राष्ट्रीय

Date : 07-Dec-2019

उन्नाव, 7 दिसंबर । अपराधों का गढ़ बन चुके उन्नाव में महिला अपराध चरम पर हैं। अपराधी खुलेआम पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। सुनकर हैरत होगी कि इस साल जनवरी से नवंबर तक जिले में 86 रेप की घटनाएं हो चुकी हैं। महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के 185 मामले सामने आए हैं।
उन्नाव के कुछ बड़े अपराध
22 फरवरी 2018 को बारासगवर में युवती को केरोसिन डालकर जिंदा जला दिया गया था।
1 नवंबर 2019 को पुरवा में शादी का झांसा देकर नौशाद से महिला का शारीरिक शोषण किया।
5 नवंबर को असोहा में शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म की शिकायत की गई।
7 नवंबर को अजगैन की छात्रा को छेड़छाड़ के विरोध पर ट्रेन से खींचकर मारने की कोशिश।
13 नवंबर को शादी की फर्जी पोस्ट डालने पर महिला आरक्षी ने शोहदे के खिलाफ कराया मुकदमा।
15 नवंबर को युवती ने शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने का लगाया आरोप।
15 नवंबर को पुरवा में दलित महिला से छेड़छाड़ में सिपाही और उसके साथी पर रिपोर्ट दर्ज।
19 नवंबर को मांखी थाना क्षेत्र के एक गांव की युवती के साथ की गई छेड़छाड़।
20 को बांगरमऊ में छात्रा से युवक ने की छेड़छाड़।
30 नवंबर को बांगरमऊ में चाकू की नोक पर किशोरी से दुष्कर्म।
30 नवंबर को गैंगरेप पीडि़त शिक्षिका के साथ केस वापस लेने को लेकर मारपीट।
विधायक सेंगर पर रेप केस से सुर्खियों में आया उन्नाव।
डेढ़ साल के बाद एक बार फिर रेप प्रकरण ने साहित्य नगरी को झकझोरकर रख दिया। डेढ़ वर्ष पूर्व बांगरमऊ विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का नाम दुष्कर्म में आने के बाद से उन्नाव सुर्खियों में बना है। तीन अप्रैल 2018 को सेंगर के गांव की ही लडक़ी ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इस मामले में विधायक जेल में हैं और दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में सुनवाई चल रही है जो अंतिम दौर में है। सूत्रों की मानें तो एक-दो सप्ताह के अंदर फैसला भी आ सकता है। गुरुवार को हुई जिंदा जलाने के प्रयास की घटना ने एक बार फिर जिले के जख्म हरे कर दिए।(हिंदुस्तान)
 


Date : 07-Dec-2019

नई दिल्ली, 7 दिसंबर। केरल के कोट्याम में कांजिरपल्ली में एक नाबालिग लडक़ी से कथित तौर पर बलात्कार का मामला सामने आया है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक आरोपी ने एक गिलास पानी मांगने के बहाने लडक़ी के घर में घुसा और कथित तौर पर उसके साथ रेप की घटना को अंजाम दिया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच भी शुरू कर दी है।
दूसरी ओर से बिहार के दरभंगा में सदर थाना क्षेत्र में शुक्रवार को 5 साल की बच्ची से बलात्कार के आरोप में एक टेम्पो चालक को गिरफ्तार किया गया। घटना को लेकर पुलिस उपाधीक्षक अनोज कुमार ने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि हमें बताया गया है कि टेम्पो चालक बच्ची को एक बगीचे में ले गया और उसके बलात्कार किया। पीडि़ता का इलाज चल रहा है।
इसके अलावा मध्य प्रदेश के दामोह जिले के लिधोरा गांव में एक लडक़ी ने तालाब में छलांग लगाकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली है क्योंकि उसके गांव के कुछ युवाओं ने कई मौकों पर उसके साथ छेड़छाड़ की थी। हालांकि फिलहाल घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। (लाइव हिन्दुस्तान)
 


Date : 07-Dec-2019

उन्नाव, 7 दिसंबर । उन्नाव में रेप के बाद जलाई गई पीडि़ता ने शुक्रवार रात दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रात 11.40 बजे दम तोड़ दिया है। सफदरजंग अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। दरअसल, गुरुवार सुबह उन्नाव में 5 आरोपियों ने उस पर पेट्रोल डालकर जला दिया था। आरोपियों में से एक पीडि़ता के साथ हुए गैंगरेप का मुख्य आरोपी है।
सफदरजंग अस्पताल के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट के हेड डॉ। शलभ कुमार ने बताया कि बड़े प्रयासों के बावजूद पीडि़ता को बचाया नहीं जा सका। शाम में ही उसकी हालत खराब होनी शुरू हो गई थी। रात 11.10 बजे उसे कार्डियक अरेस्ट आया और 11.40 बजे उसकी मौत हो गई।
मामला उन्नाव के बिहार थाना क्षेत्र का है, पुलिस एफआईआर के मुताबिक पीडि़त युवती का पिछले साल दिसंबर में गैंगरेप हुआ। और इस साल मार्च 2019 में पुलिस ने इस गैंगरेप की शिकायत भी दर्ज की थी। और इसी केस की तारीख के लिए कोर्ट में युवती जा रही थी।
इस दौरान बिहार थाना क्षेत्र के अंतर्गत ही आने वाले एक और गांव के पास गैंगरेप के पांचों आरोपियों ने मिलकर पहले उसे मारा पीटा, चाकू भी मारा और फिर जिंदा जला दिया। पीडि़ता ने खुद ही 112 पर फोन किया और पुलिस से आपबीती बताई। पीडि़ता के फोन के बाद ही पीआरवी और एंबुलेंस पहुंची थी।
घटना के चश्मदीद ग्रामीणों ने बताया कि 90 फीसदी जलने के बाद भी पीडि़ता घटनास्थल से एक किलोमीटर तक पैदल चली थी। इसके बाद उसने घर के बाहर काम कर रहे एक व्यक्ति से मदद भी मांगी। मौके पर पहुंची पुलिस ने लडक़ी को पास के ही जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। वहां से उसे लखनऊ अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। इसके बाद उसे दिल्ली भेजा गया। 
पीडि़ता ने अस्पताल में बयान भी दिया था। मजिस्ट्रेट को दिए अपने बयान में पीडि़ता ने 5 आरोपियों के नाम लिए हैं। पीडि़ता के बयान के अनुसार, पांचों आरोपियों ने मिलकर पहले उसे चाकू भी मारा और फिर जिंदा जला दिया।
इस घटना के बाद पूरे उन्नाव में हडक़ंप मच गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सभी 5 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस घटना में जिन आरोपियों के नाम हैं, उनमें एक हाल ही में जमानत पर छूट कर जेल से बाहर आया है। दो आरोपियों ने अपने तीन साथी के साथ मिल कर इस वारदात को अंजाम दिया।
उधर युवती को जब लखनऊ से दिल्ली लाया गया तो उसकी हालत बहुत गंभीर थी। लखनऊ के सिविल अस्पताल में उसे डॉक्टरों ने प्लास्टिक सर्जरी बर्न यूनिट में रखा गया था इसके बाद दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में भेजा गया था। 
मार्च 2019 में लडक़ी ने उन्नाव के बिहार थाने में जो एफआईआर लिखवाई उसमें लडक़ी और आरोपी एक ही गांव के रहने वाले हैं। आरोपी ने लडक़ी को शादी का झांसा देकर रायबरेली में रेप किया और रेप का वीडियो भी बना लिया
इसके बाद धमकी देकर लडक़ी के साथ कई बार रेप हुआ। आरोपी उसे फिर से रायबरेली ले आया। स्नढ्ढक्र के मुताबिक, आरोपी उसे कमरे से बाहर नहीं निकलने देता था। बाहर निकलने पर जान से मारने की धमकी देता था। शिकायत के मुताबिक, लडक़ी शादी के लिए दबाव बनाने लगी लेकिन आरोपी ने बाद में उसे उसके गांव जाकर छोड़ दिया और शादी करने से भी इनकार कर दिया।
पीडि़ता की सफदरगंज हॉस्पिटल में मौत के बाद पूरे देश में फिर से प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द उन्नाव पीडि़ता को इंसाफ मिले। 
पीडि़ता के पिता ने कहा, जिस तरह हैदराबाद कांड के आरोपियों को मारा गया ऐसे ही हमारी बेटी के दरिंदों को दौड़ा-दौड़ाकर मारा जाना चाहिए या फिर फांसी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरोपियों को सजा मिलने के बाद बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी।
पीडि़ता के भाई ने कहा कि हम शव को अपने गांव ले जाएंगे और वहीं शव को दफना देंगे क्योंकि अब उसमें जलाने लायक कुछ भी बचा नहीं है। 
इसके अलावा भाई ने कहा कि मेरी बहन मुझसे सिर्फ इतना कह सकी कि वह जीना चाहती है और दोषियों को फांसी पर लटकते देखना चाहती है। यह राज्य की असफलता है।
उधर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उन्नाव की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, अत्यंत दुखद है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं। सभी आरोपी पकड़े जा चुके हैं। सरकार उन्हें जल्द से जल्द सजा दिलवाएगी।(आजतक)
 


Date : 07-Dec-2019

नई दिल्ली, 7 दिसंबर । अब वाहनों के दस्तावेजों यानी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी), ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल), पॉल्यूशन सर्टीफिकेट समेत अन्य को मोबाइल नंबर से लिंक कराना जरूरी हो जाएगा। यह नियम एक अप्रैल 2020 से लागू होगा। इस संबंध में केंद्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर इस पर लोगों की राय मांगी है।
इस संबंध में लोग 30 दिन के अंदर यानी 29 दिसंबर तक अपने सुझाव सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को भेज सकते हैं। यह मामला उस समय सामने आया, जब बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल को मंजूरी दी। इस बिल का मकसद पब्लिक और प्राइवेट कंपनियों के लिए पर्सनल डेटा को रेगुलेट करने की व्यवस्था करना है।
माना जा रहा है कि वाहन के दस्तावेजों से मालिक के मोबाइल नंबर के लिंक होने से गाड़ी चोरी होने की जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी। वाहन दस्तावेजों के साथ मोबाइल नंबर लिंक होने से गाड़ी की चोरी, खरीद-फरोख्त पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
इसके अतिरिक्त वाहन डाटा बेस में मोबाइल नंबर दर्ज होने से जीपीएस के अलावा मोबाइल नंबर की मदद से किसी भी व्यक्ति की लोकेशन का पता किया जा सकता है। इसमें विशेषकर सडक़ दुर्घटना, अपराध को अंजाम देने के बाद पुलिस उक्त व्यक्ति का तुरंत पता लगा सकती है और भ्रष्टाचार से भी राहत मिलेगी।
साथ ही केंद्र सरकार और अन्य सरकारी संस्थाओं के पास सभी वाहनों और ड्राइविंग लाइसेंस का पूरा डाटा, मोबाइल नंबर सहित उपलब्ध होगा। अगर जरूरत पड़ी तो पुलिस, आरटीओ या कोई अन्य एजेंसी आसानी से वाहन चालक या उसके मालिक से संपर्क कर सकती है। जबकि बड़े महानगरों में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट को लागू किया जा सकेगा।(आजतक)
 


Date : 07-Dec-2019

नई दिल्ली, 7 दिसंबर। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन - इसरो सिर्फ रॉकेट के जरिए उपग्रह छोडऩे का ही काम नहीं करता, बल्कि देश और समाज के विकास में भी मदद करता है। चाहे वह शिक्षा हो, ढांचागत विकास हो, रक्षा हो या आपदा से लोगों बचाना। इसरो के इस काम में सबसे ज्यादा मदद करता है इसरो का हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर। 
एनआरएससी देश के सभी मंत्रालयों, विभागों और रक्षा इकाइयों को जरूरी नक्शे और सैटेलाइट इमेज दिलाता है। ताकि वे अपनी जरूरतों के अनुसार उनका उपयोग कर सकें। ये विकास के लिए भी हो सकते हैं। प्लानिंग या आपदा में भी मदद करते हैं। 
एनआरएससी से मिली तस्वीरों के जरिए जमीन की स्थिति, उसकी संरचना, शहरी और ग्रामीण इलाकों का नक्शा बनाने, कृषि, ई-गवर्नेंस, जंगल, पर्यटन, जीआईएस, सूखा, बाढ़, ग्लेशियर आदि के बारे में जानकारी मिलती है। 
एनआरएससी का भुवन प्लेटफॉर्म देश के सैकड़ों विभागों को उनकी प्लानिंग में मदद करता है। इसके लिए यह ओशनसैट-1, 2, आईआरएस पी6, रिसोर्ससैट, कार्टोसैट-1 और कार्टोसैट-2 सैटेलाइट्स की मदद लेता है। इनकी मदद से बनने वाले नक्शे और चित्रों के जरिए ही देश के ढांचागत विकास कार्यक्रमों की नींव रखी जाती है। 
कई बाद दूसरे छोटे देश भारत से मदद मांगते हैं ताकि उनके विकास कार्यों में बेहतरी आ सके। इसके लिए वे इसरो के एनआरएससी सेंटर से मदद मांगते हैं। तब ऐसे में इसरो अपने सैटेलाइट्स का मुंह उन शहरों की तरफ मोड़ देते हैं। लेकिन ये जरूरत पडऩे पर ही किया जाता है। 
भारत में 440 शहरों के लिए एनआरएससी के भुवन प्लेटफॉर्म पर अभी विकास कार्य चल रहे हैं। इनके अलावा दुनियाभर के 34 शहर हैं, जहां इसरो अपने उपग्रहों के जरिए नजर रखता है या उन शहरों की विकास कार्यों को लेकर मदद की है। ये सभी जानकारी जियोस्पेशियल मीडिया एंड कम्युनिकेशन द्वारा आयोजित जियोस्मार्ट इंडिया कार्यक्रम में मिली है। 
अबू धाबी, अल-बसरा, कुवैत, चित्तेगॉन्ग, कोलंबो, ढाका, एल-पासो, काश्ल, काठमांडू, खुलना, कुमिंग, लाहौर, मंडाले, यंगून, तबरीज, थिंपू, उरुक्मी, डर्बन, सैन जोस, अल्जीरिया, एथेंस, केपटाउन, दुबई, मस्कट, पर्थ, रियो डी जनेरो, विएना, असमारा, एल-ओबीड, जोहानिसबर्ग, अंतोफागस्ता और लिस्बन।  (आजतक)
 


Date : 07-Dec-2019

प्रशांत चाहल
हैदराबाद, 7 दिसंबर । तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के पास एक महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप और उनकी हत्या के चार अभियुक्तों को शुक्रवार सुबह कथित मुठभेड़ के दौरान स्थानीय पुलिस ने गोली मार दी थी जिसे बहुत से लोगों ने वीरतापूर्ण बताते हुए इसकी प्रशंसा की। लेकिन ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जो इस कथित एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं और इसकी निष्पक्ष जाँच की माँग कर रहे हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस घटना का संज्ञान लेते हुए एक टीम को जाँच के निर्देश दे चुका है जिसका नेतृत्व एक एसएसपी स्तर के अधिकारी करेंगे और जल्द से जल्द आयोग को अपनी रिपोर्ट सौपेंगे।
वहीं तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वो चारों अभियुक्तों के शव 9 दिसंबर शाम 8 बजे तक परिरक्षित रखे और उनके पोस्टमॉर्टम का वीडियो कोर्ट में जमा करवाए।
इस बीच मारे गए अभियुक्तों के परिजनों ने कोर्ट में मुकदमा चलाए जाने से पहले ही पुलिस द्वारा उन्हें मुठभेड़ में मार गिराने पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि पुलिस की कहानी पर उन्हें विश्वास नहीं हो रहा।
साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने इस कथित मुठभेड़ के बारे में शुक्रवार शाम प्रेस कॉन्फे्रंस कर जो ब्यौरा दिया, उस पर लोगों को विश्वास क्यों नहीं हो रहा? और पुलिस की कहानी में वो कौनसे हिस्से हैं जिनपर सवाल उठ रहे हैं?
यह समझने के लिए बीबीसी ने उत्तर प्रदेश पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के पूर्व महानिदेशक प्रकाश सिंह, दिल्ली के पूर्व पुलिस उपायुक्त मैक्सवेल परेरा और तेलंगाना के वरिष्ठ पत्रकार एन वेणुगोपाल राव से बात की।
1. एनकाउंटर का समय
पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने दावा किया कि पुलिसकर्मियों और अभियुक्तों के बीच मुठभेड़ सुबह 5.45 से 6.15 के बीच हुई।
इससे पहले उन्हीं के विभाग के एक अधिकारी ने नाम ना जाहिर करने की शर्त पर बीबीसी को बताया था कि रात करीब 4 बजे पुलिस चारों अभियुक्तों को जेल से अपराध की जगह ले जाया गया था।
सज्जनार ने दलील दी कि अभियुक्तों को इतनी सुबह अपराध की जगह इसलिए ले जाना पड़ा क्योंकि उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा था। लोगों में उन्हें लेकर बहुत गुस्सा था। लेकिन पुलिस कमिश्नर की इस दलील से मैक्सवेल परेरा बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं।
उन्होंने बीबीसी से कहा, ये दलील विश्वसनीय नहीं लगती क्योंकि पुलिस दिन की रोशनी में बड़े आराम से यह काम कर सकती थी। वो अतिरिक्त पुलिस बल के साथ इलाके की घेराबंदी कर सकते थे। और लोगों के डर से सज्जनार का क्या मतलब है? क्या वो ये मान रहे हैं कि भीड़ पुलिस की मौजूदगी में भी लिंचिंग कर सकती है?
वहीं प्रकाश सिंह ने अपने समय की कुछ मुठभेड़ों और पुलिसिया छापेमारी की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा, अंधेरे में या तडक़े पुलिस की कार्यवाही का एक ही लक्ष्य होता है कि वो अपराधी को रंगे हाथ पकडऩा चाहते हैं। लेकिन यहाँ किसी को पकडऩा तो था नहीं, फिर ये वक्त चुना ही क्यों गया? क्योंकि सीन रीक्रिएट करने का काम तो दिन में बड़े आराम से हो सकता था, बल्कि बेहतर ढंग से हो सकता था। 
जबकि वरिष्ठ पत्रकार एन वेणुगोपाल राव सीन रीक्रिएट करने की पुलिस की दलील को ही गैर-जरूरी और बोगस मानते हैं।
वो कहते हैं, सार्वजनिक तौर पर ये चार लोग ही महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप और उनकी हत्या के अभियुक्त थे क्योंकि ख़ुद पुलिस ने एक सप्ताह पहले प्रेस रिलीज जारी कर ये दावा किया था कि चारों ने जुर्म कुबूल कर लिया है। पुलिस ने तो ये दावा भी किया था कि चारों ने कैमरे पर सारे डिटेल बताए हैं। और जब चारों ने कथित तौर पर लिखित में अपना जुर्म कुबूल कर लिया था तो फिर उन्हें मौके पर ले जाकर ये जाँच क्यों हो रही थी? वो भी अंधेरे में।
2. पुलिस की तैयारी
पुलिस ने इन चारों अभियुक्तों को 30 नवंबर को गिरफ्तार किया था जिसके बाद उन्हें चेल्लापली मजिस्ट्रेट के सामने भेजा गया था। पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार के अनुसार 4 दिसंबर को इन अभियुक्तों की पुलिस हिरासत मिली थी। 4-5 दिसंबर, यानी दो दिन तक इन चारों से पूछताछ की गई।
सज्जनार ने दावा किया, पूछताछ के दौरान इन लोगों ने बताया था कि पीडि़ता का फोन, घड़ी और पावर बैंक उन्होंने अपराध की जगह पर छिपाए थे। हम लोग उसी की तलाशी के लिए घटनास्थल पर आए थे। दस पुलिसकर्मियों की एक टीम अभियुक्तों को घेरे हुए थी और चारों अभियुक्तों के हाथ खुले हुए थे।
पुलिसकर्मियों के अधिकारों पर खुलकर बात करने वाले मैक्सवेल परेरा शीर्ष अदालत के एक आदेश को अव्यवहारिक बतलाते हुए कहते हैं, सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि पुलिस अभियुक्तों के हाथ नहीं बांध सकती। पूरी दुनिया में किसी अन्य देश में ऐसे आदेश नहीं हैं। इस नजर से देखें तो भारत में अभियुक्तों को कथित तौर पर सबसे अधिक मानवाधिकार मिले हुए हैं। लेकिन यह पुलिस के लिए यह एक बड़ी मुसीबत है। कोर्ट कहता है कि पुलिसकर्मी अभियुक्त का हाथ पकडक़र चलें, उन्हें हथकड़ी ना लगाएं। पर कोर्ट ने पुलिस जाँच अधिकारी को कई अधिकार दिये हुए हैं और इस केस में उन अधिकारों को प्रयोग करने की इच्छाशक्ति दिखाई नहीं देती।
प्रकाश सिंह कोर्ट के आदेश का हवाला देकर कहते हैं, ऐसे मौकों पर जाँच अधिकारी लीड करता है। वो सबकुछ रिकॉर्ड करता है। अगर वो चाहे कि अभियुक्तों को हथकड़ी लगानी है, क्योंकि पुलिस बल कम है या अभियुक्त पुलिस पर भारी पड़ सकते हैं, तो ऐसे विशेष मौकों पर जाँच अधिकारी हाथ बांधने का फैसला ले सकता है। हालांकि इसके लिए उन्हें वरिष्ठ अधिकारी से जायज कारण बताकर अनुमति लेनी होती है और डायरी में उसे दर्ज करना होता है।
वो कहते हैं, इस केस में पुलिस के पास सारे कारण थे। अभियुक्तों पर गैंगरेप और हत्या का आरोप था। उनके हाथ बांधे जा सकते थे। लेकिन कोर्ट के आदेश की मूल भावना को समझे बिना, तेलंगाना पुलिस ने ऐसा क्यों होने दिया, इसका जवाब उन्हें जाँच में देना होगा। कमिश्नर के बयानों से ये साफ है कि अभियुक्तों पर भौतिक दबाव बनाए रखने के लिए पुलिसवालों की जितनी तैयारी होनी चाहिए थी, वो नहीं थी। ऐसे में फायर करने की नौबत आ जाये, इसका जिम्मेदार कौन है?
3. मुठभेड़ का दावा
मैक्सवेल परेरा पुलिस कमिश्नर सज्जनार के उस दावे को भी संदिग्ध मानते हैं कि चारों अभियुक्तों ने डंडे और पत्थरों से पुलिस पर हमला किया और दो पुलिसकर्मियों से हथियार छीन लिये जिसकी वजह से पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।
वो कहते हैं, पुलिस हिरासत में चल रहे अभियुक्तों को डंडे और पत्थर मिल कहाँ से गए? चार अभियुक्तों पर दस पुलिसकर्मी कोई कम संख्या नहीं है जो उनके हथियार छिन जाएं। और अगर ऐसा हुआ है जिसे पुलिस अपनी कहानी में मान भी रही है, तो सीनियर अधिकारियों पर इसे लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
प्रकाश सिंह भी यह बात हजम नहीं कर पाए कि दो अभियुक्तों ने पुलिस से हथियार छीन लिए होंगे। वो कहते हैं, ये पुलिसकर्मी हैं या तमाशा। कैसे 20 वर्ष के लडक़े आपसे पिस्टल छीन सकते हैं। ऐसी किसी ड्यूटी पर तो अतिरिक्त सावधानी रखनी होती है। पुलिस ने क्यों नहीं बताया कि उन लडक़ों ने पिस्टल छीनने के बाद कितने राउंड फायर किये?
जबकि वेणुगोपाल इस संबंध में एक अलग ही पहलू पर बात करते है। वो कहते हैं, ये क्रिमिनल थे, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन चारों अभियुक्त बहुत तनाव में थे। इनकी उम्र 20 के आसपास थी। ऐसी रिपोर्टें हैं जिनमें कहा गया कि जेल में उन्हें खाना नहीं दिया गया। जिस बैरेक में उन्हें रखा गया वहाँ अन्य कैदियों ने उन्हें पीटा। लोग कह रहे थे कि इन्हें वकील नहीं मिलना चाहिए। दो दिन से वो न्यायिक हिरासत में थे। ऐसे में ये बड़ा असंभव लगता है कि इन चारों ने दस हथियारबंद पुलिसवालों के सामने कोई हरकत की होगी।
वो कहते हैं, चारों अभियुक्तों को ये जरूर पता होगा कि वो पुलिस से बचकर भाग भी गए तो भीड़ उन्हें जिंदा जला देगी। ऐसे में वो पुलिस से बचने की कोशिश करेंगे ही क्यों?
4. घायल पुलिसकर्मी
वीसी सज्जनार ने प्रेस काँफे्रंस में दावा किया कि चारों अभियुक्तों को ढेर करने में पुलिस को करीब दस मिनट लगे। यानी खुले मैदान में इस दौरान अभियुक्तों और पुलिस के बीच क्रॉस-फायरिंग होती रही। जिसका अंत ये हुआ कि चारों अभियुक्तों की गोली लगने से मौत हो गई। लेकिन एक भी पुलिसकर्मी को गोली ने नहीं छुआ।
पुलिस कमिश्नर के अनुसार इस मुठभेड़ में दो पुलिस अधिकारी घायल हुए जिन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया क्योंकि उनके सिर में चोट है जो डंडे या पत्थर से लगी है।
दिल्ली के पूर्व पुलिस उपायुक्त मैक्सवेल परेरा कहते हैं, पुलिस कमिश्नर का ये बयान बहुत शर्मनाक और गैर-पेशेवर है। ये बिल्कुल यूपी स्टाइल है। जब मैं दिल्ली पुलिस में था तब यूपी के अपराधी दिल्ली में आकर सरेंडर करते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि यूपी पुलिस सरेंडर करने पर भी उन्हें गोली मार देगी। देश का कानून अपराधियों को भी अपनी दलील देने का अधिकार देता है और इससे उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता।
प्रकाश सिंह कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार अब इस मामले की जाँच होगी, तभी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी क्योंकि सुनने में पुलिस कमिश्नर की ये कहानी बहुत घिसी-पिटी लगती है।
5. हर बार एक जैसी कहानी कैसे?
तेलंगाना के वरिष्ठ पत्रकार एन वेणुगोपाल राव राज्य के इतिहास का हवाला देकर पुलिस की कहानी पर सवाल उठाते हैं। वो कहते हैं कि हर बार पुलिस की कहानी में इतनी समानता कैसे होती है?
वो बताते हैं, तेलंगाना पुलिस (पहले आंध्र प्रदेश पुलिस) का ऐसी कहानियाँ सुनाने का इतिहास रहा है। वो इसमें बहुत निपुण हैं। 1969 के बाद से वो एनकाउंटर के ऐसे संदिग्ध किस्से सुना रहे हैं। इस तरह की मुठभेड़ों की शुरुआत नक्सलियों के खिलाफ हुई थी जिसपर सिविल सोसायटी ने कभी सवाल नहीं उठाया। लेकिन 2008-09 के बाद से पुलिस ने ये रणनीति आमतौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
जब तेलंगाना का निर्माण हुआ और इस क्षेत्र में तेलंगाना आंदोलन चल रहा था तब चंद्रशेखर राव समेत अन्य टीआरएस नेताओं ने यहाँ की पुलिस पर आरोप लगाया था कि आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस गलत तरीके अपना रही है। लेकिन जैसे ही वे पावर में आये, तो उनकी सरकार में पुलिस ने नालगोण्डा जि़ले में चार कथित मुस्लिम चरमपंथियों को वारंगल जेल से हैदराबाद कोर्ट के रास्ते में शूट किया और पुलिस ने बिल्कुल यही कहानी दुनिया को बताई। ये 2014 का वाकया है।
लेकिन ये कहानी 1969 से शुरू होती है। तब आंध्र प्रदेश में पहला एनकाउंटर हुआ था। आंध्र पुलिस ने कलकत्ता से आ रहे सीपीआई (एमएल) के सात सदस्यों को रेलवे स्टेशन पर उतरते ही गिरफ्तार किया और फिर उन्हें गोली मार दी। उस साल पुलिस ने एनकाउंटर की जो कहानी सुनाई थी, वो कहानी आज तक वैसी की वैसी है, बस पात्र, तारीखें और जगहें हर बार बदल जाती हैं।
हैदराबाद डॉक्टर रेप केस का जिक्र करते हुए एन वेणुगोपाल राव ने कहा कि दिसंबर 2007 में पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने वारंगल जिले में एसिड अटैक के तीन अभियुक्तों को पुलिस हिरासत के दौरान गोली मार दी थी। इस बार हैदराबाद केस के बाद हमने देखा कि लोगों ने सोशल मीडिया पर वारंगल की कहानी लिखकर सज्जनार को चैलेंज किया और कहा कि अब वैसा क्यों नहीं करते।
वो बताते हैं कि 90 के दशक में चंद्रबाबू नायडू जब सत्ता में आते हैं, तब से ऐसे एनकाउंटर करने वाले पुलिस अधिकारियों को प्रमोशन दिए जाने लगे।
पर क्या सूबे में आज तक कभी किसी एनकाउंटर केस की जाँच के बाद पुलिस को दोषी पाया गया? इसके जवाब में वेणुगोपाल ने बताया, 1987-88 में एक मजिस्ट्रेट ने अपनी जाँच में पाया था कि पुलिस अफसर की दलीलें बेबुनियाद हैं और उन्हें सजा मिलनी चाहिए। तो उस मामले का अंत ये हुआ कि मजिस्ट्रेट का ट्रांसफर कर दिया गया। इसलिए सरकार पुलिस के खिलाफ जाएगी या निष्पक्ष जाँच को सपोर्ट करेगी, ये उम्मीद कम लगती है।
वेणुगोपाल कहते हैं, बीते दो सप्ताह में तेलंगाना राज्य में हैदराबाद गैंगरेप-मर्डर जैसे तीन अन्य केस हुए हैं। लेकिन अन्य दो लड़कियाँ (एक वारंगल में और दूसरा आदिलाबाद में) दलित हैं, इसलिए उनपर अधिक चर्चा नहीं हुई। और ये भी अपने आप में एक बड़ा सवाल है।(बीबीसी)
 


Date : 07-Dec-2019

तेलंगाना, 7 दिसंबर । तेलंगाना हाईकोर्ट ने पुलिस एनकाउंटर में मारे गए रेप और हत्या के चार अभियुक्तों के शवों को सोमवार यानी नौ दिसंबर सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट इस मामले में सोमवार को ही सुनवाई करेगा। महिला और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इस मामले को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
हैदराबाद से करीब 50 किलोमीटर दूर महबूब नगर जिले के चटनपल्ली गाँव में शुक्रवार सुबह हुए एनकाउंटर में मारे गए चारों अभियुक्तों को एक वेटनरी डॉक्टर से रेप और उनकी हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिए निर्देश में कहा है, चारों अभियुक्तों के शवों को नौ दिसंबर की रात आठ बजे तक सुरक्षित रखा जाए। कोर्ट ने राज्य सरकार से ये भी कहा है कि शवों के पोस्टमार्टम का वीडियो भी कोर्ट में पेश किया जाए।
वहीं, समाचार एजेंसी पीटीआई ने जानकारी दी है कि चार अभियुक्तों के शवों की ऑटोप्सी महबूबनगर के सरकारी अस्पताल में की गई। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की गई।
हैदराबाद पुलिस ने शुक्रवार को एककाउंटर की जानकारी दी थी। पुलिस के मुताबिक चारों अभियुक्तों ने जांच के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया और पुलिस की जवाबी कार्रवाई में चारों अभियुक्तों की मौत हो गई थी। बाद में साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने एक प्रेस काँफे्रंस के दौरान एनकाउंटर के बारे में विस्तार बताया था।
सज्जनार ने बताया, हमने चार लोगों को 30 नवंबर को चार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था। हमें चार दिसंबर को इन चारों की दस दिन की पुलिस हिरासत मिली। हमने चार दिसंबर-पांच दिसंबर को पूछताछ की।
सज्जनार ने आगे बताया, हमारे दस पुलिसकर्मी उनके साथ थे। हम उन्हें अपराध की जगह लेकर आए थे। यहां पर अभियुक्तों ने पुलिस पर हमला कर दिया है, उन्होंने हमारे दो पुलिसकर्मियों से हथियार भी छीन लिए और गोली चलाने लगे। सबसे पहले मोहम्मद आरिफ़ ने पुलिस पर हमला किया। इसके बाद दूसरे अभियुक्तों ने भी हमला किया। चेतावनी देने के बाद भी वे थमे नहीं। पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी और उसमें चारों मारे गए।
तेलंगाना पुलिस की कार्रवाई की कई लोग सराहना कर रहे हैं, लेकिन इस बीच महिला और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले कई संगठनों और कार्यकर्ताओं ने पुलिस एनकाउंटर पर सवाल भी उठाए हैं। उन्होंने इस मामले में तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर अपनी चिंता जाहिर की है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता देवी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में एनकाउंटर पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा, इससे पीडि़त को न्याय नहीं मिलेगा और न ही इस तरीके से महिलाएं सुरक्षित होंगी। हालांकि, मृत डॉक्टर के पिता ने पुलिस एनकाउंटर को लेकर कहा, मेरी बेटी की आत्मा को अब शांति मिली होगी।(बीबीसी)
 


Date : 07-Dec-2019

चित्रकूट, 7 दिसंबर । उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में एक महिला डांसर को गोली मारे जाने का मामला सामने आया है। महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें दिख रहा है कि महिला डांसर के कुछ देर रुकने के बाद गोली चलने की आवाज आती है और महिला डांसर अपना चेहरा पकड़े गिर जाती हैं।
महिला डांसर की स्थिति गंभीर होने के चलते उन्हें बाद में कानपुर में भर्ती कराया गया है। पुलिस के मुताबिक गोली चलाने वाले शख़्स की पहचान कर ली गई है और उसकी तलाश की जा रही है। यह वाकया उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले का है। जिले के मऊ थाना क्षेत्र के टिकरा गांव में ग्राम प्रधान की बेटी की शादी के दौरान बीते एक दिसंबर को ये हादसा हुआ है।
चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल ने बताया है, गोली चलाने वाले का पता चल गया है। अभियुक्त प्रधान का रिश्तेदार बताया जा रहा है और कौशांबी जिले के रानीपुर गांव का निवासी है। हमने दो टीम गठित कर दी है, अभियुक्त को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
भारत में शादी के दौरान हिंसा आम बात है, इस मौके पर आतिशबाजी के लिए गोलीबारी का इस्तेमाल भी ख़ूब होता है। शराब के नशे में भी हिंसा कई बार नियंत्रण के बाहर हो जाती है।
ऐसी ही एक घटना पंजाब में 2016 में हुई थी, जब शादी में डांस के दौरान गोली चलने में एक गर्भवती महिला की मौत हो गई थी।
नवंबर, 2016 में, हरियाणा में एक महिला के गोली चलाने पर दुल्हे के चाची सहित तीन लोगों की मौत हो गई। यहां गोली चलाने वाली महिला साध्वी देवा ठाकुर और उनके छह बॉडीगार्ड पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था। बाद में उन्होंने पुलिस के सामने आत्म समपर्ण किया था।
2018 में पंजाब पुलिस ने एक शख्स को गिरफ्तार किया जिस पर शादी से पहले जश्न के दौरान में गलती से अपने पड़ोसी की गोली चलाकर हत्या करने का आरोप था। उन्होंने अपनी बेटी की होने वाली शादी को सेलिब्रेट करने के लिए गोली चलाई, एक गोली उनकी पड़ोस में रहने वाली एक महिला को लगी और उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।(बीबीसी)
 

 


Date : 06-Dec-2019

नई दिल्ली, 6 दिसंबर। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महिला सुरक्षा को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि पॉक्सो एक्ट में सजायाफ्ता को माफी नहीं मिलनी चाहिए। ऐसे मामलों में दया याचिका का प्रावधान खत्म हो। 
राष्ट्रपति ने राजस्थान के सिरोही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, महिला सुरक्षा एक गंभीर मसला है। पॉक्सो अधिनियम के तहत दुष्कर्म के दोषियों को दया याचिका दायर करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। संसद को दया याचिकाओं की समीक्षा करनी चाहिए।
राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब हैदराबाद में पशु चिकित्सक के साथ हैवानियत करने वाले चार आरोपियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया है। पुलिस आरोपियों को क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्शन करने के लिए ले गई थी। जहां उन्होंने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। आत्मरक्षा में पुलिस ने उन पर गोलियां चलाईं। जिसमें उनकी मौत हो गई। इसे लेकर सभी लोगों ने खुशी जाहिर की है।
इस घटना ने 16 दिसंबर, 2012 में हुए निर्भया कांड की यादें ताजा कर दी। निर्भया के आरोपियों को अदालत ने मौत की सजा सुना दी है। इसी बीच निर्भया के चार आरोपियों में से एक आरोपी विनय शर्मा की दया याचिका खारिज करने की सिफारिश गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से की है।
इससे पहले दिल्ली सरकार भी 23 साल के विनय शर्मा की दया याचिका खारिज करने की सिफारिश गृह मंत्रालय को कर चुकी है। इस याचिका को खारिज करते हुए कहा गया है कि निर्भया मामले के जघन्य अपराधी शर्मा की दया याचिका को खारिज किया जाए। मामले के दोषी ने राष्ट्रपति से दया याचिका की मांग की है।
दिल्ली सरकार का कहना था कि जघन्य अपराधी को बख्शा नहीं जा सकता। दोषी को सजा देने से समाज में एक संदेश जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना के बारे में कोई सोच भी न सके। तिहाड़ ने इसे दिल्ली सरकार को भेजा है। दिल्ली सरकार ने इसे उपराज्यपाल को भेज दिया और फिर ये गृह मंत्रालय से होता हुआ राष्ट्रपति तक पहुंचा है।  (अमर उजाला)
 


Date : 06-Dec-2019

नई दिल्ली, 6 दिसंबर । हैदराबाद में महिला डॉक्टर के रेप के बाद उसे जलाने वाले आरोपियों को पुलिस मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया है। लोकसभा में भी शुक्रवार को हैदराबाद एनकाउंटर का मसला उठाया गया, जिसपर जमकर बवाल हुआ। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी इस मामले में धर्म का एंगल लाने पर विपक्षी पार्टियों पर जमकर बरसीं। उन्होंने कहा कि महिला सम्मान के विषय में सांप्रदायिक एंगल जोडऩा गलत होगा।
स्मृति ईरानी ने लोकसभा में कहा कि आज बंगाल के एक सांसद यहां पर मंदिर का नाम ले रहे थे और वो हैदराबाद-उन्नाव की घटना के बारे में बोल रहे थे, लेकिन आखिर मालदा में क्या हुआ उस पर क्यों चुप्पी साध कर बैठे हैं।
जैसे ही स्मृति ईरानी ने मालदा का नाम लिया तो लोकसभा में हंगामा शुरू हो गया और टीएमसी की ओर से सवाल दागा गया कि बताइए क्या हुआ? इस पर स्मृति ईरानी ने तपाक से जवाब दिया कि नहीं पता, तो जाकर बंगाल का अखबार पढि़ए।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी बोलीं कि मालदा के रेप को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया। क्या ये सत्य नहीं है कि इसी सदन ने जघन्य अपराध के मामले में मौत की सजा का कानून बनाया, अगर आप आज चिल्लाकर एक महिला को बोलने से रोक रहे हैं तो ये गलत है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के अपराधों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, केंद्र सरकार की ओर से महिला संरक्षण के लिए राज्य सरकारों को पैसा दिया गया। स्मृति ईरानी के अलावा भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मीनाक्षी लेखी ने भी विपक्ष पर निशाना साधा।
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने शुक्रवार को लोकसभा में महिलाओं के खिलाफ अपराध का मुद्दा उठाया, इस दौरान उन्होंने हैदराबाद एनकाउंटर, उन्नाव की घटना का जिक्र किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्नाव की पीडि़ता 95 फीसदी जल गई है, देश में क्या हो रहा है।(आजतक)

 


Date : 06-Dec-2019

उन्नाव, 6 दिसंबर । उन्नाव के बिहार थाना क्षेत्र में रेप सर्वाइवर को जिंदा जलाने की जघन्य वारदात को अंजाम देने वाले एक आरोपी के रिश्तेदार ने अब सर्वाइवर के चाचा-चाची को जान से मारने की धमकी दी है।
सर्वाइवर के चाचा गंगाघाट थाना इलाके के सीताराम कालोनी में किराए के मकान में रहकर एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। सर्वाइवर के चाचा के मुताबिक उन्हें आरोपी शिवम के फूफा ने फोन करके धमकी दी कि वे उनकी दुकान जला देंगे और जीने नहीं देंगे। उन्होंने बताया कि वह पुलिस को सूचना देकर कार्रवाई की मांग करेंगे।
गुरुवार को उन्नाव एक साल पहले गैंगरेप का शिकार हुई युवती को आरोपियों ने तेल छिडक़ कर जिंदा जलाने की कोशिश की। 90 प्रतिशत तक 27 साल की सर्वाइवर फिलहाल जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। अब उसे एयर एंबुलेंस से दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल लाया गया है। वहीं प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक फ्रेश एसआईटी टीम का गठन किया है। इस एसआईटी टीम नेतृत्व एएसपी रैंक के अधिकारी करेंगे।(दिक्विंट)

 


Date : 06-Dec-2019

नई दिल्ली, 6 दिसंबर। हैदराबाद में शुक्रवार को वेटनरी डॉक्टर के गैंगरेप और मर्डर के चारों आरोपियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने एनकाउंटर की पुष्टि करते हुए बताया, ये घटना मौका-ए-वारदात पर क्राइम सीन दोहराने के क्रम में हुई। पुलिस के मुताबिक चारों आरोपियों ने मौके से भागने की कोशिश की। जिसके बाद उन्हें ढेर कर दिया गया। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक एनकाउंटर की घटना सुबह 3-6 के बीच की है।

27-28 नवंबर की दरम्यानी रात को हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ हैवानियत की वारदात को अंजाम दिया गया था। बाद में महिला डॉक्टर का जला शव बेंगलुरु हैदराबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर अंडरपास के करीब मिला था।   
पुलिस ने इस मामले में चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, जिसके बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। हैदराबाद पुलिस द्वारा हिरासत की मांग के बाद आरोपियों को 7 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया था। पुलिस आरोपियों द्वारा सीन रिक्रिएट कराने के दौरान पुलिस मुठभेड़ में चारों आरोपी मारे गए।
हालांकि पुलिस द्वारा आरोपियों के एनकाउंटर की यह पहली वारदात नहीं है। इससे पहले भी कई एनकाउंटर की घटना हुई है जो काफी चर्चित रहीं और एनकाउंटर की कई घटनाओं पर सवाल भी खड़े हुए।
बटला हाउस एनकाउंटर
सबसे पहले बात बटला हाउस एनकाउंटर की। 19 सितंबर 2008 की यह घटना काफी चर्चित रही थी। लेकिन इस एनकाउंटर की कहानी शुरू होती है 13 सितंबर 2008 को दिल्ली के करोल बाग, कनाट प्लेस, इंडिया गेट और ग्रेटर कैलाश में हुए सीरियल बम ब्लास्ट से।
उस ब्लास्ट में 26 लोग मारे गए थे, जबकि 133 घायल हो गए थे। दिल्ली पुलिस ने जांच में पाया था कि बम ब्लास्ट को आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन ने अंजाम दिया था। इस ब्लास्ट के बाद 19 सितंबर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सूचना मिली थी कि इंडियन मुजाहिद्दीन के पांच आतंकी बटला हाउस के एक मकान में मौजूद हैं। इसके बाद पुलिस टीम अलर्ट हो गई।
19 सितंबर 2008 की सुबह आठ बजे इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की फोन कॉल स्पेशल सेल के लोधी कॉलोनी स्थित ऑफिस में मौजूद एसआई राहुल कुमार सिंह को मिली। उन्होंने राहुल को बताया कि आतिफ एल-18 में रह रहा है। उसे पकडऩे के लिए टीम लेकर वह बटला हाउस पहुंच जाए। राहुल सिंह अपने साथियों एसआई रविंद्र त्यागी, एसआई राकेश मलिक, हवलदार बलवंत, सतेंद्र विनोद गौतम आदि पुलिसकर्मियों को लेकर प्राइवेट गाड़ी में रवाना हो गए।
इस टीम के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा डेंगू से पीडि़त अपने बेटे को नर्सिंग होम में छोड़ कर बटला हाउस के लिए रवाना हो गए। वह अब्बासी चौक के नजदीक अपनी टीम से मिले। सभी पुलिस वाले सिविल कपड़ों में थे। बताया जाता है कि उस वक्त पुलिस टीम को यह पूरी तरह नहीं पता था कि बटला हाउस में बिल्डिंग नंबर एल-18 में फ्लैट नंबर 108 में सीरियल बम ब्लास्ट के जिम्मेदार आतंकी रह रहे थे।
सुबह 11 बजे के करीब सभी पुलिसकर्मी लोकेशन पर पहुंच गए। पुलिस वालों ने ऊपर जाकर देखा कि सीढिय़ों के सामने इस फ्लैट में दो गेट हैं। उन्होंने बाईं ओर वाला दरवाजा अंदर की ओर धकेल दिया। पुलिस वाले अंदर घुस गए। उन्हें अंदर चार लडक़े नजर आए। वह थे आतिफ अमीन, साजिद, आरिज और शहजाद पप्पू। सैफ नामक एक लडक़ा बाथरूम में था। दोनों ओर से धड़ाधड़ फायरिंग होने लगी।
लगभग 10 मिनट बाद दोनों तरफ से फायरिंग खत्म हो चुकी थी। इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को दो गोलियां लगी। हवलदार बलवंत के हाथ में गोली लगी। आरिज और शहजाद पप्पू दूसरे गेट से निकल कर भागने में कामयाब रहे। गोलियां लगने से आतिफ अमीन और साजिद की मौत हो गई। फायरिंग सुनकर लोग सीढिय़ों से नीचे भागने लगे। इसका फायदा उठाकर आरिज और शहजाद भी भाग गए।
इसी बीच पुलिस ने दो आतंकियों को भागते समय गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद ओवेस मलिक नामक एक शख्स ने 100 नंबर पर फोन करके फायरिंग की खबर दी। पीसीआर से जामिया नगर पुलिस चौकी को इस एनकाउंटर की खबर मिली। मेसेज फ्लैश कर दिया गया।
महज 10 मिनट के अंदर इस गोलीबारी की खबर इलाके में फैल गई। इस मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस भी भारी तादाद में पहुंच गई। उस फ्लैट को सील कर दिया गया। होली फैमिली हॉस्पिटल में इलाज के दौरान इंस्पेक्टर शर्मा का निधन हो गया। इंस्पेक्टर शर्मा ने अपनी 21 साल की पुलिस की नौकरी में 60 आतंकियों को मार गिराया था, जबकि 200 से ज्यादा खतरनाक आतंकियों और अपराधियों को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन बटला हाउस का यह एनकाउंटर आखिरी साबित हुआ।
इशरत जहां एनकाउंटर 
साल 2004 में हुए एनकाउंटर में गुजरात पुलिस ने इशरत जहां उसके दोस्त प्रनेश पिल्लई उर्फ जावेद शेख और दो पाकिस्तानी नागरिकों अमजदाली राना और जीशान जोहर को आतंकी बताते हुए ढेर कर दिया था। इशरत जहां केस में पूर्व आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा, पूर्व एसपी एनके अमीन, पूर्व डीएसपी तरुण बरोट समेत 7 लोगों को आरोपी बनाया गया है। पूर्व डीजीपी पीपीपी पांडेय को बीते साल सीबीआई अदालत ने इस मामले में आरोपमुक्त कर दिया था।
सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर
इस घटना की शुरुआत गुजरात के गृहमंत्री रह चुके हरेन पंड्या की हत्या के बाद हुई थी। 26 मार्च 2003 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। साल 2005 में अहमदाबाद में राजस्थान और गुजरात पुलिस ने ज्वाइंट ऑपरेशन में सोहराबुद्दीन शेख को मार गिराया था। साल 2006 में ये केस आगे बढ़ा और सोहराबुद्दीन के साथ रहे तुलसी प्रजापति का भी एनकाउंटर कर दिया गया।
एमपी में 8 सिमी सदस्यों का एनकाउंटर
साल 2016 के अक्टूबर महीने में सिमी से जुड़े आठ क़ैदियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। ये सभी क़ैदी जेल से भाग गए थे। पुलिस के मुताबित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़े इन कैदियों ने एक सुरक्षा गार्ड की गला रेत कर हत्या की थी। बाद में चादरों की रस्सी बनाकर जेल से भाग निकले थे।
बाद में इन आंतकियों को ईंटखेड़ी के पास घेरा गया। पुलिस के मुताबिक दोनों तरफ से गोलीबारी हुई। जिसमें सभी क़ैदिय़ों को मार गिराया गया।
दारासिंह एनकाउंटर
स्पेशल आपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने 23 अक्टूबर, 2006 को जयपुर में दारासिंह का एनकाउंटर किया था। जिसके बाद दारा सिंह की पत्नी सुशीला देवी ने एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए हत्या करार दिया था। सुशीला देवी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच सौंपी थी। इस पर 23 अप्रैल 2010 को सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
मामले में मंत्री राजेन्द्र राठौड़, तत्कालीन एडीजी एके जैन सहित 17 लोगों को आरोपी बनाया था। इसके बाद सीबीआई ने जांच के बाद अदालत में चार्जशीट पेश की।
कनॉट प्लेस एनकाउंटर
31 मार्च 1997 को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कनॉट प्लेस इलाके में एक एनकाउंटर को अंजाम दिया था। एसीपी एसएस राठी के नेतृत्व में क्राइम टीम ने हरियाणा के कारोबारी प्रदीप गोयल और जगजीत सिंह को उत्तर प्रदेश का गैंगस्टर समझ कर गोली मार दी थी। इस घटना में दोनों कारोबारी की मौत हो गई थी। फर्जी एनकाउंटर के इस मामले में 16 वर्ष तक सुनवाई चली। जिसके बाद अदालत ने आरोपी पुलिस और अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे। (आजतक)
 


Date : 06-Dec-2019

नई दिल्ली, 6 दिसंबर । तेलंगाना एनकाउंटर पर बीजेपी की सांसद मेनका गांधी ने कहा कि वहां जो हुआ वह बहुत भयानक हुआ इस देश के लिए। आप लोगों को ऐसे नहीं मार सकते हैं। आप कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते हैं। मेनका गांधी ने कहा कि वे आरोपी थे और वैसे भी कोर्ट से उसे फांसी की सजा मिलती। उन्होंने कहा कि ऐसा होने लगे तो फिर फायदा क्या है कानून का, फायदा क्या है सिस्टम का। मेनका ने कहा, इस तरह तो अदलात और कानून का कोई फायदा ही नहीं, जिसको मन हो बंदूक  उठाओ जिसको मारना हो मारो। कानूनी प्रक्रिया में गए बिना आप उसे मार रहे हो तो फिर कोर्ट, कानून और पुलिस का क्या औचित्य रह जाएगा। (एनडीटीवी)
 


Date : 06-Dec-2019

नई दिल्ली/हैदराबाद, 6 दिसंबर। हैदराबाद में महिला डॉक्टर से गैंगरेप और हत्या के आरोपियों के एनकाउंटर को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। एक बड़ा वर्ग जहां इस मसले पर हैदराबाद पुलिस की तारीफ कर रहा है तो कुछ लोगों ने इस एनकाउंटर पर सवाल भी खड़े किए हैं। एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हर मुठभेड़ की जांच की जानी चाहिए। 
उनके अलावा कांग्रेस के सीनियर लीडर शशि थरूर ने ट्वीट किया, न्यायिक व्यवस्था से परे इस तरह के एनकाउंटर स्वीकार नहीं किए जा सकते। एक ट्वीट को रीट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, हमें और जानने की जरूरत है। यदि क्रिमिनल्स के पास हथियार थे तो पुलिस ने अपनी कार्रवाई को सही ठहरा सकती है। जब तक पूरी सच्चाई सामने न आए तब तक हमें निंदा नहीं करनी चाहिए। लेकिन कानून से चलने वाले समाज में इस तरह का गैर-न्यायिक हत्याओं को सही नहीं ठहराया जा सकता।
उनके अलावा राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, एक आम नागरिक के तौर पर मैं खुश हूं कि उनका वह अंत हुआ है, जैसा हम लोग चाहते थे। लेकिन, ऐसा न्याय कानूनी सिस्टम के तहत होना चाहिए था। यह सही प्रक्रिया के तहत होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि हम हमेशा से उनके लिए मौत की सजा मांग रहे थे और यहां पुलिस सबसे अच्छी जज साबित हुई। मैं नहीं जानती कि आखिर किन परिस्थितियों में यह एनकाउंटर हुआ। 
वामपंथी दल सीपीएम के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि गैर-न्यायिक हत्याएं महिलाओं के प्रति हमारी चिंता का जवाब नहीं हो सकतीं। उन्होंने कहा कि बदला कभी न्याय नहीं हो सकता। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप कांड के बाद लागू हुए कड़े कानून को हम सही से लागू क्यों नहीं कर पा रहे है।
बीजेपी की सांसद मेनका गांधी ने भी इस एनकाउंटर को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, जो भी हुआ है, वह इस देश के लिए बहुत भयानक हुआ है। आप लोगों को इसलिए नहीं मार सकते क्योंकि आप ऐसा चाहते हैं। आप कानून अपने हाथ में नहीं ले सकते। उन्हें किसी भी तरह से कानून के जरिए ही सजा दी जानी चाहिए थी।
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एनकाउंटर को लेकर लोग खुशी जाहिर कर रहे हैं। हालांकि यह भी चिंता का विषय है कि किस तरह से लोगों का क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम से भरोसा उठ गया है। निर्भया केस पर उन्होंने कहा कि मुझे दुख है कि उन्हें 7 साल हो गए हैं। हमने एक दिन में ही दया याचिका को खारिज कर दिया था। अब मैं राष्ट्रपतिजी से अपील करता हूं कि वह भी जल्दी ही इस पर फैसला लें और दोषियों को फांसी के फंदे पर पहुंचाया जा सके। (नवभारतटाईम्स)
 


Date : 06-Dec-2019

नई दिल्ली, 6 दिसंबर। समाजवादी पार्टी (एसपी) से राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने हैदराबाद गैंगरेप आरोपियों के एनकाउंटर पर देर आए दुरुस्त आए कहा। संसद में इस घटना पर बोलते हुए अभिनेत्री और सांसद ने बलात्कारियों को भीड़ के हवाले (लिंचिंग) करने की वकालत की थी। जया के उस बयान पर काफी विवाद भी हुआ था। उन्नाव और दूसरी रेप की घटनाओं में भी ऐसी ही सजा के प्रावधान के सवाल पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। 
राज्यसभा की कार्यवाही में भाग लेने के लिए जया बच्चन ने संसद परिसर में मीडिया से बात की। उन्होंने एनकाउंटर पर ज्यादा कुछ नहीं बोला। मीडिया के सवाल पर उन्होंने कहा, देर आए दुरुस्त आए। बहुत देर हो गई। बहुत ज्यादा देर हो गई। मीडिया ने जब उनसे पूछा कि क्या उन्नाव गैंगरेप के दोषियों के साथ भी ऐसा ही होना चाहिए तो उन्होंने कहा कि मैं इस पर कुछ नहीं बोलूंगी। (नवभारतटाईम्स)
 


Date : 06-Dec-2019

रिजू मेहता
नई दिल्ली, 6 दिसंबर । शादी में दरार पडऩे और तलाक होने के बाद महिलाओं के क्या अधिकार होते हैं, उनकी सही और पूरी जानकारी उन्हें आमतौर पर नहीं होती है। इसके चलते वे पार्टनर से अपना हक नहीं ले पाती हैं और अपने साथ बच्चों के लिए वित्तीय परेशानियां मोल लेती हैं। ऐसे में लोगों का यह सोचना आम है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहीं महिलाओं के पार्टनर से अलग होने के बाद उनकी हालत तो बदतर होती होगी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अदालतों ने ऐसी महिलाओं और इनके बच्चों के लिए वित्तीय और दूसरे अधिकार सुनिश्चित किए हैं। 
सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशन को पांच कैटिगरी में डाला है - वयस्क और अविवाहित स्त्री-पुरुष के घरेलू संबंध, शादीशुदा पुरुष और अविवाहित महिला (पुरुष के शादीशुदा होने की जानकारी स्त्री को हो) के संबंध, अविवाहित पुरुष और शादीशुदा महिला (स्त्री के शादीशुदा होने की जानकारी पुरुष को हो) के संबंध, शादीशुदा पुरुष और अविवाहित महिला (जिसमें पुरुष के शादीशुदा होने की जानकारी स्त्री को नहीं हो) के संबंध और समलिंगी पार्टनर के लिव-इन रिलेशन। 
महिलाओं को छह ऐसे अधिकार दिए गए हैं, जिनका सहारा वे अपनी आर्थिक, शारीरिक और मानसिक सुरक्षा के लिए ले सकती हैं। इनमें उनके और उनके बच्चों के भरण-पोषण, वैवाहिक घर, स्त्री धन, मान मर्यादा के साथ रहने, समर्पित संबध और माता-पिता की संपत्ति में अधिकार शामिल हैं। क्रिमिनल प्रोसीजर कोड के सेक्शन 125 के तहत महिलाओं को भरण-पोषण का अधिकार दिया गया है। तलाक होने के बाद भरण-पोषण का अधिकार हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 (2) और हिंदू एडॉप्शन ऐंड मेंटेनेंस एक्ट, 1956 में शामिल किया गया है। वहीं प्रोटेक्शन ऑफ वुमन फ्रॉम डॉमेस्टिक वायलंस एक्ट, 2005 के तहत महिलाओं को सभी तरह के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक शोषण के खिलाफ सुरक्षा दी जाती है। 
मलिमथ समिति से 2003 में मिली सिफारिशों के बाद सेक्शन 125 को सीआरपीसी में शामिल किया गया था। इसके तहत पत्नी का अर्थ बदला गया और उसमें लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को जोड़ा गया। अगर ऐसी महिलाएं अपने भरण-पोषण में असक्षम हैं तो उनकी वित्तीय जरूरतें उनके पार्टनर को पूरी करनी होगी। रिश्ते में खटास आने के बाद भी लिव इन पार्टनर को उनके फाइनैंस का ख्याल रखना होगा। इसी तरह डॉमेस्टिक वायलेंस एक्ट में शादीशुदा महिलाओं के बराबर लिव-इन में रह रहीं महिलाओं को रखा गया है। 
हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956, को 2005 में संशोधित करके महिलाओं को पैरेंटल प्रॉपर्टी पर अधिकार दिया गया था। बेटियां, अविवाहित हों या शादीशुदा, माता-पिता की पुश्तैनी और अपनी खरीदी प्रॉपर्टी पर बेटों के बराबर हक होगा। पुश्तैनी जमीन जायदाद पर उनका जन्मसिद्ध अधिकार होगा। पैरंट्स की अपनी खरीदी प्रॉपर्टी में उन्हें वसीयत के मुताबिक हिस्सा मिलेगा। 
2014 में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि अगर स्त्री-पुरुष लंबे समय तक साथ रहते हैं तो उनके संबंधों से होनेवाले बच्चे वैध माने जाएंगे। पर्सनल लॉ में ऐसे बच्चों को भरणपोषण का अधिकार नहीं दिया गया है, लेकिन सीआरपीसी के सेक्शन 125 में उनके हितों को सुरक्षा दी गई है। जहां तक प्रॉपर्टी राइट्स की बात है, हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 16 के तहत इन बच्चों को वैध माना जाता है। पुश्तैनी और पेरंट्स की अपनी खरीदी प्रॉपर्टी के वे कानूनी उत्तराधिकारी होते हैं। हालांकि, सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी की गाइडलाइन के तहत लिव-इन कपल बच्चे गोद नहीं ले सकते। (इकॉनॉमिक टाईम्स)
 


Date : 06-Dec-2019

बिचोलिम (गोवा), 6 दिसंबर । अपनी पत्नी की बीमारी और गरीबी से परेशान एक 46 वर्षीय शख्स ने अपनी चलने-फिरने से लाचार पत्नी को जिंदा ही दफना दिया। यह घटना बुधवार की है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है मामले की जांच की जा रही है। 
प्राप्त जानकारी के अनुसार मारमवाडा के रहने वाले तुकाराम शेतगांवकर ने अपनी पत्नी तन्वी को तिलारी सिंचाई परियोजना की नहर की कंस्ट्रक्शन साइट पर जिंदा मिट्टी के नीचे दबा दिया। इस मामला तब सामने आया जब गुरुवार सुबह 10 बजे नहर पर काम करने वाले कर्मचारी जेसीबी की मदद से खोदी हुई मिट्टी को बराबर कर रहे थे। 
बिचोलिम पुलिस का कहना है कि जैसे ही इन लोगों ने काम करना शुरू किया शेतगांवकर वहां आया और उसने आपत्ति जताते हुए मजदूरों को वहां काम करने से रोकने की कोशिश की। लेकिन मजदूरों ने उसकी एक नहीं सुनी और काम करते रहे। इसी बीची जेसीबी ने मिट्टी खोदी तो मजदूरों को उसके नीचे एक महिला का शव दबा दिखाई दिया। वहां खड़ा शेतगांवकर यह देखकर वहां से रफू चक्कर हो गया। 
सूचना पाकर आई पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए उसे गोवा मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। शक के आधार पर शेतगांवकर को पुलिस स्टेशन बुलाकर पूछताछ की गई। इस दौरान उसने माना कि यह उसकी 44 साल की पत्नी तन्वी का शव है। उसने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी लंबे समय से बिस्तर पर थी, गरीबी और निराशा से तंग आकर उसने बुधवार रात उसे जिंदा ही दफना दिया। 
शेतगांवकर ने यह भी बताया कि जीवन के बुरे हालात की वजह से उनके 13 साल के बेटे की पढ़ाई भी बीच में ही छूट गई है। पुलिस ने शेतगांवकर को गिरफ्तार कर लिया है।(टाईम्स न्यूज) 

 


Date : 06-Dec-2019

नई दिल्ली, 6 दिसंबर। हैदराबाद में महिला डॉक्टर से रेप और मर्डर के आरोपियों का एनकाउंटर किए जाने के बाद दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने इस मसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। स्वाति ने कहा कि कोर्ट को रेप के दोषियों को 6 महीने के भीतर  फांसी पर लटका देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो शायद देश भर की पुलिस यही करने लग जाएगी जो इस मामले में हुआ है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो हुआ ठीक ही हुआ क्योंकि कम से कम अब ये लोग सरकारी मेहमान बनकर तो नहीं रहेंगे जैसे निर्भया रेप केस में आरोपी रह रह रहे हैं।  स्वाति मालीवाल इन दिनों बलात्कारियों को 6 महीने के भीतर सजा सुनिश्चित करने सहित कई मांगों के साथ अनशन पर बैठी हुई हैं। 
गौरतलब है कि शुक्रवार को तडक़े 3 बजे तेलंगाना रेप-मर्डर केस के सभी आरोपियों का एनकाउंटर कर दिया गया। पुलिस का दावा है कि ये सभी आरोपी भागने की कोशिश कर रहे थे और इस दौरान पुलिस की ओर से हुई फायरिंग में सभी आरोपी मारे गए हैं।  
मिली जानकारी के मुताबिक अदालत में चार्जशीट दाखिल करने के बाद पुलिस इन चारों आरोपियों को घटनास्थल पर ले गई थी ताकि सीन ऑफ क्राइम (रिक्रिएशन) की जांचने के लिए ले गई थी। लेकिन उनमें से एक आरोपी पुलिसकर्मी का हथियार छीन कर भागने की कोशिश करने लगा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अगर यह आरोपी भाग जाते तो बड़ा हंगामा खड़ा हो जाता इसलिए पुलिस के पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था और जवाबी फायरिंग में चारो आरोपी मारे गए। माना जा रहा है कि इस मामले की पूरी जानकारी पुलिस कमिश्नर प्रेस कॉन्फे्रंस कर सकते हैं। (एनडीटीवी)
 


Date : 06-Dec-2019

नई दिल्ली, 6 दिसंबर। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आज 4 पुनर्विचार याचिकाएं दायर की जाएंगी। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से मिसबाहुद्दीन, मौलाना हसबुल्ला, हाजी महबूब और रिजवान अहमद द्वारा पुनर्विचार याचिकाएं दायर की जाएंगी। इन सभी याचिकाओं के वकील राजीव धवन होंगे। वहीं भारतीय पीस पार्टी की ओर से पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी गई है। गौरतलब है कि नवंबर महीने में सुप्रीम कोर्ट अयोध्या मामले में फैसला सुनाया था कि विवादित जमीन रामलला को दे दी जाए और मुस्लिमों को किसी दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन दी जाए। लेकिन इस फैसले के खिलाफ सुन्नी वक्फ बोर्ड ने पुनर्विचार याचिका दाखिल करने से इनकार कर दिया है। वहीं जमीयत उलेमा हिन्द ने इस मामले से जुड़े एक पक्ष के साथ मिलकर याचिका दाखिल की है।
भारतीय पीस पार्टी के 5 सवाल
सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह से एएसआई रिपोर्ट पर आधारित है ना कि तथ्यों पर।
1949 तक कब्ज़ा हमेशा मुस्लिमों के पास था और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 110 का  इसका पालन नहीं किया गया। हिंदू पक्षकारों द्वारा झूठ बोला गया।
केंद्रीय गुंबद के नीचे मस्जिद में 1949 तक नमाज अदा की गई थी, और 1949 से पहले वहां कोई मूर्ति नहीं थी। 1949 से पहले कोई भी हिंदू प्रार्थना नहीं करता था।
एएसआई द्वारा कोई सबूत नहीं दिया गया है कि वहां मंदिर था जो राम को समर्पित था।
1885 में राम चबूतरा राम मंदिर था जो बाबरी मस्जिद का बाहरी आंगन है। इसमें मुस्लिम पक्ष का  आंतरिक अदालत का विशेष अधिकार था लेकिन हाल के फैसले में यह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित नहीं किया गया है (एनडीटीवी)
 


Date : 06-Dec-2019

नई दिल्ली, 6 दिसंबर । बीएसपी सुुुप्रीमो मायावती ने कहा है कि तेलांगना एनकांउटर पर कहा है कि उत्तर प्रदेश और दिल्ली पुलिस को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।  मायावती ने अपने बयान में कहा है कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध चरम पर है लेकिन राज्य सरकार सो रही है, यहां की पुलिस और दिल्ली को हैदराबाद पुलिस से प्रेरणा लेनी चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि उत्तर प्रदेश में अपराघियों को गेस्ट बनाकर रखा जाता है, उत्तर प्रदेश में जगंल राज है। 
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक रेप पीडि़ता को आरोपियों ने जिंदा जलाकर मारने की कोशिश की थी। गुरुवार सुबह जब वह केस की सुनवाई के लिए रायबरेली के लिए घर से निकली तो आरोपी ने अपने साथियों के साथ उसके ऊपर केरोसिन छिडक़कर आग लगा दी।
पीडि़ता की हालत गंभीर बनी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक पीडि़ता 60-70 फीसदी तक जल गई है। पीडि़ता ने पांच आरोपियों के नाम बताए हैं, इनमें से 3 को पहले पकड़ लिया गया था। बाद में दो आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। 
घटना के बाद से ही विपक्षी पार्टी लगातार सरकार पर हमलावर है। गुरुवार को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट कर लिखा था उन्नाव की दुष्कर्म पीडि़ता को जिंदा जलाये जाने के दुस्साहस की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार का सामूहिक इस्तीफा होना चाहिए।(एनडीटीवी)