अंतरराष्ट्रीय

Posted Date : 18-May-2018
  • आज हम आपको दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला से मिलवाएंगे। महिला की उम्र 128 साल होने का दावा किया गया है। बताया जाता है कि अब यह अपना 129वां जन्मदिन मनाने जा रही है। इस महिला की उम्र के बारे में तो जानकर आप चौंक ही गए होंगे लेकिन इससे भी ज्यादा हैरानी आपको तब होगी जब इसकी जिंदगी की कहानी जानेंगे। 
    डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक रूस में एक महिला खुद को दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला कह रही है। दावा है कि यह महिला 128 साल की है और अब जल्द ही अपना 129वां जन्मदिन मनाने वाली है। इस महिला को अपनी लंबी उम्र से परेशानी होने लगी है। इस वजह से वह खुश नहीं रहती।
    रूस के चेचेन्या में रहने वाली कोकू इस्तामबुलोवा को लगता है कि वह जिंदगी में एक भी दिन खुश नहीं रही। इसके बावजूद पता नहीं कैसे वह इतने वर्षों जिंदा रह गई। इस्तामबुलोवा शाकाहारी हैं। वह खाना कम और दूध ज्यादा पीती हैं। अगले महीने ही वह 129वां साल की हो जाएंगी।
    जी हां इस्तामबुलोवा अगले महीने अपना 129वां जन्मदिन मनाएंगी। इस बात की पुष्टि खुद रूस सरकार ने की है। उनके पासपोर्ट में उनके जन्म की तारीख 1 जून 1889 लिखी गई है। इस लिहाज से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनकी उम्र 55 साल और सोवियत संघ के पतन के दौरान 102 साल रही होगी। याद हो सोवियत रूस का पतन 1991 में हो गया था।
    इस्तामबुलोवा द्वितीय विश्व युद्ध को दौर को बहुत ही भयानक बताती है। उस समय नाजियों के टैंक उनके घरों के पास से गुजरते थे। अपनी उम्र के राज के सवाल पर इस्तामबुलोवा इसे भगवान की मर्जी बताती है। जहां लोग  लंबे समय तक जीने के लिए खेलते-कूदते हैं, कुछ अच्छा खाते हैं उधर इस्तामबुलोवा ने इतने समय तक जिंदा रहने के लिए कुछ भी नहीं किया।
    लेकिन उनकी यह जिंदगी अब उन पर ही बोझ बनती जा रही है। वह अपनी जिंदगी में एक भी दिन खुशी नहीं रही। इस उम्र में वह खुद खाना बनाती है। उनके सारे बच्चों की मौत हो चुकी है। उन्हें संभालने वाला कोई नहीं है। अपनी जवानी में वह गार्डन की खुदाई किया करती थी। अब तो उनसे वह भी नहीं होती। दरअसल कोको अपनी जिंदगी से पूरी तरह से थक चुकी हूं। उन्हें अब यह लगता है कि भगवान उन्हें सजा दे रहा है। (डेलीमेल)

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Posted Date : 18-May-2018
  • वॉशिंगटन, 18 मई । दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया वेबसाइट फेसबुक ने साल 2018 के शुरुआती 3 महीने में लगभग 58 करोड़ 30 लाख फेक अकाउंट्स को बंद कर दिया है। कंपनी का कहना है कि उसने यह कदम कम्युनिटी स्टैंडर्ड को बनाए रखने और समाज में हिंसा, सेक्स या आतंकी प्रोपेगैंडा और हेट स्पीच पर लगाम लगाने के लिए उठाया है। 
    कैंब्रिज ऐनालिटिका डेटा लीक मामले के बाद विवादों में आने वाले फेसबुक ने कहा है कि उसने हर दिन खुलने वाले लाखों फेक अकाउंट्स पर रोक लगाने का प्रयास कर रहा है। हालांकि कंपनी का कहना है कि इतना बड़ा कदम उठाने के बावजूद सभी ऐक्टिव अकाउंट्स में से 3-4 फीसदी प्रोफाइल फेक हैं। 
    फेसबुक का दावा है कि वह लगभग 100 पर्सेंट तक स्पैम की पहचान करता है और उसने पिछले 3 महीनों में 837 मिलियन यूजर पोस्ट्स को डिलीट किया है। इस दौरान फेसबुक ने अपने यूजर्स की 3 करोड़ ऐसी पोस्ट्स पर वॉर्निंग भी जारी की है जिनमें हिंसा, सेक्स, आतंकवाद या हेट स्पीच जैसा कॉन्टेंट था। 
    फेसबुक का दावा है कि वह आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के जरिए ऐसी पोस्ट की पहचान कर रहा है और यूजर्स द्वारा रिपोर्ट किए जाने से पहले वह लगभग 85.6 फीसदी ऐसी आपत्तिजनक पोस्ट की पहचान कर लेता है। हाल में फेसबुक ने यूजर्स के प्राइवेट डेटा के इस्तेमाल करने वाली 200 से ज्यादा एप्स को अपने प्लैटफॉर्म से भी हटाया था। (एएफपी)

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Posted Date : 18-May-2018
  • वॉशिंगटन, 18 मई। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जीना हास्पेल को सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) की नई निदेशक के तौर नियुक्त किया। उन्होंने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। ट्रंप ने ट्वीट कर जीना हास्पेल को सीआईए की नई निदेशक बनने पर बधाई दी।
    कौन हैं जीना हास्पेल?
    जीना हास्पेल पहली महिला हैं जिन्हें सीआईए के निदेशक के तौर पर चुना गया है। इससे पहले जीना हास्पेल सीआईए की उप-प्रमुख थीं। अपने कार्यकाल में वो अधिकतर समय एक गुप्त एजेंट की भूमिका में ही रहीं। जीना हास्पेल को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जॉर्ज एस डब्ल्यू बुश सम्मान भी दिया जा चुका है।
    सार्वजनिक मंच पर कहा-सुनी के कई वाकयों के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने शीर्ष सहयोगी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन को पद से हटा दिया था। उनकी जगह माइक पोंपियो को नियुक्त किया।
    ट्रंप ने ट्वीट किया, माइक पोंपियो, सीआईए के निदेशक हमारे नए विदेश मंत्री बनेंगे। वह बेहतरीन कार्य करेंगे। ट्रंप ने सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के प्रमुख के तौर पर जीना हास्पेल की नियुक्ति की भी घोषणा की थी। ट्रंप ने कहा, मैंने यह फैसला ( टिलरसन को हटाने का) स्वयं लिया है। सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान समेत प्रमुख मुद्दों पर उनके टिलरसन के साथ मतभेद थे। (आज तक)

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Posted Date : 17-May-2018
  • सोफिया
    बुल्गारिया, 17 मई । ईरान डील से बाहर निकलने और व्यापार युद्ध को बढ़ावा देने के बाद अब अमरीका के दोस्त ही उनसे नाराज दिख रहे हैं। यूरोपियन यूनियन के चेयरमैन ने बुधवार को एक बैठक के दौरान कहा कि जिनके पास डॉनल्ड ट्रंप जैसे दोस्त हों, उन्हें दुश्मनों की क्या जरूरत है? 
    28 देशों के नेता बुधवार को बुल्गारिया की राजधानी में रात्रिभोज पर मिले थे, ताकि इसपर चर्चा की जा सके कि बचे-खुचे ईरान समझौते को कैसे सुरक्षित रखा जाए और यूरोपिय देशों के ईरान के साथ व्यापार को ट्रंप के प्रतिबंधों के बाद कैसे आगे बढ़ाया जाए ताकि ट्रेड वॉर से बचा जा सके। 
    यूरोपियन यूनियन के चेयरमैन डॉनल्ड टस्क ने कहा कि ट्रंप के फैसलों से निपटने के लिए यूरोपियन यूनियन को पहले से भी ज्यादा एकता दिखानी होगी। टस्क ने न्यूज कॉन्फ्रेंस में कहा, राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया फैसलों को देखते हुए कोई यह भी सोच सकता है कि ट्रंप जैसे दोस्तों के होने पर किसी को दुश्मन की क्या जरूरत? 
    इससे आगे उन्होंने कहा, स्पष्ट तौर पर कहूं तो, यूरोप को राष्ट्रपति ट्रंप का आभारी होना चाहिए। क्योंकि हमें सभी तरह के भ्रमों से छुटकारा मिला।
    ट्रंप की अमरीका फस्र्ट नीति से यूरोपियन नेताओं की मुसीबतें लगातार बढ़ रही हैं। फिर वह पैरिस जलवायु समझौते से अमरीका का बाहर निकलना हो या 2015 में हुए ईरान परमाणु समझौते से अमरीका का अलग होना। ट्रंप के फैसलों ने यूरोप की अपनी विदेश नीति के लिए खतरा पैदा कर दिया है। 
    टस्क ने कहा, यूरोप को अपनी सुरक्षा के लिए शक्ति अनुसार सबकुछ करना चाहिए। हमें उस स्थिति के लिए भी तैयार रहना होगा जब अपने दम पर सबकुछ करने की नौबत आ जाएगी।
    इस हफ्ते अमरीकी दूतावास को इजरायल से यरुशलम शिफ्ट करने से भी कई यूरोपिय देश नाराज थे, हालांकि, ईयू इसका खुलकर विरोध इसलिए नहीं कर पाया क्योंकि इजरायल समर्थक देश चेक गणराज्य और हंगरी ने अमरीका के फैसले के समर्थन में थे। (रॉयटर्स)

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Posted Date : 17-May-2018
  • वाशिंगटन, 17 मई । मलेशिया के सुधारवादी नेता माने जाने वाले अनवर इब्राहिम को शाही माफी दिए जाने के साथ जेल से उनकी रिहाई का अमरीका ने स्वागत किया है। इस फैसले पर अमरीकी सरकार के प्रवक्ता ने कहा है, अनवर इब्राहिम पर लगे आरोपों के बाद उन्हें जेल भेजे जाने की घटना से मलेशिया में कानून और न्याय व्यवस्था को चोट पहुंची थी। लेकिन सरकार की तरफ से माफी दिए के बाद अब इब्राहिम एक बार फिर अपने परिवार के साथ हैं। हमें इस बात की बेहद खुशी है।
    इससे पहले बुधवार को 70 वर्षीय अनवर इब्राहिम की रिहाई हुई थी। महातिर मोम्मद के नेतृत्व में मलेशिया की नवनिर्वाचित सरकार के गठन के बाद से ही अनुमान लगाए जाने लगे थे कि इब्राहिम की सजा जल्दी ही माफ की जा सकती है। खबरों के मुताबिक उन्हें भ्रष्टाचार और यौन उत्पीडऩ के आरोप में पांच साल की सजा सुनाई गई थी। कहा जाता है कि उन्हें दी गई सजा राजनीति से प्रेरित थी। ऐसे में मलेशिया के चार विपक्षी दलों ने 92 साल के महातिर मोहम्मद की अगुवाई में एकजुट होकर सत्ता पर काबिज नजीब रजाक के खिलाफ चुनाव लड़ा था। चुनाव में इब्राहिम का दल भी महातिर मोहम्मद के साथ था।
    प्रधानमंत्री पद पर रहने के दौरान नजीब रजाक पर लगे करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप की जांच शुरू हो गई है। इसी कड़ी में स्थानीय पुलिस ने बुधवार को उनके घर समेत कुल पांच ठिकानों पर छापेमारी की। बताया गया है कि छापेमारी गुरुवार की सुबह तक चली। इस दौरान पुलिस ने कुछ थैलों और नजीब रजाक के निजी सामान को जब्त किया है। (टाईम्स आफ इंडिया)

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Posted Date : 17-May-2018
  • लंदन, 17 मई । प्रिंस हैरी और मेगन मार्केल का शाही जोड़ा 19 मई को शादी के बंधन में बंधने जा रहा है। इस शादी को खास बनाने के लिए जबरदस्त तैयारी चल रही है। इसमें दूल्हा-दुल्हन के पोशाक से लेकर शादी में प्रयोग होने वाले फूलों, खाना, और अन्य सजावट का खासा ध्यान रखा जा रहा है। मजेदार बात ये है की शाही जोड़ी को शादी में कुछ अजीबो-गरीब परंपराएं निभानी पड़ेंगी, खासतौर पर प्रिस हैरी को। 
    भले ही खर्च या पैसा शाही परिवार का मसला नहीं है पर  राजकुमार हैरी को शादी की पोशाक महंगी और हटके बनवाने की इजाजत नहीं है। उन्हें चटख लाल रंग की वो यूनिफार्म पहननी होगी जो उन्हें आइरिश गार्ड सेवा में मानद कर्नल के पद के लिए मिली है, या फिर सेना की यूनिफार्म पहननी पड़ेगी जैसी उनके पिता प्रिंस चाल्र्स ने उनकी मां प्रिंसेज डायना से अपनी शादी के दौरान पहनी थी। ऐसा इसलिए है क्योंकि शाही परिवार के बेटों को दूल्हा बनने के दौरान यही कपड़े पहनने होते है फार्मल सूट नहीं। 
    आमतौर में शादी के रिसैप्शन में नवदंपत्ति को पार्टी लॉन या बैंक्वेट हॉल के मध्य में सबके बीच में खास स्थान पर बिठाया जाता है, लेकिन शाही जोड़े के साथ ऐसा नहीं है। प्रिंस हैरी को अपनी पत्नी के साथ चर्च के सीधे हाथ पर अनिवार्य रूप से बैठना होगा क्योंकि शाही परिवारों के लिए वही स्थान नियत होता है। 
    सामान्य शादी में नवविवाहित जोड़े को औसत आकार का एक केक काटना होता है, पर शाही नियम तो हट कर ही होगा। यहां पर प्रिंस हैरी और उनकी पत्नी दोनों को दो केक काटने होंगे क्योंकि यही परंपरा है। 
    शाही परिवार में वेडिंग रिंग यानि शादी की अंगूठी पहनने की परंपरा नहीं है। इसीलिए प्रिंस चाल्र्स ने डायना से अपनी शादी की अंगूठी उस उंगली में नहीं पहनी थी जिसे रिंग फिंगर कहा जाता है बल्की वे अपनी कनकी उंगली में इसे पहने थे। राजकुमार हैरी के पहले उनके बड़े भाई प्रिंस विलियम और उनके दादा प्रिंस फिलिप ने भी अंगूठियां नहीं पहनी थीं। ऐसे में उम्मीद है कि हैरी भी इसी परंपरा का पालन करेंगे। (पंजाब केसरी)

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Posted Date : 17-May-2018
  • वॉशिंगटन, 17 मई। अमरीका के राष्ट्रपति अकसर अपनी बयानबाजी के लिए विवादों में रहते हैं। अब एक बार फिर उन्होंने प्रवासियों को लेकर ऐसा बयान दिया है जिसकी चारों तरफ आलोचना हो रहा है। दरअसल, ट्रंप ने सीमा पर दीवार बनाने और कानून प्रवर्तन के बारे में चर्चा के बीच कुछ प्रवासियों की तुलना जानवरों से कर डाली।  
    ट्रंप ने कैलिफॉर्निया से वाइट हाउस आए रिपब्लिकन सांसदों को कहा, हमारे देश में लोग आ रहे हैं या आने की कोशिश कर रहे हैं। हम लोगों को देश से बाहर ले जा रहे हैं। आप यकीन नहीं करेंगे कि ये लोग कितने बुरे हैं, ये आदमी नहीं बल्कि जानवर हैं।
    ट्रंप के इस बयान पर कोलोराडो से कांग्रेस के सदस्य जेरेड पोलिस ने कहा, प्रवासी इंसान हैं ना कि जानवर, अपराधी, ड्रग डीलर और बलात्कारी। वे इंसान हैं। कैलिफॉर्निया के गवर्नर जैरी ब्राउन ने कहा, ट्रंप प्रवासियों के बारे में, अपराध के बारे में और कैलिफॉर्निया के कानूनों के बारे में झूठ बोल रहे हैं। (एएफपी)

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Posted Date : 16-May-2018
  • यरुशलम, 16 मई। इजरायली सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए फिलिस्तीनियों की संख्या मंगलवार को बढ़कर 61 हो गई। गाजा-इजरायल सीमा पर सोमवार को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई घायलों ने दम तोड़ दिया। यह विरोध-प्रदर्शन यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के उद्घाटन के खिलाफ हुए थे। इजरायल सुरक्षाबलों ने कहा कि गाजा पट्टी सुरक्षा बाड़ से सटे 13 स्थानों पर फिलीस्तीन के 40,000 लोगों ने इस हिंसक दंगों में हिस्सा लिया।  
    यह हिंसा यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के उद्घाटन के मद्देनजर हुई, जिसमें राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप, उनके दामाद जेयर्ड कुशनर और वित्त मंत्री स्टीवन नुचिन के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। बीबीसी के मुताबिक, इजरायली पुलिस और गुस्साए प्रदर्शनकारियों के बीच में हिंसक झड़प हुई। 
    प्रदर्शनकारिरयों ने नए दूतावास के बाहर फिलीस्तीन के झंडे लहराए। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी ले लिया गया। इस बीच तुर्की और दक्षिण अफ्रीका ने इस घटना की निंदा की और अपने-अपने राजदूतों को इजरायल से वापस बुलाने की घोषणा की।   (आईएएनएस)

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Posted Date : 16-May-2018
  • नई दिल्ली, 16 मई। चीन के सिचुआन प्रांत ने भारत से पहुंचे बौद्ध भिक्षुओं द्वारा वहां बौद्ध धर्म की शिक्षा देने पर रोक लगा दी है। इसके पीछे चीन की यह आशंका है कि ये भिक्षु अलगाववाद को बढ़ावा दे सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर कहा है कि लितयांग काउंटी में भारतीय मूल के कुछ बौद्ध भिक्षुओं पर गलत तरीके से बौद्ध धर्म की शिक्षा देने का आरोप लगा है। इस काउंटी के एक अधिकारी ने बताया है कि गलत शिक्षा या अलगाववाद के संकेत देने वाले भिक्षुओं पर सख्त नजर रखी जाती है। साथ ही, ऐसा करने पर उन्हें सार्वजनिक रूप से बौद्ध शिक्षा देने से रोक दिया जाता है। (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 16-May-2018
  • नई दिल्ली, 16 मई । कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की उम्मीदों को झटका लगता दिख रहा है। उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के साथ आज होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत रोक दी है। उसने यह कदम अमरीका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास की वजह से उठाया है। उसने कहा कि यह सैन्य अभ्यास उत्तर और दक्षिण कोरिया के संबंधों में सुधार लाने की विचारधारा के खिलाफ है।
    इस नए घटनाक्रम के बाद उत्तर कोरिया की आधिकारिक न्यूज एजेंसी केसीएनए ने उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली बातचीत को लेकर भी संदेह जताया है। एजेंसी ने कहा, दक्षिण कोरिया में हो रहा यह सैन्य अभ्यास हमें निशाना बना रहा है। यह पनमुनजोम घोषणापत्र के लिए गंभीर चुनौती है और कोरियाई प्रायद्वीप में हुई सकारात्मक राजनीतिक प्रगति के खिलाफ एक भड़काऊ सैन्य प्रयास है।
    वहीं, अमरीका को लेकर एजेंसी ने कहा, अमरीका ने दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर जो सैन्य अभ्यास किया है उसके बाद उसे उत्तर कोरिया से होने वाली बातचीत के भविष्य को लेकर सावधान रहना होगा। उसने अमरीका और दक्षिण कोरिया के बीच हुए सैन्य अभ्यास को उत्तर कोरिया के लिए सबसे बड़ी धमकी बताया और कहा कि इसके बाद बातचीत रोकने के अलावा उसके पास और कोई विकल्प नहीं था।
    उधर, दक्षिण कोरिया ने एक बयान में कहा कि उत्तर कोरिया के इस कदम से पहले आज दोनों देशों के बीच पनमुनजोम घोषणापत्र पर अमल करने के मुद्दे पर बातचीत होनी थी। बीती 27 अप्रैल को दोनों देशों ने इस घोषणापत्र के जरिये शांति, समृद्धि और एक होने की घोषणा की थी। इसके तहत परमाणु हथियारों को पूरी तरह खत्म करने की बात भी शामिल थी। (इंडियन एक्सप्रेस)

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Posted Date : 16-May-2018
  • वाशिंगटन, 16 मई। उत्तर कोरिया ने आज कहा कि अमरीका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास के कारण उसके पास दक्षिण कोरिया के साथ होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता स्थगित करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है क्योंकि यह दोनों कोरियाई देशों के बेहतर हुए संबंधों के खिलाफ है।
    दक्षिण कोरिया के एकता मंत्रालय ने कल कहा कि वार्ता का लक्ष्य उन योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना था जो 27 अप्रैल के कोरियाई शिखर सम्मेलन के बाद निकलकर सामने आयी थी जिसमें कोरिया युद्ध का औपचारिक अंत करना और पूर्ण परमाणु निशस्त्रीकरण करना शामिल था। 
    उत्तर कोरिया की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल एजेंसी ने अमरीका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास को उकसावे का कार्रवाई बताते हुए कहा कि उत्तर कोरिया के पास बातचीत स्थगित करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।
    दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने कहा है कि उत्तर कोरिया का दोनों कोरियाई देशों के बीच मंत्रिमंडलीय स्तर की वार्ता को स्थगित करने का निर्णय खेदजनक है और यह अप्रैल में दोनों देशों के बीच किये गये वायदे के खिलाफ है।
    मंत्रालय के प्रवक्ता बैक ते-ह्युन ने बयान में कहा, अमरीका-दक्षिण कोरिया के बीच वार्षिक संयुक्त हवाई युद्धाभ्यास का हवाला देकर उत्तर कोरिया का दोनों कोरियाई देशों के बीच होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता को एकतरफा स्थगित करने का निर्णय खेदजनक है। यह पनमुनजोम के शिखर सम्मेलन की घोषणा के खिलाफ है। ह्युन ने उत्तर कोरिया से बातचीत के मार्ग पर दोबारा लौटने की अपील की। इस आशय का बयान उत्तर कोरिया के पास भेजा जाएगा। (एजेंसी)

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Posted Date : 15-May-2018
  • गजा, 15 मई । गजा सीमा पर इसराइली सैनिकों के साथ फलस्तीनियों की झड़प में में कम से कम 55 फलस्तीनी मारे गए हैं। फलस्तीनी अधिकारियों के मुताबिक इस हिंसक झड़प में 2700 लोग घायल भी हुए हैं।
    यरूशलम में अमरीकी दूतावास के उद्घाटन के पहले ये हिंसा हुई है। इस दूतावास को लेकर फलस्तीनी नाराज बताए जा रहे थे। फलस्तीनी इसे यरूशलम पर इसराइली कब्जे को अमरीकी समर्थन के तौर पर देख रहे रहैं। फलस्तीनी लोग यरूशलन के पूर्वी इलाके पर अपना दावा जताते हैं। सोमवार को अमरीका ने यरूशलम में अपना दूतावास खोल दिया।
    इस कार्यक्रम में अमरीकी अधिकारियों के साथ राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बेटी और दामाद ने शिरकत की। ट्रंप ने वीडियो पर इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इस घड़ी का लंबे समय से इंतजार था।
    गजा पर शासन करने वाले मुस्लिम संगठन हमास ने पिछले छह हफ्तों से इसे लेकर विरोध प्रदर्शन छेड़ रखा है।
    इसराइल का कहना है कि प्रदर्शनकारी सीमा पर लगे बाड़ को तोडऩे की कोशिश कर रहे थे। इसराइल इस बाड़ की कड़ाई से सुरक्षा करता है। हमास के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सोमवार को हुई हिंसा में मारे गए लोगों में बच्चे भी हैं। गजा से मिल रही रिपोर्टों के मुताबिक वहां फलस्तीनियों ने पत्थर फेंके और आग लगाने के काम आने वाले बम चलाए।
    इसके जवाब में इसराइल की ओर से स्नाइपरों ने गोलियां चलाईं। इसराइल की सेना का कहना है कि 35 हजार फलस्तीनी सीमा पर लगे बाड़ के पास दंगा कर रहे थे।
    इसराइल का कहना है कि इस विरोध प्रदर्शन का मकसद सीमा पर लगी बाड़ को तोडऩा और इससे लगे उसके रिहाइशी इलाकों पर हमला करना था। इसराइल की सेना ने बताया कि रफा में सुरक्षा बाड़ के पास विस्फोटक लगाने की कोशिश कर रहे तीन लोगों को उसने मार दिया।
    यहां तक कि इसराइल ने जबालिया में हमास की सैनिक चौकियों को पर भी हवाई हमले किए हैं।
    14 मई, 1948 को इसराइल की स्थापना के समय विस्थापित हुए फलस्तीनियों की याद में यहां हर साल मातम मनाया जाता है। फलस्तीनी इसे नकबा कहते हैं।
    इसी सिलसिले में फलस्तीनी हर हफ्ते इसराइलियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। जब से ये विरोध प्रदर्शन शुरू हुए हैं, कई लोग मारे जा चुके हैं और हजारों घायल हुए हैं। इसराइल के साथ संघर्ष कर रहे इस्लामी संगठन हमास ने कहा है कि वो विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला और तेज करेगा।
    उसका कहना है कि इससे दुनिया का ध्यान फलस्तीनियों की तरफ जाएगा कि हमारे लोग किस तरह से अपने पुरखों की जमीन पर लौटने के हक के लिए लड़ रहे हैं।
    गजा में एक साइंस टीचर ने कहा, आज एक बड़ा दिन है। आज हमने सीमा पर लगे बाड़ को पार किया और इसराइल और दुनिया को ये बता दिया कि हम पर ये कब्जा हमेशा नहीं रहने वाला है। यरूशलम की स्थिति इसराइल फलस्तीन संघर्ष के केंद्र में है। यरूशलम पर इसराइल की संप्रभुता को दुनिया स्वीकार नहीं करती है।
    1993 में फलस्तीन और इसराइल के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत यरूशलम के मुद्दे को आगे की बातचीत के जरिए सुलझाने पर रजामंदी हुई थी। साल 1967 के मध्य-पूर्व संघर्ष के समय इसराइल ने पूर्वी यरूशलम पर कब्जा कर लिया था। दिसंबर, 2017 में ट्रंप की घोषणा से पहले तक किसी भी देश ने यरूशलम पर इसराइल के कब्जे को मान्यता दी थी। (बीबीसी)

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Posted Date : 15-May-2018
  • ताइवान, 15 मई । ताइवान के पॉपस्टार का गाना सुन कोमा से बाहर आई लड़की। अस्पताल का एक किस्सा काफी वायरल हो रहा है। चौबीस वर्षीय लड़की अचानक गाना सुनकर कोमा से बाहर आ गई। चीनी न्यूजपेपर के मुताबिक, लड़की को ताइवान के पॉपस्टार जे चाऊ के गाने को सुनाया गया था। पिछले साल नवंबर 2017 को लड़की कोमा में चली गई थी। ऑक्सीजन न पहुंचने के कारण उनके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था और कोमा में चली गई थीं। लड़की को उठाने के लिए नर्स ने उनको जोक्स और मजेदार खबरें सुनाई। लेकिन वो हिली तक नहीं। लेकिन जैसे ही उन्होंने ताइवेन आर्टिस्ट के गाने को सुना तो उठ गईं। 
    नर्स ने बताया- मैं अक्सर जे चाऊ के गानों को सुनती हूं। मुझे लगा इनको भी गाना पसंद आएगा। इसलिए मैंने चला दिया। गाने ने काम कर दिया और लड़की को होश आ गया। अस्पताल के स्टाफ भी हैरान हैं कि गाना सुनकर लड़की को होश आ गया। साल 2006 के सुपरहिट गाना रोजमेरी को सुनकर लड़की की आंखें खुल गईं और वो मुस्कुराने लगीं। 
    जैसे ही लड़की को होश आया तो नर्स ने उनको पैरों को चलाने की कोशिश की, उंगलियों का चलाने की कोशिश की। जिसमें वो सफल रहीं। नर्स ने कहा- जब मैं उसके लिए गाना गा रही थी तो सभी डॉक्टर बेड के पास ही खड़े थे। गाना सुनाने के बाद जब मैंने पूछा कि क्या मैंने गाना अच्छे से गाया तो लड़की ने मुस्कुराकर जवाब दिया- बुरा नहीं है... (एनडीटीवी)

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Posted Date : 14-May-2018
  • नई दिल्ली, 14 मई । इंडोनेशिया के दूसरे बड़े शहर सुराबाया स्थित पुलिस मुख्यालय में मोटरसाइकिल पर आए दो आतंकवादियों ने सोमवार को विस्फोट कर अपने आप को उड़ा लिया जिसमें अधिकारियों समेत कम से कम 10 लोग घायल हो गए।  
    एक दिन पहले ही गिरजाघरों पर हुए कई आत्मघाती हमलों में कम से कम 14 लोग मारे गये थे और कई लोग घायल हो गये थे। इन हमलों की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली। पुलिस ने घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज के हवाले से बताया कि सुरक्षा जांच चौकी पर एक बाइक को रोका गया जिस पर एक पुरुष और एक महिला सवार थे।  घायलों में छह नागरिक और चार पुलिसकर्मी शामिल हैं। (आजतक)

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Posted Date : 13-May-2018
  • भारत में कराना चाहते थे इलाज
    कराची, 13 मई : पाकिस्तान को 1994 का विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले हॉकी गोलकीपर मंसूर अहमद का निधन हो गया. ओलंपिक में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने वाले 49 साल के मंसूर पिछले काफी समय से दिल में लगे पेसमेकर और स्टेंट से परेशान थे. उन्होंने हृदय प्रत्यारोपण के लिए भारत से भी संपर्क किया था.
    पाकिस्तान के लिए 388 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले इस दिग्गज को 1994 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के लिए याद किया जाएगा. उन्होंने फाइनल में नीदरलैंड्स के खिलाफ पेनल्टी शूट में गोल का बचाव कर पाकिस्तान को विश्व विजेता बनाया था. इसी साल उन्होंने चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में जर्मनी के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट का बचाव किया था, जिससे पाकिस्तान इसका विजेता बना था.
    पिछले दिनों मंसूर ने एक वीडियो संदेश जारी कर भावुक अपील की थी. उन्होंने कहा था कि भारत के खिलाफ हॉकी मैचों में कई बार उन्होंने भारतीयों के दिल तोड़े हैं और कई बार भारतीय टीम से जीत छीन कर अपने देश पाकिस्तान को विजेता बनाया है, लेकिन वह खेल का हिस्सा था. लेकिन मुझे अपने दिल की सर्जरी के लिए भारत सरकार की मदद चाहिए. भारत सरकार से अपील में मंसूर ने कहा था कि मेडिकल वीजा उनकी जिंदगी बचा सकता है. (Aajtak)

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Posted Date : 13-May-2018
  • पेरिस, 13 मई। फ्रांस की राजधानी पेरिस में शनिवार रात को एक शख्स ने राहगीरों पर चाकू से हमला किया। पेरिस प्रांत के ट्वीट के हवाले से बताया, एक संदिग्ध ने पेरिस के दूसरे डिस्ट्रिक्ट में पांच लोगों पर चाकू से हमला किया, जिसमें एक की मौत हो गई। दो गंभीर रूप से घायल हैं जबकि दो को हल्की चोटें आई हैं।  आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट  ने हमले की जिम्मेदारी ली है। हालांकि, पुलिस की गोलीबारी में हमलावर मारा गया। घटना मध्य पेरिस के ओपेरा जिले में हुई।  फ्रांस के एक अखबार ली फिगारो ने पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा कि हमलावर राहगीरों पर चाकू से हमला करते वक्त अल्ला ओ अकबर चिल्ला रहा था।

    फ्रांस के गृहमंत्री ने इस जघन्य अपराध की निंदा की और पुलिस की त्वरित कार्रवाई को सराहा। हालांकि, पुलिस की गोलीबारी में हमलावर मारा गया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चाकू हमलावर को आतंकवादी करार दिया था।आईएस की मीडिया विंग अमाक न्यूज एजेंसी ने कहा, पेरिस में लोगों पर चाकू से हमला करने वाला शख्स आईएस का लड़ाका है। सीएनएन के मुताबिक, आईएस ने अपने इस दावे के कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए।  (आईएएनएस)

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Posted Date : 13-May-2018
  • इंडोनेशिया, 13 मई । इंडोनेशिया के दूसरे सबसे बड़े शहर सुराबाया के तीन चर्चों पर हुए आत्मघाती हमले में नौ लोगों की मौत हो गई है। पुलिस का कहना है कि हमले में कई लोग घायल भी हुए हैं। ये धमाके स्थानीय समयानुसार सुबह के साढ़े सात बजे कुछ ही मिनटों के दरमियां हुए। हालांकि अभी तक किसी चरमपंथी संगठन ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा नहीं किया है।
    टेलीविजन पर आ रही तस्वीरों में एक चर्च के प्रवेश द्वार पर फैला मलबा देखा जा सकता है। हाल के दिनों में इंडोनेशिया में इस्लामी चरमपंथ फिर से उभरता हुआ दिख रहा है।
    इंडोनेशिया की खुफिया एजेंसी का कहना है कि चरमपंथी गुट जेमाह अंशारुत दौलाह ने इन हमलों को अंजाम दिया होगा। खुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट से ये गुट प्रेरित बताया जाता है। कुछ ही दिनों पहले इंडोनेशिया में जेल में बंद इस्लामी चरमपंथियों के साथ सुरक्षा बलों की मुठभेड़ में पांच सैनिकों की मौत हो गई थी। (बीबीसी)

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Posted Date : 11-May-2018
  • नई दिल्ली, 11 मई । उस मुलाकात की तारीख और जगह का नाम सामने आ गया है, जिसका मुद्दत से इंतजार था। दुनिया के दो ऐसे नेता जो कुछ दिन पहले तक सबसे बड़े दुश्मन माने जाते थे और जंग की दहलीज पर खड़े थे, अब हालात दुरुस्त करने और नफरत कम करने के लिए मिलने वाले हैं।
    अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग 12 जून को सिंगापुर में मिलने वाले हैं। जब से ये ऐलान हुआ था कि दोनों की मुलाकात होनी है, तभी से मिलने की जगह को लेकर कयास लगने लगे थे। इन कयासों पर लगाम कसते हुए ट्रंप ने खुद ट्वीट किया कि (उत्तर कोरिया के नेता) किम जोंग उन और मेरे बीच होने वाली जिस मुलाकात का इंतजार हो रहा है, वो 12 जून को सिंगापुर में होगी। 
    हम दोनों कोशिश करेंगे कि ये मुलाकात विश्व शांति के लिए बेहद खास पल बने।
    अब जब ये साफ हो गया है कि दुनिया की सबसे हाई-प्रोफाइल बैठक कहां होनी है, तो ये सवाल उठ रहा है कि इसकी मेजबानी के लिए सिंगापुर को ही क्यों चुना गया?
    जब ये संभावना जताई जा रही थी कि ये बैठक सिंगापुर में हो सकती है, तो इसके साथ-साथ डीएमजेड (डिमिलिट्राइज़्ड जोन) का नाम भी उछला था।
    डीएमजेड वो जगह है, जो दक्षिण और उत्तर कोरिया के बीच सरहद खिंची है। हाल में जब किम, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से मिलने आए थे, तो इसी जगह से बॉर्डर लांघा गया था।
    शुरुआत में ऐसी खबरें थीं कि ट्रंप भी इसके पक्ष में थे, लेकिन एक धड़े का मानना था कि डीएमजेड जाने का मतलब करीब-करीब उत्तर कोरिया जाने जैसा हो जाएगा।
    इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ट्रंप के उत्तर कोरिया जाने और किम जोंग-उन के अमरीका जाने का कोई सवाल ही नहीं था। ये जगह कोई तीसरी ही हो सकती थी। क्योंकि किम किसी भी हालत में पश्चिमी जगत या यूरोप में जाने को तैयार न होते। इसके अलावा किम जोंग-उन जापान और दक्षिण कोरिया जाने को भी राजी न होते।
    चीन, इस मुलाकात की मेजबानी को तैयार हो सकता था लेकिन वो अमरीका को मंजूर न होता। एशिया के दूसरे देश और अफ्रीका सुरक्षा की दृष्टि से नहीं आंके गए। दिलचस्प है कि इन सभी विकल्पों के अलावा मंगोलिया का नाम भी उछला था लेकिन वो चीन के करीब होने की वजह से अमरीका की पसंदगी से हट गया होगा।
    सबसे बड़ी बात ये है कि सिंगापुर तटस्थ है। उसके कोरियाई प्रायद्वीप से कोई हित नहीं जुड़े हैं। हालांकि पिछले साल उत्तर कोरिया और सिंगापुर के कारोबारी ताल्लुक खत्म हो गए थे, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज कर दिया जाए तो दोनों के संबंध कमोबेश मधुर ही रहे हैं।
    यहां तक कि उत्तर कोरियाई लोगों को कई दिनों तक सिंगापुर जाने के लिए वीजा भी नहीं चाहिए होता था। ये दुनिया के उन करीब 40 देशों में है जहां उत्तर कोरिया का दूतावास है। किम जोंग उन भी सिंगापुर को लेकर काफी आश्वस्त बताए जाते हैं। इसके अलावा सिंगापुर, उत्तर कोरिया से ज़्यादा दूर नहीं है और किम छोटी उड़ान से भी वहां पहुंच सकते हैं। ये चिंता काफी बड़ी है क्योंकि उन्हें उड़ान भरने को लेकर चिंतित बताया जाता है।
    सिंगापुर को लेकर जहां उत्तर कोरिया तनावमुक्त है, वहीं अमरीका का भी वो पुराना दोस्त है। ये इस क्षेत्र में अमरीका का पोत रखने की पसंदीदा जगह है और उसका यहां नेवी लॉजिस्टिक बेस है।
    इसके अलावा अमरीका, सिंगापुर को लेकर इसलिए सकारात्मक है क्योंकि उत्तर कोरिया के नेता से मुलाकात में यहां सुरक्षा को लेकर आश्वस्त रहा जा सकता है। इसके अलावा सिंगापुर इन बड़ी बैठकों की कामयाब मेजबानी भी कर चुका है। साल 2015 में 60 साल बाद चीन और ताईवान भी यही मिले थे।
    सिंगापुर के प्रमुख अखबार स्ट्रैट टाइम्स के मुताबिक कि सिंगापुर में सिक्योरिटी जोरदार है, जो किसी भी अमरीकी राष्ट्रपति के लिए प्राथमिकता होती है। और साथ ही बहुत कम नोटिस पर वो अहम अंतरराष्ट्रीय बैठकों का आयोजन करा सकता है।(बीबीसी)

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Posted Date : 11-May-2018
  • बीजिंग, 11 मई । चीन में कुछ ऐसा हुआ जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। गर्लफ्रेंड से पीछा छुड़ाने के लिए बॉयफ्रेंड ने करीब 3 लाख डॉलर (2 करोड़ रुपयों से ज्यादा) दिए। लेकिन पैसों का ढेर छोड़कर गर्लफ्रेंड चली गई। क्योंकि उसको पैसे बहुत कम लगे। चीन के हांगजोऊ शहर के एक बार में शख्स रविवार की सुबह सूटकेस में पैसे लेकर पहुंचा था। स्टाफ मेंबर्स को लावारिस सूटकेस मिला। उस सूटकेस को स्टोर रूम में ले जाया गया। वहां जब सूटकेस खोला गया तो उसमें से 100 के बंडल भरे दिखे। जिसके बाद उन्होंने पुलिस को बुला लिया। 
    पुलिस जब नोटों को गिनने बैठी तो सूटकेस से करीब 2 मिलियन यूआन मिले। बाद में पता चला कि ये सूटकेस एक आईटी कर्मचारी का था। 
    जो बार में पिछली रात दो महिलाओं के साथ देखा गया था। उनमें से एक लड़की उसकी गर्लफ्रेंड बताई गई।  बार के स्टाफ ने देखा था कि शख्स महिला से झगड़ते हुए सूटकेस छोड़कर चला गया था। कुछ देर बाद महिला भी बिना सूटकेस के बार छोड़कर चली गई थी। 
    लड़का जब वापस अपना सूटकेस लेने आया तो पुलिस ने उसे पकड़ लिया। तब उसने खुलासा किया कि ब्रेकअप के बाद वो अपनी एक्स-गर्लफ्रेंड को ब्रेकअप फी के तौर पर पैसे देने आया था। लेकिन उसकी गर्लफ्रेंड 10 मिलियन युआन चाहती थी। इसलिए वो पैसे छोड़कर चली गई। गर्लफ्रेंड ने उसको कॉल कर बताया था कि वो पैसे छोड़कर चली गई है। जिसके बाद वो सूटकेस लेने वापस आया था। 
    ग्लोबल टाईम्स को उसकी गर्लफ्रेंड ने बताया- मैं पैसे नहीं लिए और चली गई थी। मैंने कॉल भी किया था और कहा था कि पैसे नहीं लिए हैं अपने पैसे वापस ले जाओ। इस खबर ने सभी को हैरान कर दिया और खबर काफी वायरल हो रही है।(एनडीटीवी)

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Posted Date : 11-May-2018
  • टोरंटो, 11 मई । कनाडा के एक कैबिनेट मंत्री को डेट्रॉटड हवाईअड्डे पर सुरक्षा जांच के लिए पगड़ी उतारने को कहा गया। कनाडा ने अमरीकी अधिकारियों के समक्ष इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है।
    कनाडा के नवोन्मेष, विज्ञान तथा आर्थिक विकास मंत्री नवदीप बैंस ने कल बताया कि पिछले वर्ष कनाडा वापसी लौटने के दौरान उनसे डेट्रॉयड मेट्रो एयरपोर्ट पर उनसे पगड़ी उतारने के लिए कहा गया था।
    नवदीप ने बताया कि जांच मशीन में कोई समस्या थी जिसके कारण उन्हें गेट से वापस बुलाया गया, सुरक्षा जांच तक वापस ले जाया गया और वहां उन्हें पगड़ी उतारने के लिए कहा गया।
    उन्होंने बताया कि जब जांच अधिकारियों को पता चला कि वह कौन हैं तो उन्हें बिना पगड़ी उतारे जाने दिया गया। मंत्री ने इसकी शिकायत कनाडा के विदेश मंत्री से की और उन्होंने इसकी शिकायत अमरीकी अधिकारियों से की। नवदीप ने बताया कि अमरीकी अधिकारियों ने खेद जताया और माफी मांगी जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।(एजेंसी)

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