराची में तमाम ग़ैर-क़ानूनी इमारतें ध्वस्त की जा रही हैं तो ऐसा नहीं हो सकता है कि फ़ौज के ग़ैर-क़ानूनी ढांचों को छोड़ दिया जाए.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुलज़ार अहमद और जस्टिस क़ाज़ी अमीन ने कैंटोनमेंट की अपील पर व्यावसायिक गतिविधियों के ख़िलाफ़ सुनवाई पूरी की तो मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुलज़ार अहमद ने कहा कि सेना के ग़ैर-क़ानूनी ढांचों को छोड़ दिया तो बाक़ी को कैसे गिराएंगे.

जस्टिस गुलज़ार अहमद ने कहा कि देश की ज़मीन का शोषण नहीं किया जा सकता है, सेना जिन क़ानूनों का सहारा लेकर कैंटोनमेंट की ज़मीन पर व्यवयासिक गतिविधियां करती है वो ग़ैर-संवैधानिक हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में रक्षा सचिव की रिपोर्ट को असंतोषजनक क़रार देते हुए कहा कि कैंटोनमेंट की तमाम ज़मीनें असली सूरत में बहाल करनी होंगी.

क्या है मामला
कैंट
ग़ौरतलब है कि बीते हफ़्ते बुधवार के दिन कराची में अतिक्रमण और कल्याणकारी उद्देश्य से आवंटित की गई ज़मीन के मामले में सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुलज़ार अहमद ने अपने आदेश में कहा था कि कैंटोनमेंट की ज़मीनों पर हाउसिंग और व्यापारिक गतिविधियां कैंटोनमेंट एक्ट 1924 और लैंड एक्विज़िशन एक्ट 1937 का उल्लंघन है.

कराची में सेना के हाथों आईजी सिंध के कथित अपहरण की घटना के बाद, लेफ़्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम को हुमायूं अज़ीज़ की जगह कराची का कोर कमांडर नियुक्त किया गया था.
फ़ैज़ हमीद का दौर ख़त्म, ISI के नए प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम कौन हैं?
समाप्त
सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ पाकिस्तान ने कहा था कि कैंटोनमेंट बोर्ड को केंद्र और राज्य सरकारों ने जो ज़मीनें आवंटित की हैं वो सिर्फ़ कैंट उद्देश्यों के लिए हैं और वहां व्यावसायिक और हाउसिंग उद्देश्य ग़ैर-क़ानूनी हैं.

दूसरी ओर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट कराची रजिस्ट्री में रक्षा सचिव पेश हुए थे और उन्होंने कहा था कि भविष्य में कैंटोनमेंट की ज़मीनें रक्षा उद्देश्यों के अलावा किसी काम के लिए इस्तेमाल नहीं की जाएंगी और इसको लेकर उन्हें सशस्त्र बलों के प्रमुखों ने सूचित कर दिया है.

'अफ़सरों को घर देना रक्षा उद्देश्यों में नहीं आता'
मंगलवार को इस्लामाबाद में इस केस की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीस जस्टिस गुलज़ार अहमद ने कहा कि 'फ़ौज के साथ कोई क़ानूनी सहायता नहीं होती है, वो जो चाहते हैं करते रहते हैं, समझ नहीं आता कि रक्षा मंत्रालय कैसे इन गतिविधियों को बरक़रार रखेगा.'

मुख्य न्यायाधीश ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि 'अटॉर्नी जनरल साहब फ़ौज को क़ानून कौन समझाएगा?'

मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 'सिनेमा, शादी हॉल और घर बनाना अगर रक्षा गतिविधियां हैं तो फिर रक्षा क्या होगी?'

उन्होंने कहा कि 'सिर्फ़ कराची का मामला नहीं है पूरे देश का यही हाल है, क्वेटा, लाहौर में भी रक्षात्मक ज़मीनों पर शॉपिंग मॉल बने हुए हैं.'

सुनवाई समाप्त करते हुए मुख्य न्यायाधीश गुलज़ार अहमद ने पूछा कि 'क्या सिनेमा, शादी हॉल, स्कूल और घर बनाना रक्षात्मक उद्देश्यों में है?'

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि 'वरिष्ठ फ़ौजी अफ़सरों को घर देना रक्षात्मक उद्देश्यों में नहीं आता, फ़ौज को मामूली कारोबार के लिए अपने बड़े उद्देश्यों पर समझौता नहीं करना चाहिए और अपने संस्थानों के सम्मान का ध्यान रखना चाहिए.'

मुख्य न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी में कहा कि 'कैंटोनमेंट को ज़मीन रक्षा उद्देश्यों को पूरा होने के बाद सरकार को वापस करनी होती है.'

जस्टिस क़ाज़ी अमीन ने कहा कि 'सैन्य गतिविधियों के लिए गेरिसन और रिहाइश के लिए कैंटोनमेंट होते हैं.'

इस मौक़े पर रक्षा सचिव ने अदालत को बताया कि क़ानून के उल्लंघन की जांच के लिए तीनों सेनाओं की एक संयुक्त समिति बना दी गई है.

अदालत ने कहा कि 'कैंटोनमेंट की तमाम ज़मीन असल हालत में बहाल करनी होगी और संविधान के अनुसार सेना के सभी नियमों और विनियमों की समीक्षा की जाए.'

सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा सचिव से चार हफ़्तों के अंदर इसकी कार्यान्वयन रिपोर्ट मांगी है. (bbc.com)

15 साल के छात्र ने स्कूल में की अंधाधुंध फायरिंग, तीन की मौत, आठ जख्मी
01-Dec-2021 1:29 PM (103)

वाशिंगटन : मंगलवार को एक 15 साल के छात्र ने अपने मिशिगन हाई स्कूल में गोलियां बरसा दीं. घटना में तीन किशोरों की मौत हो गई और आठ अन्य लोग घायल हो गए. ओकलैंड काउंटी शेरिफ कार्यालय ने कहा है कि आठ घायलों में एक शिक्षक सहित सात अन्य हैं. घटना तब हुई, जब कक्षाएं चल रही थीं. बताया जा रहा है कि मृतकों में एक 16 वर्षीय किशोर, एक 14 वर्षीया और एक 17 वर्षीया किशोरी शामिल हैं. घायलों में से छह की हालत स्थिर है और दो की सर्जरी की जा रही है.  हमले को लेकर कारण स्पष्ट नहीं हो सका है.

इस घटना में शामिल आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है. उसके पास से एक सेमी-ऑटोमैटिक हैंडगन को जब्त किया गया है. बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के दौरान उसने कोई विरोध नहीं जताया. उसने एक वकील की मांग की है. घटना के संबंध में उसने कोई बयान नहीं दिया है.  

वहीं इस संबंध में अंडरशेरिफ माइकल मैककेबे ने कहा कि यह बहुत दुखद स्थिति है. माता-पिता परेशान हैं. बता दें कि आरोपी ने पांच मिनट में 15-20 राउंड फायरिंग की.  फायरिंग की घटना के तुरंत बाद उसे हिरासत में ले लिया गया. आरोपी आज क्लास में था और अकेले हमले को अंजाम दिया. मैककेबे ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पीड़ितो को निशाना बनाकर उसने फायरिंग की घटना को अंजाम दिया गया था या बेतरतीब ढंग से ऐसे ही गोलियां चला दी थीं. आरोपी छात्र अभी बात नहीं कर रहा है. पुलिस स्कूल में घटनास्थल की तलाशी ले रही है. (ndtv.in)
 

गजब ! दुनिया की पहली ऐसी बस, जो सड़क पर भी चलेगी और पटरी पर भी दौड़ेगी
01-Dec-2021 11:43 AM (121)

 

जापान में दुनिया की पहली ऐसी गाड़ी बनाई गई है, जिसकी क्षमता सड़क के साथ-साथ रेलवे ट्रैक पर भी दौड़ने की होगी. ये एक बस होगी, जो सड़क और ट्रैक पर आराम से चल सकेगी. पहले कहा जा रहा था कि टोक्यो ओलंपिक तक बस का संचालन शुरू हो जाएगा लेकिन अब ये बस क्रिसमस के आस-पास लोगों के लिए चलाने की योजना बनाई गई है.

बस का शुरुआती ट्रायल कामयाब होने के बाद सरकार इसे दो राज्यों के बीच चलाने की प्लानिंग में है. दुनिया में अपनी तरह का ये पहला वाहन है. इसका संचालन जापान की कंपनी एसा सीसाइड रेलवे कर रही है. शुरू में इस बस को केइओ, टोकूमिशा, मुरोतो और कोची के बीच चलाया जाएगा. ड्यूल मोड व्हीकल का रूट ऐसा बनाया जाएगा कि ये सड़क और रेल पटरी, दोनों से होकर गुजरे. इस वाहन की शुरुआत क्रिसमस पर शिकोकु से की जाएगी.

पटरी और सड़क पर कैसे चलेगी बस ?
Dual Mode Vehicle के रूट के मुताबिक ये 6 किलोमीटर सड़क पर चलेगा और 10 किलोमीटर रेलवे ट्रैक पर दौड़ेगा. जापानी मीडिया के मुताबिक इस तरह का वाहन तैयार करने के लिए माइक्रोबस में ही कुछ संसोधन किए गए हैं. इसमें ऐसे पहिये लगाए गए हैं, जो रेल की पटरी पर चलने के लिए उपयुक्त हैं. जब बस को सड़क पर चलना होगा तो ये पहिये ऊपर की ओर उठ जाते हैं और सामान्य रूप से बस टायर के सहारे चलने लगती है. इसी तरह कहीं भी ज़रूरत होने पर इन्हें स्विच किया जा सकेगा.

दिन में 13 राउंड लगाएगी अनोखी बस
बस में कुल 18 यात्रियों के बैठने की जगह है. चूंकि ये बस खुद को रास्ते के मुताबिक स्विच कर सकती है, ऐसे में लोग इसमें बैठने के लिए उत्साहित होंगे. क्रिसमस से इसकी आधिकारिक शुरुआत होने के बाद हर दिन ये अपने रूट पर 13 राउंड लगाएगी. इस खास बस में यात्रा करने के लिए पहले ही लोगों को अपनी टिकट बुक करानी होगी, जो ऑनलाइन रिजर्वेशन के तहत हो सकेगी. जापानी सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और डेमो वायरल हो रहा है और लोग इसे काफी पसंद भी कर रहे हैं. (news18.com)

आर्टिस्ट ने इंक पेन से किया करिश्मा, बनाई ऐसी खूबसूरत तस्वीर कि दंग रह गए लोग!
01-Dec-2021 11:42 AM (128)

 

दुनिया में जितने हाथ हैं, उतने ही चित्र हो सकते हैं मगर उन तमाम चित्रों को करिश्मा नहीं कहा जा सकता. क्योंकि करिश्मा सिर्फ उन्हीं हाथों से होता है जिनका हुनर औरों से अलग होता है. सोशल मीडिया पर कई आर्टिस्ट्स के ड्रॉइंग वीडियोज वायरल होते रहते हैं. आज हम आपको एक ऐसा वीडियो दिखाएंगे जिसे देखकर आपकी आंखें खुली की खुली रह जाएंगी. वायरल हो रहे इस वीडियो को आर्टिस्ट ने इंक पेन से बनाया है.

यूनीलैड नाम के फेसबुक पेज पर हाल ही में एक बेहद खूबसूरत वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में आर्टिस्ट फाउंटेन पेन का इस्तेमाल कर के ऐसे-ऐसे चित्र बना रहा है जिसे देखकर लोग हैरान हो जा रहे हैं. बड़ी बात ये है कि इंक पेन से कई बार ज्यादा मात्रा में भी इंक निकल जाती है ऐसे में वो बिना काट-छांट किए, या पेंटिंग को गलत किए बहुत ही सुंदर चित्र बना रहा है.

बेहद खूबसूरत हैं शख्स की पेंटिंग्स
वीडियो के पहले चित्र में शुरुआत देखकर लगता है कि आर्टिस्ट बस यूं ही टेढ़ी-मेढ़ी लाइनें बना रहा है मगर जब वो अपने चित्र को पूरा करते हैं तो एक फुटबॉलर की छवि बनकर बाहर आती है जो बॉल को किक मारते हुए नजर आ रहा है. उनकी पेंटिंग्स की यही खासियत है कि शुरुआत में कोई बता ही नहीं सकता कि वो किस चीज का चित्र बना रहे हैं मगर जैसे-जैसे चित्र पूरा होता जाता है वैसे-वैसे उसकी खूबसूरती का अंदाजा लगता है. वीडियो देखकर ये भी पता चल रहा है कि आर्टिस्ट ने कलम चलाने में महारथ हासिल की है.

सोशल मीडिया पर लोग हो जा रहे दंग
आपको बता दें कि ये वीडियो आइगोर चिबिलयेनाम के एक पेंटर का है. इंस्टाग्राम पर उन्हें 25 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं. और उनकी वेबसाइट पर भी उनके कार्य के खूबसूरत नमूने देखने को मिल जाएंगे. फेसबुक पर वायरल हो रहे वीडियो पर लोग कमेंट कर अपनी हैरानी जाहिर कर रहे हैं. लोगों ने कहा कि उनके पेन चलाने के तरीके और निरंतर निकलने वाली इंक को देखकर बहुत अच्छा मेहसूस हो रहा है. जबकि कुछ लोग तो उनके जैसा पेन खरदीने की बात कर रहे हैं. इस बात पर लोगों का ये भी कहना है कि पेन के कारण पेंटिंग सुंदर नहीं लग रही है बल्कि आर्टिस्ट के कारण वो खूबसूरत नजर आ रही है. (news18.com)

अच्छी-भली ज़िंदगी छोड़ ठंडे 'नर्क' में पहुंचा शख्स ! जानलेवा ठंड में करता रहा घुड़सवारी
01-Dec-2021 11:41 AM (110)

हर कोई एक सेटल ज़िंदगी चाहता है, जहां अच्छी नौकरी और सुकून देने वाला घर हो. ब्रिटेन के हर्टफोर्डशायर में रहने वाले निकिता ग्रेट्सी के पास ये सब कुछ था. 23 साल के निकिता एक रेस्टोरेंट में मैजनेर थे और अच्छी-खासी ज़िंदगी जी रहे थे. इसी बीच उन्हें एक दिन न जाने क्या सूझी कि उन्होंने नौकरी छोड़ी और सोलो ट्रैवलिंग पर निकल गए. ये यात्रा कोई रिलैक्सिंग वेकेशन नहीं बल्कि उनके धैर्य और सहनशक्ति की परीक्षा थी.

निकिता ग्रेत्सी ने साल 2019 में ही साइबेरिया का रुख कर लिया और ऐसी-ऐसी जगहों पर ट्रेकिंग के लिए गए, जो सीधा मौत का बुलावा थीं. उन्होंने जंगली घोड़ों के साथ हज़ारों किलोमीटर की ट्रेकिंग की  और ये साबित किया है कि सामान्य लोग ही असाधारण चीज़ें करके दिखाते हैं. उनके इस जुनून के बारे में सोचकर ही आपको ठंड का एहसास होने लगेगा क्योंकि साइबेरिया में सामान्य तौर पर तापमान माइनस से 30 डिग्री नीचे ही रहता है.

सकून भरी ज़िंदगी छोड़ ठंडे नर्क में पहुंचे
ग्रेत्सी वेल्विन गार्डेन सिटी के अच्छे रेस्टोरेंट में मैनेजर की नौकरी करते थे और अपने लिए सुख-सुविधाओं भरी ज़िंदगी अफोर्ड कर सकते थे. उन्होंने साल 2019 में अपनी सेविंग्स को ट्रेनिंग कैंप्स में लगाया और खतरनाक ट्रेकिंग के लिए निकल गए. अपने इस ट्रिप में उन्हें -60°C के तापमान में रहना पड़ा. वहां ठंड इतनी ज्यादा था कि इंसान के फेफड़े तक जमने लगें. उन्होंने डिक्टेटर स्टालिन की बनवाई हुई कुख्यात रोड ऑफ बोन्स की भी यात्रा की. ये सड़क सोवियत के तानाशाह स्टालिन ने कैदियों से जमाने वाली ठंड में बनवाई थी. निकिता बताते हैं कि वे अपने आपको टेस्ट करना चाहते थे कि वे किन परिस्थितियों में सर्वाइव कर सकते हैं.

ज़िंदगी का असल लुत्फ़ उठाया
3 महीने तक हांड कंपाने वाली ठंड में जंगली घोड़ों पर सवार होकर ग्रेत्सी घूमते रहे. वे खुद बताते हैं कि कई बार उनके साथ ऐसी घटनाएं हुईं कि उन्हें लगा कि अब ज़िंदा नहीं बचेंगे. मौत से बचकर निकल जाने के अपने अनुभव को वो ज़िंदगी का सबसे अलग अनुभव बताते हैं. खतरनाक भालुओं से भरी हुई जगहों पर घुड़सवारी करने के बाद ग्रेत्सी कहते हैं कि उन्हें इससे ज्यादा मज़ा पहले कभी नहीं आया. उन्होंने करीब 9000 किलोमीटर की ट्रेकिंग कर डाली. ग्रेत्सी के माता-पिता रूसी और यूक्रेन मूल के हैं और वे 7 साल की उम्र में ही इंग्लैंड आ गए थे. इस सफर से लौटने के बाद वे एक बार फिर वहां जाना चाहते हैं, जिसके लिए वे वीज़ा की प्रक्रिया भी पूरी कर रहे हैं. (news18.com)

जानें कौन से हैं 2021 के बेस्ट Apps और Games, गूगल ने जारी की प्ले स्टोर की Best of 2021 लिस्ट...
01-Dec-2021 11:40 AM (124)

गूगल ने ऑफिशियलमी अपने यूट्यूब रिवाइंड को बंद कर दिया है, लेकिन कंपनी साल खत्म होने वाले अपने बाकी ट्रैडिशन अभी भी फॉलो कर रही है. इसी बीच गूगल ने गूगल प्ले की बेस्ट ऑफ 2021 लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें प्ले स्टोर के टॉप ऐप्स और गेम्स पा पता चला है. जैसे कि पिछले साल लिस्ट ऐप और गेम के लिए यूज़र चॉइस, बेस्ट ऐप, बेस्ट गेम जैसी कई कैटेगरी शामिल थी. आइए देखते हैं Google Play’s Best of 2021 की लिस्ट.

गूगल के मुताबिक आइए जानते हैं कौन से हैं 2021 के बेस्ट ऐप्स और गेम्स…
बेस्ट ऐप ऑफ 2021 (इंडिया) Bitclass: Learn Anything. Live. Together!
बेस्ट गेम ऑफ 2021 (इंडिया): Battlegrounds Mobile India

बेस्ट ऐप्स फॉर फन
FrontRow: Learn Singing, Music, Rap, Comedy & More
Clubhouse: The Social Audio App
Hotstep

बेस्ट ऐप्स फॉर एवरेडी एसेंशियल
Sortizy – Recipes, Meal Planner & Grocery Lists
SARVA – Yoga & Meditation
Guardians from Truecaller

बेस्ट ऐप्स फॉर पर्सनल ग्रोथ
Bitclass: Learn Anything. Live. Together!
EMBIBE: Learning Outcomes App
Evolve Mental Health: Meditations, Self-Care & CBT Best Hidden Gems
Jumping Minds – Talk & Feel Better
Learn Product Management & Marketing Skills @ FWD
Moonbeam I Podcast Discovery

बेस्ट ऐप्स फॉर गुड
Evergreen Club – Health, Fitness, Fun & Learning
being: your mental health friend
Speechify – text to speech tts

बेस्ट ऐप्स फॉर टैबलेट्स
Houzz – Home Design & Remodel
Canva
Concepts: Sketch, Note, Draw

बेस्ट ऐप्स फॉर  वियर
My Fitness Pal
Calm
Sleep Cycle: Sleep analysis & Smart alarm clock
बेस्ट ऑफ 2021 गेम्स इन इंडिया
बेस्ट Competitive गेम्स
Battlegrounds Mobile India
Summoners War: Lost Centuria
MARVEL Future Revolution
Pokemon Unite
Suspects: Mystery Mansion

बेस्ट गेम चेंजर
JanKenUP!
Unmaze – a myth of shadow & light
NieR Re[in]carnation
Tears of Themis

बेस्ट इंडी गेम्स
DeLight: The Journey Home
Huntdown
My Friend Pedro
Ronin: The Last Samurai
Bird Alone

बेस्ट पिक अप & प्ले
Cats in Time – Relaxing Puzzle Game
Crash Bandicoot: On the Run!
Dadish 2
Disney POP TOWN
Switchcraft: The Magical Match 3

बेस्ट गेम्स फॉर Tablets
Chicken Police – Paint it RED!
My Friend Pedro: Ripe for Revenge
Overboard!
The Procession to Calvary.

(news18.com)

 

PAK आर्मी को झटका, SC ने कहा-फौज का काम मुल्क की हिफाजत, बिजनेस करना नहीं
01-Dec-2021 11:36 AM (176)

 

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने चार दिन में दूसरी बार ताकतवर फौज को बड़ा झटका दिया है. चीफ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान गुलजार अहमद की बेंच ने मंगलवार को फौज से कहा- ‘आपको सरकारी जमीन रक्षा उद्देश्य से दी गई है. अगर इसका इस्तेमाल बिजनेस के लिए हो रहा है, तो यह मंजूर नहीं किया जा सकता. आर्मी यह जमीन सरकार को वापस कर दे. आर्मी का काम मुल्क की हिफाजत करना है, न कि बिजनेस करना.’ चार दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा सचिव को तलब कर कहा था कि वो लिखित में ये बताएं कि मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए दी गई जमीन पर शादी हॉल और मूवी थिएटर क्यों और किसकी मंजूरी से बनाए जा रहे हैं.

चीफ जस्टिस गुलजार अहमद की बेंच पाकिस्तान सेना के सरकारी जमीन के बेचने के एक मामले में सुनवाई कर रही है. इसमें जस्टिस काजी मोहम्मद अमीन अहमद और जस्टिस एजाज-उल-अहसान भी शामिल हैं. मंगलवार को बेंच के सामने डिफेंस सेक्रेटरी लेफ्टिनेंट जनरल मिया मोहम्मद हिलाल पेश हुए. बेंच ने उनसे कहा- ‘आपको सरकारी जमीन इसलिए दी गई थी, ताकि इसका इस्तेमाल आप सैन्य कार्यों के लिए करें. आप वहां सिनेमा हॉल, शादी हॉल, पेट्रोल पम्प और शॉपिंग मॉल्स बना रहे हैं. यह कारोबार नहीं तो और क्या है?’

सम्मान की चिंता कीजिए
इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा- ‘अवाम फौज का सम्मान करती है. आपके इन कामों क्या संदेश जाएगा. कराची हो या कोई दूसरा कैंटोन्मेंट एरिया, आपने हर जगह यही किया है. हमने आपकी रिपोर्ट देखी है, इससे हम कतई संतुष्ट नहीं हैं.’ इस पर डिफेंस सेक्रेटरी ने कहा- ‘हम आपको पूरी रिपोर्ट और फोटोज देना चाहते हैं. अटॉर्नी जनरल इसे तैयार कर रहे हैं. चार हफ्ते में रिपोर्ट आपके सामने रखी जाएगी.’ इस पर कोर्ट ने चार हफ्ते की मोहलत दे दी.

मुल्क की हिफाजत ही कीजिए
जस्टिस अमीन ने डिफेंस सेक्रेटरी से कहा- ‘फौज का काम सरहदों पर मुल्क की हिफाजत करना है, आप लोग तो खुलेआम कारोबार कर रहे हैं और इसके लिए किसी तरह की मंजूरी लेना भी शान के खिलाफ समझते हैं. आपके कई अफसरों ने सरकारी जमीन पर घर बनाकर उन्हें लाखों रुपये में बेच दिया. आप इस बारे में भी चार हफ्ते में रिपोर्ट सौंपें.’ (news18.com)

फ्रांस: टीवी पर्सनैलिटी एरिक जेमो अब लड़ेंगे राष्ट्रपति चुनाव, इस्लाम को बनाते रहे हैं निशाना
01-Dec-2021 11:35 AM (138)

 

पेरिस. फ्रांस की राजनीति में टीवी पर्सनैलिटी एरिक जेमो इन दिनों खूब चर्चा में हैं. दक्षिणपंथी विचारधारा के एरिक जेमो ने साल 2022 में फ्रांस का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. इन दिनों उनके बारे में टीवी चैनलों और अखबारों में जितनी प्रमुखता से खबरें छप रही हैं, उतनी किसी दूसरे नेता के बारे में नहीं. जनमत सर्वेक्षणों में भी उनकी लोकप्रियता बढ़ रही है. इससे अब जेमो को अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में एक मजबूत दावेदार समझा जाने लगा है.

पिछले हफ्ते आए एक सर्वे में एरिक जेमो ने धुर दक्षिणपंथी नेता मेरी ली पेन को पछाड़ दिया. हैरिस इंटरेक्टिव पॉल में बताया गया कि जेमो को 17 फीसदी मतदाताओं का समर्थन मिल रहा है, जबकि ली पेन को 15 फीसदी का. सर्वे में 24 फीसदी समर्थन के साथ राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों सबसे ऊपर आए.

इस्लाम को बनाते रहे हैं निशाना
जेमो की खूबी भड़काऊ भाषण देना है. वे अपने भाषणों में इस्लाम को निशाना बनाते हैं. इससे फ्रांस में सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ा है, लेकिन उसका सियासी फायदा जेमो को मिल रहा है. उनके समर्थकों का कहना है कि जेमो ताजा हवा के एक झोंके की तरह आए हैं. वे उन बातों को कह रहे हैं, जिन्हें दूसरे नेता बोलने से बचते हैं. जबकि जेमो को नफरत भड़काने के एक मामले में सजा हो चुकी है.

पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वां ऑलोंद के सलाहकार रह चुके जेसपार्ड गैंतजर ने वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू से कहा- ‘जिस तरह ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया को उसकी औकात बताने की कोशिश की थी, वैसा ही जेमो ने फ्रांस मे किया है. वे मीडिया की सुर्खियों में इसलिए हैं, क्योंकि उनके भड़काऊ बयानों को ज्यादा दर्शक या पाठक मिलते हैं.’

ट्रंप और जेमो में कई समानताएं
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप और जेमो में कई समानताएं हैं. दोनों की जिंदगी लगभग एक जैसी रही है और उनके विचार भी समान हैं. ट्रंप की तरह की जेमो की लोकप्रियता टीवी न्यूज चैनलों पर उनके बारे में लगातार कवरेज से बढ़ी है. दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि वे पेशेवर राजनेता नहीं हैं. वे आव्रजकों (इमिग्रेंट्स) के खिलाफ ट्रंप जैसी ही आक्रामक भाषा बोलते हैं.

हाल में जेमो ने मांग की कि फ्रांस में जन्म लेने वाले हर व्यक्ति के लिए कैथोलिक मत के मुताबिक नाम रखना अनिवार्य कर दिया जाए. उन्होंने कहा कि उससे समाज में समरूपता बढ़ेगी. समाजशास्त्री फिलिपे कॉरकफ ने वेबसाइट पॉलिटिको से कहा- ‘अंतर सिर्फ यह है कि ट्रंप ने बुद्धिजीवियों के खिलाफ मुहिम चला रखी थी, जबकि जेमो खुद को बुद्धिजीवी मानते हैं. फ्रांस में राष्ट्रपति बनने के लिए बौद्धिकता का लबादा ओढ़ना पड़ता है. मैक्रों ने दार्शनिक पॉल रिकॉये के साथ अपनी निकटता को प्रचारित किया था. इसलिए जेमो खुद को बैद्धिक ट्रंप के रूप में पेश करना चाहते हैं.’ 

मीडिया वॉचडॉग एक्रिमेड के मुताबिक, पिछले महीने जेमो को टीवी चैनलों पर 11 घंटे का समय मिला, जबकि सोशलिस्ट उम्मीदवार एनी हिदालगो को सिर्फ दो घंटे का वक्त ही मिल पाया. ली पेन को भी दो घंटे से कुछ ही ज्यादा समय दिया गया. (news18.com)

Elon Musk की स्‍पेसएक्‍स भी हो सकती है दिवालिया, टेस्ला के सीईओ ने क्‍यों कही ये बात? जानिए
01-Dec-2021 11:33 AM (143)

 

नई दिल्ली. एलन मस्क ने कहा है कि गंभीर वैश्विक मंदी के कारण स्पेसएक्स भी दिवालिया हो सकती है. हालांकि इसकी संभावना नहीं है, लेकिन यह असंभव भी नहीं है. स्पेसएक्स के सीईओ ने मंगलवार को मेमो के बारे में एक लेख का जवाब देते हुए यह बात कही.

इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्‍ला के संस्‍थापक एलन मस्क ने कहा कि अगर रैप्टर इंजन की समस्याओं को ठीक नहीं किया गया तो स्पेसएक्स दिवालिया होने के संभावित जोखिम का सामना कर सकता है. उन्होंने रैप्टर प्रोडक्शन के मुद्दे पर सबसे बड़ी संभावित अड़चन होने के बारे में एक ट्वीट का ‘हां’ में जवाब दिया, जबकि कंपनी स्टारशिप और स्टारलिंक पर भारी मात्रा में खर्च कर रही है.

जानिए क्या कहा मस्क ने?
एलन मस्क ने अपने जवाब में कहा, “अगर एक गंभीर वैश्विक मंदी के कारण पूंजी उपलब्धता कम हो जाती है, जबकि स्पेसएक्स को स्टारलिंक और स्टारशिप पर अरबों का नुकसान हो रहा है तो दिवालियापन की संभावना है.” मस्क ने यह भी कहा कि स्टारशिप कार्यक्रम के परिमाण को पूरी तरह से सराहा नहीं गया है.

चिप संकट से मस्क हैं परेशान
दुनियाभर में छाए चिप या सेमीकंडक्टर की कमी का संकट टेस्‍ला जैसी एडवांस कार कंपनी के लिए भी परेशानी का सबब बना हुआ है. कंपनी के सीईओ Elon Musk तो इस कदर परेशान है कि उन्होंने सप्लाई चेन के मुद्दे पर 2021 की तुलना एक बुरे सपने से कर दी.

इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाने वाली अमेरिकी कंपनी टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क से ट्विटर पर जब कुछ यूजर्स ने कंपनी के आने वाली टेस्‍ला कारों के बारे में पूछा तो  उन्होंने कहा, ओह दोस्त! यह साल सप्लाई चेन को लेकर एक नाइटमेयर (बुरा सपना) रहा है और ये अब भी खत्म नहीं हो रहा है. (news18.com)

उत्तर पश्चिमी तुर्की में तेज आंधी तूफान के कारण 6 लोगों की मौत : मीडिया रिपोर्ट
01-Dec-2021 10:42 AM (146)

इस्तांबुल, 1 दिसम्बर | स्थानीय मीडिया के अनुसार, तुर्की के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में तेज आंधी तूफान ने कम से कम छह लोगों की जान ले ली और 50 से अधिक घायल हो गए। तुर्की के एक टीवी समाचार चैनल एनटीवी ने मंगलवार को कहा कि 16 मिलियन से अधिक की आबादी वाले तुर्की के सबसे बड़े शहर इस्तांबुल में चार लोगों की मौत हो गई और 46 अन्य घायल हो गए।

रिपोर्ट के अनुसार, खराब मौसम ने दो और लोगों की जान ले ली और उत्तरी प्रांतों कोकेली और जोंगुलडक में कई अन्य घायल हो गए।

जहाज फंस गए हैं और तेज हवाओं के कारण स्कूलों को बंद करना पड़ा है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, तेज हवा के झोंकों के कारण मोटरसाइकिल चालकों को बोस्फोरस पुलों को पार करना मुश्किल हो गया है।

स्थानीय समय (1500 जीएमटी), सोमवार को इस्तांबुल के गवर्नर कार्यालय ने एक लिखित बयान में कहा कि शाम छह बजे तक सड़क पर मोटरसाइकिल और इलेक्ट्रिक स्कूटर पर रोक लगा दी गई।

तुर्की की राष्ट्रीय ध्वज एयरलाइन टर्किश एयरलाइंस के अनुसार, तूफान ने इस्तांबुल के लिए जाने वाले विमानों को बाधित कर दिया है। (आईएएनएस)

 

वैश्विक टीकाकरण अभियान ही महामारी को रोकने का है उपाय : संयुक्त राष्ट्र प्रमुख
01-Dec-2021 10:29 AM (173)

संयुक्त राष्ट्र, 1 दिसम्बर | संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि एक वैश्विक महामारी से और इस अन्यायपूर्ण और अनैतिक स्थिति से बाहर निकलने का एकमात्र तरीका वैश्विक टीकाकरण अभियान है। महासचिव 77 (जी77) और चीन के समूह के विदेश मंत्रियों के साथ न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक बैठक में बोल रहे थे, जहां उन्होंने कहा कि विकसित और विकासशील देशों पर समान रूप से कोविड -19 महामारी का कहर जारी है।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित टीकाकरण रणनीति के पीछे खड़ा है, जिसका लक्ष्य 2021 के अंत तक सभी देशों के 40 प्रतिशत लोगों और 2022 मध्य तक 70 प्रतिशत लोगों को टीके लगाना है।

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने एसीटी-त्वरक और कोवैक्स सुविधा के लिए समर्थन मांगते हुए कहा कि हर जगह, हर किसी के पास तक कोविड -19 टीके, परीक्षण और उपचार की पहुंच होनी चाहिए।

गुटेरेस ने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था के 2021 में 5.9 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन रिकवरी की गति बेहद असमान है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, जब विकसित अर्थव्यवस्थाएं अपने सकल घरेलू उत्पाद का 28 प्रतिशत रिकवरी में निवेश करती हैं, मध्यम आय वाले देश 6 प्रतिशत निवेश करते हैं और सबसे कम विकसित देश केवल 1.8 प्रतिशत निवेश करते हैं, तो यह उनके लिए आश्चर्यजनक नहीं लगता है।

उदाहरण के लिए, उप-सहारा अफ्रीका में, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में प्रति व्यक्ति संचयी आर्थिक विकास बाकी दुनिया की तुलना में 75 प्रतिशत कम होगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि यह खतरनाक विचलन व्यापक होने का खतरा है क्योंकि 2022 में विकास दर घटने की उम्मीद है। बढ़ती मुद्रास्फीति उधार लेने और कर्ज चुकाने की लागत पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने जलवायु परिवर्तन, असमानता और नई प्रौद्योगिकियों के विकास को भी संबोधित किया, जिन्होंने इन वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए एकता और एकजुटता का आह्वान किया।

महामारी के दौरान, महासचिव ने बहुपक्षवाद के महत्व और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर प्रकाश डाला।

संयुक्त राष्ट्र देशों की टीमों ने 139 देशों और क्षेत्रों के लिए सामाजिक-आर्थिक प्रतिक्रिया योजनाएँ जारी कीं। तत्काल समर्थन को प्राथमिकता देने के लिए लगभग 3 बिलियन डॉलर का पुनर्खरीद किया गया था और अन्य 2 बिलियन डॉलर जुटाए गए थे।

महासचिव के लिए, यह हाल के सुधार थे जिन्होंने विश्व निकाय को समायोजित करने और त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाया।(आईएएनएस)

अजरबैजान में सेना का हेलीकॉप्टर क्रैश, 14 सैनिकों की मौत
01-Dec-2021 9:23 AM (125)

 

बाकू. अजरबैजान में मंगलवार को एक बड़ा हादसा हुआ है. अधिकारियों ने बताया कि देश के काकेशस क्षेत्र के पूर्व में एक ट्रेनिंग फ्लाइट के दौरान अजरबैजानी सेना का एक सैन्य हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है. इस घटना में 14 लोगों की मौत हो गई. पूर्व सोवियत गणराज्य के फ्रंटियर गार्ड ने एक बयान में कहा, ‘राज्य सीमा सेवा के हेलीकॉप्टर दुर्घटना की वजह से 14 लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए हैं.’ इसने कहा कि सभी पीड़ित सैन्यकर्मी थे.

इससे पहले मंगलवार को देश की सीमा सेवा और अभियोजक जनरल ने एक संयुक्त बयान में कहा कि अजरबैजान की राज्य सीमा सेवा से संबंधित एक सैन्य हेलीकॉप्टर मंगलवार सुबह लगभग 10:40 बजे एक ट्रेनिंग फ्लाइट का संचालन करते हुए खैजी क्षेत्र के गाराखेबाट हवाई क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर किस वजह से क्रैश हुआ है, इसकी जांच की जा रही है. ये घटना ऐसे समय पर हुई है, जब दो हफ्ते पहले ही अजरबैजान और पड़ोसी आर्मेनिया के बीच अपनी साझा सीमा पर सबसे खराब लड़ाई हुई.

पिछले साल आर्मेनिया और अजरबैजान में हुआ भयंकर युद्ध
ये लड़ाई पिछले साल नागोर्नो-कराबाख क्षेत्र में युद्ध के बाद हुई है. पिछले साल छह हफ्ते चले युद्ध में 6500 से अधिक लोगों की जान चली गई. ये युद्ध नवंबर 2020 में जाकर खत्म हुआ था. रूस ने अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच युद्धविराम करवाया. इस सौदे ने आर्मेनिया को उस क्षेत्र को सौंप दिया, जिसे उसने दशकों तक नियंत्रित किया था.

16 नवंबर को हुई लड़ाई में छह आर्मेनियाई और सात अजरबैजानी सैनिक मारे गए. इससे दोनों पक्षों के बीच तनाव खासा बढ़ गया था. उसी दिन रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने एक संघर्ष विराम पर बातचीत की थी. अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच तनाव मई से ही तनाव बढ़ा हुआ है. आर्मेनिया ने कहा कि अजरबैजान की सेना ने दोनों देशों द्वारा साझा की गई झील की घेराबंदी करने के लिए दक्षिणी सीमा पार कर ली. (एपी इनपुट के साथ) (news18.com)

27 साल की महिला को था बॉयफ्रेंड पर बेवफाई करने का शक, उठाया ऐसा कदम कि सभी के उड़ गए होश
01-Dec-2021 9:23 AM (127)

 

रिश्तों में कई बार गलतफहमियां पैदा हो जाती हैं. मगर समझदार कपल वही होता है जो उनक गलतफहमियों को दूर कर अपने रिश्ते को और भी मजबूती से चलाए. लेकिन जब कभी रिश्तों में शक पैदा हो जाता है वो खत्म होने का नाम नहीं लेता. मजबूत से मजबूत रिश्तों को शक हिलाकर रख देता है. ऐसा ही कुछ एक कपल के बीच भी हुआ जो इंग्लैंड में रहते थे. गर्लफ्रेंड को लगता था कि उसका बॉयफ्रेंड उसे धोखा दे रहा है. उसका दूसरी लड़कियों के साथ संबंध है. इस शक में उसने ऐसा कदम उठा लिया कि हर कोई जानकर चौंक गया.

हडर्सफील्ड में रहने वाली 27 साल की एला एमेरी साल 2019 में अपने घर में मरी हुई पाई गई थीं. इस घर में वो अपने बॉयफ्रेंड जैक फ्रीथ के साथ रहा करती थीं जो एक हीटिंग इंजीनियर थे. एला ईटन स्मिथ नाम के वकील के साथ काम करती थीं और पार्ट-टाइम आइलैश टेक्नीशियन की भी नौकरी करती थीं.

बॉयफ्रेंड पर था शक
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक एला को ऐसा लगता था कि उनका बॉयफ्रेंड दूसरी लड़कियों से बातें करता है. दोनों के बीच तब भयंकर लड़ाई हुई जब जैक अपने कुछ दोस्तों के साथ ड्रिंक पीने चले गए जबकि एला चाहती थीं कि वो घर में रहें जो दोनों ने साथ में खरीदा था. एला की मौत से एक दिन पहले जैक अपने एक दोस्त का जन्मदिन मनाने एक पब में गए थे. तब उनके कुछ और दोस्त भी साथ में थे. एला घर पर ही थीं मगर उन्हें ये शक था कि पार्टी में सिर्फ लड़के नहीं लड़कियां भी गई होंगी. जब वो रात में घर लौटा तो एला ने उनका फोन चेक किया और दूसरी लड़कियों से पर्सनल बातें निकालवाने के लिए जैक बनकर मैसेज किया. हालांकि जैक, एला से बहुत प्यार करते थे इसलिए वो कभी दूसरी लड़कियों के बारे में सोच भी नहीं सकते थे.

पहले के रिलेशन में भी सुसाइड की कोशिश कर चुकी थी महिला
जैक को शक के आधार पर गिरफ्तार भी किया गया मगर जब उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले तो उन्हें छोड़ दिया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक एला अपने पहले के भी रिलेशन में सुसाइड की कोशिश कर चुकी थीं. उन्हें एंग्जाइटी की समस्या भी थी. एला अपने परिवार का बहुत ध्यान रखती थीं और उनके कारण चिंता में रहती थीं. इस वजह से वो फ्रस्ट्रेट हो चुकी थीं. (news18.com)