अंतरराष्ट्रीय

25-Oct-2020 10:14 AM 13

वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (US Presidential Elections 2020) से कुछ ही दिन पहले डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन (Joe Biden) ने एक लेख के जरिए मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर आरोप लगाया कि उनके शासन काल में भारतीय अमेरिकियों पर अत्याचार हुए. बाइडन के इस लेख के बारे में कहा जा रहा है कि वह इसके जरिए भारतीय-अमेरिकी वोटर्स के बीच में अपनी पहुंच बनाना चाह रहे हैं.

बाइडन ने एक ऑप-एड (Biden Op-ed) में भारतीय समुदाय तक पहुंचने की कोशिश करते हुए इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका और भारत ने अतीत में भी सिद्धांत और व्यापारिक अवसरों को साझा किया है.

बाइडन ने अमेरिकियों और भारतीय प्रवासियों के बीच के साझा मूल्यों पर भी जोर दिया. लेख में बाइडन ने लिखा- 'हम हमेशा अपने मूल्यों के कारण भारतीय अमेरिकी समुदाय से गहराई से जुड़े हुए महसूस करते हैं. मैंने परिवार और बड़ों के प्रति कर्तव्य, लोगों के प्रति सम्मान के साथ व्यवहार करना, आत्म-अनुशासन, सेवा और कड़ी मेहनत सीखी. मुझे मेरे आयरिश पूर्वजों से यह मूल्य मिले, जिन्होंने अमेरिका में बेहतर जीवन के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया था. उन्होंने मुझे एक बेटे, भाई, पति, पिता, दादा और आस्था के व्यक्ति और हमेशा लोगों की सेवा करने वाले शख्स के रूप में आकार दिया है.'

मेरे घर में मनाई दीपावली- बाइडन

बाइडन ने इस तथ्य पर जोर दिया कि भारतीय अमेरिकी मतदाता उत्तरी कैरोलाइना, वर्जीनिया, पेंसिल्वेनिया, मिशिगन, जॉर्जिया और टेक्सास में शक्तिशाली हैं. उन्होंने लेख में चार साल पहले अपने घर पर आयोजित दीवाली के एक स्वागत समारोह का भी जिक्र किया. बाइडन लिखा कि, 'यहाँ मैं एक आयरिश कैथोलिक उपराष्ट्रपति था, जिसने अपने घर में उस रात परंपरागत हिन्दुओं, बौद्धों, सिखों, जैनियों के साथ दीपावली का पर्व मनाया. उस रात मुस्लिम, क्रिश्चियन और भारतीय अमेरिकी भी यहां मौजूद थे.'

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बाइडन ने इस चुनाव में उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिश का भी जिक्र किया है. उन्होंने हैरिस के भारतीय मूल के होने पर खास जोर दिया है.

बाइडन ने भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं से अपील करते हुए कमल हैरिस के भारतीय मूल पर भी जोर दिया. उन्होंने लिखा, 'कमला होशियार, परखी हुई और पूरी तरह से तैयार हैं. एक और बात जो कमला को इतना प्रेरित करती है, वह है उनकी मां श्यामला गोपालन. जब हम उसके बारे में बात करते हैं तो हमें उनपर गर्व महसूस होता है. वह चेन्नई से थीं जहां उनके पिता, कमला के दादा, भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल थे. कमला अक्सर अपनी मां की तस्वीरें अपनी युवा बेटियों के हाथों में बांटती हैं, एक तस्वीर जो साहस, आशा, और बलिदान की हजार कहानियाँ बयां करती है.'

लेख में भारत, चीन और आतंकवाद का जिक्र

डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ने लिखा- 'मुझे पता है कि आप उसके नामांकन पर गर्व महसूस करते हैं क्योंकि उसकी कहानी भी आपकी कहानी है. यह एक अमेरिकी कहानी है. मुझसे बराक ओबामा ने कहा था- आखिर व्यक्ति तक का साथ लेकर संभावनाओं पर विश्वास करें. और मैं कमला से वही कह रहा हूं.'

लेख में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ने चीन के साथ भारत के रुख और उपमहाद्वीप में आतंकवाद के मुद्दे पर स्पष्ट संदेश दिया. उन्होंने लिखा कि- 'अमेरिका और भारत आतंकवाद के खिलाफ एक साथ खड़े होंगे और शांति और स्थिरता के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे जहां न तो चीन और न ही कोई अन्य देश अपने पड़ोसियों को धमकी दे पाएगा. हम संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत दोनों में ओपन मार्केट डेवलप करेंगे और मध्यम वर्ग का विकास करेंगे. हम एक साथ जलवायु परिवर्तन, वैश्विक स्वास्थ्य, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और परमाणु प्रसार जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करेंगे.'

H1B- Visa के बहाने ट्रंप पर हमला

बाइडन ने एच -1 बी वीजा और अप्रवासी वीजा पर ट्रंप पर हमला करते हुए कहा कि ट्रंप में अप्रवासियों के बारे में खतरनाक बयानबाजी है. 'यह संभव है कि आप और आपके परिवार को राष्ट्रपति ट्रंप के कानूनी आव्रजन और नागरिकता के स्थायी सुधार और नागरिकता और एच -1 बी वीजा कार्यक्रम पर उनके निर्णयों के बीच फंस गए हों. प्रवासियों के बारे में उनकी खतरनाक बयानबाजी ने श्वेत वर्चस्ववादियों को मजबूत बनाया है. उनके बयानों ने भारतीय अमेरिकियों के खिलाफ हेट क्राइम को बढ़ावा दिया है.'

जो बाइडन ने कहा कि वह अफोर्डेबल केयर एक्ट का दायरा बढ़ाएंगे, जिससे गरीब परिवारों के लिए सार्वजनिक शिक्षा मुफ्त होगी और दुनिया में सबसे अच्छे और प्रतिभाशाली अप्रवासी श्रमिकों  का स्वागत होगा.' उन्होंने राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि वह वक्त दोनों देशों (भारत-अमेरिका) के रिश्ते का सबसे अच्छा समय था.(news18)


25-Oct-2020 10:10 AM 12

वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार सुबह वेस्ट पाम बीच में मतदान किया और इसके बाद संवाददातओं से कहा कि उन्होंने ट्रंप के नाम के एक व्यक्ति को वोट दिया है. वेस्ट पाम बीच, ट्रंप के निजी मार-ए-लेगो क्लब के समीप है. वह न्यूयार्क में मतदान किया करते थे लेकिन पिछले साल अपना निवास स्थान बदल कर फ्लोरिडा कर लिया था. ट्रंप ने जिस पुस्तकालय में बने मतदान केंद्र में मतदान किया, उसके बाहर काफी संख्या में उनके समर्थक एकत्र थे. वे लोग 'और चार साल' के नारे लगा रहे थे.

राष्ट्रपति ने मतदान करने के दौरान मास्क पहन रखा था लेकिन संवाददाताओं से बात करने के दौरान इसे उतार लिया. उन्होंने इसे 'बहुत सुरक्षित मतदान बताया.' डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडेन ने अभी तक मतदान नहीं किया है और उनके तीन नवंबर को चुनाव के दिन डेलवेयर में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की संभावना है. डेलवेयर में फ्लोरिडा की तरह पहले मतदान की पेशकश नहीं गई है. राष्ट्रपति का शनिवार को नार्थ कैरोलिना, ओहायो और विस्कोंसिन में व्यस्त चुनावी कार्यक्रम है.

2016 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने फ्लोरिडा में 49.02 प्रतिशत मतों से जीत दर्ज की थी, जबकि उनकी तत्कालीन डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी हिलेरी क्लिंटन 47.82 प्रतिशत मतों पर सिमट गई थीं. हालिया रियल क्लियर पॉलिटिक्स पोलिंग औसत के अनुसार, डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडन वर्तमान में फ्लोरिडा में ट्रंप से 1.4 प्रतिशत अंक या 48.2 प्रतिशत- 46.8 प्रतिशत की बढ़त से आगे चल रहे हैं

तीन राज्यों में रैली करेंगे ट्रंप

मतदान के बाद राष्ट्रपति तीनों राज्यों में रैलियां करेंगे. ट्रंप ने इन तीनों क्षेत्रों में साल 2016 में जीत दर्ज की थी. इसी बीच शनिवार को बाइडेन पेनसिल्वेनिया में ड्राइव-इन रैलियों का आयोजन करेंगे. स्थानीय मीडिया के अनुसार, बाइडन की योजनाबद्ध रैलियां स्क्रैटन में उनके जन्मस्थान के पास लुजर्न काउंटी और फिलाडेल्फिया के उत्तर में बक्स काउंटी में आयोजित की जाएंगी. हिल न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को जारी हालिया रॉयटर्स / इप्सोस ओपिनियन पोल के अनुसार, बाइडन 49 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं के समर्थन के साथ आगे चल रहे हैं, जबकि ट्रंप को 45 प्रतिशत समर्थन मिला है.(news18)


25-Oct-2020 10:03 AM 10

वॉशिंगटन. अमेरिका में 3 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव (US Election 2020) के लिए फाइनल वोटिंग होनी है. इस समय वहां अर्ली वोटिंग चल रही है. इस चुनाव में एक अनोखी बात यह हुई है कि स्पेस से एक ट्रेवलर केट रूबिन्‍स (Kate Rubins) ने अपना वोट डाला है. इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (International Space Station) से गुरूवार को केट ने अपना वोट डाल दिया है. इस बात की जानकारी अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने केट के हवाले से ट्विटर के जरिए दी. केट ने धरती से करीब 408 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन पर बैलेट का प्रयोग किया.

केट छह माह के लिए आईएसएस में पहुंची है

केट के हवाले से नासा ने ट्विटर पर लिखा कि आज मैंने इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन से वोट डाल दिया है.' इस ट्वीट में यह बताया गया है कि क्रू मेंबर केट रूबिन्‍स ने पिछले हफ्ते से आईएसएस में अपनी छह माह की पारी शुरू की है. नासा ने रूबिन्‍स की जो फोटो पोस्‍ट की है उसमें वह जीरो ग्रैविटी वाले आईएसएस में बने वोटिंग बूथ के सामने नजर आ रही हैं. रूबिन्‍स और नासा की तरफ से एबसेंटी वोटिंग की प्रक्रिया के बारे में बताया गया है.

इलेक्ट्रॉनिक बैलेट जेनरेट कर ई-मेल से कराई वोटिंग

केट की ओर से बताया गया कि हैरिस काउंटी स्थित क्‍लर्क के ऑफिस की तरफ से एक सुरक्षित इलेक्‍ट्रॉनिक बैलेट को जेनरेट को किया गया था. यह जगह ह्यूस्‍टन, टेक्‍सास में नासा के जॉनसन स्‍पेस सेंटर का हेडक्‍वार्टर है. इस लिंक को ई-मेल के जरिए आईएसएस भेजा गया. रूबिन्‍स ने बैलेट को ई-मेल में ही भरा और फिर इसे क्‍लर्क के ऑफिस में वापस भेज दिया गया.

वर्ष 2016 में भी केट ने आईएसएस से ही अपना वोट डाला था. उन्‍होंने एक वीडियो में कहा, 'अंतरिक्ष से वोट करने में समर्थ होना हमारे लिए एक सम्‍मान की बात है.' 14 अक्‍टूबर को केट रूबिन्‍स और रूस के दो अंतरिक्ष यात्री कजाखस्‍तान स्थित बायकनौर से आईएसएस के लिए गए थे.(news18)


25-Oct-2020 9:29 AM 16

चीन के शंघाई शहर में इंजीनियरों ने 7,600 टन की एक विशालकाय इमारत को उसकी जगह से खिसकाकर दूसरी जगह ले जाने का कारनामा कर दिखाया है.

उन्होंने 1935 में बनी शंघाई के लागेना प्राथमिक विद्यालय की पाँच मंज़िला इमारत को उसकी जगह से उठाया और तकनीक के इस्तेमाल से उसे कुछ दूरी पर ले गए.

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इस पुरानी इमारत के पास ही एक नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू होना है जिसके लिए जगह थोड़ी पड़ने पर इस बिल्डिंग को उसकी जगह से खिसकाने का निर्णय लिया गया.

चीन के इंजीनियरों के पास इस इमारत को गिराने का विकल्प भी था, मगर उन्होंने इस ऐतिहासिक इमारत को उसकी जगह से उठाकर दूसरी जगह शिफ़्ट करने का निर्णय लिया.

बिल्डिंग को मूल जगह से क़रीब 62 मीटर खिसकाया गया

चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, इंजीनियरों की एक टीम ने तकनीक की मदद से बिल्डिंग को उठाया और 198 रोबोटिक टाँगों की मदद से उसे कुछ दूर ले गए.

स्थानीय मीडिया के अनुसार, कंक्रीट से बनी हज़ारों टन की इस इमारत को उसकी मूल जगह से क़रीब 62 मीटर खिसकाया गया है.

चीन सरकार द्वारा नियंत्रित सीसीटीवी न्यूज़ नेटवर्क के अनुसार, इमारत को एक जगह से दूसरी जगह शिफ़्ट करने का काम 18 दिनों में पूरा किया गया. बताया गया है कि 15 अक्तूबर को बिल्डिंग शिफ़्ट करने का काम पूरा कर लिया गया था.

न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, स्थानीय प्रशासन ने अब इस ऐतिहासिक इमारत को संरक्षित रखने का निर्णय लिया है और उसी लिहाज़ से इमारत की मरम्मत का काम किया जा रहा है.

इमारतों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ़्ट करने के यूँ तो कई तरीक़े हैं, मगर आमतौर पर इंजीनियर ऐसी इमारतों को बड़े प्लेटफ़ॉर्म की मदद से शिफ़्ट करते हैं जिन्हें ज़्यादा क्षमता वाली रेल या क्रेन से खींचा जाता है.

लेकिन इस बार चीनी इंजीनियरों ने रोबोटिक लेग्स (रोबोट द्वारा नियंत्रित मज़बूत पाये) इस्तेमाल किये जिनके नीचे पहिये लगे थे. चीनी इंजीनियरों द्वारा पहली बार इस तरीक़े को अपनाया गया है.

हालांकि, ग़ौर करने वाली बात यह है कि शंघाई के इंजीनियरों के पास बिल्डिंगों को इस तरह शिफ़्ट करने का पुराना तजुर्बा है.

साल 2017 में, 135 साल पहले बने और क़रीब दो हज़ार टन वज़न वाले ऐतिहासिक बौद्ध मंदिर को उसकी मूल जगह से लगभग 30 मीटर खिसकाया गया था और इस मंदिर को 30 मीटर खिसकाने में 15 दिन लगे थे.

इस साल की शुरुआत में भी चीन के इंजीनियरों ने बिल्डिंग निर्माण के क्षेत्र में एक कीर्तिमान स्थापित किया था. चीन के हूबे प्रांत में स्थित वुहान शहर में कोरोना संक्रमण तेज़ी से फ़ैलने के बाद चीनी इंजीनियरों ने दस दिन में हज़ार बेड का अस्पताल बनाकर दिखाया था. वुहान वही शहर है जहाँ सबसे पहले कोविड-19 संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि की गई थी.(bbc)


25-Oct-2020 9:17 AM 14

स्कूली बच्चों को मुफ्त लंच का विरोध करने की सजा !

ब्रिटेन के चांसलर ऋषि सुनक और उत्तरी इंग्लैंड (England) से सत्ताधारी कंजर्वेटिव पार्टी के तीन सांसदों को उनके निर्वाचन क्षेत्र के एक स्थानीय पब और रेस्तरां ने जीवनभर के लिए प्रतिबंधित (Ban) कर दिया है.

यूके चांसलर ऋषि सुनक (Rishi Sunak) को उनके क्षेत्र के एक स्थानीय पब और रेस्तरां ने जीवन भर के लिए प्रतिबंधित कर दिया है. चांसलर के साथ उनके साथी और सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी के तीन संसद सदस्य भी प्रतिबंधित (Ban) किए गए हैं. छुट्टी के दौरान बच्चों के लिए मुफ्त स्कूल भोजन के लिए हुए मतदान में हिस्सा लेने के बाद उनके खिलाफ यह कदम उठाया गया है. उत्तरी यार्कशायर में मिल पब और उससे जुड़ा आइवन मुलिनो रेस्तरां सुनक के क्षेत्र रिचमंड के अंतर्गत आता है.

इस सप्ताह के शुरू में हाउस ऑफ कामंस में मतदान के तुरंत बाद ही पब-रेस्तरां ने फेसबुक का सहारा लिया. सदन में इंग्लैंड टीम फुटबालर मार्कस रशफोर्ड द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत स्कूली बच्चों के लिए सरकार के अस्थायी मुफ्त भोजन को बढ़ाने को लेकर मतदान हुआ था.

पब-रेस्तरां के मालिक अलेक्स कूक ने गुरुवार को फेसबुक पोस्ट में कहा- सरकार ने मुफ्त स्कूली भोजन बढ़ाने के खिलाफ मतदान किया है. यह निंदनीय है. मैट विकर्स, सिमोन क्लर्क, जैकब युंग, ऋषि सुनक सभी ने योजना के खिलाफ मतदान किया.. निंदनीय. चारों को अब पूरे जीवन के लिए मिल एंड आइवन मुलिनो में प्रतिबंधित किया जाता है.

ऋषि सुनक ब्रिटेन की कंजरवेटिव पार्टी के नेता हैं. वे एक शांत और स्थिर प्रकृति के व्यक्ति माने जाते हैं. फिलहाल सुनक ब्रिटेन के चासंलर ऑफ द एक्सचेकर यानि कि वित्त मंत्री हैं, लेकिन क्या वे ब्रिटेन में वे अगले प्रधानमंत्री के प्रबल दावेदार हैं. बोरिस जॉनसन का उत्तराधिकारी तय होने में फिलहाल काफी समय है, लेकिन ब्रिटेन में इस तरह की चर्चाएं बेवजह नहीं उड़ा करतीं. फिर भी जिस तरह से सुनक की लोकप्रियता बढ़ रही है. (news18)


25-Oct-2020 9:16 AM 14

वाशिंगटन, 25 अक्टूबर | वैश्विक स्तर पर कोरोनावायरस मामलों की कुल संख्या 4.25 करोड़ हो चुकी है, वहीं घातक संक्रमण से अब तक 1,148,940 से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। यह जानकारी जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय ने रविवार को दी। विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सिस्टम साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसएसई) के नए अपडेट के अनुसार, रविवार की सुबह तक कुल मामलों की संख्या 42,532,198 हो गई, जबकि मौतों का आंकड़ा बढ़कर 1,148,943 हो गया।

सीएसएसई के अनुसार, अमेरिका दुनिया में कोविड-19 से सबसे अधिक प्रभावित देश हैं। यहां संक्रमण के 8,571,943 मामले दर्ज किए गए हैं, वहीं इससे हुई मौतों का आंकड़ा 224,771 है।

वहीं संक्रमण के मामलों के हिसाब से भारत 7,814,682 आंकड़ों के साथ दूसरे स्थान है, जबकि देश में मरने वालों की संख्या 117,956 है।

सीएसएसई के आंकड़ों के अनुसार, कोविड-19 के अधिक मामलों वाले अन्य शीर्ष 15 देश ब्राजील (5,380,635), रूस (1,487,260), फ्रांस (1,084,659), अर्जेंटीना (1,081,336), स्पेन (1,046,132), कोलम्बिया (1,007,711), मेक्सिको (886,800), पेरू (883,116), ब्रिटेन (857,043), दक्षिण अफ्रीका (714,246), ईरान (562,705), इटली (504,509), चिली (500,542), इराक (449,153) और जर्मनी (427,808) हैं।

कोविड-19 से हुई मौतों के मामले में अमेरिका के बाद ब्राजील का स्थान है, जहां 156,903 मौतें दर्ज की गई हैं।

वहीं 10,000 से अधिक मौत दर्ज करने वाले देशों में मेक्सिको (88,743), ब्रिटेन (44,835), इटली (37,210), स्पेन (34,752), फ्रांस (34,536), पेरू (34,033), ईरान (32,320), कोलंबिया (30,000), अर्जेंटीना (28,613), रूस (25,647), दक्षिण अफ्रीका (18,944), चिली (13,892), इंडोनेशिया (13,205), इक्वाडोर (12,542), बेल्जियम (10,658), इराक (10,568) और जर्मनी (10,015) हैं।(आईएएनएस)


25-Oct-2020 9:00 AM 12

काबुल, 25 अक्टूबर | अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में शनिवार एक शैक्षणिक केंद्र में हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए। स्थानीय पुलिस ने यह जानकारी दी। काबुल पुलिस के प्रवक्ता फिरदौर फरमर्ज ने यहां पत्रकारों से कहा, "विस्फोट स्थानीय समयनुसार 4.30 बजे कोवसर-ए-दानिश में एक निजी शैक्षणिक केद्र में हुआ। आत्मघाती हमलावार ने संस्थान के सुरक्षा गार्ड द्वारा पकड़े जाने के बाद खुद को उड़ा लिया।"

उन्होंने कहा, "शुरुआती जानकारी से पता चला है कि हमलावर समेत 11 लोगों की मौत हो गई है और 20 अन्य घायल हो गए हैं।"

प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद नबी ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ से कहा, "हमने दशटी बराची क्षेत्र में पुल-ए-खुश्क में स्थित एक शैक्षणिक केंद्र के बाहर जोरदार विस्फोट की आवाज सुनी। विस्फोट से लोग डर गए।"

अभी तक किसी ने भी इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।(आईएएनएस)


24-Oct-2020 7:44 PM 16

पाकिस्‍तान, 24 अक्टूबर | पाकिस्‍तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दामाद कैप्‍टन सफदर के कराची के होटल से गिरफ्तारी का सीसीटीवी फुटेज निकालने वाले पत्रकार लापता हैं.

मीडिया आउटलेट ने शनिवार को यह पुष्टि की है. जियो न्यूज के अनुसार, अली इमरान सैयद शुक्रवार शाम को अपने घर से निकले थे और परिवार को बताया कि वह आधे घंटे में लौट आएंगे, लेकिन नहीं आया.

उनकी पत्नी ने बताया कि उनकी कार घर के बाहर खड़ी है और उनका मोबाइल फोन भी घर पर ही है. परिवार ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को सैयद के लापता होने के बारे में सूचित किया गया, जिन्होंने लापता होने के संबंध में मामला दर्ज किया है.

इस बीच, जियो न्यूज प्रशासन ने कहा कि कराची के पुलिस प्रमुख और डीआईजी ईस्ट को भी उनके लापता होने की सूचना दी गई है.

जबकि मामले में संज्ञान लेते हुए सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने सिंध के इंस्पेक्टर जनरल मुश्ताक महार को पत्रकार का पता तुरंत लगाने के निर्देश दिए. मुराद अली शाह ने कहा, “पत्रकारों के खिलाफ इस तरह का कृत्य असहनीय है.”

इस बीच, पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (पीएफयूजे) ने घटना की निंदा की है और कहा कि स्टेट पत्रकारों के बीच आतंक पैदा करके प्रेस की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी सैयद की ‘तत्काल रिहाई’ का आह्वान किया है.

विपक्षी दलों ने इमरान को ठहराया जिम्मेदार

इस बीच पाकिस्‍तान के विपक्षी दलों ने इमरान खान सरकार को पत्रकार के लापता होने के लिए जिम्‍मेदार बताया है. पीपीपी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने कहा कि पत्रकार का गायब होना अभिव्‍यक्ति की आजादी पर हमला है. उन्‍होंने कहा कि इस तरह से पत्रकारों के लापता होने से पाकिस्‍तान की पूरी दुनिया में नकारात्‍मक छवि बनती है. पाकिस्‍तानी पत्रकारों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है.(https://www.tv9bharatvarsh.com/)


24-Oct-2020 5:59 PM 18

दुबई, 24 अक्टूबर | दुबई में रहने वाले एक भारतीय किशोर ने अपने स्कूल के प्रोजेक्ट को पारिवारिक व्यवसाय में बदलकर अपने पिता को चकित कर दिया है। यह जानकारी शनिवार को मीडिया रिपोर्ट के हवाले से मिली। खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दुबई के निवासी और जीईएमएस के छात्र सोलह वर्षीय इशिर वाधवा को अपनी ग्रेड 10 पाठ्यक्रम के लिए एक इनोवेटिव प्रोजेक्ट बनाना था।

इसके लिए उन्होंने रोजमर्रा की समस्या की तलाश की, जिसके बाद उन्होंने दीवार पर स्क्रू और कीलें देखीं।

इशिर ने कहा, "हालांकि स्क्रू और कील का प्रयोग बहुत लंबे समय से होता आ रहा है, और उनका प्रयोग लोगों के लिए दैनिक आधार पर समस्याएं पैदा करते हैं, जैसे कि दीवारों को नुकसान, श्रम की आउटसोर्सिग, धूल और ड्रिलिंग के अन्य खतरे।"

उन्होंने आगे कहा, "मैं अपने बड़े भाई अविक के पास पहुंच गया, जो अभी अमेरिका में पर्डयू विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। जब हमने अपने विचारों को एक साथ रखा, तो बेहतरीन विचार सामने आए।"

उनका समाधान दो स्टील टेप और एक मजबूत चुंबक को एक साथ रखना था।

उन्होंने आगे कहा, "दीवार पर चिपकने वाला स्टील टेप 'अल्फा स्टील टेप' के रूप में जाना जाता है और ऑब्जेक्ट को 'बीटा स्टील टेप' के रूप में लटका दिया जाता है। नियोडिमियम चुंबक पूरे एसेंबली को एक साथ पकड़े रखता है।"

दो चुंबकों के एक साथ आने पर उत्पन्न ध्वनि के आधार पर परिवार ने इस उत्पाद का नाम क्लैपइट रखा है।

खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इशिर के पिता ने इसे एक गेम-चेंजर प्रोजेक्ट माना है, और इसलिए सुमेश वाधवा ने अपनी अच्छी वेतन वाली नौकरी और कैरियर को छोड़ दिया और उत्पाद को अपने पारिवारिक व्यवसाय के रूप में लॉन्च करने का फैसला किया।

--आईएएनएस


24-Oct-2020 2:48 PM 21

सैन फ्रांसिस्को, 24 अक्टूबर| एक अमेरिकी जज ने फिर से चीनी मैसेजिंग ऐप वीचैट पर प्रतिबंध लगाने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश को रोक दिया है। द वर्ज ने शुक्रवार को बताया कि कैलिफोर्निया के एक जज ने यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के उस अनुरोध को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि चीनी कंपनी टेनसेंट के वीचैट ऐप को ऐप स्टोर पर एक्टिव रखने का निर्णय पलट दिया जाए।

जज ने कहा, "रिकॉर्ड इस निष्कर्ष का समर्थन नहीं करता है कि सरकार अपने राष्ट्रीय-सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए लेन-देन के निषिद्ध तरीकों को संकुचित कर रही है। बल्कि सबूत इस बात का समर्थन करता है कि लेन-देन की यह प्रक्रिया सरकार के वैध हितों को पूरा करने में आड़े नहीं आती है।"

ट्रंप ने 6 अगस्त को वाचैट के जरिए अमेरिकी लेन-देन पर प्रतिबंध लगाने के लिए कार्यकारी आदेश जारी किया था। इसके बाद वीचैट यूजर्स के कानूनी अधिकारों के लिए लड़ने एक गैर सरकारी संगठन यूएसडब्ल्यूयूए ने ट्रंप प्रशासन पर मुकदमा दायर किया, जो 17 सितंबर को अदालत में खुला। (आईएएनएस)


24-Oct-2020 2:46 PM 33

जिनेवा, 24 अक्टूबर| विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के महानिदेशक ट्रेडोस एडनहोम गेब्रेयसिस ने कहा है कि दुनिया अभी भी कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में अहम मोड़ पर है। उन्होंने कई देशों में नए मामलों की संख्या बढ़ने के मद्देनजर तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगले कुछ महीने बहुत 'कठिन' होने वाले हैं और कुछ देश तो 'खतरनाक ट्रैक' पर हैं।

उन्होंने कहा, "बहुत से देशों में मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है जबकि अभी अक्टूबर ही चल रहा है।"

गेब्रेयसिस ने नेताओं से आग्रह किया है कि वो तत्काल कार्रवाई करें ताकि अनावश्यक मौतों को रोकने, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को ढहने और स्कूलों को फिर से बंद करने से रोका जा सके।

डब्ल्यूएचओ के हेल्थ इमरजेंसी प्रोग्राम की तकनीकी प्रमुख मारिया वान केरखोव ने कहा कि डब्ल्यूएचओ अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के एक समूह तक पहुंच गया है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अधिक जानकारी साझा की जाएगी।

उन्होंने कहा, "चूंकि पिछले दिसंबर में चीन के वुहान में पहले मामले का पता लगा था इसलिए शुरूआती अध्ययन वहीं से शुरू किया जाएगा।"

जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार, शनिवार की सुबह तक दुनिया में कोरोनावायरस मामलों की कुल संख्या 4,21,14,524 और मौतों की संख्या 11,43,291 हो चुकी है।

अमेरिका 84,84,991 मामलों और 2,23,914 मौतों के साथ दुनिया में प्रभावित देशों में शीर्ष पर है। वहीं 77,61,312 मामलों के साथ भारत दूसरे स्थान पर है जबकि देश में कोरोना से 1,17,306 लोगों की मौत हो चुकी है। (आईएएनएस)


24-Oct-2020 2:43 PM 24

लिस्बन, 24 अक्टूबर| महिलाओं की तुलना में औसत तौर पर पुरुष कोविड -19 एंटीबॉडी का अधिक उत्पादन करते हैं। यह बात पुर्तगाली शोधकर्ताओं ने कही है। उन्होंने यह भी कहा है कि, 90 फीसदी रोगियों में सार्स-कोव-2 वायरस के संपर्क में आने के सात महीनों तक के बाद एंटीबॉडी मिली हैं।

यूरोपीय जर्नल ऑफ इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित हुए नतीजे यह भी बताते हैं कि एंटीबॉडी के स्तर के मामले में उम्र महत्वपूर्ण कारक नहीं है, लेकिन रोग की गंभीरता है।

पुर्तगाल में मेडिसिना मॉलीक्यूलर आणविक जोआओ लोब एंट्यून्स के लेखक मार्क वल्डोवेन ने कहा, "हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली सार्स-कोव-2 को हानिकारक वायरस के तौर पर पहचानती है और फिर इसके जवाब में एंटीबॉडी का उत्पादन करती है, जो वायरस से लड़ने में मदद करती है।"

इस अनुसंधान टीम ने कोविड -19 अस्पताल के 300 से अधिक रोगियों और स्वास्थ्य सेवा कार्यकर्ताओं के एंटीबॉडी स्तर और 200 से अधिक कोविड -19 से उबर चुके स्वयंसेवकों की निगरानी की थी।

पिछले 6 महीने के दौरान किए गए अध्ययन में कोविड -19 लक्षण आने के बाद के शुरूआती 3 हफ्तों के भीतर एंटीबॉडी के स्तर में तेजी से वृद्धि देखने को मिली लेकिन बाद में उम्मीद के मुताबिक इसमें कमी आई।

उन्होंने कहा, "इस प्रारंभिक चरण में महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक एंटीबॉडी का उत्पादन करते हैं, लेकिन कुछ महीनों के बाद महिला, पुरुष दोनों में एंटीबॉडी का स्तर समान मिला।" (आईएएनएस)


24-Oct-2020 2:42 PM 21

लापास, 24 अक्टूबर| बोलीविया के सुप्रीम इलेक्टोरल ट्रिब्यूनल (टीएसई) ने घोषणा की है कि मूवमेंट टवॉर्डस सोशलिज्म (एमएएस) पार्टी के उम्मीदवार लुइस अर्से कैटाकोरा ने 18 अक्टूबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव में 55.1 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, शुक्रवार को ला पास में एक समारोह के दौरान टीएसई प्रमुख सल्वाडोर रोमेरो ने कहा, "हमने एक राजनीतिक संकट के बीच एक जटिल चुनाव कराया। हमने एक पारदर्शी, सुरक्षित और सत्यापित चुनावी प्रक्रिया का अनुपालन किया है .. हम लुईस अर्से को बोलीविया के निर्वाचित राष्ट्रपति और डेविड चोकेहुआंका को निर्वाचित उपराष्ट्रपति के रूप में घोषित करते हैं।"

उन्होंने कहा कि 88 प्रतिशत योग्य मतदाताओं ने चुनावों में मतदान किया।

एमएएस ने सीनेट और चैंबर ऑफ डेप्युटीज में भी पूर्ण बहुमत प्राप्त की, हालांकि इसे संवैधानिक सुधारों को पूरा करने के लिए आवश्यक दो तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं हुआ।

टीएसई ने राजनीतिक संगठनों, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय अवलोकन मिशनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ मीडिया की उपस्थिति के बीच देश के नौ विभागों में मतों की गिनती में पांच दिन बिताए।

1989 के बाद यह पहली बार है जब देश ने इतने कम समय में राष्ट्रपति चुनाव के आधिकारिक परिणाम प्रकाशित किए हैं।

आधिकारिक मतों में 55.1 प्रतिशत मतों के साथ चुनाव के अर्से को विजोता दिखाया गया है।

दूसरे स्थान पर सिटीजन कम्युनिटी पार्टी के कार्लोस मेसा रहे उन्हें 28.83 प्रतिशत मत मिले और क्रीमोस (वी बिलीव) अलायंस के लुइस फर्नांडो कैमाचो 14 प्रतिशत मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। (आईएएनएस)
 


24-Oct-2020 12:18 PM 27

वाशिंगटन, 24 अक्टूबर| एक टीवी बहस के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी पर उनके प्रतिद्वंदी जो बाइडन ने कहा कि वह तेल इंडस्ट्री बंद करना चाहते हैं। इसके बाद डेमोक्रेट इस मामले पर पैदा हुए भ्रम को दूर करने में लगे हैं। 

बीबीसी ने शनिवार को बताया कि बाइडन के सहयोगियों ने कहा कि वह जीवाश्म ईंधन पर मिलने वाली सब्सिडी को खत्म करने के बारे में बात कर रहे थे, न कि उद्योग को।

इस बीच डेमोक्रेट ने कोरोनावायरस को लेकर फिर से ट्रंप पर हमला करते हुए कहा, "उन्होंने इस मामले में अमेरिका को उसके हाल पर छोड़ दिया है।"

गुरुवार की रात नैशविले में बहस के दौरान ट्रंप ने अपने प्रतिद्वंदी से पूछा, "क्या आप तेल इंडस्ट्री को बंद कर देंगे?" इस पर बाइडन ने जबाव दिया, "हां, मैं तेल इंडस्ट्री से ट्रांजिशन करूंगा क्योंकि यह इंडस्ट्री बहुत प्रदूषण फैलाती है।"

बाइडन ने कहा कि जीवाश्म ईंधन को समय के साथ नवीकरण की जा सकने वाली ऊर्जा के जरिए प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए ताकि अमेरिका शून्य कार्बन उत्सर्जन की ओर बढ़ सके।

बता दें कि बाइडन चुनावों में लगातार बढ़त बनाए हुए हैं। लेकिन यह बढ़त बहुत छोटी और कुछ राज्यों में ही है, ऐसे में मतदाताओं का असल रुख 3 नवंबर को ही सामने आ सकता है। वहीं 5.3 करोड़ से अधिक अमेरिकी कोरोनावायरस के कारण पहले ही मेल के जरिए रिकॉर्ड स्तर पर मतदान कर चुके हैं। (आईएएनएस)


24-Oct-2020 12:09 PM 23

वाशिंगटन, 24 अक्टूबर | डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडन ने कहा है कि अगर वह 3 नवंबर के चुनाव में जीत जाते हैं, तो अमेरिका के सभी लोगों को कोविड-19 वैक्सीन वह निशुल्क उपलब्ध कराएंगे। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, शुक्रवार को विलिमिंगटन, डेलावेयर में एक भाषण के दौरान बाइडन ने कहा, "एक बार हमारे पास सुरक्षित और प्रभावी टीका होने के बाद, यह सभी के लिए निशुल्क उपलब्ध होगा- चाहे आपका बीमा हो या नहीं हो।"

उन्होंने एक बार फिर कोरोना वायरस महामारी को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि वह (ट्रंप) वायरस के खिलाफ लड़ाई में हार गए हैं। 

पूर्व उपराष्ट्रपति ने 3 नवंबर के चुनाव से पहले आखिरी और अंतिम बार ट्रंप से बहस करने के एक दिन निशुल्क वैक्सीन उपलब्ध कराने का वादा किया। 

बहस में कोरोनोवायरस महामारी एक प्रमुख विषय था।

महामारी से दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावित देश अमेरिका में कोरोना के अब तक 8,484,991 मामले सामने आ चुके हैं और 223,914 लोगों की मौत हो चुकी है।  (आईएएनएस)


24-Oct-2020 10:49 AM 18

पेरिस, 24 अक्टूबर | फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि उनके देश के अगले साल के मध्य तक कोरोनावायरस से जूझने की संभावना है। गौरतलब है कि देश में कोविड-19 के 10 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं।

बीबीसी के मुताबिक, फ्रांस में शुक्रवार को कोविड-19 के 40,000 से अधिक नए मामले सामने आए और 298 मौतें दर्ज की गईं। रूस, पोलैंड, इटली और स्विट्जरलैंड सहित अन्य देशों ने भी मामलों में वृद्धि दर्ज की है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि वायरस के खिलाफ लड़ाई के मद्देनजर यूरोपिय देशों में कोरोना मामलों में वृद्धि चिंताजनक है।

यूरोप में प्रतिदिन दर्ज किए जाने वाले संक्रमण के मामले पिछले 10 दिनों में बढ़कर दोगुने से अधिक हो गए हैं। इस महाद्वीप में अब तक कुल 78 लाख मामले और 247,000 मौतें दर्ज की गई हैं।

डब्ल्यूएचओ के प्रमुख ट्रेडोस अडेनहोम ने संवाददाताओं को बताया, "अगले कुछ महीने बहुत कठिन होने वाले हैं और कुछ देश खतरनाक रास्ते पर हैं।"

विश्व स्तर पर कोविड-19 से 4.2 करोड़ से अधिक मामले सामने आए हैं और 11 लाख मौतें हुई हैं।

पेरिस क्षेत्र के एक अस्पताल के दौरे पर आए मैक्रों ने कहा कि वैज्ञानिक उन्हें बता रहे थे कि उन्हें यकीन है कि वायरस अगली गर्मियों तक मौजूद रहेगा।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि फ्रांस में पुन: पूर्ण या आंशिक लॉकडाउन लगाया जाएगा या नहीं अभी यह कहना जल्दबाजी होगा।

करीब 4.6 करोड़ के आबादी वाले देश में शुक्रवार रात से कर्फ्यू छह सप्ताह तक देश के लगभग दो-तिहाई हिस्सों में बढ़ाया गया है।

मैक्रों ने कहा कि जब एक दिन में 3,000 और 5,000 के बीच नए मामले दर्ज किए जाने लगेंगे, तभी कर्फ्यू में ढील दी जाएगी।

इस बीच, एपी-एचपी हॉस्पिटल ग्रुप के प्रमुख मार्टिन हर्श ने चेतावनी दी कि संक्रमण की दूसरी लहर पहले की तुलना में ज्यादा खतरनाक हो सकती है।(आईएएनएस)


24-Oct-2020 10:44 AM 16

वाशिंगटन, 24 अक्टूबर | दुनियाभर में कोरोनोवायरस के कुल मामलों की संख्या 4.2 करोड़ के पार पहुंच गई है, जबकि 1,143,291 लोग इस बीमारी से जान गंवा चुके हैं। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी ने यह जानकारी दी।

यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सिस्टम्स साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसएसई) ने अपने नवीनतम अपडेट में खुलासा किया कि शनिवार की सुबह तक कुल मामलों की संख्या 42,114,524 थी, जबकि मृत्यु का आंकड़ा बढ़कर 1,143,291 हो गया।

सीएसएसई के अनुसार, दुनिया में सबसे ज्यादा 8,484,991 मामलों और 223,914 मौतों के साथ अमेरिका सबसे ज्यादा प्रभावितों देशों में शीर्ष पर है।

वहीं, 7,761,312 मामलों के साथ भारत दूसरे स्थान पर है, जबकि देश में 117,306 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है।

सीएसएसई के आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना के अधिकतम मामलों वाले अन्य शीर्ष 15 देश ब्राजील (5,353,656), रूस (1,471,000), फ्रांस (1,084,732), अर्जेटीना (1,069,368), स्पेन (1,046,132), कोलंबिया (998,942), मेक्सिको (879,876), पेरू (880,775), ब्रिटेन (834,010), दक्षिण अफ्रीका (712,412), ईरान (556,891), चिली (498,906), इटली (484,869), इराक (445,949) और जर्मनी (417,350) हैं।

वर्तमान में मौतों के मामले में ब्राजील दूसरे स्थान पर है। देश में 156,471 लोग कोरोना से जान गंवा चुके हैं।

10,000 से ज्यादा मौतों वाले अन्य देश मेक्सिको (88,312), ब्रिटेन (44,661), इटली (37,059), स्पेन (34,752), फ्रांस (34,536), पेरू (33,984), ईरान (31,985), कोलंबिया (29,802), अर्जेटीना (28,338), रूस (25,353), दक्षिण अफ्रीका (18,891), चिली (13,844), इंडोनेशिया (13,077), इक्वाडोर (12,528), बेल्जियम (10,588) और इराक (10,513) हैं।(आईएएनएस)


24-Oct-2020 10:14 AM 19

नागोर्नो-काराबाख़ में आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच चल रहे भीषण युद्ध ने तुर्की में बने लड़ाकू ड्रोन विमानों को भी दुनिया की नज़र में ला दिया है. कहा जा रहा है कि तुर्की से ख़रीदे गए ड्रोन की वजह से अज़रबैजान को युद्ध में बढ़त हासिल हुई है.

नागोर्नो-काराबाख़ युद्ध शुरू होने से पहले ही तुर्की के ड्रोन विमानों की वजह से कई सैन्य विश्लेषक उसे ग्लोबल डिफेंस इंडस्ट्री क्षेत्र के शीर्ष देशों में शामिल करने लगे थे.

उन्नत लड़ाकू ड्रोन बना रहा तुर्की अपने आप को इसराइल या अमरीका के साथ जोड़कर नहीं देखना चाहता है. वो उन्नत तकनीक के नए विमान ख़ुद बना रहा है.

मानवरहित विमानों के अमरीकी सैन्य विशेषज्ञ डेनियल गेटिंगर ने बीबीसी तुर्की सेवा से कहा कि तुर्की कई तरह के ड्रोन विमान बना रहा है.

हेबरतुर्क के पत्रकार और एविएशन के विशेषज्ञ गुंते सिमसेक का मानना है कि तुर्की कई बरसों से से उड्डयन क्षेत्र में हुए अपने नुकसान की भरपाई कर रहा है.'

वो बताते हैं कि विमान निर्माता तुर्की साल 1940 में ही सिविल एविएशन ऑर्गेनाइज़ेशन का सदस्य बन गया था. हालाँकि, अगले कुछ वर्षों में तुर्की की स्थिति कमज़ोर होती गई. लेकिन अब मानवरहित विमान बनाकर उसने अपनी स्थिति मज़बूत कर ली है.

तुर्की की आलोचना

देश के भीतर ड्रोन हमलों और उनमें आम नागरिकों की मौत को लेकर तुर्की को आलोचना का सामना भी करना पड़ा है.

अमरीका के मिशेल एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़े डेनियल गेटिंगर कहते हैं कि यूएवी के मामले में दुनिया में सबसे आगे इसराइल और अमरीका हैं.

इसराइल और अमरीका ने 1970 और 80 के दशक में सैन्य इस्तेमाल के लिए ड्रोन विमान बनाने की शुरुआत की थी. तुर्की इस क्षेत्र में नया निर्माता है. इसके अलावा चीन और फ़्रांस भी बड़े ड्रोन निर्माता देश हैं.

गेटिंगर के मुताबिक इस समय दुनिया में कम से कम 95 देश ड्रोन विमान बनाने की कोशिश कर रहे हैं और कम से कम 60 देश 267 तरह के सैन्य ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं.

सबसे ज़्यादा ड्रोन खरीदने वाला देश-चीन

गुंते सिमसेक के मुताबिक ड्रोन डिजाइन, सॉफ़्टवेयर और इस्तेमाल के मामले में तुर्की दुनिया के शीर्ष पाँच देशों में शामिल है.

ब्रिटेन स्थित गैर सरकारी संगठन ड्रोन वॉर्स के मुताबिक ड्रोन उत्पादन के क्षेत्र में शामिल होने वाला तुर्की नई पीढ़ी का देश है. इन देशों में चीन, ईरान और पाकिस्तान भी शामिल हैं.

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक़ बीते साल चीन के ड्रोन निर्यात में 1430% की वृद्धि हुई है और इस मामले में चीन सबसे आगे हो गया है.

एयरोस्पेस और डिफ़ेंस के क्षेत्र में काम करने वाली शोध फर्म टील ग्रुप के मुताबिक साल 2019 में ड्रोन का कारोबार बढ़कर 7.3 अरब डॉलर का हो गया.

अगले 10 साल में यह आंकड़ा 98.9 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.

बेयरेकतार ड्रोन का कंट्रोल सेंटर

तुर्की की सेना अलगाववादी संगठन पीकेके के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर ड्रोन विमानों का इस्तेमाल करती है और इसी वजह से तुर्की में इनका उत्पादन बढ़ा है.

तुर्की पीकेके को आतंकवादी संगठन मानता है. ये उन कुर्दों का संगठन है जो तुर्की में कुर्दों के लिए अलग देश बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

तुर्की साल 2000 के बाद से इसराइल से ड्रोन ख़रीद रहा था लेकिन हेरोन टाइप यूएवी उड़ाने में उसे समस्याएं आ रहीं थीं. कभी वो क्रैश हो जा रहे थे कभी तकनीकी कारणों से उड़ नहीं पा रहे थे.

इसी वजह से कुछ हेरोन ड्रोन वापस इसराइल भी भेज दिए गए थे.

अमरीका की कांग्रेस ने भी प्रीडेटर और रीपर ड्रोन की तुर्की को बिक्री पर रोक लगा दी थी.

इसके बाद अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए तुर्की को अपना ड्रोन कार्यक्रम विकसित करना पड़ा.

बायकार कंपनी का बायरक्तार टीबी2 ड्रोन दुनिया के सबसे चर्चित ड्रोन विमानों में शामिल है.

ये अपने प्रतिद्वंदियों से इसलिए बेहतर है क्योंकि ये मिसाइल ले जाने में सक्षम सबसे छोटा ड्रोन है.

इसका इस्तेमाल हवाई क्षेत्र की निगरानी और जासूसी के लिए भी किया जा सकता है. ये सटीक निशाना भी लगाता है.

किन देशों के पास है ये ड्रोन?

तुर्की और अज़रबैजान के मीडिया में इस साल गर्मियों में इस ड्रोन को ख़रीदने की ख़बरें आने लगीं थीं. इसके अलावा सर्बिया, क़तर, ट्यूनीशिया और लीबिया भी तुर्की में बनें मानवरहित विमान ख़रीद चुके हैं.

नागोर्नो काराबाख़ की लड़ाई में बायरक्तार टीबी2 ड्रोन विमानों के कामयाब इस्तेमाल ने इनकी माँग भी बढ़ा दी है.

गुंते सिमसेक कहते हैं कि अब इस ड्रोन का बाज़ार बढ़ा हो गया है.

फ्रांस24 के साथ एक साक्षात्कार में अज़रबैजान के राष्ट्रपति से जब पूछा गया कि उन्होंने तुर्की से कितने ड्रोन लिए हैं तो इसके जवाब में उन्होंने कहा था कि 'हमारे पास अपना मक़सद हासिल करने के लिए पर्याप्त ड्रोन विमान हैं.'

राष्ट्रपति इल्हाम अलियेव ने कहा था, ''ये वो जानकारी है जिसे मैं सार्वजनिक नहीं करना चाहूंगा.''

अज़रबैजान के राष्ट्रपति ने युद्ध पर ड्रोन के प्रभाव से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए कहा था, ''ज़ाहिर तौर पर ये नए ज़माने के उन्नत हथियार हैं. मैं ये कह सकता हूं कि तुर्की से मिले ड्रोन विमानों से हमने आर्मीनिया के एक अरब डॉलर से अधिक सैन्य साज़ो-सामान बर्बाद कर दिए हैं.''

तुर्की ने सीरिया में चलाए ऑपरेशन स्प्रिंग शील्ड के दौरान भी अपने ड्रोन विमानों का इस्तेमाल किया था.

सीरिया में तुर्की के सैन्य ऑपरेशन में भी ड्रोन विमान इस्तेमाल हुए हैं

तुर्की के ड्रोन विमानों की मदद से ही लीबिया की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार विद्रोही सैन्य नेता ख़लीफ़ा हफ़्तार के बलों के ख़िलाफ़ प्रभावी कार्रवाई कर पाई थी.

साल 2019 में तुर्की ने 2.74 अरब डॉलर के हथियार बेचे. पिछले साल के मुकाबले तुर्की ने 34 प्रतिशत की बढ़त हासिल की. विशेषज्ञों के मुताबिक साल 2023 तक तुर्की का ड्रोन कारोबार 10 अरब डॉलर तक बढ़ जाएगा.

स्टॉकहोम पीस इंस्टीट्यूट के मुताबिक साल 2014-18 के बीच तुर्की ने हथियारों की बिक्री 170% बढ़ाई जबकि साल 2015-19 के बीच तुर्की के हथियारों के आयात में 48% की कमी आई.

इसकी वजहों में तुर्की का स्थानीय तकनीक विकसित करना और विदेशों से हथियार ख़रीदने में आ रही दिक्कतें शामिल हैं.

डेनियल गेटिंगर कहते हैं कि तुर्की सिर्फ़ हथियार बेचना में ही दिलचस्पी नहीं ले रहा है बल्कि वो दूसरे देशों से रिश्ते भी बनाना चाहता है.

तुर्की की विदेश नीति इतनी आक्रामक क्यों?

वो कहते हैं कि तुर्की ड्रोन के उत्पादन के मामलों में दूसरे देशों को सहयोग भी दे रहा है.

गेटिंगर के अनुसार, बायरक्तार ड्रोन टीबी2 वर्ज़न से कुछ सस्ता है और तुर्की ने इसकी बिक्री के लिए ख़ूब प्रचार भी किया है.

तुर्की के ड्रोन विमानों की एक ख़ास बात ये है कि इन्हें पूरी तरह से स्थानीय स्तर पर बनाया गया है.

ड्रोन निर्माता कंपनी बायकार ने एक बयान में कहा है कि उसका पूरा सिस्टम स्थानीय और घरेलू उत्पादन पर ही आधारित है.

हालाँकि विशेषज्ञ इससे अलग राय रखते हैं. डेनियल गेटिंगर कहते हैं कि तुर्की सेंसर डिवाइस और टार्गेट डिवाइस जर्मनी और कनाडा से हासिल करता है.

रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक तुर्की के ड्रोन कार्यक्रम की एक कमज़ोर कड़ी ये है कि ये आयात पर निर्भर है.

अमरीका के चुनावों में तुर्की की पैनी नज़र की वजह

साल 2019 में ब्रितानी अख़बार द गार्जियन ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि तुर्की का बायरक्तार टीबी2 ड्रोन हॉर्नेट टाइप के मिसाइल लांचरों का इस्तेमाल करता है जिन्हें ब्रितानी कंपनी ईडीओ एमबीएम टेक्नोलॉजी ने बनाया है.

हालाँकि बायकार ने इन आरोपों को खारिज किया है.

रिपोर्टों के मुताबिक जर्मनी की कंपनियों ने 1.28 करोड़ यूरो के सैन्य उपकरण तुर्की को बेचे थे जिनका इस्तेमाल ड्रोन बनाने में हो सकता है.

गुंते सिमसेक का कहना है कि तुर्की ने ड्रोन विमान का इंजन बनाने में प्रगति की है और ये एक बेहद विवादित मुद्दा है.

ड्रोन वॉर्स से जुड़े सेमुएल ब्राउनसोर्ड के मुताबिक तुर्की के पास अपने ड्रोन विमानों के विकास और निर्यात का मौका है.

इस क्षेत्र में तुर्की की कामयाबी की सबसे बड़ी वजह ये है कि वो दुनिया के ऐसे चंद देशों में शामिल है जो अपनी ही ज़मीन पर ड्रोन विमानों से हमले कर रहे हैं.

अर्दोआन सरकार तुर्की के इस स्वर्णिम इतिहास को दोहराने की कोशिश में

सेमुएल ब्राउनसोर्ड ने एक लेख में ये भी कहा है कि तुर्की अपनी सीमाओं के भीतर इन ड्रोन विमानों का नियमित इस्तेमाल करता है.

मानवाधिकार संगठन और कार्यकर्ता आरोप लगाते रहे हैं कि तुर्की अपने ही देश में ड्रोन विमानों का इस्तेमाल कर आम नागरिकों को निशाना बना रहा है.

संगठनों का आरोप है कि तुर्की ने उत्तरी सीरिया में भी ड्रोन विमान इस्तेमाल किए.

ड्रोन विमानों की एक आलोचना इस बात को लेकर भी होती है कि इनके इस्तेमाल का एक ही नतीजा होता है- लोगों की मौत.

सेमुएल ब्राउनसोर्ड कहते हैं, 'ड्रोन विमान से किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाता. जब ये इस्तेमाल होते हैं तो मौत निश्चित नतीजा होती है. ये एक गंभीर चिंता की बात है.'(bbc)


24-Oct-2020 9:24 AM 21

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर | भारत और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के बीच 100 वर्षों के संबंधों में एक नया अध्याय लिखा गया है। भारत ने 35 वर्षों बाद अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के गवनिर्ंग बॉडी की अध्यक्षता ग्रहण की है। श्रम और रोजगार सचिव अपूर्व चंद्रा को अक्टूबर 2020 से जून 2021 तक की अवधि के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के गवनिर्ंग बॉडी के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है। यह पद अंतर्राष्ट्रीय स्तर का है। गवनिर्ंग बॉडी, आईएलओ का शीर्ष कार्यकारी निकाय है जो नीतियों, कार्यक्रमों, एजेंडे, बजट का निर्धारण करता है और महानिदेशक का चुनाव का कार्य भी करता है। वर्तमान समय में आईएलओ के 187 सदस्य हैं। अपूर्व चन्द्रा नवंबर 2020 में होने वाली शाषी निकाय की आगामी बैठक की अध्यक्षता करेंगे। जिनेवा में, उनके पास सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और सामाजिक भागीदारों के साथ बातचीत करने का अवसर होगा। यह संगठित या असंगठित क्षेत्र में सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के सार्वभौमिकरण के बारे में मंशा स्पष्ट करने के अलावा श्रम बाजार की कठोरता को दूर करने के लिए सरकार द्वारा की गई परिवर्तनकारी पहलों के प्रतिभागियों को भी एक मंच प्रदान करेगा।

अपूर्व चंद्रा 1988 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में सात साल से अधिक समय तक अपूर्व चंद्रा ने कार्य किए हैं। चंद्रा ने महाराष्ट्र सरकार में प्रधान सचिव (उद्योग) के रूप में 2013 से 2017 के बीच चार वर्षों तक काम किया है। 1 अक्टूबर 2020 से उन्होंने श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव के रूप में पद संभाला है।(आईएएनएस)


24-Oct-2020 9:01 AM 16

वाशिंगटन, 24 अक्टूबर | वैश्विक कश्मीरी पंडित प्रवासी (जीकेपीडी) और अन्य सामुदायिक संगठनों ने जम्मू एवं कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से पहली बार सीमा-पार की क्रूर आक्रामकता की 73वीं वर्षगांठ के अवसर पर वाशिंगटन में पाकिस्तान के दूतावास के सामने विरोध रैली की। मास्क पहने हुए और सामाजिक दूरी के मानदंडों का पालन करते हुए, प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार को काला दिवस मनाया। उन्होंने पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद को कश्मीर के लिए खतरनाक करार देते हुए काला दिवस मनाया। इसके लिए उन्होंने डिजिटल ट्रक और कार डिस्प्ले का इस्तेमाल किया।

रैली के आयोजक और वाशिंगटन डीसी, जीकेपीडी के समन्वयक मोहन सप्रू ने कहा, "प्रदर्शनकारी पाकिस्तान की सीमा-पार आतंकवाद और कश्मीर में 73 साल लंबी स्थायी नीति की कड़ी निंदा करने के लिए एकत्र हुए हैं। पाकिस्तान ने अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया है, जिनमें कश्मीरी हिंदू, सिख, ईसाई और बौद्ध शामिल हैं।

घाटी में हिंसा और आतंक फैलाने में पाकिस्तान की भूमिका के विरोध में यह दिन मनाया गया। दरअसल 22 अक्टूबर, 1947 को पाकिस्तानी आक्रमणकारियों ने अवैध रूप से जम्मू-कश्मीर में प्रवेश किया और लूटपाट और अत्याचार किए।

पाकिस्तानी सेना समर्थित कबाइली लोगों के लश्कर (मिलिशिया) ने कुल्हाड़ियों, तलवारों, बंदूकों और हथियारों से लैस होकर कश्मीरी लोगों पर हमला बोल दिया था।

सीमा पार इस्लामिक आतंकवाद की क्रूरता बेरोकटोक जारी रही और इसके परिणामस्वरूप 1989-1991 के बीच स्वदेशी कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार किया गया और उसके बाद उनका जबरन पलायन हुआ। दुनिया भर में इस्लामिक आतंकवाद के खतरे को पहचानने में विश्व समुदायों को ईमानदार होने की जरूरत है। कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार किया गया है और इस अल्पसंख्यक समुदाय के मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

कार्यकर्ता सिद्धार्थ अंबरदार ने कहा, "कश्मीर लौटने और सच्ची शांति के लिए इस्लामी आतंकवाद के खतरे को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा।"

उन्होंने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं की हत्या और दुष्कर्म का शिकार हुए लोगों को न्याय मिलना चाहिए।

अंबरदार ने कहा, "घाटी में स्वदेशी कश्मीरी हिंदुओं की सुरक्षित वापसी के लिए अभी भी कोई व्यापक व्यवहार्य योजना नहीं है, जो अपने ही देश में शरणार्थी बने हुए हैं।"

उन्होंने ऐसे कुछ कश्मीरी हिंदू परिवारों की पीड़ा और कठिनाइयों का भी जिक्र किया, जो भय के माहौल में अभी भी घाटी में रह रहे हैं और जिनकी ओर अभी भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

विरोध प्रदर्शन में शामिल एक अन्य कश्मीरी हिंदू समुदाय के कार्यकर्ता स्वप्न रैना ने कहा, "हम न्याय की मांग करते रहेंगे और दुनिया को इस्लामी आतंकवादियों द्वारा स्वदेशी कश्मीरियों के नरसंहार को भूलने नहीं देंगे।"

स्थानीय समुदाय (लोकल कम्युनिटी) कार्यकर्ता उत्सव चक्रबर्ती ने कहा कि 22 अक्टूबर, 1947 के काले दिन के बारे में लोगों कम लोगों को जानकारी है। उन्होंने कहा कि हमें उसे याद रखे रखना और साझा करना जरूरी है, ताकि इस तरह के घटनाक्रम को दोबारा कभी नहीं दोहराया जा सके।

पत्रकार और स्थानीय पश्तून निवासी पीर जुबैर ने कहा, "पाकिस्तान ने आदिवासियों को जिहाद के नाम पर कश्मीरियों पर हमला करने और उन पर अत्याचार करने के लिए प्रेरित किया है। इसके अलावा पाकिस्तान ने 1947 में कश्मीरी हिंदुओं और सिखों के साथ जो किया, वह अब आदिवासियों के साथ भी हो रहा है।"(आईएएनएस)