अंतरराष्ट्रीय

19-Jan-2021 9:17 AM 19

अमेरिकी अभियोजकों के मुताबिक़, एक शख़्स महामारी में यात्रा करने से इतना डर गया कि वो तीन महीने तक शिकागो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के एक सुरक्षित क्षेत्र में बिना किसी को बताए रहता रहा.

36 वर्षीय आदित्य सिंह को शनिवार को तब गिरफ़्तार किया गया जब एयरलाइन स्टाफ ने उनसे अपनी पहचान बताने के लिए कहा.

आदित्य ने जवाब में एक बैज की ओर इशारा किया, लेकिन ये बैज एक ऑपरेशन मैनेजर का था. उस मैनेजर ने अक्टूबर में अपना बैज खोने की शिकायत दर्ज कराई थी.

पुलिस के मुताबिक़, आदित्य सिंह 19 अक्टूबर को एक विमान में लॉस एंजीलिस से ओ'हारे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचे थे.

शिकागो ट्रिब्यून के अनुसार, एसिस्टेंट स्टेट अटॉर्नी कैथलीन हेगर्टी ने कहा कि आदित्य को हवाई अड्डे पर कथित तौर पर एक बैज मिला और “वो कोविड की वजह से घर जाने से डर रहे थे.”

उन्होंने जज से कहा कि आदित्य दूसरे यात्रियों से मिले खाने और पैसों से अपना गुज़ारा कर रहे थे.

कुक काउंटी की न्यायाधीश सुज़ाना ओर्टिज़ ने मामले पर हैरानी जताई.

उन्होंने रविवार को आरोपों को रेखांकित करने वाली अभियोजक से कहा, "अगर मैं आपको ठीक से समझ रही हूं तो आप कह रही हैं कि एक अनधिकृत, ग़ैर-कर्मचारी व्यक्ति 19 अक्टूबर 2020 से 16 से 2021 के बीच ओ'हारे हवाई अड्डे टर्मिनल के एक सुरक्षित हिस्से में कथित तौर पर रह रहा था, और किसी को पता नहीं चला? मैं आपको सही से समझना चाहती हूं."

असिस्टेंट पब्लिक डिफेंडर कर्टनी स्मॉलवुड के अनुसार, आदित्य सिंह लॉस एंजिल्स के एक उपनगर में रहते हैं और उनका कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड नहीं है. ये स्पष्ट नहीं है कि वो शिकागो क्यों आए थे.

शहर के हवाई अड्डों की देखरेख

उनपर एक हवाई अड्डे के प्रतिबंधित क्षेत्र में ग़लत तरीक़े से घुसने और चोरी का आरोप लगाया गया है. उन्हें ज़मानत के लिए 1,000 डॉलर भरने होंगे. तब तक के लिए उनपर हवाई अड्डे में घुसने पर रोक लगा दी गई है.

जज ओर्टिज़ ने कहा, "अदालत इन तथ्यों और परिस्थितियों को चौंकाने वाला मानती है कि इतने वक़्त तक ये होता रहा."

"लोगों की सुरक्षित यात्रा के लिए एयरपोर्ट का पूरी तरह से सुरक्षित होना ज़रूरी है, इसलिए मुझे लगता है कि ऐसे कथित कामों से वो शख़्स समुदाय के लिए ख़तरा बन गया."

शहर के हवाई अड्डों की देखरेख करने वाले शिकागो विमानन विभाग ने एक बयान में कहा, "ये घटना जांच के दायरे में है, हालांकि हमने पाया कि इस सज्जन ने हवाई अड्डे या यात्रा करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए किसी तरह का ख़तरा पैदा नहीं किया." (bbc)


19-Jan-2021 9:03 AM 14

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रॉस एडहॉनम गीब्रिएसुस ने कहा है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन आने से इसे पाने के लिए होड़ मची है लेकिन इस होड़ में दुनिया के ग़रीब देशों के पिछड़ने का डर है.

सोवमार देर शाम जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि एक तरफ जब कोरोना वैक्सीन हमारे लिए उम्मीद ले कर आई है वहीं दूसरी तरफ इसके कारण पैदा होने वाला असल ख़तरा भी सामने आ रहा है. दुनिया के अमीर देशों और ग़रीब देशों के बीच असामनता की दीवार है जो इसके वितरण में बड़ी रुकावट साबित हो सकती है.

उन्होंने कहा, “ये अच्छी बात है कि सरकारें अपने स्वास्थ्यकर्मियों और बूढ़ों को पहले वैक्सीन देना चाहती है. लेकिन ये सही नहीं है कि अमीर देशों के युवाओं और स्वस्थ वयस्कों को वैक्सीन की खुराक ग़रीब मुल्कों में रहने वाले स्वास्थ्यकर्मियों और बूढ़ों से पहले मिले.”

उन्होंने कहा कि मौजूदा वक्त में कम से कम 49 अमीर मुल्कों में जहां लोगों को वैक्सीन की 3.9 करोड़ खुराक दी गई है, वहीं ग़रीब मुल्कों में इसकी केवल 25 खुराक ही लोगों को मिली है.

उन्होंने कहा कि ये आंकड़ा बताता है कि विश्व एक भयावह नैतिक विफलता के कगार पर है और इसकी क़ीमत दुनिया के सबसे गरीब देशों के लोगों को चुकानी पड़ेगी.

उन्होंने कहा कि वैक्सीन के वितरण में समानता लाना न केवल देशों की नैतिक जिम्मेदारी है बल्कि ये रणनीतिक और आर्थिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण होगा.

उन्होंने कहा कि वैक्सीन पाने की होड़ के कारण दुनिया के ग़रीब ख़तरे में होंगे और इससे महामारी पूरी तरह से ख़त्म नहीं हो सकेगी. उन्होंने सभी मुल्कों से अपील की की साल के पहले सौ दिनों के भीतर दुनिया के सभी स्वास्थ्यकर्मियों और बूढ़ों को कोरोना की वैक्सीन दी जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि बीते कई महीनों से संगठन सभी मुल्कों में समान रूप से वैक्सीन पहुंचाने की जद्दोजहद में लगा हुआ है. संगठन ने पांच उत्पादकों से वैक्सीन की 2 अरब खुराक सुरक्षित कर ली है और उसे वैक्सीन की और एक अरब खुराक भी मिलने वाली है. संगठन फरवरी में लोगों को वैक्सीन देना शुरू करेगा. (बीबीसी)


19-Jan-2021 8:27 AM 16

कनाडा. यूनाइटेड किंगडम के गैर-सरकारी संगठन खालसा एड को उसके मानवीय कार्यों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया है. कनाडा के सांसद टिम उप्पल, ब्रैम्पटन पैट्रिक ब्राउन के मेयर और ब्रैम्पटन के सांसद पीपी प्रबीत सिंह सरकारिया ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए आधिकारिक तौर पर खालसा एड को नॉमिनेट किया है.

द नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी के अध्यक्ष टिम उप्पल ने बेरिट रीस-एंडरसन को लिखे एक पत्र में कहा है कि खालसा एड एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ है जिसका उद्देश्य दुनिया भर के आपदा क्षेत्रों और नागरिक संघर्ष क्षेत्रों में मानवीय सहायता प्रदान करना है. साथ ही कहा गया कि खालसा एड संपूर्ण मानव जाति को एक के रूप में मान्यता देने के सिख सिद्धांत के आधार पर सीमा के पार अंतर्राष्ट्रीय मानवीय सहायता करने वाला संगठन बन है.

20 साल से लोगों की मदद कर रहा खालसा एड

कनाडा के नेताओं ने कहा कि इसे रवींद्र (रवि) सिंह द्वारा स्थापित किया गया था, जो साल 1999 में कोसोवो में शरणार्थियों के साथ फंस गए थे .यह संगठन 20 साल से दान बाढ़, भूकंप जैसे प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं के पीड़ितों को दुनिया भर में सहायता प्रदान करता रहा है.
उप्पल ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि खालसा एड, 'सरबत दा भला' की सिख विचारधारा से प्रेरित है, जिसका अर्थ है सीमाओं, जाति और धर्म की परवाह किए बिना सभी की भलाई हो.

इस बाबत टिम उप्पल ने ट्वीट में कहा, '20 सालों से से खालसा दुनिया भर में हताश लोगों की मदद कर रहा है. संसद के सदस्य के तौर पर मैं ,सांसद पीपी प्रबीत सिंह सरकारिया और पैट्रिक के समर्थन के साथ, खालसा एड को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित कर रहा हूं.'खालसा एड के नॉमिनेशन पर रवि सिंह ने कहा, 'हम इससे बहुत प्रभावित हैं. हम जो कुछ भी करते हैं वह दुनिया भर में हमारी टीमों और वॉलंटरियर्स का शुक्रिया अदा करते हैं. हम इस ऐतिहासिक नामांकन के लिए ऊपर वाले के आभारी हैं.'

बता दें खालसा एड बीते 53 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों की सेवा कर रही है. इसने टिकरी सीमा पर एक किसान मॉल भी बनाया है. 16 जनवरी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने खालसा एड के भारत के निदेशक अमनप्रीत सिंह और अन्य ट्रस्टियों को समन जारी किया कर जांच एजेंसी के सामने पेश होने को कहा था. (news18)


18-Jan-2021 8:50 PM 21

निखिला नटराजन

न्यूयॉर्क, 18 जनवरी | अमेरिका की नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ओकलैंड, कैलिफोर्निया, अर्बाना शैम्पेन, इलिनॉय, बर्कले, क्यूबेक, कनाडा, वाशिंगटन, डी.सी. के बाद दो बार कैलिफोर्निया का सफर कर चुकी हैं, और अब व्हाइट हाउस पहुंचने जा रही हैं।

जब कमला हैरिस आखिरकार देश के बेहद प्रभावशाली ओहदे पर पहुंची हैं तो यह अमेरिका में उनके लंबे सफर का एक परमोत्कर्ष है।

कमला हैरिस ने अपने संस्मरण 'द ट्रथ्स वी होल्ड' में लिखा है, "मैं 12 साल की थी और फरवरी में कैलिफोर्निया से दूर स्कूल के साल के मध्य में, 12 फीट बर्फ से ढके एक फ्रांसीसी भाषी विदेशी शहर में जाने का विचार परेशान कर देने वाला था।"

अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति के रूप में हैरिस का आगमन पहियों की कहानी है, जो रुक-रुक कर चलती है, और नई दिशाओं में निकलती है। सबसे पहले, उनके माता-पिता अकादमिक उपलब्धि की तलाश में आए और फिर हैरिस ने अपने राजनीतिक करियर में चार चांद लगाया।

उन्होंने 2019 के एक साक्षात्कार के दौरान पत्रकार डैना गुडइयर को बताया था, "मेरे बचपन की बहुत ज्वलंत स्मृति मेफ्लावर ट्रक थी।" मेफ्लावर अमेरिका की सबसे बड़ी पूर्ण सेवा वाली मूविंग कंपनियों में से एक है।

हैरिस ने गुडइयर से कहा, "हम बहुत आगे बढ़ गए।"

लेकिन अमेरिकी शहरों के बीच हैरिस की यात्रा लगभग एक महिला यात्री के बाद आता है और हैं उनकी मां श्यामला गोपालन, जो तमिलनाडु की हैं।

जब श्यामला 1958 में अमेरिका आई थीं तो तब वह 19 साल की थीं और अपने परिवार से विदेश में पढ़ने जाने वाली पहली शख्स थीं। उन्होंने एक ऐसी यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया, जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था, एक ऐसे देश में थीं, जहां पहले वह कभी नहीं गई थीं।

कमला के पिता डोनाल्ड हैरिस का भी कुछ ऐसा ही सफर रहा था। वर्ष 1961 में कमला के माता-पिता से मुलाकात हुई और 1963 में शादी हुई।

कुल मिलाकर कमला हैरिस की कहानी एक मंजी हुई यात्री की है।

जब वह उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी, तब यह उनकी मां की मातृभूमि मद्रास और पिता की मातृभूमि ब्राउन्स टाउन (जमैका) के लिए एक सर्वश्रेष्ठ उपहार होगा।  (आईएएनएस)

 


18-Jan-2021 8:42 PM 24

निखिला नटराजन

न्यूयॉर्क, 18 जनवरी | अमेरिका के निर्वतमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन अमेरिकी राष्ट्रपतियों में शामिल हो रहे हैं, जो नए राष्ट्रपति जो बाइडेन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगे। इसके साथ ही वह एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्होंने प्रतिद्वंद्वी की जीत को स्वीकार नहीं करते हुए भीड़ को कैपिटल हिल पर हमला करने के लिए उकसाया और इतना ही नहीं वह अमेरिकी इतिहास में दो बार महाभियोग का सामना करने वाले भी पहले राष्ट्रपति हैं।

1801 में जॉन एडम्स अपने उत्तराधिकारी थॉमस जेफरसन के शपथ ग्रहण में शामिल नहीं हुए थे।

1829 में, व्यक्तिगत अपमान के साथ एक कड़वी लड़ाई लड़ने के बाद, जॉन क्विंसी एडम्स ने एंड्रयू जैक्सन के शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया था।

जब शपथ ग्रहण समारोह से पहले जैक्सन की पत्नी की मृत्यु हो गई, तो भावी राष्ट्रपति ने अपने विरोधी पर तनाव को बढ़ाने का आरोप लगाया।

1869 में, जॉनसन ने खुद को यूलेसीस एस ग्रांट के शपथ समारोह से अनुपस्थित कर दिया और व्हाइट हाउस में रहकर अंतिम मिनट के कानून पर हस्ताक्षर करने में मशगूल रहे। ग्रांट ने इस समारोह के लिए व्हाइट हाउस से कैपिटल के लिए जॉनसन के साथ जाने से इनकार कर दिया।

रिचर्ड निक्सन ने जेराल्ड फोर्ड के शपथ ग्रहण से पहले व्हाइट हाउस के लॉन से एक हेलीकॉप्टर में उड़ान भरी।

ट्रंप की अनुपस्थिति को लेकर कोई हैरानी नहीं है क्योंकि उन्होंने चुनाव परिणामों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

वहीं, नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि वह ट्रंप के दूर रहने से खुश हैं।

जब उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस से यह सवाल किया जाता है तो वह आमतौर मुस्कुराहट या हंसी के साथ पल्ला झाड़ लेती हैं।  (आईएएनएस)

 


18-Jan-2021 4:50 PM 21

रामल्ला. फिलिस्तीन 14 साल के लंबे समय के बाद इस साल अपना पहला राष्ट्रीय चुनाव कराने जा रहा है. इनमें संसदीय, राष्ट्रपति और राष्ट्रीय परिषद के चुनाव शामिल हैं. नादोलु एजेंसी ने बताया, फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास द्वारा हस्ताक्षरित एक डिक्री के तहत, संसदीय चुनाव 22 मई को, 31 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव और 31 अगस्त को होंगे.

बताया गया, "राष्ट्रपति ने चुनाव समिति और राज्य के सभी राज्य शिक्षार्थियों को निर्देश दिया कि वे मातृभूमि के सभी शहरों में एक लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया शुरू करें." इजरायल और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार के बीच 2014 में इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच शांति वार्ता का अंतिम दौर टूट गया था.

1967 के मध्य पूर्व युद्ध में इजरायल ने वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी और पूर्वी यरुशलम को जब्त कर लिया था और अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बावजूद उन्हें नियंत्रित करे रखा था. फिलिस्तीनी पूर्वी यरुशलम को अपनी राजधानी के रूप में इन जमीनों पर एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करना चाहते हैं. (news18.com)


18-Jan-2021 4:35 PM 26

सऊदी अरब चाहता है कि उसके यहां रहने वाले लगभग 54 हजार रोहिंग्या लोगों को बांग्लादेश वापस ले ले. बांग्लादेश अगर इसके लिए राजी होता है तो उसकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
  डॉयचे वैले पर जोबैर अहमद की रिपोर्ट

डीडब्ल्यू के साथ एक हालिया इंटरव्यू में बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने कहा था कि बांग्लादेश सऊदी अरब में रहने वाले कुछ रोहिंग्या लोगों को कानूनी दस्तावेज मुहैया करा सकता है.

रोहिंग्या मुसलमानों का संबंध म्यांमार के पश्चिमी प्रांत रखाइन से है. लेकिन म्यांमार उन्हें अपना नागरिक नहीं मानता. अपने साथ भेदभाव और दमन से बचने के लिए बहुत से रोहिंग्या लोगों ने दूसरे देशों में शरण ली है. इनमें सबसे ज्यादा लोग बांग्लादेश में रहते हैं.

लगभग 40 साल पहले सऊदी अरब ने दसियों हजार रोहिंग्या लोगों को लिया था. सितंबर 2020 में सऊदी अरब ने कहा था, "अगर बांग्लादेश इन शरणार्थियों को अपना पासपोर्ट जारी करता है तो इससे बहुत मदद होगी क्योंकि सऊदी अरब नागरिकता विहीन लोगों को अपने यहां नहीं रखता."

सऊदी अरब में रहने वालो रोहिंग्या लोगों के पास किसी देश की नागरिकता नहीं है. यहां तक कि शरणार्थियों के जो बच्चे सऊदी अरब में पैदा हुआ हैं और अरबी भाषा बोलते हैं, उन्हें भी सऊदी अरब की नागरिकता नहीं दी गई है.

बांग्लादेश भी रोहिंग्या लोगों को अपना नागरिक नहीं मानता है. इसलिए कई विशेषज्ञ कहते हैं कि विदेश मंत्री मोमेन का यह बयान उनके देश को मुश्किल में डाल सकता है कि बांग्लादेश कुछ रोहिंग्या को पासपोर्ट दे सकता है. इससे रोहिंग्या लोगों की वापसी के लिए म्यांमार से होने वाली वार्ता पर असर पड़ सकता है.

इनका कोई देश नहीं
रोहिंग्या लोगों का कोई देश नहीं है. यानी उनके पास किसी देश की नागरिकता नहीं है. रहते वो म्यामांर में हैं, लेकिन वह उन्हें सिर्फ गैरकानूनी बांग्लादेशी प्रवासी मानता है.

मोमेन ने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा था, "हमने इस बारे में सऊदी अधिकारियों से बात की है और उन्हें भरोसा दिलाया है कि हम उन लोगों के पासपोर्ट रिन्यू कर देंगे जो बांग्लादेश से सऊदी अरब गए."

विदेश मंत्री ने बताया कि बहुत सारे रोहिंग्या लोगों ने बांग्लादेशी अधिकारियों को रिश्वत देकर पासपोर्ट हासिल किए थे. उन्होंने कहा, "2001, 2002 और 2006 में बहुत से रोहिंग्या लोग बांग्लादेशी पासपोर्ट पर सऊदी अरब गए. कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने उन्हें ये पासपोर्ट जारी किए."

लेकिन बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने साफ कहा कि उनका देश इन शरणार्थियों के बच्चों की कोई जिम्मेदारी नहीं लेगा. उन्होंने कहा, "ये रोहिंग्या 1970 के दशक से बांग्लादेश में नहीं रह रहे हैं. उनके बच्चों की पैदाइश और परवरिश दूसरे देशों में हुई. उन्हें बांग्लादेश के बारे में कुछ नहीं पता. उनकी परवरिश अरब लोगों की तरह हुई है."

बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन
बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने कुछ लोगों को पासपोर्ट देने की बात कही

मोमेन का कहना है कि सऊदी अरब सारे रोहिंग्या लोगों को वापस नहीं भेजना चाहता, "जिन लोगों को सऊदी नागरिकता मिल गई है, वे वहीं रहेंगे."

सऊदी अरब में लगभग तीन लाख रोहिंग्या लोगों को पहले ही वर्क परमिट मिल गया है. जिन 54 लोगों को सऊदी अरब वापस भेजना चाहता है, उनमें से ज्यादातर के पास बांग्लादेश से सऊदी अरब आते हुए बांग्लादेशी पासपोर्ट था या फिर उन्हें सऊदी अरब में मौजूद बांग्लादेशी कंसुलेट से पासपोर्ट मिला.

कौन ले जिम्मेदारी?

ढाका स्थित रिफ्यूजी एंड माइग्रेटरी मूवमेंट नाम की संस्था के कार्यकारी निदेशक सीआर अबरार कहते हैं कि अगर इन लोगों के पास बांग्लादेशी पासपोर्ट हैं तो उनकी जिम्मेदारी बांग्लादेश को लेनी चाहिए. लेकिन शरणार्थियों की वापसी के लिए जिस तरह से सऊदी अरब बांग्लादेश पर दबाव बना रहा है, वह उसकी भी निंदा करते हैं.

वह कहते हैं, "बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत नहीं है. फिर भी उसने इन लोगों को लेकर बहुत हिम्मत दिखाई है. सऊदी अरब को बांग्लादेश पर और दबाव नहीं डालना चाहिए."

अबरार कहते हैं कि रोहिंग्या लोग आर्थिक कारणों से प्रवासी नहीं बने हैं, "वे एक प्रताड़ित समुदाय हैं. सऊदी अरब को यह बात समझनी चाहिए."

अबरार कहते हैं कि अगर बांग्लादेश सऊदी अरब से रोहिंग्या लोगों को ले लेता है तो इससे इन शरणार्थियों की वापसी के लिए म्यांमार से हो रही बातचीत में बांग्लादेश का रुख कमजोर होगा. उनका मानना है, "म्यांमार इस बात का फायदा उठाने की कोशिश करेगा और बांग्लादेश पर दबाव डालेगा कि वह और ज्यादा रोहिंग्या लोगों को अपनी नागरिकता दे."

अमेरिका की इलिनॉय स्टेट यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र पढ़ाने वाले अली रियाज कहते हैं कि यह बांग्लादेश के लिए एक मुश्किल परिस्थिति है. लेकिन वह इस बात को नहीं मानते कि सऊदी अरब वाले मुद्दे की वजह से म्यांमार के साथ होने वाली वार्ता में बांग्लादेश के रुख पर कोई असर होगा.

रियाज ने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा, "ये दोनों अलग अलग मुद्दे हैं. कुछ रोहिंग्या लोगों को नागरिकता देने का यह मतलब नहीं है कि बांग्लादेश सारे रोहिंग्या लोगों को अपना लेगा."


18-Jan-2021 4:31 PM 28

-विष्णु सोम

नई दिल्ली: चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में चल रहे सीमा विवाद के बीच अरुणाचल प्रदेश में एक नई चिंता उभरती दिखाई दे रही है. NDTV को मिली एक्सक्लूसिव सैटेलाइट तस्वीरों में देखा जा सकता है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में एक नया गांव बसाया है, जिनमें लगभग 101 घर हैं. 1 नवंबर, 2020 को ली गई इन तस्वीरों को लेकर जब NDTV ने कई विशेषज्ञों को संपर्क किया तो उन्होंने इसकी पुष्टि की कि यह गांव भारत के वास्तविक सीमा के 4.5 किलोमीटर अंदर बना हुआ है और भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय होगा.

यह गांव ऊपरी सुबनशिरी जिले के त्सारी चू नदी के किनारे पर मौजूद है. यह वो इलाका है, जहां पर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है और इसे सशस्त्र लड़ाई वाली जगह के तौर पर चिन्हित किया गया है. यह गांव हिमालय के पूर्वी रेंज में तब बनाया गया है, जब इसके कुछ वक्त पहले ही दोनों देशों की सेनाओं के बीच जून में दशकों बाद गलवान घाटी एक हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे. हालांकि, चीन ने आधिकारिक रूप से कभी नहीं बताया कि उसके कितने जवानों को नुकसान पहुंचा था. पूर्वी लद्दाख का यह विवाद अभी तक नहीं कई राउंड की बातचीत के बाद भी नहीं सुलझ पाया है और दोनों देशों के जवान दुर्गम इलाकों में भयंकर जानलेवा ठंड के बीच सीमा पर तैनात हैं. (khabar.ndtv.com)


18-Jan-2021 4:22 PM 22

नई दिल्‍ली. सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के 52 साल के वाइस चेयरमैन जे वाई ली को दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने घूसखोरी के मामले में ढाई साल कैद की सजा सुनाई है. इसी के साथ कंपनी की लीडरशिप और बड़े कारोबार को लेकर दक्षिण कोरिया के नजरिये में भी बदलाव आया है. अब जे वाई ली सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के अहम फैसलों में शामिल नहीं होंगे. बता दें कि इन बैठकों में प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को पीछे छोड़ने और कंपनी को संभालने से जुड़ी नीतियों पर फैसला होता है. कंपनी पर नियंत्रण रखने के लिए ये बैठकें अहम होती हैं.

ली पर पूर्व प्रेसिडेंट पार्क गॉन हे के एक सहयोगी को घूस देने का आरोप है. इस वजह से वह 2017 में भी जेल जा चुके हैं. फिर उन्होंने घूस देने के आरोपों से इनकार करते हुए अपील की. इसके बाद उनकी सजा कम कर दी गई और वो एक साल बाद जेल से बाहर आ गए. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला सियोल हाईकोर्ट में भेज दिया. सियोल हाईकोर्ट ने ली को घूस देने का दोषी पाया और ढाई साल कैद की सजा सुना दी.

सुप्रीम कोर्ट में कर सकते हैं अपील, राहत की गुंजाइश कम
साउथ कोरिया के कानून के मुताबिक, तीन साल या इससे कम साल की सजा को ही खारिज किया जा सकता है. अगर किसी को इससे लंबी कैद होती है तो उसे अपनी सजा पूरी करनी होगी. ली को हुई ढाई साल कैद की सजा में से उनके डिटेंशनल सेंटर में रहने के वक्‍त को घटाया जा सकता है. संभव है कि सियोल हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाए. इस मामले में लीगल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले में एक बार फैसला सुना चुका है. ऐसे में अब हाईकोर्ट के फैसले में बदलाव की गुंजाइश कम ही है.  (news18.com)


18-Jan-2021 4:18 PM 34

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता से जाने में केवल दो दिन ही बाकी हैं, लेकिन इस बीच लगातार कोई न कोई विवाद सामने आ रहा है. ताजा विवाद इवांका से जुड़ा हुआ है, जिसे टॉयलेट स्कैंडल (Toilet Scandal) कहा जा रहा है. आरोप है कि इवांका ने अपनी सुरक्षा में तैनात सीक्रेट सर्विस जवानों को टॉयलेट दिलवाने के लिए टैक्सदाताओं के करोड़ों रुपए खर्च कर दिए.

इवांका ने लगाई रोक
दरअसल मामला कुछ ऐसा है कि इवांका और उनके पति जेरेड कुश्नर की सुरक्षा के लिए खुफिया सर्विस के जवानों की तैनाती हुई. अमेरिकी राष्ट्रपति के परिवार की सुरक्षा के लिए प्रोटोकॉल के तहत तैनात ये जवान ड्यूटी शुरू होने के साथ ही मुसीबतों से घिर गए. हो ये रहा था कि इवांका ने उन्हें अपने घर का टॉयलेट इस्तेमाल करने से मना कर दिया, जबकि उनके घर पर पूरे 6 टॉयलेट बने हुए हैं.

ऐसे में जवान ड्यूटी के दौरान लगभग तीन किलोमीटर की दूरी तय करके कथित तौर पर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के घर जाते और उनके टॉयलेट इस्तेमाल करते थे. लंबी दूरी तय करके लौटने में समय लगता था, लिहाजा इवांका ने एक दूसरा तरीका निकलवाया. महीनों बाद इवांका के घर के ही पास एक घर किराए पर लिया गया ताकि सीक्रेट एजेंट फारिग हो सकें. केवल टॉयलेट के इस्तेमाल के लिए भाड़े पर लिए गए इस घर का मासिक किराया लगभग 2 लाख 20 हजार रुपए था. इस तरह से चार सालों में केवल टॉयलेट के लिए 74 लाख रुपए से भी ज्यादा पैसे खर्च हो गए.

डेमोक्रेट्स ले रहे आड़े हाथ
14 जनवरी को वॉशिंगटन पोस्ट में ये खबर आने के बाद से विपक्षी पार्टी लगातार इवांका के गैरजरूरी खर्च की आलोचना कर रही है. डेमोक्रेट्स का कहना है कि घर में 6 टॉयलेट होने के बाद भी इवांका का उसके लिए अलग से पैसे खर्च करना सही नहीं था.

टॉयलेट को लेकर ट्रंप परिवार पहले भी निशाने पर रहा है. साल 2016 में जब ट्रंप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे और चुनाव प्रचार कर रहे थे, तब न्यूयॉर्क सिटी के उनके अपार्टमेंट में एक सोने का बना कमोड भी गलती से सामने आ गया था. इसपर ट्रंप को अय्याश भी कहा गया, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी कि क्या वाकई ट्रंप के घर पर सोने से बना कमोड है.

पानी की कमी की शिकायत 
कार्यकाल के दौरान भी ट्रंप का टॉयलेट ऑब्सेशन सामने आया था, जब उन्होंने बाथरूम में वॉटर फिक्शचर के कारण पानी कम आने की शिकायत की थी. यहां तक कि उनकी लगातार शिकायत के चलते डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी ने शावर वॉटर प्रेशर के नियमों में नरमी बरतने की बात कही थी. बता दें कि बहुत से पश्चिमी देशों में पानी की बर्बादी को रोकने के लिए बाथरूम में वॉटर फिक्शचर लगाया जाता है. ये एक तरह का सिस्टम है, जिससे नल से या शावर से सीमित मात्रा में पानी गिरता है. आमतौर पर ये इतना होता है कि कोई भी आसानी से नहा ले और पानी गैरजरूरी ढंग से बहता न रहे.

अमेरिका में भी पानी को लेकर ये नियम साल 1992 में लाया गया. तब जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश राष्ट्रपति थे. उनकी सरकार ने नहाने के दौरान पानी की बर्बादी को रोकने के लिए शावर फिक्शचर का नियम बनाया. इसके तहत प्रति मिनट लगभग 2.5 गैलन (9.5 लीटर) पानी की सीमा तय हुई.

बाइडन की पत्नी भी अभी से विवादों में 
इधर टॉयलेट के मामले में अमेरिका में राजनीति अजीब बात नहीं. नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन वाइट हाउस में नया टॉयलेट बनवाने को लेकर पहले ही विवादों में घिर चुके हैं. बाइडन की पत्नी जिल बाइडन ने करोड़ों रुपयों का प्लान बनाया है, जिसके तहत वे वहां के टॉयलेट का सौंदर्यीकरण करवाएंगी. एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक ये बात फेडरल कागजों के लीक होने से पता चली. इसमें साफ लिखा है कि जि बाइडन अपने हिस्से के टॉयलेट को अपग्रेड करने के लिए लगभग 1.2 मिलियन डॉलर का बजट तैयार कर चुकी हैं.

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बता दें कि ट्रंप के वाइट हाउस छोड़ने और बाइडन के आने से पहले पूरा भवन एक बार फिर से साफ किया जाएगा. डीप क्लीन का ये खर्च भी लगभग 1 करोड़ रुपए है. इसी बीच जिल बाइडन ने उसमें ये नए खर्च जोड़ दिए हैं. ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी ने इसे फिजूलखर्ची बताते हुए बाइडेन की काफी आलोचना भी की थी.  (news18.com)


18-Jan-2021 1:31 PM 15

रविवार 17 जनवरी तक देश में 2,24,301 प्रथम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को कोविड-19 के खिलाफ टीका लग चुका लग था. उत्तर प्रदेश में टीका लेने के बाद एक सरकारी अस्पताल के कर्मचारी की मृत्यु हो गई है.

  डॉयचे वैले पर चारु कार्तिकेय की रिपोर्ट

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि दुष्प्रभाव के अधिकतर मामले दर्द, सूजन, हल्का बुखार, बदन-दर्द, मतली, चक्कर आना और त्वचा पर दाने आना जैसी एलर्जी संबंधी प्रतिक्रियाओं तक सीमित है. हालांकि जिन 447 लोगों को दुष्प्रभाव हुए उनमें से तीन को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ गई. बाद में उनमें से दो को अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई, लेकिन एक व्यक्ति अभी भी ऋषिकेश एम्स अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी है.

लेकिन उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक सरकारी अस्पताल के एक कर्मचारी की टीका लगने के 24 घंटों बाद मृत्यु हो गई. जिले के मुख्य मेडिकल अधिकारी (सीएमओ) ने कहा है कि 46-वर्षीय अस्पताल कर्मचारी महिपाल सिंह की मृत्यु का टीके से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने बताया कि महिपाल को शनिवार को टीका लगाया गया था और रविवार को उन्हें सांस फूलने और सीने में जकड़न की शिकायत हुई और कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई.

मीडिया में आई रिपोर्टों के अनुसार सीएमओ ने कहा है कि महिपाल के निधन का कोविड-19 के टीके से कोई संबंध लग नहीं रहा है और आगे की जानकारी उनकी पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने पर दी जाएगी. इसके अलावा भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को लेकर विवाद बना हुआ है. मीडिया में आई रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि कोवैक्सिन लेने से पहले जिस स्वीकृति पत्र पर हस्ताक्षर करना पड़ता है उस पर स्पष्ट लिखा हुआ है कि यह एक क्लीनिकल ट्रायल है और इसी वजह से लोगों में इस टीके को लेकर संशय बना हुआ है.

केंद्र सरकार के अस्पतालों में इस समय कोवैक्सिन ही दी जा रही है. दिल्ली स्थित केंद्रीय अस्पताल राम मनोहर लोहिया अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को चिट्ठी लिख कर कहा है कि चूंकि कोवैक्सिन का परीक्षण अभी तक पूरा नहीं हुआ है और इस वजह से उसे लेने को लेकर अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों को इस टीके को लेकर आशंकाएं हैं.

इसलिए उन्होंने मांग की है कि उन्हें कोवैक्सिन की जगह सीरम इंस्टीट्यूट का टीका कोविशील्ड दिया जाए. हालांकि उनकी इस मांग पर अस्पताल ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है. देश में टीकाकरण तय कार्यक्रम के तहत आगे बढ़ रहा है. सभी राज्यों को सप्ताह में कम से कम चार दिन टीकाकरण करने के लिए कहा गया है, ताकि अस्पतालों की सेवाएं भी बाधित ना हों.


18-Jan-2021 1:27 PM 14

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन 20 जनवरी को पद ग्रहण करने से पहले ही अब तक अपनी प्रशासनिक टीम में अहम भूमिकाओं के लिए 20 भारतीय मूल के अमेरिकियों को नॉमिनेट कर चुके हैं. इनमें से 13 नाम तो महिलाओं के हैं, जो बाइडन प्रशासन में खास रोल निभाने जा रही हैं. अमेरिका की सिर्फ 1% आबादी भारतीय अमेरिकियों की है और इस समुदाय को इतना प्रतिनिधित्व मिलना अपने आप में एक इतिहास बनने जा रहा है.

यह भी दिलचस्प फैक्ट है कि बाइडन टीम में चुने जा चुके 20 भारतीय अमेरिकियों में से 17 तो सीधे व्हाइट हाउस कॉम्प्लेक्स का ही हिस्सा होंगे. रविवार को ही न्यूज़18 ने आपको बताया था कि बाइडन टीम में भारतीय मूल की किन चर्चित महिलाओं को बेहद महत्वपूर्ण रोल मिल चुके हैं. अब 20 चेहरों की पूरी टीम के बारे में जानिए.

बाइडन टीम के 20 भारतीय चेहरे
अमेरिका के इतिहास में किसी राष्ट्रपति के प्रशासन में इतने भारतीयों को अहम पद नहीं मिले, जितने बाइडन के कार्यकाल की शुरूआत में मिल चुके हैं. अमेरिका में भारत के लिए गौरवशाली इतिहास रच रहे इन चेहरों को जानिए.

नीरा टंडन : व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट में डायरेक्टर के पद पर नीरा को नॉमिनेट किया गया है.
डॉ. विवेक मूर्ति : अमेरिका के सर्जन जनरल की पोस्ट के लिए इस भारतीय सर्जन का नाम चर्चा में रहा.
​​वनिता गुप्ता : न्याय और विभाग में असोसिएट अटॉर्नी जनरल की भूमिका के लिए वनिता का नाम सुर्खियों में रहा.
उज़रा ज़ेया : नागरिक सुरक्षा, लोकतंत्र और मानवाधिकार संबंधी मामलों के लिए स्टेट सेक्रेट्री पद उज़रा संभालेंगी.

माला अडिगा : बाइडन की पत्नी जिल बाइडन के लिए नीति निदेशक के तौर पर माला नज़र आएंगी.
गरिमा वर्मा : जिल बाइडन के दफ्तर में डिजिटल डायरेक्टर पद पर गरिमा होंगी.
सबरीना सिंह : अमेरिका की पहली महिला बनने जा रहीं जिल के डिप्टी प्रेस सेक्रेट्री के लिए सबरीना का नाम नॉमिनेट हुआ.
आयशा शाह : व्हाइट हाउस में डिजिटल स्ट्रैटजी के लिए पार्टनरशिप मैनेजर का रोल आयशा को मिला है.

समीरा फाज़िली : आयशा के बाद दूसरी कश्मीरी समीरा हैं, जिन्हें व्हाइट हाउस में रोल मिला. नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल में डिप्टी डायरेक्टर समीरा होंगी.
भरत राममूर्ति : समीरा के ही समकक्ष एनईसी के डिप्टी डायरेक्टर राममूर्ति भी होंगे.
गौतम राघवन : प्रेसिडेंशियल स्टाफ से जुड़े दफ्तर में डिप्टी डायरेक्टर का पद संभालेंगे.
विनय रेड्डी : भाषण लिखने वाले विभाग में डायरेक्टर होंगे.

वेदांत पटेल : प्रेसिडेंट के सहायक प्रेस सेक्रेट्री की ज़िम्मेदारी पटेल को मिलेगी.
सोनिया अग्रवाल : व्हाइट हाउस में अमेरिका की क्लाइमेट पॉलिसी और इनोवेशन के मामलों में वरिष्ठ सलाहकार की भूमिका निभाएंगी.
विदुर शर्मा : व्हाइट हाउस की कोविड 19 रिस्पॉंस टीम में टेस्टिंग के मामलों में नीति सलाहकार होंगे.
तरुण छाबड़ा : व्हाइट हाउस की सिक्योरिटी काउंसिल में जिन तीन भारतीयों को प्रवेश मिला, उनमें से तरुण को नेशनल सिक्योरिटी व तकनीक के लिए सीनियर डायरेक्टर बनाया गया.

सुमोना गुहा : नेशनल सिक्योरिटी से ही जुड़े विभाग में दक्षिण ​एशिया संबंधी मामलों में सीनियर डायरेक्टर होंगी.
शांति कालथिल : डेमोक्रेसी और मानव अधिकार मामलों के लिए कॉर्डिनेटर बनी हैं.
नेहा गुप्ता : व्हाइट हाउस में वकीलों की टीम में असोसिएट काउंसिल के तौर पर नियुक्त हुईं.
रीमा शाह : नेहा के साथ डिप्टी असोसिएट काउंसिल के तौर पर सेवाएं देंगी.

कमला हैरिस को तो आप जानते ही हैं
भारत और दक्षिण एशिया में अपनी जड़ें रखने वाली कमला हैरिस पहली अश्वेत अमेरिकी महिला हैं, जो उप राष्ट्रपति बनने जा रही हैं. बाइडन की टीम में सबसे बड़ा और प्रमुख चेहरा तो कमला ही होंगी, जिनके बारे में काफी चर्चा की जा चुकी है. भारतीय अमेरिकी कम्युनिटी को इतना प्रतिनिधित्व और पहचान मिलने से बेहद उत्साह है.  (news18.com)


18-Jan-2021 1:06 PM 23

सूमी खान

ढाका, 18 जनवरी | बांग्लादेश की सरकार ने मार्च, 2020 के बाद से अलग-अलग समयों पर 23 बेलआउट पैकेजों को लॉन्च किया है ताकि कोविड-19 की वजह से हुई कमजोर आर्थिक स्थिति को थोड़ा बल मिल सके।

वित्त मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, रविवार को प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हाशिए पर रह रहे ग्रामीणों की जिंदगी में सुधार लाने के मकसद से दो नई योजनाओं को मंजूरी दे दी, जिनकी कीमत 2,700 करोड़ टका आंकी जा रही है।

मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि सरकार ने अभी तक इन सभी संगठनों और एजेंसियों के माध्यम से प्रदान किए जाने वाले ऋण पर ब्याज दरों पर कोई फैसला नहीं लिया है, लेकिन लाभार्थियों को कम ब्याज पर ऋण मुहैया कराया जाएगा।

धनराशि को जारी करने से पहले वित्त विभाग द्वारा उनकी मौजूदा दरों की चर्चा और समीक्षा की जाएगी और इस पर कोई ठोस फैसला लिया जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि नए पैकेजों का कार्यान्वयन जल्द ही शुरू होगा।

वित्तीय सहायता की कुल राशि इस वक्त 124,053 करोड़ टका है यानि कि देश के सकल घरेलू उत्पाद का 4.44 प्रतिशत।

मंत्रालय द्वारा हाल ही में आयोजित बैठकों में इन प्रोत्साहन पैकेजों के समग्र पहलुओं पर चर्चा की गई और तमाम हितधारकों की सिफारिशों के बाद ही इन नई योजनाओं को मंजूरी दी गई है।

इस चर्चा में व्यापारिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों और बैंकों के प्रतिनिधियों, विकास भागीदारों और एजेंसियों ने सरकारी और अर्ध-सरकारी एजेंसियों के माध्यम से कुटीर, लघु और मध्यम उद्योगों (एसएमई) में धनराशि के विस्तार का सुझाव दिया।

इस बयान में आगे कहा गया कि उन्होंने हाशिए पर रह रहे लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने और गरीबों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार करने के लिए भी कदम उठाने की बात कही है।

1,500 करोड़ टका के इस पैकेज के तहत सरकार विभिन्न सरकारी और अर्ध-सरकारी एजेंसियों के माध्यम से सूक्ष्म और कुटीर उद्यमियों को ऋण देगी, जिनमें एसएमई फाउंडेशन, बांग्लादेश स्मॉल एंड कॉटेज इंडस्ट्रीज कॉपोर्रेशन और बांग्लादेश एनजीओ फाउंडेशन शामिल होंगे ताकि महामारी के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गति लाई जा सके।

300 करोड़ टका की धनराशि एसएमई फाउंडेशन को प्रदान किए जाएंगे ताकि वे कुटीर उद्योगों में अपने परिचालन का विस्तार कर सके और साथ ही इसके माध्यम से महिला उद्यमियों की भी मदद की जाएगी।

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, एसएमई फाउंडेशन द्वारा छोटे व्यवसायों और उद्यमियों के बीच ऋण का प्रसार किया जाएगा ताकि महामारी की वजह से पैदा हुई आर्थिक मंदी की स्थिति का भली-भांति सामना किया जा सके।

इसके अलावा, पैकेज के तहत बांग्लादेश लघु और कुटीर उद्योग निगम को 100 करोड़ रुपये मिलेंगे। देश भर में छोटे-छोटे प्रयासों का समर्थन करने के लिए स्थापित राज्य द्वारा संचालित यह निगम अपने मौजूदा क्रेडिट कार्यक्रमों के तहत अपने यहां के छोटे उद्यमियों और औद्योगिक इकाइयों को ऋण प्रदान करेगा।

पैकेज में व्यवसाय के ²ष्टिकोण से महिलाओं को भी वित्तीय सहायता दी जाएगी, जो आर्थिक मंदी की वजह से काफी प्रभावित हुई हैं।

महिलाओं के उपक्रमों का समर्थन करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक सरकारी पहल के तहत जोइता फाउंडेशन को 50 करोड़ टका मिलेंगे। ऋण प्रदान करने के अलावा फाउंडेशन द्वारा महिला उद्यमियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इसके अलावा, सामाजिक विकास फाउंडेशन पल्ली दोरिद्रो विमोचन फाउंडेशन और बांग्लादेश पल्ली डेवलपमेंट बोर्ड को भी क्रमश: 300-300 करोड़ टका दिए जाएंगे और स्मॉल फार्मस डेवलपमेंट फाउंडेशन को 100 करोड़ टका मिलेगा।

मार्च 2020 में, सरकार ने देश में महामारी के शुरू होने के बाद से कुटीर, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए 20,000 करोड़ टका के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी। हालांकि, बड़े औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों की तुलना में यहां ऋणों के वितरण की दर कम थी।

1,200 करोड़ टका पैकेज के तहत गरीबी से प्रभावित देश के 150 उप-जिलाओं में सुविधाहीन बुजुर्गों, विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं को सहायता के रूप में धनराशि प्रदान की जाएगी। लाभार्थियों को एक महीने में 500 टका का भत्ता मिलेगा। पैकेज को वित्तीय वर्ष 2021-2022 में लागू किया जाएगा। (आईएएनएस)
 


18-Jan-2021 1:05 PM 22

निखिला नटराजन

न्यूयॉर्क, 18 जनवरी (आईएएनएस)| कमला देवी हैरिस, विवेक मूर्ति, गौतम राघवन, माला अडिगा, विनय रेड्डी, भरत राममूर्ति, नीरा टंडन, सेलिन गाउंडर, अतुल गवांडे कुछ ऐसे भारतीय अमेरिकी नाम हैं जो अब किसी भी समय की तुलना में वहाइट हाउस के गलियारे में ज्यादा मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।

अब तक, लगभग दो दर्जन भारतीय-अमेरिकियों को बाइडेन-हैरिस ए-टीम में ज्यादा प्रभावशाली पदों पर नियुक्त या नामित किया गया है।

रिपब्लिकन सीनेटर डेविड पेरड्यू, निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी, ने कमला हैरिस को कह-मह-मह-लाह या काह-माह-लाहऔर कमला-माला-माला कहा! उन्होंने कुछ ऐसा बोलकर 3 नवंबर, 2020 के चुनाव से पहले कमला हैरिस का मजाक उड़ाया था।

जैसा कि पेरड्यू ने खुद का एक तमाशा बनाया था, बहुत कम ही उन्हें या ट्रंप को पता था कि दो दर्जन भारतीय नाम 2021 में व्हाइट हाउस में अपनी जगह बनाएंगे।

6 जनवरी तक, जिस दिन एक हिंसक समर्थक ट्रंप भीड़ ने वाशिंगटन डीसी में कैपिटल बिल्डिंग पर हमला किया, हैरिस के डेमोक्रेटिक पार्टी के सहयोगियों ने जॉर्जिया सीनेट की दोनों सीटों पर जीत हासिल कर ली थी, जिसने अमेरिका के शक्ति संतुलन को बदल दिया।

जब हैरिस और बाइडेन शपथ लेंगे तो वे चिकित्सा, अर्थशास्त्र, डिजिटल संचार और स्टोरी टेलिंग सहित विषय वस्तु विशेषज्ञता के एक विस्तृत आर्क के पार भारतीय-अमेरिकी सफलता की कहानियों के व्हाइट हाउस में आने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

इन नामों में गौतम राघवन, विवेक मूर्ति, माला अडिगा, विनय रेड्डी, भारत राममूर्ति, नीरा टंडन, सेलीन गाउंडर शामिल हैं।

हैरिस ने अपना नाम अमेरिका को समझाने में बहुत समय बिताया है। जिसका अर्थ कमल का फूल होता है।

कमला, देवी लक्ष्मी के 108 नामों में से एक है, जो भारतीय हिंदू संस्कृति में धन, समृद्धि और सौभाग्य की शक्ति है।

आईएएनएस के साथ हालिया बातचीत में, राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर और एएपीआई डेटा के संस्थापक कार्तिक रामकृष्णन ने 'बहुत ही विशेष तमिल ब्राह्मण अनुभव' की ओर इशारा किया, जिसकी झलक कमला हैरिस में देखने को मिलती है।

अगस्त 2020 में डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन के दौरान, कमला हैरिस ने इन शब्दों में खुद को अमेरिकी जनता के समक्ष पेश किया था, "एक और महिला है, जिसका नाम ज्ञात नहीं है, जिसकी कहानी साझा नहीं की गई है। एक अन्य महिला जिसके कंधे पर मैं खड़ी हूं और वह मेरी मां-श्यामला गोपालन हैरिस हैं।"

हालांकि, समानांतर में, सांस्कृतिक परिवर्तन की एक विधि के रूप में परिवर्तनों को नाम देने के लिए अमेरिका कोई अजनबी नहीं है।

जिस किसी ने भी कमला के नाम का मजाक उड़ाना अच्छा विचार समझा, उसका यह मिथक वह वर्ष 2020 में टूट गया।
 


18-Jan-2021 12:59 PM 13

चीन के ताज़ा सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से सिर्फ़ चीन ने ही साल 2020 में बढ़ोतरी दर्ज की है.

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन की जीडीपी की विकास दर 2.3 फ़ीसदी रही है. साल के आखिरी तिमाही में ये दर 6.5 फीसदी रही वहीं तीसरी तिमाही में ये दर 4.9 फीसदी थी.

कोविड-19 के कारण लॉकडाउन की परिस्थिति में 2020 के शुरूआती तीन महीने में चीन की अर्थव्यस्था 6.8 फीसदी तक गिर गई थी.

वायरस के लिए कंटेनमेंट ज़ोन तय करने और आपातकालीन सहायताओं के कारण चीन का व्यापार और अर्थव्यवस्था फिर से एक बार पटरी पर लौटने लगी थी.

हालांकि कोविड-19 का असर अब तक बरक़रार है, देशभर में लगे शटडाउन और बंद पड़े कई मैन्युफ़ैक्चरिंग प्लांट ने अर्थव्यवस्था को धीमी विकास दर की ओर धकेल दिया है. वर्तमान जीडीपी के आंकड़े बीते 40 साल में चीन की सबसे धीमी विकास-दर दर्शाते हैं.

सोमवार को सामने आए आंकड़ों के मुताबिक़ चौथी तिमाही में चीन के औद्योगिक उत्पादन में 7.3 फीसदी की बढ़त और रिटेल सेक्टर में 4.6 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है.

कई विश्लेषकों के मत हैं कि साल 2021 में अर्थव्यस्था और तेज़ी से आगे बढ़ेगी लेकिन इसके विपरीत चीन के सांख्यिकी ब्यूरो ने टिप्पणी की है कि "विदेश और देश में भयानक और जटिल परिस्थितियां पैदा हुई है, महामारी का 'बड़ा असर' पड़ा है."

गुरुवार को सामने आए आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर महीने में चीन के निर्यात में उम्मीद से अधिक वृद्धि हुई क्योंकि दुनिया भर में कोरोनो वायरस के प्रकोप के दौरान ने चीनी सामानों की मांग को बढ़ी है. इसके अलावा चीन ने 2020 में कच्चे तेल, तांबा, लौह अयस्क और कोयले की रिकॉर्ड खरीदारी की है.

जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में चीनी मुद्रा युआन के मज़बूत होने के बावजूद चीनी सामान की बिक्री बढ़ी है. युआन के मज़बूती से निर्यात महंगा हो जाता है.

इकोनॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट में बतौर प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट काम करने वाली यूए सू कहती हैं, "जीडीपी के आंकड़े बताते हैं कि अर्थव्यवस्था अब सामान्य हो रही है. अभी भी चीन के उत्तरी प्रांतों में कोरोना के नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं जिससे अर्थव्यवस्था को मामूली झटका लग सकता है, लेकिन उम्मीद यही है कि अर्थव्यवस्था के सुधरने की गति बरकरार रहेगी."

बीते महीने चीन के नेताओं ने एक एजेंडा बैठक में तय किया था कि इस साल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी नीतियों का समर्थन किया जाएगा और चीन किसी भी तरह के अचानक नीतियों के परिवर्तन से बचेगा.

चीन की अर्थव्यवस्था में ऐसे वक़्त में बढ़त देखी जा रही है, जब दुनिया के बाक़ी देश कमज़ोर मांग, लाखों नौकरियां जाने और बंद होते कारोबारों से जूझ रहे हैं.

एक कठोर लॉकडाउन की वजह से 2020 की पहली तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था में 6.8 फीसदी की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई, इसके बावजूद चीन की अर्थव्यवस्था का इंजन अब फिर से रफ़्तार पकड़ने लगा है.

लेकिन हमें चीन के डेटा को लेकर हमेशा चौकसी बरतनी चाहिए. चीन की अर्थव्यवस्था की स्थिति को समझने के लिए हमें आंकड़ों के बजाए डेटा के कर्व को देखना चाहिए. ये आंकड़े दिखाते हैं कि शहरों में कठोर और तुरंत लॉकडाउन लगाने की चीन की रणनीति ने काम किया. सरकार के नेतृत्व में निवेश और चीनी सामानों के लिए वैश्विक मांग पैदा करने के कदम ने तेज़ रिकवरी और निर्यात बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.

हालांकि चीन की ये सालाना वृद्धि दर 40 से भी ज़्यादा सालों में सबसे कम रही है. एक तरफ वायरस के दोबारा पैर पसारने की चिंताओं ने चीनी ग्रोथ की भविष्य की तस्वीर को धुंधला कर दिया है और उपभोक्ता मांग अब भी कमज़ोर है, तो दूसरी तरफ चीन अमेरिका के साथ अपने तल्ख़ रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहा है. हालांकि ऐसा लगता नहीं है कि अमेरिका का नया प्रशासन चीन पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुक़ाबले नरम रवैया अपनाएगा.

इसमें कोई शक नहीं है कि ये सभी चुनौतियां 2021 में चीन के विकास पर असर डालेंगी, लेकिन संभावना है कि चीन दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में तो बेहतर स्थिति में ही होगा. (bbc.com)


18-Jan-2021 12:49 PM 14

जकार्ता, 18 जनवरी | इंडोनेशिया में आए एक शक्तिशाली भूकंप और बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 96 हो गई है और इस वक्त करीब 70,000 लोग विस्थापित हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने सोमवार को इसकी जानकारी दी है। एजेंसी के एक प्रवक्ता रादित्य जाति ने कहा कि पश्चिम सुलावेसी प्रांत में 14 व 15 जनवरी को 6.2 तीव्रता के भूकंप और 5.9-तीव्रता के इसके आफ्टरशॉक के बाद कुल 81 लोगों ने अपनी जानें गंवाई हैं।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी बीच दक्षिण कालिमंतान में 14 जनवरी को बाढ़ आने के चलते 15 लोगों की मौत हो चुकी है।

जाति ने कहा कि भूकंप आने की वजह से करीब 28,000 लोगों को दक्षिणी सुलावेसी प्रांत के शहर मामुजू और मैजेने जिले में बने 25 शिविरों में विस्थापित होना पड़ा, जबकि बाढ़ के चलते लगभग 40,000 निवासियों को दक्षिणी कालिमंतान प्रांत में मजबूरन विस्थापित होना पड़ा।

उन्होंने आगे बताया कि भूकंप से क्षतिग्रस्त हुए घरों की संख्या जिले में 1,150 हो गई है और पांच विद्यालयों को भी नुकसान पहुंचा है। शहर और जिले में भूंकप के फिर से आने की आशंका बनी हुई है।

एजेंसी के प्रमुख डॉनी मोनाडरे के मुताबिक, "लोगों को प्रभावित इलाकों से बाहर निकालने की प्रक्रिया में कोविड-19 के फैलने की आशंका को ध्यान में रखते हुए रैपिड टेस्ट कराए जा रहे हैं और विस्थापित लोगों के लिए बने शिविर भी एक-दूसरे से दूर-दूर बनाए गए हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "ये पीड़ित किसी भी तरह से कोविड-19 वायरस की चपेट में न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए एंटीजन टेस्ट की व्यवस्था होगी।"

जाति ने यह भी बताया, इस बीच, दक्षिण कालिमंतान प्रांत में आए बाढ़ की वजह से करीब-करीब 25,000 मकान ढ़ह गए हैं।

उन्होंने कहा कि 14 जनवरी से एक आपातकालीन स्थिति घोषित की गई है और जोखिम के होने की भविष्यवाणी की गई है।  (आईएएनएस)

 


18-Jan-2021 12:31 PM 13

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आलोचक अलेक्सी नावाल्नी को रूस लौटते ही गिरफ्तार कर लिया गया है. उनकी गिरफ्तारी की वैश्विक नेताओं ने आलोचना की है. अमेरिका ने नावाल्नी की गिरफ्तारी को विरोधियों को चुप कराने वाला कदम बताया.

  dw.com

मॉस्को एयरपोर्ट पर विपक्षी नेता नावाल्नी को उस वक्त गिरफ्तार कर लिया गया जब वे कई महीनों बाद अपना इलाज कराकर जर्मनी से लौटे थे. नावाल्नी को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कटु आलोचक माना जाता है. पिछले साल 20 अगस्त को उनकी विमान यात्रा के दौरान तबियत बिगड़ गई थी और विमान की आपात लैंडिंग करानी पड़ी थी. बाद में पता चला कि उन्हें जहर दिया गया था. नावाल्नी का इलाज जर्मनी में चल रहा था. नावाल्नी के साथ हुई घटना के बाद पश्चिमी देशों ने इसकी कड़े शब्दों में आलोचना की थी. नावाल्नी का कहना था उन्हें नर्व एजेंट देने का आदेश पुतिन ने दिया था.

अमेरिका, यूरोपीय संघ, यूरोपीय संघ के सदस्य देशों, कनाडा की सरकार और अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन के एक वरिष्ठ सहयोगी ने नावाल्नी की तत्काल रिहाई का आग्रह किया है. अधिकार समूहों ने भी रिहाई की मांग की है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आरोप लगाया है कि रूसी सरकार नावाल्नी को चुप कराने के लिए "अथक अभियान" चला रही है. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल ने ट्विटर पर लिखा कि नावाल्नी की गिरफ्तारी "अस्वीकार्य" है जबकि फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि गिरफ्तारी "गंभीर चिंता" का विषय है. बाइडेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान ने कहा, नावाल्नी को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए और उनपर हमले के अपराधियों को पकड़कर सजा दी जानी चाहिए."

गिरफ्तारी की आलोचना

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ ने कहा है कि अमेरिका इसकी "कड़ी निंदा" करता और उन्होंने गिरफ्तारी पर चिंता जाहिर करते हुए कहा रूसी सरकार की आलोचना करने वाली आवाजों को दबाने का यह ताजा प्रयास है. रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखरोवा ने पलटवार करते हुए फेसबुक पोस्ट में लिखा कि विदेशी नेता "अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करें" और "अपने देश की समस्याओं से निपटें."

एएफपी के मुताबिक 44 साल के नावाल्नी जब बर्लिन की फ्लाइट से मॉस्को पहुंचे तो उनका सामना पासपोर्ट कंट्रोल के पास वर्दी वाले पुलिसकर्मयिों से हुआ. उन्होंने अपनी पत्नी युलिया को गले लगाया, जो जर्मनी से उनके साथ यात्रा कर आई थीं. वहां से पुलिस नावाल्नी को लेकर चली गई. उनके समर्थकों का कहना है कि उन्हें एयरपोर्ट के नजदीक एक पुलिस स्टेशन में रखा गया. नावाल्नी की वकील ओल्गा मिखाइलोवा ने कहा कि उन्हें बिना कोई कारण हिरासत में लिया गया और उन्हें साथ जाने नहीं दिया गया. उन्होंने कहा, "अभी जो भी हो रहा है वह कानून के खिलाफ हो रहा है."

क्रेमलिन के आलोचक 

रूस की एफएसआईएन जेल सेवा ने एक बयान में कहा है कि उसने नावाल्नी को 2014 के धोखाधड़ी के निलंबति जेल की सजा के उल्लंघन के मामले में हिरासत में लिया है और कोर्ट का फैसला आने तक उन्हें हिरासत में रखा जाएगा. नावाल्नी धोखाधड़ी के एक मामले में दोषी हैं. एफएसआईएन जेल सेवा ने पहले कहा था कि अगर नावाल्नी शर्तों का उल्लंघन करते हैं तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा, जेल सेवा ने उन्हें कार्यालय में उपस्थिति दर्ज करने को कहा था. शेरमेटयेवो एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए नावाल्नी ने कहा था कि उन्हें गिरफ्तारी से डर नहीं लगता. उन्होंने कहा, "मुझे खौफ नहीं है...क्योंकि मुझे पता है कि मैं सही हूं, मुझे पता है कि मेरे खिलाफ आपराधिक मामले गढ़े गए हैं."

नावाल्नी के विमान को आखिरी समय में मॉस्को के वुनकोव एयरपोर्ट से शेरमेटयेवो एयरपोर्ट के लिए मोड़ दिया गया. नावाल्नी ने अपने समर्थकों को वुनकोव एयरपोर्ट पर जुटने के लिए कहा था. माना जा रहा है कि प्रशासन के इस फैसले के पीछे पत्रकारों और नावाल्नी के समर्थकों को मिलने से रोकना था. नावाल्नी का इलाज बर्लिन के शारिटे अस्पताल में नोविचोक नाम के नर्व एजेंट (जहर) के लिए चल रहा था. उन्होंने जर्मनी में पांच महीने बिताए और उसके बाद वे रूस लौट थे. जहर देने के लिए उन्होंने क्रेमलिन को जिम्मेदार ठहराया था. मॉस्को नावाल्नी को जहर दिए जाने के आरोपों से इनकार करता आया है, इसके बजाय वह पश्चिमी समर्थित साजिश के आरोपों को दोहराता आया है और हमले की जांच करने से इनकार कर चुका है.

एए/सीके (एएफपी, डीपीए)


18-Jan-2021 12:15 PM 15

सैन फ्रांसिस्को, 18 जनवरी | कैलिफोर्निया काउंटी में 32,904 मामले और 418 नई मौतें सामने आने के बाद राज्य में कुल मामलों की संख्या 29,51,682 और मौतें 33,391 पर पहुंच गई है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार तक बे एरिया में कुल मामलों की संख्या 3,34,505 थी और 3,342 लोगों की मौत हो चुकी थी। वहीं सांता क्लारा काउंटी में 1,060 मौतें और 91,466 मामले दर्ज हुए हैं। सैन फ्रांसिस्को में शनिवार को वायरस से 13 लोगों की मौत होने के बाद कुल मौतों की संख्या 254 हो गई थी, यहां अब तक 28,221 मामले दर्ज हो चुके हैं।

कॉन्ट्रा कोस्टा काउंटी में 446 मौतों के साथ, अब तक 51,573 लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। शनिवार को भी यहां 946 मामले सामने आए। सैन मेटो काउंटी के अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि यहां 554 नए मामलों के बाद कुल मामले 31,204 हो गए हैं। अल्मेडा काउंटी में शनिवार को 919 नए मामले सामने आए और 2 नई मौतें हुईं, अब यहां कुल 65,679 मामले और 757 मौतें दर्ज हो चुकी हैं।

नॉर्थ बे के सोनोमा, सोलानो, मारिन और नपा काउंटियों में शनिवार को कोई नई मौत नहीं हुई, लेकिन 383 नए मामले आए। अब यहां कुल मामलों की संख्या 66,362 और मौतों की संख्या 531 है।

कैलिफोर्निया के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बे एरिया क्षेत्र में अब आईसीयू की उपलब्धता का प्रतिशत 3.4 प्रतिशत है। (आईएएनएस)


18-Jan-2021 12:13 PM 15

जकार्ता, 18 जनवरी (आईएएनएस)| इंडोनेशिया में आए एक शक्तिशाली भूकंप और बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 96 हो गई है और इस वक्त करीब 70,000 लोग विस्थापित हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने सोमवार को इसकी जानकारी दी है। एजेंसी के एक प्रवक्ता रादित्य जाति ने कहा कि पश्चिम सुलावेसी प्रांत में 14 व 15 जनवरी को 6.2 तीव्रता के भूकंप और 5.9-तीव्रता के इसके आफ्टरशॉक के बाद कुल 81 लोगों ने अपनी जानें गंवाई हैं।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी बीच दक्षिण कालिमंतान में 14 जनवरी को बाढ़ आने के चलते 15 लोगों की मौत हो चुकी है।

जाति ने कहा कि भूकंप आने की वजह से करीब 28,000 लोगों को दक्षिणी सुलावेसी प्रांत के शहर मामुजू और मैजेने जिले में बने 25 शिविरों में विस्थापित होना पड़ा, जबकि बाढ़ के चलते लगभग 40,000 निवासियों को दक्षिणी कालिमंतान प्रांत में मजबूरन विस्थापित होना पड़ा।

उन्होंने आगे बताया कि भूकंप से क्षतिग्रस्त हुए घरों की संख्या जिले में 1,150 हो गई है और पांच विद्यालयों को भी नुकसान पहुंचा है। शहर और जिले में भूंकप के फिर से आने की आशंका बनी हुई है।

एजेंसी के प्रमुख डॉनी मोनाडरे के मुताबिक, "लोगों को प्रभावित इलाकों से बाहर निकालने की प्रक्रिया में कोविड-19 के फैलने की आशंका को ध्यान में रखते हुए रैपिड टेस्ट कराए जा रहे हैं और विस्थापित लोगों के लिए बने शिविर भी एक-दूसरे से दूर-दूर बनाए गए हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "ये पीड़ित किसी भी तरह से कोविड-19 वायरस की चपेट में न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए एंटीजन टेस्ट की व्यवस्था होगी।"

जाति ने यह भी बताया, इस बीच, दक्षिण कालिमंतान प्रांत में आए बाढ़ की वजह से करीब-करीब 25,000 मकान ढ़ह गए हैं।

उन्होंने कहा कि 14 जनवरी से एक आपातकालीन स्थिति घोषित की गई है और जोखिम के होने की भविष्यवाणी की गई है।


18-Jan-2021 12:02 PM 14

इस्लामाबाद. पाकिस्तान में जीएम सईद की 117 वीं जयंती पर सिंध प्रांत के सान कस्बे में प्रदर्शनकारियों ने सिंधुदेश की आजादी के लिए रै​ली निकाली. इस अवसर पर प्रदर्शनकारी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दुनिया के अलग-अलग देशों के नेताओं की तस्वीरें हाथों में लिए नारा लगा रहे थे. आपको बता दें कि सईद आधुनिक सिंधी राष्ट्रवाद के जनक माने जाते हैं.

प्रदर्शनकारियों ने सिंध प्रांत को बताया वैदिक सभ्यता का घर

सईद सान में पैदा हुए थे. सान कस्ब पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जमशोरो जिले में पड़ता है. प्रदर्शनकारियों ने इस बात ​का दावा किया कि सिंध प्रांत सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक सभ्यता का घर है और जिसे ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था और 1947 में उन्होंने 1947 में पाकिस्तान के मुस्लमानों के हाथों में सौंप दिया था. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सभी दर्दनाक हमलों के बीच सिंध ने अपने इतिहास, संस्कृति, स्वतंत्रता, सहिष्णु और सामंजस्यपूर्ण समाज के रूप में अपनी अलग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखा है.

देशी और विदेशी भाषा ने एक-दूसरे को प्रभावित किया

जेई सिंध मुत्तहिदा महाज के अध्यक्ष शफी मुहम्मद बुरफात ने कहा कि विदेशी और देशी लोगों की भाषाओं और विचारों ने न केवल एक-दूसरे को प्रभावित किया है बल्कि मानव सभ्यता के सामान्य संदेश को स्वीकार भी किया है. उन्होंने कहा कि पूर्व और पश्चिम के धर्मों, दर्शन और सभ्यता के इस ऐतिहासिक मेल ने हमारी मातृभूमि सिंध को मानवता के इतिहास में एक अलग स्थान दिया है.

चीन के हाथों बेचने की बात से परेशान हो रहे हैं यहां के लोग

पाकिस्तान की इमरान खान सरकार के दौरान सिंध प्रांत में अल्पसंख्यक समुदायों विशेषकर हिंदू, सिख और ईसाई तबके के साथ काफी ज्यादती की खबरें आती रहीं हैं. इतना ही नहीं, सिंध की जमीन को जबरन चीन को दिया जा रहा है. चीन को मछली पकड़ने के लिए समुद्री इलाके दिए जा रहे हैं.

पाकिस्‍तान में अलग सिंधुदेश बनाने की मांग सिंध की राष्‍ट्रवादी पार्टियां कर रही हैं. इस आंदोलन को सिंध के नेता जीएम सैयद ने बांग्‍लादेश की आजादी 1971 के ठीक बाद शुरू किया था. उन्‍होंने सिंध के राष्‍ट्रवाद को नई दिशा दी और आधुनिक सिंधुदेश का विचार दिया. इस आंदोलन से जुडे़ नेताओं का मानना है कि संसदीय तरीके से आजादी और अधिकार नहीं मिल सकते हैं.  (news18.com)