अंतरराष्ट्रीय

Date : 13-Jan-2020

बाल्टीमोर (अमेरिका) 13 जनवरी । प्राधिकारियों ने बताया कि बाल्टीमोर में सप्ताहांत में गोलीबारी की आठ घटनाएं हुईं जिनमें पांच लोगों की मौत हो गई और सात अन्य लोग घायल हो गए।करीब 24 घंटे के अंतराल में गोलीबारी की आठ घटनाएं हुईं। पहली घटना शुक्रवार देर रात ढाई बजे हुई और आखिरी घटना शनिवार देर रात करीब 11 बजे हुई। (एपी)
 


Date : 13-Jan-2020

बगदाद, 13 जनवरी। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम नहीं हो रहा है। हाल ही में ईरान ने रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स के मुखिया जनरल कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेते हुए इराक स्थित दो अमेरिकी बेस पर एक दर्जन से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया था। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि इस अटैक में करीब 80 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। यूएस ने इसका खंडन किया था। इराक की राजधानी बगदाद में बीते रविवार एक बार फिर अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर रॉकेट दागे जाने का मामला सामने आया है।
अल जजीरा की खबर के अनुसार, इस हमले में चार इराकी सैनिकों के घायल होने की खबर है। अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने से जुड़ी अभी कोई खबर नहीं है। मिली जानकारी के मुताबिक, रॉकेट यहां स्थित अल-बलाद एयरबेस पर दागे गए। इस बेस में अमेरिकन ट्रेनर, सलाहकार और एफ-16 लड़ाकू विमान की मेंनटेंस सर्विस से जुड़े सैनिक रहते हैं। अल-बलाद एफ-16 लड़ाकू विमानों का मुख्य एयरबेस है। बताया जा रहा है कि कुछ रॉकेट एयरबेस स्थित रेस्टोरेंट में आकर गिरे थे।
इस हमले में एयरबेस का रन-वे भी क्षतिग्रस्त हुआ है। रॉकेट अटैक में घायल हुए इराकी सैनिक एयरबेस के गेट पर तैनात थे। बेस में अमेरिकन एक्सपर्ट्स, ट्रेनर और एडवाइजर समेत काफी लोग थे। हमले में किसी के मारे जाने की खबर नहीं है। अभी तक किसी ने भी इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए हाल ही में यूएस ने अपने अधिकारियों और सैनिकों को इस एयरबेस से हटाना शुरू कर दिया था। बताया जा रहा है कि जिस समय यह हमला हुआ उस समय एयरबेस पर अमेरिकी नागरिक नहीं थे।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को धमकी दे चुके हैं कि वह युद्ध के पक्ष में नहीं हैं लेकिन अगर ईरान ने किसी भी अमेरिकी नागरिक या उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। दूसरी ओर ईरानी मंत्रियों ने भी अमेरिका को जवाब देते हुए कहा कि वह भी युद्ध नहीं चाहते लेकिन अपनी आत्मरक्षा में हर मुमकिन जवाब जरूर देंगे। हाल ही में ईरान ने मिसाइल अटैक में यूक्रेन के एक यात्री प्लेन को मार गिराया था। इसमें 176 लोगों की मौत हो गई थी। ईरान ने अपनी गलती स्वीकारते हुए इसे मानवीय चूक बताया था। (भाषा)
 


Date : 13-Jan-2020

तेहरान, 13 जनवरी । ईरान की इकलौती महिला ओलंपिक पदक विजेता किमिया अलीजादेह ने देश छोडऩे का फैसला लिया है।
21 साल की किमिया ने इस बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा है जिसके मुताबिक वह ईरान में, पाखंड, झूठ, अन्याय और चापलूसी का हिस्सा नहीं बनाना चाहती हैं। उन्होंने खुद को ईरान की लाखों सताई हुई महिलाओं में एक माना है। किमिया इस वक्त कहां हैं, इसके बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन ईरानी मीडिया की खबरों में कहा जा रहा है कि वह ट्रेनिंग के सिलसिले में नीदरलैंड्स में हो सकती हैं। उन्होंने 2016 के रियो ओलंपिक में ताइक्वांडो में कांस्य पदक जीतकर ईरान के लिए इतिहास रचा था। अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा है कि ईरान के अधिकारियों ने उनकी कामयाबी को अपने प्रोपगैंडा के लिए इस्तेमाल किया।
यूक्रेन के यात्री विमान को ईरान ने अपने मिसाइल से मार गिराया, गलती के लिए माफी मांगी। किमिया ने ईरान छोडऩे का फैसला तब लिया है जब ईरान में भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है, बुधवार को यूक्रेन के एक यात्री विमान को ग़लती से मिसाइल से मार गिराने और अगले दो दिनों तक इससे इनकार करने के चलते ईरान की जनता सडक़ों पर उतरकर अपनी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। इसके अलावा ईरान और अमरीका के बीच संघर्ष की स्थिति बनी हुई है।
किमिया ने अपनी सोशल पोस्ट में लिखा है, मैं ईरान की लाखों सताई गई महिलाओं में से एक हूं जो सालों तक देश के लिए खेलती रही हूं। अधिकारियों ने जो भी कहा मैं उसे मानती रही। हर आदेश का पालन किया है, लेकिन उनके लिए हममें से कोई भी अहमियत नहीं रखता। हम उनके लिए केवल इस्तेमाल होने वाले हथियार भर हैं।
किमिया अलीजादेह ने ये भी लिखा है कि सरकार उनकी कामयाबी को राजनीतिक तौर पर भुनाती रही लेकिन अधिकारी उनका अपमान करते रहे। उन्होंने यह बताया है कि अधिकारी उनपर कमेंट करते थे, किसी महिला के लिए अपने पैरों को स्ट्रेच करना पुण्य का काम नहीं है।
अलीजादेह ने इससे भी इनकार किया है कि उन्हें यूरोप से कोई आकर्षक प्रस्ताव मिला है और ना ही उन्होंने यह बताया है कि वह कहां जाएंगी। पिछले सप्ताह जब उनके गायब होने की खबर आई थी तब ईरान के लोगों ने झटका लगने जैसी प्रतिक्रियाएं दी थीं।
ईरान के राजनेता अब्दुलकरीम हुसेनजादेह ने मानव संसाधन के देश छोडऩे के लिए अयोग्य अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया था। बीते गुरुवार को ईरान की समाचार एजेंसी इसना की एक रिपोर्ट में कहा गया, ईरानी ताइक्वांडो को झटका। किमिया अलीजादेह नीदरलैंड्स में बसीं।
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अलीजादेह को उम्मीद है कि वो 2020 के टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेंगी लेकिन वह वहां ईरान के बैनर तले नहीं होंगी। ईरान छोडऩे के अपने इरादे की घोषणा करते हुए किमिया ने अपने आगे की योजनाओं के बारे में जानकारी तो नहीं दी है लेकिन उन्होंने कहा है कि वह जहां भी रहेंगी ईरान की बेटी बनकर रहेंगी।(बीबीसी)